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  • घोसी तहसील कैंटीन की बोली हुई निरस्त पुनः बोली 16 जुलाई को

    मुजफ्फर इस्लाम,घोसी,मऊ । स्थानीय तहसील परिसर में कैंटीन एवं कैंटीन से सटे दो दुकानों सहित साइकिल स्टैंड की बोली गुरुवार की तहसील मीटिंग हाल में सम्पन्न हुई। जिसमें अधिकतम बोली 40 हजार ही लग पाई। तहसीलदार सुबाष यादव ने ब्यापक प्रचार प्रसार एवं उम्मीद के अनुरूप बोली नहीं होने पर बोली निरस्त करते हुए पुनः 16 जुलाई को 11 बजे से कराने हेतु कहा। जबकि पिछले वित्तिय वर्ष की बोली 93000 हजार रुपये रही। वहीं नीरज कुमार राय ने उपजिलाधिकारी के यहाँ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि तहसील प्रशासन की मिली भगत से बोली बिना ब्यापक प्रचार प्रसार एवं राष्ट्रीय अखबारों में निकाले ही कराई गई।जिसकी जाँच कराते हुए जनहित में कार्यवाही किया जाय।

  • उत्तर प्रदेश में कल रात 10 बजे से फिर लॉकडाउन

    आशिफ अली,मिल्लत टाइम्स( उत्तर प्रदेश )
    उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना मामले को देखते हुए फिर से लॉकडाउन दिनांक 10 जुलाई, 2020 की रात्रि 10 बजे से 13 जुलाई, 2020 को प्रातः 05 बजे तक की प्रतिबन्ध अवधि में ग्रामीण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक कारखाने खुले रहेंगे। इन कारखानों में सोशल डिस्टेन्सिंग एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबन्धों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।प्रतिबंध अवधि में अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू हवाई सेवाएं जारी रहेंगी। हवाई अड्डों से गंतव्य तक जाने वालों के आवागमन व माल वाहक वाहनों के आवागमन पर कोई प्रतिबन्ध नहीं रहेगा। राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर परिवहन व इनके किनारे स्थित पेट्रोल पम्प एवं ढाबे पूर्ववत खुले रहेंगे। प्रदेश में रेलवे का आवागमन पूर्व की भांति यथावत जारी रहेगा। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के आवागमन हेतु यथावश्यक बसों की व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा की जाएगी। इन बसों को छोड़कर परिवहन निगम की सेवाओं का प्रदेश के अन्दर आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा।

    मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार द्वारा इस सम्बन्ध में जारी किए गए निर्देशों में उल्लिखित किया गया कि इस प्रतिबंध के दौरान प्रदेश के समस्त कार्यालय तथा सभी शहरी व ग्रामीण हाट, बाजार, गल्ला मण्डी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान इत्यादि बंद रहेंगे। प्रतिबंध अवधि में समस्त आवश्यक सेवाएं यथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सकीय सेवाएं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूर्व की भांति होगी। इन सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों, कोरोना वॉरियर, स्वच्छताकर्मी तथा डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़े व्यक्तियों के आने-जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।


  • दरभंगा: कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही तेज़ी से, महापौर ने भी ज़िला प्रशासन से पूर्ण लॉक डाउन की माँग की

    मो नसीम अंसारी (मिल्लत टाइम्स,दरभंगा)

    दरभंगा मे कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलने पर महापौर बैजंती देवी खेड़िया ने चिंता व्यक्त किया है। उन्होने कहा है कि अभी का समय नगर वासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यदि अभी भी हम अपने आपको संक्रमित होने से नही रोक पाते हैं तो पिछले लगभग चार महीनो का किया हुआ संयम बेकार हो जाएगा और स्थिति विकराल रुप ले लेगी। महापौर ने लोगों से अपील की है कि वे अपने अपने घरों पर ही रहें। अत्यावश्यक होने पर ही मास्क पहनकर कहीं निकलें। आज के तिथि मे मास्क का प्रयोग और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना अत्यावश्यक है। महापौर ने आज जारी किए गये प्रेस विज्ञप्ति मे कहा है कि दरभंगा शहर मे जिस गति से संक्रमित लोगों की संख्या मे वृद्धि हो रही है उसको रोकने के लिए कुछ दिनो तक कंप्लीट लॉकडाउन का होना अति अनिवार्य है। उन्होने कहा कि इस आशय का प्रस्ताव हमने कल जिलाधिकारी के साथ बैठक मे दिया भी था। हम फिर से एकबार जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि शहर मे कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जायें। साथ ही नागरिकों से भी विनम्र निवेदन है कि अपने जान की कीमत को समझें और सामने वाले की भी। घर मे रहकर इस विपरीत समय का सामना करें।

  • कोयला निजीकरण: मोदी सरकार बनाम हेमंत सरकार

    अफ्फान नोमानी

    देश की सर्वोच्च सरकारी कंपनी और धरोहर का निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार के निशाने पर है मध्य भारत में स्थित कोयला खदान. मोदी सरकार ने कोयला खदान की निजी कंपनी के हाथों नीलामी के लिए सूची भी तैयार कर दिया है. इस सुची में मध्य भारत ( ओड़ीशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व झारखंड ) और पश्चिम बंगाल के कुछ छेत्रों के कोयला खदान है.

    कोयला निजीकरण को लेकर मध्य भारत में मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का स्वर तेज हो गया है. पश्चिम बंगाल में कोयला खदान के मजदूर लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल कर रहे है. झारखंड में कुल 22 कोयला खदानें है जो 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदान के मजदुर यूनियन कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध जुलुस निकाल रहे है. झारखंड में कोयला निजीकरण मामले पर सीएम हेमंत सोरेन से लेकर सभी झामुमो, कांग्रेस व राजद के विधायक व नेता सहित अन्य पार्टी के नेता भी कोयला निजीकरण का विरोध कर रहे है.

    झारखंड कोयला खदान में एक ललमटिया भी है जो महागामा विधानसभा छेत्र में आता है. महागामा विधानसभा छेत्र के विधायक कांग्रेस के दीपिका पांडेय सिंह है जो कोयला निजीकरण मामला उठने के बाद शुरू से ही मोदी सरकार के निजीकरण नीति के खिलाफ सक्रीय दिख रही है. दुर्भाग्य से राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में नहीं है लेकिन स्थानीय मीडिया ( इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और वेब ) में प्रतिदिन कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में है. विधायक दीपिका पांडेय सिंह अपने कार्यकर्ता के साथ मजदुर यूनियन को लेकर कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध कर रही है.

    झारखंड में कोयला निजीकरण पर सियासत गरम है.इसी को लेकर निजीकरण विरोधी की प्रमुख चेहरा विधायक दीपिका पांडेय सिंह से वार्तालाप किया. बातचीत के दौरान दीपिका पांडेय सिंह ने कहा की ” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना लोगों की कीमत पर कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोयला क्षेत्र का निजीकरण करने की है. भाजपा सरकार ने कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इसके निजीकरण की योजना बनायी है. हम जनता के हित में निजीकरण के खिलाफ लड़ते रहेंगे. अगर कोयला निजीकरण हुआ तो सबसे पहले हमारे लाश से गुजरना होगा. क्योकि जल,जंगल, जमींन और झारखंड की सभी संपदा बचाना हम झारखंडवासी का मौलिक अधिकार है. और इसको बचाने के लिए हेमंत सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है. झारखंड की हेमंत सरकार मोदी सरकार से क़ानूनी लड़ाई लड़ रही है. अभी तो सिर्फ 22 कोयला खदान छेत्रों में आंदोलन शुरू हुआ है, जरुरत पड़ी तो पुरे राज्य में जन आंदोलन होगा. लेकिन हम झारखंडवासी किसी निजी कंपनी को किसी भी कोयला खदान में घुसने नहीं देंगे. झारखंड की संपदा से झारखंडवासी का आर्थिक रूप से जुड़ाव है. जो कमाने खाने का एक मात्र जरिया है. अगर निजीकरण होता है तो उद्योगपति अपनी मर्जी चलाएगा जिससे बहुत संख्या में स्थानीय लोग बेरोजगार हो जायेगे. और हम ऐसा मजदूर वर्ग के हित में नहीं होने देंगे “.

    सवाल है मोदी सरकार के निशाने पर सबसे ज्यादा झारखंड के कोयला खदान ही क्यों है? वजह साफ़ है झारखंड की सभी 22 कोयला खदानें कुल मिलाकर 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदानों में लगभग 386 करोड़ टन कोयले का भंडार है। इसलिए 22 कोयला खदानों से झारखंड के खजाने में आने वाली कुल राशि 90 हजार करोड़ के पार होगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून को कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन मोदी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सरकार की दखल के बाद कोयला खदानों की नीलामी में पेच आ गया है. देश में कोयला क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ लाखों कोयला मजदूर हड़ताल पर हैं। इसमें वामपंथी संगठनों के अलावा आरएसएस से जुड़ी बीएमएस तक को भारी दबाब में शामिल होना पड़ा है. इस मामले के विभिन्न जानकर भी निजीकरण के खिलाफ है. माइंस मिनरल एंड पीपल के अध्यक्ष श्रीधर रामामूर्ति का कहना है की ” अगर कोयला का निजीकरण होता है तो निजी कंपनिया अंधाधुंध खनन करेंगी और कोल इंडिया जैसे सार्वजनिक छेत्र के उपक्रम को हाशिए पर पहुँचा देंगी “.
    मई के शुरूआत में जब कोयला निजीकरण विरोध हुआ तो 18 मई 2020 को बीसीसीएल ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रल्हाद जोशी का बयान जारी किया. मंत्री ने कहा है कि कोल इंडिया का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त कोयला भंडार है, जो देश में 100 वर्षों से अधिक तक बिजली बनाने के लिए पर्याप्त है। सरकार को कोल इंडिया पर गर्व है और आने वाले समय में इसे और मजबूत किया जाएगा।

    लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया की खबर से 18 जून के बाद कोयला निजीकरण पर सियासत गर्म है. झारखण्ड, पश्चिम बंगाल,ओड़िसा और छत्तीसगढ़ में विरोध जारी है.

    सवाल है की क्या विदेशी कम्पनियों से खनन करा कर भारतीय जरूरतों की पूर्ति हो सकेगी? जब सरकारी कंपनी खनन करने में सक्षम है तो निजी कंपनी की जरुरत क्या है? गौरतलब हो कि 1973 में कोयला खनन के राष्ट्रीयकरण के बाद निजी कंपनियों के खनन की इजाजत नहीं थी। कोयला खनन की सरकारी कंपनियों की क्षमता पर्याप्त है और उनमें जरूरत के मुताबिक इजाफा की भी गुंजाइश है लेकिन सरकार का असली मकसद कोयला क्षेत्र में कॉरपोरेट्स के लिए लूट व अकूत मुनाफाखोरी के लिए बाजार तैयार करना है। भारत में महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन में कोयला का भंडार होना भारतीयों के लिए एक बड़ा वरदान है. और इसे बचाना राष्ट्र हित में है.

    अब देखना यह है राष्ट्र हित में इसे बचाने में कितना कामयाब हो पायेगी हेमंत सरकार.

    लेखक अफ्फान नोमानी रिसर्च स्कॉलर, लेक्चरर व स्तंभकार है

  • राजस्थान मे अब सफाई कर्मचारी नाला-चेम्बर मे उतर कर सफाई नही करेगा।

    अशफाक कायमखानी ।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस समर्पण भाव के साथ स्वच्छताकर्मियों एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों ने कोराना काल मे काम किया है। उससे कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सरकार कामयाब हो सकी हैं। कोरोना की जंग में शामिल डॉक्टर्स, नर्सिंगकर्मियों, आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं पुलिस सहित आप सबकी मेहनत से देश में राजस्थान का मान और सम्मान बढ़ा है। गहलोत ने आह्वान किया कि आगे भी इसी मनोयोग से कोरोना की लड़ाई में टीम भावना के साथ जुटे रहें।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं सफाईकर्मियों के साथ मुख्यमंत्री गहलोत संवाद कर रहे थे। प्रदेशभर के 196 नगरीय निकायों के करीब 1600 प्रतिभागी इस कार्यक्रम से सीधे जुड़े।

    पिछले करीब चार महीने से राजस्थान कोरोना को नियंत्रित करने में कामयाब रहने का मुख्यमंत्री ने बताते हुये कहा कि स्वच्छताकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शहर, गली-मोहल्ले एवं घर-घर को संक्रमणमुक्त रखने में बड़ी भूमिका अदा की है।सफाईकर्मियों को मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर सहित अन्य सुरक्षा सामग्री के लिए राज्य सरकार ने एक-एक हजार रूपए उपलब्ध कराए ताकि फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम करते हुए वे संक्रमण से बचे रहें। इसके साथ ही राजस्थान पहला राज्य है, जिसने कोरोना की जंग में जुटे हुए सरकारी और गैर-सरकारी कार्मिकों की चिंता करते हुए उन्हें 50 लाख रूपए के बीमा कवर की सुविधा प्रदान की है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सभी वर्गों एवं जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों का सहयोग लेकर उनके अनुभवों एवं नवाचारों का उपयोग करते हुए राजस्थान को इस लड़ाई में अग्रणी पायदान पर रखा। नगर निगमों के महापौर, सभापति, चैयरमेन, पार्षदों आदि जनप्रतिनिधियों से इस दौरान संवाद किया और उनसे सुझाव लिए। सफाई निरीक्षकों, जमादारों सहित अन्य स्वच्छताकर्मियों से मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद करते हुए उनके अनुभव जाने और उनसे उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान कोरोना के प्रति आमजन में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए दो पोस्टरों का विमोचन भी किया। सभी जिला कलक्टरों एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्वच्छताकर्मी को सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में नहीं उतरना पड़े। यह काम पूरी तरह मशीनों से ही करवाया जाए। सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में उतरने से मौत की कोई घटना नहीं होनी चाहिए।

    इस अवसर पर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा अखिल अरोरा, शासन सचिव श्रम नीरज के. पवन, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • घोसी के भाई बहन ने बढ़ाया ज़िले का मान

    मुजफ्फरुल इस्लाम
    घोसी(मऊ)स्थानीय नगर के डाक बंगला मोड़ के रहने वाले राजू वारसी के 11 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अहमद ने Zee Tv द्वारा आयोजित सारेगामापा लिटिल चैम्प 2020 में टॉप 30 में आकर ज़िले का मान सम्मान बढ़ाया है। उल्लेखनीय है मोहम्मद अहमद उत्तर प्रदेश से इस प्रतियोगिता में टॉप 30 तक पहुँचने वाले न सिर्फ़ मऊ जनपद के बल्कि पूर्वांचल से पहले प्रतियोगी हैं। साथ ही श्री राजू आरसी की 14 वर्षीय पुत्री अलीशा नें भी इस वर्ष उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकेडमी द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में दादरा ठुमरी(बाल वर्ग) में प्रथम पुरस्कार अर्जित करके प्रदेश का नाम रौशन किया। इन दोनों बच्चों पर पूरे जनपदवासियों को गर्व है। उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन के चलते ये ख़बर मीडिया का हिस्सा नहीं बन सकी। श्री राजू वारसी आर्थिक रूप से बेहद कमज़ोर हैं और होम ट्यूशन के द्वारा घर का ख़र्च चलाते हैं और अपनी ख़राब आर्थिक हालात के कारण बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित भी हैं।

  • राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार का समय नजदीक।

    किसी भी समय चार सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    पीछले साल 25 व 26 जून को राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा 2018 की आयोजित मुख्य परीक्षा का परीणाम आखिर कार कोर्ट के आदेश पर तकनीकी जांच के बाद जल्द जारी होकर सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार अगस्त या सितंबर मे शुरू होने की उम्मीद के बाद प्रशासनिक व सरकार के स्तर पर जारी हलचल से लगने लगा है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के खाली चल रहे चार सदस्य पदो पर नये सदस्यों की जल्द नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    राजस्थान सीविल सेवा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार के अगस्त-सितंबर मे शूरू होने की सम्भावना के अतिरिक्त पुलिस सेवा के सब इंस्पेक्टर की लिखित परीक्षाओं मे चयनित होने वाले प्रत्याशियों के साक्षात्कार इसी दस जुलाई से शूरु हो रहे है। एवं जेएलओ पद के लिये लिखित परीक्षा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार की डेट भी जुलाई माह मे आने की सम्भावना जताई जा रही है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग मे भाजपा सरकार के समय नियुक्त चार सदस्यों मे अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती व सदस्य राजकुमारी गुर्जर, रामू राम रायका व शिवसिंह राठौड़ वर्तमान समय मे पदस्थापित है। जबकि पीछली कांग्रेस सरकार के समय बने सभी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा परीक्षा 2018 की मुख्य परीक्षा पीछले साल 25-26 जून को आयोजित होने के बाद कानूनी उलझन मे फंसने के बाद आखिरकार हाल ही मे हाईकोर्ट के जारी आदेश अनुसार अगले महीने मे सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार शुरू होने की उम्मीद जताई जाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दवाब बढ गया है कि वो जल्द रिक्त चल रहे चार सदस्य पदो पर नये लोगो की नियुक्ति करे।

    लोकसेवा आयोग के सदस्यों के पद वैसे तो सवैधानिक पद होते है। लेकिन इन पदो पर नियुक्ति करते समय केण्डीडेट की योग्यता के अतिरिक्त राजनीति व बिरादरी संतुलन पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है। वर्तमान सरकार के समय जल्द होने वाली सम्भावित उक्त नियुक्तियों मे भी जाट-मुस्लिम-एससी एसटी व मूल ओबीसी पर विशेष फोकस किये जाने की चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती के तीन माह बाद अक्टूबर मे रिटायर होने पर उनकी जगह अध्यक्ष पद पर पुलिस विभाग के आला अधिकारी की नियुक्ति होने की प्रबल सम्भावना जताई जा रही है।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने तीन तीन सलाहकार नियुक्त करने की जरुरत क्यो आ पड़ी?

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के तीसरी दफा मुख्यमंत्री बनने वाले अशोक गहलोत को आखिरकार इस समय तीसरे ब्यूरोक्रेट्स को अपना सलाहकार बनाने की जरूरत क्यो आ पड़ी है। जबकि पहले से दो ब्यूरोक्रेट्स के सलाहकार नियुक्त होने के बाद से अब तक वो दोनो निठल्ले बैठे है।

    अपने स्तर पर राजनीतिक व सरकारी स्तर पर फैसले लेने के लिये विख्यात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली दफा किसी राजनीतिक नेता को अपना सलाहकार नियुक्त करने के बजाय उन्होंने तीन सलाहकार नियुक्त किये वो तीनो ही ब्यूरोक्रेट्स रहे है।

    हालांकि मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री अपने किसी तरह के राजनीतिक सलाहकार नियुक्त करे या नही करे पर प्रैस सलाहकार जरुर नियुक्त जरुर करते रहे है। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली दफा अपने डेढ साल का समय गुजरने तक अभी तक किसी भी मिडिया क्रमी को अपना प्रैस सलाहकार नियुक्त नही किया है। मुख्यमंत्री गहलोत को प्रैस सलाहकार के लिये उपयुक्त व काबिल नाम नजर नही आया या फिर उन्होंने इसकी जरुरत ही नही समझी, यह तो स्वयं मुख्यमंत्री जाने। इसके विपरीत मुख्यमंत्री ने भारतीय प्रशासनिक सेवा दो सेवानिवृत्त अधिकारी गोविंद शर्मा व अरविन्द मायाराम को पहले से अपना सलाकर नियुक्त कर रखा था। वही अगले तीन महिने बाद सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य सचिव डी बी गुप्ता को अचानक पद से हटाकर अपना तीसरा सलाहकार नियुक्त करके प्रदेश मे नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

    कुल मिलाकर यह है कि मंत्रीमंडल के बजाय अंदर खाने ब्यूरोक्रेट्स के मार्फत अपनी सरकार चलाने के लिये विख्यात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा मुख्य सचिव गुप्ता को सेवानिवृत्ती के पहले दो ब्यूरोक्रेट्स के सलाहकार के नियुक्त होने के बावजूद गुप्ता के रुप मे तीसरा सलाहकार नियुक्त करने के बाद प्रदेश मे अलग तरह की चर्चा चल पड़ी है।

  • राजस्थान मे जिला पुलिस अधीक्षक पद पर किसी मुस्लिम का वर्तमान मे पदस्थापित नही होना चर्चा बनी।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि ब्यूरोक्रेट्स को पदस्थापित करने का मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। लेकिन लोकतांत्रिक सरकार व जनता द्वारा चुने गये नेता की खासियत होती है कि वो अपने राजकीय फैसले उस तरह का करते है जिस फैसले मे उस क्षेत्र के हर तबके को अहसास होता नजर आये है कि सत्ता मे उन्हें समान अवसर दिये जा रहे है। साथ ही सत्ता मे भागीदारी सबको मिलना ही सुशासन का स्वरूप माना जाता है।

    राजस्थान मे कांग्रेस सरकार जब जब रही है तब तब अक्सर जिला पुलिस अधीक्षक के पद पर किसी ना किसी मुस्लिम आईपीएस अधिकारी को जिला पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित करने का सीलसीला चला आ रहा था। वर्तमान मे भरतपुर पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित हैदर अली जैदी का 66 आईपीएस अधिकारियों की आई तबादला सूची मे उप महानिरीक्षक, इंटेलिजेंस, जयपुर के पद पर पदस्थापित कर दिया गया है। जबकि हैदर अली जैदी के अलावा दुसरे मुस्लिम भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अरशद अली को अभी तक खांचे मे ही पदस्थापित कर रखा है।

    राजस्थान के मुस्लिम समुदाय की बदनसीबी रही है कि भारतीय सीविल सेवा परीक्षा पास करके राजस्थान से बना आईपीएस को अभी तक राजस्थान केडर नही मिल पाया है। एवं नाही अन्य प्रदेश का भारतीय सीविल सेवा मे चयनित होकर राजस्थान केडर मे पदस्थापित नही हो पाये है। प्रदेश मे जो आईपीएस बनकर यहां पोस्टेड हुये वो सभी राजस्थान पुलिस सेवा से तरक्की पाकर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बने है।

    आजादी के बाद लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद राजस्थान पुलिस सेवा से विभागीय तरक्की पाकर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बनने वालो मे जो आईजी पद तक पहुंचे है उनमे मुराद अली अबरा, लियाकत अली खान, निसार अहमद फारुकी व कुवंर सरवर खान का नाम शामिल है। इसके अलावा तारीक आलम भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे है। उक्त अधिकारियों के अलावा वर्तमान मे भारतीय पुलिस सेवा के राजस्थान केडर मे पदस्थापित अधिकारी हैदर अली जैदी पुलिस अधीक्षक पद से तरक्की पाकर डीआईजी पुलिस पद पर पदस्थापित हुये है।एवं दूसरे अरशद अली आईपीएस है। जिन्हें सरकार चाहे तो जिला पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित कर सकती है। सरकार मे जनता का दवाब या विधायकों की आवाज को अहमियत मिला करती है। राजस्थान मे सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के कुल नो मुस्लिम विधायक होने के बावजूद उनके मुहं से किसी एक भी उक्त मामले मे आवाज सुनाई नही आ रही है। सभी नो विधायकों को अपने अपने कर्तव्यों पर विचार जरुर करना चाहिए।

  • रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय से मुलाकात, पेश की अपनी किताब व विभिन्न मुद्दों पर हुई वार्तालाप

    रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय के बीच अहम मुलाकात हुई. लेखक नोमानी ने साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर लिखी किताब एमएलए को पेश किया. लेखक नोमानी ने राज्य कि शिक्षा पॉलिसी व युवाओं के रोजगार, कोयला निजीकरण व मदरसा शिक्षक के रूके वेतन व खासकर साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर आधारित रोड मेप पर चर्चा किया. जिसपर एमएलए दीपिका पांडेय ने सहमति जताते हुवे कहा कि शिक्षा व युवाओं के रोजगार पर हम काफी सीरियस है. अपने छेत्र में साइंस, लॉ,एग्रीकल्चर व मेडिकल इंस्टीटूशन कायम करना हमारा अहम विज़न है. होनहार व शिक्षित युवाओं का होना मेरे लिए गर्व की बात है. रही बात मदरसा शिक्षकों के रूके वेतन का तो माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मदरसों के शिक्षक के अनुदान भुगतान का प्रस्ताव कैबिनेट में रखने की स्वीकृति दे दी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के मदरसा के करीब 700 शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों को अनुदान का भुगतान हो सकेगा। और कोयला निजीकरण मामले को लेकर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुके है.

    हम क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे है और जरूरत पड़ी तो जन आंदोलन भी होगा.