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  • डीएमसीएच में लचर व्यवस्था से हुई जमाल अतहर रूमी,प्रो उमेश चंद्र और गंगा देवी की मौत की उच्चस्तरीय जांच हो- नेयाज अहमद

    डीएमसीएच की लचर व्यवस्था को लेकर इंसाफ मंच ने बुलाई गणमान्य नागरिकों की बैठक।

    29 जुलाई को क़िलाघाट में आयोजित होगा प्रतिरोध धरना।

    भीगो(दरभंगा) 27 जुलाई
    जमाल अतहर रूमी, प्रोo उमेश चंद्र और गंगा देवी की डीएमसीएच में लापरवाही से मौत मामले को लेकर दरभ़ंगा के पूर्व पार्षद नफिसुल हक रिंकु के निवास स्थान नफिसुल हक रिंकू, वार्ड पार्षद रुस्तम कुरैसी और एआईपीएफ के भूषण मंडल की तीन सदस्यीये अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुआ। बैठक में इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, रियाज खान कादरी, उजैल अहमद अंसारी अकरम सिद्की, मो रेहान, मो तम्मने, मो जावेद, मो उमर, मो आफताब अलि, मकसूद आलम ” पप्पू ख़ाँ, मनोज पासवान, संतोष यादव, मो जमशेद, मो अशलम, मो आरजू आदि ने शिरकत किया। बैठक को सम्बोधित करते हुए इंसाफ मंच के नेयाज अहमद ने कहा कि डीएमसीएच में लापरवाही व लचर व्यवस्था से जमाल अतहर रूमी, प्रो उमेश चंद्र, और गंगा देवी को अपनी जान गवानी पड़ीं हैं। और डीएमसीएच अपनी गलती मानने के बदले उल्टे पीड़ित परिवारों पर मुक़दमा कर दिया। पूरे मामले का उच्चस्तरीय जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर आंदोलन तेज किया जाएगा।

    बैठक को सम्बोधित करते हुए अकरम सिद्दीकी ने कहा कि डीएमसीएच में हुई इन मौतों के दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर डीएमसीएच की गुंडागर्दी को खत्म करें‌ और मृतक के परिजनों को‌ न्याय दिलाने में अपना भरपूर सहयोग दे। पूर्व पार्षद नफिसुल हक”रिंकू ने कहा कि जिला पार्षद जमाल अतहर रूमी की डीएमसीएच मौत क़ई सवाल खड़े करते हैं। जब रूमी को कोरोना नेगेटिव होने के बाद भी कोरोना मरीज के रूप में उनका ट्रीटमेंट कैसे हुआ इसका जवाब डीएमसीएच को देना होगा। दरभंगा जिला मुहर्रम कमिटी के सचिव रूस्तम कुरैसी ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय देने के बदले उल्टे मुक़दमा करना इंसाफ की हत्या हैं।
    बैठक से 29 जुलाई को क़िलाघाट में 12 बजे दिन से लॉकडॉन का पालन करते हुए प्रतिरोध धरना देने का निर्णय लिया गया।

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहली दफा अपने बूने जाल मे स्वयं फंसते नजर आ रहे है।

    गहलोत की कोराना काल मे सरकार चलाने की बजाय कांग्रेस के 19-विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने मे अधिक रुचि।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    1998 मे दिल्ली हाईकमान से सांठगांठ करके मुख्यमंत्री का पद पहली दफा पाने वाले अशोक गहलोत ने तब से लेकर अब तक प्रदेश के जनाधार रखने वाले दिग्गज कांग्रेस नेताओं को एक एक करके धीरे धीरे राजनीतिक तौर पर ठिकाने लगाते रहने से कांग्रेस लगातार कमजोर होती चली जाने के बावजूद 2018 मे फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद भी गहलोत ने अपने पुराने रवैये के मुताबिक सचिन पायलट को राजनीतिक तौर पर ठिकाने लगाने का जो जाल बूना उसमे गहलोत स्वयं व उनके कारण कांग्रेस पार्टी फंसती नजर आ रही है।

    2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम के मुताबिक कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंचने पर जनता की भावनाओं के विपरीत दिल्ली मे मोजूद कांग्रेस के कोकस से सांठगांठ करके मुख्यमंत्री पद पाने के बाद हमेशा की तरह ब्यूरोक्रेसी के मार्फत सचिन पायलट व उनके समर्थक मंत्रियों को असरहीन करने की भरपूर गहलोत ने कोशिशे की। लेकिन मुख्यमंत्री की उक्त कोशिशों को पायलट व समर्थक विधायक सब समझते हुये सब्र से काम लेते हुये सरकार को पांच साल तक चलाना चाहते थे। पर गहलोत ने विभिन्न धाराओं के साथ स्वयं के मंत्री व कांग्रेस विधायकों के खिलाफ अंग्रेजी राज के समय के बने काले कालून देश द्रोह कानून की दफा 124-A का उपयोग करते उन्हें आरोपी बनाया तो वो सभी नेता दिल्ली हाईकमान को अपनी भावनाओं से अवगत करवाने जाने पर मुख्यमंत्री ने बीना वजह ऐसा माहोल बनाया कि दिल्ली गये सभी कांग्रेस विधायक बागी हो गये है। यानि उनके खिलाफ माहोल बनाने के लिये अपने समर्थक विधायको की बाड़ेबंदी करके पायलट समर्थकों को पहले जिन नेताओं को साईडलाईन किया उसी तरह उनको भी साईडलाईन करने की कोशिशें की पर गहलोत उस कोशिश मे अभी तक कामयाब नही हो पाये है।

    मुख्यमंत्री गहलोत अपनी रणनीति के तहत लगातार सचिन पायलट पर भाजपा से मिलकर सरकार गिराने का आरोप लगाकर उनको अलग थलग करने की उम्मीद दिल मे पालकर जनता से सहानुभूति पाने की भरपूर कोशिशे करना जारी रखा हुवा है। वही सचिन पायलट ने अपने आपको अभी तक कांग्रेस मे होना व कांग्रेस छोड़कर किसी अन्य दल मे नही जाने का लगातार कहना जारी रखने के बावजूद गहलोत ने सचिन पायलट व कुछ मंत्रियों को मंत्रीमंडल से जल्दबाजी मे बरखास्त करने व अध्यक्ष पद से हटाने के बाद सुलह की गुंजाइश को एक तरह से आंशिक रुप से खत्म करने मे सफलता जरूर पा ली है।

    मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा बूने जाल के तहत मुख्यमंत्री आवास व होटल मे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बूलाई जिसमे उन 19-विधायकों के शामिल नही होने की शिकायत को लेकर मुख्य सचेतक महेश जौशी विधानसभा स्पीकर के पास गये एवं स्पीकर ने चंद घंटो मे उन्हें नोटिस जारी कर नोटिस की तामिल प्रशासन की मदद से घरो पर चिपका कर करने की कोशिश की। असल मे गहलोत इस बहाने उन 19 कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द करवाने चाहते थे लेकिन उनकी मंशा को भांपकर वो 19-विधायक उस नोटिस के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय की शरण मे चले गये जहां उस पर स्टे हो जाने के बाद फायनल जजमेंट तक मामला विचाराधीन है। लेकिन स्पीकर के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट मे सुनवाई होने के बावजूद स्पीकर सुप्रीम कोर्ट गये जहां सुनवाई हो रही है।

    मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा अपनी सरकार के प्रत्येक कार्यकाल मे सत्ता मे सबकी हिस्सेदारी तय करने की बजाय हमेशा सत्ता को अपने इर्द गिर्द कायम रखा है। बोर्ड-निगम व आयोगो का गठन एवं संवेधानिक पदो पर नियुक्ति या तो की नही। अगर कुछ नियुक्ति व गठन किये तो सरकार के जाते समय अपने कार्यकाल के अंतिम दौर मे किये जो सरकार बदलते ही हटा दिये जाते रहे है। गहलोत की उक्त कार्यशैली के कारण भी आम कार्यकर्ताओं मे उदासीनता व असंतोष का आलम छाता रहा है।

    जब गहलोत का फेंका हर पाशा पहली दफा उनके उलटा पड़ने लगा तो उन्होंने हड़बड़ी मे कुछ ऐसे कदम उठा लिये जो अब तक बनाई गई उनकी कथित छवि के विपरीत व असल रुप के अनुसार पाई गई। मुख्यमंत्री गहलोत के अपनी सरकार चलाने की बजाय विधायकों को होटल मे बाड़ेबंदी मे रखने के अलावा किसी तरह उन 19-विधायकों की सदस्यता रद्द कराने मे अधिक रुचि होना देखा गया जो अभी तक संभव नही हो पाया है। सड़क से राजभवन तक कोशिश करने के साथ राजभवन की सुरक्षा को लेकर धमकाने वाले ब्यान से गहलोत की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। विधायकों को साथ लेकर राजभवन जाकर वहां धरना-प्रदर्शन व नारेबाजी करना उनमे बोखलाहट होना दर्शाता है। इससे पहले अपने साथी रहे पायलट को नकारा व निकम्मा तक बताने से तो साफ लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत अब आपा खोते जा रहे है।

    कांग्रेस द्वारा पहले 27-जुलाई को राजभवन पर प्रदर्शन करने का ऐहलान किया। उस ऐहलान के बाद राज्यपाल ने जब डीजीपी यादव व मुख्य सचिव राजीव को राजभवन तलब करके हालात जाने तो कांग्रेस ने भारत के एकमात्र जयपुर स्थित राजभवन पर प्रदर्शन नही करने का कहकर बाड़ेबंदी मे मोजूद विधायकों वाली होटल मे ही विरोध सभा करने का ऐहलान घबराहट मे कर दिया है।

    मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने 2008 के शासन की तरह इस दफा भी बसपा के छ विधायकों को कांग्रेस मे शामिल कर लिये जाने के बाद विलय को विधान विरोधी बताते हुये बसपा व विधायक दिलावर पहले स्पीकर के पास याचिका लेकर गये फिर माननीय न्यायालय मे याचिका लेकर गये है, जहां सुनवाई होनी है। इसके अतिरिक्त बसपा के राष्ट्रीय महामंत्री सतीशचंद्र मिश्रा ने उक्त बसपा के सभी विधायकों को विधानसभा मे कांग्रेस के बहुमत प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने के खिलाफ पाबंद किया है। उक्त मामले को लेकर दायर याचिका व मिश्रा द्वारा बसपा विधायकों को व्हीप जारी करके पाबंद करने से कांग्रेस खेमे मे भारी खलबली मचना देखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री गहलोत व कांग्रेस पार्टी बार बार बहुमत होने का दावा करने पर जनता के मध्य सवाल उठने लगने लगे है कि अगर बहुमत है तो वो आराम से सरकार चलाये उन्हें कोन रोक रहा है। लेकिन फिर भी वो कोविड के प्रदेश मे आसमान छुते आंकड़े व रोजाना एक हजार से अधिक पाये जाने वाले कोराना पोजीटिव मरीजों के बावजूद सरकार को होटल मे बंद कर रखा है।जबकि विधायकों का मुश्किल समय मे उनके क्षेत्र की जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे गहलोत-पायलट खेमो मे बंटे कांग्रेस विधायकों के बाद जारी आपसी संघर्ष मे गहलोत पहली दफा अपने बूने जाल मे फंसते नजर आ रहे है। sog व acb एवं 124-A का अपने ही लोगो के खिलाफ उपयोग करने के अतिरिक्त अपनी खामियो को छुपाने के लिये सारे इल्जाम भाजपा पर लगा कर सहानुभूति पाने की कोशिश से गहलोत की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है। अपनी कमजोरी छुपाने के लिये अपने ही साथी को नकारा व निकम्मा बता देने के बाद जनता मे गहलोत को लेकर अलग तरह की बहस छिड़ चुकी है। जिस तरह कांग्रेस हमेशा भाजपा व संघ का डर दिखाकर मुस्लिम समुदाय को वोटबैंक की तरह उपयोग कर उनके हितो पर कठोराघात करती आई है। उसी तरह अशोक गहलोत भी वर्तमान राजनीतिक घटनाटक्रम मे अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालकर अपने आपके मुख्यमंत्री पद को बचाये रखने के लिये हर बात का इल्जाम भाजपा पर लगाने से नही छुकते हुये भावनाओं से खेलने की रणनीति अपना रहे है। जबकि उनको मालूम होना चाहिए कि अगर स्वयं को सर्वेसर्वा बनाये रखने की इच्छा के तरह परिवार के सदस्य को नाहक कुचलनै की कोशिश मे परिवार मे अगर फूट पड़ती है तो जहां तक संभव हो पाता है उतना विरोधी भी लाभ उठाने की भरपूर कोशिश करते ही हमेशा आये है। अभी भी समय है कि गहलोत को अपने मुख्यमंत्री पद को बचाये रखने के लिये अड़यल रुख को त्याग कर कांग्रेस को बचाये रखने के लिये किसी तीसरे नेता को मुख्यमंत्री क्षका पद देकर पार्टी मे एकता व मजबूती बनाये रखने के लिये आगे आना चाहिए।वरना प्रदेश मे कांग्रेस के लिये हालात साजगार साबित नही होंगे।

  • राजस्थान मे लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवार रहे नेता व पूर्व सांसद राजनीतिक घटनाटक्रम मे नई करवट ले सकते है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    लोकसभा चुनाव मे राजस्थान की सभी पच्चीस सीटो से चुनाव लड़ चुके कांग्रेस उम्मीदवारों मे से दो-चार को छोड़कर अधिकांश उम्मीदवार प्रदेश मे पल पल घट व बदल रहे राजनीतिक घटनाटक्रम पर नजर रखते हुये अपनी महत्ती भूमिका अदा करने का तय करके राजनीतिक करवट लेकर मोजुदा समय मे अहम किरदार निभा सकते है।

    राजनीतिक सुत्र बताते है कि कांग्रेस से जुड़े अधिकांश लोकसभा उम्मीदवार व पार्टी से जुड़े पूर्व सांसद जयपुर मे जल्द एक बैठक करके मोजूदा राजनीतिक घटनाटक्रम पर मंथन करके व्यू रचना बनाकर उस पर अमल कर सकते है। प्रदेश मे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अब केन्द्र सरकार से सीधा टकराव होने की सम्भावना पूरी तरह बन चुकी है। वही कांग्रेस विधायक भी कम ज्यादा तादाद मे दो भागो मे बंट चुके है। गहलोत सरकार बहुमत सिद्ध करे या अल्पमत मे आये या फिर राष्ट्रपति शासन लगे। लेकिन सम्भवतः चालू वर्ष के आखिर मे बिहार चुनाव के साथ राजस्थान मे भी मध्यवर्ती विधानसभा चुनाव होना माना जा रहा है।

    राजस्थान के राजनीतिक घटनाटक्रम के तहत कांग्रेस विधायक गहलोत-पायलट खेमो मे विभक्त होकर होटल्स मे कैद हो चुके है। वही लोकसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों व कांग्रेस पार्टी से जुड़े पूर्व सांसद एक जगह बैठकर मोजुदा राजनीतिक संकट मे नया कुछ कर सकते है। इनमे से अनेक उम्मीदवार तो काफी मजबूत व सीनियर लीडर्स की श्रेणी मै
    मे आते है।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे को लग सकता है बडा झटका।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बसपा के सभी छ विधायको के कांग्रेस मे शामिल कराने को लेकर भाजपा विधायक मदन दिलावर व बसपा ने पहले स्पीकर के यहा 16-मार्च को शिकायत करके बसपा विधायको के कांग्रेस मे विलय को गलत करार देते हुये प्रार्थना करने पर जब स्पीकर सीपी जोशी द्वारा अभी तक उस पर निर्णय नही लेने के पश्चात आखिरकार मदन दिलावर ने उक्त मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय मे दिलावर व बसपा द्वारा दायर याचिका पर 27-जुलाई को सुनवाई होनी है।

    हालांकि न्यायालय का उक्त याचिका पर सुनवाई के बाद जो निर्णय आयेगा उसके बाद बसपा विधायको के अस्तित्व पर प्रभाव पड़ना तय है। लेकिन हाईकोर्ट मे दिलावर द्वारा उक्त प्रकरण को लेकर दायर याचिका के बाद कानून के जानकार व राजनितिज्ञ उक्त प्रकरण को लेकर चर्चा करने जरुर लगे है। अगर न्यायालय का आदेश विलय प्रक्रिया के खिलाफ आता है तो बसपा विधायको की सदस्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते है। अगर उक्त छ विधायकों की विलय प्रक्रिया की खामियों के कारण सदस्यता रद्द होती है तो मुख्यमंत्री खेमे द्वारा अब 102 विधायको का समर्थन होना जताया जा रहा उस संख्या बल मे कमी आने से गहलोत खेमे को बडा झटका लग सकता है।

    कुल मिलाकर यह है कि बसपा विधायकों के कांग्रेस मे विलय होने को लेकर मदन दिलावर व बसपा द्वारा 16-मार्च को स्पीकर सीपी जौशी के यहा चुनौती देने के चार महिने तक जौशी द्वारा निर्णय नही लेने के पश्चात आखिरकार दिलावर ने उच्च न्यायालय मे याचिका दायर करने के पश्चात सोमवार 27-जुलाई को सुनवाई होना तय हुवा है।

  • शरजील इमाम और अखिल गोगोई की रिहाई के लिए एस.डी.पी.आई बिहार का 400 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन

    प्रेस विज्ञप्ति 24 जुलाई, 2020:भारत में कोरोना को रोकने के नाम पर लॉकडाउन तैयारी की कमी के कारण पूरी तरह से विफल रही है , साथ ही सरकार द्वारा इस बीच की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि यहां लॉकडाउन कोरोना को रोकने के उद्देश्य से नहीं बल्कि उसके आड़ में सांप्रदायिक फासीवाद ताकतों को बढ़ावा देने के लिए है यह बातें *सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया*, बिहार के राज्य अध्यक्ष *नसीम अख्तर* ने कहा, एसडीपीआई ने 24 जुलाई को बिहार के सभी जिलों में सैकड़ों स्थानों पर शरजील इमाम और अखिल गोगोई को रिहा करने की मांग करने वाले तख्तियों के साथ धरना प्रदर्शन किया है। पार्टी ने सवाल किया कि जब कोरोना गुवाहाटी जेल में तेजी से फैल रही थी तब शरजील और गोगोई और अन्य कैदियों की जान क्यों नहीं बचाई गई ? क्या कोरोना के नाम पर शरजील और गोगोई की हत्या की साजिश तो नहीं है? इसलिए पार्टी ने शरजील इमाम, अखिल गोगोई की तुरंत रिहाई और उनके लिए बेहतर इलाज की मांग की, साथ ही राजनीतिक शत्रुता के तहत गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

    अपने बयान में, पार्टी के राज्य सचिव मंजर आलम और राज्य के उपाध्यक्ष नूरुद्दीन ज़ंगी ने धर्मनिरपेक्ष दलों की आलोचना करते हुए कहा कि जब सी.ऐ.ऐ विरोधी आंदोलन चल रहा था, तो हर कोई मंच पर आने और नेता बनने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जब आंदोलन का हिस्सा रहे कार्यकर्ताओं व छात्रों को गिरफ्तार करने और प्रताड़ित करने का काम जारी है, तो सब चुप है, यहां तक ​​कि राजद नेता जामिया विद्वान मीरान हैदर की गिरफ्तारी पर उनकी अपनी पार्टी को भी सांप सूंघ गया है। बिहार के लाल शरजील इमाम का जीवन खतरे में है लेकिन बिहार का कोई भी नेता या कोई भी दल अपने राज्य के बेटे के लिए मुंह खोलने को तैयार नहीं है

    बिहार शरीफ प्रदर्शन में बोलते हुए, पापुलर फ्रंट बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम अख्तर और मुजफ्फरपुर के औराई में बोलते हूवे कैंपस फ्रंट के नेता सैफुर रहमान ने सभी धर्मनिरपेक्ष व्यक्तियों और धर्मनिरपेक्ष संगठनों से अपील की कि वे यूपी और दिल्ली को एक व्यावहारिक तौर पर पुलिस राज्य बनाकर व तलबा और ऐकटिविसटों को प्रताड़ित कर हिंदू राष्ट्र के किऐ जा रहे टेस्ट के खिलाफ एकजुट हो कर हिंदू राष्ट्र के चल रहे परीक्षण को विफल कर देश को फासीवाद की खतरनाक मक़सद से बचा लें । उन्होंने एसडीपीआई को धन्यवाद दिया कि जब सभी ज़बान बंद होती दिख रही हैं, तब एसडीपीआई देश की रक्षा में सबसे आगे दिख रही है।

  • घोसी,ग्राम पंचायत सोमारीडीह में एक भी विद्यालय न होने से सर्व शिक्षा अभियान हो रहा है हवा हवाई साबित:चन्द्रशेखर

    मुज़फ्फरूल इस्लाम
    घोसी,मऊ। बीएसपी के मण्डल क्वार्डिनेटर चन्द्रशेखर निवासी मखदुमपुर ने पत्रकार वार्ता कर क्षेत्र की घोसी मोहम्दाबाद गोहना रोड़ को लेकर मुखर होते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से लगायत लोकनिर्माण से समस्या को अवगत कराने के बावजूद भी बरसात बाद यदि उक्त मार्ग नहीं बनता है तो जन सहयोग से आंदोलन किया जायेगा।ब्लाक के ग्राम पंचायत सोमारीडीह में एक भी विद्यालय नही होने से सर्व शिक्षा अभियान केवल हवा हवाई साबित हो रहा। कठिन सघर्षो में रहते हुए बीएसी द्वारा प्रदत्त पदों से रंज आकर पार्टी छोड़ने के दबाव को लेकर गबन का आरोपी न होने के बावजूद भी फर्जी फसाया गया।जबकि उच्च न्यायालय के वेल आर्डर से भी स्पष्ट है कि उक्त कम्पनी से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है। मिशन 2022 में प्रदेश में सर्वागींण विकास एवं जंगल राज खत्म करते हुए आयरन लेडी बहन कुमारी मायावती को मुख्यमंत्री बनाने हेतु हमसभी दृढ़ संकल्पित है।

  • घोसी,ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा 3 सूत्री ज्ञापन

    मुजफ्फरुल इस्लाम,घोसी,मऊ। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन घोसी द्वारा गुरुवार को पत्रकारों की सुरक्षा एवं जान माल की हिफाज़त को लेकर तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम तीन सूत्रीय ज्ञापन तहसील अध्यक्ष सुदर्शन कुमार के नेतृत्व में सौपा।जिमसें विगत दिनों गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी की गोली मारकर निर्मम हत्या सहित इधर पत्रकारों पर हमले व फर्जी ढंग से मुकदमा में फँसाये जाने की घटनाओं से देश का चौथा स्तम्भ खतरे में है।तीन सूत्रीय ज्ञापन में पत्रकार विक्रम जोशी के हत्या में शामिल हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी के साथ राष्ट्र द्रोह का मुकदमा करते हुए फाँसी की सजा सुनाई जाय। 25 लाख रुपये मुआवजा के साथ नौकरी एवं परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो।पत्रकारों की सुरक्षा के साथ पत्रकारों के साथ कि जाने वाली किसी भी आपराधिक घटना का तत्काल संज्ञान ले कार्यवाही सुनिश्चित हो।ज्ञापन सौपने वालों में अरविंद राय,अशोक श्रीवास्तव, वायुनन्दन मिश्रा आदि शामिल रहे।

  • मुख्यमंत्री गहलोत ने विधायकों को छोड़कर सत्ता सूख से संगठन व सांसदो को कभी तरजीह नही दी।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने खिलाफ विधायको मे बगावत के सूर नही निकलने इसलिए सभी विधायकों को अपने अपने क्षेत्र के पंचायत-निकाय चुनाव की टिकट देने के अलावा पसंद के डिजायर प्रथा के मार्फत सरकारी कार्मिक लगाने के अतिरिक्त सभी तरह के विकास के काम उनकी मर्जी से होने की पूरी छूट दे कर उन्हें भरपूर सत्ता का सूख भोगने की परिपाटी जो 1998 मे डाली वो आज भी जारी कर रखी है। लेकिन अबकी दफा सचिन पायलट के विधायक-मंत्री बनकर सत्ता सूख भोगने की बजाय मुख्यमंत्री बनकर सत्ता अपने हिसाब से चलाने का दावा ठोके रखने का परिणाम यह निकला कि सत्ता के दो पावर सेंटर कायम होने के चलते विधायकों मे मुख्यमंत्री के प्रति आक्रोश लगातार पनपते जाने पर आज पायलट के नेतृत्व मे विधायकों ने राजस्थान मे नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर जो कदम उठाया है उससे सरकार लड़खड़ाने लगी है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने अब तक के सभी मुख्यमंत्री कार्यकाल मे संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों सहित जिलाध्यक्ष व लोकसभा सभा सदस्य या कांग्रेस की तरफ से लोकसभा उम्मीदवार रहे नेताओं को सत्ता सूख से हमेशा कोसो दूर रखने की रणनीति को अपनाये रखा है। इन सब नेताओं के मुकाबले विधायकों को सत्ता पूरी तरजीह देकर सर्वेसर्वा बनाये रहने से कांग्रेस संगठन व नेताओं सहित आम कार्यकर्ताओं मे कांग्रेस की सरकार रहने के बावजूद जब इनकी छवनी जब एक पैसे मे भी नही चली तो उनमे उदासीनता आने से गहलोत के मुख्यमंत्री रहते आम विधानसभा चुनाव होने पर कांग्रेस हमेशा ओधे मुह गिरती आई है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने नेतृत्व वाली सरकार मे केवल मात्र विधायकों को खूश करने का एक अलग तरह की परिपाटी का जो चलन शुरु कर रखा है जिसके तहत विधानसभा के दोसो कांग्रेस उम्मीदवारो को तो सत्ता मे पूरी तरजीह दी। वही दोसो के मुकाबले कांग्रेस के पच्चीस लोकसभा उम्मीदवारों को रत्ती भर भी तरजीह नही देने का ही परिणाम यह निकला कि आज संकट की घड़ी मे वो सभी पच्चीस उम्मीदवार किसी भी तरह की मुख्यमंत्री के फेवर मे भूमिका निभाते नजर नही आये। या फिर वो सभी भूमिका निभाने मे सत्ता संघर्ष के चले नाटक मे सक्षम नही हो पाये। अगर मुख्यमंत्री गहलोत विधायकों के साथ साथ लोकसभा का चुनाव लड़े कांग्रेस उम्मीदवारों व संगठन के ओहदेदारों को सत्ता सूख मे चाहे विधायकों से कम लेकिन उन्हें भी अहमियत देते तो वो सभी नेता आज उनकी ढाल बनकर संकट के दौर मे साथ खड़े नजर आते।

    राजस्थान मे आम विधानसभा चुनाव के पहले होने के कारण अधिकांश लोकसभा उम्मीदवारों ने कांग्रेस के विधानसभा उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिये अपनी पूरी ताकत को झोंक कर कोशिश करने का परिणाम ही आया कि प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार गठित हो पाई। इसके विपरीत गहलोत के नेतृत्व मे सरकार गठित होने के बाद जब लोकसभा चुनाव हुये तो उस चुनावों मे विधायक व विधानसभा उम्मीदवारों ने सत्ता के नशे मे सत्ता सूख मे अन्य को भागीदारी ना देने की मानसिकता के चलते लोकसभा चुनाव मे उदासीन रहकर काम किया बताते। अगर उक्त लोग अपने चुनाव की तरह लोकसभा उम्मीदवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करते तो प्रदेश मे बालाकोट-पुलवामा मामले के बावजूद 8-10 कांग्रेस से सांसद विजयी होते। एवं चुनाव हार का मंत अंतर भी निश्चित बहुत कम होता।

    कुल मिलाकर यह है कि आठ विधानसभाओं पर बना एक लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी अपनी कुछ ना कुछ राजनीतिक हेसियत जरुर रखता होगा। मुख्यमंत्री ने सरकार व अपना नेतृत्व बचाये रखने के लिये समर्थक विधायको को एक पखवाड़े से होटल मे बंद करके रख रखा है। जबकि सचिन पायलट सहित 19 कांग्रेस विधायक नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर राजस्थान के बाहर अज्ञात स्थान पर डेरा डाले हुयै है। ऐसे हालात मे मुख्यमंत्री की पहल व पसंद के मुताबिक पायलट को सभी पदो से हटाकर उनकी जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। पायलट समर्थक दो मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। पूरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी व उसके अग्रिम संगठनों को भी भंग कर दिया गया है। युवा-एनएसयूआई व सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष बदल दिये गये है। फिर भी कांग्रेस सरकार पर आया संकट अभी टला नही है। बल्कि दिन ब दिन संकट पेचीदा होता जा रहा है।

  • UP:सीबीएसई बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्राइज़ लाफ़ अज़ीज़िया से सम्मानित किया गया

    मुजफ्फरुल इस्लाम
    घोसी,मऊ।स्थानीय नगर स्थित अजीजिया कोचिंग सेंटर में बुधवार को सामाजिक दूरी के साथ अजीजिया समारोह का आयोजन किया गया।जिमसें कोचिंग संस्थान में अध्यनरत उन प्रतिभाओं को जो सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया उन्हें प्राइड ऑफ अजीजिया अवार्ड से सम्मानित किया गया।संस्थान के छात्र अभिषेक यादव ने 92%,आबिद हुसैन,मो फराज, साहिल खान,हिमांशु मौर्य, अनुपम,अर्चिता सिंह ने 94%मार्क्स हासिल किया ।संस्थान के डाइरेक्टर अजीजुल्लाह अब्बासी ने प्रतिभाओं को अवार्ड देते हुए बताया कि इस वैश्विक महामारी में भी यह संस्थान आधुनिक एवं उच्च क्वालिटी लेवल केसाथ ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहा है।बड़े शहरों जैसे आधुनिक सुविधाओं के साथ यह संस्थान सतत प्रयासरत रहता है कि इस क्षेत्र से प्रतिभाएं निकले जो पुरे देश मे नाम रोशन करें। यूट्यूब के साथ भी जुड़ कर लाभ लिया जा सकता है।

  • राजस्थान:मुस्लिम समुदाय की बेटियों ने सीनियर (आर्ट) परीक्षा परिणाम मे कामयाबी का परचम लहराया।

    सुरेय्या ने 98.80 व मुस्कान ने 95 व निमरा ने 95.60 प्रतिशत अं पाये।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुस्लिम समुदाय के शैक्षणिक तौर पर पीछड़े माने जाने वाले कलंक को अब लड़को से कई गुणा आगे बढकर बेटियों के आ रहे परीक्षा परिणामो को देखकर लगता है कि बेटियों ने उस कलंक को मिटाने का अब निश्चय कर ही लिया है।

    हालही मे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के सीनियर कक्षा के परिणामों पर नजर दौड़ाये तो पाते है कि बडी तादाद मे मुस्लिम बेटियो ने 90-95 प्रतिशत अंक ही नही अनेको ने तो 95- से 99 प्रतिशत अंक से पास करते हुये नये कीर्तिमान बनाये। अनेक शिक्षक बताते है कि विज्ञान संकाय मे उक्त तरह के हायर नम्बर मिलते रहने देखा जाता रहा है। पर अब आर्ट विषय मे भी उक्त तरह के हायर अंक पाना बेटियों द्वारा कीर्तिमान कायम करना ही है।

    माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा आज जारी सीनियर आर्ट विषय का परीक्षा परिणाम जारी करने पर प्रांत भर की हजारों मुस्लिम बेटियो ने अच्छे अंक लाकर जो समुदाय के माथे पर अशिक्षा का कलंक मिटाने की सफल कोशिश की है। उनमे से कुछ उदाहरणो पर नजर डालते है तो पाते है कि झालावाड़ जिले के पिड़ावा कस्बे की सरकारी बालिका स्कूल की छात्रा सुरेय्या खान ने 98.80 अंक पाये है। वही सीकर जिले के कासली गावं की बेटी मुस्कान खान ने 95.00 प्रतिशत अंक पाये है। एवं उसी की चचेरी बहन निमरा बानो ने 95.60 प्रतिशत अंक पाये है।

    कुल मिलाकर यह है कि सीनियर आर्ट के आज आये परीक्षा परिणाम मे सुरेय्या, मुस्कान व निमरा नामक बेटियां मात्र उदाहरण के तौर पर देखी जा सकती है। हजारो बेटियां ऐसी है जिन्होने 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर समुदाय के सामने एक नजीर पेश की है कि अगर समाज बेटियो की शिक्षा पर अधिकाधिक फोकस करके उनको भी सुविधाएं व गाईडेंस प्रदान करे तो वो वतन की खिदमात बेहतर ढंग से अंजाम देने को तैयार है।