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  • जैसलमेर मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से खुलकर बात की।

    अशफाक कायमखानी।जैसलमेर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर मे अपने समर्थक विधायको की बाड़ेबंदी करने के बाद आज मीडिया से बात करते हुये कहा कि ऐसे मौके पर हम आए हैं जब ईद भी है और राखी भी आ रही है, जो बहुत बड़े त्यौहार होते हैं। आप मजबूरी देखिए डेमोक्रेसी को बचाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ रहा है। देश के अंदर हालात बहुत गंभीर हैं पूरे मुल्क में, लोकतंत्र खतरे के अंदर है सभी तरह से। जो फैसले कर रही है भारत सरकार आप देख रहे हो क्या स्थिति बन गई है देश के अंदर और सरकारें एक के बाद एक चुनी हुई सरकारें जो हैं, चाहे वो मणिपुर हो, गोवा हो, अरुणाचल प्रदेश हो, कर्नाटक सबको मालूम है क्या हुआ, मध्यप्रदेश में क्या हुआ। इसलिए मैं बार-बार बोलता हूं हालात बड़े गंभीर हैं देश के, तो राजस्थान की जनता ने जो साथ दिया है हमारा आज घर-घर में चर्चा है कि चुनी हुई सरकार हमारे द्वारा, बीजेपी कौन होती है गिराने वाली? सरकार कांग्रेस की बनती है,

    भारतीय जनता पार्टी की बनती है, कोई दिक्कत नहीं है। कभी परंपरा रही नहीं है कि हम उनकी सरकार को गिराने के लिए षड्यंत्र करें, हमने कभी नहीं किया, बल्कि रोका हमने, शेखावत जी के वक्त में हमने रोका, जो षड्यंत्र कर रहे थे उनकी अपनी ही पार्टी के, मैंने जाकर कहा गवर्नर साहब को, हम इसको लाइक नहीं करते हैं। प्रधानमंत्री जी को मैंने कहा नरसिम्हा राव जी को कि ये जो हमारी पार्टी के कुछ लोग लगे हुए हैं इन कामों में, ये लोकतंत्र के खिलाफ में हैं, हमारी परंपरा अलग रही है। फिर भी दुर्भाग्य से इस बार बीजेपी का खेल बहुत बड़ा है हॉर्स ट्रेडिंग का क्योंकि खून उनके मुंह लग चुका है कर्नाटक के अंदर, मध्यप्रदेश के अंदर, इसलिए वो प्रयोग यहां कर रहे हैं, पूरा गृह मंत्रालय इस काम में लग चुका है। धर्मेंद्र प्रधान जी की तरह कई मंत्री लगे हुए हैं, पीयूष गोयल जी लगे हुए हैं, कई नाम छुपे रुस्तम की तरह भी वहां पर हैं, हमें मालूम है। हम किसी की परवाह नहीं कर रहे हैं, हम तो लोकतंत्र की परवाह कर रहे हैं। हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, राहुल गांधी जी ने कहा था एक बार गुजरात के अंदर कि विचारधारा आरएसएस की, बीजेपी की रहेगी देश के अंदर, हमें ऐतराज़ भी नहीं है। लड़ाई होती है लोकतंत्र में विचारधारा की, नीतियों की, कार्यक्रमों की होती है। लड़ाई ये नहीं होती है कि आप चुनी हुई सरकार को बर्बाद कर दो, उसको टॉपल कर दो, फिर लोकतंत्र कहां बचेगा? लड़ाई हमारी लोकतंत्र को बचाने के लिए है, व्यक्तिगत किसी के खिलाफ नहीं है। मोदी जी को चाहिए, प्राइम मिनिस्टर हैं वो, दो बार उनको मौका दिया है जनता ने, थाली बजवाई, ताली बजवाई, मोमबत्ती लगवाई, लोगों ने उनकी बात पर विश्वास किया, ये बहुत बड़ी बात है, उन प्रधानमंत्री को चाहिए, जो कुछ तमाशा हो रहा है राजस्थान के अंदर, उसको बंद करवाएं। हॉर्स ट्रेडिंग की रेट बढ़ गई है, जैसे ही डिक्लेयर हुआ विधानसभा का सत्र और रेट बढ़ा दी उन्होंने, आप बताइए क्या तमाशा हो रहा है? आज हर नागरिक का कर्त्तव्य है देश के अंदर-प्रदेश के अंदर, आप लोगों का भी कर्त्तव्य भी है मीडियावालों का भी, सच्चाई का साथ दो, इनको सबक ऐसा मिले राजस्थान से, आगे ये भविष्य में कोई गवर्नमेंट टॉपल इस रूप में करने की हिम्मत नहीं करें, ये मेरा मानना है।

    सवाल- दूसरे खेमे में वैसे तो शान्ति है पर ट्वीट पॉलिटिक्स हो रही है, गजेंद्र सिंह लगातार ट्वीट कर रहे हैं?
    जवाब- देखिए वो तो खाली झेंप मिटा रहे हैं, उनको इस्तीफा देना चाहिए खुद को ही, जो आदमी पकड़ा गया हो ऑडियो टेप के अंदर, सरकार को टॉपल करने के षड्यंत्र में शामिल हो और उनके खिलाफ पहले से ही कई मुकदमे चल रहे हैं, गरीबों का पैसा लूट लिया है राजस्थान के अंदर। गरीब चाहे किसी भी कौम का है, गांव-गांव में इंतज़ार कर रहा है कब मुझे पैसा वापस मिलेगा, जिस राज्य में गजेंद्र सिंह शेखावत साहब के जो दोस्त लोग हैं उन सबने मिलकर, इनका खुद का नाम भी आ रहा है, वो संजीवनी कॉपरेटिव सोसायटी नाम आ रहा है, कोर्ट ने भी आदेश जारी कर दिए हैं, अब मॉरल रूप से उनको इस्तीफा देना चाहिए और उनके ट्वीट में भी दम नहीं है।

    सवाल- सर कितने विधायकों का समर्थन है आपको?
    जवाब- 200 लोगों का।

    सवाल- इस बार कह रहे हैं कि अशोक गहलोत का स्वभाव बदला हुआ है, आमतौर पर कूल रहने वाले अशोक गहलोत अग्रेसिव हैं?
    जवाब- कहां मैं अग्रेसिव हूं, मैं बड़े प्यार से मोहब्बत से बात करता हूं, आदर करता हूं केंद्रीय मंत्रियों का चाहे वो किसी पार्टी के हों, उसमें कोई कमी नहीं है और मैं मुस्कुराता हूं तो मुझे गॉड गिफ्टेड है, मैं क्या कर सकता हूं?

    सवाल- सर माफ करने की प्रवृत्ति आपकी रही है। अगर उस खेमे से कुछ लोग आते हैं तो क्या माफ किया जाएगा आपकी तरफ से?
    जवाब- ये तो हाईकमान पर निर्भर करता है, हाईकमान अगर उनको माफ करती हैं तो मैं गले लगाऊंगा सबको, मेरा कोई प्रेशर पॉइंट नहीं है, मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, विश्वास किया है मुझपर, मैं विभिन्न पदों पर रहा हूं, 3 बार केंद्रीय मंत्री रहा हूं, 3 बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहा हूं, 3 बार AICC महामंत्री रहा हूं और 3 बार मैं मुख्यमंत्री बना हूं, मुझे क्या चाहिए? मैं जो कुछ कर रहा हूं सेवा के लिए कर रहा हूं, पब्लिक सेवा के लिए कर रहा हूं और जो हाईकमान तय करेगा मुझे किसी में ऐतराज़ नहीं है।

    सवाल- सतीश पूनिया ने सवाल उठाया है कि जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट हो गए, इनको कहीं और ले जाते डर था तो?
    जवाब- क्या है कि ये लोग नए-नए नेता बने हैं, ये वसुंधरा जी से टक्कर लेना चाहते हैं। तो वसुंधरा जी से टक्कर लेने के लिए क्या है इनमें आपस में प्रतिस्पर्धा है, राठौड़ साहब में, पूनिया साहब के अंदर, गुलाबचंद कटारिया जी भले आदमी हैं, थोड़ा कम बोलते हैं, मीडिया के सामने आते हैं तब वो हमें गाली-गलौज करते हैं, तो इनमें कोई दम नहीं है किसी में भी और वसुंधरा जी पता नहीं वो कहां गायब हो गई हैं।

    सवाल- सर आप ये कह रहे हैं कि भाजपा का ये पूरा खेला षड्यंत्र है लेकिन ये भी बात कही जा रही है कि प्रदेश की भाजपा के शीर्षस्थ नेता कहीं न कहीं आपकी सरकार बचाने में आपके साथ में हैं?
    जवाब- आपकी जानकारी में है तो मुझे बताइए फिर मैं उनसे संपर्क करूं।

    सवाल- सर प्रधानमंत्री को शिकायत की थी आपने उसका कुछ जवाब दिया प्रधानमंत्री जी ने, चिट्ठी भी लिखी थी आपने?
    जवाब- मैंने उनको बता दिया, जब असेंबली बुलाई नहीं जा रही थी तब मैंने अवगत करवा दिया, अब आगे तो वो उनके ऊपर है। एक मैं मांग करना चाहूंगा, आज ही मैंने तय किया है, प्रधानमंत्री जी को मैं एक पत्र भी लिखूंगा कि एक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करो आप देश के मुख्यमंत्रियों के साथ में क्योंकि कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं देश के अंदर-प्रदेश के अंदर। प्रदेश में हमने बहुत शानदार व्यवस्था कर रखी है, आज जो संख्या मरीजों की बढ़ रही है पॉजिटिव केसेज़ की, चिंता करने की इसलिए आवश्यकता नहीं है। कई राज्य तो टैस्ट ही नहीं कर रहे हैं। पहले हमारे यहां पर सुविधा नहीं थी टैस्टिंग की, पुणे और दिल्ली भेजते थे हम टैस्टिंग के लिए, आज हमारे यहां 40 हजार टैस्ट पर डे हो सकते हैं, ये कैपेसिटी हो गई है। टैस्टिंग हमने इसलिए बढ़ाई है, एक थ्योरी है, अगर आप टैस्टिंग बढ़ाओगे, वहां तक पहुंचोगे जो आखिरी मरीज है या पॉजिटिव है, इलाज शुरु कर दोगे तो वो आगे नहीं फैलाएगा, इसलिए हमने टैस्टिंग बढ़ाई है। संख्या बढ़ रही है पर मृत्युदर 1 पर्सेंट से भी कम हो गई है यहां पर, देश के अंदर पहला राज्य राजस्थान है जहां पर मृत्युदर 1 पर्सेंट से कम हो गई है। रिकवरी रेट हमारे यहां शानदार है, डबलिंग रेट यहां अच्छी है, इलाज शानदार हो रहा है, हमारे यहां जो दवाइयां हैं, प्लाज्मा थैरेपी शुरु की है हमने जयपुर में, जोधपुर में, उदयपुर में, बीकानेर के अंदर वो बहुत कामयाब हुई है, सभी तरह से आज पूरे देश में दुनिया में राजस्थान की चर्चा हो रही है जो हमने मैनेजमेंट किए हैं। संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि हमने बहुत बड़ी तादाद में, 25 हजार के लगभग हम टैस्ट करवा रहे हैं, कई राज्य तो 10 हजार भी नहीं करवा पा रहे हैं। इसलिए हमने तो ऑफर किया है दूसरे राज्यों को, अगर आपको जरूरत है तो हम आपको 5 हजार टैस्ट पर डे राजस्थान में करके देगी सरकार, आपकी जनता के लिए देगी, हमें खुशी होगी।

    सवाल- सर जैसलमेर में विधायकों को लाए हैं?
    जवाब- आप सबको मालूम है, जब मैं आता हूं तो आपके चेहरे भी खिल जाते हैं, मेरा भी चेहरा खिल जाता है।

    सवाल- सर तनोट माता में आपकी गहरी आस्था है, क्या तनोट माता मंदिर भी ले जाएंगे?
    हमारे मेंबर्स कई पहली बार आए हैं जैसलमेर, सब तनोट भी जाएंगे, और जगह भी जाएंगे, वो उनपर निर्भर करता है। हमारे यहां उनकी तरह बंदिश नहीं है। टेलीफोन छीन लिए सबके, बात नहीं कर सकते, हमारे यहां टेलीफोन भी, आना-जाना भी सब जारी रखा।

  • मुसलमान देश के लिए हमेशा कुर्बानी देने को तैयार है : शाही इमाम पंजाब

    – लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सोशल डिस्टेंस से ईद की नमाज अदा की गई

    लुधियाना 1 अगस्त (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट ) : करोना वायरस के संकट के मद्देनजर सोशल डिस्टेंस के साथ आज यहां फील्ड गंज चौक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद समेत अन्य सभी मस्जिदों में ईद उल अजहा (बकरा ईद) कि नमाज अदा की गई। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री भारत भूषण आशू, लोकसभा सदस्य स. रवनीत सिंह बिट्टू, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के प्रधान सरदार प्रितपाल सिंह, विधायक सुरिंदर डावर, श्री राकेश पाण्डे, श्री संजय तलवार, श्री कुलदीप सिंह वैद, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री हीरा सिंह गाबडिय़ा ने बधाई संदेश भेजा। ईद के अवसर पर संबोधन करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि आज का दिन हम अल्लाह के प्यारे नबी हजऱत इब्राहीम अलहिस्सलाम की याद में मानते हैं जिन्होंने इंसानों को यह सबक दिया कि अगर वक़्त आए तो अपनी जान से प्यारी चीज भी अल्लाह की राह में कुर्बान करने से ना घबराओ, शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम की इसी प्रेरणा से भारत के मुसलमानों ने देश को आज़ाद करवाने के लिए अंग्रेजों से टक्कर लेते हुए हजारों कुर्बानियां दी थी।

    उन्होंने कहा कि आज भी अगर देश को जरूरत पड़ी तो मुसलमान कुर्बानी देने को तैयार है। शाही इमाम ने कहा की आज का दिन बरकत और रहमत वाला है, दुआ कबूल होती है और अल्लाह का हुक्म है कि ईद के दिन गरीबों और जरुरतमंदों की मदद की जाए। शाही इमाम ने नमाजियों से कहा कि आज ईद के दिन इस बात का ख्याल रखा जाए कि कोई भी पड़ोसी चाहे वह किसी भी धर्म का हो भूखा ना रहे।

    इस अवसर पर नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि इस्लाम के पर्व इबादत और नेकी की राह दिखाते हैं हम साल भर रोजाना पांच नमाज अदा करते हैं और ईद के दिन छे नमाज अदा करते है। उस्मान लुधियानवी ने कहा कि कुर्बानी के इस दिन हम सब इस संकल्प को दोहराते हैं कि अगर देश और कौम को जरुरत पड़ी तो हम पीछे नहीं रहेंगे। इस अवसर पर पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया गए थे। डीसीपी लॉ एंड आर्डर श्री अश्वनी कपूर, एडीसीपी 1 दीपक पारेख, एसीपी सेन्ट्रल सरदार वरियाम सिंह विशेष तौर पर उपस्थित रहे।

    ईद उल अजहा पर संबोधन करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी।

    नमाज अदा करवाते नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी।

    सोशल डिस्टेंस से अपनी बारी का इंतजार करते हुए नमाजी।
    नमाजियों को सैनिटाइजर कर बुखार चेक कर जामा मस्जिद में एंट्री करवाते प्रबंधक।

  • जानिए मुसलमान कैसे और क्यों मनाते हैं ईद उल अजहा (बकरा ईद):खुर्रम मलिक

    कोरोना वायरस की वजह से आज पुरा विश्व एक अजीब सी परिस्थिति से गुज़र रहा है. और इस महामारी से झूझते हुए आज पूरे चार महीने गुज़र चुके हैं. और इस का असर हर ओर देखा जा सकता है. अबतक हमारे देश में इस की वजह से हज़ारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हालात यह हो चुके हैं के देश में कोरोना केस की संख्या मोदी जी के जुमले की तरह 15 लाख पार कर चुका है.बीच में अनलाक की प्रक्रिया के तहत आम जीवन पटरी पर लौटती दिख रही थी और ऐसा लग रहा था के अब इस बीमारी से हमारा देश मुक्त हो जाएगा परंतु बढ़ते केस की वजह कर देश के कई राज्यों में फिर से लाक डाउन करना पड़ा. हमारे राज्य बिहार में भी ऐसा होता लग रहा है. यह बात अलग है के इस लेख को लिखे जाने तक ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है के किया 1 अगस्त से फिर से 15 दिनों का लाक डाउन होगा या नहीं? लेकिन कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए ऐसा लगता है के ईद उल फ़ितर की तरह ईद उल अज़्हा की नमाज़ भी घरों में ही पढ़नी होगी .फिर से इस महामारी की वजह से स्कूल कॉलेज, बाज़ार बंद हैं वहीं दूसरी ओर मस्जिद मंदिर गिर्जा गुरुद्वारा भी बंद पड़े हैं. और ऐसे में मुसलमानों का पवित्र महीना ईद उल अज़्हा भी आ चुका है. और जैसा के सब को पता है के मौजुदा वक़्त कोरोना का है लेकिन ऐसे में ही नमाज़ भी पढ़नी है. तो जैसा के हमने ईद उल फ़ितर पर भी नमाज़ का तरीक़ा बताया था. इसी लिये ईद उल अज़्हा पर भी हम ने सोचा के आप लोगों को तरीक़ा बताया जाए. क्यों के ईद उल फ़ितर पर हमारे लेख को आप सब ने बहुत पसंद किया था.
    उम्मीद की जा रही है के 1 अगस्त शनिवार को मुसलमानों का पवित्र त्यौहार ईद उल अज़्हा मनाया जाएगा.

    ईद उल अज़्हा के दिन सुबह सवेरे उठना , मिसवाक(दतमन) करना, नहाना, खूशबू लगाना, अपनी हैसियत के हिसाब से अच्छा कपडा़ पहनना मुसतहब है.
    ईद की नमाज़ में अज़ान और तकबीर नहीं कही जाती है.
    घर में मिंबर की जगह कुर्सी इस्तेमाल कर सकते हैं. और अगर किसी को खु़तबा नहीं आता हो तो इस के बगै़र भी नमाज़ पढी़ जा सकती है…

    ईद की नमाज़ के लिये इमाम के अलावा तीन बालिग़ आदमी का होना ज़रूरी है. अगर य भी मुम्किन ना हो तो अलग से दो या चार रकत नफ़िल नमाज़ पढ़ना है.

    लेकिन सब से पहले इस के इतिहास पर कुछ बात कर लेते हैं.
    आखि़र किया है ईद उल अज़्हा का इतिहास?
    इस्लाम धर्म में इस का किया महत्व है और मुसलमान इसे क्यों मनाते हैं? आयिये जानते हैं.

    जैसा के हम सब जानते हैं कि यह पवित्र त्यौहार मुसलमानों के एक नबी हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम की याद में मनाया जाता है. इतिहास में इस से जुड़ा एक बहुत ही मश्हूर क़िस्सा है के हज़रत इब्राहीम अo ने सपने में देखा के वह अपने बेटे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम के गर्दन पर छुरी चला रहे हैं. यह बात आप ने अपने बेटे इसमाईल को बताई. और बेटे से राय पूछा तो बेटे ने कहा के अब्बा जान अगर ऐसा है तो यह अल्लाह का कोई हुकुम होगा. और आप को इस हुक्म पर अमल करना चाहिए. मैं तय्यार हूँ. फिर दोनों बाप बेटे एक सुनसान जगह पर गए. बेटे इस्माईल अo ने कहा के अब्बा जान आप अपनी आँखों पर कपडा़ बांध लीजिये किया पता आप को मेरी गर्दन पर छुरी चलाते वक़्त बेटे की मोहब्ब्बत बीच में आ जाए और आप इस वजह से आप अल्लाह के हुक्म को पूरा ना कर पाएं. और फिर बाप ने ऐसा ही किया .
    और जब क़ुर्बानी की जगह पर दोनों बाप नेटे पहुँचें तो बेटे इसमाईल अo आग्या का पालन करते हुए ज़मीन पर लेट गए और अपने पिता से कहा के आप मेरी गर्दन पर छुरी चलाएँ और अल्लाह के हुक्म को पूरा करें. तो इब्राहीम अo ने ऐसा ही किया. लेकिन जैसे ही बाप ने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई वैसे ही छुरी एक दुंबे( अरबमें एक जानवर) पर चली. और उस की क़ुर्बानी हो गई. बस अल्लाह को यही अदा पसंद आई और उसी दिन से मुसलमानों पर क़ुर्बानी वाजिब (ज़रूरी) कर दिया गया.
    इसी तरह अगर और बात करें तो इसलाम की दो ईदों में से एक ईद उल अज़्हा है. जो ज़िल हिज्जा की दस तारीख़ को मनाई जाती है. यह हज़रत इब्राहीम अo की अपने बेटे की क़ुर्बानी की अज़ीम यादगार है जिसे अल्लाह पाक ने रहती दुनिया तक इबादत के तौर पर ज़िंदा कर दिया आख़री नबी मुहम्मद साहब (सo अo वo) का फ़रमान है ” क़र्बानी के दिन इंसानों के आ’माल में से अल्लाह को इतना ज़ियादा महबूब अमल (कार्य) कोई नहीं जितना क़ुर्बानी के दिन क़ुर्बानी करना है”
    एक दूसरी जगह आप मुहम्मद साहब का फ़रमान है के “जो इंसान क़ुर्बानी की ताक़त रखता हो और फिर भी क़ुर्बानी ना करे, वह हमारी इबादत्गाह के क़रीब भी ना आए.
    क़ुरान ओ हदीस की रौशनी में यह बात साबित है के हर उस आक़िल (समझदार) बालिग़(व्यस्क) मुसलमान पर क़ुर्बानी वाजिब (ज़रूरी) है जिस के पास साढे़ बावन तोला चांदी या उस की क़ीमत का माल उस की ज़रूरयात से ज़ियादा हो. (यह माल चाहे सोना, चांदी या उस के ज़ेवर (गहने) हों. तिजारत (व्यापार) का माल या ज़रूरत से ज़ियादा घरेलु सामान हो, या ज़मीन हो)
    क़ुर्बानी का मक़सद सिर्फ़ जानवरों की क़ुर्बानी नहीं है, बल्कि इस का असल मक़सद यह है के इस क़ुर्बानी के नतीजे में हमारे अंदर फ़रमांबरदारी (आग्या का पालन) का जज़्बा पैदा हो जाए, और हम अल्लाह के हुकुम के आगे अपने जज़्बात और खा़हिशात को क़ुर्बान (त्याग) करने वाले बन जाएं.
    आज कल कुछ लोग क़ुर्बानी के बारे में में सही जानकारी ना होने की वजह कर ग़लत बयानबाज़ी करते हुए नज़र आते हैं.
    इसी लिये हमें अच्छी तरह जान लेना चाहिए के क़ुर्बानी के बदले उस की क़ीमत का सदक़ा करना या उस को ग़रीबों की ज़रूरयात पर ख़र्च कर देना हरगिज़ क़ुर्बानी का बदल नहीं हो सकता.
    लेकिन अभी कोरोना काल चल रहा है इस लिए क़ुर्बानी करने के साथ ही कुछ बातों का खा़स ख़्याल रखना होगा… जैसे के….
    सफ़ाई का खा़स ख़्याल रखें.
    शारीरिक दुरी बनाए रखें.
    क़ुर्बानी की बची हुई चीज़ें खाल, खू़न, और दूसरी गंदगी को ऐसी जगह पर ना डालें जिस से किसी को भी तकलीफ़ हो.
    माहौल को साफ़ सुथरा रखें.
    अपने साथ पुरी इंसानियत की भलाई, आपसी मोहब्बत और भाई चारा के लिये काम करें और साथ ही दुआ भी करें.

    हम यहाँ आप को यह बताना चाहते हैं कि ईद उल अज़्हा की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा किया है. सब से पहले तो हमें किसी भी नमाज़ की नियत करनी होती है. वैसे नियत दिल से होनी चाहिए. अगर ज़ुबान से बोल दिया तो और भी अच्छा है. नियत इस तरह करना है. नियत करता हूँ मैं नमाज़ ईद उल अज़्हा की वाजिब. छे ज़ाएद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह त’आला के. रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़. नियत के बाद तक्बीर ए तहरीमा (हाथों को कंधे तक उठाना है और फिर पेट पर बांध लेना) के बाद सना पढ़ना है उस के बाद दो और तक्बीर कही जाएगी. पहली तक्बीर के बाद हाथों को कंधे तक ले कर जा कर छोड़ देना है, फिर दूसरी बार भी ऐसा ही करना है. तीसरी तक्बीर के बाद हाथों को बांध लेना है और सुरह फ़ातिहा और उस के बाद कोई भी सुरह पढ़ना है. उस के बाद रुकु में जाना है फिर सज्दे में और इस तरह एक रकत पूरी करनी है.
    दूसरी रकत के लिये खड़े होंगे तो सब से पहले सुरह फ़ातिहा और फिर कोई सुरह मिलाएंगे और उस के बाद रुकु में जाने से पहले पहले तीन ज़ाएद तक्बीरें (अल्लाह हु अकबर) कहते हुए हाथ छोड़ देंगे और चौथी तक्बीर कह कर रुकु में जाएंगे और सजदा के साथ सलाम फेर कर नमाज़ मुकम्मल करेंगे.

    नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा। यह दो है. ईद उल अज़्हा का खु़त्बा यह है.

    पहला खु़त्बा…
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अल्हम्दु लिल्लाही रब्बिल आ लमीन वल आ’क़िब’तू लिल मुत्तक़ीन, वससलातु वससलामु अला सय्येदेना मुहम्मदिन व’अला आ’लिही व’अस’हाबिही अज्म’ईन, अम्मा बा’द
    फ़अ’ऊज़ु बिल्लाही मि’नश शैतान नि’र्रजीम, बिस्मिल्ला’हिर रहमान निर्रहीम,
    इनना आ’तै’नाका कल’कौसर, फ़सल्लिलि रब्बिका वन्हर, इनना शानि’अ’का हुवल अब’तर,
    व’अन आयेशा रज़ि’अल्लाह हु त’आला अन’हा ,
    अन्ना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम, मा अ’मिला आद’मियुन मिन अमलि यौम’नहरि अहब्बा इलल्लाहि मिन इहराक़िद’दमि उन्नहु लयाति यौमल्क़यामति बिक़रूनिहा व’अश’हारिहा व’अज़’लाफ़िहा इनन’दमा ल’यक़’ऊ मिनल्लाहि बिमकानिन क़ब्ला अन’यक़’आ मिन’अल’अरज़ि फ़’तीबु बिहा नफ़सन,
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अल्लाहुम्मा इन्नी अ’ऊज़ु बिका मिनल बरसि वल’जुनूनि वल’जज़ामि व’मिन सैय्ये’इल अस्क़ाम.
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    *दूसरा खु़तबा ….
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    नह’मदुहु व’नस’त’ईनुहु व’नुसल्ली अला रसूलिहिल करीम. अम्मा बा’द
    फ़अ’ऊज़ु बिल्लाही मि’नश शैतान नि’र्रजीम, बिस्मिल्ला’हिर रहमान निर्रहीम,
    इननल्लाहा व’मलाइकतुहु यु’सल’लुना अलन’नबी, या अय्यु’हल’लज़ीना आ’मनू सल्लू अलैही व’सल्लिमु तस्लीमा.
    अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व’अला आलि मुहम्मदिन व’अ’लल खुलफ़ाई रा’शिदीन अल’मह’दिय्यीन. व’अ’ला अस’हा’बिहि अज’म’ईन. व’अ’ला मन त’बि’अ’हुम इला यौमिद दीन. इबाद’अल्लाह र’हि’म’कुमुल्लाह.
    इन्नल्लाहा या’मुरु बिल’अद’लि वल’इहसानि व’ई’ता’ई ज़िल’क़ुर्बा व’यन्हा अनिल फ़ह’शाइ वल’मुन’करि वल’बगई, य’इ’ज़ुकुम ल’अल’लकुम त’ज़क्करून. वल्ज़िकर
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अब थोडी़ बात क़ुर्बानी के तरीक़े पर भी कर ली जाये.
    आयिये जानते हैं कि क़ुर्बानी का सही तरीक़ा किया है?
    जानवर की गर्दन पर छुरी चलाते वक़्त ज़बह करने से पहले बिस्मिल्लाह अल्लाह हु अकबर पढे़
    ज़बह करते हुए यह आयते़ भी पढ़ना भी साबित है.
    इन्नी वज्जहतु वजहिया लिल्लज़ी फ़’त’रस समावाति वल’अर’ज़ि हनीफ़न वमा अना मिनल मुश्रिकीन .क़ुल इनना सलाती व’नुसुकी व’महयाया व’म’माती लिल्लाही रब्बिल आ लमीन. ला शरीका लका व’बि’ज़ा’लिक उमिरतु व’अना अव’व’लुल मुस्लिमीन.
    ज़बह करने के बाद यह दुआ पढे़.
    अल्लाहुम्मा तक़ब्बल निम्नी कमा त’क़ब’बल’ता मिन हबीबिका मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम व’मिन खलीक़िका इब्राहीमा अलैहिस सलाम.

    जानवर को ज़बह करते वक़्त ऐसा जुमला कहना ज़रूरी है जो सिर्फ़ अल्लाह त’आ’ला के ज़िक्र और हमद ओ सना पर हो.

    ज़बह करते वक़्त सिर्फ़ उर्दु में भी अल्लाह का नाम लिया जैसे के यह बोला के अल्लाह के नाम से ज़बह करता हूँ तो भी क़ुर्बानी हलाल हो जायेगी

    और नमाज़ में अल्लाह से दुआ करें के अल्लाह हमारे देश और दुनिया में इस कोरोना वायरस नामी महामारी को ख़तम कर दे और दुनिया में अमन चैन और शान्ती की फ़िज़ा बनी रहे.

  • उत्तर प्रदेश मे 240 गांव बाढ़ से प्रभावित साथ ही दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर|

    आशिफ अली/मिल्लत टाइम्स( उत्तर प्रदेश )

    प्रदेश में दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें शारदा नदी, लखीमपुर खीरी में अपने खतरे के निशान से 08 से.मी. ऊपर तथा सरयू नदी, बलिया में अपने खतरे के निशान से 16 से.मी. ऊपर बह रही है प्रदेश में बाढ़ के संबंध में निरन्तर अनुश्रवण किया जा रहा है। कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक परिस्थिति नहीं है |

    वर्तमान में प्रदेश के 08 जनपदों की 17 तहसीलों के 240 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें बाराबंकी के 57, अयोध्या के 02, कुशीनगर के 09, गोरखपुर के 80, आजमगढ़ के 14, बस्ती के 07, संतकबीर नगर के 68 व सीतापुर के 03 गांव शामिल हैं | बाढ़ से 65,564 लोग प्रभावित हैं। बाढ़ से अब तक 07 जनपदों जिनमें बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, कुशीनगर, मऊ, संतकबीर नगर, सीतापुर में 8,408.6 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है | प्रदेश के 06 जनपदों- बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर, श्रावस्ती, प्रयागराज में एनडीआरएफ की तैनाती की गई हैसाथ ही कुशीनगर, गोरखपुर, बलरामपुर, प्रयागराज, मुरादाबाद जनपदों में एसडीआरएफ तथा 05 जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, बाराबंकी, गोण्डा, श्रावस्ती में पीएसी की तैनाती की गई है |
    यह जानकारी राहत आयुक्त, श्री संजय गोयल ने दी |


  • सीतामढ़ी:मिल्लत टाइम्स की ख़बर का असर,हरकत में आई प्रशासन,DM ने बैठक कर सभी प्रखंड स्तर पदाधिकारी को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों की समस्यायों का समाधान करने को कहा

    मेराज़ आलम ब्यूरो रिपार्ट

    सीतामढ़ी। सभी बीडीओ,सीओ, थानाध्यक्ष एवं प्रखंडो के नोडल पदाधिकारी अपने-अपने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रो में जाकर लोगो से मिलकर उनकी समस्याओं की जानकारी लेगें,साथ ही चल रहे राहत कार्यो का फीड बैक भी लेगें।उक्त बातें डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने समाहरणालय स्थित परिचर्चा भवन में आयोजित बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियो से कही। उन्होंने कहा कि संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेगे और तीन दिन बाद सभी अनुमंडल पदाधिकारी इससे संबधित रिपोर्ट के साथ जिलास्तरीय बैठक में भाग लेंगें। जिलाधिकारी ने कहा कि आमजनों को समस्याओं को पूरी गंभीरता के साथ सुनना एवम उसका समाधान करना ही आपका महत्वपूर्ण दायित्व है।

    (मिल्लत टाइम्स की टीम द्धारा बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में परेशान लोगों की दो‌‌ दिन पहले उठाई गई थी आवाज )
    बिहार में बाढ़ के पानी का कोहराम हजारों लोग बेघर, भूखे प्यासे रहने पर मजबूर सरकारी रीलीफ सिर्फ कागजों पर

    उन्होंने कहा कि बीडीओ,सीओ सहित सभी पदाधिकारी आमजनों के फोन को उठाये एवं उनकी समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुने। डीएम ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने सरकारी नंबर को ही व्हाट्सअप नंबर रखे ताकि जब आपकी व्यस्तता के कारण आपसे बात नही हो पाती है तो आमजन या पदाधिकारी आपको सहझता के साथ व्हाट्सअप मैसेज कर सके। उन्होंने कहा कि जब भी मैं किसी पदाधिकारी को व्हाट्सअप मैसेज करती हूँ, तो हर हाल तुरंत उसका अनुपालन कर रिपोर्ट करे,अन्यथा जबाबदेही तय कर करवाई की जाएगी। डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने प्रखंडवार सभी बीडीओ,सीओ एवम राजस्व पदाधिकारियो से बाढ़ प्रभावित पंचायतो की स्थिति,तटबंधों की स्थिति,पॉलीथिन की उपलब्धता,ब्लीचिंग पाउडर की उपलब्धता,प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति,राहत केंद्रों एवम सामुदायिक किचेन की व्यवस्था आदि का समीक्षा कर कई आवश्यक दिशा निर्देश भी दिया।

    जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी पूरी सावधानी के साथ अपने-अपने दायित्व का निर्वहन करे। यह सुनिश्चित करे की आपके कार्यालय में सभी लोग मास्क अनिवार्य रूप से पहने,सामाजिक दूरी का पालन करे,समय-समय पर हाथों को धोते रहे एवम कार्यालय को भी समय-समय पर सेनेटाइज करते रहे।उन्होंने कहा कि हमे कोरोना की परिस्थितियो में ही कार्य करना है,इसलिये डरकर नही बल्कि पूरी सजगता के साथ सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य करे।उन्होंने बीडीओ सूप्पी एवम कार्यपालक एवं अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण सीतामढ़ी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनलोगो की तत्परता एवम अपने कार्य के प्रति जबाबदेही के कारण जमला-परसा सहित अन्य तटबंधों की स्थिति नियंत्रण में रही।

    डीएम ने बीडीओ सूप्पी द्वारा मास्क फोर्स अभियान को गति प्रदान करने एवम उसे आमजनों से जोड़ने हेतू किये गए प्रयासों की भी जमकर तारीफ किया। उन्होंने सीओ डुमरा अफ़शा परवेज,रुन्नीसैदपुर, बीडीओ डुमरा मुकेश कुमार की कार्यशैली एवं तत्परता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनलोगो ने आमजनों की समस्याओं पर गम्भीरता से लेकर उसका समाधान करने का प्रयास किया है। उक्त बैठक में एडीएम मुकेश कुमार,निदेशक डीआरडीए,मुमुक्ष चौधरी,डीपीआरओ परिमल कुमार,आपदा प्रभारी अविनाश कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

    नोट:मालूम हो की दो दिन पहले मिल्लत टाइम्स की टीम द्वारा सीतामढ़ी के कई बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बाढ़ से परेशान लोगों की परेशानियों से मिल्लत टाइम्स की टीम ने प्रशासन और सरकार को अवगत कराई थी

  • बहुमत का दावा करने वाले मुख्यमंत्री गहलोत आखिर समर्थक विधायको को बाड़ेबंदी मे कितने दिन ओर रखेगे।

    पवित्र त्योहार ईद-उल-अजहा व रक्षाबंधन के बाद स्वतंत्रता दिवस आने को है

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने नेतृत्व वाली सरकार को अभी भी बहुमत मे बताने के बावजूद पीछले एक पखवाड़े से भी अधिक समय से अपने समर्थक कांग्रेस विधायक व निर्दलीय विधायकों सहित बीटीपी व अन्य दलो के विधायको को जयपुर की आलीशान होटल मे बाड़ेबंदी मे कैद करके जनता के पैसो की बरबादी करते रहने का तात्पर्य समझ से परे है। बहमत अगर है तो चलाओ सरकार ओर विधायको को करे आजाद ताकि कोराना की महामारी व प्रदेश मे रोज एक हजार से अधिक आते मरीजो से छाये खोफ मे अपने क्षेत्र की जनता के मध्य रहकर उनके डर को कम करने की विधायक कुछ ना कुछ कोशिश कर सके। लेकिन गहलोत को विधायको की विश्वसनीयता पर शक होगा कि वो आजाद होते ही उनसे अलग छिटक कर कही विरोधी घड़े से जा ना मिले।

    ऊधर पायलट खेमा भी मुख्यमंत्री गहलोत सरकार के अल्पमत मे आने का दावा तो कर रहे है। लेकिन संख्या बल उनके पास भी ठीक ठाक अभी तक उतना जुट नही पाया है। जितने संख्या बल की उनको जरुरत है। फिर भी पायलट गूट ने गहलोत की कथित लगातार बनाई जाने वाली गांधीवादी छवि को जरूर सबके सामने लाकर गहलोत को केवल पद व सत्तालोलुपता के तौर पर ला खड़ा कर दिया है।

    मुख्यमंत्री गहलोत के पीछे या उनके इशारे पर मतदाताओं का मतदान करना कभी प्रदेश मे देखा नही गया लेकिन कांग्रेस की हाईकमान से हाथ मिलाये रखने के चलते वो तीसरी दफा जनता की इच्छा के विपरीत मुख्यमंत्री बनने मे जरुर कामयाब रहे है। मुख्यमंत्री गहलोत का राजनीतिक प्रभाव का आंकलन तब भी हुवा था जब 1989 के लोकसभा चुनाव मे मुस्लिम समुदाय की नाराजगी के चलते उनके सामने जोधपुर लोकसभा चुनाव मे अब्दुल गनी सिंधी के निर्दलीय/इंसाफ पार्टी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते ही गहलोत चुनाव हार गये। 1989 के उस चुनाव के बाद एक दो दफा को छोड़कर अधिकांश लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस जोधपुर से हार ती आ रही है। अबके लोकसभा चुनाव मे गहलोत ने अपने पुत्र को उम्मीदवार बनाकर जनता पर थोपा तो जनता ने उसे बूरी तरह हराकर बैरंग लोटाया ही नही बल्कि गहलोत की स्वयं की बूथ से पुत्र वैभव को बहुत कम मत देकर उन्हें राजनीति का असल रुप दिखाया था।

    मोजुदा राजनीतिक घटनाटक्रम पर नजर दोड़ाये तो पाते है कि गहलोत केवल मात्र अपने मुख्यमंत्री पद को बचाये रखने के लिये वो सब कुछ ताकत लगाकर कर रहे है, जो वो कर सकते है। जबकि प्रदेश की जनता चाहती है कि मुख्यमंत्री गहलोत रहे या पायलट या फिर दोनो को छोड़कर तीसरे विकल्प को तलासा जाये। लेकिन कांग्रेस सरकार कैसे भी बची रहे। पर कांग्रेस सरकार बचाये रखने मे सबसे बडा रोड़ा गहलोत की मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की जीद आड़े आ रही है।

    कांग्रेस पार्टी की नीतियों अनुसार प्रभारी महामंत्री का कार्य प्रदेश के नेताओं मे ढंग से समनवय बनाये रखकर पार्टी संगठन व सरकार को मजबूती देते रहे। लेकिन प्रभारी महासचिव अविनाश पाण्डे ने विधानसभा चुनाव के पहले तो पायलट की तारीफ करते रहे एवं ज्योही गहलोत मुख्यमंत्री बने तो पाण्डे ने रुख बदल कर केवल गहलोत के प्रति एक पक्षीय रवैया अपनाये रखा जिसका परिणाम आज कांग्रेस विधायकों के खण्डित होने के रुप मे नजर आ रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत ईद-उल-जुहा व रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार से पहले विधानसभा सत्र बूलाकर महुमत सिद्ध करने के बहाने पायलटों समर्थक विधायको की सदस्यता रद्द करवाने की कोशिश मे लगे हुये है। वहीं जरूरत के होटल मे बाड़ेबंदी मे ठहरे गहलोत समर्थको विधायकों ने एक अगस्त को ईद-उल-जुहा व तीन अगस्त को रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहारों पर अपने अपने क्षेत्र मे जाने का दवाब बना रहे बताते है। उसके बाद 15-अगस्त के स्वतंत्रता दिवस को भी सभी विधायक स्वतंत्रता के साथ मनाने की कह रहे है।जबकि गहलोत केवल अपने मुख्यमंत्री पद बचाये रखने के लिये कांग्रेस पार्टी की बली देने पर उतारु है। अभी भी समय है कि कांग्रेस गहलोत-पायलट को छोड़कर अन्य विकल्प पर विचार करे।

  • दरभंगा: डीएमसीएच की लचर व्यवस्था को लेकर इंसाफ मंच ने दिया प्रतिरोध धरना।

    # डीएमसीएच में लचर व्यवस्था से हुई जमाल अतहर रूमी, प्रो उमेश चंद्र और गंगा देवी की वो मौत की उच्चस्तरीय जांच हो- नेयाज अहमद

    दरभंगा, 29 जुलाई

    ‌जमाल अतहर रूमी, प्रोo उमेश चंद्र और गंगा देवी की डीएमसीएच में लापरवाही से हुई मौत मामले को लेकर इंसाफ मंच के बैनर तले किलघाट में इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, पूर्व पार्षद नफिसुल हक रिंकु नफिसुल हक रिंकू, भूषण मंडल, अकरम सिद्दकी व मकसूद आलम” पप्पू खां के नेतृत्व में प्रतिरोध धरना दिया गया। धरना में अकरम सिद्दीकी नफीस उल हक रिंकू रुस्तम कुरैशी रियाज खान कादरी मोहम्मद जमशेद अहमद अली तमन्ना अशोक पासवान राजा पासवान भूषण मंडल लक्ष्मण पासवान मोहम्मद कुर्बान मोहम्मद रेहान रशीदा खातून शनिचरी देवी अनिल पासवान पंचायत समिति, सफीउर रहमान अधिवक्ता मुर्तुजा राईन मनोज पासवान, संतोष यादव, मो जमशेद, मो अशलम, मो आरजू आदि ने शिरकत किया। धरना को सम्बोधित करते हुए इंसाफ मंच के नेयाज अहमद ने कहा कि डीएमसीएच में लापरवाही व लचर व्यवस्था से जमाल अतहर रूमी, प्रो उमेश चंद्र, और गंगा देवी को अपनी जान गवानी पड़ीं हैं।

    और डीएमसीएच अपनी गलती मानने के बदले उल्टे पीड़ित परिवारों पर मुक़दमा कर दिया। पूरे मामले का उच्चस्तरीय जांच व दोषियों पर कार्रवाई किया जाय नहीं तो आंदोलन को तेज करने को बाध्य होंगे। धरना को सम्बोधित करते हुए अकरम सिद्दीकी ने कहा कि डीएमसीएच में हुई इन मौतों के दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर डीएमसीएच की गुंडागर्दी को खत्म करें‌ और मृतक के परिजनों को‌ न्याय दिलाने में अपना भरपूर सहयोग दे। पूर्व पार्षद नफिसुल हक”रिंकू ने कहा कि जिला पार्षद जमाल अतहर रूमी की डीएमसीएच मौत क़ई सवाल खड़े करते हैं। जब रूमी को कोरोना नेगेटिव होने के बाद भी कोरोना मरीज के रूप में उनका ट्रीटमेंट कैसे हुआ इसका जवाब डीएमसीएच को देना होगा। दरभंगा जिला मुहर्रम कमिटी के सचिव रूस्तम कुरैसी ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय देने के बदले उल्टे मुक़दमा करना इंसाफ की हत्या हैं। धरना की अध्यक्षता मो रियाज खान कादरी ने किया।

  • क़ुर्बानी को लेकर पुलिस की मनमानी कार्यवाही पर रोक लगाए सरकार: जमियत उलेमा-ए-हिंद

    *आख़िर किस कानून के अंतर्गत पुलिस प्रशासन बड़े जानवरों की क़ुर्बानी से रोक रही है-? जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष ने उठाया प्रश्न*।

    नई दिल्ली (28 जुलाई 2020)
    जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना क़ारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने देश के विभिन्न भागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में क़ुर्बानी को लेकर ज़िला पुलिस प्रशासन के माध्यम से तानाशाही और अत्याचार किए जाने पर रोष प्रकट किया है और कहा है कि क़ुर्बानी इस्लाम का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक धार्मिक कार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की रुकावट (बाधा) खड़ी न की जाए। उन्होंने बताया कि जमीयत को लिखित तौर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं कि पुलिस जानवरों को पकड़ कर ले जा रही है। और बहराइच, गाज़ीपुर, गाज़ियाबाद आदि में ज़िला प्रशासन ने बड़े जानवरों की क़ुर्बानी पर रोक लगा दी है। इसी तरह से देश के विभिन्न भागों से भी ऐसे ही क़ुरबानी में रुकावटों वाले समाचार प्राप्त हो रहे हैं. प्रश्न यह है कि आख़िर पुलिस ने किस क़ानून के तहत बड़े जानवरों पर प्रतिबंध लगाया है। और वह यह सब किसके इशारे पर कर रही है-? इस संबंध में पुलिस के माध्यम से अत्याचार, बर्बरता और तानाशाही तथा खुलेआम क़ानून का मज़ाक बनाए जाने से जनता में तीव्र असंतोष और रोष पाया जाता है। हम पुलिस के इस तरह के अत्याचारों की घोर निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि सरकारें इन सब पर तुरंत रोक लगाएं। और इस बात को सुनिश्चित बनाया जाए कि मुसलमान पूरी सरलता के साथ क़ुर्बानी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य को पूर्ण कर सकें।

    अध्यक्ष जमीअत उलमा ए हिंद ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और क़ुर्बानी से संबंधित सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है उस पर जनता चल रही है। मुस्लिम नेता तथा संस्थाएं इसके संबंध में लोगों को लगातार जागरुक कर रहे हैं। जहां तक गाइडलाइन की बात है तो इसमें कहीं भी बड़े जानवर की क़ुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं है। अगर पुलिस प्रशासन इससे बढ़कर किसी के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करती है और मनमर्ज़ी के आदेश – नियम थोपती है तो इसके परिणाम बहुत ख़राब और नकारात्मक होंगे।

    अध्यक्ष जमीयत उलमा ए हिंद ने यह चेताया है कि अगर सरकार ने समय रहते क़दम नहीं उठाया तो देश में अशांति और दंगों की परिस्थितियां पैदा हो जाएंगी। और उसकी ज़िम्मेदार सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकार होगी। उन्होंने जमीअत उलमा ए हिंद के कार्यकर्ताओं और ज़िम्मेदारों को भी अवगत कराते हुए निर्देश दिए हैं कि अगर उनके क्षेत्र में क़ुर्बानी को लेकर कोई परेशानी होती है या पुलिस अत्याचार करती है तो आप लिखित रूप में इसकी सूचना जमीयत उलमा ए हिंद के कार्यालय को दें। ताकि जमीयत उलमा ए हिंद के द्वारा सरकार और संबंधित अधिकारियों से मिलकर उस समस्या को हल कराने (समाधान) का पूरा पूरा प्रयत्न किया जाए।

  • पटना:महात्मा गांधी सेतू पश्चिमी लेन बनकर तैयार 31 जुलाई को नितिन गडकरी करेंगे उद्घाटन,जाम से लोगों को मिलेगी राहत

    मुजफ्फर आलम, पटना: पटना के महात्मा गांधी सेतु का पश्चिमी लेन नए अवतार में बनकर तैयार हो गया है और इस पुल पर आम लोग भी 31 जुलाई से अपनी गाड़ियों से आवाजाही कर सकेंगे।
    बिहार के लोगों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को एक सूत्र में बांधने वाला गांधी सेतु पुल एक बार फिर से दुरुस्त होकर, एक नए रंग में दिखाई देने वाला है। महात्मा गांधी सेतु की पश्चिमी लेन बनकर तैयार है और 31 जुलाई से इस पुल पर आम लोग भी अपनी गाड़ियों से आवागमन करते नजर आएंगे। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका उद्घाटन करेंगे।

    लेन को पूरी तरह स्टील से बनाया गया है
    पुराने और जर्जर सुपर स्ट्रक्चर को हटाकर महात्मा गांधी सेतु की नई लेन का निर्माण किया गया है। पश्चिमी लेन पूरी तरह से स्टील से बना है, जो देखने में भी बहुत आकर्षक है। पश्चिमी लेन को बनाने में लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण 3 वर्षों में किया गया था। इस नए लेन के निर्माण में जो कि साढ़े पांच किलोमीटर लंबे है, 45 स्पैन लगाए गए हैं। हालांकि पश्चिमी लेन की सुपर संरचना लोहे की है, लेकिन पुराने पुल के 46 स्तंभों का इसमें उपयोग किया गया है। यह चौड़े स्टील के ट्रबना है जो इसे काफी मजबूत बनाती है।

    नितिन गडकरी 31 जुलाई को करेंगे उद्घाटन
    केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 31 जुलाई को सुबह 11 बजे इसका उद्घाटन करेंगे। नितिन गडकरी का पटना आने का प्लान नहीं है, बल्कि इस नई लेन का उद्घाटन वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करेंगे। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, सुशील मोदी सहित कई नेता शामिल होंगे। आपको बता दें कि इस पुल का निर्माण जो कि 5.575 किलोमीटर लंबी है , 1980 में किया गया था। इसकी शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। जो केवल 30 साल में जर्जर हो गया था।

    एशिया का सबसे लंबा पूल था गांधी सेतु
    एशिया का सबसे लंबा पुल होने का गौरव प्राप्त था महात्मा गांधी सेतु को। इसे देखने दूर-दूर से लोग आते थे, लेकिन इसने 30 सालों में ही अपना दम तोड़ना शुरू कर दिया था। 2014 में, केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए सिरे से गांधी सेतु की मरम्मत के लिए समझौता हुआ। ईस्ट लेन भी अगले महीने बंद हो जाएगी। दोनों लेन के निर्माण के बाद, जेपी सेतु और राजेंद्र पुल से लोड कम होगा और लोगों को जाम से छुटकारा मिल सकेगा।

  • कांग्रेस हाईकमान गहलोत की जीद के आगे नतमस्तक होने की बजाय कांग्रेस सरकार बचाये रखने के विकल्प तलास करे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मध्यप्रदेश की सरकार के तत्तकालीन मुखिया कमलनाथ व दिग्विजय सिंह की जीद का कांग्रेस हाईकमान ने साथ देकर मध्यप्रदेश की सरकार गिरने के बाद राजस्थान सरकार के मुखिया अशोक गहलोत की जीद के आगे भी अब नतमस्तक होकर कांग्रेस हाईकमान को राजस्थान की सरकार गवाने के बजाय सरकार बनी रहने के विकल्प पर मंथन करके सरकार बचाये रखने पर अंतिम फैसला नये विकल्प पर ले लेना चाहिए।

    स्पीकर जौशी द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे दायर एसएलपी को वापस ले लिया है। वही कांग्रेस ने राजस्थान के राजभवन पर आज के प्रदर्शन करने के ऐहलान के बाद वहा प्रदर्शन करना रद्द कर दिया है। राज्यपाल द्वारा कल उक्त कांग्रेस प्रदर्शन को लेकर डीजीपी यादव व मुख्य सचिव राजीव को राजभवन तलब करके इंतजाम के बारे मे पुछने के बाद गहलोत खेमे को अपनी गलती का अहसास होने पर उन्होंने राजभवन की बजाय बाड़ेबंदी मे बंद विधायक वाली होटल मे ही विरोध सभा करने का तय करने से कांग्रेस खेमे मे बैचेनी होना साफ नजर आ रहा है।

    कांग्रेस नेताओं द्वारा बार बार भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने के लिये लोकतांत्रिक मूल्यों का चीरहरण करने के आरोप लगाये जाते रहे है। हो सकता है कि इस आरोप मे कुछ हद तक सच्चाई भी हो। पर मदन दिलावर द्वारा बसपा विधायकों के विलय के खिलाफ स्पीकर सीपी जोशी के यहां लगाई याचिका पर बीना उनका पक्ष जाने उसको निरस्त करने व उस निर्णय की कापी तक उपलब्ध नही करवाने को लोकतंत्र मे कांग्रेस कहा तक जायज मान रही है। जबकि उक्त निर्णय की कोपी तक लेने के लिये विधायक को धरने पर बैठना पड़ रहा है।

    इधर गहलोत मंत्रीमंडल द्वारा विधानसभा का सत्र बूलाने का अधकचरा निवेदन पत्र दो दफा राजभवन भेजनै के बाद राज्यपाल द्वारा कुछ क्योरीज के साथ वापस लोटाने से कांग्रेस रणनीतिकारों की किरकिरी होना देखा जा रहा है। गहलोत खेमे द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटाखटाने पर उन्हे किसी तरह की राहत नहीं मिलते देख रणनीति मे बदलाव करते हुये जनता मे जाकर आंदोलन करने का तय किया बताते है।

    कुल मिलाकर यह है कि अधिकांश विधायक अभी चुनाव मे जाना नही चाहते है। पर गहलोत की चल रही रणनीति से लगता है कि राजस्थान मे बिहार चुनाव के साथ मध्यवर्ती चुनाव हो सकते है। पंखवाड़े से अधिक समय से बाड़ेबंदी मे बंद विधायकों के प्रति उनकी क्षेत्र की जनता मे अंसतोष पनप रहा। असंतोष अगर चरम पर पहुंच गया तो जनता होटल को घेरकर अपने विधायको को बाड़ेबंदी से मुक्त कराने की तरफ भी बढ सकती है। कांग्रेस हाईकमान को पल पल बदलते राजनीतिक हालात पर मंथन करके अशोक गहलोत की जीद के आगे नतमस्तक होने की बजाय सरकार बचाये रखने के विकल्पों पर विचार करना चाहिए।