नई दिल्ली, बिहार टूरिज्म डिपार्टमेंट के अनुसार सुलतान पैलेस इस्लामिक आर्किटेक्चर का श्रेष्ठ उदाहरण है। इसका निर्माण 1922 में किया गया था। जोकि इंडो-इस्लामिक कल्चर को दर्शाता है।
कैबिनेट के फैसले के बाद कहा जा रहा है की जोभी बिल्डर्स आयेंगे उन्हे ये जमीन 45 साल के लिए लीज पर दे दी जाएगी।
कहने का मतलब है की इन सारे धरोहर को तोड़ दिया जाएगा और प्राइवेट लोगों को लीज पर दे दिया जाएगा जिससे बिहार सरकार को पैसे मिलेंगे।
अमिताभ कुमार दास (IAS-1994) बिहार में सीनियर IPS पद पर थे, जिन्हे बिहार सरकार द्वारा इनके काम और ईमानदारी को देखते हुए वक्त से पहले रिटायरमेट दे दिया है।
जब अमिताभ दास ने ये खबर सुनी तो उन्होंने बिहार के राज्यपाल को खत लिखा और खत के ज़रिए उन्हे सुलतान पैलेस धरोहर को तोड़ने से रोकने की बात कही है, उन्होंने कहा कि सुलतान पैलेस जैसे ऐतिहासिक स्थलों को न तोड़ा जाए।
सुलतान पैलेस पटना के बीचोबीच स्थित वीरचंद पटेल पथ पर मौजूद है। सुलतान पैलेस को ‘सर सुलतान अहमद’ ने बनवाया था
सर सुलतान अहमद एक विद्वान थे साथ ही साथ पटना हाई कोर्ट में जज थे, सुलतान अहमद पटना यूनिवर्सिटी के पहले हिंदुस्तानी वाइस चांसलर भी रह चुके हैं।
सर सुलतान अहमद को भारत पाकिस्तान बंटवारे के बाद मुहम्मद अली जिन्ना का प्रस्ताव आया था की आप पाकिस्तान चले आएं आपको पाकिस्तान में कैबिनेट मिनिस्टर बनाया जाएगा।
लेकिन सुलतान अहमद ने ये कह कर कि हिंदुस्तान की मिट्टी में मेरे पूर्वज दफन हैं, और में अपने पूर्वजों को छोड़ कर पाकिस्तान नही आऊंगा।
सुलतान अहमद के द्वारा 1922 में सुलतान पैलेस का निर्माण करवाया था। जिस ज़माने में कलेक्टर की मासिक आय ₹100 हुआ करता था उस वक्त उस धरोहर को बनाने में 3 लाख रुपए की लागत आई थी।
अभी बिहार में जगह-जगह पर अग्निपथ का विरोध चल रहा उस वक्त नीतीश कैबिनेट ने ये फैसला लिया कि सुलतान पैलेस को लीज पर किसी प्राइवेट हाथों में सौंप दिया जाएगा, और फिर इसे तोड़ कर 5 स्टार होटल बनाया जाएगा।
इससे पहले नीतीश कुमार की सरकार ने ही पटना के अशोक राजपथ पर स्थित ‘अंजुमन इस्लामिया हॉल’ को तोड़ डाला था और वहां मार्केट बना दिया गया था।
जंग-ए-आजादी के दौर में अंजुमन इस्लामिया हॉल बड़ी बड़ी सभाओं का गवाह रह चुका है।
इसके बाद खुदा बख्श लाइब्रेरी जैसी जगहों को तोड़ने की बात उठी थी जब इसका काफी विरोध हुआ तब सरकार ने अपने कदम पीछे हटा लिए थे।
अमिताभ दास ने बताया की अगर सुलतान पैलेस को तोड़ने का फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे और लोगों के साथ मिलकर सत्याग्रह करेंगे। इसके बाद भी अगर उनकी बात को नही मानती तो वे पटना हाई कोर्ट में PIL दायर करेंगे, तथा सोशल मीडिया कम्पेन चलाया जाएगा। और उन्होंने बाकी लोगों से भी अनुरोध किया कि सोशल मीडिया के सहारे लोग उनके कम्पेन में शामिल हो सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं।
बता दें कि पहले भी जब खुदा बक्श लाइब्रेरी को तोड़ने की बात उठी थी तब अमिताभ दास ने इसका विरोध किया था साथ ही सिविल सर्विस के कई लोगों ने विरोध जाहिर किया था जिस कारण खुदाबख्श लाइब्रेरी अभी तक सही सलामत है।
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