एर्दोआन के साथ मैर्केल की वार्ता,कहा बहरे रूम पर चल रहे प्रगति कार्य का स्वागत करते हैं

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09 February 2021 (Publish: 11:24 AM IST)

पूर्वी बहरे रूम सागर में ऊर्जा की खोज को लेकर तुर्की ने यूरोपीय संघ को नाराज कर दिया था,लेकिन जर्मन चांसलर का कहना है कि अब बातचीत का समय आगया है।
जर्मन सरकार द्वारा सोमवार 8 फरवरी को जारी एक बयान में कहा गया है कि चांसलर एंजेला मर्केल ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन के साथ बातचीत के दौरान कहा, “पूर्वी बहरे रूम सागर में हाल के सकारात्मक विकास का स्वागत किया है।”
दोनों नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात की, जिसमें मर्केल ने कहा “अब बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ने का समय आगया है।”
तुर्की ने कब्रस और यूनान के तटों से विवादित पानी में तेल और गैस के भंडार की खोज शुरू कर दी थी, जिसपर कब्रस और यूनान दोनों अपना अपना दवा करते हैं । तुर्की भी इस पानी पर दावा करता है और इससे यूरोपीय संघ के साथ तुर्की के संबंध और खराब हो गए थे।

गैस के भंडार की तलाश

पूर्वी बहरे रूम सागर में कब्रस के तट पर पानी को लेकर तुर्की और यूनान के बीच विवाद काफी पुराना रहा है। हालांकि, तुर्की ने पिछले साल अगस्त में इस क्षेत्र का पता लगाने के लिए एक जहाज भेजा था। यूरोपीय संघ ने तुर्की के इस कदम चेतावनी दी थी , लेकिन तुर्की ने इसे अनदेखा कर दिया था ।
पिछले साल दिसंबर में यूरोपीय संघ के सदस्यों ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान भी किया था। यूरोपीय संघ ने तुर्की पर एकतरफा भड़काऊ कार्रवाई करने और यूरोपीय संघ के खिलाफ अपनी बयानबाजी बढ़ाने का आरोप लगाया है।

पूर्वी भूमध्य सागर में साइप्रस के तट पर पानी को लेकर तुर्की और ग्रीस के बीच विवाद काफी पुराना है। हालांकि, तुर्की ने पिछले साल अगस्त में इस क्षेत्र का पता लगाने के लिए एक जहाज भेजा था। यूरोपीय संघ (ईयू) ने तुर्की को संयम की चेतावनी दी है, लेकिन तुर्की ने इसे अनदेखा कर दिया है।
पिछले साल दिसंबर में यूरोपीय संघ के सदस्यों ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान किया था। यूरोपीय संघ (ईयू) ने तुर्की पर एकतरफा भड़काऊ कार्रवाई करने और ब्लाक के खिलाफ अपनी बयानबाजी बढ़ाने का आरोप लगाया है
यूरोपीय संघ ने तुर्की पर आर्थिक प्रतिबंधों को खारिज कर दिया है, कहा है कि 25 और 26 मार्च को यूरोपीय संघ की अगली बैठक में कड़े प्रतिबंधों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

नई शुरुआत

जब यूरोपीय संघ ने प्रतिबंधों की धमकी दी थी,तो एर्दोआन ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया था । हालांकि अब , उनके शब्द पहले की तरह कठोर नहीं हैं। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने भी अपने दावे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की कि वह विवाद को हल करने में “एक नई शुरुआत करेंगे”।
पूरे यूरोप में तुर्कों की सबसे बड़ी आबादी जर्मनी में है, और इसलिए जर्मनी ने बार-बार विभिन्न विवादास्पद मुद्दों पर यूरोपीय संघ और तुर्की के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण 2016 शरणार्थी समझौता है, जिसके तहत तुर्की ने अवैध प्रवासियों को यूरोप में प्रवेश करने से रोक दिया है।

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