लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में जानलेवा हमला

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12 August 2022 (Publish: 04:53 PM IST)

नई दिल्ली, भारतीय मूल के ब्रिटिश-अमेरिकी लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में जानलेवा हमला हुआ है। न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस के मुताबिक, सुबह 11 बजे चौटाउक्वा इंस्टीटयूशन में हमलावर तेजी से मंच पर दौड़ा और सलमान रुश्दी और इंटरव्यूअर पर चाकू से हमला कर दिया। चाकू रुश्दी के गर्दन पर लगी है।

वहीं इंटरव्यूअर के सिर पर हल्की चोट आई है। सलमान रुश्दी वहीं है जिसने नबी की शान में गुस्ताखी की थी, उसने एक नॉवेल लिखा था जिसमें इस्लाम और नबी के बारे में अपमान किया था।

रुश्दी को एयर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया है। उनकी स्थिति को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नही दी गई है। हमलावर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसकी उम्र 25 साल के आसपास बताई जा रही है। हमले की वजह अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, उनकी किताबों को लेकर उन्हें कई बार फतवा भी जारी हो चुका है। हमले को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

रुश्दी का जन्म मुंबई में हुआ था। ‘द सैटेनिक वर्सेस’ और ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ जैसी किताबें लिख कर चर्चा में आए रुश्दी को बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ‘सैटेनिक वर्सेस’ के लिए उन्हें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के फतवे का सामना करना पड़ा था।

75 साल के सलमान रुश्दी ने अपनी किताबों से दुनिया भर में पहचान बनाई। अपने दूसरे ही उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ के लिए 1981 में ‘बुकर प्राइज’ और 1983 में ‘बेस्ट ऑफ द बुकर्स’ पुरस्कार से सम्मानित किए गए। रुश्दी ने लेखक के तौर पर शुरुआत 1975 में अपनी पहली नॉवेल ‘ग्राइमस’ के साथ की थी। 75 साल के सलमान रुश्दी ने अपनी किताबों से दुनिया भर में पहचान बनाई। अपने दूसरे ही उपन्यास ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ के लिए 1981 में ‘बुकर प्राइज’ और 1983 में ‘बेस्ट ऑफ द बुकर्स’ पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

रुश्दी ने लेखक के तौर पर शुरुआत 1975 में अपनी पहली नॉवेल ‘ग्राइमस’ (Grimus) के साथ की थी। ‘द सैटेनिक वर्सेस’ सलमान रुश्दी का चौथा नॉवेल है। भारत और दुनिया के कई देशों में यह नॉवेल बैन है। यह नॉवेल 1988 में प्रकाशित हुआ था, जिस पर पर काफी विवाद हुआ था। सलमान की इस नॉवेल में नबी का अपमान किया गया है। इस किताब का शीर्षक एक विवादित मुस्लिम परंपरा के बारे में है।

इस परंपरा के बारे में रुश्दी ने अपनी किताब में खुल कर लिखा। किताब को कई मुस्लिम देशों में बैन कर दिया गया था। इसके प्रकाशन के बाद ही रुश्दी को मौत की धमकी मिली और ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी ने उनके लिए फतवा जारी कर दिया था। इस नॉवेल के जापानी अनुवादक हितोशी इगाराशी की हत्या कर दी गई थी, जबकि इटैलियन अनुवादक और नॉर्वे के प्रकाशक पर भी हमले हुए।

 

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