नई दिल्ली, सोशल मीडिया पर 10 साल के एक लड़के का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी गोद में दो साल के भाई का शव नजर आ रहा है। इस वीडियो को देखने के बाद लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ काफी गुस्सा है।
10 साल के इस लड़के का नाम सागर कुमार है। यह मामला यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है। जहां एक बच्चे को अपने भाई का शव लेने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली। पुलिस के अनुसार, दो साल के बच्चे कला कुमार की शुक्रवार को उसकी सौतेली मां सीता ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी।
दिल्ली सहारनपुर हाइवे पर बैंक के पास रोते हुए मासूम को चुप ना करा पाने पर महिला ने बच्चे को कार के आगे धक्का दे दिया। कार की टक्कर से मासूम की मौत हो गई थी। बागपत के सर्कल अधिकारी देवेंद्र कुमार शर्मा ने कहा, स्थानीय लोगों ने हमें सूचित किया, जिसके बाद महिला के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
लड़के के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव उसके पिता प्रवीण कुमार को सौंप दिया गया, जो शामली जिले में दिहाड़ी मजदूर हैं। प्रवीण के साथ उसका रिश्तेदार रामपाल और उसका बेटा सागर भी था। रामपाल ने आरोप लगाया कि प्रवीण ने बार-बार एक स्वास्थ्य अधिकारी से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। लेकिन उसके अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
यूपी के बागपत में 10 साल के लड़का को नहीं मिली एंबुलेंस, अपने दो साल के भाई का शव हाथ में उठाकर ले गया। pic.twitter.com/Ps7U1x1yJL
— Public Face (@publicfacetv) August 29, 2022
ये पहली बार नहीं है जब इस तरह की तस्वीर सामने आई हो, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से तो लगभग हर महीने ही ऐसी खबरें सामने आती रहती है। कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ऐसी ही मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई थी। जहां अस्पताल से एम्बुलेंस नहीं मिलने पर बेबस पिता को भारी बारिश के बीच बेटे का शव कंधे पर रखकर कई किलोमीटर तक पैदल जाने पर मजबूर होना पड़ा था।
बता दें कि पीड़ित बजरंगी यादव के बेटे शुभम को बिजली का करंट लगने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पीड़ित पिता ने बताया कि उन्होंने एम्बुलेंस के लिए अस्पताल के कर्मचारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने इसके बदले पैसे की मांग की, जो वह अदा करने में समर्थ नहीं थे। मजबूरन उन्हें अपने कंधे पर ही बेटे का शव लेकर चलना पड़ा।
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