पटना:महात्मा गांधी सेतू पश्चिमी लेन बनकर तैयार 31 जुलाई को नितिन गडकरी करेंगे उद्घाटन,जाम से लोगों को मिलेगी राहत

मुजफ्फर आलम, पटना: पटना के महात्मा गांधी सेतु का पश्चिमी लेन नए अवतार में बनकर तैयार हो गया है और […]

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28 July 2020 (Publish: 05:06 PM IST)

मुजफ्फर आलम, पटना: पटना के महात्मा गांधी सेतु का पश्चिमी लेन नए अवतार में बनकर तैयार हो गया है और इस पुल पर आम लोग भी 31 जुलाई से अपनी गाड़ियों से आवाजाही कर सकेंगे।
बिहार के लोगों के लिए अच्छी खबर है। उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को एक सूत्र में बांधने वाला गांधी सेतु पुल एक बार फिर से दुरुस्त होकर, एक नए रंग में दिखाई देने वाला है। महात्मा गांधी सेतु की पश्चिमी लेन बनकर तैयार है और 31 जुलाई से इस पुल पर आम लोग भी अपनी गाड़ियों से आवागमन करते नजर आएंगे। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका उद्घाटन करेंगे।

लेन को पूरी तरह स्टील से बनाया गया है
पुराने और जर्जर सुपर स्ट्रक्चर को हटाकर महात्मा गांधी सेतु की नई लेन का निर्माण किया गया है। पश्चिमी लेन पूरी तरह से स्टील से बना है, जो देखने में भी बहुत आकर्षक है। पश्चिमी लेन को बनाने में लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण 3 वर्षों में किया गया था। इस नए लेन के निर्माण में जो कि साढ़े पांच किलोमीटर लंबे है, 45 स्पैन लगाए गए हैं। हालांकि पश्चिमी लेन की सुपर संरचना लोहे की है, लेकिन पुराने पुल के 46 स्तंभों का इसमें उपयोग किया गया है। यह चौड़े स्टील के ट्रबना है जो इसे काफी मजबूत बनाती है।

नितिन गडकरी 31 जुलाई को करेंगे उद्घाटन
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 31 जुलाई को सुबह 11 बजे इसका उद्घाटन करेंगे। नितिन गडकरी का पटना आने का प्लान नहीं है, बल्कि इस नई लेन का उद्घाटन वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करेंगे। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, सुशील मोदी सहित कई नेता शामिल होंगे। आपको बता दें कि इस पुल का निर्माण जो कि 5.575 किलोमीटर लंबी है , 1980 में किया गया था। इसकी शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी। जो केवल 30 साल में जर्जर हो गया था।

एशिया का सबसे लंबा पूल था गांधी सेतु
एशिया का सबसे लंबा पुल होने का गौरव प्राप्त था महात्मा गांधी सेतु को। इसे देखने दूर-दूर से लोग आते थे, लेकिन इसने 30 सालों में ही अपना दम तोड़ना शुरू कर दिया था। 2014 में, केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए सिरे से गांधी सेतु की मरम्मत के लिए समझौता हुआ। ईस्ट लेन भी अगले महीने बंद हो जाएगी। दोनों लेन के निर्माण के बाद, जेपी सेतु और राजेंद्र पुल से लोड कम होगा और लोगों को जाम से छुटकारा मिल सकेगा।

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