Category: खास ख़बरें

  • तबरेज मॉब लिंचिंग: पत्नी ने कहा-आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करो नहीं तो कर लूंगी आत्महत्या

    बरेज अंसारी मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया. तबरेज की पत्नी एस परवीन ने धमकी दी है कि अगर आरो‌पियों पर हत्या (Murder) का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया तो वो आत्महत्या (Suicide) कर लेंगी. शाइस्ता परवीन परिजन के साथ कलक्‍ट्रेट पहुंचकर डीसी ए दोड्डे से मुलाकात की. उन्‍होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है. शाइस्‍ता ने इस मामले में आवेदन देकर पोस्टमार्टम, विसरा और SIT रिपोर्ट की कॉपी मांगी है. डीसी ने उन्हें एसपी से मुलाकात कर इन रिपोर्ट्स की कॉपी लेने के लिए कहा है..

    शाइस्ता परवीन ने आवेदन में कहा कि तबरेज अंसारी की मौत ग्रामीणों की पिटाई और पुलिस और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हुई. ऐसे में आगे की कार्रवाई के लिए परिवार को पोस्टमार्टम, विसरा एवं एसआईटी रिपोर्ट की जरूरत है. उसने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने इस मामले में धारा 302 को हटाकर धारा 304 के तहत गलत ढंग से कोर्ट में चार्जशीट पेश की है. परवीन ने बताया कि इस सिलसिले में पहले भी आवेदन कर रिपोर्ट की मांग की गई थी लेकिन वह अब तक नहीं दी गई है.

    बता दें कि इस मामले में तब नया मोड़ आया जब चार्जशीट में सभी 11 आरोपियों के ऊपर से धारा 302 को हटाकर धारा 304 लगाई गई. तबरेज की पत्नी शाइस्ता ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि दबाव के चलते आरोपियों पर लगी धाराओं में बदलाव किया गया. हालांकि, जिले के एसपी एस कार्तिक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या का मामला नहीं बनता था, इसलिए आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट फाइल की गई है.

    भीड़ ने पोल से बांधकर रात भर पीटा था
    गौरतलब है कि 17 जून की रात को तबरेज अंसारी झारखंड के जमशेदपुर में अपने रिश्तेदार के घर से सरायकेला-खरसावां स्थित अपने गांव कदमडीहा लौट रहा था. इस दौरान रास्ते में धातकीडीह गांव में ग्रामीणों ने चोरी के आरोप में उसे पकड़ लिया और पोल से बांधकर रात भर उसकी पिटाई की. कथित रूप से उससे ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे भी लगवाए गए. ग्रामीणों ने रात भर पीटने के बाद अगले दिन सुबह उसे पुलिस के हवाले कर दिया था.

    पुलिस ने घायल तबरेज का इलाज सदर अस्पताल में कराया, फिर शाम को उसे जेल भेज दिया गया था. इसके चार दिन बाद 22 जून की सुबह दोबारा तबरेज अंसारी को जेल से गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया था. साथ ही खरसावां थाना प्रभारी और सिनी ओपी प्रभारी को ड्यूटी में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया था. मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था

    input: news 18

  • दिल्ली में फिर लागू होगा ऑड-ईवन फॉर्मूला, अरविंद केजरीवाल ने की घोषणा

    दिल्‍ली में इस साल फिर वाहनों के लिए ऑड ईवन फॉर्मूला लागू किया जा रहा है। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा करते हुए बताया कि दिल्‍ली में इस साल 4 नवंबर से लेकर 15 नवंबर के बीच ऑड ईवन फॉर्मूला लागू किया जा रहा है। यह ऑड ईवन 12 दिनों के लिए लागू होगा। इसके तहत दिल्‍ली में 6 दिन ईवन नंबर वाली गाडि़यां और शेष 6 दिन ऑड नंबर वाली गाडि़यां सड़कों पर प्रतिबंधित रहेंगी।

    अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली के प्रदूषण में 25 फीसदी कमी आई है। दिल्ली की इकलौता ऐसा शहर है, जहां प्रदूषण बढ़ने के बजाय कम हो रहा है लेकिन हमें प्रदूषण और कम करना है। हमें पराली जलाने और सर्दियों की वजह से होने वाले स्मॉग से निपटने के लिए भी तैयारियां करनी हैं”

    मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिवाली के वक्‍त हर साल दिल्‍ली में प्रदूषण का स्‍तर काफी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों से अपील है कि दिल्‍ली की सेहत को देखते हुए लोगों से अपील है दिल्‍ली में इस बार पटाखें न चलाएं। इसी के साथ मुख्‍यमंत्री ने घोषणा की है कि इस बार अक्‍टूबर में दिल्‍ली के लोगों को सरकार की ओर से मास्‍क बांटे जाएंगे।

    अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हमने प्रदूषण से निपटने के लिए सात सूत्री कार्य योजना की घोषणा की है। जिसमें सम-विषम, प्रदूषण मॉस्क, कम्यूनिटी दिवाली लेजर शो, एनवॉयरमेंट मार्शल, हॉटस्पॉट कट्रोल, डस्ट कंट्रोल, ट्री चैलेंज शामिल शामिल हैं।

    उन्होंने इस बात की जानकारी भी दी कि पराली सीजन के बाद विंटर एक्शन प्लॉन लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम-विषम और कम्यूनिटी दिवाली सेलिब्रेशन के अलावा सभी उपाय सर्दियों के मौसम में जारी रहेंगे।

  • भारत में मुस्लिम विवाह को आसान बनाने के लिए Nikah Forever साईट का किया गया आगाज

    मिल्रत टाइम्स,नई दिल्ली:आज के समय में मैट्रिमोनियल साइट्स पर अपने आदर्श मैच को खोजने के लिए सही प्रोफाइल खोजने से लेकर हर चीज को अंतिम रूप देना बहुत कठिन हो गया है। भारत में मुस्लिम-विवाह कई सारी परंपराओं से भरा हुआ हैं तथा परिवार और नैतिकता से प्रेरित हैं। इसलिए, एक वास्तविक मुस्लिम वैवाहिक स्थल की उपस्थिति भारतीय मुस्लिम समाज के लिए आज के समय की आवश्यकता है। मुस्लिम भाइयों और बहनों को अपने धर्म की सीमाओं के भीतर रहते हुए अपने आदर्श मैच को देखने के लिए एक मुस्लिम-केंद्रित मंच की आवश्यकता है।

    अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया हमदर्द के पूर्व छात्र श्री हम्माद रहमान ने इसे समाज के लिए अत्यंत आवश्यकता के रूप में महसूस करते हुए, भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम वैवाहिक वेबसाइट निकाह- फ़ॉरएवर (*Nikah Forever*) की स्थापना की है। उन्होंने अपने मिशन स्टेटमेंट को ‘Your Forever is our Priority’ कहकर प्राथमिकता दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसा कि पैगंबर मोहम्मद(PBUH) द्वारा बताया गया है कि इस्लाम में शादी आपके धार्मिक दायित्वों को पूरा करने का प्रवेश द्वार है। माशा अल्लाह! इस सोच के साथ, इस स्टार्ट-अप का अंतर्निहित उद्देश्य मुस्लिम भाई बहनों को सही मैच खोजने में मदद करना है। इस विचार को हकीकत में बदलने के लिए, वह Nikah Forever की दृष्टि के साथ आया, जो कि एक ऐसी जगह है जहाँ सबलोग एकमत होकर अल्हम्दुलिल्लाह का पाठ करेंगे और अपने आने वाले कल में ख़ुशहाल जीवन व्यतीत करेंगे।

    NikahForever.com एक डिजिटल वैवाहिक मंच है जो प्रामाणिकता, नैतिकता और विश्वास की नींव पर आधारित है। 2018 में स्थापित इस मंच में पहले से ही 6,000 से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या मौजूद है। यह दिल्ली में स्थित है और भारतीय मुसलमानों की वैवाहिक जरूरतों को पूरा करने के एकमात्र उद्देश्य से चलाया जा रहा है। यह मंच समझता है कि दो परिवारों के लिए एकजुट होना और एक नई शुरुआत करना कितना महत्वपूर्ण है। इस चीज़ को नज़र में रखते हुए हर पंजीकृत उपयोगकर्ता के साथ संबंध पारदर्शिता पर आधारित है।

    दिल्ली स्थित इस मंच का असल मक़सद न्यूनतम लागत पर सभी के लिए वैवाहिक सेवा लाने पर केंद्रित है। अन्य वैवाहिक साइटों के विपरीत, पंजीकरण बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के भुगतान की आवश्यकता के सरल चरणों में किया जा सकता है। श्री हम्माद का मत है कि प्रत्येक मुसलमान को इस वैश्विक वैवाहिक नेटवर्क का हिस्सा बनने का समान अवसर मिलना चाहिए। क्योंकि, आप कभी नहीं जानते कि कौन आपको किस समय और किस जगह पर आदर्श लगता है। उम्र, राज्य और वरीयताओं जैसे फिल्टर के साथ वांछित प्रोफाइल के साथ खोज और जुड़ने के लिए वेबसाइट आसान एल्गोरिदम का उपयोग करती है।

    NikahForever.com भविष्य-उन्मुख है इसलिए यह गुणवत्ता-सिद्ध और साथ ही अपने ग्राहकों के साथ परिचालन-कुशल जुड़ाव सुनिश्चित करता है।

    यह मंच डेटाबेस की बड़ी मात्रा को बनाए रखने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ब्लॉक-चेन तकनीक का उपयोग करता है। गोपनीय जानकारी रखने की ज़िम्मेदारी के साथ, NikahForever अपने क्लाइंट के बायोडाटा को सबसे निजी लॉकर में रखता है। आपके पास व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ के लिए आपकी व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने की कोई छिपी नीति नहीं है। श्री हम्माद ने वेबसाइट का डिज़ाइन और विकल्प बहुत कम और सरल रखा है। NikahForever में एक ग्राहक-अनुकूल इंटरफेस है। यह आपके फोन या लैपटॉप पर ज्यादा जगह नहीं लेता है और अच्छी गति से काम करता है। विकल्पों की व्याख्या करना आसान है और आप एक पृष्ठ से दूसरे पृष्ठ पर परेशानी मुक्त होकर जा सकते हैं।

    गोपनीयता और सुरक्षा

    अधिकांश मुस्लिम महिलाएं अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर की गोपनीयता के बारे में चिंतित हैं। यह एक चुनौती है क्योंकि अन्य वैवाहिक साइटें मुस्लिम महिलाओं की गोपनीयता के मुद्दों के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं हैं। हालांकि, NikahForever.com हया को मुस्लिम महिलाओं के प्रमुख और सबसे सुंदर लक्षणों में से एक के रूप में महसूस करता है। इस कारण से, महिलाओं की प्रोफ़ाइल तस्वीर की गोपनीयता महिला उपयोगकर्ताओं के लिए पवित्रता और पवित्रता बनाए रखती है। उपयोगकर्ता द्वारा इच्छुक परिवार के संपर्क में रहने पर और तस्वीर साझा करने के लिए सहज होने पर इसे बाद में व्यक्तिगत सेटिंग्स में बदला जा सकता है। इस मंच पर सूचनाओं को अद्यतन करने और नए प्रोफाइलों पर नज़र रखने के लिए लगातार प्रोफाइल की निगरानी की नीति है। यह निर्दोष परिवारों को ब्लैकमेलिंग और साइट के दुरुपयोग से बचने के लिए किया जाता है। साइट केवल प्रामाणिक पहचान प्रमाण और पृष्ठभूमि की जांच पर काम करती है। साइट पर पंजीकृत हर मुस्लिम भाई और बहन की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी है।

    ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया की उपस्थिति

    मंच में रचनात्मक लेखकों का एक उच्च-कार्य समूह है, जो वास्तव में जानता है कि शादी के समय मुस्लिम दूल्हा और दुल्हन कैसा महसूस करते हैं। ये लेखक अपने ब्लॉग की समृद्धि में योगदान करते हैं जो इस्लाम के आलोक में मुस्लिम विवाह की बात करता है।

    श्री हम्माद एक स्व-प्रेरित व्यक्ति हैं जो वैश्विक रूप से NikahForever.com को सबसे बड़े मुस्लिम वैवाहिक स्थल बनाने का इरादा रखते हैं। वह आशावादी है और आशा करते है कि आपको वह खुशी प्रदान करे जो आप अपने लिए देख रहे हैं। उनका मानना ​​है, “जब अल्लाह दो लोगों को एकजुट करना चाहता है, तो इस पृथ्वी पर कोई भी बल उन्हें अलग नहीं कर सकता है। यह एक सबक है जो हम सभी अंततः सीखते हैं। ”उन्होंने Nikah Forever Muslim Matrimony के साथ उस खाई को पाटने का लक्ष्य रखा है जो वादे किए गए हैं।

  • ममता बनर्जी ने कहा कि अगर भाजपा ने NRC के नाम पर बंगाल में एक भी व्यक्ति को छुआ, तो हम उन्हें सबक सिखा देंगे.

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर एक बार फिर बीजेपी पर हमला बोला है. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आगाह किया कि वह NRC के नाम पर ‘आग से नहीं खेले.’ बता दें कि असम में जारी NRC के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री आज सड़कों पर उतरीं. जुलूस में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता, मंत्री और कार्यकर्ता भी शामिल हुए. TMC का कहना है कि बंगाल की जनता राज्य में एनआरसी लागू नहीं होने देगी. इससे पहले एनआरसी के ख़िलाफ़ तृणमूल ने 7 और 8 सितंबर को भी ज़िलों में विरोध प्रदर्शन किया था.

    तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ने भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के नाम पर पश्चिम बंगाल के एक भी नागरिक को ‘छू कर दिखाने की चुनौती दी.’ एनआरसी के विरोध में निकाली गई रैली में उन्होंने कहा, ‘हम बंगाल में एनआरसी को कभी इजाजत नहीं देंगे. हम उन्हें धार्मिक एवं जातिगत आधार पर लोगों को बांटने की इजाजत नहीं देंगे. हम असम में एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर असम के लोगों को चुप कराया है, लेकिन वे बंगाल को चुप नहीं करा सकते..

    ममता के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी रिएक्शन आया. पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने कहा कि बंगाल में भी एनआरसी को लागू करेंगे और घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाएंगे. उन्होंने ममता सरकार पर बांग्लादेशी मुसलमानों को बचाने का भी आरोप लगाया. दिलीप घोष ने कहा, ‘ममता बनर्जी सरकार बंगाल में एक करोड़ से अधिक बांग्लादेशी मुसलमानों, रोहिंग्या को बचा रही है.

  • Ayodhya Case : मुस्लिम पक्ष ने कहा-यूपी के मंत्री कह रहे अयोध्या हिंदुओं की, सुप्रीम कोर्ट भी उनका; CJI ने की निंदा

    मुस्लिम योध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले (Ayodhya Case) में 22 वें दिन मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पक्ष रखा. राजीव धवन ने मुख्य मामले की सुनवाई से पहले अपनी कानूनी टीम के क्लर्क को धमकी  दिए जाने की जानकारी कोर्ट को दी और कहा कि ऐसे गैर-अनुकूल माहौल में बहस करना मुश्किल हो गया है. राजीव धवन ने कोर्ट को बताया कि यूपी में एक मंत्री ने कहा है कि अयोध्या हिंदुओं की है, मंदिर उनका है और सुप्रीम कोर्ट भी उनका है. उन्होंने कहा कि ‘मैं अवमानना के बाद अवमानना दायर नहीं कर सकता.’ उन्होंने पहले ही 88 साल के व्यक्ति के खिलाफ अवमानना दायर की है.

    इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के बाहर इस तरह के व्यवहार की निंदा करते हैं. देश में ऐसा नहीं होना चाहिए. हम इस तरह के बयानों की निंदा करते हैं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दोनों पक्ष बिना किसी डर के अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखने के लिए स्वतंत्र हैं.

    इससे बाद राजीव धवन ने मुख्य मामले पर बहस की शुरुआत की. राजीव धवन ने कहा कि  मुस्लिम लिमिटेशन पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि निर्मोही अखाड़े की लिमिटेशन छह साल होनी चाहिए थी. छह साल की अवधि से बचने के लिए निर्मोही अखाड़ा शेवियेट, बिलांगिंग और कब्जे की दलील दे रहा है, जो कि सही नहीं है, क्योंकि निर्मोही सिर्फ सेवादार है, जमीन के मालिक नहीं हैं.

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि निर्मोही अखाड़े द्वारा प्रस्तुत वाद के चलाए जाने की योग्यता के बारे में प्रश्न उठाया जा सकता है. धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा किस बात को चुनौती दे रहे थे, वह क्या चाहते थे, लेकिन इस मसले को उठाना मेरे लिए सही नहीं होगा. राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही के मामले में साक्ष्य और गवाही पर्याप्त नहीं हैं. धवन ने कहा कि आप अवैधता के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर सकते और उससे लाभ देने की कोशिश नहीं कर सकते, भले ही आप अवैधता पैदा न करें, फिर भी आप उस पर विश्वास नहीं कर सकते..

    राजीव धवन ने कहा कि ट्रस्टी और सेवादार में अंतर होता है शेवियत मालिक नहीं होता है. जिस दिन से कोर्ट का ऑर्डर आया, यानी 5 जनवरी 1950 को, उस दिन से कंटिनिवस रांग खत्म हो जाता है. निर्मोही अखाड़े ने अगर समय से पहले, यानी छह साल पहले अखाड़े ने रिसीवर नियुक्त करने को चुनौती दी होती तो ठीक था, लेकिन निर्मोही अखाड़े ने छह साल की तय समय सीमा के बाद चुनौती दी, इसलिए निर्मोही अखाड़े का दावा नहीं बनता. इनकी याचिका खारिज की जानी चाहिए.

    राजीव धवन ने कहा कि एक ट्रस्ट या ट्रस्टी के विपरीत शेबेट के अधिकार का दावा नहीं कर सकता. सन 1934 के बाद से मुस्लिमों ने वहां पर प्रवेश नहीं किया, लेकिन जब आप उन्हें प्रवेश नहीं करने देंगे तो वे इबादत कैसे करेंगे? निर्मोही अखाड़े का जो शेवियेट, यानी सेवादार का दावा है, उसको हम सपोर्ट करते हैं, लेकिन इनका टाइटल राइट नहीं बनता.अगर निर्मोही अखाड़े को सेवादार का अधिकार है, मान भी लिया जाए कि सेवादार का अधिकार पीढ़ियों तक चलता है, तो फिर प्रॉपर्टी का मालिक कौन है, क्या नेक्स्ट फ्रेड को माना जाएगा, फिर निर्मोही अखाड़े को सेवादार से हटाने का डर कैसा, कौन मालिक या ट्रस्टी है..

    मामले में शुक्रवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से जफरयाब जिलानी बहस करेंगे उसके बाद फिर से राजीव धवन बहस करेंगे..

    input:ndtv

  • आजम खान की कम नहीं हो रहीं मुसीबतें, अब लगा बकरी चोरी का आरोप- महिला ने दर्ज कराई FIR

    समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam khan) की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. रामपुर से एमपी आज़म खान पर अब बकरी चोरी का भी मुक़दमा दर्ज हो गया है. रामपुर में एक महिला ने आजम खान के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज करवाया है. महिला का आरोप है कि आज़म खान के कहने पर  उनके आदमियों ने उसके घर से तीन भैसे, एक गाय, एक बछड़ा और चार बकरियां लूट लीं. जानवर लूट के ले जाते वक़्त वह कह रहे थे कि सब जानवर आजम खान की गौशाला को दिए जाएंगे..

    महिला का आरोप है कि जानवर लूटने वालों में शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी, सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी, उस वक़्त के सीओ आले हसन और बीस पच्चीस और लोग शामिल थे. इन लोगों ने चार तोले का हार, कान के बूंदे, सोने की अंगूठी, और एक पायल भी लूट ली..

    एफआईआर लिखाने वाली नसीमा खातून नाम की महिला का कहना है की वह अपने परिवार के साथ वक़्फ़ के यतीमखाने में रहती थी. उसका भैस और बकरी पालने और बेचने का कारोबार था. 15 अक्टूबर 2016 को सुबह क़रीब 4.30 बजे आज़म खान ने साज़िश के तहत अपने इन लोगों को मेरे घर भेजा. इनमें शामिल शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ज़ुफर फारूकी ने मेरे पति को बुरी तरह मारा-पीटा, जिससे वह काफी जख्मी हो गए. इन लोगों ने मेरे घर का सारा सामान तोड़ डाला और घर के ऊपर बुलडोज़र चलवा दिया. इनका कहना था की वहां आजम खान का स्कूल बनने वाला है. जब हमलोगों ने विरोध किया तो इन्होंने कहा कि अगर विरोध किया तो घर में चरस रखने का मुक़दमा करवा कर जेल भिजवा देंगे. जब मैं इस मामले की एफआईआर लिखवाने गई तो पुलिस ने थाने से मुझे डांट कर भगा दिया.

    पुलिस ने इस मामले में आज़म खान समेत आठ लोगों के खिलाफ नामजद और 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ दफा 452, 427, 389, 395, 448, 304, 506 और 120 बी के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया है. आज़म खान पर पिछले कुछ वक़्त में 80 से ज़्यादा मुक़दमे क़ायम हो चुके हैं. इनमें ज़मीन क़ब्ज़ा करने, किताब चोरी, बिजली चोरी और गाय भैंस और बकरी चोरी तक मुक़दमे हैं. सरकार ने उन्हें भू माफिया भी घोषित कर दिया है.

    Input:ndtv

  • पाकिस्तान के सिख विधायक भारत आए : मांगी मोदी से राजनितिक शरण

    बलदेव ख़ैबर पख़्तूख़्वाह प्रांतीय एसेंबली के सदस्य थे.

    भारतीय राज्य पंजाब आकर उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान के पंजाब में ‘अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है’ और बाक़ी समुदाय के लोग भी सुरक्षित नहीं है.

    बलदेव कुमार ने कहा, “सिर्फ़ अल्पसंख्यक ही नहीं, मुसलमान भी वहां सुरक्षित नहीं है. मैं भारत सरकार से गुज़ारिश करता हूं कि वो मुझे यहां आश्रय दे. मैं वापस नहीं जाऊंगा.”

    बलदेव कुमार फ़िलहाल पंजाब के खन्ना में रह रहे हैं. वो कहते हैं कि उन्हें पाकिस्तान में रह रहे सिखों की हालत और सुरक्षा की चिंता है.

    भारत से शरण मांग रहे बलदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुज़ारिश की है कि वो पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख परिवारों की स्थिति पर ध्यान दें.

    बलदेव कुमार ने कहा, “भारत सरकार को पाकिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख परिवारों के लिए एक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए. मैं चाहता हूं मोदी जी उनके लिए कुछ करें, वो वहां प्रताड़ित हो रहे हैं.”

    बलदेव ने भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद्दे को तूल देने के लिए भी पाकिस्तान की आलोचना की.

    उधर पाकिस्तान के स्वात में रह रहे बलदेव सिंह के भाई और पार्षद तालिक कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें तो मीडिया के ज़रिए पता चला कि उनके भाई ने भारत में राजनीतिक शरण मांगी है.

    तालिक ने कहा कि उनके भाई की बेटी थैलेसेमिया से पीड़ित है और वो उसी का इलाज कराने के लिए भारत गए थे. तालिक ने कहा कि उनके भाई के बारे में जानकर उन्हें काफ़ी निराशा हुई.

    तालिक कुमार का कहना था, ”हमारा पूरा परिवार पाकिस्तान में रहता है. ये हमारा मुल्क है. बलदेव कुमार का जन्म भी यहीं हुआ है. हमें यहां आज तक कभी कोई परेशानी नहीं हुई.”

    ख़ैबर पख़्तूख़्वाह प्रांत के सूचना मंत्री और प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शौकत यूसुफ़ज़ई ने कहा कि जैसे ही पार्टी को पता चला कि बलदेव सिंह पीटीआई के ही एक दूसरे विधायक सोरन सिंह की हत्या के अभियुक्त हैं पार्टी ने उन्हें फ़ौरन बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

    सरदार सोरन सिंह की 2016 में हत्या कर दी गई थी. बलदेव कुमार समेत कुल पाँच लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन दो साल के बाद बलदेव कुमार सुबूतों के अभाव में अदालत से बरी हो गए थे.

    बलदेव कुमार पीटीआई के अल्पसंख्यक नेताओं की सूची में दूसरे नंबर पर थे. और सोरन सिंह की हत्या के बाद उन्हें विधान सभा का सदस्य मनोनीत कर दिया गया था लेकिन पीटीआई ने उनका समर्थन नहीं किया और उन्हें सदन का सदस्य बनने में कोई न कोई बाधा पैदा करने लगी.

    आख़िरकार बलदेव ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और अदालत के आदेश पर उन्हें विधान सभा की सदस्यता की शपथ दिलाई गई. लेकिन सदन का कार्यकाल उसी दिन ख़त्म हो गया और इस तरह वो 24 घंटे से भी कम समय के लिए प्रांतीय एसेंबली के सदस्य रह सके.

    बलदेव कुमार का पूरा परिवार स्वात में रहता है. उनकी पत्नी भारत से हैं. उधर सोरन सिंह के दामाद अजय सिंह ने बीबीसी को बताया है कि उन्होंने अदालत के आदेश के ख़िलाफ़ उपरी अदालत में अपील की है इसलिए बलदेव सिंह पर मुक़दमा अभी भी चल रहा है.

    उन्होंने आश्चर्य जताया कि हत्या का एक अभियुक्त कैसे देश छोड़ सकता है.

    पीटीआई के उमर चीमा ने बीबीसी को बताया कि बलदेव कुमार पर अभी भी मुक़दमा चल रहा है और बलदेव कुमार पर विश्वास करने से पहले लोगों की उनकी नीयत पर ध्यान देना चाहिए.

    INPUT:BBC

  • JNU की छात्रा शेहला राशिद को मिली गिरफ्तारी से राहत, सेना के खिलाफ ट्वीट करने पर दर्ज हुआ था देशद्रोह का केस

    दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की छात्र नेता और जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता शेहला राशिद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है. भारतीय सेना के खिलाफ कथित ट्वीट करने के लिए शेहला पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन कुमार जैन ने पटियाला हाउस कोर्ट में राशिद को अंतरिम सुरक्षा देते हुए कहा, “सभी तथ्यों पर विचार करते हुए, मैं इस विचार पर पहुंचा हूं कि मामले की विस्तृत जांच की जरूरत है. तब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, हालांकि जांच अधिकारी (आईओ) के बुलाने पर उन्हें जांच में शामिल होना होगा.’

    कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को तय की है. सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त जन अभियोजक ने कहा कि पुलिस ने शेहला राशिद को अभी तक नोटिस नहीं दिया है. आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनकी क्लाइंट जांच में शामिल होने के लिए तैयार है और वह पुलिस का सहयोग करेंगी.

    जन अभियोजक ने भी कहा कि पुलिस को अभी तक सेना की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने आगे कहा कि पुलिस को मामले की जांच के लिए कम से कम छह सप्ताह का समय चाहिए.

    पुलिस ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के संदर्भ में शेहला राशिद के बयानों के आधार पर उनके खिलाफ शुक्रवार को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया गया था.

    दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने कहा कि तीन सितंबर प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जेएनयू से पीएचडी कर चुकीं राशिद पर सुप्रीम कोर्ट के वकील आलोक श्रीवास्तव की आपराधिक शिकायत पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया. आलोक ने राशिद की गिरफ्तारी की मांग की थी.

    राशिद ने एक साथ कई ट्वीट्स कर दावा किया था कि घाटी में भारतीय सेना ने निरंकुश होकर आदमियों को उठा रही है, घरों में छापेमारी कर रही है और लोगों का उत्पीड़न कर रही है. उन्होंने दावा किया था कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है. भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर इन आरोपों को खारिज कर इन्हें आधारहीन और असत्यापित बताया था.

    Input: NDTV

  • बुर्का पहनकर कॉलेज आईं लड़कियां तो प्रिंसिपल ने छड़ी दिखाकर भगाया.

    उत्तर प्रदेश: कॉलेज में लड़कियों की ड्रेस कोड को लेकर झगड़ा पुराना है. अक्सर उनसे कहा जाता है कि जीन्स न पहनो, पश्चिमी लिबास न पहनो, पारंपरिक पहनावे में रहो, लेकिन यूपी के फिरोज़ाबाद में एक नया अजूबा देखने को मिल रहा है. वहां एसआरके डिग्री कॉलेज ने बुर्क़े पर पाबंदी लगा दी है. कॉलेज का एक वीडियो सामने आया है जिसमें प्रिंसिपल छड़ी लेकर बुर्क़े में आई छात्राओं को कॉलेज से भगाते नज़र आ रहे हैं. इन छात्राओं का कहना है कि उनसे कहा जा रहा है, वो बस स्टॉप पर बुर्क़ा उतार कर कॉलेज में दाखिल

    बुर्का पहनना किसी कॉलेज के ड्रेस कोड के खिलाफ हो सकता है. इसे औरत की आजादी के भी खिलाफ माना जा सकता है. इसे पिछड़ेपन की निशानी भी कह सकते हैं पर यह देश के किसी कानून के खिलाफ नहीं है. फिलहाल यह चौंकाने वाला है कि कॉलेज के प्रिसिंपल छड़ी लेकर बुर्का पहनने वाली लड़कियों को किस तरह दुतकार के कॉलेज से भगा रहे हैं.

    एआसके डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल प्रभासकर राय का कहना है कि यह नियम पुराना है कि लड़कों को यूनिफॉर्म में आना है, चूंकि अभी एडमिशन चल रहे थे इसलिए इसका सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा था. अब एडमिशन प्रॉसेस पूरा हो गया है इसलिए 11 तारीख के बाद से बिना परिचय पत्र और बिना यूनिफॉर्म के प्रवेश कर दिया गया है. उन्होंने कहा, बुर्का ड्रेस के अंतर्गत नहीं आता. ड्रेस में जो कॉलेज द्वारा निर्धारित ड्रेस है उसे ही अनुमति दी जाएगी.

    कॉलेज में पुलिस का पहरा है. पुलिस बुर्का पहनने वाली लड़कियों से कह रही है कि वो बाहर बस स्टैंड पर जाकर बुर्का उतार कर आए. क्लास के अंदर बुर्का उतारने की इजाजत नहीं है. तमाम बुर्का वाली लड़कियों का कहना है कि वह हमेशा बुर्का में कॉलेज आती हैं, लेकिन अचानक यह नियम लागू कर दिया गया.

    INPUT: NDTV

     

  • नरेंद्र मोदी सरकार के 100 दिन : डूब गए निवेशकों के 12.5 लाख करोड़ रुपये

    30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद पहले 100 दिन के भीतर निवेशक 12.5 लाख करोड़ रुपये गंवा चुके हैं. सोमवार को बाज़ार बंद होने के वक्त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों की बाज़ार पूंजी या उनका बाज़ार मूल्य 1,41,15,316.39 करोड़ रुपये था, जबकि मोदी सरकार के सत्ता संभालने से एक दिन पहले यह बाज़ार मूल्य 1,53,62,936.40 करोड़ रुपये था.

    30 मई से अब तक BSE का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 5.96 प्रतिशत, या 2,357 अंक लुढ़क चुका है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के संवेदी सूचकांक निफ्टी 50 में 30 मई से अब तक 7.23 प्रतिशत, या 858 अंक की गिरावट दर्ज की गई है.

    विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाज़ारों में गिरावट की वजूहात में आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार के अलावा विदेशी फंडों का देश से बाहर जाना व कॉरपोरेट की कम कमाई भी शामिल है.

    भारतीय बाज़ारों में विदेशी निवेशक बिकवाल हो गए हैं. बिकवाली का दबाव उस समय बढ़ा, जब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में पेश किए गए NDA सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में विदेशी निवेशकों पर भी सुपर-रिच टैक्स लागू कर दिया, हालांकि इस टैक्स को लगभग एक महीने बाद वापस ले लिया गया था.

    नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सरकार गठन के बाद से अब तक 28,260.50 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके

    IDBI कैपिटल में रिसर्च प्रमुख ए.के. प्रभाकर ने NDTV को बताया, “बाज़ारों में गिरावट की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल शुरू होने से काफी पहले ही हो गई थी.

    फरवरी, 2018 के बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स तथा डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लागू किए जाने के बाद से ही शेयर बाज़ार मूल्यांकन में गिरावट शुरू हो गई थी, और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीज़िंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज़ (IL&FS) संकट के बाद बाज़ारों में मंदी और बढ़ गई..

    ए.के. प्रभाकर के अनुसार, “बहुत-सी मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में काफी सुधार हुआ और अब वे बढ़िया मूल्यांकन पर हैं. IL&FS संकट का बाज़ारों पर काफी देर तक असर बना रहा, लेकिन अब हालात में सुधार की उम्मीद है

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा एकत्र किए जाने वाले सभी सेक्टरों के सूचकांकों में, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स को छोड़कर, पिछले 100 दिनों में नकारात्मक रिटर्न ही देखने को मिली है, और निफ्टी का PSU बैंक इंडेक्स तो 26 प्रतिशत गिरा है. पिछले महीने सरकार ने सरकारी बैंकों के बड़े स्तर पर विलय की घोषणा की थी, और अब सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों की संख्या 12 हो जाएगी.

    अमेरिका और चीन के बीच व्यापार गतिरोधों के बढ़ने से धातु (मेटल) इंडेक्स में 20 फीसदी की गिरावट आई है. विश्लेषकों का कहना है, एन्टी-डंपिंग ड्यूटी के बावजूद चीन सस्ता स्टील बेच रहा है, जिससे घरेलू धातु कंपनियों को नुकसान हो रहा है.

    निफ्टी के ऑटो इंडेक्स में 13.48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि ऑटो उद्योग पिछले दो दशक की सबसे भयावह मंदी का सामना कर रहा है. IDBI कैपिटल में रिसर्च प्रमुख ए.के. प्रभाकर ने कहा, “हमने पिछले पांच साल के दौरान ऑटो क्षेत्र में ज़ोरदार उछाल देखा, इसलिए मंदी भी साफ नज़र आ रही है. चौपहिया वाहनों की इतनी शानदार बिक्री (पिछले पांच साल जैसी) कभी नहीं देखी गई थी.पिछले पांच साल में मारुति सुज़ुकी ने जिस तरह तरक्की की है, वह अद्भुत है.

    निफ्टी के बैंक, प्राइवेट बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टरों के इंडेक्सों में भी 10 से 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.