Category: खास ख़बरें

  • पश्चिम बंगाल में एनआरसी लाने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक लाएंगे: अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि केंद्र राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विस्तार पश्चिम बंगाल तक करेगा लेकिन इससे पहले सभी हिंदू, सिख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया जाएगा.

    विवादास्पद एनआरसी पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एनआरसी के बारे में लोगों को गुमराह कर रही है.

    उन्होंने कहा, ‘एनआरसी के बारे में बंगाल के लोगों को गुमराह किया जा रहा है. मैं सभी हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करता हूं कि उन्हें देश छोड़ना नहीं पड़ेगा, उन्हें भारतीय नागरिकता मिलेगी और उन्हें एक भारतीय नागरिक के सभी अधिकार मिलेंगे.’

    https://twitter.com/ANI/status/1178979318971555841

    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शाह ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ममता दीदी कह रही हैं कि बंगाल में कोई एनआरसी नहीं होगी, लेकिन हम एक-एक घुसपैठिये की पहचान कर सभी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाएगा।’

    उन्होंने आगे कहा, ‘जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं. तब उन्होंने घुसपैठियों को निकालने की बात की थी, उन्होंने इसी मुद्दे पर स्पीकर के मुंह पर शॉल फेंक दिया था. अब जब वे घुसपैठिये उनका वोट बैंक बन गए हैं, तो वे उन्हें निकालना नहीं चाहतीं। मैं ममता दीदी को उनका 4 अगस्त 2005 को दिया गया भाषण याद दिलाना चाहूंगा जहां उन्होंने ऐसे घुसपैठियों को निकलने की बात की थी. लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को देश हित से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।’

    अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बंगाल के लोगों को नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जागरूक करने को भी कहा.

    केंद्रीय गृहमंत्री ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि मुखर्जी के बलिदान के कारण ही आज पश्चिम बंगाल भारतीय गणराज्य का हिस्सा है.

    हालांकि अमित शाह के एनआरसी से जुड़े बयान को लेकर विपक्ष इस समय उन पर हमलावर है.

    माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने एनआरसी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताए जाने संबंधी गृह मंत्री अमित शाह के बयान को गैरजरूरी बताते हुए कहा है कि भारत में किसी आस्था को अलग थलग करने वाला कोई कानून वजूद में नहीं रह सकता है, इसलिए शाह को देश में विभाजन का पोषण करने वाली प्रवृत्ति को रोकना चाहिए.

    येचुरी ने बीते मंगलवार को शाह को विभाजन का पोषक नहीं बनने की नसीहत देते हुए कहा, ‘सभी आस्थाओं का मतलब सभी प्रकार की आस्थाएं हैं, इनमें यहूदी, पारसी, मुस्लिम, बौद्ध, जैन और हिंदूओं के अलावा सभी आस्थाओं को मानने वाले इसमें शामिल हैं. गृह मंत्री को विभाजन को बढ़ावा देने, देश को नुकसान पहुंचाने और भारतीयों का दिल दुखाने की कोशिशों को रोकना चाहिए..

    https://twitter.com/SitaramYechury/status/1179012322557194241

    येचुरी ने शाह द्वारा एनआरसी के मुद्दे पर कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिए गए उस बयान पर यह प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा है कि एनआरसी जो अभी असम तक सीमित है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह पूरे देश के लिए जरूरी है और इसे देश भर में लागू किया जायेगा.

    येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘जिन्ना और सावरकर द्वारा उठाए गए द्विराष्ट्र के सिद्धांत को भारत पहले ही नकार चुका है और यह हमारा संवैधानिक सिद्धांत है. जाति, संप्रदाय, लिंग, आस्था, खानपान, व्यवसाय और राजनीतिक आस्थाओं से परे हटकर सभी भारतीय भारत में समाहित हैं.’

    उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस को तृणमूल कांग्रेस की कठपुतली पुलिस करार देते हुए कोलकाता पंहुचने पर शाह को काले झंडे दिखा रहे माकपा की राज्य इकाई के नेता पलाश दास सहित 17 नेताओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा कि शाह के आगमन पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे माकपा के 17 नेताओं को अभी भी हिरासत में रखा गया है. येचुरी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तारूद्ध तृणमूल कांग्रेस ने सिर्फ भाजपा को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है. INPUT(THE WIRE)

  • कश्मीर मुद्दे पर सुनवाई के लिए समय नहीं, अयोध्या मामले की सुनवाई ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

    भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में जारी पाबंदी और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच की कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं एक संविधान पीठ के पास भेज दिया.

    द हिंदू के अनुसार, जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली संविधान पीठ 1 अक्टूबर को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करने वाली थी. अब यह पीठ जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी और अनुच्छेद 370 के खिलाफ दायर दोनों ही तरह की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

    इन याचिकाओं में केंद्र सरकार के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति को बदलते हुए उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है. अब यह देखना है कि क्या संविधान पीठ पहले पाबंदियों पर सुनवाई करेगी और कोई आदेश जारी करेगी.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, ‘हमारे पास इतने मामलों को सुनने का समय नहीं है. हमारे पास संविधान पीठ का मामला चल रहा है. इन याचिकाओं पर कश्मीर पीठ सुनवाई करेगी.’

    यहां संविधान पीठ मामले से मतलब अयोध्या मामले की सुनवाई से था, जिसमें सोमवार को लगातार 34वें दिन सुनवाई हुई.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई कर रहे दोनों जज- सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे, अयोध्या पीठ का भी हिस्सा हैं और इस पीठ के पास 18 अक्टूबर तक अयोध्या मामले की सुनवाई को खत्म की समयसीमा है. अयोध्या मामले में सोमवार से शुक्रवार को शाम पांच बजे तक सुनवाई हो रही है.

    पाबंदियों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं का विरोध करते हुए केंद्र ने तर्क दिया कि यह कदम कठिन कारणों की वजह से उठाया गया और इससे जम्मू कश्मीर में 1990 से जारी मौत, आतंक और हिंसा की हजारों घटनाओं पर रोक लगी है.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदियों के कारण सुप्रीम कोर्ट में कई हैबियस कार्पस याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इसमें युवा वकील मोहम्मद अलीम सैयद की याचिका है जो कि अपने बूढ़े मां-बाप के लिए परेशान हैं.

    माकपा नेता सीताराम येचुरी ने अपने पार्टी के सदस्य एमवाई तरीगामी से मिलने के लिए याचिका लगाई है. जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां से मिलने के लिए याचिका लगाई है.

    हालांकि, अदालत ने इन लोगों के स्वास्थ्य के बारे में बताने के लिए प्रशासन को निर्देश देने के बजाय याचिकाकर्ताओं को ही जम्मू कश्मीर जाकर कुछ परिस्थितियों में मिलने का आदेश दिया.

    अन्य याचिकाओं में राज्य में जारी पाबंदी में लोगों के हालात पर सवाल उठाए गए हैं. इनमें एक याचिका बाल अधिकार विशेषज्ञ एकांशी गांगुली और प्रोफेसर शांत सिन्हा द्वारा दाखिल की गई जिन्होंने जम्मू कश्मीर में बच्चों को गैरकानूनी तौर पर हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करने की मांग की है.

    वहीं, एक अन्य याचिका में एक डॉक्टर ने राज्य में चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है. इसमें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की याचिका भी शामिल है.

    एक अन्य याचिका में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने राज्य में मीडिया और संचार माध्यमों पर लगी पाबंदी को चुनौती दी है.

    उन्होंने याचिका में कश्मीर तथा जम्मू के कुछ जिलों में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की निर्बाध आवाजाही पर लगी पाबंदी में तुरंत ढील के लिए केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिए जाने की मांग की थी.

    उनकी याचिका के मुताबिक, मीडियाकर्मियों को अपना काम करने देने और खबर करने के अधिकार के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 19(एक)(ए) और 19 (एक)(जी) तथा 21 तथा कश्मीर घाटी के बाशिंदों को जानने के अधिकार के तहत निर्देश दिए जाने की मांग की गयी थी.

    यह भी कहा गया था कि याचिकाकर्ता को पता नहीं है कि किस अधिकार और शक्ति के तहत आदेश जारी किया गया. इसमें कहा गया है कि संचार माध्यम कटने और पत्रकारों की आवाजाही पर सख्त पाबंदी की वजह से एक तरह से रोक लग गयी और मीडिया के प्रकाशन प्रसारण पर असर पड़ा है. इससे मीडिया के कामकाज पर एक तरह से पाबंदी लग गयी है.

    हालांकि, सरकार ने दावा किया कि आरोप गलत हैं और कश्मीर के लोगों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है.

    16 सिंतबर को दिए एक हलफनामे में सरकार ने कहा था कि कश्मीर के 105 (88.57 फीसदी) पुलिस थानों में से 93 में, जम्मू में सभी 90 पुलिस स्टेशनों (100 फीसदी) में और लद्दाख के सभी 7 (100 फीसदी) पुलिस थानों में से धारा 144 के तहत लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए गए हैं.

    इसमें कहा गया कि खाद्यान्न, एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल आदि जैसी आवश्यक वस्तुओं का तीन महीने का भंडार सुनिश्चित किया गया है.

    अदालत को आंकड़े देते हुए सरकार ने कहा कि पिछले एक महीने में कश्मीर में 8,98,050 एलपीजी रिफिल और 6.46 लाख क्विंटल राशन उपभोक्ताओं में वितरित किए गए. इसमें कहा गया कि जम्मू और लद्दाख में 100 फीसदी जबकि कश्मीर में 97 फीसदी प्राथमिक, उच्च माध्यमिक और हाईस्कूल खुल रहे हैं. input(THE WIRE)

     

  • दो अक्टू बर से जामिया होगा प्लास्टिक फ्री , लगेगा 500 रुपये फाइन..

    प्रदूषण की एक बड़ी वजह प्‍लास्‍ट‍िक का इस्‍तेमाल भी है. इसका प्रयोग कम करने के ल‍िये सरकार लगातार नये कदम उठा रही है. इसी कड़ी में देश की सबसे प्रतिष्‍ठ‍ित यूनिवर्सिटीज में एक जामिया म‍िल्‍ल‍िया इस्‍लाम‍िया(जेएमआई) ने भी प्‍लास्‍ट‍िक के उपयोग पर एक बड़ा फैसला ल‍िया है. जामिया म‍िल्‍ल‍िया इस्‍लामिया(JMI) में अब प्‍लास्‍ट‍िक इस्‍तेमाल पर पूरी तरह रोक होगा और यह नियम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 02 अक्टूबर, 2019 से लागू होगा.

    यूनिवर्सिटी ने सभी स‍िंंगल यूज प्‍लास्‍ट‍िक पर रोक लगाने का फैसला क‍िया है. ल‍िहाजा, जाम‍िया के कम्‍यून‍िटी सेंटर, सभी कैंटीन, दुकानों, कॉफी हाउस और हॉटल तक में प्‍लास्‍ट‍िक पर बैन होगा. बैन होने वाली प्‍लास्‍ट‍िक की वस्‍तुओं में वो चीजें शामिल होंगी, जो चौड़ाई में 50 माइक्रॉन से कम होंगी. इसमें प्‍लास्‍टि‍क बोतल, कप, ग्‍लास, पॉलिथ‍िन बैग और अन्‍य प्‍लास्‍ट‍िक आइटम शामिल हैं. यही नहीं थर्मोकोल से न‍िर्म‍ित वस्‍तुएं, जैसे क‍ि कप, ग्‍लास और प्‍लेटों पर भी रोक होगा.

    देना होगा मोटा फाइन:
    यूनिवर्स‍िटी के इस न‍ियम को ना मानने वाले लोगों को मोटा फाइन भरना होगा. नियमों का उल्‍लंघन करने वाले लोगों को 500 रुपये का फाइन देना होगा.

    बता दें क‍ि इस साल स्‍वतंत्रता द‍िवस 2019 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्‍लास्टिक वस्‍तुओं के प्रयोग को रोकने को कहा था. पीएम मोदी ने कहा था क‍ि पर्यावरण की हो रही हानि को रोकने के ल‍िये प्‍लास्‍ट‍िक का इस्‍तेमाल ना करें.

    जामिया म‍िल्‍लि‍या इस्‍लाम‍िया:
    जामिया मिल्‍ल‍िया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को मूल रूप से साल 1920 में अलीगढ़ में स्थापित क‍िया गया था. तब यह भारत का संयुक्त प्रांत था. इसके बाद साल 1988 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा इसे केंद्रीय विश्‍वविद्यालय का रूप म‍िला. उर्दू में जामिया का अर्थ होता है ‘यूनिवर्सिटी’ और म‍िल्‍ल‍िया का तात्‍पर्य ‘राष्‍ट्र’ या ‘देश’ होता है. INPUT;(NEWS 18)

  • Ayodhya Case: CJI रंजन गोगोई फिर बोले- 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म होना जरूरी..

    अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई ने एक बार फिर कहा है कि 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर चार हफ्ते में हमने फैसला दे दिया तो ये एक चमत्कार की तरह होगा. लेकिन अगर सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म नहीं हुई तो फैसला संभव नहीं हो पाएगा. साथ ही CJI ने कहा कि आज का दिन मिलाकर 18 अक्टूबर तक हमारे पास साढे दस दिन हैं. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि 18 अक्टूबर के बाद एक भी दिन अतिरिक्त नहीं है. इसलिए पक्षकार इसी समय सीमा में सुनवाई पूरी करें.

    मीनाक्षी अरोडा ने कहा कि वह आज खत्म कर देंगी. हिंदू पक्ष ने कहा कि जवाब देने के लिये 3 से 4 दिन का समय चाहिए. राजीव धवन से कोर्ट ने पूछा कि सूट नं 4 पर बहस करने के लिये 2 दिन पर्याप्त हैं? धवन ने कहा कि हम शनिवार को भी बहस कर सकते हैं.

    गौरतलब है कि इससे पहले भी सीजेआई रंजन गोगोई का ऐसा ही बयान आया था. 18 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कहा था कि सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा और पक्षकार समझौता कर अदालत को बताए. इसके साथ ही उन्होंने इस केस की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद भी जताई थी. .

    CJI ने कहा था, ”हमें उम्मीद है कि हम अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर लेंगे. इसके लिए हम सभी को संयुक्त प्रयास करना होगा. इसके बाद जजमेंट लिखने के लिए जजों को चार हफ्तों का वक्त मिलेगा.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”अगर पक्षकार इस मामले को मध्यस्थता समेत अन्य तरीके से सैटल करना चाहते हैं तो कर सकते हैं. पक्षकार समझौता कर अदालत को बताएं.”.input (ndtv)

  • अयोध्या केस LIVE: SC ने कहा- सुनवाई पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर के बाद एक दिन का भी नहीं मिलेगा समय

    अयोध्या केस की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि इस मामले 18 अक्टूबर के बाद पक्षकारों को जिरह के लिए एक भी दिन अतिरिक्त समय नहीं मिलेगा। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। बता दें कि अबतक 31 दिनों की सुनवाई शीर्ष अदालत में हो चुकी है। हिंदू पक्षकारों ने अपनी दलीलें रख दी हैं और मुस्लिम पक्षकार की दलीलें जारी हैं। (31वें दिन की सुनवाई यहां पढ़ें)चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाले पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि अगर 18 अक्टूबर तक दलीलें पूरी हो जाती हैं तो चार सप्ताह में फैसला देना किसी करिश्मे से कम नहीं होगा। बता दें कि चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

    चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से कहा कि आज का दिन मिलाकर 18 अक्टूबर तक हमारे पास साढ़े 10 दिन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आगाह करते हुए कहा कि अगर 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो फैसला आने की उम्मीदें कम हो जाएंगी।

    “18 अक्टूबर तक बहस पूरी होने के बाद चार सप्ताह में फैसला देना कोई करिश्मा जैसा होगासंविधान पीठ ने मुस्लिम पक्षकार और हिंदू पक्षकार को बहस के लिए समयसीमा तय कर दी है। कोर्ट के अनुसार, ज्यादातर दलीलें 4 अक्टूबर तक पूरी हो जाएंगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट दशहरा की छुट्टियां हो जाएंगी। कोर्ट 14 अक्टूबर को फिर खुलेगा। ऐसे कोर्ट के पास सुनवाई के लिए 18 अक्टूबर तक 5 और दिन बचेंगे।आइए जानते हैं आज कोर्ट में क्या हो रहा है…

    CJI ने सभी पक्षकारों से पूछा कि वे इस मामले में आगे कितना समय लेने वाले हैं। अभी मुस्लिम पक्ष की ओर से मीनाक्षी अरोड़ा दलील दे रही हैं। इसके बाद दो और वकील दलील देंगे। उसके बाद हिन्दू पक्षकार उसपर दलीलें देंगे। उस पर राजीव धवन अपनी जिरह करेंगे और उसके बाद फिर हिन्दू पक्षकार।

    CJI- मैं जानना चाहता हूं कि इसमें कितना टाइम लग जाएगा। यह सब 18 अक्टूबर तक पूरा हो जाना चाहिए। क्योंकि एक सप्ताह की छुट्टियां हैं।

    वैद्यनाथन ने कहा कि हिन्दू पक्षकारों को 3 से 4 दिन लगेंगे जिरह में।

    मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि मैं आज शाम तक अपनी दलीलें पूरी कर लूंगी।

    CJI- क्या मुस्लिम पक्षकारों के लिए अपनी दलीलें पूरी करने के लिए 2 दिन काफी हैं?

    राजीव धवन- 2 दिन में हम प्रयास करेंगे इसे समाप्त करने का।

    हिन्दू पक्ष ने कहा 28 सितंबर और 1 अक्टूबर को हम रिजॉइंडर दाखिल करेंगे

    CJI ने धवन ने पूछा कि क्या आपके लिए 2 दिन काफी होगा रिजॉइंडर के लिए

    राजीव धवन ने कहा कि सम्भवत: यह कम होगा

    CJI- फिर हम उम्मीद कर सकते है कि सुनवाई 18 अक्टूबर तक निपट जाएगी। हम इससे अधिक समय नहीं बढ़ाएंगे।

    धवन- मैं ASI रिपोर्ट पर कुछ बातें कोर्ट के सामने रखना चाहता हूं।

    CJI ने अनुमति दी।

    ASI रिपोर्ट पर राजीव धवन ने पक्ष रखना शुरू किया।

    धवन ने कहा विस्तृत आपत्तियां रिपोर्ट के खिलाफ की गईं थीं और यह भी कहा गया था कि रिपोर्ट को अदालत स्वीकार नहीं करे पर ऐसा नहीं किया गया।

  • रिज़र्व बैंक ने नौ बैंक बंद किए जाने की ख़बरों का खंडन किया, कहा- कोई बैंक बंद नहीं हो रहा

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोशल मीडिया पर नौ बैंकों को बंद करने की अफवाहों का बुधवार को खंडन किया. आरबीआई ने कहा कि कोई भी वाणिज्यिक बैंक बंद नहीं हो रहा है.

    वित्त सचिव राजीव कुमार ने सोशल मीडिया पर चल रहे इन संदेशों को शरारतपूर्ण बताया और कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालकर उन्हें मजबूत बनाने की तैयारी में है.

    केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा, ‘सोशल मीडिया के कुछ तबकों में खबरें चल रही हैं कि आरबीआई कुछ वाणिज्यिक बैंकों को बंद कर रहा है. यह पूरी तरह से गलत और झूठी खबरें हैं.’

    यह अफवाह ऐसे समय पर आयी है, जब आरबीआई ने बीते 24 सितंबर को महाराष्ट्र के पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक की कुछ खामियों को लेकर कुछ पाबंदियां लगाई हैं. इसके तहत जमाकर्ताओं के लिए छह महीने में सिर्फ 1,000 रुपये निकालने की सीमा तय की गई है.

    पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक पर इसके अलावा नया कर्ज देने और जमा लेने की भी रोक लगाई गई है.

    मालूम हो कि जिन बैंकों को बंद करने की अफवाहें उड़ रही हैं, उनमें ऐसे बैंक शामिल हैं, जिनका या तो दूसरे बैंकों में विलय हो गया है फिर विलय होने की प्रक्रिया में हैं. इनमें कॉरपोरेशन बैंक, यूको बैंक, आईडीबीआई, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आंध्रा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक और यूनाइडेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल है.

    सरकार ने पिछले महीने ही सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का विलय कर उन्हें चार बैंकों में तब्दील करने का फैसला किया है. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया जाएगा.

    वहीं सिंडीकेट बैंक को केनरा बैंक में मिलाया जाएगा. आंध्र बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय किया जाएगा, जबकि इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय किया जाएगा.

    सरकार देना बैंक और विजया बैंक का पहले ही बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कर चुकी है. हाल ही में आईडीबीआई बैंक का विलय एलआईसी में किया गया है.

  • Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर सवाल उठाए..

    अयोध्या केस (Ayodhya Case) में बुधवार को 31 वें दिन की सुनवाई हुई. अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट पर आपत्ति उठाने वाली दलील पर संविधान पीठ ने कहा कि आपकी दलीलें जोरदार नहीं हैं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट को लेकर जो आपत्ति आप यहां उठा रहे हैं आपने ट्रायल के दौरान तो ये बातें कही नहीं. इस मुद्दे पर आपकी दलीलें भी जोरदार और ठोस नहीं हैं. क्योंकि कोर्ट ऐसे मुद्दे पर जब विशेषज्ञों की कोई कमेटी बनाती है तो उसमें कोई भी कमी या गलती हो तो या तो कोर्ट उस बारे में बताए, या फिर पक्षकार बताएं. तभी विशेषज्ञ उसका जवाब दे सकते थे. इस रिपोर्ट को लेकर उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था. लिहाजा सीपीसी के नियम 26 के मुताबिक भी हम इसे यहां यानी पहली अपील में नहीं सुन सकते. मुस्लिम पक्षकारों की ओर से ASI की रिपोर्ट पर मीनाक्षी अरोड़ा वे आपत्तियां जता रही थीं जो ट्रायल के दौरान कोर्ट के संज्ञान में नहीं लाई गईं. अरोड़ा ने कहा कि वे गुरुवार को इसका जवाब देंगी.

    अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील जफरयाब जिलानी ने दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि सन 1858 में पहली बार सिख निहंग मस्जिद वाली इमारत में जबरन घुसे और पाठ शुरू किया था. मना करने पर वे नहीं हटे तो दरोगा और पुलिस ने उनको जबरन बाहर किया. तब पहली बार कोई गैर मुस्लिम उस इमारत में उपासना के लिए दाखिल हुआ था. जिलानी की दलीलें पूरी होने के बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण, यानी कि आर्कियालॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से मीनाक्षी अरोड़ा ने बहस की..

    मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि मस्जिद 1528 से थी, लेकिन कई तरह के सबूत मिले हैं. सबूत मौखिक भी हैं और वैज्ञानिक भी, लेकिन उन पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि यहां मामला सामाजिक विज्ञान से भी जुड़ा है. कुछ लोगों को रामजन्म स्थान का विश्वास है लेकिन 1528 में कुछ हुआ था.अरोड़ा ने हाईकोर्ट के फैसले के हवाले से कहा- 1885 में जिला जज ने भी यह पाया था कि महंत रघुबर दास ने मंदिर बनाया था. मस्जिद ऐसी जगह पर बनाई जो हिंदुओं के लिए पवित्र थी. लेकिन 356 साल  हो गए हैं. लिहाजा अब इस मामले में कुछ करने से शांति भंग होगी. लिहाजा दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखें.

    जफरयाब जिलानी की आंखों में मोतियाबिंद होने की वजह से उन्हें देखने में दिक्कत है. लिहाजा कोर्ट में कई दस्तावेज इनकी जूनियर आकृति ने पढ़े.  उन्होंने ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत का उल्लेख करते हुए कहा कि विक्रमादित्य के बनाए मंदिर और बौद्ध मठ, स्मारक अयोध्या में थे. मंदिरों के इस शहर में सारे मंदिर हिंदुओं के नहीं थे.

    मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्षकारों की ओर से बहस की. मीनाक्षी अरोड़ा ने ASI की रिपोर्ट और खुदाई में मिले सामान पर दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि उन अलग-अलग यात्रियों के वर्णन में भी मंदिर, ढांचे, खंबों को लेकर कई विरोधाभास हैं. जब मस्जिद बनाई गई तो वहां खाली जगह थी. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि जीर्णोद्धार का मतलब यह भी हो सकता है कि वहां बहुत पुराना ढांचा रहा हो जहां यह मस्जिद बनाई गई.

    अरोड़ा ने कहा कि 1528 से 1992 तक मस्जिद का अस्तित्व था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इसमें दो तर्क हो सकते हैं, अव्वल तो निर्जन पड़े जीर्ण मंदिर की जगह मस्जिद बनाई गई, या फिर बिल्कुल खाली जमीन पर बनाई गई. आप इस पर अपनी बात रखें. अरोड़ा ने कहा कि हिंदुओं का दावा है कि महाराजा विक्रमादित्य के समय रामजन्म भूमि मंदिर बनाया गया था. उसमें

    कसौटी पत्थर के खंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां थीं. उन्हें ध्वस्त कर उसके अवशेषों के साथ मस्जिद बनाई गई. इसमे एएसआई की रिपोर्ट भी मौखिक, यात्रा वृत्तांत और खुदाई में मिली चीज़ों का रसायनिक विश्लेषण है. ASI के खुदाई में विशेषज्ञ भुवन विक्रम सिंह थे. हाईकोर्ट ने उनसे भी पूछताछ की लेकिन कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकारों को उनसे जिरह की इजाजत नहीं दी.  बाद में एएसआई रिपोर्ट को ठोस सबूत माना और फैसले में इसका जिक्र भी किया.

    मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट ने भी इस मामले में कुछ नहीं कहा कि मस्जिद बाबर ने बनाई या औरंगजेब ने. मैं भी इसमें नहीं पड़ूँगी. जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि ASI की रिपोर्ट न मानने का आधार क्या है? जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि मंदिरों के जीर्णोद्धार की भी परंपरा रही है. पुराने जीर्ण मंदिरों को उसी स्थान पर सिरे से बनाया जाता है. क्या जीर्ण मंदिर की जगह पर बनाई मस्जिद? ये तो हिन्दू पक्ष को बताना पड़ेगा कि वहां मंदिर था. वो सबूत दें. किसी यात्री के वृतांत से यह कैसे साबित होगा कि उसे किसी ने बताया था कि वहां एक मंदिर था.

    मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि रिपोर्ट पर दस्तखत नहीं हैं. सीजेआई ने कहा कि हालांकि वह रिपोर्ट कोर्ट का रिकॉर्ड बन गई थी, उस पर तो नाम छपे हैं. आपकी आपत्ति उसके लेखक को लेकर है. आप रिपोर्ट के दसवें चैप्टर को लेकर दलील देना चाहती हैं तो दें. जस्टिस भूषण ने कहा कि उस रिपोर्ट पर हरि

    मांझी और बीआर मणि के नाम छपे हैं, क्योंकि रिपोर्ट पर उनके दस्तखत हैं. ये तो ASI ने नाम छापकर मान लिया है कि यह साझा रिपोर्ट है. चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने रिपोर्ट के दसवें अध्याय, जिसमें रिपोर्ट का निष्कर्ष है, को लेकर आपकी इस आपत्ति का संज्ञान लिया है. हम देखेंगे कि रिपोर्ट के साथ कोई फारवर्ड लेटर था या नहीं. अब आप अगला पॉइंट बताएं.

    मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हिन्दू पक्षकारों ने यह नहीं बताया कि वहां मंदिर किसने और किस काल में बनाया? विक्रमादित्य तो कई राजाओं की पदवी रही, लिहाज़ा ये दावा ठोस नहीं है. 85 खंभे की बात कही गई जिनमें से एएसआई ने 50 को ही देखा और 12 को पूरी तरह एक्सपोज़ किया. बाकी को थोड़ा बहुत देखकर छोड़ दिया था. खुदाई के दौरान ज़मीन के भीतर से मिले सबूत का कालखंड निर्णय जरूरी है जिससे निर्माण काल का पता चलता है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हालांकि यहां इसकी क्या अहमियत होगी? अरोड़ा ने कहा कि हो सकता है नीचे कोई मंदिर जैसा ढांचा हो, लेकिन उसे तोड़कर ही मस्जिद बनाई गई इसका कोई सबूत नहीं है.

    जस्टिस बोबड़े ने कहा, लेकिन नीचे मंदिर का ढांचा तो मिला है. उसके निर्माण के कालखंड की अहमियत उतनी नहीं है. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि वहां खुदाई की जगह पश्चिमी छोर पर 50 मीटर लंबी मोटी दीवार मिली. वह ईदगाह की दीवार होगी. ईदगाह बस्ती के बाहर होती थी, जहां मुस्लिम बड़ी तादाद में ईद बकरीद की नमाज़ अदा करते थे. जस्टिस भूषण ने कहा कि आपकी दलीलों में ईदगाह का कहीं ज़िक्र नहीं है जैसा कि हिन्दू मंदिर होने की प्लीडिंग देते रहे हैं.

    मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि पुरातत्व रिपोर्ट में कहा गया है कि खंभे अलग-अलग समय के हैं. कोई 6AD और कोई 7AD का है. कोई बड़ा और छोटा तथा अलग-अलग दूरी पर स्थित हैं. ऐसे में खुदाई के बाद जिन खंभों की बात की जा रही है वह मंदिर के थे, यह स्पष्ट नहीं है. चीफ जस्टिस ने कहा कि आप जो भी दलीलें दे रहीं हैं वो आपके दावे से संबंधित हैं, क्या इनका औचित्य है? अरोड़ा ने कहा कि मेरा तात्पर्य यह है कि रिपोर्ट सही नहीं है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप क्यों पुरातत्व विशेषज्ञों की राय को नकार रहीं हैं, जबकि उन्होंने अदालत के आदेश पर प्रक्रिया के अनुरूप काम किया.. INPUT( NDTV)

  • अगर आप मोदी को ‘फादर ऑफ इंडिया’ स्वीकार नहीं कर सकते, तो आप भारतीय नहीं: जितेंद्र सिंह

    केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने बुधवार को कहा कि खुद को भारतीय नहीं मानने वाला ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को ‘भारत का पिता’ कहे जाने पर गर्व महसूस नहीं करेगा. डाक विभाग में केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) सुधारों की शुरुआत किए जाने संबंधी कार्यक्रम से इतर सिंह ने कहा कि भारत का सम्मान आज जिस ढंग से किया जा रहा है, वह विगत में दुर्लभ था. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री ने कहा, ‘जो लोग विदेश में रहते हैं, उन्हें आज भारतीय होने पर गर्व है. यह प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व और उनकी व्यक्तिगत पहुंच की वजह से हो रहा है.’

    डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मोदी को ‘भारत का पिता’ कहे जाने के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति से किसी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए ऐसा शब्द नहीं सुना है. सिंह ने कहा, ‘यदि अमेरिका या इसके राष्ट्रपति की ओर से कोई निष्पक्ष और साहसिक बयान आता है तो मुझे लगता है कि हर भारतीय को गर्व महसूस होना चाहिए, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़ा हो.’ उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी भारतीय प्रधानमंत्री या विश्व के किसी अन्य नेता की प्रशंसा इस तरह के शब्दों से की है. यदि किसी को इस पर गर्व नहीं है तो हो सकता है कि वह खुद को भारतीय न मानता हो.’ कुछ कांग्रेस नेताओं के यह कहने पर कि केवल एक ही राष्ट्रपिता हो सकता है, सिंह ने कहा कि इसके लिए कांग्रेस को ट्रम्प से जिरह करनी होगी.

    आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की आलोचना करते हुए सिंह ने कहा, ‘जहां तक आतंकवाद और इस बुराई को बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका की बात है, तो जो विदेशी देश आतंकवाद में पाकिस्तान की संलिप्तता की भारत की बात को नहीं मानते थे, वे आज इसे स्वीकार कर रहे हैं और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है.’ ट्रम्प ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में मोदी की खूब सराहना की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘मुझे याद है कि भारत पहले काफी अस्थिर था. वहां काफी मतभेद, लड़ाई थी, लेकिन वह (मोदी) सभी को साथ लेकर आए. जैसे कि एक पिता करता है. शायद वह ‘फादर ऑफ इंडिया’ (भारत का पिता) हैं.. input: (NDTV)

  • Petrol-Diesel के दाम में वृद्धि पर 8 दिन बाद लगा ब्रेक, जानें अपने शहर की कीमत..

    पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार आठ दिन से हो रही वृद्धि पर आखिरकार बुधवार को ब्रेक लगा. उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी का रुख बना हुआ है. बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव दो दिनों में करीब दो डॉलर प्रति बैरल गिरा है. सऊदी अरामको के तेल संयंत्रों पर हुए हमले से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आए जोरदार उछाल के बाद भारत की तेल विपणन कंपनियां लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा रही थीं.

    इस हमले के बाद भारत में पेट्रोल दो रुपये से ज्यादा महंगा हो गया है. वहीं, डीजल का दाम दिल्ली में 1.70 रुपये लीटर बढ़ गया है तो कुछ अन्य शहरों में डीजल के दाम में इससे ज्यादा की वृद्धि हुई है.

    हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में फिर नरमी का रुख बना हुआ है. पिछले सत्र में बेंट क्रूड के वायदा सौदे में 3.75 फीसदी की गिरावट आई. ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि वैश्विक आर्थिक विकास सुस्त पड़ने से तेल की मांग कमजोर रहने की संभावनाओं से तेल की कीमतों पर फिर दबाव आया है.

    इंडियन ऑयल की बेवसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम पूर्ववत क्रमश: 74.13 रुपये, 76.82 रुपये, 79.79 रुपये और 77.06 रुपये प्रति लीटर बने रहे. चारों महानगरों में डीजल के दाम भी बिना किसी बदलाव के क्रमश: 67.07 रुपये, 69.47 रुपये, 70.37 रुपये और 70.91 रुपये प्रति लीटर बने हुए हैं.

    इसी महीने 14 सितंबर को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको के तेल संयंत्रो पर ड्रोन से हुए हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में 16 सितंबर को अचानक तकबरीन 20 फीसदी का उछाल आया जोकि 28 साल बाद आई सबसे बड़ी एक दिनी तेजी थी. कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी यमन के हौती विद्रोहियों ने ली थी.

    अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के नवंबर डिलीवरी अनुबंध में इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर पिछले सत्र के मुकाबले 0.65 फीसदी की नरमी के साथ 62.69 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था. INPUT(NDTV)

  • Petrol-Diesel के दाम में वृधि पर 8 दिन बाद लगा ब्रेक, जानें अपने शहर की कीमत

    पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार आठ दिन से हो रही वृद्धि पर आखिरकार बुधवार को ब्रेक लगा. उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी का रुख बना हुआ है. बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का भाव दो दिनों में करीब दो डॉलर प्रति बैरल गिरा है. सऊदी अरामको के तेल संयंत्रों पर हुए हमले से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आए जोरदार उछाल के बाद भारत की तेल विपणन कंपनियां लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा रही थीं.

    इस हमले के बाद भारत में पेट्रोल दो रुपये से ज्यादा महंगा हो गया है. वहीं, डीजल का दाम दिल्ली में 1.70 रुपये लीटर बढ़ गया है तो कुछ अन्य शहरों में डीजल के दाम में इससे ज्यादा की वृद्धि हुई है.

    हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में फिर नरमी का रुख बना हुआ है. पिछले सत्र में बेंट क्रूड के वायदा सौदे में 3.75 फीसदी की गिरावट आई. ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि वैश्विक आर्थिक विकास सुस्त पड़ने से तेल की मांग कमजोर रहने की संभावनाओं से तेल की कीमतों पर फिर दबाव आया है.

    इंडियन ऑयल की बेवसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम पूर्ववत क्रमश: 74.13 रुपये, 76.82 रुपये, 79.79 रुपये और 77.06 रुपये प्रति लीटर बने रहे. चारों महानगरों में डीजल के दाम भी बिना किसी बदलाव के क्रमश: 67.07 रुपये, 69.47 रुपये, 70.37 रुपये और 70.91 रुपये प्रति लीटर बने हुए हैं.

    इसी महीने 14 सितंबर को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको के तेल संयंत्रो पर ड्रोन से हुए हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में 16 सितंबर को अचानक तकबरीन 20 फीसदी का उछाल आया जोकि 28 साल बाद आई सबसे बड़ी एक दिनी तेजी थी. कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी यमन के हौती विद्रोहियों ने ली थी.

    अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के नवंबर डिलीवरी अनुबंध में इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर पिछले सत्र के मुकाबले 0.65 फीसदी की नरमी के साथ 62.69 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था.