Category: खास ख़बरें

  • बिहार राज्य के चार लाख शिक्षक आज से गये अनिश्चित कालीन हरताल पर।।

    परवेज आलम,पटना : आल बिहार राज्य के चार लाख शिक्षक आज से गये अनिश्चित कालीन हरताल पर।।बताते चले कि बिहार के चार लाख शिक्षक सामान्य कार्य समान वेतन के मांग को लेकर बिहार सरकार को चेतावनी देते हुए अनिश्चित कालीन हरताल पर चले गए है जिस से राज्य में चल रहे मैट्रिक का परीक्षा बाधित हो रहा है।

    इस से पहले बिहार के चार लाख शिक्षकों ने बिहार सरकार के मख्यमंत्री औए शिक्षा मंत्री से सामान्य कार्य के बदले में सामान्य वेतन देने के लिए आग्रह किया था लेकिन बिहार सरकार शिक्षकों की बात को अनसुनी करती आरही है जिस कारण वश बाध्य हो कर मैट्रिक के परीक्षा के समय शिक्षकों ने सरकार को ठेंगा दिखाते हुए हरताल पर चले गए है।बिहार राज्य संघर्ष समन्वय शिक्षक संघ के बैनर तले उस समय तक शिक्षक हरताल पर बैठे रहेंगे जबतक बिहार सरकार चार लाख शिक्षकों को सामान्य काम के बदले सामान्य काम नही देदेती हैं।

  • दिल्ली विधानसभा चुनाव: पूर्वांचल फैक्टर कितना असर डालेगा, तीस सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं

    दिल्ली का विधानसभा चुनाव हो और हिन्दीभाषी राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश की चर्चा न हो यह असंभव सी बात है। यह कहावत है की दिल्ली का रास्तआ उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रता है और यह कहावत बहुत हद तक सही भी है सत्ताधारी दल भाजपा और उसके गठबंधन के पास उत्तर प्रदेश और बिहार से ही अकेले 100 से अधिक सांसद हैं इसलिए पूर्वांचल मतदाता को ध्यान में रखना हर पार्टी चाहेगी आज चुनाव प्रचार का आख़िरी दिन बचा है। जितनी रैलियां होनी है वह आज तक ही होगी। क्योंकि 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और 11 फ़रवरी को मतगड़ना होगी।

    पूर्वांचल फैक्टर

    दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों की संख्या के अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं. न्यूज़लॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी बताते हैं कि दिल्ली में 43 प्रतिशत वोटर पूर्वांचल के रहने वाले हैं जनसत्ता अख़बार से जुड़े वरिष्ट पत्रकार मनोज मिश्रा जो खुद भी पूर्वांचल से आते हैं, बताते हैं, “दिल्ली में 26 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में 20 प्रतिशत वोटर पूर्वांचली हैं. वहीं 10 विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों की संख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा है. ऐसे विधानसभा क्षेत्र संगम विहार, बुराड़ी, किराड़ी, विकासपुरी और उत्तम नगर है.’’

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर मनोज तिवारी का होना।

    जहाँ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जो की भोजपुरी गायक से सांसद बन्ने तक का सफ़र तय किया है। और अभी वह दिल्ली में भाजपा की कमान संभाल रहे हैं। इसके पीछे बस एक ही वजह है की वह पूर्वांचल से आते हैं और दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं इसको देखते हुए भाजपा के दिल्ली इकाई में मनोज तिवारी के विरोध के बावजूद भाजपा ने विधानसभा चुनाव की कमान मनोज तिवारी के हांथों में दे रखी है। और चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बिहार के उप मुख्यमंत्री को भी प्रचार की अहम ज़िम्मेदारी दी गई है। जिसका मुख्य कारण है पूर्वांचल के मतदाताओं की संख्या को ध्यान में रखा गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में अपनी सरकार होने का फ़ायदा उठाना चाहती है भाजपा तो भाजपा की तरफ़ से दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार की कमान वैसे तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के हांथों में है।

    कांग्रेस के लिए कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं कृति आज़ाद।

    उसी प्रकार कांग्रेस ने भी भाजपा के पूर्व सांसद और अब कांग्रेस के नेता कृति आज़ाद जो भारतीय क्रिकेट टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं और पिछला 2019 का लोकसभा से पहले भाजपा से कांग्रेस में आए और झारखंड के धनबाद लोकसभा से चुनाव लड़ा जिसमें उनहें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन उनकी भी अपनी राष्ट्रीय पहचान है। भले ही कृति आज़ाद अभी कांग्रेस में आए हैं लेकिन इनके पिता श्री भागवत झा आज़ाद बिहार के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं जो कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। कृति आज़ाद भी दरभंगा से तीन बार लोकसभा सदस्य और दिल्ली के गोल मार्केट से विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। इसलिए कांग्रेस ने भी अपनी शुन्य को दूर करने के लिए और पूर्वांचल के मतदाताओं को ध्यान रखते हुए उनहें दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रमुख बनाया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शिला दीक्षित जीनकी शादी उत्तर प्रदेश में कन्नौज में हुई थी और उनहोंने भी अपने को पूर्वांचल की कहकर हमेशा राजनीति की। लेकिन अभी कांग्रेस के पास शिला दीक्षित की मृत्यु के बाद कोई वैसा नेता नहीं है जो दिल्ली की जनता के पर अपना प्रभाव छोड़ सके। इसलिए कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है। कांग्रेस मैदान में अपने कुछ प्रत्याशीयों और राष्ट्रीय नेतृत्व के दम पर चुनाव लड़ रही है। इसलिए कांग्रेस की कोशिश है किसी भी तरह से अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया जा सके और विधानसभा में अपने शून्य के नम्बर को समाप्त किया जा सके। जबकि 2013 तक पूर्वांचल के मतदाताओं साथ कांग्रेस के साथ था।

    अपने पांच साल के विकास और केजरीवाल का चेहरा।

    आम आदमी पार्टी को अपने पिछले पांच सालो के कामों पर भरोसा है। और अरविंद केजरीवाल का एक मज़बूत चेहरा है जबकि और किसी दल के पास अरविंद केजरीवाल को टक्कर देने के लिए कोई नेता नहीं है और अगर मुख्य विपक्षी पार्टी भापजा के प्रदेश अध्यक्ष जो की अरविंद केजरीवाल के सामने कहीं दिखाई नहीं देते हैं और अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को पिछले चुनाव में किया गया वादा बिजली, पानी, स्वास्थ्य, मोहल्ला क्लिनिक और सरकारी स्कूल जैसे बुनियादी वादे को पूरा कर के दिल्ली की जनता के बीच अपने भरोसे को मज़बूत किया है। अब केजरीवाल भी क्यों पिछे रहते पूर्वांचल के मतदाताओं की बात की जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में आप के 14 विधायक पूर्वांचल से आते थे। इस बार भी आप ने 12 प्रतयाशी पूर्वांचल से संबंध रखते हैं। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली इकाई के पूर्व प्रमुख दिलीप पांडे और सरकार में मंत्री और वर्तमान दिल्ली इकाई के प्रमुख गोपाल राय भी पूर्वांचल से ही आते हैं। दिल्ली में अपने किए गए विकास और राजनीतिक समिकरण को बखूबी समझने वाले केजरीवाल को पूरी उम्मीद है की फिर से उनकी वापसी ज़रूर होगी । अब यह तो परिणाम ही बताएगा।

    Zain Shahab Usmani, Engineer, Columnist & Political Analyst. This is personal’s view of writer.

  • “शरजील इमाम, तुम इस देश में कन्हैया कुमार नहीं हो सकते” क्योंकि तुम मुसलमान हो!

    आजकल शरजील इमाम चर्चा में हैं। भाजपा की प्रतीक पॉलिटिक्स ने उसे देशद्रोह का ताजा प्रतीक बना दिया है, जबकि यही भाजपा सरकार आतंकवादी सप्लाई करने वाले देवेंदर सिंह पर देशद्रोह की धारा नहीं लगाती और न ही उसके आकाओं का कनेक्शन खंगालती है। वैसे सरकार, भाजपा और भाजपा के संबित जैसे प्रवक्ता वही कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए, जो उनकी राजनीति के अनुरूप है। लेकिन हम क्या कर रहे हैं?

    3 जनवरी को शाहीनबाग में सावित्रीबाई फुले जयंती मनाने के लिए हम शरजील से मिले थे। कोई आधे घण्टे की मुलाकात थी। शरजील में हमने पाया कि वह मुसलमानों की राजनीति को वर्षों से, आजादी के दिनों से ठगा हुआ महसूस करता है। उसे कांग्रेस, गांधी, सीपीएम से लेकर आज के नेताओं और दलित नेताओं, जैसे बहन जी अथवा चन्द्र शेखर आदि से सवाल थे। वह चाहता था कि शाहीनबाग का प्रोटेस्ट भी राजनेताओं और आंदोलन को कैरियर की तरह लेने वालों से बचे। शरजील इमाम मुसलमानों की राजनीति को उसी तरह एक दिशा देना चाहता है जैसा किसी भी अस्मितावादी आंदोलन के लोग देना चाहते हैं। यानी सम्बद्ध समूह द्वारा सम्बद्ध समूह की राजनीति।

    बिहार के जहानाबाद के एक स्थानीय नेता का बेटा शरजील ईमाम यद्यपि एक अच्छा आंदोलन शाहीन बाग में खड़ा करने वाले शुरुआती लोगो में एक था लेकिन वह उतना टैक्टिकल नहीं था जितना ऐसे आंदोलनों के निरन्तर संचालन के लिए होना चाहिए। उसने और उसके साथियों ने जनता का मूड समझे बिना, सबको विश्वास में लिये बिना 3 जनवरी के पहले ही शाहीनबाग के प्रोटेस्ट को वापस लेने की घोषणा कर दी। फिर क्या था उसके इस जल्दबाज बयान के लिए उसे भाजपा और अमितशाह का एजेंट तक कहा गया-जोकि ऐसा था नहीं। शाहीनबाग के प्रोटेस्ट को हालांकि दूसरे लोगों ने संभाल लिया लेकिन शरजील की यह जल्दबाजी हमसबको अखरी। लेकिन मुझे बुरा लग रहा था कि उसे शाह का एजेंट कहा जा रहा था, जबकि वह इस आंदोलन के प्रति ईमानदार था। कई बार आप अनायास ही अनपेक्षित खेमे में या तो धकेल दिये जाते हैं या समझे जाते हैं।

    और अब! अब परसो से उसका वायरल वीडियो।वीडियो में कथित तौर पर वह आसाम से शेष भारत को काटने की बात कर रहा है। बस क्या था? शाहीनबाग जैसे आंदोलनों से व्यथित भाजपा को अपने अंदाज के डैमेज कंट्रोल का मौका मिल गया। उस वीडियो को मैंने पूरा सुना। वह आसाम को कतई अलग करने की बात नहीं कर रहा, अलग देश की बात नहीं कर रहा। वह आसाम का सम्पर्क आंदोलनों के जरिये शेष भारत से काटने की बात कर रहा है। उसकी अगली दो-तीन पंक्तियां यह सिद्ध कर देती हैं। लेकिन भाजपा को तो जैसे संजीवनी मिल गयी है। दाढ़ी बढ़ाया एक मुसलमान नौजवान इंडिया से आसाम को काटने की बात कर रहा-ऐसा बिम्ब भाजपाइयों के लिए कितना आह्लादकारी होता है! आई टी सेल के बारे में पता करिये, वीडियो मिलते ही वहां मिठाईया बंटी होगी।

    और हम, हम लिबर्ल्स। हाय। जब बात अपने से अलग लोगों की आती है तो हम जलेबी भी छीलकर खाते हैं। कन्हैया कुमार पर जब भाजपाइयों ने, संघियों ने देशद्रोह का माहौल बनाया तो कन्हैया अपना बेटा था। उसके हर उटपटांग जवाब, बयान के लिए हम तर्क तलाशने लगे। लेकिन शरजील इतना खुशनसीब कहाँ! उसे तो हम उसकी स्थापनाओं में सिद्ध करके रहेंगे। कोई मौका नहीं देंगे कि वह एक अतिरेक और जल्दबाजी से अलग भी सोचे। कन्हैया की जाति और उसके धर्म ने उसे ‘फिर भी पवित्र’ रखा। बिहार के जदयू खेमे के भूमिहारों और अन्य दलों के भूमिहारों के उस दौर के बयान गौर करने लायक हैं। भूमिहार ही क्यों सम्पूर्णता में सारे सवर्णों के बयान, प्रायः।

    पर शरजील, शरजील को यह सुविधा नहीं मिलेगी। ऊपर से उसने गलत अवसर पर अपने अतिरेकी अंदाज का भाषण दिया है। उसे आसानी से भाजपा-संघ देशद्रोही प्रतीक बना देंगे और हम ऐसा बनाने में उनका अपने पूर्वग्रहों और मूर्खताओं के साथ सहयोग ही कर रहे होंगें।

    Sanjeev Chandan की फेसबुक वाल से ली गयी है ये लेखक की निजी विचार है

  • दरभंगा: CAA-NRC-NPR का विरोध, हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रोटेस्ट किया

    आज दरभंगा में नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टरऔर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के विरोध में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज किया. इस दौरान लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर एनआरसी, एनपीआर के साथ ही सीएए का विरोध किया.

    दरभंगा में CAA-NRC और NPR के विरोध को लेकर मानव श्रृंखला बनाई गई. इमारत शरिया के आह्वान पर NPR-CAA-NRC के विरोध में पूरे बिहार सूबे में लाखो के तादाद में आकर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया. इसकी शुरुआत किलाघाट के मदरसा हमीदिया के पास जिला मुहर्रम कमेटी में लोगो ने की. ये मानव श्रृंखला करामगंज होते हुए डीएम ऑफिस पर जाकर समाप्त हुई। ज्ञात रहे कि यह प्रोटेस्ट पिछले 7 दिनों से चल रही है ज़िला मोहर्रम कमेटी के पास जिसमें खास तौर कर बड़े पैमाने पर मुस्लिम औरतों शामिल रहती है.

    इस दौरान दोपहर 2 से 3 बजे तक करीब दो लाख से अधिक लोगों ने करीब 10 km किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई. इस तरह के सैकड़ों मानव श्रृंखला पूरे बिहार में बनाई गई। इसका मकसद बिहार सरकार को बताना था किस तरह ये काला कानून (CAA) जो कि सामाजिक तौर पर विभाजनकारी और भेदभावपूर्ण है इस क़ानून को सरकार तुरंत वापस ले।

    शाहीन बाग की तर्ज पर दरभंगा में मुस्लिम महिलाओं ने CAA-NRC और NPR के खिला फ अनिश्चितकालीन धरना का आज सातवां दिन है

    महिलाओं ने कहा किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि हमारी गंगा – जमुनी तहजीब को मिटा सके और धर्म के नाम पर हमें बांट सके और ये भी कहा कि अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो हर एक गली मोहल्लों में हज़ारों शाहीन बाग उठ खड़े होंगे।

    हालांकि हाथों में तिरंगा थामे धरने पर बैठे लोग न तो किसी सियासी पार्टी से जुड़े हुए हैं और न ही संगठन से।

    अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
    हर फर्द है मिल्लत की मुक़द्दर का सितारा।।

  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने डाली ‘जामिया स्टडी सर्किल’ की बुनियाद

    (दिल्ली) आज दिनांक 24 जनवरी 2020 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रो ने जामिया के विरासत को संजोने के लिए जामिया स्टडी सर्किल की बुनियाद डाली. इस मौक़े पर एक संवाद का भी आयोजन किया गया, जिसमे बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया.

    जामिया स्टडी सर्किल के बारे में हिदायतउल्लाह बताते हैं के इसका मक़सद जामिया की उस विचारधारा को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत जामिया की बुनियाद डाली गई थी. वो आगे बताते हैं के इस स्टडी सर्किल के ज़रिया जामिया के छात्रों को ना सिर्फ़ उनके विरासत से रूबरू कराया जाएगा, बल्के उनको देश विदेश के मौजूदा और पूर्व के हालात से भी रूबरू कराया जायेगा.

    आज ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी की सीढ़ीयों पर छात्र इकट्ठा हुवे, और “मुल्क के वो सियासी हालात जिसमे जामिया की बुनियाद डाली गई” पर बात रखते हुवे जामिया के छात्र मुहम्मद उमर अशरफ़ ने कहा के जामिया आज पुरे विश्व में एक आंदोलन की जगह के तौर पर जाना जा रहा है. पर बहुत कम लोगों के ये पता है कि जामिया ख़ुद एक आंदोलन की देन है, ये ना सिर्फ़ असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलन कि पैदावार है, बल्कि इसके पीछे पैनएशिया मूवमेंट है, उन्होंने रूस तुर्की युद्ध, ग्रीस तुर्की युद्ध, रूस जापान युद्ध और इटली लिबिया युद्ध का उदहारण देते हुवे बताया के इस युद्ध भारत के लोगों ने एशिया के देशों का न सिर्फ़ ज़ुबान से साथ दिया बल्कि पैसे से भी मदद कि.

    बालकान युद्ध का उदाहरण देते हुवे उन्होंने आगे कहा जामिया के संस्थापकों में से डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी ने 1911-12 मे हुए इस युद्ध मे तुर्की के समर्थन मे मेडिकल टीम की नुमाईंदगी की, जिसके बाद तुर्की ने 1 दिसम्बर 1915 को काबुल में राजा महेंद्र प्रताप कि अध्यक्षता में बनी आज़ाद हिंदुस्तान सरकार को मान्यता दे दी थी. इस सरकार की सरप्रस्ती जामिया की संग ए बुनियाद डालने वाले मौलाना महमूद उल हसन ने कि थी, इस सरकार के गृहमंत्री मौलाना ओबैदउल्ला सिंधी थे, जिन्होंने जामिया में पढ़ाया, इन लोगों का मक़सद ना सिर्फ़ भारत को आज़ाद करवाना था, बल्कि पुरे एशिया से साम्राज्यवादी ताक़त को बाहर निकलना था.

    इस मौक़े पर छात्रों से सलाह भी ली गई, जिसमे छात्रों बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, देवांशी माहेश्वरी ने इस पहल का स्वागत करते हुवे कहा के ये छत्रों के द्वारा शुरू कि गई एक बहुत अच्छी पहल है, और इसी तरह विभिन्न मुद्दे पर संवाद होते रहनी चाहिए.

    जामिया के एम.सी.आर.सी के छात्र मुदस्सिर नज़र ने कहा के जामिया स्टडी सर्किल से ना सिर्फ़ छात्रों का बल्के समाज के कमज़ोर तबक़े का भी फ़ायदा होगा.

    एहसान उर रहमान के अनुसार छात्रों का काम ना सिर्फ़ परिक्षा पास कर नौकरी करना है, बल्कि समाज के विकास में भी सहयोग करना है.

    इस मौक़े पर अफ़ाक़ हैदर, नेहाल ज़ैदी, सलमान अहमद, आरिफ़ा, मदिहा आदि छात्र मौजूद थे.

  • शाहीन बाग की तर्ज पर दरभंगा में मुस्लिम महिलाओं ने CAA-NRC और NPR के खिलाफ संभाली मोर्चे की कमान

    देश में सी ए ए, एन पी आर और एन आर सी के खिलाफ महिलाओं की उठती आवाज़ के स्वर आज दरभंगा में भी सुनाई दिए। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amendment act) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर दरभंगा की महिलाओं ने भी दरभंगा शहर के किला घाट के पास जिला मोहर्रम कमेटी के दफ्तर के सामने अनिश्चितकालीन धरना की शुरुआत की है

    महिलाओं ने कहा किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को मिटा सके और धर्म के नाम पर हमें बांट सके और ये भी कहा कि अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो हर एक गली मोहल्लों में हज़ारों शाहीन बाग उठ खड़े होंगे।

    हालांकि हाथों में तिरंगा थामे धरने पर बैठे लोग न तो किसी सियासी पार्टी से जुड़े हुए हैं और न ही संगठन से।

    अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
    हर फर्द है मिल्लत की मुक़द्दर का सितारा।।

  • अररिया की महिलाओं ने CAA-NPR-NRC के विरोध में सड़कों पर उतरी और पुरजोर तरीके से विरोध दर्ज किया

    देश में सी ए ए, एन पी आर और एन आर सी के खिलाफ महिलाओं की उठती आवाज़ के स्वर आज अररिया में भी सुनाई दिए। आज अररिया महिला नागरिक मंच द्वारा यतीम खाना से ए डी बी चौक होते हुए टाउन हॉल तक एक शांति मार्च निकाली गई जिसके बाद टाउन हाल पर बड़ी सभा आयोजित की गई। लवली नवाब ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि हमारी गंगा – जमुनी तहजीब को मिटा सके और धर्म के नाम पर हमें बांट सके। एन पी आर, एन आर सी, सी ए ए विरोधी संघर्ष मोर्चा की समन्वयक कामायनी स्वामी ने विवेकानंद जयंती पर सभा को याद दिलाया कि विवेकानंद का भारत जहां किसी भी देश के सताए और पीड़ित लोग आ कर शरण ले सकते थे, सी ए ए उस भारत पर वार करता है। फातिमा परवीन ने कहा कि अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो हर एक गली मोहल्लों में हज़ारों शाहीन बाघ उठ खड़े होंगे। तस्नीम कौसर ने भी अररिया की महिलाओं के जज्बे को सलाम कर आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका को दोहराया। नौजवान नौशीन परवीन ने बोला कि जितनी लाठी – गोली चले अब, हम लोग पीछे हटने वाले नहीं है। रमिका रागिब ने शायरी पेश करते हुए कहा कि शिव की गंगा भी पानी है, आबे ज़मज़म भी पानी है, अब पानी का मज़हब क्या होगा?! धर्म के नाम पर जनता को बांटने वाली भारत सरकार को आज इस मंच से पुरजोर चानौती मिली है कि गांधी – बिस्मिल – भगत सिंह का भारत ज़िंदा है और उसे हम किसी कीमत पर नहीं खोएंगे। जे जे एस एस की यूथ टीम – कल्याणी, तन्मय, डोली, कृष्चम, मीरा, और अन्य साथियों ने गीत गा कर सभा की आवाज़ बुलंद करी कि हम गीतों से, नारों से अपनी आवाज़ उठाएंगे और चाहे जो हो हम आगे बढ़ते जाएंगे। आज की सभा को एन पी आर, एन आर सी, सी ए ए विरोधी संघर्ष मोर्चा और हम हैं भारत के कोऑर्डिनेटर ज़ाहिद अनवर भी सभा में मौजूद थे। उन्होनें बताया कि दोनों संगठनों का समर्थन इस रेली को दिया गया है!
    जाहिद अनवर
    कन्वेनर- “हम है भारत”

  • “हम हैं भारत” के बैनर तले कारगिल पार्क (अररिया), NRC-CAA-NPR विरोधी धरना को प्रशासन ने बंद करा दिया

    “हम हैं भारत” के बैनर तले कारगिल पार्क में जो धरना चल रहा है जिसके लिए “हम हैं भारत” की तरफ़ से अनुमंडल पदाधिकारी अररिया को सूचना दे दी गई थी, धरना पहले चरण में दिनांक 7 जनवरी से 22 जनवरी तक चलना है, लेकिन पिछले दो दिन से प्रशासन की तरफ़ से अब उस जगह पर आपत्ति जताई जा रही थी! आज जिला प्रशासन के द्वारा कारगिल पार्क से धरना बन्द करा दिया गया और कहा गया है कि धरना कारगिल पार्क से हटा कर कहीं और ले जायें! हम लोगों के बहुत प्रयास के बात भी कारगिल पार्क में धरना करने की अनुमती नहीं दी गई जो बहुत दुखद है! आज कारगिल पार्क से धरना हटा लिया गया है! अब कल से ये धरना कॉंग्रेस कार्यालय के सामने टाऊन हॉल के निकट सुबह 10बजे से रात्री 8 बजे तक चलेगा! इस जगह का अनुमती भी ले ली गई है ।

    ज़ाहिद अनवर, अररिया जिला
    कन्वेनर- “हम हैं भारत”

  • जम्मू कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला , धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है

    नई दिल्ली ( मिल्लत टाइम्स डेस्क )

    सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों पर सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने सरकार के फैसलों पर सवाल खड़े किए और धारा 144 के तहत जो भी रोक लगाई गई हैं, उन्हें सार्वजनिक पब्लिश करने को कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट सरकार के तर्कों से संतुष्ट नहीं दिखा.

    सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी

    राज्य सरकार की ओर से जो फैसले सार्वजनिक किए जाएंगे, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है. जो सरकार के फैसलों का रिव्यू करेगी और सात दिन के अंदर अदालत को रिपोर्ट सौपेंगी

    7 दिन के अंदर रिव्यू हो सभी पब्लिश

    SC ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार इंटरनेट पर पाबंदी, धारा 144, ट्रैवल पर रोक से जुड़े सभी आदेशों को पब्लिश करना होगा. इसके साथ ही 7 दिन के अंदर इन फैसलों का रिव्यू करने का आदेश दे दिया है

    धारा 144 को लेकर अदालत की सख्ती

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है, बेहद जरूरी हालात में ही इंटरनेट को बंद किया जा सता है. SC ने कहा कि धारा 144 को अनंतकाल के लिए नहीं लगा सकते हैं, इसके लिए जरूरी तर्क होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह तुरंत ई-बैंकिंग और ट्रेड सर्विस को शुरू करे.

    क्या हटेंगी घाटी से पाबंदियां?

    सुप्रीम कोर्ट अब से कुछ देर में जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाने वाला है. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में राजनेताओं की एंट्री पाबंदी, इंटरनेट-मोबाइल कॉलिंग पर रोक समेत कई पाबंदियां लगी हुई हैं. इन्हीं को हटाने के लिए SC में याचिका दायर की गई थी.

    कुछ सेवाओं पर मिली थी छूट

    बता दें कि बीते दिनों सरकार की ओर से कुछ सेवाओं में छूट दी गई थी. इनमें 40 लाख पोस्टपेड सेवाएं, अस्पतालों में इंटरनेट, धारा 144 में छूट आदि शामिल था. गौरतलब है कि इन याचिकाओं के अलावा सर्वोच्च अदालत में अनुच्छेद 370 को लेकर भी कुछ याचिकाएं दाखिल की गई हैं.

  • फुलवारी शरीफ के हिंसक झड़प में लापता हुए आमिर हंजला का मिला शव , मौलाना अनीसुर रहमान कासमी ने त्वरित कार्रवाई की मांग की ।

    राष्ट्रीय जनता दल एवं महागठबंधन के द्वारा बिहार बंद के दौरान फुलवारी शरीफ में हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 7 लोगों को गोली लगी थी उन लोगों का इलाज एम्स में चल रहा है जबकि आमिर हंजला बीते 10 दिनों से गायब था जिस की लाश बीती रात मिली 
    पटना ( मिल्लत टाइम्स / फजलुल मोबीन )
    फुलवारी शरीफ में 21 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ राजद के आह्वान पर बिहार बंद के दौरान हुए हिंसक झड़प के बाद के लापता हुए 18 वर्षीय आमिर हंजला का शव 30 दिसंबर को रात 10 बजे पुलिस को फुलवारी शरीफ ब्लॉक के पीछे एक झाड़ी में मिला था। जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया । वही इस खबर पर इलाके में सनसनी फैल गई ।
    आमिर हंजला की फाइल फोटो
    जिसके बाद पीएमसीएच में भारी पुलिस व्यवस्था के दौरान पोस्टमार्टम किया गया। वही भारी पुलिस तैनाती के बीच नमाजे जनाजा के बाद चितकोहरा कब्रिस्तान में दफन किया गया ।
     ज्ञात हो कि: बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के कर्मचारी सोहेल अहमद का बेटा 18 वर्षीय आमिर हंजला सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लापता हो गया था।  हंजला के बारे में कहा जाता है कि विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद, वह संगत मोहल्ला की ओर गया था।  तब से उसका मोबाइल बंद आ रहा था।  इस खबर को तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है और आमिर हंजला को श्रद्धांजलि दी जा रही है ।

    मौलाना अनिसुर रहमान कासमी

     

     वहीं मिल्लत टाइम्स से बात करते हुए ऑल इंडिया मिल्ली कॉन्सिल के उपाध्यक्ष मौलाना अनीस-उर-रहमान कासमी (पूर्व नाजिम-ए-शरीयत पटना) ने आमिर हंजला की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाया । उन्हों ने कहा कि पुलिस की कमजोरी के वजह से दिन के उजाले में युवक को अगवा किया गया और बाद में असामाजिक तत्वों द्वारा उसकी हत्या कर दी गई।  लेकिन आज दस दिन बाद पुलिस ने शव बरामद किया है, जो आश्चर्यजनक है।  उन्होंने बिहार से सरकार से फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सुनवाई तथा हत्यारों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बिहार सरकार से पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की भी मांग की है ।