Category: खास ख़बरें

  • कंगना ने मुंबई पहुंचते ही कहा-आज मेरा घर टूटा है, कल उद्धव ठाकरे का घमंड टूटेगा

    कंगना रनौत मुंबई पहुंच चुकी हैं और मुंबई पहुंचते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘आज मेरा घर टूटा है कल तुम्हारा घमंड टूटेगा.’

    कंगना ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करके कहा है, ”उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है तूने फ़िल्म माफ़िया के साथ मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है. आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा. ये वक़्त का पहिया है याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता और मुझे लगता है तुमने मुझ पर बहुत बड़ा अहसान किया है, मुझे पता था कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी आज मैंने महसूस किया है. आज मैं इस देश को वचन देती हूं कि मैं अयोध्या पर ही नहीं कश्मीर पर भी एक फ़िल्म बनाऊंगी. और अपने देशवासियों के जगाऊंगी क्योंकि मुझे पता था कि ये हमारे साथ होगा तो लेकिन ये मेरे साथ हुआ है इसका कोई मतलब है, कोई मायने है. उद्धव ठाकरे अच्छा हुआ कि ये क्रूरता मेरे साथ हुई क्योंकि इसके कुछ मायने हैं…जय हिंद, जय महाराष्ट्र”

    कंगना गुरूवार को चंडीगढ़-मुंबई फ़्लाइट से मुंबई पहुंची हैं. जब वह एयरपोर्ट पर पहुंची तो बाहर करणी सेना कंगना के समर्थन में और शिवसेना विरोध में नारेबाज़ी कर रही थी.

    आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेती कंगना रनौत के दफ़्तर पर मुंबई महानगरपालिका की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने बीएमसी से कंगना की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए भी कहा है.

    इससे पहले मुंबई महानगरपालिका की एक टीम ने अभिनेत्री कंगना रनौत के बंगले के कुछ हिस्सों को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी थी जिन्हें वो अवैध तरीक़े से किया गया बदलाव बता रहे थे.

    कंगना के वकील रिज़वान सिद्दिक़ी ने कहा कि बीएमसी ने जो नोटिस दी थी उसका जवाब पहले ही दे दिया गया था.

    उन्होंने पत्रकारों से कहा,”बीएमसी ने जो ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस दिया था वो बे​बुनियाद है और अवैध है, स्टॉप वर्क उनको देना पड़ता है जिनके घर में काम चालू हो. वो अवैध तरीके से घर में घुसे, आस पड़ोस में सबको धमकी देकर घुस गए. नोटिस का जवाब मैंने कल ही दे दिया था.”

  • अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र विधानसभा करेगी कार्रवाई

     

    रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दाख़िल किया गया है.

    शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक ने अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ ये प्रस्ताव रखा. ये प्रस्ताव रखने के बाद विधानसभा में हंगामा हुआ और आधे घंटे के लिए काम रोक दिया गया. विधानसभा ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. ऐसे में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ सदन जल्द ही कार्रवाई शुरू कर सकता है.

    अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ सख्त से सख़्त कार्रवाई की मांग परिवहन मंत्री अनिल परब ने की है.

    अनिल परब ने कहा, “अगर कोई पत्रकार के ख़िलाफ़ कुछ बात करे या फिर उन्हें हाथ लगाए तो इस विधानसभा में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक्ट बनाया गया था. पर कोई पत्रकार ही किसी जन प्रतिनिधि के बारे में कुछ कहे तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं.”

    प्रताप सरनाइक ने कहा, “मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार के ख़िलाफ़ अर्नब गोस्वामी ने जिस भाषा का प्रयोग किया है, उसकी मैं निंदा करता हूं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उद्धव ठाकरे और शरद पवार, दोनों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास हुआ है. अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई हो.”

    अनिल परब ने अर्नब गोस्वामी के बारे में कहा, “अर्नब को लगता है कि वो खुद ही जज हैं. उद्धव ठाकरे और शरद पवार के ख़िलाफ़ उन्होंने तू-तड़ाक वाली शैली में बात की है. इस सदन को जिस तरह से पत्रकारों की सुरक्षा का क़ानून पास करने का अधिकार है उसी तरह से किसी पत्रकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का भी अधिकार है.”

    अनिल परब कहते हैं, “अगर किसी ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ गैर-ज़िम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया तो उस पर कार्रवाई होती है तो फिर मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ गैर-ज़िम्मेदारी भरे बयान पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? प्रधानमंत्री को कोई कुछ बोले तो आपको गुस्सा आता है पर अगर कोई मुख्यमंत्री को बोले तो आपको गुस्सा नहीं आता है क्या? सुपारी लेने वाले पत्रकारों पर कार्रवाई करनी चाहिए.”

    अन्वय नाइक की आत्महत्या का मामला
    महाराष्ट्र विधानसभा में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि अन्वय नाइक मामले में अर्नब गोस्वामी की जांच होगी. अन्वय नाइक एक मराठी इंटीरियर डिज़ानइर थे, जिन्होंने मई 2018 में आत्महत्या कर ली थी.

    आत्महत्या करने से पहले लिखे अपने ख़त में उन्होंने आरोप लगाया था कि अर्नब गोस्वामी ने रिपब्लिक नेटवर्क के स्टूडियो का इंटीरियर डिज़ाइन कराने के बाद भुगतान नहीं किया था.

    अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा, “अन्वय नाइक की पत्नी और बेटी ने मेरे पास आकर अर्नब गोस्वामी की शिकायत की है, इसलिए महाराष्ट्र पुलिस अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ जांच करेगी. अन्वय नाइक की पत्नी अक्षता नाइक और बेटी प्रज्ञा नाइक के शिकायतों के आधार पर ही जांच होगी.”

     

  • Alt News के फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर पर किस मामले में FIR हुई है?

    ऑल्ट न्यूज़. फैक्ट चेकिंग वेबसाइट है. इसके को-फाउंडर मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. एक एफआईआर रायपुर में हुई है और एक दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने दर्ज की है. जुबैर पर आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की शिकायत के बाद ये मामले दर्ज किए गए हैं. जुबैर पर आरोप है कि उन्होंने ट्विटर पर एक बच्ची को धमकाया और प्रताड़ित किया.

    दिल्ली साइबर क्राइम के डीसीपी अन्येश रॉय और रायपुर एसएसपी अजय यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से एफफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है.

    NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि NCPCR ने 8 अगस्त को पोस्ट का संज्ञान लिया और जांच शुरू की. हमने ट्विटर से जानकारी मांगी. ट्विटर के जवाब से असंतुष्ट होकर हमके उनके प्रतिनिधि को तलब किया. ट्विटर को प्रासंगिक जानकारी साझा करने के लिए 10 दिनों का और वक्त दिया गया है. हमने पुलिस अधिकारियों को भी कारवाई के लिए कहा.

    जुबैर के किस ट्वीट पर शिकायत हुई?

    ट्विटर पर जगदीश सिंह नाम के शख्स के साथ बहस के बाद जुबैर ने उसकी प्रोफाइल फोटो पोस्ट करते हुए जवाब दिया था. जुबैर ने फोटो में मौजूद नाबालिग लड़की का चेहरा ब्लर कर दिया था. 6 अगस्त को किए गए इस ट्वीट में  उन्होंने लिखा था,

    हेलो जगदीश सिंह, क्या आपकी प्यारी सी पोती को आपके पार्ट टाइम नौकरी के बारे में पता है, जहां आप सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देते हैं? मेरी सलाह है कि आप अपनी प्रोफाइल फोटो बदल लें.

    इसी ट्वीट को लेकर केस किया गया है कि ज़ुबैर ने एक नाबालिग की पहचान को इस तरह उजागर किया. उस ट्वीट की वजह से नाबालिक को ट्विटर पर प्रताड़ित किया गया.

    मामले पर ऑल्ट न्यूज़ ने क्या कहा?

    इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जुबैर ने कहा कि यह एकदम ओछी शिकायत है. मैं कानूनी रूप से इसका जवाब दूंगा.

    ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने ट्विटर पर ऑल्ट न्यूज़ की तरफ से स्टेटमेंट जारी किया. ऑल्ट न्यूज़ ने कहा,

    कानूनी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को शिकार बनाया जा रहा है. ऑल्ट न्यूज़ जुबैर के साथ खड़ा है. जुबैर फेक न्यूज़ से लड़ने में सबसे आगे रहे हैं और उनका यह काम उन लोगों को नुकसान पहुंचाता है जिन लोगों ने भारतीय लोकतंत्र को नीचा दिखाने के लिए गलत जानकारी को हथियार बनाया हुआ है.

  • चिराग पासवान का एक और पत्र जिसका जवाब नीतीश कुमार के पास नहीं |

    चिराग पासवान  के एक पत्र का जवाब नीतीश कुमार  के पास नहीं है. दलितों ने चिराग पासवान के सामने नीतीश कुमार के फैसले पर उठाए सवाल हैं जिसके बाद चिराग ने नीतीश कुमार को पत्र लिखा है. चिराग पासवान ने कहा है कि यदि चुनावी घोषणा नहीं है तो पिछले 15 साल में जितने भी दलितों की हत्याएं हुई हैं उन सभी के परिजनों को सरकार नौकरी दे. गौरतलब है कि बिहार सरकार ने दलित की हत्या होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. आने वाले दिनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं.

    चिराग पासवान ने कहा है कि एससी, एसटी समाज का कहना कि इसके पूर्व तीन डिसमिल जमीन देने का वादा भी सरकार ने पूरा नहीं किया था जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति समाज को निराशा हुई थी. हत्या एक अपराध है और अपराधियों में डर न्याय प्रक्रिया का होना चाहिए ताकि हत्या जैसे जघन्य अपराध से बचें.

    चिराग पासवान ने नीतीश से कहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति ही नही बल्कि किसी वर्ग के किसी भी व्यक्ति की हत्या न हो, इस दिशा में भी कठोर कदम उठाने की जरूरत है. पिछले 15 सालों में जितने भी एससी-एसटी समुदाय के लोगों की हत्या के मामले न्यायालय में लंबित हैं उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाए. इन दोनो मांगों के साथ लोक जनशक्ति पार्टी सहमत है. लोजपा की यह मांग मांगने से सरकार पर सम्पूर्ण बिहारी का विश्वास बढ़ेगा, अन्यथा जनता इसको मात्र चुनावी घोषणा मानेगी.

     

  • RRB NTPC 2020: रेलवे की तीन कैटेगरी में है 1 लाख से अधिक वैकेंसी, इस दिन से शुरू होंगी परीक्षाएं

    RRB Exam 2020: रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण अब तक परीक्षा आयोजित नहीं कराई जा सकी थी.

    RRB NTPC Exam Date: रेलवे बोर्ड (Indian Railway Board) के अध्यक्ष वी के यादव ने शनिवार को कहा कि रेलवे करीब 1.40 लाख पदों पर भर्ती के लिये 15 दिसंबर से कंप्यूटर आधारित परीक्षा  (Computer-based examination) कराना शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि इन पदों के लिए करीब 2.42 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 35208 पद गैर तकनीकी लोकप्रिय श्रेणी (एनटीपीसी) जैसे गार्ड, कार्यालय लिपिक, वाणिज्यिक लिपिक और अन्य, 1663 पद पृथक और मंत्रालयी श्रेणी जैसे आशुलिपिक आदि और 1,03,769 पद वर्ग-एक के हैं जिनमें पटरियों का रखरखाव करने वाले, प्वाइंटमैन आदि आते हैं.

    रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण अब तक परीक्षा आयोजित नहीं कराई जा सकी थी. यादव ने कहा, “तीनों श्रेणियों के पदों के लिये कंप्यूटर आधारित परीक्षा 15 दिसंबर से शुरू होगी और विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा जल्द ही की जाएगी.”

    यादव ने कहा, “हमनें विभिन्न श्रेणियों में 1,40,640 पदों पर भर्ती के लिये आवेदन आमंत्रित किये हैं. इनकी अधिसूचना कोविड से पहले जारी की गई थी. इन आवेदनों की जांच का काम पूरा हो गया था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण कंप्यूटर आधारित परीक्षा पूरी नहीं हो सकी थी.”

    रेलवे की परीक्षाओं की घोषणा करते हुए रेल मंत्री पीयूश गोयल ने भी शनिवार को एक ट्वीट किया था.

    रेलवे के एक बयान में कहा गया है कि रेलवे भर्ती बोर्ड सभी नोटिफाईड वैकेंसियों के लिए कंप्यूटर-आधारित परीक्षा आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है और महामारी के बीच जमीनी स्थिति का सक्रिय रूप से आकलन कर रहा है.

  • सुशांत केस : रिया चक्रवर्ती के वकील बोले- किसी से मोहब्बत करना गुनाह है तो प्यार के नतीजे भुगतने को तैयार

    रिया के वकील ने कहा, “रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार होने के लिए तैयार हैं. यदि किसी से प्यार करना गुनाह है तो उन्हें अपने प्यार का अंजाम भुगतना पड़ेगा.”

     सुशांत सिंह राजपूत मामले (Sushant Singh Rajput Case) में सीबीआई (CBI) समेत तीन एजेंसियों की जांच का सामना कर रहीं रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. इस बीच, रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश माने शिंदे ने रविवार को कहा कि रिया चक्रवर्ती गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं. अगर किसी से मोहब्बत करना गुनाह है तो वह प्यार का अंजाम भुगतने के लिए तैयार हैं. बता दें कि रिया चक्रवर्ती के घर आज सुबह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टीम पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए दफ्तर भी बुलाया गया है.

    रिया के वकील ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “रिया चक्रवर्ती गिरफ्तार होने के लिए तैयार हैं. यदि किसी से प्यार करना गुनाह है तो उन्हें अपने प्यार का अंजाम भुगतना पड़ेगा. निर्देश होने के नाते उन्होंने (रिया चक्रवर्ती) बिहार पुलिस, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा लगाए गए मामलों में अग्रिम जमानत के लिए किसी अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया.

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    ANI
    @ANI
    #RheaChakraborty is ready for arrest as it’s witch-hunt. If loving someone is a crime she’ll face consequences of her love. Being innocent she hasn’t approached any court for anticipatory bail in all cases foisted by Bihar Police with CBI, ED & NCB: Satish Maneshinde, her lawyer
    बता दें कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती (Actor Rhea Chakraborty) के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती ने शनिवार को एक बयान जारी किया था. उन्होंने सुशांत केस में ड्रग्स एंगल के आरोपों की जांच में उनके 24 वर्षीय बेटे शौविक चक्रवर्ती (Showik Chakraborty) की गिरफ्तारी की निंदा की. रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्रजीत चक्रवर्ती ने बयान में कहा,”बधाई हो भारत, आपने मेरे बेटे को गिरफ्तार किया है, मुझे यकीन है कि अगला नंबर मेरी बेटी का है और मुझे नहीं पता कि इसके बाद कौन गिरफ्तार होगा.

  • देश की अर्थवेवस्था चौपट मुख्य मीडिआ आखिर चुप क्यू है ? किया सिर्फ सुशांत की ही खबर चले गई या फिर देश के अहम् मुद्दों पर भी दंगाई मीडिआ बात करे गा?

    देश की अर्थव्वस्था आज़ादी के बाद सब से बुरे दौर में है ,लोगो का रोज़गार ख़तम हो गया है ,लाखो लोगो की नौकरिया चली गयी ,पुरे देश से हर दिन किसानो के आत्महत्या की तस्वीरें आ रही है ,देश का नौजवान आज सर्कार से रोज़गार की गुहार लगा रहा है। नौकरिया मांग रहा है
    देश के किसानो को उनके अनाज की मानसिब दाम नहीं मिल रहा है और अगर उनकी जमीने ली जा रही है तो उसका सही मुआवज़ा नहीं मिल रहा है ,देश की बेटिया इस मोदी सरकार में सुरक्छित नहीं है सब का साथ सब का वकास के नारे की बात करने वाली मोदी सरकार आज  उधोग पतियों की सरकार बन कर रह गयी है ,इस देश में जनता के मसाइल की बौछार है लेकिन आज का मुख्या मीडिआ इन सारी बातो से मुँह मोड़ कर सरकार के चाटुकारिता में लगा हुआ है उसको सिर्फ सुशांत की खबर का ही कवरेज करना है चाहे देश की आम जनता भूक से मर जाये उसको कोई परवाह नहीं है ,गोदी मीडिआ लोगो को दंगाई बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है आज का यह मीडिआ वास्तव में मीडिआ नहीं रह गया यही बल्कि दंगाई मीडिआ बन गया है।
    देश का युवा सरकार से रोज़गार मांग रहा है ,सरकार उनकी बातो को नहीं सुन रही  तो ताली थाली बजा कर सरकार को जगाने की कोशिश कर रहा यही लेकिन,उसके बावजूद भी गोदी मीडिआ को यह सारी चीजे नहीं दिख रही है।

     

  • राजस्थान कांग्रेस मे गहलोत-पायलट के मध्य छिड़ी वर्चस्व की जंग मे घटे घटनाक्रम मे अचानक चार पदो पर हुई नियुक्तियों मे मुस्लिम नदारद रहा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य पीछले कुछ महीनों से चल रही राजनीतिक वर्चस्व की जंग मे कल अचानक घटे घटनाक्रम से आये नये मोड़ के बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद से बरखास्त करके शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा को नया पीसीसी चीफ मनोनीत किया गया है। डोटासरा के अलावा युवा कांग्रेस, सेवादल व एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष भी पार्टी हाईकमान द्वारा नये मनोनीत किये गये है। जिनमे एक भी मुस्लिम को अध्यक्ष पद पर मनोनीत नही करने को कांग्रेस द्वारा अपने परम्परागत वोटबैंक मुस्लिम समुदाय की पूरी तरह अनदेखी करना प्रदेश मे चर्चा का विषय बना हुवा है कि मुस्लिम कांग्रेस राजनीति मे ना तीन मे है ओर ना तेराह मे गिने जा रहे है। जबकि कांग्रेस के वर्तमान समय मे नो मुस्लिम विधायक है जो अभी तक अशोक गहलोत के केम्प मे ही बैठे हुये है।

    गहलोत-पायलट के मध्य जारी राजनीतिक वर्चस्व की जंग के आसमान छुने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाईकमान के मार्फत अचानक संगठन स्तर पर बदलाव करवाकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा (जाट), राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पर विधायक गणेश घोघरा (आदिवासी), एनएसयूआई के अध्यक्ष पद पर अभिषेक चोधरी (जाट) व प्रदेश सेवादल अध्यक्ष पद पर हेमेंद्र शेखावत (राजपूत) को मनोनीत करवा कर पायलट खेमे को मात देने की कोशिश करते हुये केंद्रीय स्तर पर मोजूद कांग्रेस हाईकमान के कोकस पर अभी भी अपनी मजबूत पकड़ होना साबित किया है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वेसे ऊपर से अपने आप को सेक्यूलर व गांधीवादी होने के साथ साथ मुस्लिम हितैषी दिखाने की भरपूर कोशिश करते रहे है। जिसके कारण चाहे प्रदेश स्तर पर ना सही पर राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले मे उनकी उजली छवि देखी जाती है। जबकि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री काल पर नजर दोड़ाये तो मुस्लिम समुदाय के प्रति उनके काम करने का तरीका इससे अलग नजर आता है। जब से अशोक गहलोत की राजनीति मे चमक-धमक बढी है तब से उनके ग्रह जिले जोधपुर से मुस्लिम विधायक बनने का सीलसीला खत्म हो चुका है। अशोक गहलोत के पीछले कार्यकाल मे जोधपुर के बालेसर मे मुस्लिम-मालियो मे विवाद हुवा तो उसमे सरकारी स्तर पर मुस्लिम समुदाय को कुचला गया था। जिसकी रिपोर्ट विभिन्न समाचार पत्रो की सुर्खियां बनी थी। इन्ही गहलोत के कार्यकाल मे जैसलमेर-बाडमेर जिले के 32 मुसलमानों को रासुका मे बंद किया गया था।

    अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनने से पहले राजस्थान सरकार मे ग्रहमंत्री रहे है। तब काला कानून “टाडा” के दूरूपयोग होने के खिलाफ आवाज बूलंद होने के मध्य तत्तकालीन ग्रहमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश मे टाडा कानून के तहत पहली गिरफ्तारी एक मुसलमान की करने के आदेश दिये थे। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री कार्यकाल मे भरतपुर के गोपालगढ़ कस्बे की मस्जिद मे नमाजियों पर पुलिस द्वारा गोली चलाकर मारने की शर्मनाक घटना घटित हुई थी। जिसमे पीडित मुसलमानों को ही मुलजिम बनाकर गिरफ्तार किया गया था। सीआई फूल मोहम्मद को सवाईमाधोपुर के सुरवाल कस्बे मे सरेआम डयूटी के समय चलाकर मारने की घटना को कभी भूलाया नही जा सकता है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री गहलोत के वर्तमान कार्यकाल मे महाधिवक्ता व अतिरिक्त महा अधिवक्ताओं के मनोनयन मे मुस्लिम प्रतिनिधित्व नही दिया गया। मंत्रीमण्डल गठन मे एक मात्र शाले मोहम्मद को मंत्री बनाया गया जिसको अल्पसंख्यक मंत्रालय तक सीमित रखा गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे कांग्रेस की सत्ता लाने मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस के वर्तमान असमंजस वाले हालात मे भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनकी कांग्रेस पार्टी की दया द्रष्टि का पात्र नही समझा गया तो माने कांग्रेस व गहलोत के अच्छे दिनो मे तो समुदाय को अछूत बना कर रखा जा सकता है। कल चारो पदो पर हुये मनोनीत अध्यक्षों के लिये इलेक्सन नही बल्कि मनोनयन (सलेक्शन) हुवा है। मनोनयन मे पार्टी व नेताओं की केवल कृपा दृष्टि व जेहनी सोच निर्भर करती है।

  • जन्मदिन मुबारक हो प्रिय अखिलेश यादव

    २०१२ का यूपी चुनाव जिसने भी देखा है उसे याद होगा कि कैसे अचानक एक नौजवान साइकिल से चलकर पूरा यूपी नाप डालता है। उस नौजवान की आँखों में तमाम नए सपने थे जो उसने संजोए थे अपने प्रदेश के लिए, अपनी पार्टी के लिए, मुल्क की जनता के लिए। आँखों में सुंदर स्वप्न और व्यवहार में गजब की आत्मीयता लिए वह युवक राजनीपदार्पण करतापर है और बहुत कुछ उलट-पलट कर रख देता है।

    समाजवादी विचारधारा पर खड़ी पार्टी जो उस वक्त प्रौढ़ावस्था की तरफ़ मुड़ चुकी होती है उसमें अखिलेश यादव का अविर्भाव एक प्रगतिशील, लिबरल और बहुत कुछ बड़ा करने के लिए आतुर युवा के तौर पर होता है।

    अखिलेश यादव वह शख़्सियत हैं जो अपने कर्मक्षेत्र में तमाम बड़े परिवर्तनों और अपने स्वभाव में अद्वितीय विनम्रता बरकरार रखने वाले राजनेता के तौर पर लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ चुके हैं।

    एक मुख्यमंत्री के तौर पर जिस रफ़्तार से उन्होंने यूपी जैसे बीमारू समझे जाने वाले राज्य को महज़ पाँच सालों में विकास के जिस पथ पर दौड़ाया है वह अविस्मरणीय है।

    जिस राज्य की सड़कें अपने गड्डों की वजह से पूरे देश में कुख्यात थीं वहाँ अखिलेश यादव महज़ १८ महिनों के अल्प समय में एक ऐसी सड़क बनाकर देते हैं जिसकी गुणवत्ता महज़ इस बात से समझी जा सकती है कि आपातस्थिति में उस पर लड़ाकू विमान तक उड़ान भर सकते हैं।

    एक ऐसा राज जहां कई-कई बच्चे स्नातक, परास्नातक होने के बाद भी निर्धनता की वजह से कंप्यूटर या लैपटॉप जानते तक नहीं थे वहाँ बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद हर बच्चे को लगातार पाँच साल hp के बेहतरीन लैपटॉप सरकार ने मुफ़्त देकर “ज्ञान की क्रांति” का मार्ग खोल दिया।

    राजधानी लखनऊ में HCL-IT City, Amul, Lulu Mall जैसी बड़ी कंपनियाँ खड़ी कर दी गईं जिससे रोज़गार सृजन किया जा सके। ना मालूम कितने ही नए अस्पताल बनाए गए और जर्जर हो चुके पुराने अस्पतालों का कायाकल्प किया गया।

    डायल१००, १०९० जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएँ नागरिकों को दी गईं जिनकी वजहों से एक समय अपराधों के लिए कुख्यात रहे राज्य में बेहतर क़ानून व्यवस्था को संभव किया गया। चार-चार ज़िलों में मेट्रो ट्रेन का DPR बनकर तैयार किया गया जिसमें से लखनऊ में को मेट्रो शुरु भी हो गई है।
    किसानों एवं लघु उद्योगों को सुदृढ़ करने के लिए नई मंडियाँ बनाने का काम किया गया जिससे उनकी उपज का बेहतर मूल्य उन्हें उपलब्ध कराया जा सके।

    लोहिया ग्राम योजना, लोहिया ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से दूरदराज़ के इलाक़ों को मुख्य शहरों से जोड़ा गया। समाजवादी एंबुलेंस सेवा के माध्यम से बीमारु राज्य की बीमारी को दूर करने का रास्ता खोजा गया।

    पाँच साल के कार्यकाल में MBBS की सीटें दोगुनी की गईं, तमाम सरकारी दफ़्तरों की जर्जर हो चुकीं इमारतों को विश्वस्तरीय नईं इमारतों में स्थानांतरित किया गया जिससे सरकारी काम में तेज़ी एवं गुणवत्ता आई। इतिहास की अनमोल धरोहरों को संरक्षित किया गया जिसकी बानगी किसी भी पुरातात्विक महत्व वाली इमारत को देखकर समझी जा सकती है।

    जिस राज्य की प्रमुख पहचान वहाँ के महिलाओं के पिछड़ेपन को लेकर थी वहाँ उन्हें पढ़ने के लिए विद्याधन दिया गया। पिंक ऑटो देकर आत्मनिर्भर बनाया गया।

    एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए Sheroes Hangout जैसी शानदार पहल को हरी झंडी दिखाई गई। साहित्य, कला, सिनेमा, इतिहास, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए “यशभारती” जैसा सम्मान दिया गया।

    सिनेमा को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की पहल की गई जिसके फलस्वरूप अचानक से यूपी के शहर बॉलीवुड के रूपहले पर्दे पर छाने लगे।

    पर्यावरण प्रेमी अखिलेश यादव ने नदियों की सफ़ाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई और उसे धरातल पर साकार करके भी दिखाया जिसका सबसे बढ़िया उदाहरण गोमती है। हर शहर में पार्कों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया उनमें ओपन जिम जैसी चीजें लगवाईं गईं, साइकिल पथ बनवाए गए जिससे सड़कों पर ट्रैफ़िक के भार को कम किया जा सके और साइकिल चलाने वाले स्कूल के विद्यार्थियों को और अन्य लोगों की सुरक्षा गारंटी दी जा सके।

    कुंभ मेले का अभूतपूर्व आयोजन किया जिसे UN जैसी वैश्विक संस्था ने सम्मानित किया। कुंभ की आयोजन समिति का अध्यक्ष श्री आज़म खान जी से करवाकर अखिलेश यादव ने पूरी दुनिया के सामने सांप्रदायिक संकीर्णता को नकार देने का अप्रतिम उदाहरण दिया ऐसी और भी बेहतरीन कामयाबियां हैं एक कुशल मुख्यमंत्री के तौर पर श्री अखिलेश यादव के हिस्से में पर वो सब फिर कभी।

    अब आते हैं दूसरे पहलू पर; एक संगठनकर्ता के तौर पर अखिलेश यादव।
    यहाँ भी अखिलेश पूरी तरह से सफल ही नज़र आते हैं। एक बूढ़ी हो चली पार्टी को वह अचानक से नौजवान करने के काम में जुट जाते हैं और इतनी मोहब्बत अपने हर एक युवा कार्यकर्ता के दिल में अपने ओजस्वी नेतृत्व से भर देते हैं कि यूपी के तमाम युवा अपने प्रिय नेता के नाम पर अपनी जवानी तक क़ुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं। वो प्रेम जिसने भी देखा वह चकित रह गया, तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं के दिलों पर अखिलेश की लोकप्रियता साँप की तरह लोटने लगी।

    हम उन दिनों सुदूर दक्षिण में थे हमनें खुद देखा है तिरुपति, चेन्नई से लेकर हैदराबाद तक के लोगों को अखिलेश यादव के बारे में उत्साहपूर्ण बात करते हुए।

    क्या शानदार माहौल था यूपी में अखिलेश जी के नेतृत्व में। इतवार को बेख़ौफ़ लखनऊ वाले रात में “गंजिंग” करते थे। अधिकारी और सरकार में शामिल मंत्री फुर्सत के वक्त तनाव को कम करने के लिए क्रिकेट खेला करते थे। उन पलों ने यूपी के माहौल में सकारात्मकता भर दी थी जो विकास के लिए सर्वोत्तम बात थी।

    राजनेता के तौर पर भी अगर हम देखें तो पाएंगे अखिलेश यादव यहाँ भी विलक्षण रहे। कांग्रेस और बसपा के साथ किए गए उनके गठबंधन भले ही चुनावी मैदान में सफल ना हुए हों लेकिन इन गठबंधनों की वजह से सपा के तमाम नौजवान कार्यकर्ता के वैचारिक उथलेपन को दूर करने में कामयाबी ज़रूर मिली है।

    समाजवादी पार्टी के पोस्टर पर बाबा साहेब की तस्वीर का आना और सपा के कार्यकर्ताओं का गांधी को जानना इन गठबंधनों का ही नतीजा रहा जो निश्चित तौर पर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर इंगित करता है और यह संभव हो पाया सिर्फ़ और सिर्फ़ अखिलेश यादव की गहरी दृष्टि और स्पष्ट आचरण की वजह से।

    हमारे लिए अखिलेश यादव दुनिया के उन बड़े विजनरी नेताओं की श्रेणी में खड़े होते हैं जो अपने शुभकर्मों से बंजर ज़मीन में भी विकास की फसल उगा सकते हैं।

    अखिलेश यादव एक आज्ञाकारी पुत्र के तौर पर, एक श्रेष्ठ पति के तौर पर, एक सुंदर पुरा के तौर पर और एक नेकदिल राजनेता के तौर पर जनता के सामने आते हैं और उसके दिलों पर राज करते हैं।

    संप्रदाय, जाति, भाषा जैसे तमाम मसलों से ऊपर उठकर सभी के हित में “काम के बोलने” की राजनीति करने वाले हरदिल अज़ीज़ टीपू भैया को जन्मदिन की बहुत बहुत मुबारकबाद।
    -पवन यादव

  • मुस्लिम समुदाय को शादियों को सस्ता से सस्ता व तालीम को मयारी से मयारी बनाने के लिये मुकाबला अब करना ही होगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालाकि भारत भर के मुस्लिम समुदाय मे एक मुहीम चला कर शादियों को हर मुमकिन सस्ती से सस्ती व तालीम को मयारी से मयारी बनाने के लिये किसी ना किसी रुप मे मुकाबलाती मुहीम किसी ना किसी समाजी संगठन या शख्स के मार्फत पिछले कुछ समय से तेजी के साथ चलाई जा रही है। लेकिन इस मुहीम को पूरी तरह सोला आन्ना सफल करने के लिये राजस्थान के शेखावाटी जनपद की जमीन व शिक्षामय माहोल बडा उपयोगी साबित हो सकता है। अगर भारत भर के माहिरीन व स्थानीय समाज जरा सा अपना ध्यान इस तरफ करके उक्त बातो पर अमल करने की कोशिश पुरा दम लगा कर करने लगे तो साजगार परिणाम आते दैर ना लगेगी। सीकर मे कायम ऐक्सीलैंस नामक तालिमी इदारे के साथ साथ शेखावाटी जनपद के सीकर चूरु व झुंझुनू जिलो मे जगह जगह कायम अनेक तालिमी इदारो ने क्षेत्र मे तालीम को आम करने मे महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करके खास तौर पर महिला शिक्षा के प्रति जन जाग्रति लाकर उस कहावत को चरितार्थ किया है कि पढी लिखी लड़की दो परिवारों की रोशनी होती है।

    अगर हम शेखावटी जनपद पर जरा नजर डाले तो शादियों को कम से कम खर्चीला बनाने के साथ साथ तमाम फिजूलखर्ची को बंद करने के लिये कायमखानी यूथ ब्रिगेड व अन्य कुछ संस्थाओं ने दिन रात कड़ी मेहनत करके समुदाय मे बदलाव लाने मे प्रयासरत है। जिसका परिणाम यह निकल कर आ रहा है कि शादी मे होने वाली फिजूलखर्ची कृने के बजाय लोगो ने उस बचत को अब बच्चो की मयारी तालीम दिलाने पर खर्च करना शुरु कर दिया है। खासतौर समुदाय मे अब बेटीयो को मयारी तालीम दिलाने के लिये भी आपसी मुकाबला होना शुरु हो गया है। जो बनते सूनहरे भविष्य की तरफ साफ ईशारा कर रहा है।

    शेखावाटी जनपद के झूंझुनू जिले की फराह, इशरत, तसनीम, रुकसार व सीकर की परवीन सहित अनेक बेटियो ने फौज व प्रशासनिक सेवा के अलावा न्यायिक सेवा मे चयनित होकर अपनी तरक्की की लाईन को लम्बा व समाज को दिशा देने को लगातार प्रयासरत है। तो मेडिकल व इंजीनियरिंग के क्षेत्र मे केवल बेटिया हजारों हजार जाने के लिये कोचिंग करने व सलेक्ट हो कर सरकारी व गैर सरकारी सेवा कर रही है। विभिन्न तरह की अन्य सेवाओ मे खासतौर पर झुंझुनू जिले की हजारों बेटियां विभिन्न तरह की कोचिंग ले रही है। पिछले दिनो झूंझुनू जिले के एक साधारण परीवार के व्यक्ति से बात होने पर उस शख्स ने बताया कि पेट काटकर बचाये पैसो से वो फाईनल की परीक्षा देने के तूरंत बाद भारतीय सिवील सेवा की तैयारी कराने के लिये अपनी बेटी का प्रवेश दिल्ली की नामी कोचिंग संस्थान मे करवाया है। जहां जीके विषय की फीस एक लाख साठ हजार व बाकी हर ओफनल विषय की फीस साठ हजार व रहने का खर्चा अलग है। वालदेन की शिद्दत की दाद देनी होगी कि वो ईद मनाने बेटी को गावं ना बूलाकर खूद दिल्ली बेटी के पास जाकर ईद मनाकर आये है। उक्त एक शानदार व शबक लेने वाला उदाहरण है। लेकिन जनपद की सैंकड़ों बेटीया इसी तरह दिल्ली व भारत के दुसरे क्षेत्र मे सिवील सेवा की तैयारी कर रही है। इनमें लड़को की तादात बेशक बेटियो से कम हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह है कि सीकर मे कायम ऐक्सीलैंस नामक तालिमी ईदारे के बानी वाहीद चोहान सहित शेखावाटी जनपद के अनेक लोगो की सामुहिक कोशिशों से शेखावाटी क्षेत्र मे काफी हद तक बेटा-बेटी की तालीम दिलाने का भेद अब जाकर लगभग खत्म हो चला है। अब जाकर हर परीवार बेटा बेटी दोनो को मयारी तालीम दिलाने मे अपनी हेसियत व पहुंच के मुताबिक़ हर मुमकिन कोशिश करने लगा है। पर इस परवाज को ओर अधिक ऊंचाई देने का काम सामाजिक संस्थाओं को करना होगा। इसके अतिरिक्त विश्वव्यापी मंदी व कोविड-19 के कारण जारी लोकडाऊन ने हम सबको हिलाकर रख दिया है। ऐसे डर के माहोल मे एक मात्र शिक्षा ने ताकत बक्शी है। एवं तालीम की अहमियत का पग पग भर अहसास हुवा है।