Category: खास ख़बरें

  • बाबरी विध्वंस : फैसला 30 सितंबर को, कोर्ट ने आडवाणी, उमा समेत सभी 32 आरोपियों को मौजूद रहने को कहा

    बाबरी विध्वंस मामले में लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट 30 सितंबर को फैसला सुनाने वाली है. कोर्ट ने मामले में सभी 32 मुख्य आरोपियों को इस दिन सुनवाई में शामिल होने को कहा है.

    बाबरी विध्वंस मामले में (Babri Demolition Case) लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court) 30 सितंबर को फैसला सुनाने वाली है. कोर्ट ने मामले में सभी 32 मुख्य आरोपियों को इस दिन सुनवाई में शामिल होने को कहा है. इनमें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे- लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह भी शामिल हैं. इस केस में स्पेशल सीबीआई सीबीआई जज एसके यादव फैसला सुनाने वाले हैं.

    इसके पहले स्पेशल जज ने 22 अगस्त को ट्रायल का स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद मामले की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा को एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया था. कोर्ट ने ट्रायल पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का वक्त दिया था. मामले में दो सितंबर से फैसला लिखना शुरू किया जाना था. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मृदल राकेश, आईबी सिंह और महिपाल अहलूवालिया ने आरोपियों की तरफ से मौखिक दलीलें पेश की. इसके पहले कोर्ट ने नाराजगी जताई थी कि बचाव पक्ष अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं कर रहा. स्पेशल जज ने बचाव पक्ष के वकील से कहा था कि अगर वह मौखिक रूप से कुछ कहना चाहते हैं तो 1 सितंबर तक कह सकते हैं, वरना उनके मौके खत्म हो जाएंगे.

    इसके बाद सीबीआई के वकीलों ललित सिंह, आर.के. यादव और पी. चक्रवर्ती ने भी मौखिक दलीलें दीं थीं. सीबीआई सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ 351 गवाहों और लगभग 600 दस्तावेज प्रस्तुत कर चुकी है. अदालत को फैसला करने में सीबीआई के गवाहों और दस्तावेजों पर गौर करना है. एजेंसी पहले ही 400 पेजों की लिखित बहस दाखिल कर चुकी है.

    बता दें कि बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने दिसंबर, 1992 में ढहाया था. उनका दावा था कि अयोध्या में यह मस्जिद भगवान राम के ऐतिहासिक राम मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी. बाबरी विध्वंस मामले में अदालत का फैसला 28 साल बाद आ रहा है.

  • कंगना रनौत ने किया जया बच्चन पर पलटवार तो स्वरा भास्कर बोलीं- शर्मनाक, बड़ों की इज्जत करना…

    कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को अब स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने जवाब दिया है. स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि शर्मनाक कमेंट. बड़ों की इज्जत करना भारतीय संस्कृति का पहला सबक है और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.

    नई दिल्‍ली: जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने बीते दिन बीजेपी सांसद रवि किशन और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को आडे़ हाथों लेते हुए कहा था कि जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन के इस बयान को लेकर कंगना रनौत ने भी उनपर पलटवार किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? ये मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं. कंगना रनौत की इस बात पर अब स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने भी जवाब दिया है. स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि शर्मनाक कमेंट. बड़ों की इज्जत करना भारतीय संस्कृति का पहला सबक है और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.

    कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के ट्वीट पर स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने उन्हें जवाब देते हुए लिखा, “शर्मानक कमेंट, कृप्या बस करो अब. अपने जहन की गंदगी खुद तक सीमित रखो. गाली देनी है तो मुझे दो. मैं तुम्हारी बकवासें खुशी-खुशी सुनूंगी और यह कीचड़ कुश्ती लड़ूंगी तुम्हारे साथ. बड़ों की इज्जत भारती संस्कृति का पहला सबक है- और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.” स्वरा भास्कर का यह ट्वीट खूब वायरल हो रहा है, साथ ही लोग इसपर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. बता दें कि स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यह जवाब दिया.

    बता दें कि स्वरा भास्कर और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) एक साथ फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ में एक साथ नजर आई थीं. वहीं, कंगना रनौत की बात करें तो उन्होने जया बच्चन (Jaya Bachchan) पर पलटवार करते हुए लिखा, “कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी, जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था. वो भी हेरो के साथ सोने के बाद, मैंने इस इंडस्ट्री को फेमिनिज्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारीप्रधान फिल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं.” बता दें कि बीते दिन जया बच्चन ने बॉलीवुड को लेकर राज्यसभा में बयान दिया था.

     

     

  • कानपुर में कोरोना से मरने वालों की संख्या यूपी में सबसे ज़्यादा, क्या है वजह?

    लखनऊ में एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर रहे 30 साल के युवा शख़्स की कानपुर में कोरोना से बीते दिनों मौत हो गई. कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद से वह कानपुर में अपने घर पर ही होम आइसोलेशन में थे.

    कोरोना पॉज़िटिव रिपोर्ट आने के चौथे दिन उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. जिसके बाद उन्हें पहले एक प्राइवेट कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत में सुधार नहीं होने पर कानपुर कैंट में स्थित सेवन एयरफ़ोर्स हॉस्पिटल में रेफ़र कर दिया गया

    परिवार वालों के मुताबिक़ इलाज के दौरान उन्हें दो बार प्लाज़्मा थेरेपी दी गई, साथ ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन भी लगाए लगे. उन्हें लगातार वेंटीलेटर पर ही रखा गया. उनके बड़े भाई ऋषि शुक्ला बताते हैं कि रात तक डॉक्टर्स ने भाई की हालत स्थिर होने की जानकारी दी थी, लेकिन सुबह जब वह अस्पताल पहुंचे तो उनको भाई की मौत की ख़बर मिली.

    शुक्ला परिवार जिस असमय दुख के दौर से गुज़र रहा है, वैसा दुख कानपुर के कई परिवारों को झेलना पड़ रहा है और हर दिन उनकी संख्या बढ़ती जा रही है.

    भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से सबसे ज़्यादा मौतें कानपुर में ही हुई हैं. हालांकि, प्रदेश की राजधानी लखनऊ बहुत पीछे नहीं है. 12 सितंबर तक कोरोना से कानपुर में 527 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लखनऊ में 516 लोगों की.

    लेकिन कानपुर की स्थिति इसलिए भी ज़्यादा गंभीर है क्योंकि लखनऊ की तुलना में कोरोना संक्रमण के मरीज़ों की संख्या कानपुर में आधी है. रविवार को लखनऊ में जहां 847 नए संक्रमण के मामले सामने आए वहीं, कानपुर में महज़ 338. लखनऊ में कुल सक्रिय मरीज़ों की संख्या नौ हज़ार से ज़्यादा है जबकि कानपुर में 4500 से ज़्यादा.

    इस हिसाब से देखें तो 12 सितंबर तक कानपुर में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर 2.65 प्रतिशत है जबकि लखनऊ में मृत्युदर 1.31 प्रतिशत है. मृत्युदर के हिसाब से कानपुर के बाद यूपी में मेरठ दूसरे नंबर पर है जहां कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्युदर 2.63 प्रतिशत है. अभी तक वहां 171 लोगों की मौत हुई है.

     

     

  • उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विशेष सुरक्षा बल के गठन को लेकर घिरी

    उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को विशेष सुरक्षा बल के गठन की अधिसूचना जारी कर दी, जिसके तहत सुरक्षा बलों को किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ़्तार करने, तलाशी लेने और ऐसे ही कई असीमित अधिकार मिल जाएँगे.

    विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती शुरुआत में सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थलों जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर होगी और निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान भी पैसे देकर इनकी सेवाएँ ले सकेंगे.

    हाल ही में विधानसभा के संक्षिप्त मॉनसून सत्र में इस विधेयक को पारित किया गया था और फिर राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है.

    उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने विशेष सुरक्षा बल के गठन की अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा और अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी इस विशेष पुलिस बल के प्रमुख होंगे.

    अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि यूपी एसएसएफ़ के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ, ज़िला न्यायालयों, राज्य सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालयों, पूजा स्थलों, मेट्रो रेल, हवाई अड्डों, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी होगी.

    पैसे देकर निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान भी इसकी सेवाएँ ले सकेंगे और उन परिस्थितियों में भी पुलिस बल के ये असीमित अधिकार बने रहेंगे.

    अधिनियम के अनुसार अगर विशेष सुरक्षा बल के सदस्यों को यह विश्वास हो जाए कि कोई भी अभियुक्त कोर्ट से तलाशी वारंट जारी करने के दौरान भाग सकता है या अपराध के साक्ष्य मिटा सकता है, तो ऐसी स्थिति में उस अभियुक्त को तुरंत गिरफ़्तार किया जा सकता है.

    यही नहीं, अभियुक्त के घर और संपत्ति की तत्काल तलाशी भी ली जा सकती है. इसके लिए सर्च वारंट या मजिस्ट्रेट की अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी. हालांकि ऐसा करने के लिए एसएसएफ़ जवान के पास पुख़्ता सबूत होने चाहिए.

    अधिनियम के मुताबिक़, ऐसी किसी भी कार्रवाई में सुरक्षा बल के अधिकारी या सदस्य के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज नहीं कराया जा सकेगा और बिना सरकार की इजाज़त के न्यायालय भी विशेष सुरक्षा बल के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा.

    इस अधिनियम के गठन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक दलों ने अधिनियम को काला क़ानून बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है.

  • मॉनसून सत्र: प्रश्नकाल पर नाराज़ विपक्ष को सरकार का जवाब, हम बहस से भाग नहीं रहे हैं

    “ये एक असाधारण परिस्थिति है. जब विधानसभाओं की बैठक एक दिन के लिए नहीं हो पा रही है, हम 800-850 सांसद यहां मिल रहे हैं. सरकार से सवाल पूछने के कई रास्ते हैं. सरकार बहस करने से बच नहीं रही है.”

    प्रश्नकाल के बिना संसद की कार्यवाही चलाने का मुद्दा सोमवार को शुरू हुए मॉनसून सत्र के पहले दिन इतना गर्म रहा कि संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी को विपक्ष को समझाने के लिए सामने आना पड़ा.

    लोकसभा में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने प्रश्नकाल ख़त्म करने पर कहा, “प्रश्नकाल तो स्वर्णकाल होता है लेकिन आप कह रहे हैं कि हालात के कारण इसे नहीं किया जा सकता. आप संसद की कार्यवाही तो चला रहे हैं लेकिन प्रश्नकाल को ख़त्म करके. आप लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर रहे हैं.”

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नाराज़ सदस्यों को भरोसा दिलाने की कोशिश करते हुए संकेत दिया कि शून्य काल का इस्तेमाल सरकार से सवाल पूछने के लिए किया जा सकता है.

    उन्होंने कहा, “ज़्यादातर राजनीतिक दलों के नेता इस बात पर सहमत थे कि प्रश्न काल न हो और शून्यकाल के लिए 30 मिनट का समय रहे. हम अध्यक्ष महोदय की इस फ़ैसले के लिए सराहना करते हैं. मेरी अपील है कि वे सत्र चलाने में सहयोग दें क्योंकि इसका आयोजन एक असाधारण समय में किया जा रहा है.”

    संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो गया है और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया के सामने आए. उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि लंबे अंतराल के बाद सब दिखाई दे रहे हैं और पूछा, “आप सब ठीक है ना, आप और आपके परिवार पर कोई संकट तो नहीं आया?

    लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ बोलता, नरेंद्र मोदी संसद सत्र के बारे में बताने लगे. उन्होंने कहा कि “कोरोना भी है और कर्तव्य भी. सभी सांसदों ने कर्तव्य को चुना है इसके लिए उनका अभिनंदन और धन्यवाद करता हूं.”

    उन्होंने सेना को लेकर सांसदों से आग्रह किया, “इस सत्र की एक विशेष ज़िम्मेदारी है कि आज जब हमारी सेना के वीर जवान सीमा पर डटे हुए हैं, बुलंद हौसलों के साथ दुर्गम पहाड़ियों में डटे हुए हैं और कुछ समय बाद बर्फ़ भी गिरेगी.”

    “जिस विश्वास के साथ वो खड़े हैं, मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं, ये सदन भी, सदन के सभी सदस्य एक स्वर से, एक भाव से ये संदेश देंगे कि सेना के जवानों के पीछे देश खड़ा है, संसद और सांसदों के माध्यम से खड़ा है, ऐसा मेरा विश्वास है.”

    उन्होंने कोरोना महामारी को लेकर पत्रकारों से भी कहा कि “ख़बरें तो आपको मिल जाएंगी लेकिन खुद को ज़रूर संभालना, ये मेरी आपको पर्सनल प्रार्थना है.”

  • चीन की नज़र मोदी समेत 10 हज़ार भारतीय शख्सियतों पर – प्रेस रिव्यू

    अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी दो महीने तक चली पड़ताल में पाया कि चीन की एक कंपनी 10 हज़ार भारतीय लोगों और संस्थाओं पर नज़र रखे हुई है.

    ‘जुनख्वा डेटा इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी को लिमिटेड’ नाम की ये कंपनी शेनज़ेन में स्थित है और इसके संबंध चीन की सरकार और चाइनीज़ कॉम्युनिस्ट पार्टी से हैं.

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके परिवार, ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, नवीन पटनायक, उद्धव ठाकरे से लेकर कैबिनट मंत्री राजनाथ सिंह, रवि शंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति इरानी इस लिस्ट में शामिल हैं.

    इतना ही नहीं, चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ बिपिन रावत, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के 15 प्रमुखों से लेकर मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे, लोकपाल पीसी घोष, कैग प्रमुख जीसी मुर्मु, ‘भारत पे’ के संस्थापक निपुण मेहरा, उद्योगपति रतन टाटा और गौतम अडानी को भी ये कंपनी मॉनिटर कर रही है.

    इनके अलावा कई बड़े पद वाले नौकरशाह, जज, वैज्ञानिक, पत्रकार, कार्यकर्ता और धार्मिक शख़्सियतों पर भी नज़र रखी जा रही है. ये कंपनी खुद दावा करती है कि ये चीन की खुफ़िया एजेंसी, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम करती है.

    इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के एक सूत्र से सवाल किया तो जवाब आया कि चीन ने किसी कंपनी या व्यक्ति से दूसरे देशों के डेटा या इंटेलिजेंस के बारे में जानकारी ना ही मांगी है और न मांगेगा.

    अख़बार ने एक सितंबर को कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद ईमेल आईडी पर सवाल भेजे थे लेकिन कोई जवाब नहीं आया बल्कि नौ सितंबर से वेबसाइट बंद कर दी गई.

    इस तरह से कंपनी का डेटा रखना ‘हाईब्रिड वारफेयर’ का हिस्सा है जहां ग़ैर-सैन्य तरीकों को प्रभुत्व और प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

  • मुंबई को बदनाम करने वाली कंगना रनौत को बीजेपी का समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण: राउत

    “रनौत को समर्थन देकर और सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपने रुख के जरिए भाजपा राजपूत और क्षत्रिय जैसी अगड़ी जातियों के वोट हासिल कर बिहार चुनाव जीतना चाहती है.”

    मुंबई: Shivsena Leader Sanjay Raut :  शिवसेना नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा मुंबई की तुलना ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर’ (पीओके) से करने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत का समर्थन कर रही है. साथ ही, यह बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.

    शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘‘रोखठोक” में राउत ने यह भी दावा किया मुंबई के महत्व को कम करने का प्रयास पद्धतिबद्ध तरीके से चल रहा है और शहर को सतत बदनाम करना इसी साजिश का हिस्सा है. राउत ने कहा,‘‘यह कठिन वक्त है, जब महाराष्ट्र में सभी मराठी लोगों को एकजुट हो जाना चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि रनौत को समर्थन देकर और सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपने रुख के जरिए भाजपा राजपूत और क्षत्रिय जैसी अगड़ी जातियों के वोट हासिल कर बिहार चुनाव जीतना चाहती है.

    राउत ने कहा, ‘‘ जिस तरह से राज्य का अपमान किया गया, उससे महाराष्ट्र (भाजपा) का एक भी नेता दुखी नहीं हुआ.” उन्होंने कहा,‘‘ एक अभिनेत्री मुख्यमंत्री को अपमानित करती है और क्या राज्य के लोगों को प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए, यह किस तरह की एकतरफा स्वतंत्रता है?”

    उन्होंने कहा,‘‘जब शहर में उनका अवैध निर्माण जिसे वह पाकिस्तान कहती हैं, ध्वस्त किया जाता है, तो वह ध्वस्त ढांचे को राम मंदिर कहती हैं. जब अवैध निर्माण पर सर्जिकल स्ट्राइक हो रहा तो आप मर्माहत हो रहे हैं. यह किस प्रकार का खेल है?

     

  • MP: उपचुनाव के प्रचार अभियान में जुटी BJP, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ-साथ राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शिरकत की.

    मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव (Bypolls) के लिये सत्ताधारी बीजेपी (BJP) चुनाव प्रचार में जुट गई है. खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मैदान में उतर चुके हैं. चुनावी सभाओं व रैलियों में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. शनिवार को मुरैना में 73 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन और करीब 194 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण का कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ-साथ राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शिरकत की.

    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और सिंधिया जौरा पहुंचे. वहां भी करीब 34 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमिपूजन और 8 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण किया गया. यहां कांग्रेस ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की है. खुद भी भारी भीड़ में नेता कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ते नजर आए. इस दौरान, सिंधिया की गाड़ी को लेकर भी विवाद हुआ क्योंकि वो  MP 03 सीरीज की गाड़ी में बैठे थे जिसका इस्तेमाल राज्य में पुलिस की गाड़ियों में होता है.

    वहीं उपचुनाव के मद्देनज़र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने आगर-मालवा जिले में स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी देवी माता मंदिर में शनिवार को पूजा अर्चना करने के बाद कांग्रेस का चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था.

    दो दिन पहले, कांग्रेस ने 15 सीटों पर अपने प्रत्‍याशियों के नाम की घोषणा कर दी है. पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को इन नामों को मंजूरी दी. सांवेर सीट से कांग्रेस ने प्रेमचंद गुड्डू को मैदान में उतारा है. वे संभवत: शिवराज कैबिनेट के सदस्‍य तुलसी सिलावट के खिलाफ मोर्चा संभालेंगे.

  • ‘आपराधिक अवमानना केस में अपील को बड़ी बेंच देखे’, प्रशांत भूषण ने SC दाखिल की रिट याचिका

    इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    Prashant Bhushan Contempt Case: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को एक रिट याचिका दायर की गई. इस याचिका में मांग की गई है कि मूल आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ अपील का अधिकार एक बड़ी और अलग पीठ द्वारा सुना जाए. यह याचिका वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    याचिका में कहा गया है कि यह गलत सजा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगा और वास्तव में बचाव के रूप में सत्य के प्रावधान को सक्षम करेगा.

    बता दें कि 3 अगस्त को प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले पर फैसला सुनाते हुए एक रुपये का जुर्माना लगाया था. फैसले के अनुसार 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में 3 महीने की जेल हो सकती है और तीन साल के लिए उन्हें वकालत से निलंबित भी किया जा सकता है.

    63 वर्षीय प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने यह कहते हुए पीछे हटने या माफी मांगने से इनकार कर दिया कि यह उनकी अंतरात्मा और न्यायालय की अवमानना होगी. उनके वकील ने तर्क दिया है कि अदालत को प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) की अत्यधिक आलोचना झेलनी चाहिए क्योंकि अदालत के “कंधे इस बोझ को उठाने के लिए काफी हैं.

     

  • 32 साल तक लेकिन अब नहीं..’ बिहार चुनाव के पहले लालू यादव की पार्टी के शीर्ष नेता ने दिया इस्‍तीफा..

    रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी में धन कुबेरों को राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकता देने और उनके वैशाली ज़िले में पूर्व सांसद रमा सिंह के शामिल कराये जाने के कारण ख़फ़ा चल रहे थे.

    पटना : 

    Raghuvansh prasad resigns: राष्ट्रीय जनता दल (RJD)के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh prasad Singh) ने आख़िरकार लालू यादव (Lalu yadav)की पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. अपने हाथ से लिखे इस्तीफे के लेटर में रघुवंश बाबू ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लालू यादव ने लिखा कि 32 सालों तक आपके पीछे खड़ा रहा लेकिन अभी नहीं. फ़िलहाल दिल्ली AIIMS में इलाज करा रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने लिखा कि पार्टी नेता, कार्यकर्र्ता और आमजनों ने मुझे बड़ा स्नेह दिया, मुझे क्षमा करे. इस पत्र के शब्दों को लेकर साफ है कि संभवत: रघुवंश अब अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते और मान-मनोब्बल की कोई गुंजाइश नहीं बची हैं.

    माना जा रहा हैं कि आने वाले दिनो में जैसे अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे तब रघुवंश बाबू नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड में शामिल होंगे.रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी में धन कुबेरों को राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकता देने और उनके वैशाली ज़िले में पूर्व सांसद रमा सिंह के शामिल कराये जाने के कारण ख़फ़ा चल रहे थे. 74 साल के रघुवंश बाबू पार्टी में उपाध्‍यक्ष का पद संभाल रहे थे और वे लालू के बेहद भरोसेमंद नेताओं में शुमार किए जाते थे. वे केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं.

    गौरतलब है कि रघुवंश इस समय पार्टी का जिस तरह से संचालन किया जा रहा था, उससे खुश नहीं थे और इस बारे में उन्‍होंने साल की शुरूआत में लालू को लेटर भी लिखा था.लालू यादव को लिखे एक पत्र में रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाल करने के अलावा पार्टी को और अधिक आक्रामक बनाने का सुझाव दिया था.पत्र को पढ़ने से दो बातें साफ़ होती हैं, एक वो राज्य इकाई की कमान संभाल रहे जगदानंद सिंह के कार्यशैली से ख़ुश नही हैं. दूसरा तेजस्वी यादव की राज्य की राजनीति से अनुपस्थिति पर भी उन्होंने अपना नाराज़गी सार्वजनिक की है.रघुवंश ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि राज्य सरकर को घेरने के लिए ना कोई ढंग का बयान दिया जाता हैं और ना संवादाता सम्मेलन आयोजित किया जाता है.