Category: खास ख़बरें

  • सुप्रिया ने संसद मे कहा:मुस्लिम औरतों ने मुझसे कहा हम अपने पति को कभी जेल नहीं भेजेंगे,क्योंकि वह हमारे बच्चों के पिता है

    मिल्लत टाइम्स,डेस्क: लोकसभा में तलाक बिल पर बहस के दौरान सांसद सुप्रिया सुले नेता के मुस्लिम औरतें भी इस बिल के खिलाफ है इन्होंने अपना भाषण देते हुए कहा कि मुस्लिम औरतें से मुलाकात हुई उन्होंने कहा कि हम अपने शहर को कभी भी जेल नहीं भेजना चाहेंगे क्योंकि वह हमारे बच्चों के पिता है

    शोले ने कहा कि मुस्लिम औरतें अपनी शरीयत के साथ खुश हैं और इस बिल के जरिए सियासत हो रही है इन्होंने बहस के दौरान भाजपा संसद पर महिलाओं के साथ बदसलूकी और नुकसान पहुंचाने का इल्जाम लगाया

  • Airtel को लाइफटाइम फ्री इनकमिंग कॉल बंद करना पड़ा महंगा,गंवा सकते है 5 करोड़ ग्राहक

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: पिछले महीने से ही देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों ने लाइफटाइम फ्री इनकमिंग सेवा बंद करनी शुरू कर दी है। अब इनकमिंग के लिए भी ग्राहकों को हर महीने रिचार्ज कराना पड़ रहा है। इसके लिए एयरटेल और वोडाफोन जैसी कंपनियों ने 28 दिनों की वैधता वाले कई प्लान भी पेश किए हैं, लेकिन इसी के साथ खबर है कि लाइफटाइम फ्री इनकमिंग सेवा को बंद करना टेलीकॉम कंपनियों को महंगा पड़ रहा है।

    इस फैसले से कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इनके ग्राहकों की संख्या में कमी हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान एयरटेल को हो सकता है। खबर है कि Airtel के 5 से 7 करोड़ तक ग्राहक कम हो सकते हैं।

    हिन्दू बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट की मानें तो कंपनी को भी यह चिंता सता रही है कि उसके ग्राहक कम हो रहे हैं और भविष्य में और कम हो सकते हैं, हालांकि कंपनियों को इस बात का भी भरोसा है कि फ्री इनकमिंग बंद करने के फैसले से उनके एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) में वृद्धि होगी।

    वहीं एयरटेल की नजर इस बात पर भी है कि उसके ग्राहक फीचर फोन से 4जी स्मार्टफोन पर शिफ्ट हों। इसके लिए कंपनी अमेजॉन प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स का फ्री सब्सक्रिप्शन जैसे ऑफर्स भी दे रही है। वहीं नए स्मार्टफोन के साथ कैशबैक ऑफर भी मिलता है।

    इसी साल अक्टूबर में Airtel ने एयरटेल टीवी प्रीमियम फीचर का ऐलान किया है जिसके तहत ग्राहकों को एयरटेल टीवी पर ZEE5 ऑरिजिनल्स, एनडीटीवी होप और 300 टीवी चैनल्स को फोन पर देखने का मौका मिल रहा है।

  • संसद मे सल्फी के खिलाफ बोलने पर,मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने पत्र जारी कर मांगा माफी

    मौलाना बदरुद्दीन अजमल जैसे ही लोकसभा में तलाक बिल पर बहस के लिए खड़े हुए उन्होंने अपने भाषण करने के बजाय बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी के किसी बात का जवाब देने लगे जिस पर सलफी मसलक का बात आ गया

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: आसाम से सांसद और एयूडीएफ के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने अपनी इस बात से माफी मांग लिया है जो इन्होंने 27 दिसंबर को तलाक बिल पर बहस के दौरान कहा था और संसद को भी पत्र लिखकर इन्होंने अपशब्द को हटाने के लिए आगरा क्या है

    मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने अपने लेटर हेड पर एक पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने लिखा है कि मैं कहना कुछ और चाह रहा था कि लेकिन जवान कुछ और कुछ और निकल गया सल्फी भाई के ताल्लुक से हर गुजर मेरा ऐसा कोई सोच नहीं है

    मौलाना द्वारा लिखा गया माफीनामा पत्र

    मौलाना ने अपने पत्र में लिखा है कि कल (27 दिसंबर 2018 को) संसद में तलाक से संबंधित दिल पर बस में हिस्सा लेते हुए मैंने सभी भाइयों से संबंधित एक गलत और दे तू की बात कह दी थी जिसका मुझे बेहद अफसोस है मेरी नियत बिल्कुल ठीक बनी थी जो बहुत गलती से जवान से जवान पर आ गई मेरा सेल्फी भाई से संबंधित ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जो दहशत गर्दी की हिमायत करते हैं जो दहशत गर्दी में पाए जाते हैं इसलिए मैं अपनी गलती का एहसास करते हुए संसद में दिए गए भाषण से माफी चाहता हूं अल्लाह से दुआ करता हूं कि वह हमारी कमियों को दूर करे,, में अपनी भाषण को संसद के रिकॉर्ड से हटाने की भी अनुरोध दे दी है जिसके बाद इंशाल्लाह वहां से हट जाएगा

    वजह रहेगी मौलाना बदरुद्दीन अजमल जैसे ही संसद में तलाक बिल पर बहस के लिए खड़े हुए उन्होंने अपने भाषण करने की बजाय भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी के किसी बात का जवाब देने लगे जिस पर चलती मतलब का टच कर आ गया और और उसकी वजह से मौलाना की जवान से दहशत गर्दी की बात निकल गई इसका मौलाना को तुरंत ही एहसास हुआ और संसद से बाहर निकलते हुए उन्होंने इस पूरे मामले पर सफाई दी देर रात इन के दफ्तर से लेटर हेड पर एक पत्र भी जारी किया गया जिसमें 9 बगैर किसी झिझक के अपने अपनी बातों को बताते हुए सेल्फी मसलक के लोगों से माफी मांग ली है

  • बिहार:सरकार की लापरवाही के कारण’शेरशाह सूरी का ऐतिहासिक किला खंडहर मे तब्दील,लगने लगा है सब्जी बाजार

    मिल्लत टाइम्स,सासाराम:। हिंदुस्तान के तख्त-ओ-ताज पर बैठने वाले जिन सुल्तानों के बचपन की किलकारियों से कोई किला कभी आबाद हुआ करता था, वहां आज सब्जी बाजार लग रहा। जिस किले ने कभी नफासत देखी थी, वहां अब कूड़े-कचरे का ढेर है। सरकारी उदासीनता की वजह से ये किला खंडहर में तब्दील हो रहा है। शेरशाह सूरी, जिसने काबुल तक बादशाही सड़क का विस्तार किया, जिसे आज ग्रैंड ट्रंक (जीटी रोड) कहते हैं। अपने शासनकाल में देश में रुपये का प्रचलन, संगठित सैन्य व डाक व्यवस्था देने वाले शेरशाह सूरी की स्मृतियों को समेटे खड़ा यह किला मलिन और बेरौनक हो चुका है।

    सूरी वंश की धरोहर
    सूरी वंश के संस्थापक व प्रसिद्ध अफगानी शासक शेरशाह सूरी के पिता हसन शाह सूरी ने लगभग सवा पांच सौ वर्ष पूर्व बिहार के सासाराम में यह किला बनवाया। यहां शेरशाह के साथ-साथ दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाले उनके पुत्र सलीम शाह का भी बचपन बीता था।

    भव्य नक्काशी व मेहराबदार झरोखे
    वर्ष 1498-99 में शेरशाह के पिता हसन सूर खां ने इसका निर्माण कराया था। पास ही बने एक बड़े हमाम का वजूद समाप्त हो चुका है। पठान वास्तुकला का अनुपम नमूना यह किला तीन मंजिला है। बीच में बड़ा आंगन व चारों तरफ गलियारा है। चारों दिशाओं में बने दरवाजों पर लाल व नीले रंग की भव्य नक्काशी है। इसमें मेहराबदार झरोखे व ऊपर की मंजिलों पर जाने के लिए सीढ़ियां हैं।

    सूरी वंश का पुश्तैनी आवास था ये किला
    शाहाबाद गजेटियर के अनुसार यह किला सूरी वंश के बादशाहों का पुश्तैनी आवास रहा है। इतिहासकार डॉ. श्याम सुंदर तिवारी बताते हैं कि यह पठान वास्तुकला का पूरे देश में एकमात्र प्रतिनिधि किला है। 1813 में यहां आए फ्रांसिस बुकानन ने भी इसकी प्रशंसा की थी। उन्होंने भी इस किले को दिल्ली सल्तनत के दोनों बादशाहों का पुश्तैनी आवास बताया।

    100 से ज्यादा फुटपाती दुकानें लगती हैं
    इस किले को न तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और न ही राज्य सरकार का कला व संस्कृति विभाग अपने अधीन ले पाया है। यहां आज की तारीख में सब्जी से लेकर अन्य चीजों की सौ से अधिक फुटपाथी दुकानें सजी हुई हैं। एक समृद्ध धरोहर हर दिन नष्ट हो रही है। दीवारों की अनूठी नक्काशी पर कील ठोककर कबाड़ टांगे जा रहे हैं।

    शुरू हो रही संरक्षण की कवायद
    रोहतास के उप विकास आयुक्त ओम प्रकाश पाल ने बताया कि शेरशाह के पुश्तैनी किले के बारे में जानकारी उपलब्ध कराकर उसे संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित विभाग के अधिकारियों से सर्वे कराकर इसके जीर्णोद्धार का खाका तैयार किया जाएगा। दुकानदारों को भी वेंडर जोन में ले जाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि शेरशाह सूरी की स्मृतियों को संरक्षित रखा जा सके।

    दैनिक जागरण इनपुट के साथ

  • भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन

    मेघालय हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने सफाई दी है कि भारत का संविधान धर्म निरपेक्षता की बात करता है और देश का बंटवारा धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: जस्टिस सेन ने 14 तारीख को अपने आदेश से जुड़ी सफाई जारी की जिसमें उन्होंने लिखा, “धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के मूल स्तंभों में है और मेरे आदेश को किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा या उसके संदर्भ में नहीं समझा जाना चाहिए.”

    इससे पहले 10 दिसंबर को नागरिकता सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के बाद उन्होंने जो आदेश दिया उसमें उन्होंने लिखा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए था.

    आदेश में लिखा था, “आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था. पाकिस्तान ने स्वयं को इस्लामिक देश घोषित किया और इसी तरह भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन ये एक धर्मनिरपेक्ष देश बना रहा.”

    जस्टिस सेन के आदेश को लेकर विवाद छिड़ा और कई हलकों में इसकी आलोचना हुई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा कि ये संविधान की अवधारणा के विपरीत है.

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    दलित नेता जिन्नेश मेवाणी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इसकी आलोचना की.
    जिन्नेश मेवाणी ने कहा कि इससे साफ संदेश मिल रहा है कि सिर्फ़ एक तबके के लोगों के लिए ही न्याय है. प्रशांत भूषण ने कहा कि इस तरह के बयानों से न्यायपलिका पर लोगों का भरोसा कम होगा.

    ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत विभिन्न संप्रदायों के लोगों से मिलकर बना एक देश है जो कभी इस्लामिक राष्ट्र नहीं बनेगा.

    इस मुद्दे पर संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी का कहना है कि जस्टिस सेन का आदेश भारत के संविधान का उल्लंघन है. पढ़िए, उनका नज़रिया –
    जस्टिस सेन ने 10 दिसंबर को दिए अपने आदेश में भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन किया था. इसके बाद उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी दी है लेकिन उनका आदेश दो तरीके से भारतीय संविधान का उल्लंघन है.

    पहला तो ये कि संविधान की प्रस्तावना में ही ये घोषणा की गई है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है. जस्टिस सेन के सामने हमेशा ही ये रास्ता खुला है कि वो अपने पद से इस्तीफ़ा दें और उसके बाद भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन करें.

    एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन होकर (एक बेंच का हिस्सा होते हुए) वो इस तरह की बात नहीं कर सकते क्योंकि अगर वो न्यायपालिका में किसी भी पद पर काम करना स्वीकार करते हैं तो वो पहले ये शपथ लेते हैं कि वो संविधान का पालन करेंगे.

    दूसरा ये कि उनका शपथ लेकर अपने पद पर काम करना उन्हें इस बात कि बाध्य करता है लोगों में भेदभाव ना करें और सभी से समान व्यवहार करें.

    जज की परिभाषा के आधार पर देखें तो अगर एक जज हिंदू राष्ट्र के हिमायती हैं तो वो पक्षपात कर रहे हैं.
    क्या ग़लत किया जज ने
    वो इस तथ्य से कतई अनजान नहीं हो सकते कि ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर राजनीतिक पार्टी बीजेपी और अन्य पार्टियों में मतभेद हैं. एक तरफ जहां बीजेपी हिंदुत्व की समर्थक है अन्य पार्टियां इसके विरुद्ध खड़ी हैं.

    अपने बयान के कारण वो आज उसी जगह पर हैं जिसके बारे में एक बार ब्रितानी जज जस्टिस लॉर्ड डैनिंग ने कहा था कि “मैदान में उतरे भी और फिर विवाद की वजह से उड़ रही धूल से अंधे भी हो गए.”

    उनके ख़िलाफ़ महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए या नहीं ये और बात है लेकिन इसमें दोराय नहीं कि उन्होंने उन लोगों का भरोसा खो दिया है जो संविधान पर भरोसा करते हैं. हालांकि ये उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके ख़िलाफ महाभियोग लाया जाएगा.

    मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं. 1981 में कोलंबिया की सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस टॉमस बर्गर को उनके पद से हटा दिया गया था. देश के वरिष्ठ 27 जजों वाली कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल ने फ़ैसला सुनाया, “राजनीतिक मसलों से संबंधित ऐसे मामलों पर जस्टिस बर्गर का अपनी राय रखना अविवोकपूर्ण था जिन पर पहले ही विवाद है.”

    इस मामले का जिक्र कई बार अदालतों में किया जाता है.
    हिंदू राष्ट्र पर जस्टिस सेन का हालिया बयान इसी वाकये की श्रेणी में सटीक बैठता है. ख़ास कर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि जस्टिस सेन ने ना तो इसके लिए सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल क्या ना ही छिपे शब्दों में ऐसा कुछ कहा. उन्होंने साफ तौर पर अपने शब्दों में हिंदू राष्ट्र की हिमायत की.

    ‘राष्ट्र सर्वोच्च है और राष्ट्र का नाम हिंदू राष्ट्र है’
    क्या सनातन संस्था ‘उग्र हिंदुत्व’ की वर्कशॉप है?
    कनाडा के चीफ़ जस्टिस से जस्टिस टॉमस बर्गर के ख़िलाफ़ शिकायत कनाडा फेडेलर कोर्ट के एक दूसरे जज ने थी. ये जज कनाडाई ज्यूडिशियल कमिटी के चेयरमैन थे.

    जस्टिस सेन के बयान से नाराज़गी इस उदाहरण के मद्देनज़र समझी जा सकती है.
    न्यायपालिका से संबंधित क़ानून (जजेस एक्ट) के तहत कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल का गठन किया गया था. ये दुर्भाग्य की बात है कि भारत में जजों के लिए इस तरह की कोई अनुशासनात्मक समिति नहीं है.

    और रह बात भारतीय जजों की तो वो अपनी ताकत, अथॉरिटी और सम्मान को ले कर कभी-कभी संवेदनशील हो जाते हैं.
    जस्टिस बर्गर ने खुद के बचाव की कोशिश की थी. उनका कहना था, “जो मैंने किया वो अपारंपरिक था लेकिन ये किसी भी मायने में राजनीति की तरफ इशारा नहीं था.”

    उनकी इस दलील को बेतुकी माना गया था और सभी ने से खारिज कर दिया था. उन्होंने कई मामलों का ज़िक्र करकते हुए इस पर लंबी दलील दी थी लेकिन उसे माना नहीं गया.

    ज्यूडिशियल काउंसिल ने इस मामले में जांच करने के लिए जीन जजों की एक समिति बनाई. इस समिति की रिपोर्ट मे कहा गया, “कानून के इतिहास से जो सिद्धांत उभरता है वो ये है कि राजनीतिक और क़ानूनी दायरे अलग हैं और इन्हें स्पष्ट रूप से अलग ही रहना चाहिए और संसदीय लोकतंत्र का इस मौलिक आधार का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए.”

    क्या ये दलील भारतीय जज पर भी लागू नहीं की जानी चाहिए?
    सफ़ाई स्वीकार्य नहीं
    समिति का कहना था, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों को अलग करने के लिए किए गए लंबे संघर्ष का इतिहास ये बताता है कि न्यायाधीशों को राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए. साथ ही राजनेताओं को न्यायिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए.”

    “इसके साथ ही ये महत्वपूर्ण है कि न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर लोगों का विश्वास कायम रहे.”

    जस्टिस बर्गर के केस में रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए अपने कार्यालय को इस्तेमाल किया.

    सार ये है कि इस ऐतिहासिक मामले का हर शब्द टिप्पणी करने वाले हाई कोर्ट के जज पर भी लागू होता है.
    रिपोर्ट में कहा गया, “जज का यह तर्क या बहाना स्वीकार्य नहीं है कि उसने अंतरात्मा के आधार पर कोई बात कही. हर राजनीतिक विषय पर जजों के अपने निजी विचार हो सकते हैं. अगर जस्टिस बर्गर के विचारों का स्वीकार किया जाए तो हो सकता है बाक़ी जज ऐसे बयान देने लगेंगे जो एक-दूसरे से अलग होंगे.”

    अगर जज एक-दूसरे से सार्वजनिक तौर पर बहस करने लगेंगे तो जनता के मन में उनके प्रति सम्मान पर क्या असर होगा?
    ऊपर से राजनेता और मीडिया ख़ामोश नहीं रहेंगे. वे भी अखाड़े में कूद पड़ेंगे जज को अपने बयान की सफ़ाई में इस तरह से उतरना पड़ेगा मानो वह ख़ुद उस विवादित विषय में एक पक्ष हों.

    ऐसे में इस मामले (मेघालय हाई कोर्ट के जज वाले) में अगर कुछ नहीं होता है तो न्यायिक स्वतंत्रता और मर्यादा को नुक़सान पहुंचेगा. ऐसा होने से रोकना है तो किसी को सुप्रीम कोर्ट जाना होगा और मांग करनी होगी कि ग़लती करने वाले इस जज के संबंध में उचित क़दम उठाए जाएं.

    सभी को करनी चाहिए आलोचना
    साथ ही बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया को बोलना चाहिए. अफ़सोस है कि मीडिया इस विषय पर ख़ामोश है. मीडिया, बार और बेंच को इसकी निंदा करनी चाहिए.

    अगर कोई जज किसी महत्वपूर्ण विषय पर अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को अनसुना नहीं कर पा रहा है और उसे लगता है कि उसे इस विषय में बोनला चाहिए तो उसे जज के तौर पर बात नहीं करनी चाहिए.

    अगर वह चाहता है कि किसी तरह का विवाद खड़ा न हो तो उसे इस्तीफ़ा देना चाहिए और फिर अखाड़े में उतरना चाहिए ताकि बाद में न्यायपालिका के बजाय बात उसी पर आए.

    ऐसे में इन जज को शालीनता से पद छोड़ देना चाहिए. जो कुछ उन्होंने कहा है, उनके शब्दों ने उन्हें हाई कोर्ट बेंच में बने रहने लायक नहीं छोड़ा है.

    उन्होंने 14 दिसंबर को अपने बचाव में जो बातें कहीं, उनका भी कोई मतलब नहीं है. हिंदू राष्ट्र की वकालत करने का मतलब यह कहना है कि संविधान ग़लत है.

    ऐसा ही आरएसएस कहता है कि ये संविधान तो अंग्रेज़ी है और हमारा अपना स्वदेशी संविधान होना चाहिए.

    इस विषय में डॉक्टर बीआर आंबेडकर की वह बात याद आती है जो उन्होंने ‘पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ़ इंडिया में लिखी थी- “हिंदू राष्ट्र बनना भारत के लिए विनाशकारी होगा.”

  • प्रेमी को पायलट बनाने के लिए प्रेमिका ने अपने हि घर को लुटा,अबतक आपने लड़की के लिए लड़कों को चोरी करते हि सुना होगा


    सांकेतिक तस्वीर

    मिल्लत टाइम्स, राजकोट:आपने वो गाना तो फिल्म तो जरूर देखी होदी ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’। मगर आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं, जहां गर्लफ्रेंड के शौक और जरूरते पूरी करने के लिए ब्वॉयफ्रेंड चोरी करने लगते हैं वहां किसी लड़की को अपने प्यार के लिए चोरी करने की बात कम ही सुनी होगी। वैसे कहते हैं कि प्यार की राह आसान नहीं होती है इसमें बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं।

    इस बात को गुजरात के राजकोट की रहने वाली एक लड़की ने सच साबित कर दिया है। उसने अपने दो साल से ब्वॉयफ्रेंड रहे हेत शाह की मदद के लिए अपने घर में चोरी की। लड़की का नाम प्रियंका परसाना है जिसने अपने प्रेमी को कमर्शियल पायलट का कोर्स करवाने के लिए चोरी की। पुलिस ने बंगलूरू से लड़के के पास से चोरी किए जेवरात और कैश बरामद कर लिए हैं।

    प्रियंका ने कथित तौर एक करोड़ रुपये मूल्य के कैश और जेवरात की चोरी की ताकि इससे बंगलूरू स्थित पायलट ट्रेनिंग एकेडमी की फीस जमा हो सके। उसने अपने घर को तहस-नहस भी कर दिया ताकि यह मामला चोरी का लगे। प्रियंका और हेत को शनिवार को पुलिस ने उस समय पकड़ लिया जब वह चोरी की योजना बनाकर उसे अंजाम दे रहे थे।

    पुलिस ने दोनों के पास से खोया हुआ कैश और ज्वैलरी बरामद कर ली है। प्रियंका भक्तिनगर के पॉश इलाके गीतांजलि पार्क में रहती है। वहीं हेत गीत गुरजारी सोसायटी का रहने वाला है। दोनों पिछले दो सालों से रिलेशनशिप में थे। दोनो चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहे थे और उनकी मुलाकात ट्यूशन क्लास के दौरान हुई थी।

    पुलिस के अनुसार प्रियंका का परिवार उस समय टूट गया जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी ने 29 नवंबर को अपने ब्वॉयफ्रेंड के लिए कैश और ज्वैलरी चुराई थी। प्रियंका के पिता द्वारा चोरी का केस दर्ज करवाने के 17 दिन बाद इसे सुलझा लिया गया। हालांकि बेटी के मामले में शामिल होने की बात पता लगने पर उसका परिवार एफआईआर वापस लेना चाहते हैं।

  • चुनाव परिणाम लाइव अपडेट: तेलंगाना में TRS 91 AIMIM 7 कांग्रेस 16 BJP 4 पर

    चुनाव परिणाम लाइव अपडेट: तेलंगाना में TRS 91 AIMIM 7 कांग्रेस 16 BJP 4 पर

    तेलंगाना में टीआरएस को भारी बहुमत एम आई एम को भी 7 सीट के साथ बढ़त आपको बता दें में कांग्रेस को 16 मिले हैं तो बीजेपी 4 पर ही लटक रही है

  • देशजलाऊ मीडिया ने किया दुष्प्रचार,PFI द्वारा लगाए गए RSS मुर्दाबाद के नारे को बता दिया,भारत देश मुर्दाबाद’

    दो साल में बिहार में यह तीसरी घटना है जब देशजलाऊ मीडिया ने समाज में आग लगाने की करतूत दिखाई. इस बार दरभंगा में सड्यंत्रकारी झूठ परोसा गया. इसके पहले अररिया और पटना में भी ऐसा ही कुकर्म मीडिया के एक वर्ग करके अपमानित हो चुका है.

    मिल्लत टाइम्स, बिहार: यह घटना दरभंगा शहर में 6 दिसम्बर की है. इस दिन SDPI यानी Social Demoratic Party of India के कार्यकर्ता बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी मनाने के एक जुलूस निकाला था. विधिवत रूप से इस जुलूस की सूचना पुलिस प्रशासन को थी और खुद एक मजिस्ट्रेट की देखरेख में यह जुलूस किलाघाट इलाके से निकला. जुलूस में लोग ‘RSS मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे. लेकिन शाम होते होते आगलगाऊ पत्रकारों और कुछ अन्य लोगों ने ‘RSS मुर्दाबाद’ के नारे को ‘भारत देश मुर्दाबाद’ कहके कुप्रचारित करना शुरू कर दिया.

    देश शलाओ मिडिया द्वारा इसे प्रमुखता से प्रसारित भी किया गया. देखते ही देखते दरभंगा सदर के भाजपा विधायक संजय सरावगी भी इस मामले में कूद पड़े और उन्होंने भी आग में घी डालने की कोशिश की और बयान दिया कि ऐसे नारे को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने कथित देशद्रोहियों को गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम भी देना शुरू कर दिया.

    आज मिल्लत टाइम्स ने दरभंगा की एसएसपी गरिमा मलिक से फोन पर बात करके पूछा है कि आपने किस आधार पर एफ आई आर दर्ज किया था उन्होंने कहा कि मुझे सूचना मिली थी और वीडियो के आधार पर हमने एफ आई आर दर्ज कर लिए जब उनसे पूछा गया कि आपको यह वीडियो कहां से प्राप्त हुआ तो उन्होंने कहा कि मुझे कहीं से प्राप्त हुआ था मिल्लत टाइम्स ने जब पूछा है कि क्या आपको यह वीडियो भाजपा विधायक की तरफ से दिया गया था या फिर विधायक के कहने पर आप ने एफआइआर दर्ज की थी तो उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई हाथ नहीं है और आगे कुछ भी बताने से मना कर दिया

    हालांकि बाद में दरभंगा के ही एक पत्रकार ने इस विडियो को अनालाइज करते हुए यूट्यूब पर डाला है और बताया है कि कुछ शरारती लोगों ने आम जन के साइको का दोहन किया है और ‘RSS मुर्दाबाद’ को ‘भारत देश मुर्दाबाद’ कहके अफवाह उड़ाई है.

    आप को याद दिला दें कि दो साल पहले पटना में PFI Popular Front of India ने एक जुलूस निकाला था जिसमें ‘PFI जिंदाबाद’ के नारे लगे. PFI जिंदाबाद के नारे को उस समय पटना के कुछ आगलगाऊ पत्रकारों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहके कुप्रचारित किया था.
    पहले भी देशजलाऊ पत्रकारों की पिट चुकी है भेद

    एक अन्य घटना पिछले दिनों अररिया में हुई जहां उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम ने भाजपा को पटखनी दी थी. जीत के जश्न में निकले जुलूस पर आरोप लगाया गया कि उसमें पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे. इस मामले में भी केस किया गया और काफी बखेड़ा किया गया. लेकिन जांच से पता चला कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे ही नहीं.
    लेकिन फिर उसी घृणित मानसिकता और समाज में जहर फैलाने वाले तत्वों ने दरभंगा में वैसी ही साजिश रची.
    इस मामले में SDPI के शमीम अख्तर ने मिडिया को बताया है कि वह इस मामले में लीगल कार्रवाई के लिए अध्ययन कर रहे हैं. ध्यान रहे कि PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक विंग SDPI है. इस संगठन पर झारखंड में भी देशद्रोह का मुकदमा किया गया था लेकिन झारखंड़ की अदालत ने इस केस को खारिज कर दिया था.
    input:naukarshahi