Category: खास ख़बरें

  • अफ़साना ख़ातून ने जिसके लिए अपना धर्म और घर छोड़ा अब वो भी उसको छोड़ कर चला गया

    हिन्दू लड़की का मुसलमान लड़के से और मुसलमान लड़की का हिन्दू लड़के से हिंदुस्तान में शादी करना एक फ़ैशन बन गया है.

    लेकिन इसका अंजाम अक़्सर बहुत ख़राब होता है है और शादी के कुछ महीनों के बाद लड़कियों को पछताना पड़ता है एक ऐसी ही घटना बिहार के बेगूसराय में पेश आया है जहाँ एक मुसलमान लड़की ने एक हिन्दू लड़के के साथ इश्क़ किया उससे शादी की लेकिन अब वो इंसाफ़ की भीख मांग रही है.

    वहीं लड़की ज़िला प्रशासन से इंसाफ़ की गुहार लगा रही है
    अपनी दास्तान सुना रही है जिस हिन्दू लड़के से उसने शादी की थी वो उसपर ज़ुल्म कर रहा है उसके साथ मारपीट कर रहा है उसे अब बीबी बना कर रखने के लिए तैयार नही है

    .
    अफसाना खातून कल अपना दर्द लेकर बेगुसराय के sp अवकाश कुमार के जनता दरबार मे पहुँची और वहां उसने अपनी दर्द बयाँ किया अफ़साना खातून sp के दरबार मे बताया के मंसूरचक थाना के गांव तिनमुहनी के रहने वाले मो सबाउद्दीन की बेटी है

    वो बेगूसराय ज़िला के बछवाड़ा गाँव मे पढ़ने जाती थी उसी समय सोनू कुमार साह नाम के एक लड़के के साथ उसकी मुलाकात हुई ये मुलाकात मोहब्बत में तब्दील हो गईं
    दोनों ने एक दूसरे का नम्बर लिया और उसके बाद एक दूसरे से बातचीत का सिलसिला जारी रहा whastapp पर चैटिंग लगातार जारी रही .

    सोनू कुमार बछवाड़ा के गैस एजेंसी में काम करता था.
    अफ़साना खातून और सोनू कुमार के बीच मोहब्बत परवान चढ़ा

    उसके बाद सोनू ने शादी की इच्छा जताई कहा के हम दोनों शादी कर लेंगे और जीवन ख़ुशी से गुजारेंगे

    अफ़साना खातून ने कहा के हम मुसलमान है और आप हिन्दू है इसलिए शादी मुमकिन नही है। मुसलमान में शादी का तरीका अलग है और हिन्दू रीतिरिवाज अलग है हमारे घर वाले भी इस रिश्ते को कुबूल नही करेंगे और निकाल बाहर करेंगे

    सोनू कुमार ने अफ़साना की बात नही मानी और इसका मिलना जुलना पहले से ज़्यादा हो गया और सोनू कुमार के कहने पर अफ़साना खातून हिन्दू रीति रिवाज़ से शादी कर ली

    सोनू कुमार के घरवाले ने इस शादी में शिरकत नही की और ना उनकी रज़ामन्दी शामिल थी इधर अफ़साना खातून के घर वाले भी इस रिश्ता के ख़िलाफ़ थे और किसी ने इसकी इज्जाजत दी और ना कोई इस शादी में शामिल हुआ.

    शादी करने के बाद दोनों ने बछवाड़ा में ही कराये के एक मकान में रहने लगे

    कुछ दिनों के बाद अफ़साना खातून गर्भवती हो गई उसने ख़ुशी से ये समाचार अपने पति को दी उसके पति ने ख़ुश होने के बजाय ग़म का इज़हार किया अफ़साना ख़ातून पर दवाब बनाया के वो बच्चा जाया कर दे

    अफ़साना ख़ातून ने इनकार किया तो उसके पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी आख़िरकार अफ़साना ख़ातून को अपने पति के ज़ुल्म के सामने झुकना पड़ा और उसने अबॉर्शन करवा लिया

    उसके कुछ दिनों के बाद सोनू कुमार बछवाड़ा बेगूसराय छोड़ कर राजगीर चला गया और किसी गैस ऐजेंसी में ही काम कर रहा है

    पत्नी अफ़साना ख़ातून के मुताबिक उसका पति अब उसका फ़ोन नही उठाता है कभी बात होती है तो उसके साथ ग़ल गलौज करता है और साफ साफ़ कहता है अब मुझे तुम्हारे साथ नही रहना है तुम मेरी बीबी नही हो तुम्हें जहां जाना है जाओ.

    अफ़साना ख़ातून का कहना है मैं ने कई बार रिश्त सुधारने की बात की उसको बहुत मनाने की कोशिस की उससे कहा इस दुनिया मे तुम्हारे सिवा मेरा कोई नही है तुमहारे लिए हमने अपना धर्म छोड़ा है अपने घर वालों को छोड़ दिया
    अब अग़र तुम भी मुझे छोड़ दो गे तो मैं कहाँ जाऊंगी अब मेरा सहारा कौन होगा .

    ये कहानी 22 साल की मुस्लिम लड़की अफ़साना ख़ातून की है जिसनें एक हिन्दू लड़के पहले मोहब्बत की उसके बाद उससे शादी की इस नाजायज़ मोहब्बत और नाजायज़ शादी के लिए उसने अपना धर्म छोड़ा अपने माँ बाप घरवालों से बग़ावत की और अब सोनू कुमार साह भी उसको छोड़कर जा चुका है जिसके लिए उसने ये सब किया

    अफ़साना ख़ातून ने अब बेगूसराय के Sp अवकाश कुमार से मदद की गुहार लगाई है ये घटना समाज के लिए एक संदेश है
    अफ़साना ख़ातून की ज़िन्दगी बर्बाद हुई है औरों के लिए एक सीख है.

  • तेज बहादुर फिर हुए तेज़,प्रधानमंत्री मोदी को दी चुनैती,हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाज़ा

    प्रयागराज, (एजेंसी)। वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव की वैधता को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है

    सीआरपीएफ के पूर्व सिपाही तेज बहादुर यादव ने रविवार को महानिबंधक के समक्ष उपस्थित होकर चुनाव याचिका दाखिल की है। नियमानुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर ही चुनाव याचिका दाखिल की जा सकती है। याचिका में तेज बहादुर ने अपने नामांकन पत्र को नियम विरुद्ध खारिज करने को पीएम मोदी के चुनाव को चुनौती देने का आधार बनाया है।

  • ज़ायरा वसीम ने अल्लाह के लिए फ़िल्मी दुनिया को कहा अलविदा,बोली फिल्मों के दौरान धर्म से भटक गई थी

    फ़िल्म ‘दंगल’ और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ जैसी फ़िल्मों से चर्चित हुईं बाल अदाकारा ज़ायरा वसीम ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया है.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:फ़ेसबुक पर लिखी एक लंबी पोस्ट में उन्होंने कहा है कि अपने धर्म और अल्लाह के लिए यह फ़ैसला ले रही हैं. ज़ायरा ने कहा है कि वो फ़िल्में में काम करने के दौरान अपने धर्म से भटक गई थीं.

    पढ़िए उनके पोस्ट के अहम हिस्से
    पाँच साल पहले मैंने एक फ़ैसला किया था, जिसने हमेशा के लिए मेरा जीवन बदल दिया था. मैंने बॉलीवुड में क़दम रखा और इससे मेरे लिए अपार लोकप्रियता के दरवाज़े खुले. मैं जनता के ध्यान का केंद्र बनने लगी. मुझे क़ामयाबी की मिसाल ती तरह पेश किया गया और अक्सर युवाओं के लिए रोल मॉडल बताया जाने लगा.

    हालांकि मैं कभी ऐसा नहीं करना चाहती थी और न ही ऐसा बनना चाहती थी. ख़ासकर क़ामयाबी और नाकामी को लेकर मेरे विचार ऐसे नहीं थे और इस बारे में तो मैंने अभी सोचना-समझना शुरू ही किया था.

    आज जब मैंने बॉलीवुड में पांच साल पूरे कर लिए हैं तब मैं ये बात स्वीकार करना चाहती हूं कि इस पहचान से यानी अपने काम को लेकर खुश नहीं हूं. लंबे समय से मैं ये महसूस कर रही हूं कि मैंने कुछ और बनने के लिए संघर्ष किया है.

    मैंने अब उन चीज़ों को खोजना और समझना शुरू किया है जिन चीज़ों के लिए मैंने अपना समय, प्रयास और भावनाएं समर्पित की हैं. इस नए लाइफ़स्टाइल को समझा तो मुझे अहसास हुआ कि भले ही मैं यहां पूरी तरह से फिट बैठती हूं, लेकिन मैं यहां के लिए नहीं बनीं हूं.

    इस क्षेत्र ने मुझे बहुत प्यार, सहयोग और तारीफ़ें दी हैं लेकिन ये मुझे गुमराही के रास्ते पर भी ले आया है. मैं ख़ामोशी से और अनजाने में अपने ईमान से बाहर निकल आई.

    मैंने ऐसे माहौल में काम करना जारी रखा जिसने लगातार मेरे ईमान में दख़लअंदाज़ी की. मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता ख़तरे में आ गया. मैं नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ती रही और अपने आप को आश्वस्त करती रही कि जो मैं कर रही हूं सही है और इसका मुझ पर फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है. मैंने अपने जीवन से सारी बरकतें खो दीं.

    बरकत ऐसा शब्द है जिसके मायने सिर्फ़ ख़ुशी या आशीर्वाद तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये स्थिरता के विचार पर भी केंद्रित है और मैं इसे लेकर संघर्ष करती रही हूं.

    मैं लगातार संघर्ष कर रही थी कि मेरी आत्मा मेरे विचारों और स्वाभाविक समझ से मिलाप कर ले और मैं अपने ईमान की स्थिर तस्वीर बना लूं. लेकिन मैं इसमें बुरी तरह नाकाम रही. कोई एक बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार.

    अपने फ़ैसले को मज़बूत करने के लिए मैंने जितनी भी कोशिशें कीं, उनके बावजूद मैं वही बनी रही जो मैं हूं और हमेशा अपने आप से ये कहती रही कि जल्द ख़ुद को बदल लूंगी.

    मैं लगातार टालती रही और अपनी आत्मा को इस विचार में फंसाकर छलती रही कि मैं जानती हूं कि जो मैं कर रही हूं वो सही नहीं नहीं लग रहा. लेकिन एक दिन जब सही समय आएगा तो मैं इस पर रोक लगा दूंगी. ऐसा करके मैं लगातार ख़ुद को कमज़ोर स्थिति में रखती, जहां मेरी शांति, मेरे ईमान और अल्लाह के साथ मेरे रिश्ते को नुक़सान पहुंचाने वाले माहौल का शिकार बनना आसान था.

    मैं चीज़ों को देखती रही और अपनी धारणाओं को ऐसे बदलते रही जैसे मैं चाहती थी. बिना ये समझे कि मूल बात ये है कि उन्हें ऐसे ही देखा जाए जैसी कि वो हैं.

    मैं बचकर भागने की कोशिशें करती और आख़िरकार बंद रास्ते पर पहुंच जाती. इस अंतहीन सिलसिले में कुछ था जो मैं खो रही थी और जो लगातार मुझे प्रताड़ित कर रहा था, जिसे न मैं समझ पा रही थी और न ही संतुष्ट हो पा रही थी.

    यह तब तक चला जब तक मैंने अपने दिल को अल्लाह के शब्दों से जोड़कर अपनी कमज़ोरियों से लड़ने और अपनी अज्ञानता को सही करने का फ़ैसला नहीं किया.

    क़ुरान के महान और आलौकिक ज्ञान में मुझे शांति और संतोष मिला. वास्तव में दिल को सुकून तब ही मिलता है जब इंसान अपने ख़ालिक़ के बारे में, उसके गुणों, उसकी दया और उसके आदेशों के बारे में जानता है.

    मैंने अपनी स्वयं की आस्तिकता को महत्व देने के बजाय अपनी सहायता और मार्गदर्शन के लिए अल्लाह की दया पर और अधिक भरोसा करना शुरू कर किया.

    मैंने जाना कि मेरे धर्म के मूल सिद्धांतों के बारे में मेरा कम ज्ञान और कैसे पहले बदलाव लाने की मेरी असमर्थता, दरअसल दिली सुकून और ख़ुशी की जगह अपनी (दुनियावी और खोखली) इच्छाओं को बढ़ाने और संतुष्ट करने का नतीजा थी.

    मेरा दिल शक़ और ग़लती करने की जिस बीमारी से पीड़ित था उसे मैंने पहचान लिया था. हमारे दिल पर दो बीमारियां हमला करती हैं. ‘संदेह और ग़लतियां’ और दूसरी ‘हवस और कामनाएं.’ इन दोनों का ही क़ुरान में ज़िक्र है.

    अल्लाह कहता है, “उनके दिलों में एक बीमारी है (संदेह और पाखंड की) जिसे मैंने और ज़्यादा बढ़ा दिया है.” मुझे अहसास हुआ कि इसका इलाज सिर्फ़ अल्लाह की शरण में जाने से ही होगा और वास्तव में जब मैं रास्ता भटक गई थी तब अल्लाह ही ने मुझे राह दिखाई.

    क़ुरान और पैग़ंबर का मार्गदर्शन मेरे फ़ैसले लेने और तर्क करने की वजह बना और इसने ज़िंदगी के प्रति मेरे नज़रिए और ज़िंदगी के मायने को बदल दिया.

    हमारी इच्छाएं हमारी नैतिकता का प्रतिबिंब हैं. हमारे मूल्य हमारी आंतरिक पवित्रता का बाहरी रूप हैं. इसी तरह क़ुरान और सुन्नत के साथ हमारा रिश्ता, अल्लाह और धर्म के साथ हमारे रिश्ते और हमारी इच्छाओं, मक़सद और ज़िंदगी के मायने को परिभाषित करता है.

    मैंने कामयाबी को लेकर अपने विचार, अपनी ज़िंदगी के मायने और मक़सद के गहरे स्रोतों को लेकर सावधानीपूर्वक सवाल किया. सोर्स कोड जिसने मेरी धारणाओं को प्रभावित किया, वो अलग आयामों में विकसित हुआ.

    कामयाबी का हमारे पक्षपाती, भ्रमित, पारंपरिक और खोखले जीवन मूल्यों से सह-संबंध नहीं है. हमें क्यों बनाया गया इसके मक़सद को समझ लेना ही कामयाबी है. हम अपनी आत्मा को धोखा देकर गुमराही में आगे बढ़ते रहते हैं और ये भूल जाते हैं कि हमें क्यों बनाया गया है.

    ये यात्रा थकाऊ रही है, लंबे समय से मैं अपनी रूह से लड़ती रही हूं. ज़िंदगी बहुत छोटी है लेकिन अपने आप से लड़ते रहने के लिए बहुत लंबी भी है. इसलिए आज मैं अपने इस फ़ैसले पर पहुंची और मैं अधिकारिक तौर पर इस क्षेत्र से अलग होने की घोषणा करती हूं.

    यात्रा की कामयाबी आपके पहले क़दम पर निर्भर है. मेरे सार्वजनिक तौर पर ऐसा करने का कारण अपनी पवित्र छवि बनाना नहीं है बल्कि मैं एक नई शुरुआत करना चाहती हूं और उसके लिए कम से कम मैं इतना तो कर सकती हूं. अपनी इच्छाओं के सामने समर्पण मत करो क्योंकि इच्छाएं अनंत हैं. आपने जो कुछ हासिल किया है, हमेशा उससे बाहर निकलो

  • रामविलास पासवान समेत चार सदस्य राज्यसभा एमपी निर्विरोध निर्वाचित

    मिल्लत टाइम्स,नई:दिल्ली केन्द्रीय मंत्री औरलोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान समेत चार सदस्य शुक्रवार को राज्यसभा के लिएनिर्विरोध निर्वाचित हुए। पासवान के अलावा ओडिशा से बीजद केअमर पटनायक, सस्मित पात्रा और भाजपा केअश्विनी बैष्णव भी निर्विरोध चुने गए।अश्विनी को बीजद ने भी समर्थन दिया। उधर, गुजरात की दो सीटों पर 5 जुलाई को चुनाव होना है।

    लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव और एक सदस्य के इस्तीफेके बाद से राज्यसभा की 6 सीटें खाली हुई थीं। इनमें ओडिशा की तीन, गुजरात की दो और बिहार की एक सीट थी। ओडिशा मेंअच्युतानंद समंता के लोकसभा,प्रताप केशरी देव के विधानसभा चुनाव जीतने औरसौम्य रंजन पटनायक के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद तीन सीटें खाली हुई थीं।

    गुजरात में अमित शाह और स्मृति ईरानी के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद 2 सीटें खाली हुईं। जबकि बिहार में रविशंकर प्रसाद के चुनाव जीतने के बाद से राज्यसभा की एक सीट खाली हुई। गुजरात में 5 जुलाई को दोनों सीटों पर अलग-अलगचुनाव होने हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

    हाजीपुर से 8 बारसांसद रहे पासवान

    पासवान के चुने जाने के बाद राज्यसभा में लोजपा का भी खाता खुल गया। पासवान ने इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। वे हाजीपुर से आठ बार सासंद चुने गए। इस बार हाजीपुर से उनकी जगह उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस ने चुनाव लड़ा था।पासवान ने हाजीपुर से1977, 1980, 1989,1996, 1998, 1999, 2004 और 2014 मेंचुनाव जीता।

  • डॉ सारा जैदी ने नि:संतानता परामर्श शिविरो मे उपचार के साथ परामर्श देकर रोगियों को राहत पहुंचा रही है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की प्रमुख नि:संतानता रोग विशेषज्ञ डा.सारा जैदी प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रो मे जाकर नि:संतानता परामर्श शिविर मे भाग लेकर गर्भ धारण करने मे आ रही दिक्कतों व उनसे बचाव एवं निवारण के बारे मे तफ्सील से बताते हुये रोगियो का उपचार करके राजस्थान मे बढते उक्त रोग पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।

    नि:संतानता रोग विशेषज्ञ डा.सारा जैदी ने महिलाओं की शादी की सही उम्र 24-28 साल को ठीक बताते हुये कहा कि शराब सेवन, स्मोकिंग, केरियर को लेकर तनाव व न्यूट्रीशियन की कमी के कारण सहायक अण्डे बनने मे दिक्कत होने के कारण आज नि:संतानता रोग के मरीज काफी बढने लगे है। पिछले पांच साल मे यह तादाद ठीक डबल होना पाया जा रहा है। डा. सारा ने कहा कि महिलाओं की शादी की ठीक उम्र 24-28 साल मानी जाती है लेकिन बडे शहरो मे अब शादी की उम्र का चलन तीस की उम्र पार करने के बढते चलन से गर्भ धारण करने मे आवश्यक सहायक अण्डो की कमी के कारण भी यह रोग बढने लगा है।

    डा.सारा जैदी ने बताया कि पहले महिलाओं के 45 की उम्र पार करने के बाद सहायक अण्डो का निमार्ण होना कम होने लगता था वो समस्या अब महिला की 35 की उम्र के बाद ही नजर आने लगती है। नि:संतानता की समस्या मोबाइल रेडिएसन व हिट के कारण भी होने लगी है। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिसर्च मे पाया गया है कि मोबाइल रेडिएशन के कारण भी शुक्राणू के पैदा होने मे कमी आने लगती है एवं टाईट अण्डरगारमेंट भी सहायक अण्डे बनने मे दिक्कत पैदा करना पाया जाता है।

    मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़ मोबाइल रेडिएशन के अलावा हलवाई व वाहन चालक के अतिरिक्त लम्बी सिटिंग वाले काम करने वालो के साथ साथ तनाव मे रहने वालो मे सहायक अण्डो का निमार्ण कम होने से नि:संतानता रोग बढने लगता है। इस रोग के महिला व पुरुष समान रुप से शिकार हो सकते है। खास तौर पर कुछ अन्य कारणो के अलावा मोबाइल रेडियेशन के कारण नि:संतानता रोग के रोगियों की तादाद पीछले पांच साल मे दूगनी होना पाया जा रहा है।

    राजस्थान के नामी जैदी परिवार व भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैदर अली जैदी (पुलिस अधीक्षक-भरतपुर) की पुत्री डा.सारा जैदी ने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रो के साथ सीकर के एक निजी नीरजा अस्पताल मे रोगियों को परामर्श देने के साथ उपचार भी किया।

    कुल मिलाकर यह है कि अधिक उम्र मे महिलाओं के शादियां करने के बढते चलन, मोबाइल रेडीयेशन व तनाव मे रहने के अलावा लम्बी सिटिंग के काम करने के कारणो से महिला व पुरुषों मे नि:संतानता के बढते रोग के रोगियों की तादाद से भारी इजाफा होने से भारतीय समाज मे चिंता की लहर पाई जाती है। ऐसे चिंताजनक हालत मे डा:सारा जैदी का परामर्श व उपचार बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।

  • NDTV की पत्रकार ने अंजना को लगाई फटकार,कहा ICU में नौटंकी कर के क्या दिखाना चाहती हो

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले मासूमों की संख्या 144 हो गई है। ऐसे में सरकार की नींद है जो टूटने का नाम नहीं ले रही है।

    मगर खुद को तेज बताने वाला ‘आजतक’ ड्रामेबाज़ी पर उतर आया। कल देर रात एंकर अंजना ओम कश्यप मुज्ज़फरपुर पहुंची जहां उन्होंने सीधे वार्ड से ही चिल्ला चिल्लाकर अपनी रिपोर्टिंग शुरू कर दी।

    एंकर अंजना ओम कश्यप को ये मालूम होना चाहिए था कि जिस अस्पताल में वो गई थी वहां बेड की कमी है और जानलेवा बीमारी के चलते हर दिन मरीजों का इजाफा हो रहा है। एंकर का कहना था कि बिना बोले आप लोग सुनते नहीं है मगर जिस तरह से वो बोल रही थी इसे बोलना नहीं चिल्लना कहते है वो भी अस्पताल में जहां लिखा होता कृपया शांति बनाए रखे।

    एंकर की इस हरकत पर NDTV की एंकर कादम्बिनी शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा- ICU में जाकर नौटंकी एंकरिंग करने से, डॉक्टरों पर चिल्लाने से अगर बच्चे ठीक हो जाते तो यही दवाई लिखी जाती। ऐसी रिपोर्टिंग ग़लत और घटिया है।

    हालाकिं एंकर अंजना ओम कश्यप ने बढ़ती आलोचनाओं की वजह सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा SKMCH में AES बच्चों को पहले वार्ड में रखा जाता है। गंभीर होने पर ICU में। कई बच्चों की हालत तो इसलिए ख़राब हो रही है क्योंकि वार्ड में AC नहीं है और सभी को dehydration है। मैंने बिहार सरकार को सुझाव दिया है, ये तो फ़ौरन किया जा सकता है। 1-2 दिन में वार्ड में AC लग जाएगा ऐसा वादा किया गया।

  • गर्मी आई,रमजान आया…लेकिन नहीं आया रूह अफजा, लोगों को मिला फिर तारीख

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:रमजान की शुरुआत हो चुकी है. पहला दिन भी बीत गया, इस बार चिलचिलाती गर्मी में रोजेदारों को पहले दिन सबसे ज्यादा कमी रूह अफजा की खली. हर किसी को उम्मीद थी कि रमजान शुरू होने से पहले रूह अफजा बाजार में मिलने लगेगा. लेकिन अभी तक रूह अफजा बाजार से गायब है. अब रूह अफजा की कमी की चर्चा सोशल मीडिया पर भी होने लगी है.

    क्यों गायब है? इसका सही जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है. कंपनी गोलमोल जवाब दे रही है. चाहने वालों को जब आज से महीने भर पहले रूह अफजा नहीं मिलने की खबर मिली तो विश्वास करना मुश्किल था. क्योंकि रूह अफजा की कमी 1906 से अभी तक कभी नहीं हुई थी.

    कुछ लोगों ने कहा कि यह केवल अफवाह है, लेकिन लोग जब बाजार पहुंचे तो अफवाह हकीकत में बदल गई. दुकानदार भी परेशान हैं कि आखिर माजरा क्या है. कंपनी की ओर से रूह अफजा की सप्लाई क्यों नहीं की जा रही है.

    इस मामले को लेकर हमने पिछले महीने 17 अप्रैल को कंपनी से संपर्क कर वजह जानने की कोशिश की. कंपनी का सीधा कहना था कि प्रमोटरों के बीच आपसी विवाद की खबर अफवाह है और सप्लाई में कमी की वजह प्रोडक्शन यूनिट में टेक्निकल खराबी है. हालांकि उस समय कंपनी की ओर से दावा किया गया था कि प्रोडक्शन तेजी से चल रहा है और अगले एक हफ्ते में रूह अफजा आसानी से बाजार में मिलने लगेगा. लेकिन ऐसा अब तक संभव नहीं हो पाया है.

    दरअसल वर्षों से गर्मी की शुरुआत होते ही टेलीविजन से लेकर तमाम माध्यमों से रूह अफजा का विज्ञापन दिखने लगता था. लेकिन इस बार गर्मी चरम पर पहुंच चुकी है. और रूह अफजा की कहीं कोई खबर नहीं है. आपको याद ही होगा, रूह अफजा का यह मशहूर विज्ञापन, ‘जरा घुलके… जरा मिलके…, ये है इंडिया मेरी जान, जिंदगी का टेस्ट बदलता है, जब इंडिया घुलता-मिलता है. रूह अफजा घुलके जियो’. लेकिन इस बार न तो विज्ञापन दिख रहा है और न ही घर-घर की पसंद रूह अफजा उपलब्ध है.

    बता दें, खबर है कि रूह अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के मालिकों के बीच आपसी विवाद की वजह से प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. हालांकि कंपनी इस तरह की खबर को शुरू से ही खारिज कर रही है. लेकिन जिस से तरह रमजान आ जाने के बावजूद भी रूह अफजा नहीं मिल रहा है, उससे साफ लगता है कि कंपनी के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है.

    सप्लाई की बात कर पल्ला झाड़ रही है. लेकिन 17 अप्रैल से अभी तक तीन हफ्ते बीत चुके हैं और बाजार अब भी रूह अफजा का इंतजार कर रहा है.

    हालांकि अब हमदर्द के चीफ सेल्स मंसूर अली का कहना है कि कुछ हर्बल सामानों की आपूर्ति की कमी की वजह से प्रोडक्शन रुक गया था. क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले हर्बल विदेश से आयात किए जाते हैं, आयात में कमी की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई थी. उन्होंने कहा कि अगले एक हफ्ते के भीतर डिमांड और सप्लाई के अंतर को ठीक कर दिया जाएगा. मंसूर अली की मानें तो गर्मी में 400 करोड़ के इस ब्रांड की बिक्री 25 फीसदी तक बढ़ जाती है. अब जब कंपनी फिर एक हफ्ते में रूह अफजा आसानी से मिलने की बात कह रही है तो ग्राहकों में एक उम्मीद जगी है.

    भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी रूह अफजा की काफी मांग है. गौरतलब है कि रूह अफजा का उत्पादन 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल माजिद ने शुरू किया था. अब अब्दुल माजिद की तीसरी पीढ़ी यानी उनके पोते कंपनी को संभाल रहे हैं.

    खबर है कि पोते अब्दुल मजीद और उसके कजीन हमद अहमद के बीच कंपनी के नियंत्रण को लेकर विवाद चल रहा है. हालांकि इसे केवल अफवाह बता रही है. रूह अफजा के मुकाबले में कई प्रोडक्टस बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन आज भी हर घर की पहली पसंद यही है.

    (इनपुट आजतक)

  • *पवित्र रमजान महीना शीघ्र आने वाला है*

    (फजलुर्रहमान क़ासमी इलाहाबादी)
    इस्लामी शरिया के अनुसार सबसे पवित्र रमजान शीघ्र आने वाला है ,इस्लाम में इस महीने को काफी महत्तव है ,इस्लाम धर्म के अनुसार सबसे पवित्र ग्रंथ क़ुरान इसी महीने में अवतरित की गयी ,क़ुरान के अलावा दोसरी आसमानी ग्रन्थ भी इसी महीने में उतारे गये ,इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहब इस महीने में बहुत ज़्यादा इबादत करते थे ,इस महीने के आने से पहले ही साहब इकराम को इस महीने की फ़ज़ीलत से आगाह करदेते थे ताकि इस महीने में किसी भी तरह से गफलत न बरतें बल्कि अपना अधिकांश समय इबादत में लगाएं ,

    *शैतान को क़ैद कर दिया जाता है,*

    रमजान का महीना इस क़दर पवित्र है जन्नत के दरवाज़ो को खूल दिया जाता है ,और शैतान को ज़ंज़ीर में जकड़ दिया जाता है ताकि इस पवित्र महीने में लोग इबादतों में मशगूल रहें ,और इस माहींने में रिज़्क़ बढ़ा दिया जाता है ,

    *नेकी 70 गुना बढ़ा दी जाती है*

    हदीस में है इस महीने में नेकियों के सवाब को बढ़ा दिया जाता है ,एक नेकी करने पर 70 नेकियों का सवाब मिलता है ,रमजान में कोई एक नमाज़ पढता है तो उसको 70फ़र्ज़ नमाज़ों का सवाब मिलता है ,ऐसे ही कोई भी फ़र्ज़ ऐदा करे उसे 70 गुना सवाब मिलता है ,इससे पता चला क़ि रमजान में एक फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना रमजान के अलावा महीने में 70 फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ने पर जो सवाब मिलता है रमजान में अल्लाहताला एक पढ़ने परवह सवाब देदेता है ,ऐसे ही नफ्ल पर फ़र्ज़ पढ़ने के बराबर सवाब मिलता है ,अल्लाह की तरफ से यह इज़ाफ़ा रमजान की बरकत की वजह से होता है ,

    *तरावीह की नमाज़ सुन्नते मुअक़्क़दा*

    रमजान में एक विशेष नमाज़ अदा की जाती है जिसे तरावीह कहा जाता है ,यह नमाज़ इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद साहब ने केवल तीन दिन पढ़ा था इस डर से कहीं यह नमाज़ फ़र्ज़ ना हो जाये नही पढ़ा ,नबी के ज़माने में और आपकी देहांत हो जाने के बाद इस्लाम के पहले खलीफा हज़रत अबूबकर सिद्दीक़ राज़िअल्लाहुणहु के ज़माने में भी लोग तनहा तनहा तरावीह की नमाज़ अदा करते रहे ,सन 15 हिजरी में इस्लाम के दोसरे खलीफा हज़रत उमर फारूक राज़िअल्लाहुणहु ने तरावीह की नमाज़ एक इमाम के पीछे शुरू करायी ,और उबैइब्ने काब राज़िअल्लाहुणहु को तरावीह का पहला इमाम मुक़र्रर किया ,और उन्होंने 20 रकात तरावीह की नमाज़ अदा करायी ,तबसे आजतक मस्जिदे हराम मक्का और मस्जिदे नबवी मदीना ने 20 नमाज़ तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है ,

    *तरावीह की नमाज़ छोड़ना गुनाह*

    तरावीह की नमाज़ में पूरा क़ुरान पढ़ा जाता है ,मुस्लिम समुदाय के लोग इस नमाज़ को काफी शौक़ से पढ़ते हैं ,इस नमाज़ के प्रति उनमे काफी उत्साह दिखाई देता है ,अगर बात की जाये इस्लामी शरिया की तो तरावीह की नमाज़ सुन्नत मुअक़्क़दा है इसका मतलब यह है कि बगैर किसी परेशानी के इस नमाज़ को छोड़ना गुनाह है और इस नमाज़ को पढ़ने पर बहुत ज़्यादा सवाब मिलता है ,

    *रमजान का रोज़ा फ़र्ज़*

    इस्लामी शरिया में रमजान के रोज़ों का काफी ज़ियादा महत्व है ,रमजान के पूरे महीने का रोज़ा फ़र्ज़ है यानि जो मुसलमान बालिग हैं जिनकी आयु 15 वर्ष की है उस पर रमजान का रोज़ा फ़र्ज़ है ,अथवा अगर कोई मुसाफिर हो यानि 76 किलोमीटर सफर करना चाहता है तो उसे शरीयत में रुखसत दी है कि अगर वह चाहे तो रोज़ों की बाद में क़ज़ा करे ,ऐसे कोई ऐसा मरीज़ हो ,अगर रोज़ा रखता है तो उसकी जान जाने का खतरा हो या उसके मर्ज़ के बढ़ जाने का खतरा हो तो वह फ़िलहाल रोज़ा न रखे बल्कि जब स्वथ हो जाये तो रोज़ों की क़ज़ा करे ,

    *रमजान का रोज़ा छोड़ना बहुत बड़ा गुनाह*

    रमजान के रोज़े पर अल्लाहताला बहुत ज़ियादा सवाब देता है ,रोज़े पर कितना सवाब मिलता है ,यह सिर्फ अल्लाह को मालूम है ,हदीस में है मेरे बन्दे ने मेरे लिए खाने पीने को छोड़ा लिहाज़ा मैं उसका बदला खुद ही दूँगा ,दोसरी इबादतों का बदला अल्लाहताला फरिश्तों के जरिए से दिलवाता है,एक दोसरी हदीस में है रोज़ा जहन्नम से ढाल है मतलब यह है दुनिया में रोज़ा रखने वाला जहन्नम में नही जायेगा ,जबकि रोज़ा का छोड़ना जिसको कोई उज़्र ना हो बहुत बड़ा गुनाह है ,ऐसा मुस्लमान अल्लाह और उसके रसूल का नाफ़रमान है ,
    *रमजान में इबादत का एहतिमाम करें*

    प्यारे नबी ने रमजान के महीने को उम्मत का महीना क़रार दिया ,रमजान का महीना अल्लाह को राज़ी करने का महीना है रमजान के महीने ही सच्ची तौबा करनी चाहिए और रमजान में खूब इबादत करना चाहिए रमजान की हर रात में गुनाहगारों की मगफिरत होती है लिहाज़ा अल्लाह के सामने रूना चाहिए ,और अपनी मगफिरत की भीख मांगनी चाहिए ,और जहन्नम से पनाह मांगना चाहिए ,

    *रमजान में जो महरूम वह सबसे बड़ा बदनसीब*

    रमजान के महीने में अल्लाह की रहमत आम होती है ,हर तरफ रहमत बरसती रहती है ,रोज़ाना यह ऐलान होता है अल्लाह की तरफ से कि कोई गुनाह से माफ़ी मांगने वाला कि उसे माफ़ किया जाये ,रमजान के आखिरी रात में बहुत ज़्यादा लोगों की मगफिरत होती है ,अल्लाह के नबी ने उस मुस्लमान के बारे में बद्दुआ दी है जो रमजान के महीने को पाये और नेक अमल करके अपनी मगफिरत ना करा सके ,जिबरील अलैहिस्सलाम ने यह बद्दुआ दी थी और हमारे प्यारे नबी ने उस पर आमीन कहा ,लिहाज़ा उस शख्स की बर्बादी के बारे में कोई शक नही जो रमजान को पाये और अपनी मगफिरत ना करा सके यानि रमजान में भी गुनाह में पड़ा रहे और नेक अमल ना करे

    *रमजान में गरीबों का रखें खास ख्याल*

    एक हदीस में है रमजान का महीना एक दोसरे के साथ घमखारी का महीना है मतलब अपने पकवान और रिज़्क़ में अपने दोसरे भाईयों को भी शामिल करें खासतौर से गरीबों और पड़ोसियों का खास ख्याल रखे ,उनका हर तरह से सहयोग करे ,उसे बहुत ज़्यादा सवाब मिलेगा ,इसलिए समस्त मुस्लिम भाईओं से निवेदन है कि इस पवित्र महीने के आने से पहले ही अल्लाह के दरबार में सच्ची तौबा करे ,और यह इरादा करे की रमजान में नेक अमल करके अपने अल्लाह को राज़ी करना है ,क्यंकि किया अगले साल हम रमजान में जीवित रहें या नही ,क्यंकि हमारे बहुत से भाई पिछले साल रमजान में थे लेकिन इस बार मौजूद नही ,क्या पता अगले साल हम भी ना रहें इसलिए समय को गनीमत जाने और पवित्र रमजान में नमाज़ की पाबंदी करें और क़ुरान की खूब तिलावत करें,अल्लाह से दुआ है कि हम सबको रमजान की कदरदानी करने वाला बनाये,अमीन

  • आस्था व धरोहर की हिफाजत। असम मे मस्जिद की मीनार का स्थानांतरण।

    चाईजुर रहमान/मिल्लत टाइम्स,असम:
    विज्ञान कितनी सफलतापूर्वक असंभव कार्यों को संभव बनाता है, इसका ताजा उदाहरण असम के नगांव जिले के पुरनी गोदाम में देखा जा रहा है। जहां 100 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक पुरनीगुदाम मस्जिद की मीनार को बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है।

    उल्लेखनीय है कि यह दो मंजिला मीनार इतनी मजबूत है कि वर्ष 1950 में आए विनाशकारी भूकंप के समय भी इस मीनार को कोई क्षति नहीं पहुंची थी। यह मीनार प्राचीन पद्धति से तैयार की गयी है। जिसमें न तो रॉड और न ही सीमेंट का उपयोग किया गया है। बल्कि, इसके निर्माण में अंडा, बोरा चावल, उड़द की दाल, गुड का घोल आदि का उपयोग किया गया था। यही वजह है कि 100 वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी आज यह चट्टान की तरह मजबूत है।

    ज्ञात हो कि बीते कुछ दिनों से इस ऐतिहासिक मीनार को तोड़ने की प्रशासनिक तत्परता चल रही थी। क्योंकि यह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-37 के विस्तार में अवरोध प्रकट कर रही थी। आखिरकार इंपीरियल डेकोर नामक संस्था द्वारा स्थानांतरण की एक तरकीब निकाली गई। इस संस्था के प्रमुख वकील अहमद नामक व्यक्ति ने इस अभियान को नेतृत्व देते हुए हरियाणा के आरआर एंड संस नामक कंपनी के साथ अनुबंध करके इस मीनार को बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करने की योजना बनाई। योजना पर कार्य शुरू हुआ और आखिरकार इसे जमीन से सफलतापूर्वक उठाकर एक सीमेंट के बने बेस पर रखकर आगे ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में अत्याधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सहायता ली गई है।

  • वर्तमान आम चुनाव में कुछ सीटों पर मुस्लिम नेतृत्व वाली सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवार को सदन में पहुंचाने का विश्लेषण किया जाए:मिल्लत टाइम्स कॉन्क्लेव में बुद्धिजीवीयों ने अपने विचार व्यक्त किए

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली
    हिंदुस्तान के सभी चुनाव में मुस्लिम मुस्लिम मतदाता ने लोकसभा की सभी सीटों के अलावा मुस्लिम बहुलक क्षेत्र से भी सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देकर इन्हें सदन में भेजा लेकिन परिणाम में मुसलमानों को कुछ नहीं मिला इन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं दी गई अन्य पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को पार्टी टाइमलाइन से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र,जनता और धर्म के लाभ की बात नहीं करने दी इसलिए 70 में लोकसभा चुनाव में मुसलमानों को चाहिए कि वह मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट दें और उन्हें सदन में पहुंचाएं


    इस विचार को व्यक्त मिल्लत टाइम्स में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने किया और कांक्लेव में उपस्थित लगभग सभी पैनलिस्ट,अतिथि तथा गणमान्य लोगों ने साझा तौर पर मिल्लत टाइम्स के नजरिया से सहमति जताई के हिंदुस्तान में अब मुस्लिम लीडरशिप वाली सियासी पार्टियों पर भरोसा करते हुए उनके प्रतिनिधि को सदन तक पहुंचाना चाहिए और हमें उनको हर तरह से सपोर्ट करना चाहिए सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देने के बजाय मुस्लिम नेतृत्व वाली सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देना चाहिए और उनसे मांग किया जाए कि वह मुस्लिम नेतृत्व वाली पार्टियों को भी गठबंधन का हिस्सा बनाएं

    वजह रहे की मशहूर वेब पोर्टल मिल्लत टाइम्स ने होटल रिवर व्यू जामिया नगर में पिछले दिन 30 मार्च को आम चुनाव 2019 में हिंदुस्तानी मुसलमानों का राजनीतिक रणनीति प्रक्रिया किया होना चाहिए के मुद्दे पर एक कांक्लेव का आयोजन किया जिसके प्रस्तावित शीर्षक निम्नलिखित थे, मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी , प्रभावी प्रतिनिधि और सत्ता मे भागीदारी पर खुलकर बहस हुई इलेक्शन 2019 के मद्देनजर मुसलमानों के लिए बुद्धिजीवियों ,स्काॅलर और गणमान्य लोगों ने यह रणनीति तय किया के 70 सालों में हमने कांग्रेस, आरजेडी, sp-bsp,टीएमसी जेडीएस, सीपीएम, समेत लगभग सभी पार्टियों पर भरोसा किया उनके प्रतिनिधि को मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से वोट देकर सदन में भेजा वर्तमान चुनाव में देश के लोकसभा की जिन सीटों पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ,सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया,वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया ,राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल समेत कई उल्लेखनीय मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों के प्रतिनिधि चुनाव लड़ रहे हैं वहां मुसलमानों को इन्हीं को पुरी तरह सपोर्ट करना चाहिए बड़ी संख्या में वोट देकर इन्हें पार्लियामेंट में पहुंचाना चाहिए
    यह लोग हिंदुस्तान के मुसलमानों,कमजोर, मजलूम , अल्पसंख्यक, दलित और गरीबों का‌ मजबूत आवाज होंगे – इन के हक की लड़ाई लड़ेंगे और नजरियाति स्तर पर हमारी वकालत करेंगे- बाकी अन्य सीटों पर आप सेकुलर पार्टी को वोट दीजिए उनके प्रतिनिधि को सदन तक पहुंचाइए
    कॉन्क्लेव में यह बात भी बहस में आई के कांग्रेस और अन्य सेकुलर पार्टियां मुस्लिम नेतृत्व को उभरने नहीं देना चाहती है उनकी पहली कोशिश होती है कि मुसलमान राजनीतिक तौर पर कमजोर रहे अख्तियार और मोहताज बन कर रहे हालांकि पैनल में शामिल कांग्रेसी लीडर डॉक्टर शकील उजमा अंसारी पूर्व मंत्री बिहार सरकालर ने इसे खारिज कर दिया और कहा की कांग्रेसी मे सभी को एक-समान प्रतिनिधित्व हासिल है

    वरीष्ठ पत्रकार जनाब ए यू आसिफ ने अपने भाषण में इस बात के लिए अपील की के वर्तमान चुनाव में मुस्लिम मतदाता कुछ सीटों पर सेकुलर मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों को वोट देकर जिताने का भी विश्लेषण करें और इन्हें सत्ता तक पहुंचाएं उन्होंने बताया कि पार्लियामेंट के रिकॉर्ड के मुताबिक मुस्लिम मेम्बरान पार्लियामेंट में सबसे ज्यादा सवाल पूछने वाले असदुद्दीन ओवैसी और मौलाना बदरूद्दीन अजमल है इसकी वजह यह है कि यह दोनों एक आजाद पार्टी के लीडर हैं इन पर किसी का दबाव नहीं है ऐसी ही पार्टियों के प्रतिनिधि मुसलमानों के हक में बेहतर साबित होते हैं
    प्रोफेसर अख्तरुल वासे साहब ने कहा मैं अख्तरुल वासे हूं और अख्तरूल ईमान पर यकीन रखता हूं ऐसे मुखलिस और हमदर्द लीडर को हम पार्लियामेंट में देखना चाहते हैं दरअसल उनका इशारा किशनगंज लोकसभा सीट से एम आई एम के उम्मीदवार अख्तर ईमान की ओर था

    मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज कासमी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम वोटों को बांटने के बजाय इसे संयुक्त करने के लिए यह रणनीति तय कर रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने आसाम बिहार और यूपी समेत कई लोकसभा क्षेत्रों पर मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा कर दिया है जहां पहले से मुस्लिम सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवार जीत हासिल कर रहे हैं ऐसे में यह अंदेशा है कि वहां का वोट बंट जाएगा और संप्रदायिक पार्टियों की आसानी से जीत हो जाएगी इसलिए ऐसी सीटों के लिए हम यह रणनीति तय कर रहे हैं कि वहां के मुस्लिम मतदाता मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों को एक होकर वोट दें

    कॉन्क्लेव के श्रृंखला शेसन में एडवोकेट महमूद पराचा सीनियर वकील सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया – मशहूर विश्लेषक मोहतरमा तस्नीम कौशर जनरल सेक्रेट्री महिला- एडवोकेट सर्फुद्दीन अहमद उपाध्यक्ष एसडीपीआई – जनाब कलीमुल हफीज चेयरमैन अलहाफिज एजुकेशनल अकैडमी – मुफ्ती एजाज अरशद कासमी मेंबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड -मशकूर अहमद उस्मानी पूर्व अध्यक्ष एएमयू स्टूडेंट यूनियन – डॉक्टर शकील अल जमा अंसारी पूर्व मंत्री बिहार सरकार – मशहूर विश्लेषक मौलाना अबिदुर रहमान आबिद – सीनियर पत्रकार मोहतरमा शबनम सिद्दीकी – डॉक्टर अब्दुल कादिर शम्स सीनियर सब एडिटर रोजनामा सहारा – बलीग नोमानी प्रवक्ता एम आई एम – इंटरनैशल विश्लेषक अख्तरूल इस्लाम सिद्दीकी – सीनियर पत्रकार कासिम सैयद चीफ एडिटर रोजनामा खबरें नई दिल्ली – डॉ खालिद आजमी कुव्वैत – डॉ मंजर इमाम – डॉक्टर मुजफ्फर हुसैन गजाली – समेत कई बुद्धिजीवी, स्कॉलर्स ने पैनल डिस्कशन में भाग लिया – मुद्दे से संबंधित सवाल किया और चर्चा हुआ-फैसल नजीर और शबीना ने निजामत का कर्तव्य निभाया
    इसके अलावा मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज कासमी – रोजनामा खबरें के चीफ एडिटर कासिम सैयद और मिल्लत टाइम्स के सब एडिटर मोहम्मद अंजर आफाक ने कई सेशन मे एंकरिंग का का कर्तव्य निभाया – सबसे पहले मोहम्मद अफसर अली की तिलावत से कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ मिल्लत टाइम्स कॉन्क्लेव की वीडियो मिल्लत टाइम्स के युटुब चैनल और फेसबुक पेज पर भी प्रकाशित की जाएगी ताकि वह लोग भी इसका लाभ ले सके जो यहां उपस्थित नहीं हो पाएं