Category: खास ख़बरें

  • लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी है, सरकार का घमंड पूरे देश के लिए आर्थिक संकट लाया है : राहुल गांधी

    विभिन्न विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को निरंकुश बताते हुए आरोप लगाया है कि वह विपक्ष की आवाज़ को अलोकतांत्रिक तरीके से दबा रही है.

    नई दिल्ली: किसान बिल को लेकर राज्यसभा (Rajya Sabha) में हुए हंगामे के बाद आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने पर सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, और विभिन्न विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को निरंकुश बताते हुए आरोप लगाया है कि वह विपक्ष की आवाज़ को अलोकतांत्रिक तरीके से दबा रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी है, सरकार का घमंड पूरे देश के लिए आर्थिक संकट लाया है.

    राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, “लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी : शुरुआत में उन्हें चुप किया गया, और बाद में काले कृषि कानूनों को लेकर किसानों की चिंताओं की तरफ से मुंह फेरकर संसद में सांसदों को निलंबित किया गया… इस ‘सर्वज्ञ’ सरकार के कभी खत्म नहीं होने वाले घमंड की वजह से पूरे देश के लिए आर्थिक संकट आ गया है…”

    इससे पहले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सांसदों के निलंबन को लेकर मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की थी. ममता बनर्जी ने अपने ट्वीट में लिखा, “किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ने वाले आठ सांसदों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण है, और इस निरंकुश सरकार की सोच का परिचायक है कि वह लोकतांत्रिक नियमों और सिद्धांतों का सम्मान नहीं करती… हम नहीं झुकेंगे और इस फासीवादी सरकार से संसद में और सड़कों पर लड़ेंगे…

     

  • कृषि विधेयकों पर बोले PM मोदी- आज हंगामा कर रहे लोग ही कृषि सुधारों के सुझाव पैरों तले दबाकर बैठे थे

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक बार फिर बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और परियोजनाओं को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं. इस दौरान पीएम ने संसद में पास हुए किसान विधेयक को लेकर भी अहम बातें कहीं.

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक बार फिर बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं. इस दौरान पीएम ने संसद में पास हुए किसान विधेयक (Farm Bills) को लेकर भी अहम बातें कहीं. पीएम ने अपने भाषण में कहा कि ‘कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है. मैं देश के लोगों को, देश के किसानों, देश के उज्ज्वल भविष्य के आशावान लोगों को भी इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं.’ पीएम ने इन विधेयकों को लेकर उठे हंगामे का जिक्र करते हुए विपक्ष पर हमला भी बोला.

    उन्होंने विधेयकों पर बात करते हुए कहा कि ‘नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल अपनी शर्तों बेच सकता है. उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा. मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी.’

    पीएम ने कहा कि ‘हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. आखिर ये कब तक चलता रहता?’ इसे लेकर पीएम ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि अब देश अंदाजा लगा सकता है कि अचानक कुछ लोगों को जो दिक्कत होनी शुरू हुई है, वो क्यों हो रही है.

    पीएम ने कृषि मंडियों के बंद होने के सवाल पर कहा कि क’ई जगह ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि कृषि मंडियों का क्या होगा? क्या मंडियां बंद हो जाएंगी? कृषि मंडियां कतई बंद नहीं होंगी. ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं. कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा.’ पीएम मोदी ने बताया कि ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए दूसरा कानून बनाया गया है. ये ऐसा कानून है जिससे किसान के ऊपर कोई बंधन नहीं होगा. किसान के खेत की सुरक्षा, किसान को अच्छे बीज, खाद, इन सभी की जिम्मेदारी उसकी होगी, जो किसान से समझौता करेगा.’

    उन्होंने MSP को लेकर उठे विवाद पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘कृषि क्षेत्र में इन ऐतिहासिक बदलावों के बाद, इतने बड़े व्यवस्था परिवर्तन के बाद कुछ लोगों को अपने हाथ से नियंत्रण जाता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए अब ये लोग MSP पर किसानों को गुमराह करने में जुटे हैं. मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि MSP की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी.’ पीएम ने विपक्ष के हंगामे को लेकर यह भी कहा कि ‘यही वो लोग हैं, जो कृषि क्षेत्रों में सुधारों को लेकर स्वामीनाथन समिति के सुझावों को अपने पैरों तले दबाए हुए बैठे हुए थे.’

  • बिहार चुनाव में ओवैसी की एंट्री, आरजेडी के मुस्लिम-यादव समीकरण में लगा सकते हैं सेंध

    बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हो गया है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी जानकारी दी.

    बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां कमर कस चुकी है. इस चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं. इस क्रम में अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (एसजेडीडी) के बीच गठबंधन तय हो गया है. जिससे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है.
    एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार चुनाव के लिए एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हुआ है. यूडीएसए गठबंधन देवेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा. ऐसी पार्टियां, जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं उनका स्वागत है. वहीं बिहार में यादव और मुस्लिम आरजेडी का वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में एआईएमआईएम और एसजेडीडी के साथ आने से आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है.
    ओवैसी ने कहा कि हमारे बारे में पुराना रिकॉर्ड बताता है कि हम किसी से नहीं डरते हैं. हम चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा में आरजेडी ने कितनी सीट जीती है. किशनगंज में अगर हमारी पार्टी नहीं खड़ी तो कांग्रेस वहां से नहीं जीत पाती. बीजेपी अगर जीत रही है तो उसकी जिम्मेदार आरजेडी है. हैदराबाद में मैंने बीजेपी को हराया, शिवसेना को हराया. महागठबंधन अब नहीं रहा.
    कांग्रेस पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस आज शिवसेना की गोद में बैठी है. कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदा समझती है. कांग्रेस की सोच सामंती है. कांग्रेस की गलत नीतियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

    बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी पहले ही बिहार विधानसभा चुना 2020 लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. सितंबर महीने की शुरुआत में ओवैसी की पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया था. एआईएमआईएम 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुकी है.

  • IPL 2020 आज का मुक़ाबला: चेन्नई सुपर किंग्स बनाम मुंबई इंडियंस

    इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें सीजन की शुरुआत मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच अबू धाबी में शाम साढ़े सात बजे से होने वाले मुक़ाबले से हो रही है.

    IPL 2020: Match schedule. All the IPL matches will be played across Dubai, Abu Dhabi and Sharjah, with night matches starting at 7.30pm IST.  .

  • जम्मू-कश्मीर के लिए 1350 करोड़ के पैकेज की घोषणा –

    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य में अर्थव्यवस्था और कारोबार को मजबूती देने के लिए 1350 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है.

    इस पैकेज की घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई है.

    पैकेज के तहत औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली में एक साल के लिए फिकस्ड डिमांड चार्जेस पर 50% की छूट दी गई है.

    इसके अलावा पर्यटन के कारोबार में लगे लोगों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

    पैकेज के मुताबिक अच्छी कीमत और भुगतान के विकल्प के साथ पर्यटन क्षेत्र में लोगों को वित्तीय सहायता के लिए जम्मू और कश्मीर बैंक द्वारा कस्टम हेल्थ-टूरिज़्म स्कीम बनाई जाएगी. इसके अलावा कर्ज़दारों के लिए मार्च 2021 तक स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई है.

    हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों में काम कर रहे लोगों के लिए क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत अधिकतम सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है.

    उन्हें पांच प्रतिशत की ऋण माफ़ी दी जाएगी. ये ऋण माफ़ी छोटे और बड़े दोनों कारोबारियों को मिलेगी. इस योजना में तकरीबन 950 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह धनराशि अगले छह महीनों के लिए इस वित्त वर्ष में उपलब्ध रहेगी.

    उपराज्पाल ने पैकेज की घोषणा करते हुए कहा, ”मैं समझता हूं कि आज तक कभी इतना बड़ा आर्थिक पैकेज नहीं बनाया गया था जिसमें वित्तीय और प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से कारोबारी समुदाय को राहत दी जा रही है. व्यापार होगा तो ना केवल जम्मू-कश्मीर की आम जनता को रोजगार मिलेगा बल्कि छोटे स्तर पर काम करके आजीविका चलाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी.”

    उन्होंने कहा, ”पहला चरण है आत्मनिर्भर भारत. आज संघ राज्य क्षेत्र ने जो निर्णय किया है ये दूसरा चरण है और इससे बहुत बड़ा तीसरा चरण अभी आने वाला है. यहां की नई औद्योगिक नीति भारत सरकार ने तैयार कर ली है, मैं उम्मीद करता हूं कि जल्दी उसकी घोषणा होगी.’

    सरकार ने यह भी कहा है कि बस ड्राइवर, कडंक्टर, ऑटो, टैक्सी ड्राइवर जिन्होंने अपना रोजगार खो दिया है उनकी भी मदद करने के लिए एक कार्य संरचना बनाई गई है.

    यह भी निर्णय लिया गया है कि हाउस बोट मालिकों और ट्रांसपोर्टर्स को मदद दी जाए. उनके पुराने हो चुके वाहन को बदलने और इंश्योरेंस में जो भी सहायता की जा सकती है, उसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा.

    जम्मू और कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को धारा 370 हटा दी गई थी. इसके बाद राज्य का पुनर्गठ करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

     

  • दिल्ली के सभी स्कूल 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे, सरकार ने आदेश जारी किया

    दिल्ली में 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने का आदेश भी रद्द हो गया, कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद

    नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) में सभी स्कूल (Schools) 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. दिल्ली सरकार (Delhi Governemnt) ने इस बारे में आदेश जारी किया है. दिल्ली सरकार के इस आदेश का यह मतलब है कि 21 सितंबर से जो 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने की बात कही थी, वह भी रद्द कर दी गई है. अब केवल ऑनलाइन क्लास जारी रहेंगी. कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद हैं.

    इससे पहले दिल्ली सरकार ने 5 सितंबर को दिल्ली में 30 सितंबर तक सभी स्कूलें बंद रखे जाने का आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि ऑनलाइन पढ़ाई पहले की तरह ही जारी रहेगी. आदेश में कहा गया था कि 20 सितंबर तक छात्रों को किसी भी तरह की एक्टिविटी के लिए स्कूल ना बुलाया जाए.

    सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से अगर 9वीं से 12वीं क्लास के छात्र अपने स्कूल जाना चाहें और टीचर की सलाह लेना चाहें तो वे अपने पेरेंट की लिखित सहमति के साथ जा सकते हैं. हालांकि अगर स्कूल और छात्र का घर कन्टेनमेंट जोन में नहीं है तो ही इजाजत होगी. लेकिन यह स्वैच्छिक होगा.

    दिल्ली सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से स्कूल एक समय में अपने 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन पढ़ाई/ आदि के लिए बुला सकते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्कूलों/छात्रों और टीचर आदि के लिए लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करेगा जिसका पालन करना होगा.

     

  • गूगल ने प्ले स्टोर से हटाया पेटीएम का ऐप

    गूगल ने प्ले स्टोर से पेटीएम का ऐप हटा दिया है. गूगल का कहना है कि पेटीएम ने ऑनलाइन गैम्बलिंग की शर्तों का उल्लंघन किया है. पेटीएम भारत का एक अहम स्टार्ट-अप है और दावा है कि इसके महीने के तौर पर पाँच करोड़ एक्टिव यूज़र्स हैं.

    गूगल ने कहा है कि ऑनलाइन जुआ और दूसरे अनियमित गैम्बलिंग ऐप्स जो सट्टा को बढ़ावा देते हैं, उन्हें प्ले स्टोर रोकता है और पेटीएम लगातार प्ले स्टोर की नीतियों का उल्लंघन कर रहा है.

    गूगल की वाइस प्रेसिडेंट सुजेन फ्रे ने कहा है कि गूगल प्ले इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि ये हमारे ग्राहकों को एक सुरक्षित एहसास देता है. इसके साथ ही डेवलपर्स को ऐसा प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराती है जो उन्हें एक टिकाऊ बिज़नेस का अवसर मुहैया कराता है. हम अपनी वैश्विक नीतियों को हमेशा ऐसे तैयार करते हैं जिसमें सभी पक्षों का ख्याल रखा जाता है.

    “गैम्बलिंग पॉलिसी को लेकर भी हमारा यही उद्देश्य होता है. हम किसी भी ऑनलाइन जुआ और दूसरे अनियमित गैम्बलिंग एप्स जो सट्टा को बढ़ावा देते हैं, उनकी अनुमति नहीं देते हैं. अगर कोई ऐप ग्राहकों को किसी बाहरी लिंक पर ले जाता है जहाँ किसी पेड टूर्नामेंट या नक़दी जीतने का ऑफ़र किया जाता है तो यह हमारे नियमों का उल्लंघन है.”

    लेकिन पेटीएम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि प्रिय पेटीएम यूज़र्स, पेटीएम एंड्रॉयड एप गूगल ऐप स्टोर पर नए डाउनलोड और अपडेट्स की वजह से उपलब्ध नहीं है. जल्द ही यह वापस आएगा. आपके पैसे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और आप अपना पेटीएम ऐप पहले की तरह ही इस्तेमाल कर सकते हैं.

    नवंबर 2016 में जब देश में अचानक नोटबंदी की घोषणा हुई तब पेटीएम का व्यापार भी अप्रत्याशित रूप ऊपर उठा था.

    साल 2010 में इस कंपनी की शुरुआत नकदी रहित लेनदेन के विकल्प के रूप में हुई थी.

    लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं की नकदी पर अधिक निर्भरता के कारण उसके सामने काफ़ी कठिनाइयां थीं.

    छह सालों में इसके 12.5 करोड़ उपयोगकर्ता थे. हालांकि, इसको छोटी दुकानों और व्यापारियों के साथ जोड़ भी दिया गया लेकिन फिर भी लेनदेन की संख्या काफ़ी कम रही थी.

    लेकिन नोटबंदी की घोषणा के तीन महीने बाद ही इसके उपयोगर्ताओं में 50 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.

  • जामिआ मिल्लिया इस्लामिआ के साथ भेदभाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला खत .

    सेवा,
    श्री नरेंद्र मोदी,
    माननीय प्रधान मंत्री,
    साउथ ब्लॉक,
    रायसीना हिल्स
    नई दिल्ली -110001

    आदरणीय प्रधानमंत्री साहब,

    मैं एक गंभीर मामले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं जो हमारे देश के भविष्य के सम्बंध में है।

    जामिया मिलिया इस्लामिया, एक केंद्रीय विश्वविद्यालय जिसका सपना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देखा गया था और आंदोलन के कर्ता-धर्ताओं द्वारा इसे एक निश्चित रूप दिया गया था, इस वर्ष यह शताब्दी वर्ष मना रहा है।
    चौतरफा उत्कृष्टता हासिल करने में जामिया के अथक प्रयासों का फल मिला है और विश्वविद्यालय ने MHRD मूल्यांकन में पहला स्थान हासिल किया है। जामिया ने अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। ये उपलब्धियां छात्रों, शिक्षकों, प्रशासन और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण संभव हो पाई हैं।
    इस तरह के प्रभावशाली एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के बावजूद, यह जानकर निराशा होती है कि केंद्र सरकार उस संस्था को सहयोग नहीं दे रही है, जो न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देती है।

    सौ साल पूरे करने वाली संस्था को 100 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देने का हमारे देश में चलन रहा है।  इस फंड का उपयोग शैक्षिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए किया जाता है। हालांकि, जामिया मिलिया इस्लामिया को 100 साल की एक बहुत ही सफल और ऐतिहासिक पारी को पूरा करने के अवसर पर कोई भी शताब्दी वित्तीय अनुदान नहीं मिला। शिक्षक दिवस के अवसर पर, जामिया टीचर्स एसोसिएशन (JTA) ने भी विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक और शोध सुविधाओं में सुधार के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुदान को जारी करने के लिए आपसे अनुरोध किया था। हालाँकि इस सम्बंध में आप की तरफ़ से आज तक कोई पहल नहीं हुई है।

    जामिया से एक और महत्वपूर्ण अनुरोध है जो लंबे समय से सरकार के पास लंबित है। विश्वविद्यालय ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि वह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने की अनुमति दे।  मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना से राष्ट्रीय स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले डॉक्टरों को तैयार करने में मदद मिलेगी। मैं आपसे जामिया को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने की अनुमति देने का अनुरोध करूंगा। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए लगातार बढ़ती आवश्यकता को संभालने में मदद करेगा।

    जामिया भी MHRD/ UGC द्वारा नियमित धन जारी करने में लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। इसके बकाया बिलों का एक अंबार लगा हुआ है, जिसमें चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल शामिल हैं जो करोड़ों की राशि के हैं। शिक्षक बड़ी मुश्किल में हैं क्योंकि सरकार उनके वास्तविक मुद्दों की लगातार अनदेखी कर रही है। धन की कमी ने जामिया को विशेष विषयों के लिए रिक्त पदों / पदों को भरने से रोक दिया है।  वित्तीय संकट के कारण विश्वविद्यालय वर्तमान सत्र में लगभग 200 शिक्षकों, अतिथि / संविदात्मक संकायों की भर्ती नहीं कर सका। जामिया प्रशासन को अनुसंधान विद्वानों को शिक्षण भार सौंपने के लिए मजबूर किया गया है। आप इस बात को मानेंगे कि ऐसा ज़्यादा समय तक नहीं चल पाएगा क्योंकि यह विश्वविद्यालय में अध्येताओं के शिक्षण और शोध की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। Covid-19 के बीच यह पीएचडी के छात्रों पर एक अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक बोझ डालेगा। छात्र: शिक्षक अनुपात और आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की रैंक पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

    इसलिए, मैं आपसे जामिया मिलिया इस्लामिया को देय धनराशि जारी करने के लिए एमएचआरडी को निर्देशित करने का अनुरोध करता हूं।

    जामिया का महात्मा गांधी के साथ एक लंबा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। जनवरी 1925 में, जब जामिया को धन की कमी के कारण बंद होने का खतरा था, तो गांधीजी ने हकीम अजमल खान से कहा, “आप को रूपये की दिक़्क़त है तो मैं भीख माँग लूँगा लेकिन जामिया बंद नहीं होनी चाहिये।” हमारे राष्ट्रपिता जामिया को चलाने के लिए भीख मांगने के लिए तैयार थे, लेकिन दुर्भाग्य से आज इस संस्था को आर्थिक रूप से घुटन देने का प्रयास किया जा रहा है।
    मैं यह सुनिश्चित करने के लिए आपके हस्तक्षेप की मांग करता हूं कि जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ भेदभाव नहीं किया जाए और उसे इसका हक दिया जाए क्योंकि एक राष्ट्र का भविष्य उसके युवा को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है जो हमारे द्वारा स्थापित और चलाए जा रहे संस्थानों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। एक शैक्षिक संस्थान में निवेश एक राष्ट्र के भविष्य में निवेश है।

    आशा है कि आप विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शोध केंद्रों को समयबद्ध तरीके से धनराशि जारी करने को सुनिश्चित करके एक शिक्षित समाज के निर्माण करने की अपनी प्रतिबधिता को प्रदर्शित करेंगे।

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित,

    सादर,

    (कुंवर दानिश अली)

  • तीन किसान बिलों का विरोध करेगा अकाली दल, सांसदों को विरोध में वोटिंग का व्हिप जारी किया, 10 बातें..

    किसानों से संबंधित तीन विधेयकों (farm sector bills)को लेकर पंजाब के किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. केंद्र की एनडीए सरकार के सहयोगी अकाली दल (Akali Dal)ने इस मामले में अपने सांसदों को व्हिप जारी किया और संसद के मॉनसून सत्र में आने वाले इन विधेयकों के खिलाफ वोट करने को कहा है.

    किसानों से संबंधित तीन विधेयकों (farm sector bills)को लेकर पंजाब के किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. केंद्र की एनडीए सरकार के सहयोगी अकाली दल (Akali Dal)ने इस मामले में अपने सांसदों को व्हिप जारी किया और संसद के मॉनसून सत्र में आने वाले इन विधेयकों के खिलाफ वोट करने को कहा है. इन विधेयकों को किसान विरोधी करार देते हुए राज्‍य के किसानों ने मांग की है कि इन्‍हें वापस लिया जाए. किसानों ने चेतावनीभरे लहजे में कहा है कि पंजाब का जो भी सांसद इन विधेयकों का पार्लियामेंट में समर्थन करेगा, उसे गांवों ने घुसने नहीं दिया जाएगा.

    1. पूरे पंजाब में किसान इन विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और इसके खिलाफ रास्‍ता जाम कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह ने इन बिलों को ‘कोरोना वायरस से भी बदतर’ बताया है. उन्‍होंने कहा कि यदि इन्‍हें लागू किया गया तो किसान, आढ़तिये और कृषि मजदूर बुरी तरह प्रभावित होंगे.
    2. किसानों ने चेतावनीभरे लहजे में कहा है कि पंजाब का जो भी सांसद इन विधेयकों का पार्लियामेंट में समर्थन करेगा, उसे गांवों ने घुसने नहीं दिया जाएगा.
    3. केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में किसानों से संबंधित कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक, 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 लेकर आई है। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक मंगलवार को लोकसभा से पारित हो गया।
    4. शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने इस पर चर्चा में कहा था कि इस कानून को लेकर पंजाब के किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के बीच बहुत शंकाएं हैं. सरकार को इस विधेयक और अध्यादेश को वापस लेना चाहिए.
    5. शिरोमणि अकाली दल (SAD)के नेताओं ने मंगलवार को बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा से मुलाकात कर आग्रह किया था कि केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित इन तीन विधेयकों पर किसानों की चिंताओं का निराकरण करना चाहिए. पार्टी ने इन विधेयकों को संसदीय समिति में भेजने की मांग की थी.
    6. शिरोमणि अकाली दल के विरोध के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में नड्डा ने कहा, ‘‘हम उनके साथ बातचीत कर रहे हैं. सारी चीजों के बारे में जानकारियां भी दे रहे हैं. बात भी हो रही है और चर्चा भी कर रहे हैं. अभी से नहीं, लगातार हो रही है. उनकी चिंताओं को ध्‍यान में रखा जाएगा. चर्चा के माध्यम से ही हम आगे बढ़ रहे हैं और आगे बढ़ेंगे.”
    7. बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने कहा कि किसानों से संबंधित जिन तीन विधेयकों को केंद्र सरकार संसद में लेकर आई है वे बहुत ही क्रांतिकारी हैं, जमीनी स्तर पर परिवर्तन लाने वाले हैं और किसानों की तस्वीर बदलने वाले हैं.
    8. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी कहा है कि संसद में पेश किए गए कृषि क्षेत्र से संबंधित विधेयकों से इस सीमावर्ती राज्य में ‘‘अशांति और असंतोष” फैल सकता है जो कि पहले ही पाकिस्तान द्वारा अशांति फैलाने की हरकतों से लगातार जूझ रहा है.
    9. सीएम अमरिंदर ने इस संबंध में राज्यपाल वी पी सिंह बदनौर को एक ज्ञापन सौंपने के लिए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की और केन्द्र संसद में इन विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाए, इस पर उनसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया.
    10.  इस मौके पर सीएम अमरिंदर के साथ पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील जाखड़ और अन्य लोग मौजूद थे. सीएम ने राज्यपाल से कहा कि राष्ट्रव्यापी संकट के बीच वर्तमान खरीद प्रणाली के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ से राज्य के किसानों के बीच ‘‘सामाजिक अशांति” पैदा हो सकती है.

  • उर्मिला मातोंडकर का कंगना रनौत पर निशाना, बोलीं-फिल्म इंडस्ट्री नशेड़ी है तो पीएम मोदी ने मिलने के लिए क्यों बुलाया

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयानों को अशोभनीय करार देते हुए उनपर निशाना साधा.

    नई दिल्ली: सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के निधन के बाद से ही समूचे बॉलीवुड गलियारे पर निशाना साधा जा रहा है. एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयान लगातार मीडिया की सुर्खियों में हैं. हाल ही में जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने बॉलीवुड को निशाना बनाए जाने पर संसद में बयान दिया. उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन के इस बयान पर कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने ट्वीट कर कहा कि कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? ये मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं. अब इस पूरे मामले पर बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने एनडीटीवी से खास बातचीत की है और अपने विचार रखे हैं.

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कहा: “अगर हमारी इंडस्ट्री नशेड़ियों का अड्डा है तो इतने सालों तक कैसे देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्री रह पाई. इस इंडस्ट्री में बड़े-बड़े लोग आए और फिल्मों के जरिए देश को नई दिशा दी. राज कपूर और दिलीप कुमार जैसे कई बड़े कलाकारों ने देश के लिए शानदार फिल्में बनाईं. बॉलीवुड पूरे विश्व में सबसे बड़ी इंडस्ट्री है. तनी बड़ी नशेड़ी इंडस्ट्री इस मुकाम पर पहुंची है तो जरूर कोई बात होगी. पीएम मोदी (PM Modi) ने इसी नसेड़ी इंडस्ट्री को मिलने के लिए बुलाया था. उन्होंने कलाकारों से महात्मा गांधी के विचारों को आदगे बढ़ाने के लिए कहा था. अगर इंडस्ट्री में सब नशेड़ी हैं तो पीएम मोदी ने उनका साथ क्यों मांगा था.”

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयानों को अशोभनीय करार देते हुए उनपर निशाना साधा. उन्होंने  कहा: “मुझे लगता है कि उन्होंने कई बार गलत टिप्पणी की हैं, जो अशोभनीय है. उन्होंने मुंबई को पीओके कहा और साथ ही मुंबई पुलिस पर भी सवाल उठाया. जया बच्चन ने उनके जन्म से पहले काम किया है. उन्होंने हमेशा समाज के लिए आवाज उठाई है और सही बात की है. अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए. लोग समझेंगे और सच्चाई जानेंगे.”

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने आगे कहा कि फिल्म इंडस्ट्री पर सवाल उठा है तो मैं सामने आई हूं. जिनके करोड़ों रुपये लगे होते हैं वो डर से पीछे हटे हैं इसलिए वो बात नहीं कर रहे हैं. कुछ लोगों से निजी दुश्मनी की वजह से पूरी इंडस्ट्री को बदनाम करना गलत बात है. उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि अगर कंगना के पास कोई ड्रग मामले में सबूत है तो नारकोटिक्स डिपार्मेंट को सौंपना चाहिए.