Category: क्षेत्रीय ख़बरें

  • कन्हैया बेगूसराय से ही चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं?

    Anamika Singh

    जबकि वो अबतक वामपंथी चेहरे के रूप पूरे देश में प्रसिद्ध हो चुके हैं.दिल्ली, गुजरात से लेकर वे केरल तक भाषण देने पहुँच गए. तो ये पूरे देश मे कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं.

    आइये थोड़ा सा मामला समझते.

    कहा जाता है बेगूसराय वामपन्थियों का अड्डा है, लेकिन वामदल वहाँ मात्र एक बार चुनाव जीती है.
    जबकि नवादा, नालन्दा जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में दो या दो अधिक बार वामदल चुनाव जीतकर आयी है.

    2014 में राजद(लालू यादव) से मुसलमान नेता लड़े थे लेकिन हार गए.उससे पहले में जदयू(नीतीश कुमार) से मुसलमान नेता लड़े और जीत गए.
    इस बार महागठबंधन से मुसलमान उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी है. तो मुसलमानो का सीट खाने पर क्यों तुले है कन्हैया.

    बिहार में कन्हैया की सच्चाई सभी भूमिहारो को पता है, वहां के सवर्ण लंठ नहीं है बाकी राज्यों के सवर्णो की तरह जो कन्हैया को देशद्रोही कह दे.
    बिहार के सवर्ण चाहते हैं कि मोदी जीते पर कन्हैया भी बेगूसराय से चुनाव लड़े और जीते.
    ये बात आपको खुलेआम बिहार के सवर्ण कहते हुए मिल जाएंगे.
    दरअसल ये लोग सदा सदा के लिए मुसलमानो की राजनीति बेगूसराय से खत्म कर देना चाहते हैं.
    बेगूसराय 20% मुसलमानो की आबादी से भरी है.

    यहां पर वामदल मात्र एक बार लोकसभा चुनाव 1967 में जीतती है,जबकि 1980,1984, 1989,1991,1996 और 2004 में तो वामपंथी दलों ने अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा.

    हालांकि इसबार भी बेगूसराय में वामदल अकेले चुनाव जीत ले तो बिल्कुल सम्भव नहीं.इसलिए मीडिया जबरदस्ती बेगूसराय को वामपंथ का अड्डा और लेनिनग्राद कह कर प्रचारित किया जा रहा है.और बार बार वामदल तथा राजद से गठबंधन की फ़र्ज़ी खबरे चलाई जाती हैं.

    अगर कन्हैया को वाकई वामपंथी विचारधारा पर चुनाव लड़ना है तो नवादा चुनाव क्षेत्र से लड़े जोकि भूमिहारो और यादव दबंगो का गढ़ रहा है.(यहां का यादवो में लालू यादव का कोई क्रेज नहीं है)
    जय भीम और लाल सलाम का नारा भी बुलन्द होगा.
    यहाँ 30% जनसंख्या दलितो की है. उन्हें कुछ बेहतर लाभ हो कन्हैया के वामपंथी विचारधारा से.

    जाति की बात आते ही कन्हैया छटपटाने लगते हैं.
    बीबीसी द्वारा ‘बोले बिहार’ में दिए गए उनके इंटरव्यू में तो यही दर्शाता है.
    इस प्रोग्राम को मोडरेट कर रही है रूपा झा जब उनसे जाति को लेकर सवाल करती हैं तो वे लेनिन की कथा सुनाने लगते हैं.
    वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर भी जब उनसे जाति से मिलने वाली प्रिविलेज की बात करते हैं तो कन्हैया की छटपटाहट साफ नजर आती है.

    सवर्ण आरक्षण पर भी बिना कोई टिप्पणी नहीं है.
    13 पॉइंट रोस्टर पर चुप्पी.

    “रवीश कुमार ने एक बात कही थी. जो जाति के मसले पर बात नहीं करना चाहता है वो सबसे बड़ा जतिवादी है”

    पता नही इनका जय भीम और लाल सलाम कैसा है।

    सम्वेदनाओं को हथियार बनाकर इन्होंने चुनाव लड़ने की सोची है तो जनता के लिए ये भी मोदी साबित होंगे.
    रोहित वेमुला या नजीब की माँ इनके लिए वाकई बड़ा मुद्दा हैं तो इन्हें बेगूसराय से कम से कम चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.

  • उत्तरप्रदेश, मायावती और महिला: महिला सशक्तिकरण में फिसड्डी

    Anamika Singh

    उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी से लेकर मायावती जैसी सशक्त महिला मुख्यमंत्री दिए यूपी की जनता ने.

    लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव यूपी से मात्र 14 महिला सांसद चुनी गई हैं.
    फिलहाल यूपी में 80 लोकसभा सीट है,

    मायावती को तरह तरह के उपाधियों से नवाजा गया.
    फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया की 59 वीं सबसे शक्तिशाली महिला लीडर बताया.
    न्यूज़वीक ने उन्हें दुनिया की 15 शक्तिशाली महिला लीडर में से एक तथा ‘बराक ओबामा ऑफ इंडिया’ भी कहा.
    हालांकि अपने शासनकाल में महिला सुरक्षा देने में भी मायावती सफल हुई.
    पर महिला सशक्तिकरण में फिसड्डी साबित हुई हैं.

    आंकड़ो पर आते हैं.?

    2007 में मायावती(बसपा) आखिरी बार मुख्यमंत्री बनती हैं और इसबार मात्र 3 महिला विधायक चुनी जाती हैं.

    2012 में अखिलेश(सपा) की सरकार बनती है मात्र 35 महिला विधायक चुनी जाती हैं
    सपा 34 महिला प्रतिनिधि खड़ा करती है जिसमें 22 जीतकर विधायक बनती हैं
    बसपा 33 कंडीडेट खड़ा करती है.

    2017 में सपा+कांग्रेस 33 महिला उम्मीदवार उतारते हैं
    वही बसपा मात्र 20 महिला उम्मीदवारो को टिकट प्रदान करती है.
    जबकि भाजपा 43 महिला को उम्मीदवारी देती है और 32 जीतकर आते हैं.

    भाजपा की तरफ से आनेवाली महिला उम्मीदवार किसी काम की नहीं हैं वो बस महिला के नाम पर मुखौटा है.

    अब आते हैं बसपा यानी मायावती जिसकी लीडर हैं फ़िलहाल.
    बसपा को कांशीराम ने बनाया. उन्होंने मायावती को कमान दी.
    मायावती 4 बार यूपी की मुख्यमंत्री चुनी जाती हैं.
    बसपा अम्बेडक्राइट पार्टी है अर्थात डॉ आंबेडकर के विचारों पर चलती है.
    अम्बेडकर का मानना था अगर समाज में महिलाओं का प्रतिनिधित्व दृढ़ हो तो समाज सभ्य हो जाएगा.

    लेकिन उन्हीं के विचारों को मानने वाली पार्टी ने सबसे कम महिला उम्मीदवार खड़े किए हैं.
    उत्तरप्रदेश में फिलहाल 403 विधानसभा की सीटे हैं.
    और महिला वोटर यहां 45% के आस पास है.

    अगर मायावती ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट प्रदान करती तो आज बसपा यूपी की ही नहीं बल्कि भारत की सबसे बड़ी पार्टी होती.
    तथा समाज काफी हद तक बदल गया होता.
    मायावती के पास मौका था 403 विधानसभा उम्मीदवारों में 300 उम्मीदवार महिला उतार सकती थी.
    80 लोकसभा उम्मीदवार में से 50 लोकसभा उम्मीदवार महिलाओं के खेमे में डाल देती.

    300 में से 50 उम्मीदवार सवर्ण पृष्ठभूमि से आनेवाली महिला.
    50 मुस्लिम समाज से तथा 100 पिछड़ा और 100 दलित समाज से.

    कुछ इसी तरह से लोकसभा उम्मीदवारी में महिलाओं की भागीदारी तय कर देतीं.

    2014 के लोकसभा चुनाव में महिला भागीदारी यूपी की देखते हैं?
    बसपा- 7(जीत-0)
    कांग्रेस-12(जीत-1)
    सपा-11(जीत-1)
    भाजपा-11(जीत-10)
    अपना दल की अनुप्रिया पटेल भाजपा गठन्धन की तरफ से कैबिनेट मंत्री थीं.

    अगर ऐसा करती तो टकले सन्तरे के लंठो की फौज एंटी रोमियो स्क्वाड बनके प्रेमी जोड़ों को न पीटते.
    पुलिस आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ पर लाठियां न बरसाती.
    शिक्षामित्रों पर लाठियां न बरसती.
    और भी न जाने कितने इंसिडेंट हुए महिला उत्पीड़न को लेकर.

    इसबार तो मायावती ने हद कर दी है, कोई उम्मीद नहीं बची है इनसे जैसा इनका बिहेवियर रहा है.हो सकता मायावती और अखिलेश को इसके बाद अपने अम्बेडक्राइट और समाजवादी होने का अक्ल आये.

    यह पोस्ट अनामिका सिंह के फेसबुक वॉल से ली गई है

  • “कन्हैया कुमार खायें-पीयेँ-अघायेँ हुए सवर्णों के नेता है”

    पटना का मौर्यालोक मार्केट राजनीतिक प्राणियों का चारागाह है। प्रति दिन शाम में लेखक, पत्रकार, छात्रनेता, राजनेता, शिक्षक, समाजसेवी, डॉक्टर, व्यापारी, बयूरोक्रेट इत्यादि का लगने वाला जमावड़ा बिहार की राजनीति को समझने के लिए पर्याप्त है। उस जमावड़े में शामिल कुछ लोग केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनाने की बात करते हैं साथ में कन्हैया कुमार की जीत की भी कामना करते हैं। आप जब उनलोगों की जाति जानने का प्रयास करेंगे तब आप बखूबी समझ जायेंगे की वह किस जाति समूह के लोग हैं।
    एक दिन पटना के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑफिस में बेगूसराय मंडल भाजपा के महामंत्री से भेंट हुई। वह भी जाति से भूमिहार थे। बातचीत में ऐसा लगा कि उनकी भी इच्छा थी कि कन्हैया बेगूसराय से चुनाव लड़े। आप निजि जीवन में भाजपा से सहानुभूति रखने वाले कुछ भूमिहार जाति के लोगों से बात करें। बात करने के दौरान एक बात सभी मे कॉमन होगा वह यह कि सबकुछ के बावजूद कन्हैया भाषण अच्छा करता है।

    मैंने यह उदाहरण इसलिए दिया है ताकि यह समझा जा सके कि कन्हैया कुमार के भूमिहार जाति से होने और बेगूसराय से चुनाव लड़ने के बीच का सम्बन्ध समझ सके। वह भले ही आवेदन देकर भूमिहार जाति में जन्म नहीं लिए हो मग़र बेगूसराय में उनकी जाति उनकी पहचान बनती जा रही है।
    बीबीसी के एक कार्यक्रम में कन्हैया जाति के प्रश्न पर जवाब देते हुए कहते है कि क्या वह अपने माता-पिता बदल ले। मेरा मानना यह है कि जातीय श्रेष्ठता के प्रश्न पर इतना घुमाकर जवाब देने की ज़रूरत ही नहीं है। बल्कि यह स्थापित सत्य है कि सवर्ण जाति में जन्म लेने पर लॉबी, नेटवर्किंग, मनोवैज्ञानिक श्रेष्ठता इत्यादि स्वयं से विकसित होता जाता है।
    इसी 15 मार्च को बिहार की राजधानी पटना में बीबीसी हिंदी के द्वारा “बोले बिहार” नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम के एक हिस्सा में कन्हैया कुमार को बतौर वक्ता बुलाया गया। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार रूपा झा मॉडरेट कर रही थी। इस पूरे कार्यक्रम में कन्हैया कुमार ने जिस तरह से जाति के प्रश्न का उत्तर दिया वह बिल्कुल ठहलाने जैसा था।

    वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर ने जब जातीय पहचान के संदर्भ में प्रश्न किया तब कन्हैया कुमार रूस के लेनिन का उदाहरण देकर और रूस के विघटन की बात करके प्रश्न को टाल गये। जब्कि सच्चाई यही है कि रूस के भौगोलिक एवं सामाजिक संरचना में जमीन-आसमान का फ़र्क़ है। भूगोल एवं समाज का राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप होता है।
    रूस के विघटन में रूस की भौगोलिक संरचना सबसे बड़ी वजह थी। भारत के संदर्भ में उसी रूस की थ्योरी को फिट करके नहीं देखा जा सकता है। बल्कि रूस की सामाजिक संरचना में जाति जैसा कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं था मग़र वहाँ की जो सामाजिक संरचना थी उसको कम्युनिस्ट सही से एड्रेस नहीं कर सकी जिसका परिणाम हुआ कि रूस से कम्युनिस्ट की सरकार चली गयी। इसलिए भारत के राजनीतिक बदलाव को रूस के सन्दर्भों में जस्टिफाई करना एक प्रबुद्ध स्कॉलर का काम नहीं है।

    वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार हमेशा कहते है कि जो जाति के मुद्दें पर बहस नहीं करना चाहता है वही असल जातिवादी है। इस पूरे एपिसोड में कन्हैया कुमार ने जाति वाले सवाल को टाल दिया। रूपा झा के सवाल को भी कन्हैया ने टालने का प्रयास किया। वह मानने को तैयार ही नहीं थे कि एक विशेष जाति वर्ग के होने के कारण बेगूसराय में उनको लाभ मिल रहा है। बल्कि जाति के सवाल को रात में सड़कों पर निकलने वाली महिलाओं की छेड़खानी से तुलना करके जवाब दिया।

    महिला तो स्वयं में एक शोषित वर्ग है और उसी वर्ग को उदाहरण मान लेना तर्कपूर्ण नहीं है। देश भर के दर्जनों प्रतिष्ठित संस्थानों में सैकड़ों रिसर्च से साबित हो चुका है कि महिला स्वयं में शोषित वर्ग है और यदि महिला दलित समुदाय से है तब दोहरा शोषण झेलती है। फिर कन्हैया जैसे प्रबुद्ध व्यक्ति जाति जैसे संवेदनशील मुद्दें को इतने हल्के में लेकर कैसे चल सकते है? ग़ज़ब तो तब लगा जब हॉल में बैठें लोग कन्हैया के जवाब के बाद ताली पीट रहे थे।
    जहाँ तक सवाल भारत मे कम्युनिस्ट पार्टी के कमज़ोर होने का है तब कन्हैया ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकारा की कम्युनिस्ट पार्टी समाज के बदलते स्वरूप को समझकर आंदोलन का रूप नहीं बदल सकी है। मैं कन्हैया की इस बात से भी सहमत नहीं हूँ। भारत कल भी जातिवादी समाज था और आज भी जातिवादी समाज है। भारत की राजनीतिक सच्चाई को तबतक नहीं समझा जा सकता है जबतक जातियों की आंतरिक राजनीति को नहीं समझ लिया जाये।
    भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने हमेशा वर्ग (Class) विभेद को मुद्दा बनाकर राजनीति किया है। जबकि होना यह चाहिए था कि कार्ल मार्क्स की उस थ्योरी को भारत में जाति में फिट करके देखना चाहिये था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाबा साहब अम्बेडकर मार्क्स और हेगेल की थ्योरी को जाति की संरचना पर फिट करके देखना चाहते थे। क्योंकि उच्च जाति में जन्म लेना एक एडवांटेज रहा है।

    कम्युनिस्ट आंदोलन में सबसे अधिक सहभागिता दलित एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की रही है। लेकिन प्रतिनिधित्व हमेशा सवर्ण एवं ब्राह्मणों के हाथ में रहा। उदाहरण के रूप में बेगूसराय, चम्पारण, जहानाबाद, गया, आरा इत्यादि जिलों में भूमिहार जाति का दबदबा रहा है। बिहार में भूमिहार ही सबसे अधिक जमीन के मालिक है। दलितों का सबसे अधिक शोषण यही जाति वर्ग के लोग भी किये है। लेकिन सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यही है कि कम्युनिस्ट आंदोलनों के अग्रणी नेता भी शोषक समुदाय के लोग है।
    समाजवादी आंदोलन के बाद लालू, मुलायम, नीतीश, पासवान जैसे नेताओं का जब उभार हुआ तब दलितों, पिछड़ों एवं मुसलमानों में प्रतिनिधित्व को लेकर एक चेतना का विकास हुआ। यही से दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कम्युनिस्ट आंदोलन से निकलकर समाजवादी राजनीति की तरफ़ शिफ़्ट हुए और नेतृत्व परिवर्तन का यही दौर था जिसे कम्युनिस्ट लोग जंगलराज से पुकारते है।
    कम्युनिस्ट पार्टी में प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर कन्हैया ने रामावतार शास्त्री को बड़ी चालाकी से एक यादव नेता के प्रतीक के रूप में पेश कर दिया। आज भी दूरस्थ भारत की एक बड़ी आबादी कन्हैया कुमार और रवीश कुमार को दलित समझती है। भला उस आबादी को 1967 में चुने गये सांसद राम अवतार शास्त्री की जाति कैसे मालूम होगी? हाँ, मगर 1967 के समय के लोगों को मालूम था कि राम अवतार शास्त्री यादव समुदाय से आते थे।

    इनसब मुद्दों पर बहस करने से पूर्व कन्हैया कुमार को थोड़ा राजनीतिक प्रतिनिधित्व (Political Representation) और राजनीतिक सहभागिता (Political Participation) के बीच के अंतर को समझना चाहिये। यह तो स्थापित सत्य है कि कम्युनिस्ट आंदोलन में शोषितों के नाम पर सबसे अधिक सहभागिता (Participation) पिछड़ी जाति, दलित, अल्पसंख्यकों की रही है।

    मगर क्या सहभागिता (Participation) के अनुपात में दलित, पिछड़े एवं अल्पसंखयकों को प्रतिनिधित्व (Representation) मिला? कन्हैया ने दबे लफ़्ज़ों में यह मैसेज देने का प्रयास किया कि कम्युनिस्ट पार्टी यादव जाति के लोगों को सांसद बनाती रही है। इसलिए महागठबंधन के अगुआ तेजस्वी यादव को चाहिये कि बेगूसराय से भूमिहार कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाने के बारे में विचार करें।
    एक युवा ने कन्हैया कुमार से पूर्व छात्रनेता चंद्रशेखर उर्फ चंदू और बाबहुली नेता शहाबुद्दीन साहब के संदर्भ में प्रश्न किया। कन्हैया ने एक अप्रत्याशित उत्तर दिया जिसकी उम्मीद कोई नहीं कर सकता था। कन्हैया बार-बार यह बताने का प्रयास करते रहे कि चन्द्रशेखर सीपीआई के नहीं थे बल्कि सीपीआई (एमएल) के नेता थे। अब जब चारों तरफ से वाम एकता की बात हो रही है उस समय चंदू के प्रश्न पर चंदू को सीपीआई (एमएल) से जोड़कर स्वयं को चंदू से अलग कर लेना कितना न्यायसंगत है? जब सीपीआई और सीपीआई (एमएल) आपस में मिलने को तैयार नहीं है फिर कन्हैया किस तरह के महागठबंधन में शामिल होने की कल्पना कर रहे है?

    क्या वह सिर्फ़ इसलिए चंदू के सवाल को टाल गये की महागठबंधन के प्रत्याशी बनने के रूप में उन्हें शहाबुद्दीन साहब के परिवार का अनैतिक समर्थन करना पड़ेगा? चन्द्रशेखर उर्फ चंदू 1990 में एमफिल के लिए जेएनयू गये। वह जेएनयू जाने से पूर्व पटना यूनिवर्सिटी के छात्र थे। वह पटना यूनिवर्सिटी में सीपीआई की छात्र विंग AISF के सक्रिय सदस्य थे। वह जब जेएनयू गये तब सीपीआई(एमएल) की छात्र विंग आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के ढाँचा को अपनी परिश्रम से खड़ा किये थे। कन्हैया कुमार भी सीपीआई की विंग AISF के नेता है। इसलिए कन्हैया द्वारा चंदू को सीपीआई से सिरे से खारिज़ कर देना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।
    भक्त का विरोध करते-करते लोग कब अंधसमर्थक की फ़ौज खड़ी कर लेते है पता भी नहीं चलता है। जब जेएनयू घटना के बाद कन्हैया कुमार जेल से छूटकर कैंपस पहुँचे तब एक जोरदार भाषण दिया। कन्हैया का कहना था कि संयोग से जेल में उनको खाना लाल और नीलें रँग के कटोरे में परोसा गया। मालूम नहीं उनकी यह बात कितनी सत्य पर आधारित है, वही जाने।

    दरअसल, वह यह बताना चाहते थे कि भगत सिंह और बाबा साहब अम्बेडकर के विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ा जायेगा। मग़र भगतसिंह और अम्बेडकर के विचारों को एकसाथ लेकर कैसे चला जा सकता है? जब्कि भगतसिंह और अम्बेडकर के विचारों में नार्थ पोल और साउथ पोल का फ़र्क़ है। उदाहरण के रूप में (1) भगतसिंह साइमन कमीशन का विरोध कर रहे थे। जब्कि अम्बेडकर पूरा एक ड्राफ़्ट लेकर साइमन कमीशन से दलितों की हिस्सेदारी माँगने चले गये।
    (2) अम्बेडकर हमेशा डेमोक्रेटिक तऱीके से क़लम को हथियार बनाकर लड़ाई लड़ने की बात करते थे। जब्कि भगतसिंह सेंट्रल हॉल पर बम फेंक रहे थे। (3) शूद्रों पर हो रहे अत्याचार के लिए अम्बेडकर ने सवर्णों एवं ब्राह्मणों को दोषी ठहराते थे इसलिए उनका मत था कि ब्रिटिश भारत में सामाजिक न्याय ब्राह्मण भारत से अधिक मिलने की संभावना है। लेकिन भगतसिंह इसबात को नकारते थे।

    ऐसे अनेकों वैचारिक विरोधभास है जिससे साबित होता है कि कन्हैया कुमार के सामाजिक रूप से विशेष सुविधा प्राप्त सवर्णों के नेता है। यदि ऐसा नहीं होता तब वह सामाजिक न्याय को मज़बूती प्रदान करने के लिए बेगूसराय से मुहिम छेड़ते और कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर ही किसी दलित या पिछड़े या अल्पसंख्यक समाज के किसी नेता को मज़बूती से समर्थन देकर चुनाव लड़ाते। इससे सहभागिता के अनुपात में प्रतिनिधित्व भी बढ़ता और सामाजिक न्याय की विचारधारा भी मज़बूत होती। साथ में कम्युनिस्ट पार्टी की विश्वसनीयता भी वापस लौटती।

    तारिक़ अनवर चम्पारणी
    (लेखक, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुम्बई से दलित एंड ट्राइबल स्टडीज में मास्टर इन सोशल वर्क, MSW, हैं और वर्तमान में बिहार में किसानों के साथ काम कर रहे हैं)

  • ढाका: सरेह से मिला शव,गोली मारकर फेंका गया था शव

    फजलुल मोबीन,ढाका: ढाका प्रखंड के हनुमान नगर गाँव के पुर्वी सरेह से एक 45 वर्षीय आदमी का शव पूलिस ने बरामद किया है। शव की पहचान सरुपा गाँव निवासी अभय कान्त सिंह उर्फ मीनटु पिता राजमंगल सिंह के रुप मे हुई है। शव के शरीर मे दो गोली लगी है एक गोली कान के बगल मे दूसरी गोली पोर मे है। मृतक अभय कान्त सिंह ढाका ब्रह्मस्थान स्तिथ छोटे लाल झा की बालु गिट्टी दूकान पर मजदूरी करता था। अभय कान्त सिंह उर्फ मिनटु सिंह कल दो पहर मे अपने घर से निकला था घर के लोग यह समझ रहे थे कि ढाका मे होगा। इस बीच शनिवार की दो पहर को पूलिस को सूचना मिली कि हनुमान नगर के सरेह मे एक शव है पूलिस पहुंची शव को थाने लाई इस बीच परीजन थाना फर पहुंचे। पूलिस परिजनो से पुछताछ कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शव के परिजन भी अब तक अभय कान्त सिंह की मृत्यु और गोली मारने वाले या फिर मृत्यु के कारण से अनभिज्ञ है। पुलिस परिजनो से पुछताछ कर कातिल तक पहुँचने की कार्रवाई मे जुटी है।

  • सीतामढ़ी:गुफरान और तस्लीम को पुलिस ने थाना मे पिट-पिट कर ली जान,एसपी ने थानाध्यक्ष समेत 8 को किया निलंबित

    (फोटो मिल्लत टाइम्स)

    एसपी ने डुमरा थाना अध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

    बेहोशी की हालत में करवाया गया सदर अस्पताल में भर्ती चिकित्सकों ने घोषित किया मृत

    एसडीपीओ सदर ने पुलिस की पिटाई से किया इंकार दंडाधिकारी की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम

    शाकिब रजा/मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी: पुलिस की पिटाई से दो लड़कों पर लूट हत्या कांड का आरोप लगने के बाद बुधवार की शाम को डुमरा थाना पुलिस ने पीट-पीटकर मार दिया गया इनकी पहचान पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाने के राम विहार निवासी मनाउल के पुत्र गुफरान (28) और मुलाजिम के पुत्र तस्लीम आलम (30) के रूप में की गई है मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमर केस जीने डुमरा थाना अध्यक्ष चंद्र भूषण कुमार सिंह समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है एसडीपीओ सदर वीर धीरेंद्र से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है दूसरी ओर जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने तिरहुत के डीआईजी रविंद्र कुमार को सीतामढ़ी पहुंचकर कैंप करने का निर्देश दिया है इस बीच सदर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया है उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम से पहले पुलिस ने शव देखने नहीं दिया डीएम रंजीत कुमार ने मामले की जांच के लिए एसडीओ सदर के नेतृत्व में एक टीम गठित की है

    मुजफ्फरपुर के युवक की हत्या तथा बाईक की लूट के आरोप के शक में किया गया था गिरफ्तार 20 फरवरी को सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर हाईवे पर उक्त लुटेरों ने लूट के दौरान मुजफ्फरपुर के औराई थाना क्षेत्र के जीवाजोर गांव निवासी सत्यनारायण साह के पुत्र राकेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर बाइक लूट ली थी मामले में मंगलवार को क्योंरिटी ने चकिया पुलिस के सहयोग से गुफरान और तस्लीम को गिरफ्तार किया था तस्लीम के पास पूछताछ के लिए डुमरा थाना में रखा गया था थाने में पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेरहमी से पिटाई कर अधमरा कर दिया गया स्थिति बिगड़ने पर बुधवार की शाम 4:25 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया वहां चिकित्सकों ने 5:05 गुफरान और 5:20 तस्लीम को मृत घोषित कर दिया इसकी सूचना पर एसडीपीओ सदर डॉ कुमार वीर धीरेंद्र समेत कई अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे दंडाधिकारी की मौजूदगी में शवों का पोस्टमार्टम कराया गया शवों पर करंट लगने जैसे निशान पाए गए हैं इधर एसडीपीओ सदर ने पुलिस की पिटाई से मौत की बात को खारिज कर दिया है कहा है कि दोनों से हाजत में मिलने कई लोग आए थे किसी मुलाकाती द्वारा कुछ खिला दिया गया होगा बताया कि मामला संदेह स्पसद हैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी

    आईजी ने मांगी रिपोर्ट सीतामढ़ी में डीआईजी कर रहे हैं कैंप:
    पुलिस की गिरफ्त में दो लड़कों की मौत के मामले पर जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने गंभीरता से संज्ञान लिया है फिलहाल थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है साथ ही तिरहुत रेंज के डीआईजी रविंद्र कुमार को सीतामढ़ी पहुंचकर कैंप करने का निर्देश दिया है आईजी ने बताया कि पूरे घटनाक्रम पर डीआईजी से रिपोर्ट मांगी गई है फाइनल रिपोर्ट के आधार पर घटना में शामिल अन्य सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी पूरे मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के मापदंड के तहत ही सारी कार्यवाही होगी

  • सीतामढ़ी में इमारत ए शरिया की ओर से विशेष तरबियाती इजलास जारी

    अमीरे शरीअत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब ने सुनी लोगों की समस्या एँ
    मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी:सीतामढ़ी में इमारत शरिया की निगरानी में दो दिवसीय विशेष सत्र चल रहा है, अमीर शरीयत , हज़रत मौलाना सैयद मुहम्मद वली रहमानी की अध्यक्षता में इजलास का पहला सत्र 6 मार्च बुधवार को सुबह 10:30 बजे मदरसा रहमानीया मेहसौल के समीप मैदान मे शुरू हुआ। इस इजलास में अपने विचार रखते हुए अमीरे शरीयत ने शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा की माँ बाप की ज़िम्मेदारी है की अपने बच्चों के शिक्षा का प्रबन्ध करें एवं उन्हें नैतिक शिक्षा भी दिलाएँ । उन्होंने आपस के झगड़ों को समाप्त करने एवं मिल जुल कर आपसी प्रेम , भाई चारा एवं अमन चैन से रहने की अपील की ।

    उन्होंने कहा की इमारत शरीया के इस इजलास का मकसद यह है कि गाँव गाँव से इमारत शरिया के संमबंध को मजबूत किया जाए एवं आप से आप की समस्याएँ सुनी जाएँ एवं उन के समाधान कि कोशिश की जाए ।
    इमारत शरीया के सचिव मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम की बुनियादी शिक्षाएँ सभी के लिए समान हैं जिस तरह एक मुसलमान की जान व माल इज्ज़त व आबरू कि हिफाज़त करना हमारे लिए ज़रूरी है उसी प्रकार एक गैर मुस्लिम की जान माल इज्ज़त व आबरू की रक्षा करना हमारा धर्म है । उन्होंने समाजिक बुराइयों , दहेज, तिलक कि रस्म, शराब एवं सूद की बुराई बयान करते हुए समाज को इन बुराइयों से पाक करने का आह्वान किया । इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना स्नाउल होदा कासमी ने अपने वक्तव्य में इमारत शरिया के विभिन्न कामों पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि इमारत शरिया एकता , अमन एवं भाई चारे की तालीम देता है और मिल जुल कर रहने एवं सामाजिक विकास के लिए काम करने पर ज़ोर देता है। इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना शिबली अल कासमी ने इमारत शरिया के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को बयान किया और कहा कि इमारत शरीया के प्रतिनिधि कि ज़िम्मेदारी है कि वह अपने गाँव एवं सामज की चहुमुखी विकास एवं उनके नैतिक , शैक्षिक एवं आर्थिक बेहतरी के लिए कोशिश करे । इस पहले सत्र का संचालन इमारत शरीया के उप सचिव मौलाना मुफ़्ती सोहराब नदवी ने किया। इस इजलास मे मौलाना मुफती नजर तौहीद मुजाहिरी काजी ए शरीयत चतरा झारखंड एंव काजी इमरान साहब बालासाथ, मौलाना कमर अनीस कासमी भी उपस्थित थे। वहीं इजलास मे शहर के गणमान्य मदरसा रहमानिया मेहसौल के अध्यक्ष मो अरमान अली,सचिव जफर कमाल अलवी, मौलाना इजहार,मो कमर अखतर, शफीक खान,मो मुर्तुजा,अनवारुल्लाह फलक सबीह अहमद,मो आरिफ हुसैन, मो असद, डॉ साजिद अली खान ,शमस शाहनवाज ,हाजी मो हसमत हुसैन, हाजी मोख्तार आलम, हाजी अब्दुल्लाह रहमानी, बसारत करीम गुलाब, पत्रकार मो सदरे आलम नोमानी, मुन्ना तसलीम ,फैयाज आलम बबलू, सिफ्फत हबीबी, मो मुराद, सिकन्दर हयात,मो मजहर अली राजा समेत हजारो लोग शामिल थे।

  • सीतामढ़ी में दो दिवसीय खुसूसी इजलास की तैयारियां मुकम्मल आज रात पहुंचेंगे अकाबिर इमारत शरिया

    शाकिब रजा/मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिला में दो दिवसीय खुशुसी तरबीती इजलास की तैयारियां मुकम्मल हो गई है सीतामढ़ी जिला में इमारत शरिया फुलवारी शरीफ पटना के द्वारा किया जा रहा है यह प्रोग्राम 6 तथा 7 मार्च को दो दिवसीय होगा आपको बता दें कि यह प्रोग्राम इमारत ए शरिया की तरफ से क्या जा रहा है

    बिहार के कई जिलों में किया गया है और कल यानी 6 तथा 7 मार्च को सीतामढ़ी जिला में भी किया जा रहा है बता दें कि इस प्रोग्राम की सदारत अकाबिर इमारत ए शरिया मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी साहब करेंगे औ‌र आज रात किसी भी समय उनका यहां आगमन हो सकता हैं

    इस प्रोग्राम में सीतामढ़ी जिला के तरफ से भी सभी लोगों ने भी खूब तावून किया है जिसमे इस्तकबालया कमेटी के सभी लोग इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं इस प्रोग्राम मे 25 से 30000 हजार लोगों के आने की संभावना है

  • जौनपुर:व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करना ही हमारी प्राथमिकता है:जावेद अज़ीम

    अजवद कासमी,जौनपुर: व्यापार मंडल कल्याण समिति की एक बैठक प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सद्दाम हुसैन के कैंप कार्यालय पर आहूत की गई जिसमें निम्न मुद्दों पर चर्चा की गई आगामी 26 जनवरी 2019 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर संगठन की तरफ से नगर के कोतवाली चौराहा पार्क में कार्यक्रम का आयोजन किया जाना सर्वसम्मति से तय किया गया।

    प्रदेश कार्यकारणी के प्रदेश अध्यक्ष श्री जावेद अज़ीम नें इस अवसर पर कहा कि व्यापारियों की आपस में एकता ही हम सबकी ताक़त है। हमारे संगठन का उद्देश्य व्यापारियों के समस्याओं को समाधान करना ही प्राथमिकता है। और जल्द ही व्यापारियों से जुड़ी हुई समस्याओं को लेकर संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल सिटी मजिस्ट्रेट से मिलेगा।

    सर्वसम्मति से प्रदेश कार्यकारिणी के उपमंत्री श्री अभय चौरसिया को प्रदेश कार्यकारिणी मंत्री पद की ज़िम्मेदारी दी गई है।

    इस अवसर पर संरक्षक साहब लाल साहू, मनोरंजन गुप्ता,प्रदेश उपाध्यक्ष सद्दाम हुसैन,कोषाध्यक्ष नूरुद्दीन शेख़,मंत्री फ़िरोज़ खान,रियाज़ अहमद,आशीष जायसवाल,मंत्री अभय चौरसिया,ज़िला प्रभारी युवा शाहनवाज़ खान,साबिर अज़ीम, प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक बैंकर आदि लोग उपस्थित रहे।

  • मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन ट्रजरार जनाब शाकिर हुसैन साहब से एक मुलाक़ात।

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली माइनॉरिटीज़ डेवलपमेन्ट फेडरेशन प्रसिडेंट सैय्यद शाहिद राहत और जनरल सेक्रेटरी ख़ालिद कुरैशी और मशहूर और अपने सोशल वर्क से पहचाने जाने वाली शमा ख़ान और मुम्ताज़ क़बीर ख़ान साहब के साथ मुलाक़ात हुई ! मुसलमानों को माइनॉरिटी मिनिस्ट्री से मिलने वाली स्कीम्स पर विस्तार से बात हुई!
    मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन माइनॉरिटी गवर्मेंट स्कूल्स को कंस्ट्रक्शन के लिए फण्ड जैसी स्किम और ग़रीब नवाज़ स्किल स्किम पर चर्चा हुई ।

    और ख़ास तौर से रजिस्टर्ड मदरसों के लिए स्किम है कि वह स्टूडेंट्स के लिए टॉयलेट बनाने के लिए मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन से फण्ड ले सकते है।
    शाकिर हुसैन साहब ने कहा यह सभी स्किम मुसलमानो के लिए है और जब भी आपको मेरी कोई ज़रूरत हो में आपके साथ हूँ आप लोगो तक यह स्कीम लेकर जाए
    हमारी कोशिश है कि हम गवरमेंट से मिलने वाली सभी स्कीमस पब्लिक तक ले कर जाएं ।

  • पुर्वी चम्पारण:जमीनी विवाद के मारपीट में महिला सहित एक दर्जन जख्मी

    फजलुल मोबीन,पुर्वी चम्पारण: कुंडवा चैनपुर थाना अंतर्गत हरदिया गांव में सोमवार को दो पक्षों के बीच जमीनी विवाद को लेकर जमकर मारपीट हुई जिसमें 15 लोग जख्मी हो गए । विवादित जमीन पर एक पक्ष जफरुल हक वहीं दूसरे पक्ष मोहम्मद सगीर अपना अपना दावा कर रहे थे । तभी उस पर बनी झोपड़ी के विवाद में दोनों पक्षों के दरमियान जमकर मारपीट हुई । घायलों में एक पक्ष के जफरूल हक , बुधन कमालुद्दीन दरक्षा बेगम रिजवाना खातून अफसाना खातून अख्तरी बेगम , रहमतुन नेशा , क्या मुद्दीन खुर्शीद आलम व दूसरे पक्ष के मोहम्मद सगीर कमरुद्दीन, मोतीउल्लह , इस्लाम जिब्राइल घायल है ।

    घायलों को गांव वालों की मदद से प्राथमिक उपचार के लिए ढाका रेफरल अस्पताल लाया गया वहीं जफरुल हक एवं रिजवाना खातून को बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी रेफर कर दिया गया । विवादास्पद भूमी पर जफरूल हक का दखल कब्जा था। वही जीबरील और मोतिउललाह इस भुमी पर दावा कर रहे थे, इसको लेकर जफरूल हक ने न्यायालय से गुहार लगाई। विवादास्पद भूमि को लेकर कांड संख्या 33/15 के अन्तर्गत न्यायालय मे मामला चल रहा था। इसी बीच जीबरील और मोतीउललाह और इस्राइल ने जफरुल के दखल कब्जे वाली भूमी पर बने झोपड़ी मे आग लगा दीया और जफरुल सहित दर्जनो लोगो को घायल कर दिया। जिसमें दोनों पक्ष जमीन को लेकर अपना कब्जा बताते हैं । दोनों पक्षों ने कुंडवा चैनपुर थाना में आवेदन दिया है थाना अध्यक्ष अभय कुमार ने बताया कि आवेदन अनुसार कार्रवाई की जाएगी ।