Category: मुस्लिम दुनिया

  • न्यूजीलैंड:दो मस्जिदों में आतंकी हमले में 49 की मौत,9 भारतीय लापता;हमलावर ने घटना फेसबुक पर किया लाइव

    वेलिंगटन:न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की अल-नूर औरलिनवुड मस्जिद में शुक्रवार को गोलीबारी हुई। हमला दोपहर की नमाज के बाद किया गया। इसमें 49लोग मारे गए और 50जख्मी हैं। पुलिस ने बताया कि 4 लोगों को हिरासत में लिया गया। लेकिन अभी हमलावर की तलाश जारी है। प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने इसे आतंकी हमला करार दिया है।एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मस्जिद के पास से एक कार से कई आईईडी को डिफ्यूज किया। उधर,ऑकलैंडस्थित ब्रिटोमार्ट स्टेशन पर भी एक बम डिफ्यूज किया गया।

    न्यूजीलैंड में भारतीय राजदूत ने ट्वीट किया, “स्त्रोतों से मिल रही जानकारी के मुताबिक हमले में 9 भारतीय/भारतीय मूल के लोगों के लापता होने की खबर है। आधिकारिक जानकारी आना बाकी है।”

    हमलावर ने फेसबुक पर लाइव किया कत्लेआम
    न्यूजीलैंड पुलिस के मुताबिक, हमलावर एक ऑस्ट्रेलियाई युवक ब्रेंटन टैरेंट (28) था। उसने मस्जिद में घुसने से पहले ही फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में हमलावर को मस्जिद के अंदर घुसकर लोगों पर गोलियां बरसाते देखागया। हालांकि, घटना के बाद फेसबुक और ट्विटर ने यह वीडियो ब्लॉक कर दिया।गोलीबारी के बाद हमलावर ने वापस अपनी कार में बैठकर बंदूक के अटकने और लोगों को आसानी से मारने के बारे में भी बात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंटन नेखतरनाक मंशा वाला37 पन्नों के एक मैनिफेस्टो भी लिखा था।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन के मुताबिक- ब्रेंटन ऑस्ट्रेलिया का नागरिक है और वह कट्टरपंथी राइट विंग से जुड़ा है।

    नमाज के लिए गए थे बांग्लादेश के खिलाड़ी

    गोलीबारी स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर करीब 1.45 बजे हुई। बांग्लादेश टीम के कुछ सदस्य कोचिंग स्टाफ के साथ नमाज पढ़ने अल-नूर मस्जिद गए थे। ईएसपीएन के बांग्लादेश के कॉरस्पॉन्डेंट मोहम्मद इस्लाम भी खिलाड़ियों के साथ थे। इस्लाम के मुताबिक- खिलाड़ी जैसे ही बस से उतरे, उन्होंने मस्जिद के अंदर गोलियों की आवाज सुनी। वे भीतर जाने ही वाले थे कि कई लोग अंदर से भागते हुए निकले। कुछ लोगों ने खिलाड़ियों के सामने ही दम तोड़ा। 10 मिनट में ही खिलाड़ी वहां से होटल के लिए निकल गए।

    बांग्लादेश के क्रिकेटर तमीम इकबाल ने ट्वीट किया- हमलावरों से पूरी टीम सुरक्षित है। यह एक भयावहअनुभव रहा। हमारे लिए प्रार्थना करें।बांग्लादेश टीम के प्रवक्ता ने कहा कि पूरी टीम सुरक्षित है लेकिन सभी खिलाड़ी मानसिक रूप से तनाव में हैं।

    भारत सभी प्रकार के आतंक निंदा करता है- प्रधानमंत्री मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले में मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति दुख और संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मोदी ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ”भारत सभी प्रकार के आतंक और उनका इस तरह की घटनाओं का समर्थन करने वालों की निंदा करता है। इस प्रकार की घृणा और हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।”

    घायलों में एक हैदराबाद का भी युवक
    हमले में घायल लोगों में एक हैदराबाद का युवक भी शामिल है। अहमद जहांगीर के अल नूर मस्जिद में शुक्रवार को नमाज़ के लिए गए थे। उनके भाई खुर्शीद इकबाल ने बताया कि अहमद को अस्पताल में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक वीडियो मिला है जिसमें उनके भाई नजर आ रहे हैं उसके सीने में गोली लगी है और वह स्ट्रेचर पर लेटा है। अहमद 15 साल पहले न्यूजीलैंड में शिफ्ट हुए हैं और यहां मस्जिद के पास रेस्टोरेंट चलाते हैं।

    स्कूल बंद किए गए
    इस घटना के बाद देशभर में मस्जिदों को बंद करने के लिए कहा गया है।पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने गोलीबारी के चलते क्राइस्टचर्च के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। ऑफिस, लाइब्रेरी और इमारतें भी बंद कर दी गई हैं।माइक ने लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर न निकलें और किसी व्यक्ति के संदिग्ध बर्ताव की सूचना दें। एक चश्मदीद ने बताया कि उसने गोलीबारी की आवाज सुनी। चार लोग जमीन पर गिरे हुए थे और हर तरफ खून बिखरा हुआ था।

    सिटी काउंसिल ने पेरेंट्स के लिए हेल्पलाइन जारी की है ताकि बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके। पास के इलाके में जलवायु परिवर्तन रैली के लिए लोग जुटने वाले थे। पुलिस ने कहा कि जब तक कहा न जाए, लोग किसी भी इलाके में न जाएं।

  • दुनिया ने महिलाओं को आजादी के नाम पर पर्दे से निकाल कर बहुत बड़ा जुल्म किया है: मौलाना उसामा कासमी

    दुनिया ने महिलाओं को आजादी के नाम पर पर्दे से निकाल कर बहुत बड़ा जुल्म किया है, उनके ऊपर दोहरी जिम्मेदारी डाल दी है। नतीजा यह हुआ कि पाश्चात्य सभ्यता वाले यूरोपीय देशों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनको अपने बाप का पता नहीं है । इन विचारों को जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक उसामा कासमी काजी ए शहर कानपुर ने आज 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर जामा मस्जिद अशरफाबाद में आयोजित जलसे में व्यक्त करते हुए कहा कि इस्लामी शरीयत ने मियां बीवी के आपसी ताल्लुकात को बहुत अहमियत दी है रिश्ते नाते को तोड़ने का काम करने वालों को जहन्नम में डाला जाएगा, यह बहुत बड़ा जुर्म है । हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मर्द और औरतों दोनों के हुकूक बताए हैं। मर्दों को वरीयता इसलिए दी है कि क्योंकि घर की निगरानी और खर्च की जिम्मेदारी उनके ऊपर है, घर के अंदर के तमाम कामों की जिम्मेदारी औरतों की है । मौलाना ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के फरमान को बताया कि तुम में सबसे बेहतर वह है जो अपनी बीवी के लिए अच्छा हो । मौलाना ने कहा कि अगर किसी की दो बीवी हैं तो उनमें फर्क ना करें , बराबरी और इंसाफ का मामला कर सकें तभी दूसरी शादी करें । मौलाना ने बताया कि महिलाएं चाहेंगी तो घर का निजाम बहुत अच्छा चलेगा । हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम से हजरत आयशा का रिश्ता अल्लाह ने आसमान में तय किया था, हजरत आयशा रजि० अल्लाह की जिंदगी रहती दुनिया तक की महिलाओं के लिए नमूना है । आज कुछ लोग औरतों को धोखा देते हुए कहते हैं कि नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के जमाने में औरतें मस्जिद में जाती थीं, हजरत उमर रजि अल्लाह ने मना कर दिया। सवाल करते हैं कि नबी की मानोगे या हजरत उमर की ? दरअसल यह सवाल ही गलत है क्योंकि हजरत उमर रजिअल्लाहु अन्हा कभी नबी सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के खिलाफ हो ही नहीं सकते हैं ।

    जब हजरत उमर ने महिलाओं को मस्जिद में जाने से मना किया तो उस वक्त भी कुछ नेक ख्वातीन हजरत आयशा के पास पहुंची थीं तो हज़रत आयशा ने भी यही कहा था कि हजरत उमर ने बिल्कुल सही फैसला लिया है। खुद नबी का फरमान है कि औरतों का घर में नमाज पढ़ना अफजल है हालांकि मस्जिद में भी नमाज हो जाएगी। अब यह हमारी महिलाओं को तय करना है कि उन्हें सवाब चाहिए या शौक चाहिए। जब हालात बदल गए और आसमानी हिदायतें आनी बंद हो गईं तो उस वक्त हजरत उमर ने यह फैसला लिया। मौलाना उसामा ने कहा कि हुजूर ने अपनी तमाम बीवियों के साथ इंसाफ का मामला किया, अपनी बीवी का इतना ख्याल रखते थे कि आप जब तहज्जुद की नमाज के लिए उठते तो इतनी आहिस्ता जाते कि सोने वाले की नींद में खलल ना पड़ जाए। नबी के जमाने में भी कुछ सहाबा ने कहा था कि हम दुनियादारी सब छोड़कर सिर्फ इबादत में लग जाएंगे तो हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नाराजगी का इजहार करके कहा था कि इबादत के साथ मामलात और मआशरत(समाजी कार्य) भी हैं ।

    नबी ने रात को तीन हिस्सों में तक्सीम किया था एक हिस्से में इबादत करते एक हिस्से में बीवी बच्चों का हक अदा करते हैं और एक में अपने जिस्म को राहत पहुंचाने के लिए सोते थे। इसलिए हमें इस्लामी निज़ाम को समझने की जरूरत है । मौलाना ने कहा कि औरतें घर के अंदर है तो मल्लिका और महारानी बनकर रहती हैं , घर में उनका ही हुक्म चलता है , घरों में जब नानी दादी अम्मा फूफी और खाला वगैरा रहती हैं तो कितना अच्छा और मुहब्बत का माहौल रहता है। लेकिन आजादी के नाम पर पाश्चात्य सभ्यता को अच्छा बताने वाले उसके नुकसान आपको भूल जाते हैं कि वहां की नाजायज़ औलादें जिन्हें अपने बाप का नाम नहीं मालूम वह कभी अपनी बूढ़ी मां की इज्जत नहीं कर सकती बल्कि उन्हें ओल्ड होम में भेज देती है , उनके पास अपने मां बाप से मिलने का वक्त नहीं रहता , मरने के बाद भी बिल अदा करके अपनी अंतिम संस्कार करवा देते हैं। ऐसे समाज को कभी अच्छा नहीं कहा जा सकता , इसलिए अल्लाह ने हमें जो दीनी और ईमानी दौलत, खानदानी एकता, फैमिली सिस्टम, एक दूसरे का हक़ अदा करने का जो निज़ाम अता किया है , उस पर शुक्र अदा करके उसकी कद्र करनी चाहिए।(मौलाना मोहम्मद मतीनुल हक कासमी, अध्यक्ष जमियत उलेमा उत्तर प्रदेश)

  • सीतामढ़ी में दो दिवसीय खुसूसी इजलास की तैयारियां मुकम्मल आज रात पहुंचेंगे अकाबिर इमारत शरिया

    शाकिब रजा/मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिला में दो दिवसीय खुशुसी तरबीती इजलास की तैयारियां मुकम्मल हो गई है सीतामढ़ी जिला में इमारत शरिया फुलवारी शरीफ पटना के द्वारा किया जा रहा है यह प्रोग्राम 6 तथा 7 मार्च को दो दिवसीय होगा आपको बता दें कि यह प्रोग्राम इमारत ए शरिया की तरफ से क्या जा रहा है

    बिहार के कई जिलों में किया गया है और कल यानी 6 तथा 7 मार्च को सीतामढ़ी जिला में भी किया जा रहा है बता दें कि इस प्रोग्राम की सदारत अकाबिर इमारत ए शरिया मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी साहब करेंगे औ‌र आज रात किसी भी समय उनका यहां आगमन हो सकता हैं

    इस प्रोग्राम में सीतामढ़ी जिला के तरफ से भी सभी लोगों ने भी खूब तावून किया है जिसमे इस्तकबालया कमेटी के सभी लोग इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं इस प्रोग्राम मे 25 से 30000 हजार लोगों के आने की संभावना है

  • 25 साल से आतंकवाद के टैग को झेल रहे 11 मुसलमान निकले बेगुनाह,अदालत ने किया बरी

    मिल्लत टाइम्स,मुंबई: तकनीक का ग़लत हाथों में जाना कितना ख़’तरनाक हो सकता है ये हम आज समझ सकते हैं. मीडिया में एक ऐसा गुट तैयार हुआ है जिसे तथ्यों से कोई मतलब नहीं है उसे बस उ’न्माद फैलाने से मतलब है. TRP का भूखा मीडिया कोई भी बात शालीनता से कहना भूल गया है, किसी को किसी इलज़ाम में पकड़ा जाता है उतने पर ही उसे मुजरिम भी मान लिया जाता है. मीडिया ट्रायल का ये ऐसा दौर चला है जहाँ क़ानून की बात करने भर से टीवी पर बैठा एंकर ज़ोर-ज़ोर से नारेबाज़ी करने लगता है.

    इस टीवी उ’न्माद की बलि बहुत लोग चढ़े हैं, बहुतों की ज़िन्दगी फँस के रह गई है. बहुत से लोग आतं’कवाद के आरोप में पकड़े गए तो उन्हें मीडिया ने इस तरह पेश किया मानो जुर्म सिद्ध हो गया. इनमें से कुछ लोग ऐसे ज़रूर होते हैं जो वाक़ई मुजरिम होते हैं लेकिन बहुत से बेगुनाह भी मीडिया के TRP जाल में फँस जाते हैं. परन्तु ये आज से ही नहीं हो रहा बल्कि काफ़ी पहले से ऐसा हो रहा है. कुछ इसी तरह की एक ख़बर आज हमारे पास है. विशेष टाडा अदालत ने बुधवार को 25 साल पहले आ’तंकवाद के इलज़ाम में गिरफ़्तार किए गए 11 मुस्लिम नागरिकों को बरी कर दिया.
    फाइल

    इन सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ विशेष सुबूत नहीं मिल सके. टाडा अदालत के न्यायधीश एससी खाती ने टाडा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने को लेकर अधिकारियों को फटकारा भी. उन्होंने 11 आरोपियों को रिहा करने का फ़ैसला किया. कन्नड़ न्यूज़ पोर्टल वर्था भारती में प्रकाशित समाचार के अनुसार बरी होने वालों में जमील अहमद अब्दुल्ला खान, मोहम्मद यूनुस मोहम्मद इशाक, फारूक नजीर खान, यूसुफ गुलाब खान, अय्यूब इस्माइल खान, वसीमुद्दीन शमशीन, शिखा शफी शेख अज़ीज़, अशफ़ाक सैयद मुर्तुज़ा मीर, मुमताज़, मुमताज़, मुमताज़ सईद शामिल हैं.
    उल्लेखनीय है कि इन लोगों को 28 मई 1994 को महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से गिरफ़्तार किया गया था और उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी) और 153 के तहत आरोप लगाए गए थे और धारा 3 (3) (4) (5) और धारा 4 (1) (4) ) बाबरी मस्जिद गिराए जाने का बदला लेने और आतं’कवादी प्रशिक्षण शिवरों में भाग लेने की योजना बना रहे थे. इसी दौरान इन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. रिहाई के फैसले के बाद अधिवक्ताओं की टीम को बधाई देते हुए, गुलज़ार आज़मी, ने कहा हालांकि इन 11 के लिए न्याय में देरी हुई है, लेकिन आ’तंकवादी होने का टैग मिटा दिया गया है। जमीयत उलमा’ के वकील को इन सभी 11 मासूमों को बरी करने का भरोसा था।” अधिवक्ताओं की टीम में एडवोकेट शरीफ शेख, मतीन शेख, अंसार तनबोली, रज़ीक शेख, शाहिद नदीम, मोहम्मद अरशद और अन्य शामिल थे।

  • नीदरलैंड:इस्लाम धर्म को झूठ और कुरान को ज़हर कहने वाला संसद डच ने कबुला इस्लाम

    मिल्लत टाइम्स,नीदरलैंड:योराम फान क्लावेरेन PVV पार्टी का हिस्सा रहे हैं. इस्लाम कबूलने के बाद उन्होंने कहा- ‘पार्टी की पॉलीसी थी, जो कुछ भी गलत था उसे किसी न किसी तरीके से इस्लाम से जोड़ा जाना था’
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    ‘डच पीपल’ नीदरलैंड नागरिकों के Germanic ethnic ग्रुप के लोगों को कहा जाता है. ये लोग डच भाषा बोलते हैं और एक कॉमन कल्चर को फॉलो करते हैं. यहां के योराम फान क्लावेरेन नाम के पूर्व राजनेता सुर्खियों में है. क्लावेरेन नीदरलैंड्स में गीर्ट विल्डर्स की पार्टी PVV की ओर से 2010 से 2014 तक सांसद रहे. ये पार्टी दुनिया भर में इस्लाम विरोधी कामों के लिए जानी जाती है.

    क्लावेरेन, विल्डर्स की पार्टी PVV से 2014 में अलग हो गए थे. उसके बाद उन्होंने नीदरलैंड्स के लिए अपनी अलग पार्टी शुरू की थी. लेकिन 2017 के नेशनल इलेक्शन में वे सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाए. उसके बाद राजनीति से अलग हो गए.

    (image: facebook)

    योराम कुछ दिनों पहले तक इस्लाम को कोसा करते थे लेकिन अब उन्होंने इस्लान कबूल कर लिया है. NRC अखबार के मुताबिक क्लावेरेन की कही बात, ‘इस्लाम झूठ है और कुरान जहर’ एक समय में काफी चर्चा में रही थी.

    इस्लाम कबूलने के बाद NRC अखबार से इंटरव्यू में योराम ने कहा, मैं अपनी उस टिप्पणी (इस्लाम झूठ है और कुरान जहर) पर शर्मिंदा हूं. उन्होंने कहा, ये बात पूरी तरह गलत है. साथ ही योराम ने ये भी कहा, ‘ये PVV पार्टी की पॉलीसी थी, जो कुछ भी गलत था उसे किसी न किसी तरीके से इस्लाम से जोड़ा जाना था’

    अल्गेमीन डागब्लाड अखबार ने लिखा, क्लावेरेन एक समय में नीदरलैंड्स में बुर्का और मीनारों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत किया करते थे. उनका कहा था, हमें नीदरलैंड्स में कोई इस्लाम नहीं चाहिए, और हो भी तो कम से कम.

    इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के लिए दुनिया भर में सुर्खियों में रहने वाले क्लावेरेन एक इस्लाम विरोधी किताब ‘From Christianity to Islam in the Time of Terror’ के लिए रिसर्च कर रहे थे. किताब जारी होने से पहले ही उन्होंने पिछले साल 26 अक्टूबर को इस्लाम कबूल किया.

    40 साल के डच राजनेता क्लावेरेन ने इस्लाम कबूलने पर डच अखबारों को बताया, मेरा मन बदल गया है. मुझे लंबे सयम से इसकी तलाश थी. ये मेरे लिए धार्मिक रूप से घर वापसी जैसा है. उन्होंने डच रेडियो से कहा, किताब लिखने के दौरान मैंने ऐसी-ऐसी चीज़ें जानीं, जिससे इस्लाम के प्रति मेरे पुराने विचार लड़खड़ा गए.

    इस्लाम कबूलने के बाद एक इंटरव्यू में क्लावेरेन ने कहा, अगर आप मानते हैं भगवान सिर्फ एक है और मोहम्मद उसके पैगंबर थे, जैसे ईसा मसीह और मोजे, तो आप औपचारिक रूप से मुसलमान हैं.

    डच मीडिया से क्लावेरेन ने कहा, धर्म बदलने पर उनकी पत्नी को कोई परेशानी नहीं है. मेरी पत्नी इस बात को स्वीकार करती है कि मैं मुसलमान हूं. उसने कहा कि अगर तुम खुश हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी.

    क्लावेरेन डच संसद के निचले सदन में बरसों से इस्लाम के खिलाफ झंडा बुलंद करते रहे. दिन रात इस्लाम की आलोचना करने वाले फान क्लावेरेन अब कहते हैं वह गलत थे. वेबसाइट politico.eu के मुताबिक, योराम मजहब बदलने वाले दूसरे पूर्व PVV पॉलीटीशियन हैं.

    नीदरलैंड्स की आबादी 1.7 करोड़ है. जिसमें लगभग पांच फीसदी मुसलमान हैं, उनकी तादाद 8.5 लाख के करीब हैं. 2050 तक नीदरलैंड्स में मुसलमानों की संख्या दो गुनी हो सकती है. ये आंकड़ें डच सेंट्रल स्टैटिक्स ब्यूरो के मुताबिक हैं.(इनपुट न्यूज १८)

  • गृहमंत्री राजनाथ नदवा पहुँचे,अखिलेश यादव ने भी मौलाना रबे हसन नदवी से की मुलाकात

    अदनान मलिक,लखनऊ:केंद्रीय गृहमंत्री एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह नदवा कालेज के प्रमुख मौलाना राबे हसनी नदवी से मिलने नदवा कालेज पहुँचे । बता दें कि 16 जनवरी को मोलाना के छोटे भाई मोलाना वाजेह हसनी नदवी का निधन हो गया था ।इस पर राजनाथ सिंह ने शोक संवेदना व्यक्त किया ।मोलाना से शोक संवेदना व्यक्त करने शाम 5:16 बजे गृहमंत्री नदवा आऐ।इस अवसर पर मोलाना ने गृहमंत्री से कहा कि ” देश पहले हे पहले देश के प्रति सोचें “। इस दोरान मोलाना ने अपनी लिखी पुस्तक ” रहबरे ईन्सानियत ” गृहमंत्री को दिया ।इस अवसर पर गृहमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा जी जबकि नदवा के ओर से नदवे के प्रभारी प्रधानाचार्य अब्दुल अजीज नदवी, मोलाना हमजा हसनी नदवी, मोलाना बिलाल हसनी नदवी व अन्य लोग उपस्थित थे ।

    करीब 20 की मुलाकात के उपरांत गृहमंत्री नदवा से वापस हुए।इस दौरान उन्होंने नदवा कालेज के छात्रों से भी बात करनी चाहि लेकिन अधिक भीड़ के कारण वह रवाना हो गए ।उल्लेखनीय हो कि इस पहले 12:45बजे के निकट उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शोक संवेदना व्यक्त करने आए ।उन्होंने मोलाना वाजेह हसनी नदवी के निधन पर दुख जाहिर किया ओर काफी दुखी भी नजर आए।उन्होंने नदवा से अपने पुराने सम्बन्धों के प्रति कहा कि ” वह नदवा से उस समय से जुड़े हैं जबकि उन्होंने ने राजनिती में कदम भी नहीं रखा था ।इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री के साथ अहमद हसन ,व अन्य लोग उपस्थित थे ।वहीं नदवे की ओर से मोलाना हमजा हसनी नदवी व अन्य लोग शामिल थे ।

  • मौलाना महमूद मदनी का इस्तीफा नामंजूर,7 फरवरी को कमेटी लेगी फैसला

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के इस्तीफे को नामंजूर कर दिया गया है। इस्तीफे पर 7 फरवरी को दिल्ली में बुलाई गई जमीयत वर्किंग कमेटी की बैठक में फैसला लिया जाएगा। मदनी ने इस संबंध में लेटर जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि जब तक इस्तीफे पर फैसला नहीं हो जाता वह संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

    जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को अध्यक्ष मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को बंद लिफाफे में अपना इस्तीफा भेजा था। मदनी द्वारा उठाए गए इस कदम से कारी उस्मान परेशान हो उठे, लेकिन उन्होंने इस्तीफा मंजूर नहीं किया। बल्कि उसे वापस मदनी के पास भेजकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था।

    रातभर मामले को लेकर गहमा गहमी रही। कारी उस्मान भी जमीयत के पदाधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए थे। गुरुवार को मौलाना महमूद मदनी ने बयान जारी कर बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा कारी उस्मान को भेजा था, लेकिन उसे मंजूर नहीं किया गया। उनके हुक्म और मशविरे से 7 फरवरी जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-आमला (वर्किंग कमेटी) की बैठक बुलाई गई है जिसमें इस्तीफे पर चर्चा की जाएगी।
    वहीं मदनी ने कहा कि जब तक इस्तीफे पर फैसला नहीं हो जाता वह पूर्व की भांति अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। मदनी के इस फैसले को लेकर जमीयत के पदाधिकारियों ने खुशी जताई है।

    जमीयत अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी दिल्ली रवाना

    मौलाना महमूद मदनी के पद से त्यागपत्र देने से परेशान अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी बृहस्पतिवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां पहुंचकर वह मौलाना मदनी से मुलाकात कर इस्तीफा दिए जाने की वजह जानेंगे। हालांकि बुधवार को कारी उस्मान यह कह चुके हैं कि मदनी पूर्व में कई बार अपनी मजबूरियां जाहिर कर इस्तीफा देने की बात कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें इसके लिए मना किया गया।

  • जानिए वह महान व्यक्ति कौन हैं,शेख़ दीन मोहम्मद जिसका गूगल ने बनाया है डूडल

    मिल्लत टाइम्स:पटना में पैदा हुए शेख़ दीन मोहम्मद ने ब्रिटेन में बड़ा नाम कमाया. गूगल ने उनकी याद में डूडल बनाया है. पर कौन थे शेख़ दीन मोहम्मद?

    पटना में 1759 में पैदा हुए शेख़ दीन मोहम्मद ने 1810 में हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस नाम का रेस्तरां मध्य लंदन में खोला था.

    इसके अलावा शेख़ दीन मोहम्मद को ब्रिटेन को शैंपू शब्द से परिचित कराने का भी श्रेय दिया जाता है.इतना ही नहीं, वे इंग्लैंड में अंग्रेज़ी में छपने वाले पहले भारतीय लेखक भी रहे हैं.

    गुरूवार को उनकी उपलब्धियों का बखान करने वाली हरे रंग की एक तख़्ती का अनावरण किया गया. ‘ग्रीन प्लाक’ कही जाने वाली यह तख़्ती सामाजिक जीवन में अहम योगदान के लिए दिया जाने वाला विशिष्ट सम्मान है.

    ग्यारह साल की उम्र में दीन मोहम्मद फौज में भर्ती हो गए और कैप्टन के पद तक जा पहुंचे.

    वे 1782 तक सेना में रहे और कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया, सेना से इस्तीफ़ा देने के बाद वे ब्रिटेन में बस गए.

    आयरलैंड में रहते हुए उन्होंने एक किताब ‘द ट्रेवल्स ऑफ़ दीन मोहम्मद’ लिखी थी जो किसी भी भारतीय की अंग्रेजी में प्रकाशित पहली कृति है.

    वे कुछ समय इंग्लैंड के पर्यटन स्थल ब्राइटन में रहने के बाद लंदन आ गए जहां उन्होंने नौकरी की.

    कुछ समय तक भाप स्नान और मालिश के पार्लर में काम करने के बाद उन्होंने अपना रेस्तरां खोला.

    ‘शैम्पू’ को ब्रिटेन में किया पॉपुलर

    भाप स्नान में नौकरी करने के दौरान ही दीन मोहम्मद ने भारतीय उपचार के रूप में चंपी की शुरूआत की. इस ‘चंपी’ का नाम इतना फैला कि दीन मोहम्मद की पहुंच राजदरबार तक हो गई.

    इसी ‘चंपी’ का अंग्रेज़ी रूप बन गया शैम्पू, दीन मोहम्मद को ‘रॉयल शैंपूइंग सर्जन’ कहा जाने लगा.

    वे जिस मसाज पार्लर में काम करते थे उसकी तो लंदन में धूम मच गई.

    उन्होंने 1810 में हिंदुस्तानी कॉफ़ी हाउस की शुरूआत की जिसमें भारतीय खाने के अलावा, भारतीय हुक्का भी पेश किया जाता था.

    उनका रेस्तरां कुछ समय चलने के बाद बंद हो गया लेकिन उसके बाद ब्रिटेन में भारतीय रेस्तरांओं की भरमार हो गई. जिस जगह उनका रेस्तरां था वहां अब कार्लटन हाउस नाम की इमारत है.

    दीन मोहम्मद रेस्तरां खोलने के दो साल के भीतर ही दीवालिया हो गए लेकिन कुछ वर्ष बाद ही उन्होंने दोबारा मसाज पार्लर का कारोबार ब्राइटन में शुरू कर दिया.

    उनकी मौत 1851 में हुई और वे ब्राइटन में ही दफ़न हैं, उनके परिवार के सदस्य ब्रिटेन में ही रहते हैं.(इनपुट बीबीसी)

  • मशहूर मौलाना जुबैर अहमद कासमी का इंतेकाल,बाद नमाज असर होगी जनाजा,लोगों मे गम कि लहर

    मौलाना जुबैर अहमद कासमी हिंदुस्तान के मशहूर आलिम ए दीन थे बिहार के मशहूर शिक्षण संस्थान मदरसा जामिया अरबिया अशरफ उल उलूम कंहवा मे प्रिंसिपल थे इसके अलावा इस्लामिक फकाह एकेडमी इंडिया के मेम्बर भी थे

    मिल्लत टाइम्स,मधुबनी: मशहूर मौलाना जुबैर अहमद कासमी का आज 13 जनवरी 2019 को सुबह 7:00 बजे 82 साल की उम्र में उनके अपने जिला मधुबनी के चंदरसेनपुर गांव में इंतकाल हो गया आज ही बाद नमाज असर नमाज़ जनाज़ा उनके अपने गांव चंद्रसेनपुर जिला मधुबनी में अदा की जाएगी और वही दफन क्या जाएगा

    मौलाना जुबैर अहमद कासमी हिंदुस्तान के मशहूर आलिम ए दीन थे बिहार की मशहूर शिक्षण संस्थान मदरसा जामिया अरबिया अशरफ उल उलूम कन्हवा में प्रिंसिपल थे
    इसके अलावा इस्लामिक फक्काह अकैडमी इंडिया के मेंबर थे दारुल उलूम सबील अल इस्लाम हैदराबाद में भी शेख उल हदीस रह चुके हैं कुछ सालों पहले मधुबनी के एक मदरसा बशारत उल उलूम ने भी मदरसा के कुछ कुछ हालात की वजह से प्रिंसिपल की जिम्मेदारी मौलाना को सौंपी गई थी

    मौलाना जुबैर अहमद कासमी का जन्म 1937 में हुई थी क्षेत्र के मदरसा में शिक्षा प्राप्त करने के बाद मौलाना ने दारुल उलूम देवबंद में एडमिशन लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण किया शेख उल हदीस मौलाना फखरुद्दीन मुरादाबादी इन के करीबी शिक्षकों में शामिल थे मौलाना एक बेहतर शिक्षक होने के साथ फक्काह पर गहरी नजर रखते थे काजी मुजाहिदुल इस्लाम कासमी रहमतुल्ला अलेह के साथ मौलाना के गहरे संबंध थे और फकही मामला के बारे में हाजी साहब मौलाना जुबेर कि राय को खुसूसी अहमियत देते थे इसलिए इन्हें फक्कियह मिल्लत का लकब भी दिया गया अशरफ उल उलूम कन्हवा के तालीम को बुलंद करने और इसकी तामीर व तर्रक्की मे मौलाना जुबेर अहमद कासमी का किरदार ना काबिल फरामोश है

    मौलाना जुबेर अहमद कासमी के पास पांच बेटे और दो बेटियां हैं जिनमें मौलाना ओवैस सिद्दीकी और मौलाना जफर सिद्दीकी कासमी भी है

    मिल्लत टाइम्स मौलाना जुबैर अहमद कासमी के इस निधन पर विशेष दुख और गम का इजहार करते हैं और पूरी टीम इस गम में बराबर के शरीक हैं

  • तालीमात नबवी ही शिर्क व बिदअत के अंधेरों को खत्म कर सकती है, नबी पाक सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने पूरी इंसानियत को तौहीद का दर्स दिया और कुफ़्र व शिर्क से रोका

    हाफिज मोहम्मद सैफ़ुल इस्लाम मदनी,कानपुर:5 जनवरी सन 2019 को मदरसा अरबिया मदीनतुल उलूम नूरगंज पुखरायां ज़िला कानपुर देहात यूपी में एक रोज़ा अजीमुश्शान माही-ए-शिर्क ओ बिदअत (सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम) कान्फ्रेंस हुई

    जलसा की सदारत फरमा रहे जनाब मौलाना मुश्ताक़ अहमद क़ासमी नाज़िम मदरसा मदीनतुल उलूम ने ख़िताब फरमाते हुए कहा कि नबी आख़िरुज़्ज़मां जनाब मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम को अल्लाह रब्बुल आलमीन ने माही-ए-शिर्क ओ बिदअत बनाकर भेजा, अल्लाह तआला अपनी ज़ात व सिफ़ात के एतबार से तनहा है उसका कोई सानी नहीं, शरीक नहीं, अकेले अपनी कुदरत-ए-कामिला से कायनात के निज़ाम को चला रहा है। बहुत से अंबिया इस दुनिया में तौहीद का पैगाम लेकर आए और आलम-ए-इंसानियत को कुफ़्र व शिर्क से रोका और एक अल्लाह की दावत दी, शहंशाह कौनैन सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम भी कुफ़्र व शिर्क व बिदअत को मिटाने के लिए इस दुनिया में तशरीफ़ लाए। आपने पूरी दुनिया को तौहीद का सबक दिया और आज पूरी दुनिया के अंदर अल्लाह और रसूल का नाम देने वाले लोग मौजूद हैं। मशरिक़ व मग़रिब में अतराफ़-ए-आलम में हमारे नबी मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की धूम है।

    उन्होंने कहा कि नबी अलैह सलाम ने दुनिया वालों को कामयाबी की तरीका बताया था मगर आज के मुसलमान उस तरीके से दूर हो चुके हैं आज मुसलमान कलमा पढ़ने वाला, अपने आपको आशिक ए रसूल कहने वाला, नमाज़ों से दूर है, घरों के अंदर शिर्क व बिदअत का अंधेरा है, घर के लोग बेनमाज़ी हैं, मुसलमान उस वक्त कामयाब होगा जब वो नमाज़ की पाबंदी करेगा, शिर्क बिदआत के अंधेरे से कामिल ईमान की रोशनी की तरफ निकलेगा, घर के तमाम लोग नमाज़ी होंगे।

    अल्लाह ने अपने नबी को सारी कायनात के लिए रेहमत बनाकर भेजा है। आप सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने बेहतरीन अंदाज और बेहतरीन अख़लाक़ के साथ मक्का वालों के सामने दीन इस्लाम की दावत देश की। इसके बावजूद भी कुफ़्फ़ार मक्का ने जनाब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम को तरह-तरह की अज़ियतें दी, आप को सख्त तकलीफों का सामना करना पड़ा, मगर आपने इनतिहाई मोहब्बत व अख़लाक़ का मुज़ाहिरा किया। किसी को बुरा नहीं कहा, कभी किसी को सताया नहीं बल्कि मुकम्मल ताकत व कुव्वत के होते हुए भी दुश्मनों से बदला नहीं लिया और रहमत की दुआएं की। तारीख ए इस्लाम में एक भी ऐसी नज़ीर पेश नहीं की जा सकती कि किसी शख्स ने गैर मामून होने की वजह से या फिर नबी या असहाब ए नबी के खौफ़ से ईमान कुबूल किया हो बल्कि आक़ा सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम के अख़लाक़ ए करीमाना और कलाम ए इलाही की हक़्क़ानियत को तस्लीम करके इस्लाम कुबूल किया। यही वजह है एक शख्स की दावत पर क़बीलों के क़बीले, ग़ैरों का लश्कर इस्लाम में दाखिल होने लगा।

    मौलाना नेमतुल्लाह राजपुरी दामत बरकातुहुम ने ख़िताब करते हुए औलिया ए कामिलीन की करामात व बुज़ुर्गी पर बात की और कहा कि अल्लाह के बेशुमार बन्दे ऐसे हैं जिन्होंने इस हाल में अल्लाह को राज़ी करने वाली जिंदगी गुजारी है कि अगर उनके हालाते जिंदगी का तज़किरा किया जाए तो यकीन म आये। किताबों में वाकिया लिखा है कि एके अल्लाह वाले 40 साल तक सोए नहीं और पूरी पूरी रात इबादतों के अंदर गुजार दी ‘यह वो लोग थे जिन्हें न दुनिया के मताअ व माल की जरूरत थी और न जाहिर दौलत से मोहब्बत करने वाले लोग थे। ना कीमती बिस्तरों का शौक था और ना ही कोई आला किस्म की मरगूब ग़िज़ा होती थी बल्कि जो मयस्सर आ आए वह खा लिया करते थे। एक बुजुर्ग का वाकया है कि पूरे हफ्ते अल्लाह की इबादत करते थे न कुछ खाते न पीते थे, सिर्फ सातों दिन रोटी के कुछ निवाले पानी में भिगोकर खा लिया करते थे।

    हज़रत ख्वाजा बायजीद बुस्तामी अलैह रहमा एक बेमिसाल वली कामिल गुजरे हैं इतनी बड़ी विलायत के मकाम पर होने के बावजूद दिन रात मां की खिदमत में गुजार देते थे।
    इन औलिया ए कामिलीन का अमल हमारे लिए नमूना है जो शख़्स वलियों की खिदमत में लगा रहता है उस पर भी वलियों के असरात पड़ने लगते हैं। उनका दिल भी नूरानी होता है इसलिए जरूरी है कि किसी वली कामिल से ताल्लुक जोड़ा जाए और उनके साथ रह कर अपने ईमान को मजबूत किया जाए।

    कान्फ्रेंस में मुफ्ती शाहिद कासमी, मौलाना अब्दुल वाजिद कासमी, मौलाना मोहम्मद खालिद कासमी, हाफ़िज़ मुहम्मद एहसानुल हक़ साहब, हाफ़िज़ सैफ़ुल इस्लाम मदनी खासतौर पर शरीक रहे, मौलाना फ़ज़ले हक़ कासमी ने नाते पाक का नज़राना पेश किया, निज़ामत के फराइज़ मौलाना अब्दुल माजिद कासमी ने अंजाम दिया और बड़ी तादाद में वाम ने शिरकत करके प्रोग्राम को कामयाब बनाया।