Category: मुस्लिम दुनिया

  • शाबान का चाँद दिखा,शबे बारात 20 अप्रेल को

    (जमीतुल अंसार,फजलुर्रहमान इलाहाबादी,लखनऊ,6 अप्रैल)
    शाबान का चाँद नज़र आया ,दिल्ली एस्थित जामा मस्जिद के इमाम बुखारी और देश की दोसरी रियाते हिलाल कमेटियों की तरफ से इसकी सूचना दी गयी ,मुस्लिम समाज के आस्था के मुताबिक पवित्र रात शबे बारात जिसमे गुनाहगारूं की मगफिरत होती है ,20 अप्रैल को शबे बारात मनायी जायेगी

    इसकी सूचना मुस्लिम धर्म गुरुयों ने दिया ,इस्लाम में इस माह का काफी महत्व है इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद साहब इस माह में बहुत ज़्यादा रोज़ रखते थे ,इस माह के बाद इस्लामी शरीयत के एतेबार से सबसे पवित्र महीना रमजान है ,और रमजान में पूरे माह रोज़ रखा जाता है ,इसलिए मोहम्मद साहब एक माह पहले से रोज़ा प्रारंभ करदेते थे ताकि पवित्र माह रमजान का रोज़ा रखने में दुश्वारी न हो ,

  • JMI की बुनियाद रेशमी रुमाल तहरीक के नायक शेख़ उल हिन्द मौलाना महमूद उल हसन ने अलीगढ़ में रखी थी

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:वो जुमा का दिन था, 29 अक्तुबर 1920, जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया के क़याम का ऐलान हुआ था। अलीगढ़ कॉलेज की मस्जिद मे जोश से भरे हुए वो छात्र और शिक्षक मौजूद थे जिन्होने ख़िलाफ़त तहरीक और असहयोग आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए अलीगढ़ कॉलेज छोड़ दिया था। इनकी तादाद कोई 300 थी। रेशमी रुमाल तहरीक के नायक शेख़ उल हिन्द मौलाना महमूद उल हसन साहब के हाथ इस एदारे की संग ए बुनियाद रखी गई। जिसके बाद उनका मशहूर ख़ुतबा मौलाना शब्बीर उस्मानी ने पढ़ कर सुनाया जो कुछ इस तरह था :- “अऐ, नौनेहाल ए वतन, जब मैने देखा के मेरे दर्द के ग़मख़्वार मदरसों और ख़ानक़ाहों में कम और स्कूलों और कॉलेजों में ज़्यादा हैं, तो मैने और मेरे चंद मुख़लिस अहबाब ने एक क़दम अलीगढ़ की तरफ़ बढ़ाया। और इस तरह हमने हिन्दुस्तान के दो तारीख़ी मुक़ाम ‘अलीगढ़ और देवबंद’ का रिश्ता जोड़ा। कुछ लोगो मेरे अलीगढ़ के इस सफ़र की निंदा कर सकते हैं, लेकिन अहल ए नज़र जानते हैं के जिस क़दर मै अलीगढ़ की तरफ़ आया हुं उससे अधिक वो(अलीगढ़) मेरी तरफ़ आया है!”

    वो आगे पढ़ते हैं :- “मुझे लीडरों से ज़यादा उन नौनिहाल ए वतन की बुलंद हिम्मत पर आफ़रीं और शाबाशी कहना चाहये जिन्होने इस नेक मक़सद की अंजामदेही के लिए अपनी हज़ारों उम्मीदों पर पानी फेर दिया और तहरीक तर्क मवालात (असहयोग तहरीक) पर मज़बूती के साथ क़ायम रहे! और अपनी क़ीमती ज़िन्दगी को क़ौम ओ मिल्लत के नाम पर वक़्फ़ कर दिया। मुसलमानों की शिक्षा मुसलमानों के हाथों में रहे और इसमें किसी बाहरी का दख़ल नही हो! हमारी ये कोशिश होनी चाहये के हम अपने कॉलेजोंं में युरोप के लिए सस्ते ग़ुलाम नही पैदा करें बल्के हमारे कॉलेज नमुना होने चाहये बग़दाद और क़ुर्तुबा की उन युनिवर्सिटी और मदारिस के जिन्होने युरोप को अपना शागिर्द बनाया।”

    इस दिन के बारे में डॉ ज़ाकिर हुसैन साहब ने एक जगह लिखा है :- मुझे और मेरे साथियों को अलीगढ़ कॉलेज की मस्जिद में दीवार का सहारा ले कर बैठा वो मुक़द्दस शख़्स याद है, जो अंग्रेज़ों की ज़ुल्म सह कर इतना कमज़ोर हो चुका था के मजमे को ख़िताब भी नही कर सकता था। तब उनका पैग़ाम उनके शागिर्द मौलाना शब्बीर अहमद उस्मानी पढ़ कर सुनाते हैं! यहां याद रहे को वो जिस दीवार का सहारा लिये बैठे थे; वो ख़ाली ईंटी पत्थर की दीवार नही थी; वो एक अज़ीम उश्शान मिल्ली दीवार थी। और वो ना सिर्फ़ उन नौजवानो को मुख़ातिब फ़रमा रहे थे जो उनके सामने बैठे थे; बल्के उनका ख़िताब क़ौम की आने वाली सारी नस्लों की तरफ़ था।

    ज्ञात रहे के ख़ुफ़िया तहरीक ‘रेशमी रुमाल’ के राज़फ़ाश हो जाने के बाद शेख़ उल हिन्द मौलाना महमूद उल हसन गिरफ़्तार कर लिए गए और उन्हे मॉल्टा भेज दिया गया। शेख़ उल हिन्द माल्टा की जेल में 3 साल 19 दिन रहे, और 8 जून 1920 को जब आप मुंबई के साहिल पर उतरे, इस्तक़बाल करने वालों मे गांधी जैसे लोग शामिल थे।

    ख़िलाफ़त तहरीक में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही जमियत उल्मा ए हिन्द की दूसरे जलसे में शेख़ उल हिन्द शामिल हुए और मुल्क की आज़ादी के लिए हिंदू मुस्लिम दोस्ती और भाई चारे को बढ़ाने की तरफ़ तवज्जो दिलाया, और साथ मौलाना महमूद उल हसन साहब ने मुसलमानो को कांग्रेस और गांधी की तहरीक में शामिल होने को कहा, फिर मौलाना मुहम्मद अली जौहर के कहने पर आप अलीगढ़ गए और वहाँ 29 अक्तुबर 1920 को आपके ज़रिए जामिया मीलिया इस्लामिया की संग ए बुनियाद रखी गई।

    शेख़ उलल हिंद मौलाना महमूद उल हसन को ज़िन्दगी ने मोहलत नही दी और 30 नवम्बर 1920 को आपका इंतक़ाल हो गया। उनकी मय्यत को देवबंद मे ग़ुसुल के लिये उतरा गया तो उनका बदन बदन न रह कर सिर्फ़ हड्डियो का ढाँचा रह गया था और उनकी उन हड्डियो और खाल पे सिर्फ़ हंटरो की मार के रंगें निशान थे और ये देख वहाँ मौजूद लोग रो पड़े थे।

    जब शेख़ुल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी कलकत्ता से देवबंद गए तो उन्होने बताया के :- “जब अंग्रेज़ो ने शेख़ उल हिंद को माल्टा जेल मे क़ैद कर रखा था तो अंग्रेज़ शेख़ उल हिंद मौलाना महमूद उल हसन को जेल के तहख़ाने मे ले जाते और लोहा की सलाख को गर्म करके शेख़ उल हिंद मौलाना महमूद उल हसन के बदन पर दाग़ते थे और उनसे कहते की महमूद उल हसन अंग्रेज़ो के हक़ मे फ़तवा दे दो”

    जब शेख़ उल हिंद मौलाना महमूद उल हसन अंग्रेज़ों के ज़ुल्म से बेहोश हो जाते और फिर होश मे आते तो कहते की ‘तुम मेरा जिस्म पिघला सकते हो; मैं हज़रत बिलाल हबशी रज़ी अल्लाहो अन्हो का वारिस हूं जिन को गर्म रेत के ऊपर लिटाया जाता था; सिने पर चट्टान रख दी जाती थी। मै तो ख़बीब {रज़ी} का वारिस हूं जिनके कमर के ऊपर ज़ख्मो के निशानात थे। मै तो इमाम मालिक {रह} का वारिस हूं जिनके चेहरे पर सिहाई मल कर उन को मदीने मे फिराया गया था। मै इमाम अबू हनीफ़ा {रह} का वारिस हूं जिनका जनाज़ा जेल से निकला था। मै तो इमाम अहमद बिन हम्बल {रह} का वारिस हूं जिनको सत्तर कोड़े लगाए गए थे। मै इल्मी वारिस हूं मजद्दि्द अल्फ़ सानी {रह} का, मै रूहानी वारिस हूं शाह वलीउल्ला मोहद्दीस देहेलवी {रह} का। भला मै कैसे तुम्हारी इस बात को क़बूल कर लुं ? मेरी चमड़ी उधड़ सकती है लेकिन मैं अंग्रेज़ों के हक़ मे फ़तवा नही दे सकता”
    (courtesy,heritage times)

  • मस्जिद को बम से उड़ाने का ख्वाब देखने वाला क्यों बना मुसलमान?

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:इस्लाम से बेइंतहा नफरत करने वाला एक शख्स कभी मस्जिद को बम से उड़ाना चाहता था लेकिन उसने धर्म परिवर्तन कर खुद ही इस्लाम कबूल कर लिया. ‘द संडे प्रोजेक्ट’ से रिचर्ड मैकिने नाम के एक शख्स ने अपनी अनोखी कहानी शेयर की है.

    रिचर्ड इंडियाना के रिटायर्ड मैरीन अफसर हैं. घर लौटने के बाद एल्कोहल एडिक्शन से लड़ रहे रिचर्ड के मन में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैल चुकी थी.

    (Richard McKinney/facebook)
    रिचर्ड ने बताया, एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ एक दुकान में पहुंचे और वहां काले बुर्के में दो महिलाओं को देखा. मैंने प्रार्थना की कि मुझे इतनी ताकत मिले कि मैं उनके पास जाऊं और उनकी गर्दन तोड़ दूं.

    लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि इससे भी ज्यादा खतरनाक प्लान बनाया. वह वह घर में बम बनाने की सोच रहे थे और इस्लामिक सेंटर के बाहर रखकर उसे उड़ाने का ख्वाब देख रहे थे.

    रिचर्ड ने सोचा था कि वह दूर से बैठकर उस भयानक मंजर को देखेंगे. रिचर्ड ने बताया, मेरी 200 से ज्यादा लोगों को मारने और घायल करने की योजना थी. इस्लाम के प्रति नफरत ही मुझे जिंदा रखे हुए थी.

    इसी बीच, मैकिने ने इस्लाम समुदाय को एक और मौका देने के बारे में सोचा. वह स्थानीय इस्लामिक सेंटर गए और वहां उन्हें एक कुरान दी गई. वे उसे घर ले गए और पढ़ने लगे.

    8 सप्ताह बाद वह इस्लाम में धर्मांतरण कर चुके थे और कुछ सालों बाद वह उसी इस्लामिक सेंटर के अध्यक्ष बन गए जिसे वह कभी बम से उड़ाना चाहते थे.

    (Richard McKinney/facebook)
    किसी को भी इतने नाटकीय घटनाक्रम पर यकीन नहीं होता लेकिन मैकिने ने इंटरव्यू में अपने इस बदलाव की पूरी कहानी सुनाई. उन्होंने बताया, एक दिन मैं घर पर दूसरे समुदाय, उनके विश्वास और उनकी नस्ल के बारे में गंदी-गंदी बातें बोल रहा था, तभी मेरी बेटी ने मुझे बहुत ही हिकारत भरी नजरों से देखा. उसके बर्ताव ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया.

    जैसे एक प्रकाश का दीया जल गया हो, मैंने देखा कि मैं अपनी बेटी के साथ क्या कर रहा हूं, मैं अपने पूर्वाग्रहों को उसे सिखा रहा था. मैकिने ने कहा कि न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च में मस्जिद पर हुए आतंकी हमले के दोषी ब्रेन्डन टैरेंट के भीतर अपने पुराने मैकिने को देख रहा था

    मैकिन ने कहा, “जिसने ऐसा घृणित अपराध किया, जिसने कई मासूमों की जान ली, वह मैं ही था. हम एक ही तरह के लोग हैं. जब मस्जिद में लोगों ने उसका मुस्कुराकर स्वागत किया तो उसने रुककर सोचा नहीं. जबकि मैं इस्लामिक सेंटर में जब गया था तो मेरा अभिवादन एक मुस्कुराहट के साथ किया गया था, इसने मुझे थोड़ा बहुत पिघला दिया. इससे मैं पहले से ज्यादा खुले दिमाग से सोचने में कामयाब हुआ और फिर मैंने दूसरों को सुनना शुरू कर दिया. लेकिन उसने (न्यूजीलैंड के हमलावर) ने ऐसा नहीं किया.”

  • वर्तमान आम चुनाव में कुछ सीटों पर मुस्लिम नेतृत्व वाली सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवार को सदन में पहुंचाने का विश्लेषण किया जाए:मिल्लत टाइम्स कॉन्क्लेव में बुद्धिजीवीयों ने अपने विचार व्यक्त किए

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली
    हिंदुस्तान के सभी चुनाव में मुस्लिम मुस्लिम मतदाता ने लोकसभा की सभी सीटों के अलावा मुस्लिम बहुलक क्षेत्र से भी सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देकर इन्हें सदन में भेजा लेकिन परिणाम में मुसलमानों को कुछ नहीं मिला इन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं दी गई अन्य पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को पार्टी टाइमलाइन से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र,जनता और धर्म के लाभ की बात नहीं करने दी इसलिए 70 में लोकसभा चुनाव में मुसलमानों को चाहिए कि वह मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट दें और उन्हें सदन में पहुंचाएं


    इस विचार को व्यक्त मिल्लत टाइम्स में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने किया और कांक्लेव में उपस्थित लगभग सभी पैनलिस्ट,अतिथि तथा गणमान्य लोगों ने साझा तौर पर मिल्लत टाइम्स के नजरिया से सहमति जताई के हिंदुस्तान में अब मुस्लिम लीडरशिप वाली सियासी पार्टियों पर भरोसा करते हुए उनके प्रतिनिधि को सदन तक पहुंचाना चाहिए और हमें उनको हर तरह से सपोर्ट करना चाहिए सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देने के बजाय मुस्लिम नेतृत्व वाली सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट देना चाहिए और उनसे मांग किया जाए कि वह मुस्लिम नेतृत्व वाली पार्टियों को भी गठबंधन का हिस्सा बनाएं

    वजह रहे की मशहूर वेब पोर्टल मिल्लत टाइम्स ने होटल रिवर व्यू जामिया नगर में पिछले दिन 30 मार्च को आम चुनाव 2019 में हिंदुस्तानी मुसलमानों का राजनीतिक रणनीति प्रक्रिया किया होना चाहिए के मुद्दे पर एक कांक्लेव का आयोजन किया जिसके प्रस्तावित शीर्षक निम्नलिखित थे, मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी , प्रभावी प्रतिनिधि और सत्ता मे भागीदारी पर खुलकर बहस हुई इलेक्शन 2019 के मद्देनजर मुसलमानों के लिए बुद्धिजीवियों ,स्काॅलर और गणमान्य लोगों ने यह रणनीति तय किया के 70 सालों में हमने कांग्रेस, आरजेडी, sp-bsp,टीएमसी जेडीएस, सीपीएम, समेत लगभग सभी पार्टियों पर भरोसा किया उनके प्रतिनिधि को मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से वोट देकर सदन में भेजा वर्तमान चुनाव में देश के लोकसभा की जिन सीटों पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ,सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया,वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया ,राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल समेत कई उल्लेखनीय मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों के प्रतिनिधि चुनाव लड़ रहे हैं वहां मुसलमानों को इन्हीं को पुरी तरह सपोर्ट करना चाहिए बड़ी संख्या में वोट देकर इन्हें पार्लियामेंट में पहुंचाना चाहिए
    यह लोग हिंदुस्तान के मुसलमानों,कमजोर, मजलूम , अल्पसंख्यक, दलित और गरीबों का‌ मजबूत आवाज होंगे – इन के हक की लड़ाई लड़ेंगे और नजरियाति स्तर पर हमारी वकालत करेंगे- बाकी अन्य सीटों पर आप सेकुलर पार्टी को वोट दीजिए उनके प्रतिनिधि को सदन तक पहुंचाइए
    कॉन्क्लेव में यह बात भी बहस में आई के कांग्रेस और अन्य सेकुलर पार्टियां मुस्लिम नेतृत्व को उभरने नहीं देना चाहती है उनकी पहली कोशिश होती है कि मुसलमान राजनीतिक तौर पर कमजोर रहे अख्तियार और मोहताज बन कर रहे हालांकि पैनल में शामिल कांग्रेसी लीडर डॉक्टर शकील उजमा अंसारी पूर्व मंत्री बिहार सरकालर ने इसे खारिज कर दिया और कहा की कांग्रेसी मे सभी को एक-समान प्रतिनिधित्व हासिल है

    वरीष्ठ पत्रकार जनाब ए यू आसिफ ने अपने भाषण में इस बात के लिए अपील की के वर्तमान चुनाव में मुस्लिम मतदाता कुछ सीटों पर सेकुलर मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों को वोट देकर जिताने का भी विश्लेषण करें और इन्हें सत्ता तक पहुंचाएं उन्होंने बताया कि पार्लियामेंट के रिकॉर्ड के मुताबिक मुस्लिम मेम्बरान पार्लियामेंट में सबसे ज्यादा सवाल पूछने वाले असदुद्दीन ओवैसी और मौलाना बदरूद्दीन अजमल है इसकी वजह यह है कि यह दोनों एक आजाद पार्टी के लीडर हैं इन पर किसी का दबाव नहीं है ऐसी ही पार्टियों के प्रतिनिधि मुसलमानों के हक में बेहतर साबित होते हैं
    प्रोफेसर अख्तरुल वासे साहब ने कहा मैं अख्तरुल वासे हूं और अख्तरूल ईमान पर यकीन रखता हूं ऐसे मुखलिस और हमदर्द लीडर को हम पार्लियामेंट में देखना चाहते हैं दरअसल उनका इशारा किशनगंज लोकसभा सीट से एम आई एम के उम्मीदवार अख्तर ईमान की ओर था

    मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज कासमी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम वोटों को बांटने के बजाय इसे संयुक्त करने के लिए यह रणनीति तय कर रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने आसाम बिहार और यूपी समेत कई लोकसभा क्षेत्रों पर मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा कर दिया है जहां पहले से मुस्लिम सेकुलर पार्टियों के उम्मीदवार जीत हासिल कर रहे हैं ऐसे में यह अंदेशा है कि वहां का वोट बंट जाएगा और संप्रदायिक पार्टियों की आसानी से जीत हो जाएगी इसलिए ऐसी सीटों के लिए हम यह रणनीति तय कर रहे हैं कि वहां के मुस्लिम मतदाता मुस्लिम लीडरशिप वाली पार्टियों को एक होकर वोट दें

    कॉन्क्लेव के श्रृंखला शेसन में एडवोकेट महमूद पराचा सीनियर वकील सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया – मशहूर विश्लेषक मोहतरमा तस्नीम कौशर जनरल सेक्रेट्री महिला- एडवोकेट सर्फुद्दीन अहमद उपाध्यक्ष एसडीपीआई – जनाब कलीमुल हफीज चेयरमैन अलहाफिज एजुकेशनल अकैडमी – मुफ्ती एजाज अरशद कासमी मेंबर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड -मशकूर अहमद उस्मानी पूर्व अध्यक्ष एएमयू स्टूडेंट यूनियन – डॉक्टर शकील अल जमा अंसारी पूर्व मंत्री बिहार सरकार – मशहूर विश्लेषक मौलाना अबिदुर रहमान आबिद – सीनियर पत्रकार मोहतरमा शबनम सिद्दीकी – डॉक्टर अब्दुल कादिर शम्स सीनियर सब एडिटर रोजनामा सहारा – बलीग नोमानी प्रवक्ता एम आई एम – इंटरनैशल विश्लेषक अख्तरूल इस्लाम सिद्दीकी – सीनियर पत्रकार कासिम सैयद चीफ एडिटर रोजनामा खबरें नई दिल्ली – डॉ खालिद आजमी कुव्वैत – डॉ मंजर इमाम – डॉक्टर मुजफ्फर हुसैन गजाली – समेत कई बुद्धिजीवी, स्कॉलर्स ने पैनल डिस्कशन में भाग लिया – मुद्दे से संबंधित सवाल किया और चर्चा हुआ-फैसल नजीर और शबीना ने निजामत का कर्तव्य निभाया
    इसके अलावा मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज कासमी – रोजनामा खबरें के चीफ एडिटर कासिम सैयद और मिल्लत टाइम्स के सब एडिटर मोहम्मद अंजर आफाक ने कई सेशन मे एंकरिंग का का कर्तव्य निभाया – सबसे पहले मोहम्मद अफसर अली की तिलावत से कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ मिल्लत टाइम्स कॉन्क्लेव की वीडियो मिल्लत टाइम्स के युटुब चैनल और फेसबुक पेज पर भी प्रकाशित की जाएगी ताकि वह लोग भी इसका लाभ ले सके जो यहां उपस्थित नहीं हो पाएं

  • गुरुग्राम फसाद:मुस्लिम परिवार की पिटाई पर लोगों पूछा,ये चीखें सुनकर चौकीदार चैन की नींद कैसे सोते है

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली,गुरुग्राम के भूपनगर इलाके में होली के दिन एक मुस्लिम परिवार की बदमाशों द्वारा पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर इस घटना के खिलाफ लोगों का जमकर गुस्सा फूटा है. इस मामले में हरियाणा पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है.

    हिरासत में लिए गए आरोपी का नाम मुकेश शर्मा बताया जा रहा है. पीड़ित परिवार के आरोपों पर हरियाणा पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है.

    पीड़ित परिवार ने पुलिस पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. पुलिस का कहना है कि उन्होंने कई बार पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया लेकिन पुलिस नहीं आई. पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि हमला करने वाले लोग घर से 25,000 रुपए भी लूट ले गए.

    पीड़ित परिवार की एक महिला समायरा का कहना है, ‘हमला उस वक्त हुआ है जब महिलाएं मेहमानों के लिए खाना बना रहीं थीं. तभी अचानक से कुछ लोग घर में दाखिल हो गए. जब मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे डंडों से पीटा. मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ है तो उन्होंने जवाब दिया कि आज मुल्लों को छोड़ना नहीं है. वे सीढ़ियों पर चढ़ गए, खिड़कियों और दरवाजों को तोड़ दिया और सबको बुरी तरह से पीटने लगे

    इस संबंध में पुलिस ने यह भी कहा है कि मोहल्ले के बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे, कुछ लोगों ने उन्हें खेलने से रोका और पीट दिया

    ट्विटर पर अखिलेश कुमार नाम के एक यूजर ने ट्वीट किया है कि वीडियो का सच जानना जरूरी है. पुलिस को पड़ताल करके तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. आखिर घटना क्या थी? अगर मामला जातिगत नहीं है तो सोशल मीडिया पर पेश करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. इस ट्वीट के जवाब में मनीष सिसोदिया ने लिखा है कि चौकीदार की चौकीदारी पर सवाल उठा दिया तो इतनी चिनचिनाहट. घटना जातिगत हो या कोई और वजह से इतनी दरिंदगी देखकर भी इंसानियत नहीं जागी. बल्कि सवाल पूछने वालों से ही सवाल.’

    एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया है कि यह चीखें सुनकर चौकीदार चैन की नींद कैसे सोते हैं.

    गुरुग्राम की इस घटना पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर हमला बोला है. केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा है कि हिटलर भी सत्ता के लिए यही करता था. हिटलर के गुंडे लोगों को पीटते थे, उनका खून करते थे और पुलिस जिन्हें मारा, उन्हीं के खिलाफ केस करती थी. मोदी जी भी ये सत्ता के लिए करवा रहे हैं, हिटलर के रास्ते चल रहे हैं. पर मोदी समर्थकों को दिखाई नहीं देता कि हमारा भारत किधर जा रहा है?

    ये लोग हिंदू नहीं हैं, हिंदुओं के वेष में गुंडे हैं। इनकी पार्टी लुच्चे, लफ़ंगे, गुंडों की फ़ौज है। इनसे देश और हिंदू धर्म दोनों को बचाना हर भारतवासी का फ़र्ज़ है

    एक अन्य ट्वीट में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह वीडियो देखिए. हमारे किस ग्रंथ लिखा है कि मुलमानों को मारे. गीता में, रामायण में या हनुमान चालीसा में? यह लोग हिंदू नहीं हैं, हिंदुओं के वेश में गुंडे हैं. इनकी पार्टी लुच्चे, लफंगे, गुंडों की फौज है. इनसे देश और हिंदू धर्म दोनों को बचाना हर भारत वासी का फर्ज है.
    दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक के बाद एक कई ट्वीट को रीट्वीट किया है. मनीष सिसोदिया ने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘अब चौकीदार के कहने पर पुलिस उस आदमी को पकड़ कर थाने में बंद करेगी जिसने इस घटना का वीडियो. इसलिए अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि अगर ये चौकीदार दोबारा जीत गया तो हर घर में यही हाल होगा.’

    घटना जातिगत हो या कोई और वजह से …इतनी दरिंदगी देखकर भी इंसानियत नही जागी.. बल्कि सवाल पूछने वालों से ही सवाल.
    हद है कुछ कथित पत्रकारों की गोदी-मीडिया भक्ति। और शर्मनाक भी।

    वीडियो का सच जानना जरूरी। पुलिस को पड़ताल करके तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। आखिर घटना क्या थी और ये जातिगत मामला सोशल मीडिया पर बना वास्तव में मामला जातिगत ही था। अगर मामला जातिगत नहीं तो इस रूप में सोशल मीडिया पर पेश करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहीए

    दरअसल, गुरुग्राम के भोंडसी के भूपनगर इलाके में होली के दिन शाम साढ़े 5 बजे के करीब दो पक्षों में विवाद हुआ जिसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई. वीडियो में साफ जाहिर है कि एक पक्ष लाठी डंडों के साथ घर में घुस गया और घरवालों की पिटाई शुरू कर दी. वीडियो में घर की महिलाएं जान बचाकर छत पर भागती नजर आ रही हैं. कुछ महिलाओं ने छत का दरवाजा बंद कर खुद को बचाया. लेकिन इस दौरान इन दौरान नीचे की मंजिल पर परिवार के कुछ सदस्यों को दबंग बेरहमी से पीटते नजर आए.

    वीडियो में एक बुजुर्ग महिला परिवार वालों को बचाने की कोशिश करती नजर आ रही है. मौके पर 30 से 35 दबंग मुस्लिम परिवार को पीटते नजर आ रहे हैं. पुलिस ने धारा 307, 452, 427, 506 के तहत कई युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर की मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है. पुलिस ने बताया कि क्रिकेट खेलने को लेकर हुआ मामूली विवाद हुआ था. इस मामले में 7 से 8 अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी गई थी. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार युवक से पूछताछ की जा रही है इसी के आधार पर भी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होगी. पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार युवक ने वारदात में शामिल दूसरे आरोपियों के नाम बताए हैं. पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची है, लेकिन अगर इस सिलसिले में किसी तरह की लापरवाही पाई जाती है तो एक्शन लिया जाएगा. पुलिस ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए इलाके में पुलिस तैनात कर दिया गया है.

  • गुरुग्राम घटना के लिए भीड़ की हिंसा की बढ़ती संस्कृति जिम्मेदार:एनसीएचआरओ

    _सरकार जल्द सभी हमलावरों को गिरफ्तार कर कठोर कार्यवाही करे : अमित श्रीवास्तव_

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्लीःमानवाधिकार संगठन नेशनल कन्फेडरशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशंस (एनसीएचआरओ) की दिल्ली ईकाई ने गुरुग्राम घटना के लिए भीड़ के ज़रिये हिंसा की बढ़ती संस्कृति को जिम्मेदार ठहराया है। ईकाई के अध्यक्ष एडवोकेट अमित श्रीवास्तव ने कहा की ये हमला धर्म की बुनियाद पर किया गया है उन्होंने कहा की जिस तरह से मुस्लिम समुदाय को कहा गया की पाकिस्तान चले जाओ ये कथन साफ़ बताता है की जो नफरत की सियासत पुरे मुल्क में चल रही है उसी के तैयार करदा लोगों ने मुस्लिम परिवार पर हमला किया है साथ ही उन्होंने कहा की ये हमला फासीवादी विचारधारा के फैलने का उदहारण है, फासीवाद के लिए औरतें और बच्चे आसान शिकार होते है। उन्होंने सरकार से घटनाक्रम को गम्भीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सभी हमलावरों को गिरफ्तार करने और कठोर कार्यवाही की मांग की है ।

  • न्यूजीलैंड:मस्जिदों में आतंकी हमले के बाद सरकार ने सभी तरह के हथियारों की बिक्री पर लगाया प्रतिबंध

    क्राइस्टचर्च:न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों में पिछले दिनों हुए कत्लेआम के बाद सरकार ने हथियार नीति में बदलाव किया। गुरुवार को प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने कहा कि न्यूजीलैंड में सभी तरह के सेमी ऑटोमैटिक हथियारों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा सभी असॉल्ट राइफलों की बिक्रीपर रोक होगी। जेसिंडा ने कहा कि इनमें ऐसे हथियार भी फायर आर्म्स भी शामिल हैं, जिन्हें सेमी ऑटोमैटिक हथियारों में बदला जा सकता है।

    क्राइस्टचर्च स्थित अल-नूर और लिनवुड मस्जिद में बीते शुक्रवार (15 मार्च) को हुए हमले में 50 लोगो मारे गए थे। इनमें 8 भारतीय थे। हमलावर ब्रेंटन टैरेंट (28) ने नमाज के दौरान लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस दौरान 50 से ज्यादा लोग जख्मी भी हुए थे। इसमें बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी बाल-बाल बच गए थे। दुनियाभर में हमले की निंदा की गई। आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री आर्डर्न ने गन कानून में बदलाव करने की बात कही थी।

    पहली पेशी में कोर्ट में हंस रहा था टैरेंट

    ऑस्ट्रेलियाई मूल के आरोपी ब्रेंटन को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया था। उसे 5 अप्रैल तक हिरासत में भेजा गया। पहली पेशी में टैरेंट को हथकड़ी लगी हुई थी। इस दौरान वह पूरे समय मुस्कुराता दिखा था। कुछ देर मीडिया की तरफ बनावटी हंसी में उसने सबकुछ ठीक होने का इशारा किया। हत्यारे के बचाव के लिए सरकारी वकील साथ गए थे, लेकिन उसने अपने वकील को हटाकर खुद केस लड़ने का फैसला किया। टैरेंट ने कोर्ट में खुद को फासिस्ट बताया और जमानत के लिए आग्रह भी नहीं किया।


    कोर्ट में हमलावर ब्रेंटन टैरेंट।

  • आम चुनाव लोकतंत्र और सेक्यूलरिज्म पर यकीन ना रखने वालों के खिलाफ मुल्क गैर सतह की नुमाइंदह व्यक्तियों पर मुसतमिल काउंसिल का सियासी मशावरती इजलास

    (प्रेस रिलीज़,नई दिल्ली,16 मार्च 2019)
    देश में सेकुलरिज्म लोकतंत्र सत्ता रवादारी फिरका वराना हम अहंगी मजहबी व मअआशरती मसावात की बकां और इसके सुरक्षा के लिए आम चुनाव मुल्क के 135 करोड़ जनता के लिए एक ऐसी जंग है जिस के ताल्लुक से तमाम इंसाफ पसंदो और लोकतंत्र एकतेदार पर यकीन रखने वालों को एक होकर काम करना होगा हर सतह पर इसके लिए जद्दोजहद की जाएगी और लोगों को जमीनी सच्चाइयों से वाकिफ कराना होगा इस जमन में मिल्ली काउंसिल ने तमाम राज्यों के सरबराह और आलमा एकराम दानिश्वर,सियसी शऊर रखने वालों और कौंसिल के नुमाइंदा अरकान के साथ अलग अलग मुद्दो पर बहस किया गया और चुनाव के सिलसिले में जरूरी तजावेज मंजूर की- तमाम उमूर पर फैसला भी हुए

    वजह रहे है कि मिली काउंसिल का मजकोरा इजलास आई ओ एस के कांफ्रेंस हॉल में हुआ जिसकी सदारत कौंसिल के कौमी सदर हज़रत मौलाना हकीम मोहम्मद अब्दुल्ला ने किया, सदर कौंसिल ने अपने भाषण मे कहा की माजी करीब और मौजूदा खतरा और मुस्तकबिल के अंदेशों के पेश नजर कौंसिल ने पुरी हिकमत अमली के साथ यह इजलास रखा है ताकी मुस्तकबिल के लिए हम एक लाहिय अम्ल तय कर सके-यकिनन इसके लिए गैर मामूली जद्दोजहद की दरकार है हमे अच्छी सोच का मजाहिरा भी करना है इंशाअल्लाह हम मसतरका कोशिशों को आगे बढ़ाएंगे तो कामयाबी हमें यकीनन मिलेगी

    आल इंडिया मिली काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम ने अपने शुरूआती और अंतिम भाषण मे वोटों की ताकत के हवाले से कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा पोलिंग करानी है और मनुवाद ने जिस तरह से जिस तरह सर उठाया है और मनुस्मृति को जिस तरह मुल्क में नाफिज किए जाने की खुली जद्दोजेहद जारी है हम अपने नाखून तदबीर से इन्हें शिकस्त देने के लिए तैयार हैं इस मौके पर कौंसिल ने मुख्तलिफ जमातो से अपने तैयार करदा मंसुर मुतालबात इजलास में पेश किया जिसे सरका ने मुतफका तौर पर मंजूरी दी इजलास में डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम के मजामीन का मजमुआ (अंदेशे जो सच साबित हुए) का इजरा भी अमल में आया

    सरका इजलास का इस्तेमाई टापिक यही था कि हमें अपने वोट फिसद बढ़ाने पर खाश ध्यान देना है और मजीद पेश रफ्त के लिए मुस्तकबिल साज अमूर अंजाम देना है , मिली कौंसिल के इस मरकजी सियासी मशावरती इजलास में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च मस्जिद पर जिस तरह आतंकी हमला हुआ और 49 नमाजियों को जिस तरह सहिद कर दिया काउंसिल ने इस आतंकी हमले पर अपने गहरे रंज व गम का इजहार किया नीज सभी शहीद के लिए बुलंदी दरजात की दुआएं की

    इजलास में सदर व जनरल सेक्रेटरी के अलावा मौलाना यासीन अली उस्मानी उपाध्यक्ष कौंसिल ,मौलाना सैयद मुस्तफा रिफाई नदवी असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी काउंसिल ,एस एम अब्दुल रहीम चेन्नई,मुनीर अहमद खान इंदौर, मुशर्रफ हुसैन अब्दुल कयूम ,अख्तर एडवोकेट ,सैयद मुजाहिद अली, एडवोकेट जनाब अब्दुल लतीफ, मौलाना मोहम्मद गुलजार कासमी, प्रोफेसर हशीना हाशिया नई दिल्ली, कारी मजहर नदवी,काजी अबु रेहान फारूकी इंदौर, मुफ्ती सईद असद हाशमी आसनसोल, इस्माइल नदी कोलकाता, मुफ्ती रिजवान कासमी तारापुरी ,अब्दुल हाफिज अहमदाबाद, सय्यद अली मुंबई ,इनाम उद्दीन अहमद, अनवर सिद्दीकी मलेरकोटला,, कारी जिशान कादरी पानीपत, डॉक्टर जहीर अहमद खान बुलंदशहर,, डॉ परवेज मियां, साहब उद्दीन अहमद गुवाहाटी ,निजामुद्दीन शेख सोलापुर, मुफ्ती बाकीर अरशद कासमी, सैयद शाहिद अहमद ,आसिफ शेख, अफरोज सलमान खान बेंगलुरु,, अब्दुल मालिक माई सहारनपुर ,मोहम्मद उमर गौतम ,अशफाक अहमद सिद्दीकी, मौलाना डॉक्टर एजाज अहमद दरभंगा,, मोहम्मद हसन गोरी जोधपुर, मौलाना तारिक शफीक नदवी समेत अन्य गणमान्य लोग व आलमा ए एकराम ने भाग लिया

  • मुस्लिमों के खिलाफ बयान देने वाले ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पर अंडे से हमला

    न्यूजीलैंड के क्राइंस्टचर्च पर नृशंस हमले को लेकर विवादित बयान देने वाले ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पर एक युवा शख्स ने अंडे से हमला कर दिया. ऑस्ट्रेलिया के विवादित सीनेटर फ्रेजर एनिंग मेलबर्न में पत्रकारों से बात कर रहे थे तभी ये वाकया हुआ.

    ये पूरी घटना पत्रकारों के कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. इस घटना का वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया है. इस वीडियो में एनिंग पत्रकारों से बात करते दिख रहे हैं. तभी एक युवा शख्स पीछे से आता है और सीनेटर के सर पर अंडा पटक देता है. गुस्साये एनिंग तुरंत पीछे मुड़ते हैं और इस शख्स को घूसा मारने लगे. तभी वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ा इसके बाद उन्होंने इस शख्स को छोड़ा.

    बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई के क्वींसलैंड से सीनेटर फ्रेजर एनिंग ने कहा था कि न्यूजीलैंड में प्रवासियों की बढ़ोतरी इस हमले के कारणों में से एक है. उन्होंने शुक्रवार को कहा था, “न्यूजीलैंड की गलियों में खून खराबे का असली कारण इमीग्रेशन प्रोग्राम है, जिसकी वजह से कट्टरपंथी मुस्लिमों को न्यूजीलैंड में आने का मौका मिला.”
    https://twitter.com/Henry_Belot/status/1106790914414919681?s=19

    सीनेटर फ्रेजर एनिंग के इस हमले की दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने एनिंग के बयान ‘कुरुप’ और ‘खेदजनक’ बताया. उन्होंने कहा कि उनके बयान का ऑस्ट्रेलिया में कोई महत्व नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने कहा, “सीनेटर फ्रेजर एनिंग द्वारा इस हिंसक, दक्षिणपंथी और आतंकी हमले के लिए इमीग्रेशन प्रोग्राम पर आरोप लगाया दुर्भाग्यपूर्ण है, इन विचारों को ऑस्ट्रेलिया में कोई जगह नहीं है, ऑस्ट्रेलियाई संसद की बात तो छोड़ ही दीजिए.”

    बता दें कि शुक्रवार को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए इस आतंकी हमले में ब्रेंटन टैरेंट नाम के एक ऑस्ट्रेलियाई मूल के शख्स ने मस्जिद में नमाज पढ़ रहे मुस्लिमों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थी. इस हमले में अबतक 49 लोगों की मौत हो गई है. मरने वाले में 6 भारतीय मुस्लिम भी शामिल हैं. इनमें 4 गुजरात के रहने वाले हैं, जबकि दो हैदराबाद के रहने वाले हैं.

  • दिल्ली:जुमा की नमाज के निगरानी के लिए बीजेपी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली,दिल्ली बीजेपी ने मांग की है कि चुनाव आयोग मस्जिदों और मुस्लिम बहुल इलाकों में स्पेशल ऑब्जर्वर की नियुक्ति करे ताकि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान मुस्लिम वोटरों को बरगला ना जा सके. दिल्ली बीजेपी ने इसके लिए चुनाव आयोग को एक लंबा चौड़ा पत्र लिखा है और कहा है कि रमजान के दौरान मुस्लिमों को धार्मिक आधार पर मतदान करने के लिए उकसाया जा सकता है, ऐसा ना हो इसके लिए जरूरी है कि चुनाव आयोग पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करे.

    बीजेपी ने पत्र में आरोप लगाया है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पिछले कुछ दिनों से मुस्लिम बहुल इलाकों में भड़काऊ भाषण और आधारहीन बयान दे रहे हैं और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. बीजेपी ने पत्र में कई उदाहरण भी दिए हैं.

    भारतीय जनता पार्टी द्वारा आप विधायक अमानतुल्लाह खान के बयान का भी जिक्र किया गया है. बीजेपी ने कहा है कि उसे इस बात की पर्याप्त आशंका है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी के दूसरे नेता धर्म के नाम पर मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.

    बीजेपी ने आगे पत्र में लिखा है कि कई बार ऐसे भाषण मस्जिदों में और आसपास दिए जाते हैं जहां अल्पसंख्यक समाज के मासूम लोग शुक्रवार को नमाज पढ़ने के लिए जमा होते हैं. यहां पर ये लोग नेताओं की नफरत की राजनीति का आसानी से शिकार बन जाते हैं. बीजेपी के मुताबिक रमजान के पवित्र महीने में इसकी बेहद आशंका है कि मुसलमानों को भड़काने के लिए धर्म की राजनीति का इस्तेमाल किया जाए.

    बीजेपी ने चुनाव को जानकारी दी है कि ये भाषण इन पवित्र स्थानों पर पर्दे के पीछे होते हैं इसलिए प्रशासन की नजर में नहीं आते हैं. भाजपा ने आगे कहा है कि इसलिए चुनाव आयोग से उनकी अपील है कि मुस्लिम बहुत इलाकों में स्थित मस्जिदों के लिए स्पेशल ऑब्जर्वर नियुक्त किया जाए ताकि राजनीतिक और धार्मिक नेता लोगों के बीच नफरत नहीं फैला सकें और मतदाताओं को धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं कर सकें. इससे आदर्श आचार संहिता का भी उल्लंघन नहीं होगा. बीजेपी ने कहा है कि अगर कोई शख्स आचार संहिता का उल्लंघन करता है कि पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे.