Category: मुस्लिम दुनिया

  • पटना:मदरसों को लेकर नीतीश सरकार ने लिया एक बड़ा फैसला!

    मिल्लत टाइम्स,पटना:नीतीश सरकार ने मदरसों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। बिहार सरकार ने फैसला किया है कि अपने पैसों से मदरसों के लिए भवन का निर्माण कराएगी। इस योजना को लेकर पहले चरण में नालंदा, औरंगाबाद और दरभंगा में कुछ मदरसों का निर्माण कराया जाएगा।
    नीतीश सरकार की तरफ से मदरसों के भवन निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। इस बैठक की अध्यक्षता अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुख्य प्रधान सचिव आमिर सुहानी ने की। इस बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के डायरेक्टर एसआइ फैसल, मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अब्दुल क्यूम अंसारी, भवन निर्माण और लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारी भी उपस्थित रहे।

    वहीं मदरसा सुदृढ़ीकरण योजना के अंतर्गत सरकार ने दूसरे चरण के लिए पचास करोड़ रुपए देने की बात कही है। बता दें राज्य में दो हजार से अधिक मदरसे हैं। सरकार ने इस बात को स्वीकार भी किया है कि मदरसों के पास अच्छे भवन नहीं हैं। अधिकतर मदरसे जर्जर हैं। वहां लैब और पुस्तकालय आदि के प्रबंध के लिए कमरे नहीं हैं। इसी को देखते हुए ऐसा फैसला किया गया है।

    सरकार की इस योजना के अंतर्गत मदरसों के सुदृढ़ीकरण के तहत छात्रावास, क्लास रूम, पुस्तकालय, लैब और बिजली-पानी के संसाधन का निर्माण सरकार कराएगी। इसके निर्माण के लिए प्रस्ताव मदरसों को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तरफ से भेजने होंगे।
    वहीं इस प्रस्ताव में पहले मदरसा समिति को अपनी जमीन होने और अविवादित होने का प्रमाणपत्र देना होगा। इससे पहले अब तक मदरसा भवन निर्माण उसकी समितियां ही करती थीं।

  • ईद:धूम धाम से पुरे हिंदुस्तान मे मनाई गई ईद,पीएम मोदी समेत कई हस्तियों ने दी बधाई

    मिल्लत टाइम्स,कई देशों के मुसलमानों ने आज ईद उल अजहा (बकरा-ईद) का त्योहार मनाया। इस्लाम में इस त्योहार को कुर्बानी के पर्व के रूप में जाना जाता है। देशभर में इस त्योहार को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस मौके पर मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोगों ने मस्जिदों और ईदगाह पर जाकर विशेष नमाज पढ़ी और गले लगकर एक-दूसरे को बधाई दी।

    अनुच्छेद 370 हटने के बाद के हालातों में जम्मू-कश्मीर में भी इस त्योहार को लेकर उत्साह देखा गया और वहां कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच लोग घर से बाहर निकले और मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ी। देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत देश की अन्य हस्तियों ने कुर्बानी के इस त्योहार पर लोगों को बधाई दी है। लोगों को बधाई देते हुए पीएम मोदी ने लिखा, ‘ईद उल अजहा पर मेरी ओर से शुभकामनाएं। मुझे उम्मीद है कि इससे समाज में शांति और खुशहाली की भावना बढ़ेगी। ईद मुबारक।’


  • ट्रिपल तलाक़ बिल के खिलाफ कोटा मे होगा विशाल रैली

    प्रेस विज्ञप्ति:कोटा 8 अगस्त, केंद्र सरकार द्वारा देश के संविधान के विपरीत शरीयत क़ानून के खिलाफ ट्रिपल तलाक़ क़ानून के नाम पर जो क़ानून बनाया है उसका सभी आम मुसलमानों सहित, अमन पसंद संविधान पर भरोसा रखने वाले विरोध करते है। कोटा के अमन पसंद लोग केंद्र सरकार के इस क़ानून के खिलाफ शनीवार 10 तारीख़ को विशाल मौन जुलुस निकालकर इसका विरोध करेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने आज एक पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया की आगामी 10 अगस्त शनिवार को सुबह 10 बजे अमन पसंद आम नागरिक, मल्टीपरपज़ स्कूल में इकट्ठे होंगे, जहाँ से सभी लोग एक जुट होकर अनुशासित तरीके से मौन जुलुस के रूप में गुमानपुरा, केनाल रोड, गीताभवन, सरोवर टाकिज़, लक्की बुर्ज, अग्रसेन चैराहा, नयापुरा थाने से होकर केक्ट्रेट पहुंचेंगे। जहाँ महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम ट्रिपल तलाक़ क़ानून को वापस लेने व पुनर्समीक्षा की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने पत्रकारों को बताया के इस मामले में सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है, सभी अमन पसंद समाज के लोगों से इस जुलुस में शांतिपूर्ण तरीके से सफ़ेद लिबास में अनुशासित तरीके से शामिल होने की अपील की गयी है। सभी समाजों के अध्यक्ष, ज़िले के सभी मस्जिदों के इमाम, आलिमों, सहित ज़िम्मेदार लोगों से इस मामले में अपील की गयी है। सभी वोलेन्टियर की बैठक कर उन्हें टेªफिक, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था एवं पानी की उचित व्यवस्था के लिये और जुलूस को अनुशासित तरीके से निकालने की ज़िम्मेदारियाँ दी गयी है, जो व्यवस्थित तरीके से अपने काम में जुटे रहेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने बताया के भारत देश का एक संविधान है, इस संविधान से भारत का हर नागरिक, हुकूमत, मंत्री सभी बंधे हुए है और प्रचलित संविधान की भावना के अनुरूप ही देश में व्यवस्थाएं है, जबकि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने सामाजिक रीति रिवाजों में अपने निजी मज़हबी क़ायदे क़ानून की पलना करने का खुला अधिकार है। इसके बावजूद भी संविधान की इस मूल भावना को ताक में रखकर एक वर्ग को टारगेट बनाकर, बार बार लोकसभा, राज्यसभा में इस क़ानून को पेश किया गया। दो बार यह क़ानून राज्यसभा में हारा, फिर भी केंद्र सरकार में बैठे कुछ ज़िम्मेदारों ने हठधर्मिता दिखाते हुए इस क़ानून को पारित कराने की ज़िद में राज्य सभा में जो खेल खेला है उसे देश ने देखा है।

    कोटा 8 अगस्त, केंद्र सरकार द्वारा देश के संविधान के विपरीत शरीयत क़ानून के खिलाफ ट्रिपल तलाक़ क़ानून के नाम पर जो क़ानून बनाया है उसका सभी आम मुसलमानों सहित, अमन पसंद संविधान पर भरोसा रखने वाले विरोध करते है। कोटा के अमन पसंद लोग केंद्र सरकार के इस क़ानून के खिलाफ शनीवार 10 तारीख़ को विशाल मौन जुलुस निकालकर इसका विरोध करेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने आज एक पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया की आगामी 10 अगस्त शनिवार को सुबह 10 बजे अमन पसंद आम नागरिक, मल्टीपरपज़ स्कूल में इकट्ठे होंगे, जहाँ से सभी लोग एक जुट होकर अनुशासित तरीके से मौन जुलुस के रूप में गुमानपुरा, केनाल रोड, गीताभवन, सरोवर टाकिज़, लक्की बुर्ज, अग्रसेन चैराहा, नयापुरा थाने से होकर केक्ट्रेट पहुंचेंगे। जहाँ महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम ट्रिपल तलाक़ क़ानून को वापस लेने व पुनर्समीक्षा की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने पत्रकारों को बताया के इस मामले में सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है, सभी अमन पसंद समाज के लोगों से इस जुलुस में शांतिपूर्ण तरीके से सफ़ेद लिबास में अनुशासित तरीके से शामिल होने की अपील की गयी है। सभी समाजों के अध्यक्ष, ज़िले के सभी मस्जिदों के इमाम, आलिमों, सहित ज़िम्मेदार लोगों से इस मामले में अपील की गयी है। सभी वोलेन्टियर की बैठक कर उन्हें टेªफिक, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था एवं पानी की उचित व्यवस्था के लिये और जुलूस को अनुशासित तरीके से निकालने की ज़िम्मेदारियाँ दी गयी है, जो व्यवस्थित तरीके से अपने काम में जुटे रहेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने बताया के भारत देश का एक संविधान है, इस संविधान से भारत का हर नागरिक, हुकूमत, मंत्री सभी बंधे हुए है और प्रचलित संविधान की भावना के अनुरूप ही देश में व्यवस्थाएं है, जबकि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने सामाजिक रीति रिवाजों में अपने निजी मज़हबी क़ायदे क़ानून की पलना करने का खुला अधिकार है। इसके बावजूद भी संविधान की इस मूल भावना को ताक में रखकर एक वर्ग को टारगेट बनाकर, बार बार लोकसभा, राज्यसभा में इस क़ानून को पेश किया गया। दो बार यह क़ानून राज्यसभा में हारा, फिर भी केंद्र सरकार में बैठे कुछ ज़िम्मेदारों ने हठधर्मिता दिखाते हुए इस क़ानून को पारित कराने की ज़िद में राज्य सभा में जो खेल खेला है उसे देश ने देखा है।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने कहा, सभी समाजों, सभी धर्मों को अपनी आज़ादी का हक़ इस देश के क़ानून इस देश के संविधान ने दिया हैं लेकिन इस बार तो हदे पार हो गयी, एक क़ानून को लाने के लिए बार बार मशक़्क़त की गई। जिससे किसी को भी फायदा नहीं। क़ाज़ी ए शहर कोटा ने साफ़ किया शरीअ़त में शादी, ब्याह का एक मुकम्मल क़ानून है। इसमें दो पक्षों के बीच में शादी एक काॅन्ट्रेक्ट है और शरीअ़त में तलाक़ का भी एक इस्लामिक तरीक़ा है। इसलिये इस ट्रिपल तलाक़ कानून का सभी विरोध करते आये है, यह तलाक़ अपने आप में सुप्रीमकोर्ट में भी अवैध घोषित हुआ है। क़ाज़ी ए शहर कोटा अनवार अहमद ने कहा, एक शौहर को अगर जेल हुई तो वह अपनी बीवी को खर्च कहाँ से देगा, इससे उसके परिवार व बच्चों की स्थिति खराब होगी। शौहर जिसको की पत्नि ने जेल भिजवा दिया, फिर वही शोहर उस बीवी को क्यों रखेगा? जबकि ट्रिपल तलाक़ अगर होती है तो फिर बीवी अपने शोहर से कोई ताल्लुक़ रख भी नहीं सकती, ऐसे में यह क़ानून मज़हबी आजादी में दख़लअंदाजी है। महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार है। उनके भविष्य को बर्बाद करने वाला है। इसलिये ट्रिपल तलाक़ के नाम पर इस काले कानून को वापस लेने की मांग व इसकी पुनर्समीक्षा कर इस क़ानून को वापस लेने का निर्देश देने के लिए राष्ट्रपति महोदय को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जायेगा|

  • मैं बांटूंगा क़ुरआन की प्रतियां,क्या आप मुझसे नफरत करेंगे?

    रांची की अदालत में एक छात्रा का मामला आया। आरोप था कि उसने फेसबुक पर इस्लाम के बारे में ऐसी बात पोस्ट की जो नहीं करनी चाहिए थी। जज साहब ने छात्रा को इस शर्त के साथ जमानत दी कि वह पवित्र क़ुरआन की पांच प्रतियां दान करे। इस एक निर्देश से रांची के कई वकील नाराज हो गए। सोशल मीडिया में जज के खिलाफ अभियान शुरू हो गया और टीवी चैनलों पर चीख-चीखकर बहस होने लगी।

    मुझे अदालत के इस निर्देश में ऐसा कुछ नहीं लगता जिस पर आपत्ति जताई जाए। मेरा मानना है कि जज साहब की मंशा यह रही होगी कि लड़की ने इस्लाम के बारे में गलत लिखा है। अगर वह क़ुरआन की पांच प्रतियां दान करेगी तो इससे उसके आचरण में अच्छा बदलाव आएगा। हो सकता है कि कुछ पन्ने पढ़ने से उसे यह भी समझ में आ जाए कि इस्लाम वह नहीं है जो वॉट्सअप और फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट की शक्ल में लोग बिना सोचे-समझे शेयर कर रहे हैं।

    लेकिन देशभर में कुछ लोगों ने इस आदेश पर जिस ढंग से प्रतिक्रिया दी, उस पर मुझे बहुत अफसोस हुआ। जज ने यह नहीं कहा कि छात्रा इस्लाम कबूल कर ले। क्या हो जाता अगर वह क़ुरआन की पांच प्रतियां बांट देती? मेरे विचार में इससे समाज में अच्छा संदेश जाता, लेकिन कुछ लोगों ने इसे भी नफरत के चश्मे से ही देखा। ताज्जुब होता है कि इनमें उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं!

    अक्सर सुनते हैं कि हम विश्वगुरु थे और हमें फिर से विश्वगुरु बनना है। हे महान लोगो, आप एक किताब की पांच कॉपियों से इस कदर भड़क गए, तो कैसे विश्वगुरु बनोगे? विश्वगुरु बाद में बनते रहना, पहले अपना दिल बड़ा करो।

    इस देश की न्यायपालिका को मैं कोई सुझाव नहीं दे सकता और न ही मेरी ऐसी योग्यता है, लेकिन बतौर एक आम नागरिक जब मैं सोशल मीडिया पर किसी भी धर्म के खिलाफ अभद्र बातें देखता हूं तो तकलीफ होती है। देश की अदालतों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि सोशल मीडिया पर जब भी कोई शख्स किसी धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें लिखे तो उसे उसी धर्म के प्रार्थनास्थल पर कुछ माह तक सेवा करने और झाड़ू लगाने का हुक्म दे। मैं समझता हूं कि इससे उस शख्स का अहंकार दूर होगा और मन में छिपी नफरत काफी हद तक कम होगी।

    रही बात क़ुरआन की पांच प्रतियां बांटने की.. वो मैं बांटूंगा। जिसे मेरा विरोध करना है, खूब करे। जिसे जाति से मेरा बहिष्कार करना है, वो आज और अभी कर दे। यह देश किसी एक जाति, समुदाय, पंथ और विचारधारा का नहीं, हम सब भारतवासियों का है। यहां आरती भी होगी और अज़ान भी, शब्द कीर्तन भी और प्रार्थना भी।

    .. जय हिंद, जय संविधान ..

    – राजीव शर्मा – (कोलसिया)

    https://www.facebook.com/writerrajeevsharma/

  • यूपी:बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मदरसे के छात्रों को बनाया निशाना,जय श्री राम न बोलने पर पीटा

    मिल्लत टाइम्स,लखनऊ:यूपी में भीड़ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि बदमाशों को कानून का कोई डर नहीं है। और कुछ घटनाएं ऐसी भी पेश आए जहां पुलिस मूकदर्शक बनी रही और गुंडे कानून की धज्जियां उड़ाते रहे। यूपी के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों राज्य में कानून का राज बताते हैं लेकिन यहाँ तो भीड़ हिंसा की जैसे बाढ़ आ गई हे.ताज़ह घटना उन्नाव का है जहां एक मदरसे के बच्चों को जय श्री राम के नारे लगाने पर मजबूर किया गया। जब बच्चों ने नारे लगाने से इनकार किया तो उनके साथ मारपीट की गई.बचों के कपड़े फाड़दए गए और उनकी साइकिल तोड़ दी गईं।

    मस्जिद के इमाम का आरोप है कि इस मामले में हिंदू चरमपंथी संगठन बजरंग दल का हाथ है। आरोपियों की पहचान फेसबुक अकाउंट के माध्यम से किया गया हे. फेसबुक पर भी आरोपियों ने खुद को बजरंग दल का सदस्य बताया है। समाचार के अनुसार 12.13 साल के कुछ बच्चे ग्राउंड में खेल रहे थे। तभी वहां आए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बच्चों से जय श्री राम के नारे लगाने को कहा। मना करने पर बच्चों को क्रिकेट के बल्ले से पीटा गया। इस पूरे मामले में अब पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच कर रही है।

  • Air India ने हज यात्रियों से मांगी माफी,जमजम पानी की कैन लाने की दी इजाजत

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:एयर इंडिया की एआई966 (जेद्दाह-हैदराबाद-मुबंई) और एआई964 (जेद्दाह-कोचीन) उड़ानों में हज यात्रियों को पवित्र जमजम पानी की कैन लाने की इजाजत दे दी गई है। यात्री इजाजत योग्य सामान के साथ यह कैन ला सकते हैं। इसके लिए 5 किलो का स्पेशलअलाउंस मिलेगा, इसे बैगेज अलाउंस में नहीं बदला जाएगा। एयरलाइन ने मंगलवार को ट्विटर पर यह जानकारी दी।

    जमजम पानी की कैन लाने पर पूर्व में रोक की वजह से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए एयर इंडिया ने माफी भी मांगी है। हज यात्री मक्का की मस्जिद अल-हरम के जमजम कुएं से पानी लेकर आते हैं।

    न्यूज एजेंसी के मुताबिक एयर इंडिया के जेद्दाह ऑफिस की ओर से 4 जुलाई को सभी ट्रैवल एजेंट्स के लिए निर्देश दिए गए थे कि एआई966 और एआई964 उड़ानों में 15 सितंबर तक जमजम कैन लाने की इजाजत नहीं होगी। एयरलाइन ने सुरक्षा के लिहाज से इन संकरे विमानों में जमजम कैन लाने पर रोक लगाई थी।

  • ज्ञान की संपत्ति को दारुल उलूम देवबंद ने ही संभाल रखा है: मेजर जनरल सुभाष शरण

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:एशिया के सबसे बड़े दीनी मदरसे और अपनी शिक्षा के लिए दुनियाभर में खास पहचान रखने वाले दारुल उलूम देवबन्द में भारतीय सेना में भर्ती प्रमुख मेजर जनरल सुभाष शरण ने दारुल उलूम पहुँचे जहां मोहतमिम मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाक़ात हुई ।

    मुफ़्ती अबुल कासिम बनारसी ने मेजर जर्नल का स्वागत करते हुए उन्हें दारुल उलूम देवबंद की शिक्षा प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी,इस अवसर पर कई और बड़े सेना के ज़िम्मेदार भी मौजूद रहे जिनमें मेरठ ज़ोन के कर्नल कुलदीप का भी स्वागत किया गया,इस दौरान मेजर जर्नल की तरफ से दारुल उलूम के मोहमतिम सेना की तरफ से सम्मान चिन्ह भेंट किया है।

    मेजर जर्नल सुभाष शरण ने दारूल उलूम के मोहतमिम से कहा कि आपके यहाँ पढ़ने वाले छात्रों को सेना में इमाम और मोअज़्ज़िन की पद पर भर्ती करवाएं,जो कि सेना में बड़े ही प्रतिष्ठित पद होते हैं,दारूल उलूम के छात्र इस पद पर भर्ती होकर देश और सेना की सेवा कर सकते हैं।

    मेजर जर्नल सुभाष शरण ने दारुल उलूम देवबंद की दुनियाभर में लोकप्रियता की प्रशंसा की और पूछा कि संस्था के 150 वर्षों के इतिहास में कैसे बदलाव आया है। इस सवाल पर, महात्मा मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि धर्म नहीं बदलता है, लेकिन समाज में बहुत बदलाव आया है। बाद में, मेजर जनरल ने संस्था के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया, और प्रसिद्ध मस्जिद रशीद और दारुल उलूम के पुराने और प्रसिद्ध पुस्तकालयों का विस्तार किया।

  • छत्तीसगढ़ मे एकता की मिसाल:ईद से पहले गुरुद्वारे में‌ की गई इफ्तारी,और पढ़ी गई नमाज

    मिल्लत टाइम्स,दुर्ग:एक ओर जहां हिंदू-मुस्लिम के नाम पर दुनिया में लोगों को लड़ाने का काम किया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग में सिख समुदाय ने एकता और अखंडता की मिसाल पेश की है। सेवाईयों के मीठे स्वाद की तरह मुस्लिम समुदाय के साथ ऐसे गले मिले की उनकी नमाज के लिए गुरुद्वारे के दरवाजे खोल दिए। ईद से एक दिन पहले मंगलवार शाम को गुरुद्वारे में रोजा इफ्तार कार्यक्रम रखा गया, इसके साथ ही मुस्लिम भाइयों ने वहां नमाज भी अता की।

    सिख समुदाय के साथ रहा है मुस्लिमों को पुराना नाता
    दरअसल, गुरुद्वारा गुरुसिंघ सभा की ओर से अनूठी शुरुआत की गई। सिख समाज की ओर से गुरुद्वारे में रखे गए रोजा इफ्तार कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के प्रमुख लोगों ने शामिल होकर रोजा खोला। मुस्लिम समाज ने जहां इसके लिए सिख समुदाय को धन्यवाद दिया और आगे भी इस प्रयास को कायम रखने की बात कही, वहीं सिख समाज का कहना है कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है और यहां सभी एक दूसरे का त्योहार खुशी पूर्वक मनाते हैं। दुर्ग में एकता की मिसाल पेश करने के लिए ये आयोजन किया गया था।

    गुरु सिंघ सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि गुरुनानक देव महाराज के साथ दो सेवादार भाई बालाजी और मर्दाना जी इस्लाम धर्म को मानते थे। फिर भी वे हमेशा गुरुनानक देव के साथ रहते थे। गुरुद्वारा हरमिंदर साहिब की नींव भी सूफी संत मियां मीर ने रखी थी। इस भाइचारे के संदेश को समाज आगे बढ़ा रहा है। कार्यक्रम में गुरु सिंघ सभा के महासचिव अरविंदर सिंह खुराना, अध्यक्ष तरसेम सिंग ढिल्लन ने कहा कि इससे दोनों समाजों के बीच आपसी प्रेम, सद्भावना और भाइचारे की भावना बढ़ेगी।

  • ईद मुबारक:आज धूम-धाम से मनाया गया ईद,जरूरतमंदों की मदद और सद्भाव का पैगाम देता है ये त्योहार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:आज भारत समेत दुनिया के कई देशों में मनाया गया ईद,कल ईद का चांद निकलने के बाद लोगों मे ईद की खुशी की लहर दौड़ गई थी ईद-उल-फितरको मीठी ईद के रूप में भी जाना जाता है। हिज़री कैलेंडर के अनुसार दसवें महीने यानी शव्वाल के पहले दिन ये त्योहार दुनिया भर में मनाया जाता है। इस्लामी कैलेंडर में ये महीना चांद देखने के साथ शुरू होता है। जब तक चांद नहीं दिखे तब तक रमजान का महीना खत्म नहीं माना जाता। इस तरह रमजान के आखिरी दिन चांद दिख जाने पर अगले दिन ईद मनाई जाती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन हजरत मुहम्मद मक्का शहर से मदीना के लिए निकले थे।

    क्यों मनाई जाती है ईद

    मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ। माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी।इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप में मनाया जाता है| इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत 2 यानी 624 ईस्वी में पहली बार (करीब 1400 साल पहले) ईद-उल-फितर मनाया गया था। पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बताया है कि उत्सव मनाने के लिए अल्लाह ने कुरान में पहले से ही 2 सबसे पवित्र दिन बताए हैं। जिन्हें ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा कहा गया है। इस प्रकार ईद मनाने की परंपरा अस्तित्व में आई।

    सद्भाव और मदद का पैगाम देता है ये त्योहार

    ईद का त्योहार सबको साथ लेकर चलने का संदेश देता है। ईद पर हर मुसलमान चाहे वो आर्थिक रुप से संपन्न हो या न हो, सभी एकसाथ नमाज पढ़ते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस्लाम में चैरिटी ईद का एक महत्वपूर्ण पहलू है। हर मुसलमान को धन, भोजन और कपड़े के रूप में कुछ न कुछ दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कुरान में ज़कात अल-फ़ित्र को अनिवार्य बताया गया है। जकात यानी दान को हर मुसलमान का फर्ज कहा गया है। ये गरीबों को दिए जाने वाला दान है। परंपरागत रूप से इसे रमजान के अंत में और लोगों को ईद की नमाज पर जाने से पहले दिया जाता है। मुस्लिम अपनी संपत्ति को पवित्र करने के रूप में अपनी सालाना बचत का एक हिस्सा गरीब या जरूरतमंदों को कर के रूप में देते हैं। विश्व के कुछ मुस्लिम देशों में ज़कात स्वैच्छिक है, वहीं अन्य देशों में यह अनिवार्य है।

    परंपराके अनुसार कैसे मनाई जाती है ईद

    ईद की शुरुआत सुबह दिन की पहली नमाज के साथ होती है। जिसे सलात अल-फ़ज़्र भी कहा जाता है। इसके बाद पूरा परिवार कुछ मीठा खाता है। वैसे ईद पर खजूर खाने की परंपरा है। फिर नए कपड़ों में सजकर लोग ईदगाह या एक बड़े खुले स्थान पर जाते हैं, जहां पूरा समुदाय एक साथ ईद की नमाज़ अदा करता है।दुआ के बाद, ईद की एक दुसरे को बधाईयां दी जाती है। उस समय ईद-मुबारक कहा जाता है। ये एक दूसरे के प्यार और आपसी भाईचारे को दर्शाता है।

    ईद-उल-फितर के मौके पर एक खास दावत तैयार की जाती है। जिसमें खासतौर से मीठा खाना शामिल होता है। इसलिए इसे भारत और कुछ दक्षिण एशियाई देशों में मीठी ईद भी कहा जाता है। ईद-उल-फितर पर खासतौर से सेवइयां यानी गेहूं के नूडल्स को दूध के साथ उबालकर बनाया जाता है और इसे सूखे मेवों और फलों के साथ परोसा जाता है।

  • हिंदुस्तान मे दिखा ईद का चांद,कल धूमधाम से मनाई जाएगी ईद

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:ईद का चांद जैसे ही आसमान में दिखा रोजेदारों ने एक दूसरे को बधाई दी. भारत में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को बधाइयां दी और देश-दुनिया में अमन-चैन की कामना की. इसी के साथ ही लगभग महीने भर से चल रहा रमजान का महीना खत्म हो गया.

    भारत में ईद का चांद दिख गया है. इसी के साथ ही बुधवार 5 जून को देशभर में ईद मनाई जाएगी.पटना से इमारत ए शरीया समेत देश के कई अन्य मुस्लिम संस्थानों ने ऐलान किया कि कल यानी कि बुधवार को ईद मनाई जाएगी. ईद का चांद जैसे ही आसमान में दिखा रोजेदारों ने एक दूसरे को बधाई दी. भारत में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को बधाइयां दी और देश-दुनिया में अमन-चैन की कामना की. इसी के साथ ही लगभग महीने भर से चल रहा रमजान का महीना खत्म हो गया. इस बार रमजान की शुरुआत 7 मई से हुई थी. रमजान का महीना 30 दिनों तक चलता है. पिछले साल 16 जून में भारत में ईद मनाई गई थी.

    5 जून को भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया में भी ईद मनाई जाएगी. ईद के मौके पर दिल्ली के मशहूर जामा मस्जिद और मीना बाजार में गजब की रौनक देखने को मिल रही है. यहां पर कपड़ों और सेवियों की दुकानें सजाई गई है. ये रौनक मंगलवार रात भर रहेगी. बुधवार सुबह देश के प्रमुख मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़ी जाएगी और लोग गले मिलकर एक दूसरे को ईद की मुबारकवाद देंगे. दिल्ली के अलावा लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद, मुंबई, जयपुर, रांची और पटना में भी धूमधाम से ईद मनाने की तैयारियां चल रही हैं.

    ईद के दिन मुस्लिम परिवार के लोग सेवइयां बनाते हैं, इसके अलावा दूसरे मीठे पकवान बनाए और खाए जाते हैं. लोग अपने से छोटों को ईदी देते हैं.