Category: मुस्लिम दुनिया

  • सऊदी राजकुमार का आया इस एक्ट्रेस पर दिल,दिया सब से बड़ा तोहफा

    रियाद : सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने अपने देश में इतने बदलाव कर दिए हैं कि उसके ढाँचे को बदलकर रख दिया है,इसी कारण से दुनियाभर में मोहम्मद बिन सलमान का नाम एक शक्तिशाली नेताओं में शामिल होता है।

    इन दिनों सऊदी प्रिंस अमेरिकी अभिनेत्री लिंडसे लोहान (Lindsay Lohan) की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस और लिंडसे लोहान के बीच अफेयर चल रहा है।

    प्रिंस (Mohammed bin Salman) अपने प्राइवेट जेट से लिंडसे लोहान (Lindsay Lohan) से मिलने के लिए जाते हैं और उन्हें तोहफे देते हैं. बताया जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने हाल ही में अमेरिकी एक्ट्रेस को गिफ्ट में एक क्रेडिट कार्ड (Credit Card) भी दिया था. हालांकि, लिंडसे के रिप्रेजेंटेटिव ने इन खबरों को बेबुनियाद बताया है।

    उन्होंने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने लिंडसे को कोई क्रेडिट कार्ड नहीं दिया और न ही उनके बीच कुछ ऐसा है. रिप्रेजेंटेटिव ने कहा, ‘एक साल पहले फॉर्मूला वन ग्रैंड प्रिक्स रेस के दौरान दोनों की एक मुलाकात हुई थी.’

    वहीं, लिंडेस लोहान के पिता माइकल लोहान ने कहा कि उनकी बेटी और सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ एक रूहानी और सम्मानजनक रिश्ता है. उन्होंने दोनों के बीच अफेयर की खबरों को खारिज कर दिया.

    माइकल ने कहा, ‘लिंडसे के मध्य पूर्व में बहुत से शक्तिशाली लोग दोस्त हैं, क्योंकि वहां उसकी बड़ी फैन फॉलोइंग है. लिंडसे MBS से कामकाज के सिलसिले में मिली थीं. वह मध्य पूर्व में शरणार्थियों की मदद के लिए काम कर रही है.’ उन्होंने कहा कि कोई इस बारे में नहीं लिखता कि सीरिया में वह क्या अच्छा काम कर रही है. सिर्फ नेगेटिव लिखना चाहते हैं. उनका सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ एक सम्मानजनक रिश्ता है, उससे ज्यादा कुछ नहीं।

  • फ्रांस की एक मस्जिद को जलाने की कोशिश,ताबड़तोड़ फायरिंग से कई लोग घायल

    मास्को :फ्रांस की मस्जिद में फायरिंग से 2 लोग घायल हो गए जबकि पुलिस ने हमलावर व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है।

    फ्रांस के दक्षिण पश्चिमी शहर बे योनि में बाद नमाज़े ज़ोहर यह घटना घटी जहां एक 84 वर्षीय व्यक्ति ने मस्जिद के दरवाजे पर फायरिंग कर दी। इस दौरान मस्जिद से बाहर निकलने वाले दो ऐसे व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए जिनकी उम्र 70 वर्ष बताई जाती हैं, इससे पहले उसने मस्जिद के दरवाजे को जलाने की भी कोशिश की और इस दौरान दो व्यक्तियों बाहर आए तो उस ने उन पर गोलीबारी शुरू करदी।

    हमलावर व्यक्ति मस्जिद के पास रहते थे जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, व्यक्ति ने इससे पहले मस्जिद पार्किंग में खड़ी एक कार पर भी फायरिंग की थी।

  • तीन तलाक में सजा के प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

    तीन तलाक (Triple Talaq) में सजा के प्रावधान के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंचा है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने याचिका दाखिल कर तीन तलाक में सजा के प्रावधान को चुनौती दी है.

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि तलाक-ए-बिद्दत को अपराध बनाना असंवैधानिक है. इससे पहले अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए तीन तलाक कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

    आपको बता दें कि तीन तलाक को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद से ये गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में शामिल हो गया है. ऐसे में आरोपी को सिर्फ मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकता है. इतना ही नहीं पीड़ित महिला के ब्लड रिलेटिव्स भी तीन तलाक के मामले में एफआईआर दर्ज करा सकेंगे. इसी प्रावधान को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

  • ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की सभा का सत्र आज से विजयवाड़ा में शुरू,देशभर से मुख्य प्रतिनिधि हुए उपस्थित

    मिल्लत टाइम्स, विजयवाड़ा: देश की प्रसिद्ध संगठन ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की राष्ट्रीय सभा का तीन दिवसीय सत्र आज से बाद नमाज मगरिब हिंदुस्तान के एतिहासिक शहर विजयवाड़ा में शुरू हो गया है इस सभा में काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्लाह मोगैसी,जनरल सेक्रेटरी डॉ मोहम्मद मंजूर आलम,उप राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना यासीन अली उस्मानी बदायूनी,मौलाना अब्दुल अलीम

    भटकाली,मौलाना अनीस उर रहमान कासमी,मौलाना मुस्तफा रफाई जिलानी,असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी समेत अन्य गणमान्य लोग शिरकत कर रहे हैं,आज बाद नमाज मगरिब ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की मजलिस आमला का खुशुसी इजलास विजयवाड़ा के डी के होटल में शुरू हो गया है कल 19 और 20 नवंबर को सभा का मुख्य इजलाश होगा इसके अलावा इस्लाम और अन्य पारी होगी

    ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अरबाब हल वह देश के मौजूदा हालात को चिंतनिय मामला व चैलेंज और अन्य मुख्य इशू पर गौर करेंगे मजलिस आमला के इजलास का शुरुआत करते हुए काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी डॉ मोहम्मद मंजूर आलम ने कहा कि मौजूदा हालात ने मुसलमानों के दरमियान खौफ और डर समाया हुआ है नौजवानों में मायूसी फैलती जा रही है जिस पर खास ध्यान देने की जरूरत है और अब आप के ख्वाब और मायूसी से कैसे निकाल सकते हैं इस पर खुसूसी तौर पर अमल तय करें और ध्यान दे इसे संकट को शामिल रखें काउंसिल के सदर मौलाना अब्दुल्ला मोगैसी ने कहा कि एक ऐसे समय में जब देश संकट से दो चार है हम यह सभा कर रहे हैं हमें उम्मीद है कि यहां से देश और मिल्लत के लिए कोई अच्छा और बेहतर फैसला होगा उन्होंने कहा कि भूतकाल में ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल ने नुमाया कारनामा अंजाम दिया है और हमेशा मुश्किल वक्त में काम की दुरुस्त रहनुमाई का फ्रेज अंजाम दिया है इंशाअल्लाह आगे भी इजलास ऐतिहासिक और कौम मिल्लत के हक में मुफीद और बा मकसद साबित होगा

  • हिंदुस्तान की तहजीब व इंसानियत की दी जाती है पूरी दुनिया में मिसाल:शेख जमाल

    मक्का मदीना से पहुँचे मेहमानों के इस्तिकबाल में प्रोग्राम आयोजित

    बेहट: क्षेत्र के जामिया रहमत घघरोली में मक्का मदीना से आये महमानों के इस्तकबाल में एक प्रोग्राम का आयोजन किया गया। प्रोग्राम में क्षेत्र व दूर-दराज से भारी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इस मौके पर शेख वलीद सईद ने मगरिब की नमाज भी अदा कराई।

    प्रोग्राम को खिताब करते हुए महमान-ए-खुसुशी शेख जमाल यूसुफ ने लोगो को तालीम के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि हिंदुस्तान की तहजीब देखकर हमें बहुत खुशी हो रही है। जितना सम्मान और प्यार हमें इस मुल्क से मिला है, उतना ओर कही से नही मिला। हम इस पैगाम को जगह-जगह बताएंगे। उन्होंने कहा कि यहां सभी धर्मों के लोग आपस मे मिलजुल कर रहते हैं। यह भी पूरी दुनिया मे एक मिसाल है। साथ ही हिंदुस्तान के सभी लोग अच्छे है। उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें यही सिखाता है कि आपस मे मिलजुल कर रहो और एक दूसरे की हमदर्दी करो। प्रोग्राम को खिताब करते हुए शेख वलीद सईद ने कहा कि इंसानियत को जिंदा रखने की हमें पुरजोर कोशिश करनी चाहिए। प्रोग्राम के आयोजक तथा जामिया प्रबंधक मौलाना डॉ अब्दुल मालिक मुगीसी ने सभी मेहमानों का इस्तिकबाल व शुक्रिया अदा किया।

    साथ मुख्य मेहमानों को मुगीसी अवॉर्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने ने कहा कि हमे भेदभाव भुलाकर मुल्क की भलाई के लिए काम करना चाहिए, क्योंकि इस्लाम भलाई व अपने वतन से मुहब्बत का पैगाम देता है। इस मौके पर मौलाना शमीम अख्तर मदनी, मौलाना निसार, हाजी फजलुर्रहमान, मुफ़्ती राशिद, मोलाना शमशीर कासमी मौलाना अख्तर आदि ने भी संबोधित किया

  • Ayodhya Case : मुस्लिम पक्ष ने कहा-यूपी के मंत्री कह रहे अयोध्या हिंदुओं की, सुप्रीम कोर्ट भी उनका; CJI ने की निंदा

    मुस्लिम योध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले (Ayodhya Case) में 22 वें दिन मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पक्ष रखा. राजीव धवन ने मुख्य मामले की सुनवाई से पहले अपनी कानूनी टीम के क्लर्क को धमकी  दिए जाने की जानकारी कोर्ट को दी और कहा कि ऐसे गैर-अनुकूल माहौल में बहस करना मुश्किल हो गया है. राजीव धवन ने कोर्ट को बताया कि यूपी में एक मंत्री ने कहा है कि अयोध्या हिंदुओं की है, मंदिर उनका है और सुप्रीम कोर्ट भी उनका है. उन्होंने कहा कि ‘मैं अवमानना के बाद अवमानना दायर नहीं कर सकता.’ उन्होंने पहले ही 88 साल के व्यक्ति के खिलाफ अवमानना दायर की है.

    इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के बाहर इस तरह के व्यवहार की निंदा करते हैं. देश में ऐसा नहीं होना चाहिए. हम इस तरह के बयानों की निंदा करते हैं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि दोनों पक्ष बिना किसी डर के अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखने के लिए स्वतंत्र हैं.

    इससे बाद राजीव धवन ने मुख्य मामले पर बहस की शुरुआत की. राजीव धवन ने कहा कि  मुस्लिम लिमिटेशन पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि निर्मोही अखाड़े की लिमिटेशन छह साल होनी चाहिए थी. छह साल की अवधि से बचने के लिए निर्मोही अखाड़ा शेवियेट, बिलांगिंग और कब्जे की दलील दे रहा है, जो कि सही नहीं है, क्योंकि निर्मोही सिर्फ सेवादार है, जमीन के मालिक नहीं हैं.

    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि निर्मोही अखाड़े द्वारा प्रस्तुत वाद के चलाए जाने की योग्यता के बारे में प्रश्न उठाया जा सकता है. धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा किस बात को चुनौती दे रहे थे, वह क्या चाहते थे, लेकिन इस मसले को उठाना मेरे लिए सही नहीं होगा. राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही के मामले में साक्ष्य और गवाही पर्याप्त नहीं हैं. धवन ने कहा कि आप अवैधता के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर सकते और उससे लाभ देने की कोशिश नहीं कर सकते, भले ही आप अवैधता पैदा न करें, फिर भी आप उस पर विश्वास नहीं कर सकते..

    राजीव धवन ने कहा कि ट्रस्टी और सेवादार में अंतर होता है शेवियत मालिक नहीं होता है. जिस दिन से कोर्ट का ऑर्डर आया, यानी 5 जनवरी 1950 को, उस दिन से कंटिनिवस रांग खत्म हो जाता है. निर्मोही अखाड़े ने अगर समय से पहले, यानी छह साल पहले अखाड़े ने रिसीवर नियुक्त करने को चुनौती दी होती तो ठीक था, लेकिन निर्मोही अखाड़े ने छह साल की तय समय सीमा के बाद चुनौती दी, इसलिए निर्मोही अखाड़े का दावा नहीं बनता. इनकी याचिका खारिज की जानी चाहिए.

    राजीव धवन ने कहा कि एक ट्रस्ट या ट्रस्टी के विपरीत शेबेट के अधिकार का दावा नहीं कर सकता. सन 1934 के बाद से मुस्लिमों ने वहां पर प्रवेश नहीं किया, लेकिन जब आप उन्हें प्रवेश नहीं करने देंगे तो वे इबादत कैसे करेंगे? निर्मोही अखाड़े का जो शेवियेट, यानी सेवादार का दावा है, उसको हम सपोर्ट करते हैं, लेकिन इनका टाइटल राइट नहीं बनता.अगर निर्मोही अखाड़े को सेवादार का अधिकार है, मान भी लिया जाए कि सेवादार का अधिकार पीढ़ियों तक चलता है, तो फिर प्रॉपर्टी का मालिक कौन है, क्या नेक्स्ट फ्रेड को माना जाएगा, फिर निर्मोही अखाड़े को सेवादार से हटाने का डर कैसा, कौन मालिक या ट्रस्टी है..

    मामले में शुक्रवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से जफरयाब जिलानी बहस करेंगे उसके बाद फिर से राजीव धवन बहस करेंगे..

    input:ndtv

  • इराक:कर्बला में मुहर्रम के जुलूस में भगदड़,31 लोगों की मौत,100 से ज्यादा जख्मी

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:कर्बला के एक धार्मिक स्थल पर मची भगदड़भगदड़ की चपेट में आए 31 शिया श्रद्धालुओं की मौत
    इराकी शहर कर्बला के एक प्रमुख धर्मस्थल में भगदड़ के दौरान कई शिया श्रद्धालुओं की मौत हो गई है. मुहर्रम के दौरान हुई इस घटना में मरने वालों की संख्या 31 पहुंच गई है. इसके अलावा कई लोग भगदड़ के दौरान घायल हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में करीब 100 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं.

    श्रद्धालु आशुरा के जुलूस की ओर बढ़ रहे थे तभी भगदड़ मची और भीड़ बेकाबू हो गई. मुहर्रम के दिन हजारों लोग इस पवित्र शहर में शामिल होने के लिए इकट्ठे हुए थे. जिस जगह यह हादसा हुआ है, वह जगह बगदाद से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

    मुहर्रम 10वां दिन जिसे रोज-ए-आशुरा कहते हैं. सबसे अहम दिन होता है. 1400 साल पहले मुहर्रम के महीने की 10 तारीख को ही इमाम हुसैन को शहीद किया गया था. उसी गम में मुहर्रम की 10 तारीख को ताजिए निकाले जाते हैं.

    कहा जा रहा है कि यह हादसा तब हुआ जब लोग इमाम हुसैन के मकबरे की ओर आगे बढ़ रहे थे.

    इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुर्बानी की याद में ही मुहर्रम मनाया जाता है. मुहर्रम शिया और सुन्नी दोनों समुदाय के लोग मनाते हैं. हालांकि, इसे मनाने का तरीका दोनों समुदायों में अलग-अलग होता है.(इनपुट आजतक)

  • फ़ातेमा के चैन इब्ने मुर्तज़ा ऐ ग़रीबे कर्बला अलवेदा*ये बहन तुझको कफ़न ना देसकी*धुप में जलता रहा लाश तेरा*

    मुजफ्फरूल इस्लाम,घोसी(मऊ)।घोसी नगर के बड़ागाव की प्रसिद्ध 10 वीं मोहर्रम का जुलुस गम व मातम के बीच पूरे रीति रिवाज के साथ मंगलवार की शाम को राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित शिया कर्बला में आकर समाप्त हुआ।इस अवसर पर अंजुमनों द्वारा नौहखानी व छुरी,जंजीर का मातम पेश किया गया।कर्बला के शहीदों की याद में पेस नौहा खानी पर वहा मौजूद हर शख्स की आखे नम हो जारही थी।कर्बला पहुचने के बाद सभी ताजियों को दफन करने और शामे गरीबा के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।

    घोसी नगर में प्रसिद्ध 10 वीं मोहर्रम का जूलूस सोमवार की देर रात्रि अब्बासी बीबी के फ़ाटक से प्रारम्भ होकर नीम तले ,छोटे दुआरे,सोनार टोली,मोहल्ला होते हुये नौहा खानीअंजुमनों ने हिस्सा लिया अंजुमन मसुमिया कदीम,अंजुमन इमामिया.दस्तए मसुमिया,ने नोहा खानी किया मातम के बीच।
    1लिखा है खत में सुगरा ने ये दर्द का मन्ज़र
    बगैर आप के वीरान है ये घर बाबा

    2 गुज़र रहे है ये सबो रोज़मेरे ये रो रो कर
    बगैर आप के वीरान है ये घर बाबा

    धीरे धीरे बड़ागाव बाजार स्थिय जानकी मन्दिर के सामने चौक पहुच कर समाप्त हुआ।मंगलवार की दोपहर को पुनः ताजिया जुलुसअकीदत के साथ प्रारम्भ हुआ और गम और मातम के बीच परम्परागत रास्तो से होते हुये शाम नीमतले होते सदर इमामबड़ा पहुच कर समाप्त हुआ।शिया समुदाय के लोग नंगे पाव चल रहे थे।इस के अलावा अंजुमन सज्जादिया ने भी ताबुत व अलम का जूलुस अज़खानाये अबुतालिब से निकाला ये जूलुस ताज़िया के आगे आगे चलता है।
    1 कहा सै ने रो रो के ऐ कर्बला ज़ईफी में कोई सहारा नही

    2 गरीबुल वतन हु वतन दुर है इस आलम में कोई हमारा नही
    इसी कड़ी में घोसी नगर स्थित,धरौली स्थित गाँव एवं
    बैसवाड़ा में भी मोहर्रम का जुलुस शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।

    इस अवसर पर सय्यद कुल्लन मिया,सय्यद असगर इमाम,गज़नफर अब्बास,शमीम हैदर,मज़हर नेता,इस्तेयाक सेठ,अहमद उर्फ़ फुलचन,अलमदार,शजीद जाहिदी,गमखार हुसैन,जौहर अली,इफ़्तेख़ार अहमद आदि लोग उपस्थित रहे।

  • इस्लामी नव वर्ष शुरू,हजरत उमर की शहादत को किया याद 10 सितंबर को मनाया जाएगा यौम-ए-आशूरा:शाही इमाम

    लुधियाना, 1 सितंबर: मुहर्रम का चांद नजर आते ही इस्लामी नव वर्ष 1441 के आरंभ के मौके पर आज यहां लुधियाना जामा मस्जिद में विशेष दुआ करवाई गई और इस मौके पर इस्लाम धर्म के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारूक रजी अल्लाह को भी याद किया गया। वर्णनयोग है कि एक मुहर्रम के दिन ही हजरत उमर फारूक शहीद हुए थे। इस अवसर पर शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि हमारी दुआ है कि इस्लामी नव वर्ष दुनिया भर के लोगों के लिए शांति व अमन भाईचारे वाला रहे।

    शाही इमाम मौलाना हबीब ने मुसलमानों के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारूक रजी अल्लाह की जीवनी पर रोशनी डालते हुए कहा कि विश्व भर में आज भी उमर-ए-फारूक का इंसाफ अपनी मिसाल आप है। उन्होनें कहा कि फारूकी दौर में ही दुनिया भर के इंसानों के लिए बड़े-बड़े फैसले किए गए, जिससे इंसानियत का सिर बुलंद हुआ।

    शाही इमाम ने कहा कि हजरत उमर फारूक की जीवनी हम सब के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। फारूकी दौर दुनिया में आज भी सुनहरे शब्दों के साथ याद किया जाता है। शाही इमाम ने बताया कि मुहर्रम का चांद नजर आते ही इस्लामी नव वर्ष का आगाज हो गया है और आने वाली 10 तारीख को यौम-ए-आशूरा का दिन मनाया जाएगा। उन्होने बताया कि आशूरा का दिन यहां इस्लाम धर्म में बहुत बड़ी विशेषता रखता है वहीं इसी दिन प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन रजीअल्लाह अनहु ने मैदान-ए-करबला में सच्चाई का परचम बुलंद करते हुए शहादत का जाम पीया था।

  • कानपुर:इस्लाम एक पूर्ण जीवन प्रणाली है।दीन व दुनिया में पेश आने वाली जरूरतों में कोई ऐसी जरूरत नहीं है जिसके बारे में इस्लाम में मार्गदर्शन न हो।

    मिल्लत टाइम्स,कानपुर:इस्लाम एक पूर्ण जीवन प्रणाली है।दीन व दुनिया में पेश आने वाली जरूरतों में कोई ऐसी जरूरत नहीं है जिसके बारे में इस्लाम में मार्गदर्शन न हो।पैगम्बर मुहम्मद स0अ0व0 अल्लाह के आखिरी नबी हैं उनके बाद कोई नबी नहीं आने वाला और दीन ए इस्लाम कयामत तक जारी रहेगा । दीन व दुनिया की आवश्यकता के लिए सन व तारीख की जरूरत पड़ती है इस्लाम की अपनी तारीख व कलेंडर है वह किसी का मोहताज नहीं। इन विचारों को मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक उसामा क़ासमी जमियत उलेमा के प्रदेश अध्यक्ष ने जमियत बिल्डिंग रजबी रोड जमीअत उलमा शहर व मज्लिस तहफ्फुज़े खत्मे नुबुव्वत कानपुर में आयोजित जलसा इस्तक़बाले इस्लामी नव वर्ष 1441 हिजरी में अपने बयान में व्यक्त किया।

    मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक उसामा कासमी ने सन हिजरी के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लामी कलेन्डर से हमारी इबादतें जुड़ी हैं हम रोज़ा, ईदैन और हज आदि इबादतों को इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से अदा करते हैं. इस्लामी कलेंडर की सुरक्षा हम सभी मुसलमानों का दायित्व है। दुनिया की जरूरतों में सन् ईसवी के उपयोग का मतलब यह नहीं है कि हम अपने कैलेंडर को भुला दें। इस्लाम सभी के लिए है। मौलाना ने सन् हिजरी की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम में फारूक आजम रजि0 से पहले सन् लिखने का रिवाज न था आम घटनाओं को याद रखने के लिए जाहिलियत में कुछ प्रसिद्ध घटनाओं से सन की गणना कर लेते थे। बहुत दिनों तक काब बिन लुइ के निधन से साल शुमार होता रहा, या फिर आमुल्फील जारी हुआ उसकी शुरूआत इस साल से हुई जबकि अबरहा काबा के ढाने का हाथी लेकर आया था और उसी हिसाब से आमुल्फील से पबेर किया फिर आमुल्फुज्जार का रिवाज हुआ फिर उसके बाद विभिन्न सन् चले लेकिन फारूक आजम ने जो सन् चलया वह आज तक जारी है और कयामत तक इस्लाम के हर समुदाय में यही जारी रहेगा 16 हिजरी में फारूक रजि0 के सामने दो फरमान पेश किए गए जिन पर केवल शाबान लिखा था और जो एक दूसरे से विपरीत था हजरत फारूक आज़म ने कहा कि मैंने इस आदेश में मना किया था।

    आमिल ने कहा नहीं आपने इस फरमान की अनुमति दी थी हजरत उमर फारूक आज़म यह सुनकर चुप हो रहे और उसी समय अरबाब शूरा इकट्ठा करके एक मजलिस आयोजित की, बड़े-बड़े सहाबा इकट्ठा हुए और यह समस्या पेश हुई किसी ने राय दी कि सन् की गणना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की विलादत से किया जाए, हजरत फारूक आजम ने कहा इसमें ईसाइयों से मुशाबिहत पाई जाती है क्यों कि उनका सन् भी मीलादी है किसी ने कहा कि साल का हिसाब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नबुव्वत से हो कोई बोला कि इसमें फारसियों की तकलीद किया, फारूक आजम ने इन दोनों रायों से अलग होकर के इरशाद फरमाया कि बेहतर होगा कि सन् का शुमार हिजरत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम से किया जाए क्योंकि यह इस्लाम में यह बहुत बड़ी घटना है और उसी के बाद से इस्लाम का तेजी से प्रसार हुआ लोगों ने इस राय को पसंद किया और इसी पर सहमति हो गयी फिर चर्चा यह पैदा हुई कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने रबीउल अव्वल में हिजरत फरमाई थी उस हिसाब से शुरू साल रबीउल अव्वल हो या कि अरब के पुराने दस्तूर के लिहाज़ से मुहर्रम के महीने से हो।

    सहाबा किराम के मशवरे से फारूक आजम ने मुहर्रम को साल का पहला महीना नियुक्त किया। मौलाना उसामा ने जल्सा इस्तक़बाल इस्लामी नव वर्ष का कारण बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल अपनी संस्कृति अपना कल्चर और अपने कैलेंडर को याद करना ही नहीं बल्कि यह रिवाज देना और उसकी सुरक्षा का संकल्प लेना है। कुरआन की तिलावत से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । संचालन हक़ एजुकेषन के डायरेक्टर मौलाना हिफ्जुर्रहमान क़ासमी ने किया। इस अवसर पर मुफ्ती उस्मान क़ासमी, मौलाना नूरूद्दीन अहमद क़ासमी, डा0 हलीमुल्लाह खां, मौलाना जावेद क़ासमी, मौलाना अकरम जामई, मौलाना अंजुम मज़ाहिरी, क़ारी अब्दुल मुईद चौधरी, मौलाना अनीस खां आदि के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।े