Category: मुस्लिम दुनिया

  • लुधियाना जामा मस्जिद के ऑनलाइन जलसे में जुड़े डेढ़ लाख से अधिक लोग

    अल्लाह से माफी मांगने से पहले दूसरों को माफ करना सीखें : शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना, 10 अप्रैल (मेराज़ आलम ब्यूरो) : शबे बरात की पवित्र रात के अवसर पर एतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में ऑनलाइन जलसे का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने की। इस अवसर पर जामा मस्जिद में सिर्फ 4 लोग ही उपस्थित थे, जिनमें बज्मे हबीब के अध्यक्ष मशहूर शायर गुलाम हसन कैसर नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी कारी मुहम्मद मोहतरम व शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम का नाम शामिल है।

    ऑनलाइन प्रोग्राम में एक लाख से ज्यादा श्रोता फेसबुक पर शाही इमाम पंजाब की पेज पर जुड़े जिन्होंने देर रात तक कुरान शरीफ की तिलावत और नाते रसूले पाक सुनी, इस बा बरकत रात को लेकर की गई विशेष दुआ में उपस्थित रहे। इस अवसर पर शाही पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि अल्लाह से माफी मांगने से पहले जरूरी है कि बंदा दूसरों को माफ करना सीखें। उन्होंने कहा कि जो दूसरों को माफ करता है उसकी तरफ से मांगी गई माफ़ी खुदा के दरबार में कबूल होती है।

    शाही इमाम ने कहा कि आज शबे बरात की रात पर हम सबको कोरोना वायरस की मुक्ति के लिए विशेष दुआएं करनी चाहिए और अल्लाह से यह मांगे की दुनिया पहले की तरह खुशहाल हरी-भरी नजर आने लगे। उन्होंने ने कहा कि इस मुसीबत की घड़ी में जो लोग समाज में नफरत का जहर घोलना चाहते हैं उनकी साजिशों को प्यार आपसी भाईचारे और एकता के साथ नाकाम बनाया जाएगा।

    ऑनलाइन जलसे को संबोधित करते हुए नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि इबादत से पहले अपने पड़ोसी और घरवालों के साथ इंसान का व्यवहार नेकी वाला होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दूसरों को तकलीफ़ देने वाले खुदा की इबादत करके कभी कामयाब नहीं हो सकते। नायब शाही इमाम ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हजऱत मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दुनिया को जो शिक्षा दी है उसमें प्यार और एकता की ऐसी ताकत है जिसे संप्रदायिक ताकते तोड़ नहीं सकतीं। उस्मान ने कहा कि इस्लमं धर्म शांति का सन्देश देता है और आगे भी देता रहेगा।

  • ईमान व सब्र को ताख पर ना रखे,वरना कोविड-19 व लोकडाऊन मे दुसरो का हक मारा जायेगा।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।वीर-सपूतों व दानियो के तोर पर पहचान बना चुके राजस्थान प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने कोविड-19 व लोकडाऊन से उपजे हालात को जिस समझदारी व एकाग्रता के साथ सम्भालते हुये रोजाना अधिकाधिक कोराना टेस्ट करके प्रभावित मरीजो का इलाज करने का रिकॉर्ड काम किया है। वही उपजे हालात मे उनके द्वारा किसी को भी भूख से मरने नही देने की पूर्ण व्यवस्था करने के सुखद परिणाम साफ नजर आ रहे है। गहलोत सरकार के तरीकों को देश की अन्य राज्य सरकारों व केन्द्रीय सरकार को अपनाने पर विचार करना चाहिए। लेकिन इन सबके मध्य राज्य के अनेक जगह पर जब प्रशासन के लोग खाद्य सामग्री लेकर पहुंचे तो पाया कि उनके घरो मे राशन सामग्री पहले से मोजूद थी या यू कहे कि उनके घर पर भोजन बन रहा था।

    अपने पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल मे अकाल राहत का शानदार प्रबंधन करने वाले अशोक गहलोत ने आज कोविड-19 व लोकडाऊन से उपजे हालात के समय भी सुव्यवस्थित प्रबंधन करके फिर से एक मिशाल कायम की है। सरकारी स्तर पर कोराना वायरस के प्रभाव को कम से कम करने व प्रभावित लोगो की पहचान करके उनका जल्द से जल्द ईलाज करके उनको ठीक करके उनके घरो तक भेजने का जो सिस्टम कायम किया है। उसकी जीतनी सहरायना की जाये वो कम ही मानी जायेगी।

    सरकारी स्तर पर राज्य के किसी भी नागरिक को एवं राज्य मे इस समय रह रहे राज्य के बाहर के किसी भी व्यक्ति को हरगिज भूखा नही सोने देने के लिये भरसक सफलतापूर्वक कोशिशे की जा रही है। वही आम जरुरतमंदों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने मे सरकार के अलावा लगे हुये भामाशाहों व सामाजिक संस्थाओं द्वारा किये जा रहे सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन कुछ लोग इस विकट परिस्थितियों मे भी ईमान को ताख मे रखकर दूसरो का हक मारने की कोशिश मे लगे हुये है। टोल फ्री व कंट्रोल रुम नम्बर पर मांग दर्ज करवाने पर सरकारी स्तर पर खाद्य सामग्री देने जब अधिकारी पुलिस के साथ घर आकर किचन मे रखे सामान को देखकर देने से शर्म के मारे कुछ लोग इस तरह सामग्री लेने से कतराने लगे है।वही अनेक जगह यह भी देखने को मिला है कि जब सरकार का प्रतिनिधि खाद्य सामग्री देने आते है तो उन्हें पहले से उसके घर मे सामग्री पाई जा रही है। जिसके अनेक कारण भी बताये जा रहे है कि जरुरतमंद सरकारी सहायता के अलावा भामाशाहों व सामाजिक संस्थाओं द्वारा वितरित की जा रही खाद्य सामग्री पाने की कोशिश भी अतिरिक्त रुप मे करता है। सरकारी मदद के मुकाबले उसको भामाशाहों व संस्थाओं द्वारा वितरित की जा रही खाद्य सामग्री आसानी से बीना किसी फोरमल्टीज के मिल जाती है। यानि जरुरतमंद द्वारा हर तरफ कोशिश करने पर जब तक सरकारी खाद्य सामग्री पहुंच पाती है उससे पहले भामाशाहों द्वारा वितरित खाद्य सामग्री उस तक पहुंच जाती है। इनमे से कुछ लोग तो एक नही अनेक भामाशाहों व संस्थाओं से खाद्य सामग्री प्राप्त करके दूसरों का हक मारने से भी बाज नही आ रहे है।

    सरकारी प्रतिनिधि द्वारा खाद्य सामग्री व्यक्ति की मांग पर घर पहुंचाने पर उनकी रसोई मे पहले से खाद्य सामग्री मिलने व कहीँ पर हलवा बनने के समाचार अखबारों की सुर्खियां लगातार बन रही है वही सीकर मे इस विकट परिस्थितियों मे कुछ सुखद अहसास भी हुये। सीकर के मोहल्ला कारीगरान मे लोकडाऊन के चलते जरुरतमंद लोगो को पहले दिन से एक मुस्लिम परिवार द्वारा खाद्य सामग्री पहुंचाने का सीलसीला शुरू करने के बाद जब वो एक बंगाली दास परिवार को खाद्य सामग्री देने पहुंचे तो दास परिवार ने उनको कहा कि आप द्वारा पहले दी गई सामग्री अभी हमारे पास है। उस सामग्री से दो-तीन दिन निकल सकते है। तो आप द्वारा अब लाई सामग्री हम नही लेगे, किसी दूसरे जरुरतमंद को दे दो। हमारी सामग्री खत्म हो जायेगी, तब हम फिर से आपसे ले लेंगे। इसी तरह शहर के अन्य हिस्से मे यूपी के परिवार है जिनको खाद्य सामग्री देने का आफर किया तो उन्होंने कहा कि उनके पास पैसे बचे हुये है उनसे थोड़ी थोड़ी खाद्य सामग्री खरीदकर काम चला लेगे फिर कमी आई तो उधार ले लेगे ओर फिर कमाकर उधारी चुका देगे।

  • कोरोना वायरस की युद्ध को जीतने के लिए मुसलमानों ने कब्रस्तान व मस्जिद का रुख न करके अपने अपने घरों में ही पढ़ा फातिहा व नमाज़

    मुज़फ्फरुल इस्लाम,घोसी,मऊ। स्थानीय नगर सहित ग्रामीण इलाकों में गुरुवार को कोरोना संक्रमण को ले प्रशानिक अपील के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने घरों में ही रह कर ही सूरा फातेहा पढ़ा।वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए अपने पूर्वजों की इबादत एव दुवाओ हेतु कब्रिस्तान पर न जाकर घरों में ही दुवाएं की गई।पूरी रात मुस्लिम इबादत में मशगूल रहे साथ ही साथ कोरोना को लेकर पूरे देश के लिये भी दवाओं का क्रम जारी रहा। वही नगर के मस्जिदों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए तीन चार लोगों ने ही नमाज पढ़ी। कब्रिस्तान पर सन्नाटा पसरा रहा। शबे बारात को ले सीओ अभिनव कन्नौजिया, कोतवाली प्रभारी सचितानन्द यादव,उपनिरीक्षक सविंद्र राय मय फोर्स पूरे नगर क्षेत्र के अलग अलग जगहों पर चक्रमण करते रहे।

  • शबेबरात में लोगो ने किया लॉकडाउन का पालन:मस्जिदों में रहा सन्नाटा,घरों में ही अदा की गई नमाज

    शबेबरात के मौके पर भी लॉक डाउन का मूसलमानो ने किया पालन

    । शब ए बरात आज सूर्यास्त के बाद से होगी। इसे लेकर इमारत ए शरिया सहित मधेपुरा के सभी मस्जिदों की ओर से एलान कर दिया गया है। सभी एदारों की ओर से देशभर में लागू लॉकडाउन का अनुपालन करते हुए घरों में इबादत करने की अपील की गई है। इस इबादत के साथ कोरोना वायरस जैसी महामारी से निजात और देश की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए दुआएं करने की अपील भी की गई है।

    एदारों की ओर से कहा गया है कि शब ए बरात की रात मस्जिदों में न जाकर अपने घरों में ही इबादत करें। इसके अलावा शब ए बरात के मौके पर कतई आतिशबाजी ना हो। इसे हराम बताया गया है। जदयु के बिहार के बुद्धिजीवी प्रकोष्ट के उपाध्यक्ष डॉ प्रो मो गुलहसन ने अपील की है कि लॉकडाउन का अनुपालन करते हुए घरों में नमाज अदा करें। मस्जिदों में न जाएं। क्रब्रिस्तान न जाकर घरों से ही मरहूमों के इसले सवाब के लिए दुआएं पढ़ें। शब ए बारात को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है।

    ये है गुनाहों से तौबा की रातः मौलाना सुफ़यान साहब ने बताया जाता है कि ये रात बड़ी अजमत और बरकत वाली होती है। इस रात में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है। इस दिन मुस्लिम घरों में तमाम तरह के पकवान जैसे हलवा, बिरयानी, कोरमा आदि बनाया जाता है। इबादत के बाद इसे गरीबों में भी बांटा जाता है। शब-ए-बारात की रात को इस्लाम की सबसे अहम रातों में शुमार किया जाता है

    क्योंकि इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, इंसान की मौत
    और जिंदगी का फैसला इसी रात को किया जाता है।
    इसलिए इसे फैसले की रात भी कहा जाता है।

  • शब ए बरात के अवसर पर घरों में करें इबादत :शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से ऑनलाइन किया जाएगा जलसा सीरत उन नबी का आयोजन

    लुधियाना 8 अप्रैल (मेराज़ आलम ब्यूरो) : पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक आज दिनांक 9 अप्रैल, 2020 को दिन गुजार कर आने वाली रात शबे बरात की मुकद्दस रात होगी। शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने अपने संदेश में कहा है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर चल रहे करफियू को देखते हुए सभी मुसलमान भाई बहन अपने-अपने घरों में ही शबे बरात की मुकद्दस रात मनाए। शाही इमाम ने कहा कि अपने घरों में सारी रात इबादत करें, कुराने पाक की तिलावत करें, नफिल नमाज अदा करें और आज की रात क्योंकि अल्लाह ताला के दरबार में कबूलियत की रात है इसलिए पूरी दुनिया के लोगों को कोरोना से निजात के लिए विशेष दुआएं की जाएं। शाही इमाम ने कहा कि शबे बरात की मुकद्दस रात में अल्लाह तबारक वताला अपने बंदों को माफ फरमाते हैं और उनकी दुआएं कबूल की जाती हैं, दुनिया भर में कोरोना के कहर के बीच इस मुकद्दस रात का आना हम सब के लिए राहत और सुकून की बात है। उन्होंने कहा कि हर एक मुसलमान पर लाजिम है कि वह विश्व से कोरोना के खात्मे और सभी लोगों की तंदुरुस्ती और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं करवाएं। शाही इमाम ने कहा कि शबे बरात की इबादत से पहले इस बात का खास ध्यान रखें कि आपके पड़ोस में रहने वाले किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति भूखा ना हो, जो भी जरूरतमंद है उसको अपनी हैसियत के मुताबिक मदद करें।

    शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने बताया कि हर साल लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शबे बरात की रात को होने वाला जलसा सीरत उन नबी का आयोजन इस बार फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर ऑनलाइन किया जाएगा, जिसमें कारी मुहम्मद मोहतरम की तिलावत-ए-कुरान शरीफ होगी। कारी मुहम्मद इब्राहीम नाते रसूले पाक पेश करेंगे। नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी का विशेष संबोधन होगा व आखिर में शाही इमाम साहब दुआ करवाएंगे।

    मुस्तकीम ने सभी लोगों से अपील की है कि वह रात 10 बजे से 12:30 बजे तक फेसबुक पेज शाही इमाम पंजाब पर जुड़कर इस जलसे में ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं। मुस्तकीम ने बताया कि 10 तारीख दिन शुक्रवार को शबे बरात के बाद एक दिन नफली रोजा रखा जाएगा।

    लुधियाना के 46 जमाती पाए गए नेगेटिव
    लुधियाना कोरोना के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच पंजाब में तबलीगी जमात के सदस्यों की मेडिकल जांच चल रही है, लुधियाना शहर में विभिन्न राज्यों से आई हुई जमातों को पिछले दिनों राहों रोड इस्लामिया स्कूल में कवारांटेन किया गया है और सभी 46 जमतियों का लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिकल टेस्ट करवाया गया और सभी जमात के सदस्य नेगेटिव पाए गए। क्लीन चिट पाए गए जमातियों के रहने के प्रबंधों का नायब शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी व शाही इमाम पंजाब के सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने जायजा लिया। इस अवसर पर राहों रोड मदनी मस्जिद के प्रधान मुहम्मद जमील ने बताया की सभी जमतियों को अलग-अलग कमरों में कवारांटेन किया गया है, शहर के लिए राहत की बात है कि सभी के टेस्ट नेगेटिव आए हैं।

    मदनी मस्जिद राहों रोड पर जमातियों के लिए किए गए प्रबंधों का जायजा लेते हुए नायब शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी, मुहम्मद जमील व अन्य।

  • भारत को अंधेरे में न डाला जाए : हज़रत अमीर शरीअत

    मुंगेर 4 अप्रैल 2020: 5 अप्रैल को रात नौ बजे से नौ मिनट पूरे देश के प्रकाश के बुझाने की अपील पर अमीर-ए-शरीअत इस्लामी विचारक मौलाना मुहम्मद वली रहमानी साहब सज्जादानशीन ख़ानक़ाह रहमानी मुंगेर ने फ़रमाया है कि देश के विभिन्न भागों से लोग पूछ रहे हैं कि 5 अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट पूरे देश में अंधेरा करने की अपील पर अमल करना सही है या नहीं? मेरे अनुसार अच्छी खासी रोशनी को बुझाना और दिये या लालटेन या मोबाइल की रोशनी फैलाना कुछ विचित्र कार्य होगा, यह मज़बूत स्थिति से कमज़ोर स्थिति की ओर ले जाना है, और प्रधानमंत्री इसमें निपुण हैं, उन्होंने कई कार्यों के द्वारा देश की जनता को अच्छी से बुरी स्थिति की ओर यात्रा करवायी है, जैसे नोटबन्दी, जीएसटी का ग़लत रूप से लागू करना, बेरोज़गारी में बढोत्तरी, किसानों की स्थिति को नज़रअंदाज़ करना, देश के ग़रीब, भूमिहीन, अनपढ़ लोगों के लिए एनपीआर जैसे कार्यक्रम के माध्यम से देश को अच्छी से बुरी स्थिति की ओर ले जा रहे हैं,

    अंधेरा और अंधेर नगरी प्रधानमंत्री का कार्य हो सकता है मगर यह देश के स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है, बिजली विभाग का भी कहना है कि यदि रोशनी बन्दी पर अमल किया गया तो पॉवरग्रेड पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसको ठीक करने के लिए एक सप्ताह का समय लग सकता है, इसके कारण कोरोना के मरीज़ों के इलाज में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, सम्भवतः प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल की रात को रोशनी बन्दी और इससे पहले थाली और ताली बजाने की अपील हिन्दू धर्म के परिदृश्य में की हो और वे धार्मिक प्रथाओं के प्रचार प्रसार का प्रयास कर रहे हों, मगर इस्लाम, ईसाईयत, सिक्ख मत, बुद्ध मत, जैन मत में इसका कोई धार्मिक महत्व नहीं है, जिन लोगों की ऐसी मान्यताएं हैं वे ऐसा कर सकते हैं लेकिन मुसलमानों, ईसाइयों, सिक्खों, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के मानने वालों को इसके करने की कदाचित आवश्यकता नहीं है, इस्लाम में इस प्रकार के अंधविश्वास की कोई गुंजाइश नहीं है।

    हज़रत रहमानी ने फ़रमाया कि कोरोना विषाणु अंधेरा फैलाने से भाग सकता है ऐसी सोच प्रधानमंत्री को मुबारक हो, मेरे जैसा इंसान रोशनी फैलाने में विश्वास रखता है, और इस बात को सही समझता है कि प्रत्येक देशवासी अपने अपने घरों में रहे, अपने अपने तरीके से अपने अल्लाह को याद करे, पड़ोस और मुहल्ले के ग़रीबों का ख़्याल रखे, उनकी सहायता करे, प्रशासन के निर्देशों का पालन करे और उसके सुझावों पर अमल करे, अभी डॉक्टर और उनके सहयोगी कड़ी मेहनत और हिम्मत के कार्य कर रहे हैं, अपनी जान पर खेल कर मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं, उनका आदर सम्मान किया जाए, आवश्यकता पड़ने पर उनका सहयोग भी किया जाए, देश की सुरक्षा और मरीज़ों के स्वस्थ होने के लिए घर पर रह कर दुआ की जाए।

  • महाराष्ट्र:कब्रिस्तान समिति ने मुस्लिम का शव को दफनाने से इनकार किया,फिर श्मशान में हुआ अंतिम संस्कार

    मुंबई. कोरोना के कारण 65 साल के बुजुर्ग की बुधवार को मौत हो गई थी। मुस्लिम समुदाय के इन बुजुर्ग का जनाजा लेकर जब परिजन चारकोप नाका स्थित कब्रिस्तान लेकर पहुंचे तो वहां की देखरेख करने वाली समिति ने लाश को दफनाने से इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि 2 घंटे तक समझाने के बावजूद कब्रिस्तान समिति ने लाश दफन नहीं करने दी। इसके बाद प्रशासन और समाजसेवियों ने हिंदू श्मशान भूमि प्रबंधन समिति से बातचीत की। इसके बाद बुजुर्ग के शव का दाह संस्कार हुआ।

    बुजुर्ग मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड में रहते थे। बुधवार तड़के जोगेश्वरी पूर्व स्थित अस्पताल में उनका निधन हुआ। परिजनों का आरोप है कि कब्रिस्तान समिति ने इसलिए शव को दफनाने की इजाजत नहीं दी, क्योंकि बुजुर्ग की मौत कोरोनावायरस के चलते हुई थी। इस घटना के बाद मालवणी में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    मामला सामने आने के बाद मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
    विधायक ने कहा- परिजन ट्रस्टियों को बताए बिना शव सीधे कब्रिस्तान ले गए
    महाराष्ट्र के मंत्री और मालवाणी के विधायक असलम शेख ने कहा, “सरकारी निर्देशों के अनुसार कोरोनावायरस से जान गंवाने वाले मुस्लिमों को एक कब्रिस्तान में दफन किया जाना चाहिए, जो उस हॉस्पिटल के सबसे करीब हो और जहां रोगी की मृत्यु हुई थी। मालवणी का जो मामला है, उसमें मृतक के परिजन कब्रिस्तान के ट्रस्टियों और अन्य संबंधित लोगों को बताए बिना शव कब्रिस्तान ले गए। फिर शव को दफनाने की मांग की। हालांकि, जिन लोगों ने निर्देशों का उल्लंघन किया है, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस घटना से एक दिन पहले एक और कोरोनोवायरस पीड़ित को उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

  • मुस्लिम समुदाय को इस तरफ भी झांक कर अपने आपको परवरदिगार के तराजू मे तोलना होगा!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि धार्मिक मान्यताओं अनुसार बीना वजह देर रात तक जागना ओर सुबह देर तक सोते रहने की सख्त मनादी के बावजूद मुस्लिम बस्तियों मे उक्त तरह की धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बीना वजह लोगो का देर रात तक जागना व सुबह सूरज निकलने के बाद या उससे भी काफी देर से उठने के आम रिवाज बन चुके को पाक परवरदिगार के तराजू मे तोल कर देखना ही होगा।

    हमे याद करना चाहिए की हमारी दादीयां व नानीया सुबह जल्द उठकर घर आंगन व बाहर आम रास्ते मे झाड़ू लगाकर घर के आवश्यक कामो मे जूट जाती थी तब जाकर पुरुष उठकर इबादत करके अपने काम (रोजगार) के लिये निकल जाने के बाद सुबह का सूरज निकलता था। लेकिन आज सबकुछ उलटा-पुल्टा होने से अनेक तरह की परेशानियों से घिरा हुवा इंसान अपने आपको पा रहा है। राजस्थान की जाट बिरादरी के उत्थान मे सबसे अहम किरदार उनके बूजुर्गो की उस कड़ी मेहनत का फल ही है कि वो रात को जल्दी सोने व सुबह बहुत जल्द उठकर जमीन के सीने को चीरकर खेती के रुप मे सोना (स्वर्ण) निकालने की आदत को ही माना जायेगा।

    पीछले दो-तीन दिन किसी एक मिलने वाले शख्स के साथ उसके दूध का व्यापार शुरु करने की इच्छा के चलते सर्वे के अनुसार कुछ लोगो से बात हुई जो यह है। एक मुस्लिम मोहल्ले के शख्स से बात होने पर व्यापारी को उसने कहा कि आप सुबह जल्दी दूध बेचना चाहते तो जरा सोच लो इस मोसम मे करीब आठ बजे तक आपके पास कोई दूध लेने उनके मोहल्ले मे नही आयेगा क्योंकि मोहल्ले के अधीकांश लोग तब तक सोये रहते है। अन्य मुस्लिम मोहल्ले के दूध की दुकान के एक अन्य संचालक से बात करने पर उसने बताया की उनके सुबह जल्दी अपनी दुकान खोलने के बावजूद आठ बजे के बाद ही ग्राहक उसके यहां दूध लेने आते है। शाम के मुकाबले सुबह उसके यहां दूध की बिक्री बहुत कम है। उसके क्षेत्र मे सुबह जल्द के बजाय देर सुबह उठने की घर घर की कहानी समान है। इसी तरह एक दूध की दुकान चलाने वाले ने तो यहां तक कह डाला कि उसने तो सुबह दूध की दूकान खोलना ही बंद कर दिया वो बस मात्र शाम को ही दूध की बिक्री के लिये दुकान खोलते है। सभी ने एक खास बात यह भी कही कि उनके पड़ोसी मोहल्ले मे दूध की दूकान सुबह सवेरे खुल जाने के बावजूद खूलने से पहले लोग दूध लेने के इंतजार मे खड़े रहते है। इसका अर्थ यह है कि उस क्षेऋ के लोग सुबह सवेरे जल्द उठने वाले है। उन लोगो ने यह भी बताया कि अधीकांश मुस्लिम दूध प्लास्टिक की थैलियों मे लेकर जाते है एवं पड़ोसी क्षेत्र के लोग दूध लाने मे सिल्वर-स्टील की केतली-बरनी इस्तेमाल करते है।

    मुस्लिम बस्तियों मे देर रात तक जागना व सुबह देरी से उठना घर घर की कहानी भन चुका है। ऊंट के मुहं मे जीरा समान कुछ लोग सुबह इबादत के लिये जल्द अगर उठते भी है तो इबादत के बाद उस क्षेत्र की टी-स्टाल पर चाय पीते है। अगर उनमें से कुछ घर आकर चाय पीते है तो वो स्वयं चाय बनाकर ही पीते है। क्योंकि बाकी घर वाले तो सुबह देर तक सोये रहते है। समुदाय को सोचना चाहिए की उन पर आने वाली परेशानियों का अनेक कारणो मे एक कारण बीना वजह देर रात तक उनका जागना व सुबह देर तक सोते रहना तो नही। पहले यह समस्या शहरो तक सीमित थी लेकिन अब यह शहरों के साथ साथ गावं-ढाणी देहातो तक भी आम हो चुकी है।

  • पंजाब:1947 से बंद पड़ी गोहीर की मस्जिद में पढ़ी गई पहली नमाज़

    वक्फ बोर्ड मैम्बर कलीम आजाद ने 2 लाख रुपए देने का किया ऐलान

    पंजाब जालंधर, (मेराज़ आलम): 7 दशक बाद आज जैसे ही तहसील नकोदर मस्जिद नूरी गोहीर में पहली नवाज अदा की गई तो पूरे गांव में खुशी का माहौल पैदा हो गया और सिख समाज तथा मुस्लिम समाज ने इसको आपसी एकता की संज्ञा दी।

    उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले इस मस्जिद को पंजाब वक्फ बोर्ड मैम्बर कलीम आजाद, इसलाहे उम्मत एजुकेशनल एंड वैल्फेयर ट्रस्ट पंजाब के अध्यक्ष फजलुर्रहमान के प्रयासों से गोहीर की यह मस्जिद मुसलमानों के हवाल की गई थी, फिर उसकी मुरम्मत के बाद आज इस मस्जिद में पहली नवाज अदा की गई।

    इस अवसर पर मुख्यअतिथि के रूप में शामिल हुए इसलाहे उम्मत एजुकेशनल वेलफेयर पंजाब के चेयरमैन फजलुर्रहमान मजाहिरी ने कहा कि मस्जिदों अल्लाह का घर हैं, उन्हें आबाद रखने वाले भाग्यशाली हैं। उन्होंने कहा कि गोहीर जैसे गांव में मस्जिद होना एक ऐतिहासिक कदम है। केवल पंजाब बल्कि पूरे देश में अच्छा संदेश गया है। मस्जिद के पड़ोसी सरदार कुलदीप ङ्क्षसह ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके गांव में अल्लाह की इबादत के लिए मस्जिद खोल दी गई है।
    वहीं पंजाब वक्फ बोर्ड सदस्य कलीम आजाद ने वक्फ बोर्ड से 2 लाख रुपए ग्रांट देने की घोषणा की और कहा कि यह मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि इस मस्जिद में उनकी उपस्थिति में पहली बार नवाज पढ़ी गई।

    इस मौके पर प्रधान रवींद्र ङ्क्षसह, मदनी मस्जिद नकोदर के प्रधान अब्दुसत्तार ठेकेदार, मौलाना अमानुल्लाह मजाहिरी, मो. नवाब मो. दिलबाग, मो. सलीम, मोहम्मद अली, लाल हुसैन, मुस्तफा, बशीर अहमद, चौधरी याकूब मो. मिसकीन, मो. अशरफ अली, राजू, मो. शाकिर, हाफिज मो. गलफाम, मो. निराले, नैयर आलम मौजूद थे।

  • वर्ष 2019 के विश्व मुस्लिम व्यक्ति का सम्मान तैयब एर्दोगान के नाम

    अंकारा (मिल्लत टाइम्स): तुर्की के मौजूदा अध्यक्ष रिसेप तईप एर्दोगन की इज्जत में लगातार वृद्धि हो रही है। नाइजीरिया के एक अखबार ने तैयब एर्दोगन को वर्ष 2019 के मुस्लिम व्यक्ति में सब से महत्पूर्ण करार दिया हे.न्यूज़ पेपर “मुस्लिम समाचार नाइजीरिया” ने शनिवार को अपने प्रकाशन में तैयब एर्दोगन को इस साल का विश्व इस्लामी व्यक्ति करार दिया और उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया है, 2018 में भी या सम्मान एर्दोगान के नाम हुवा था

    अबू बकर ने कहा कि राष्ट्रपति एर्दोगन मजलूमों के साथी और दोस्त हैं और वह पूरी दुनिया में पीड़ित राष्ट्रों के लिए आवाज बुलंद करते हैं। उन्होंने हमेशा फिलिस्तीनी पीड़ित मुसलमानों के लिए आवाज बुलंद की। वह फिलिस्तीनियों के खिलाफ अत्याचार की साहसी और जोरदार आवाज हैं।संपादक अबू बकर ने बताया कि “रिसेप तईप एर्डोगन ने सीरिया, म्यांमार, कश्मीर और फिलीस्तीन के मामलों में हमेशा अपनी आवाज़ खुलकर बुलंद की है।” आपने हाल ही में कुआलालंपुर शिखर सम्मेलन में भी मुस्लिम देशो में एकता और एकजुटता की कोशिश की है

    अखबार के मुख्य संपादक रशीद अबू बकर ने कहा कि तैयब एर्दोगन इस्लामी की शक्तिशाली, प्रभावशाली और सम्मानित व्यक्ति हैं। वे इस्लामी साल 2019 की विश्व इस्लामी व्यक्ति का सम्मान और पुरस्कार प्राप्त करने के हकदार हैं।

    वर्ष 2019 के इस एवार्ड में दूसरे नंबर पर मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद, तीसरे नंबर पर अमेरिकी संसदीय सदस्य इल्हान उम्र, चौथे नंबर पर गामबिया के अध्यक्ष और पांचवें नंबर पर तुर्की मूल जर्मन फुटबॉलर मसूद अज़ाल रहे हैं।