Category: मुस्लिम दुनिया

  • मशहूर लेखिका डाॅ कमला दास ने किया इस्लाम कुबूल,कहा इस्लाम शांति और मुहब्बत का प्रतीक है

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:“मुझे हर अच्छे मुसलमान की तरह इस्लाम की एक-एक शिक्षा से गहरी मुहब्बत है। मैंने इसे दैनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से अपना लिया है और धर्म के मुक़ाबले में दौलत मेरे नज़दीक बेमानी चीज़ है।” इस्लाम जो मुहब्बत, अमन और शान्ति का दीन है. – डॉक्टर कमला सुरैया

    इस्लाम जो सम्पूर्ण जीवन-व्यवस्था है, और मैंने यह फै़सला भावुकता या सामयिक आधारों पर नहीं किया है, इसके लिए मैंने एक अवधि तक बड़ी गंभीरता और ध्यानपूर्वक गहन अध्ययन किया है और मैं अंत में इस नतीजे पर पहुंची हूं कि अन्य असंख्य ख़ूबियों के अतिरिक्त इस्लाम औरत को सुरक्षा का एहसास प्रदान करता है और मैं इसकी बड़ी ही ज़रूरत महसूस करती थी.

    फ़ोटो क्रेडिट: Ummate Nabi
    इसका एक अत्यंत उज्ज्वल पक्ष यह भी है कि अब मुझे अनगिनत ख़ुदाओं के बजाय एक और केवल एक ख़ुदा की उपासना करनी होगी. रमज़ान का महीना मुसलमानों का अत्यंत पवित्र महीना और मैं ख़ुश हूं कि इस अत्यंत पवित्र महीने में अपनी आस्थाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन कर रही हूं.

    तथा समझ-बूझ और होश के साथ एलान करती हूं कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं और मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत) हैं। अतीत में मेरा कोई अक़ीदा नहीं था। मूर्ति पूजा से बददिल होकर मैंने नास्तिकता अपना ली थी, लेकिन अब मैं एलान करती हूं कि मैं एक अल्लाह की उपासक बनकर रहूंगी और धर्म और समुदाय के भेदभाव के बग़ैर उसके सभी बन्दों से मुहब्बत करती रहूंगी.

    ‘‘मैंने किसी दबाव में आकर इस्लाम क़बूल नहीं किया है, यह मेरा स्वतंत्र फै़सला है और मैं इस पर किसी आलोचना की कोई परवाह नहीं करती। मैंने फ़ौरी तौर पर घर से बुतों और मूर्तियों को हटा दिया है और ऐसा महसूस करती हूं जैसे मुझे नया जन्म मिला है।’’

    इस्लामी शिक्षाओं में बुरके़ ने मुझे बहुत प्रभावित किया अर्थात वह लिबास जो मुसलमान औरतें आमतौर पर पहनती हैं। हक़ीक़त यह है कि बुरक़ा बड़ा ही ज़बरदस्त लिबास और असाधारण चीज़ है। यह औरत को मर्द की चुभती हुई नज़रों से सुरक्षित रखता है और एक ख़ास क़िस्म की सुरक्षा की भावना प्रदान करता है। आपको मेरी यह बात बड़ी अजीब लगेगी कि मैं नाम-निहाद आज़ादी से तंग आ गयी हूं।

    कमला सुरय्या पूर्व नाम कमला दास अँग्रेजी और मलयालम भाषा की भारतीय लेखिका थीं। वे मलयालम भाषा में माधवी कुटटी के नाम से लिखती थीं। उन्हें उनकी आत्मकथा ‘माई स्टोरी’ से अत्यधिक प्रसिद्धि मिली। कमला की बहुत ही कम उम्र में शादी हो गई थी। उस वक्त उनकी उम्र मात्र 15 साल की थी।

    उनका जन्म आज़ादी से तेरह साल पहले 1934 में केरल के साहित्यिक परिवार में हुआ था. छह वर्ष की आयु में ही उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया था. अपनी आत्मकथा ‘माई स्टोरी’ में कमला दास लिखती हैं, “एक बार गवर्नर की पत्नी मैविस कैसी हमारे स्कूल आईं.

    मैंने इस मौके पर एक कविता लिखी लेकिन हमारी प्रिंसिपल ने वो कविता एक अंग्रेज़ लड़की शर्ली से पढ़वाई. इसके बाद गवर्नर की पत्नी ने शर्ली को अपनी गोद में बैठा कर कहा कि तुम कितना अच्छा लिखती हो! मैं दरवाज़े के पीछे खड़ी वो सब सुन रही थी.”

    “इतना ही नहीं गवर्नर की पत्नी ने शर्ली के दोनों गालों पर चुंबन लिए और उनकी देखादेखी हमारी प्रिंसिपल ने भी मेरी आखों के सामने उसको चूमा. पिछले साल मैंने लंदन के रॉयल फ़ेस्टिवल हॉल में अपनी कविताओं का पाठ किया. आठ बजे से ग्यारह बजे तक मैं मंच पर थी.

    जब मैं स्टेज से नीचे उतरी तो कई अंग्रेज़ों ने आगे बढ़ कर मेरे गालों को चूम लिया. मेरे मन में आया कि शर्ली, मैंने तुमसे अपना बदला ले लिया.” उनके छोटे बेटे जयसूर्या दास, जो इस समय पुणे में रहते हैं, बताते हैं, “मेरी मां एक सामान्य इंसान थीं.

    अक्सर साड़ी पहनती थीं. कभी कभी वो लुंगी भी पहना करती थीं. उनको आभूषण पहनने का बहुत शौक था. वो अपने हाथ में 36 चूडियाँ पहनती थीं-18 दाहिने हाथ में 18 बाएं हाथ में. काफी भावनाप्रधान महिला थीं. दिन में दो बार नहाती थीं और परफ़्यूम की जगह अपनी पानी की बाल्टी में इत्र डालती थीं.”

  • पांच तबलीगी जमात को आरपीएफ ने सीमांचल एक्सप्रेस से टूंडला जंक्शन पर किया गिरफ्तार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली ,: रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने तब्लीगी जमात के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जब वे गुरुवार को सीमांचल एक्सप्रेस से निजामुद्दीन मरकज से अपने घर लौट रहे थे,

    एक जमात सदस्य ने कहा।
    आरपीएफ कर्मियों ने सुबह 11 बजे टूंडला जंक्शन पर अबू बकर (52) अबू सलमा (35) शाहनवाज उर्फ ​​छोटू (30) आफताब (35) और फुजैल (40) को हिरासत में ले लिया।

    गिरफ्तार किए गए लोगों में से तीन नेपाल के हैं जबकि दो बिहार के अररिया जिले के हैं।

    आज सुबह 100 से अधिक तब्लीगी सदस्यों का एक समूह आनंद विहार टर्मिनल पर सीमांचल एक्सप्रेस में सवार हुआ, जब ट्रेन टूंडला जंक्शन पर पहुंची तो आरपीएफ ने उनके कोच में प्रवेश किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    आरपीएफ कर्मियों ने तीन व्यक्तियों को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की। जब टीम के दो अन्य सदस्यों ने आपत्ति जताई, तो आरपीएफ के लोगों ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया, जिन्होंने मुख्यालय के एक सदस्य को टीम का हिस्सा बताया।

    वे निजामुद्दीन में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे।

    गिरफ्तार व्यक्तियों को लखनऊ भेजा गया है, उन्होंने टुंडेला के तबलीगी के एक स्थानीय सदस्य को सूचित किया है।

  • सुप्रिया ने संसद मे कहा:मुस्लिम औरतों ने मुझसे कहा हम अपने पति को कभी जेल नहीं भेजेंगे,क्योंकि वह हमारे बच्चों के पिता है

    मिल्लत टाइम्स,डेस्क: लोकसभा में तलाक बिल पर बहस के दौरान सांसद सुप्रिया सुले नेता के मुस्लिम औरतें भी इस बिल के खिलाफ है इन्होंने अपना भाषण देते हुए कहा कि मुस्लिम औरतें से मुलाकात हुई उन्होंने कहा कि हम अपने शहर को कभी भी जेल नहीं भेजना चाहेंगे क्योंकि वह हमारे बच्चों के पिता है

    शोले ने कहा कि मुस्लिम औरतें अपनी शरीयत के साथ खुश हैं और इस बिल के जरिए सियासत हो रही है इन्होंने बहस के दौरान भाजपा संसद पर महिलाओं के साथ बदसलूकी और नुकसान पहुंचाने का इल्जाम लगाया

  • नोएडा पुलिस की अजीब चाल:नमाजियों को रोकने के लिए पार्क में भरवा दिया गया पानी

    मील्लत टाइम्स,नोएडा: नोएडा पुलिस ने जिस पार्क में नमाज से मना किया था वहां आज काफी संख्या में पुलिस मौजूद है. यही नहीं पार्क में पानी भी भर दिया गया है. इस बीच नोएडा सेक्टर 58 में जुमे की नमाज के मुख्य आयोजनकर्ता ने गुरुवार को मुसलमानों से अपील की कि पार्क में एकत्र ना हों क्योंकि वहां जुमे की नमाज के लिए अनुमति नहीं मिली है. पुलिस ने उक्त पार्क में धार्मिक गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है.

    पार्क में जुमे की नमाज आयोजित करने वालों में से एक आदिल राशिद (45) ने कहा कि वह इस मामले में और विवाद नहीं चाहते हैं. पुलिस का कहना है कि वह हालात पर नजर रखेगी. इस महीने की शुरुआत में नोएडा पुलिस ने आदेश जारी किया था कि सरकारी भूखंडों पर जुमे की नमाज नहीं हो सकती है क्योंकि उसके लिए यथोचित अनुमति नहीं है.

    राशिद ने कहा,”मैंने पार्क में नमाज की अनुमति देने के लिए प्रशासन को आवेदन दिया था लेकिन वह नामंजूर हो गया. इसलिए जिन्हें सूचना नहीं है, मैं उन लोगों से अपील करूंगा कि वे जुमे की नमाज के लिए कल पार्क में ना आएं.”

    2013 से ही पार्क में जुमे की नमाज पढ़ाने का दावा करने वाले 24 वर्षीय मौलवी नोमान अख्तर ने कहा कि वह जुमे की नमाज के लिए पार्क में नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा कि राशिद और अख्तर को नमाज के लिए अवैध तरीके से पार्क का इस्तेमाल करने के आरोप में 18 दिसंबर को एहतियातन हिरासत में लिया गया और तीन दिन तक जेल में रखा गया था.(इनपुट एबीपी)

  • सऊदी अरब में फंसी हज़ारीबाग निवासी सिलविया पाउल की जल्द भारत वापसी के लिए प्रयासरत है:जयंत सिन्हा।

    अनवर हुसैन/मिल्लत टाइम्स,झारखंड: हजारीबाग कुछ दिन पूर्व केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री सह हज़ारीबाग सांसद जयंत सिन्हा को उनके संसदीय क्षेत्र हज़ारीबाग की निवासी रीमा मरांडी की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ था।
    आवेदन में रीमा मरांडी द्वारा बताया गया था कि उनकी माँ श्रीमती सिलविया पाउल को एक एजेंट द्वारा पासपोर्ट बनवाकर सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में घरेलू काम करने के लिये अप्रैल 2015 में भेजा गया था जो अब वहां फंस चुकी हैं और उनके मालिक के द्वारा उनको परेशान किया जा रहा है। साथ ही उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया है और पिछले एक साल से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया है। वह भारत वापस आना चाहती हैं लेकिन पासपोर्ट के अभाव में उनके लिये यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। वह वहां की पुलिस से भी संपर्क नहीं कर पा रही हैं।इस विषय में जयंत सिन्हा ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात कर उनसे मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर शीघ्र ही ठोस कदम उठाने व सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को सिलविया पाउल जी को जल्द से जल्द भारत वापस भिजवाने का निर्देश देने हेतु आग्रह किया था।

    इस मामले की प्रगति पर प्रति सप्ताह जयंत सिन्हा समीक्षा कर जेद्दाह के कार्यालय से संपर्क बनाये हुए हैं।
    यह निष्ठा अब रंग ला रही है। काउंसल जनरल, जेद्दाह के कार्यालय ने सिलविया पाउल से संपर्क स्थापित कर लिया है। साथ ही उनके मालिक की पत्नी से भी बात हुई जिन्होंने यह आश्वासन दिया है कि सिलविया पाउल को एक माह के भीतर उनका वीज़ा व बकाया वेतन प्राप्त हो जाएगा जिसके उपरांत वे भारत वापस आ सकेंगी।

    साथ ही काउंसिल जनरल का कार्यालय अपने एक सदस्य को सिलविया का हाल चाल जानने भेज रहा है। वह यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही बताया कि उनके मालिक से मिलकर उन्हें शीघ्र भारत वापस भेजने का प्रबंध किया जा रहा है।
    कुछ माह पूर्व भी सऊदी अरब से भारतीय मज़दूरों द्वारा फोन कर यह बताया गया था कि उन्हें यहां बंधक बनाकर रखा गया है। इस मामले में सुषमा स्वराज और जयंत सिन्हा के समन्वय और प्रयासों से 32 मज़दूरों की वतन वापसी हुई थी।

  • राम मंदिर पर भाजपा बिल लाई तो अदालत में देंगे चुनौती: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

    मिल्लत टाइम्स: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को कहा कि सरकार द्वारा अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिये अध्यादेश लाये जाने और तीन तलाक पर संसद में कानून बनाए जाने की स्थिति में वह उन्हें अदालत में चुनौती देगा। बोर्ड ने यह भी कहा कि मंदिर के लिये कानून बनाने की मांग कर रहे कुछ हिन्दूवादी संगठनों के भड़काऊ बयानों पर सरकार रोक लगाये और और उच्चतम न्यायालय उनका संज्ञान ले।

    बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की यहां हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य कासिम रसूल इलियास ने बताया कि केंद्र सरकार तीन तलाक पर अध्यादेश लाई है। इसकी मियाद छह महीने होगी। अगर यह गुजर गई तो कोई बात नहीं लेकिन अगर इसे कानून की शक्ल दी गई, तो बोर्ड इसको उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा।

    उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश मुस्लिम समाज से सलाह-मशवरा किए बगैर तैयार किया गया है और अगर सरकार इसे संसद में विधेयक के तौर पर पेश करेगी तो बोर्ड की समिति सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से गुजारिश करेगी कि वे इसे पारित ना होने दें। इलियास ने बताया कि बोर्ड का स्पष्ट रुख है कि वह बाबरी मस्जिद मामले में अदालत के अंतिम फैसले को स्वीकार करेगा।

    बैठक में यह भी राय बनी कि सरकार मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश या कानून लाने की मांग के साथ दिए जा रहे जहरीले बयानों पर रोक लगाए और उच्चतम न्यायालय भी इसका संज्ञान ले। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने इस मौके पर कहा कि अयोध्या के विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रहने की स्थिति में कानूनी तौर पर कोई अध्यादेश नहीं लाया जा सकता।

    यही वजह है कि सरकार ने यह रुख दिखाया है कि वह अध्यादेश नहीं लाएगी। अगर कोई अध्यादेश आता भी है तो वह कानूनन सही नहीं होगा और बोर्ड उसको चुनौती देगा।

    इस सवाल पर कि बोर्ड मंदिर बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद तथा अन्य कुछ संगठनों द्वारा विभिन्न आयोजन करके सरकार पर दबाव बनाए जाने की आड़ में दिये जा रहे भड़काऊ बयानों की शिकायत उच्चतम न्यायालय से क्यों नहीं करता, जीलानी ने कहा कि यह हमारे लिये मुनासिब नहीं है।

    हमारा मानना है कि जो लोग इस तरह के बयान दे रहे हैं उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई करे और उच्चतम न्यायालय भी इसका संज्ञान ले। उसके लिये उपाय सोचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि राम जन्मभूमि आंदोलन किसी पार्टी का कार्यक्रम हो सकता है, किसी सरकार का नहीं, क्योंकि हुकूमत धर्मनिरपेक्षता से आबद्ध है।

    जीलानी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में इस्माइल फारूकी मामले पर निर्णय के दौरान कहा गया है कि इस फैसले का असर अयोध्या मामले पर नहीं पड़ेगा। बोर्ड ने इसका स्वागत किया है। विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े मुकदमे की सुनवाई अब शुरू होनी है।

    अदालत यह कह चुकी है कि वह इस मसले का आस्था के आधार पर नहीं बल्कि जमीन पर मालिकाना हक के मुकदमे के तौर पर निर्णय करेगी। इलियास ने बताया कि बैठक में बोर्ड की दारुल कजा कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि इस साल देश में 14 नई दारुल कजा का गठन किया गया है।

    इस महीने के अंत तक कुछ और स्थानों पर भी इन्हें कायम किया जाएगा। दारुल कजा में कम वक्त में जायदाद, वरासत और तलाक जैसे मामलों का निपटारा किया जाता है। इससे बाकी अदालतों के बोझ को कम करने में मदद मिलती है।

    उन्होंने बताया कि बैठक में यह फैसला किया गया है कि दारुल कजा के अब तक दिये गये फैसलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा ताकि अदालत के बोझ को कम करने में दारुल कजा के योगदान को दुनिया के सामने लाया जा सके।