लुधियाना 20 अगस्त (मेराज़ आलम) आज यहां लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में रुअते हिलाल (चांद देखने वाली) कमेटी पंजाब की मीटिंग शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की अध्यक्षता में हुई। जिसमे देश भर से विभिन्न रूअते हिलाल कमेटियों की ओर से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार मुहर्रम उल हराम का चांद नजर आने की तसदीक की गई । शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने इस्लामी नववर्ष की बधाई देते हुए ऐलान किया कि 21 अगस्त को इस्लामी नववर्ष की एक तारीख है,और दस मुहर्रम उल हराम यौमे आशूरा का दिन 30 अगस्त दिन रविवार को होगा।
Category: मुस्लिम दुनिया
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आज मुहर्रम का चांद नजर आया: शाही इमाम पंजाब
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इस्लामिक स्टेटऑफ़ इराक एंड सीरिया – एक थ्रेट” विषय पर वेबिनार आयोजित
तरन्नुम अतहर
नोएडा – इस्लामिक स्टेटऑफ़ इराक एंड सीरिया – एक थ्रेट” विषय पर वेबिनार सीरीज का आयोजन नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ लॉ एंड लीगलअफेयर्स ने किया। इस वेबिनार सीरीज की अतिथि वक्ता पूर्व राजनयिक सुषमा गांगुली थॉमस ने आधुनिक आतंकवाद विशेषकर “इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया” से सम्बंधित संगठन की गतिविधियों एवं उनके क्रिया कलापों के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला। वेबिनार के प्रारम्भ में सर्वप्रथम कुलपति प्रोफसर डॉक्टर जयानंद ने अतिथि वक्ता पूर्व राजनयिक सुषमा गांगुली थॉमस का स्वागत किया। वेबिनार का आरंभ बैद्यनाथ मुखर्जी द्वारा एक स्वागत नोट के साथ किया गया, तदुपरांत अतिथि वक्ता पूर्व राजनयिक सुषमा गांगुली थॉमस ने “इस्लामिक स्टेटऑफ़ इराक एंड सीरिया – एक थ्रेट”विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया Iउन्होंने बताया कि सीरिया और इराक में सक्रिय आतंकवादी संगठन आई.एस.आई.एस (ISIS) पूरी दुनिया के लिए बड़े खतरे के रूप में उभरा है। इसके खौफनाक इरादों पर यदि समय रहते दुनिया नहीं चेती तो इंसानियत के दुश्मन इस संगठन की ताकत और बढ़ जाएगी। दुर्भाग्य से इसके खिलाफ लड़ाई को लेकर अमेरिका और रूस में मतभेद हैं। आई.एस.आई.एस एक शक्तिशाली आतंकवादी समूह है जिसने मध्य पूर्व के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। नागरिकों पर क्रूर हिंसाऔर जानलेवा हमले के लिए बदनाम इस स्व-वर्णित ख़लीफ़ा ने अनमोल स्मारकों, प्राचीन मंदिरोंऔर अन्य इमारतों को नष्ट करने और प्राचीन स्मारकों को नष्ट करने के अलावा, दुनिया भर में सैकड़ों आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है।
उन्होंने आगे कहा कि इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया को इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड दी लीवेंट भी कहते हैं। यह एक जिहादी संगठन है, जो कि इराक और सीरिया में इस्लाम के नाम पर हिंसा फैलाता है। आई.एस.आई.एस. को दुनिया भर में हिंसा की जघन्य वारदातों को अंजाम देने के लिए पहचाना जाता है, जिसमें सार्वजनिक फांसी, बलात्कार, हत्या और सूली पर चढ़ना शामिल है। समूह ने क्रूर हत्याओं की वीडियो टैपिंग और उन्हें ऑनला इन प्रदर्शित करने की नापाक प्रतिष्ठा अर्जित की है।
अपने व्याख्यान में उन्होंने आगे कहा कि आई.एस.आई.एस. को दुनिया का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन कहा गया है। जब कि अनुमानों में भिन्नता है, इस समूह को केवल 2014 में $ 2 बिलियन का बताया गया था। ISIS का ज्यादातर पैसा बैंकों, तेल रिफाइनरियों और अन्य क्षेत्रों में मौजूद संपत्ति पर नियंत्रण रखने से आया है।
इस समूह ने अपहरणकर्ताओं, करों, जबरन वसूली, चोरी की कलाकृतियों, दान, लूटपाट और विदेशी लड़ाकों से इस के खजाने को भरने के लिए अपहरण का भी इस्तेमाल किया है। आतंकवाद हिंसा का एक गैर-कानूनी तरीका है जो लोगों को डराने के लिये आतंकवादियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। आज, आतंकवाद एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। इसका इस्तेमाल आम लोगों और सरकार को डराने-धमकाने के लिये हो रहा है।भारत ढ़ेर सारी चुनौतियों का सामना कर रहा है जैसे गरीबी, जनसंख्या वृद्धि, निरक्षरता, असमानता आदि बहुत कुछ, फिर भी आतंकवाद इन सबसे ज्यादा खतरनाक है जो पूरी मानवजाति को प्रभावित कर रहा है। ये बहुत ही डरावनी बीमारी है जो लोगों को मानसिक और बौद्धिक स्तर पर प्रभावित कर रही है। चाहे ये छोटे देशों में होता हो (आयरलैंड, इज़रायल आदि) या बड़े देशों (यूएसए, रुस, भारत आदि) में; ये दोनों ही जगह चुनौती के रुप में है। अपने कुछ राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत लक्ष्य की प्राप्ति के लिये आतंकवादी समूह हिंसात्मक तरीकों का प्रयोग कर के आतंकवाद को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद का कोई नियम कानून नहीं होता वो केवल अपनी माँगों को पूरा करने के लिये सरकार के ऊपर दबाव बनाने के साथ ही आतंक को हर जगह फैलाने के लिये निर्दोष लोगों के समूह या समाज पर हमला करते हैं। उनकी माँगे बेहद खास होती हो,जो वो चाहते हैं केवल उसी को पूरा कराना चाहते हैं। यह मानव जाति के लिये एक बड़ा खतरा है।वो कभी-भीअपने दोस्त, परिवार, बच्चे, महिलाएं बूढ़े लोगों के लिये समझौता नहीं करते हैं। वो केवल लोगों की भीड़ पर बम गिराना चाहते हैं। वो लोगों पर गोलियाँ चलाते हैं, विमानों का अपहरण करते हैं और दूसरी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
भारत मे लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की मजबूत जड़ें हैं और यह आई.एस.आई.एस. एजेंडा के लिए परेशानी पैदा करता है। लेकिन जैसा कि आई.एस.आई.एस. के तौर-तरीकों से ऊपर सुझाया गया है, स्थानीय आतंकवादियों के समूहों के साथ कट्टरता और विलय के विभिन्न आकार में आ सकता है। इसलिए, भारत को घर में पैदा हुए आतंकवाद और कट्टरता को जड़ से उखाड़ने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। आतंकवाद का कोई नियम कानून नहीं होता वो केवल अपनी माँगों को पूरा करने के लिये सरकार के ऊपर दबाव बनाने के साथ ही आतंक को हर जगह फैलाने के लिये निर्दोष लोगों के समूह या समाज पर हमला करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में वेबिनार के संयोजक डॉ. परंतप दास, एचओडी, स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी एवं बैद्यनाथ मुखर्जी सहित मिस सौमि चटर्जी – असिस्टेंट प्रोफेसर – स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल अफेयर्स, एन.आई.यू सहित अनेक वक्ताओं ने विचार रखे ।
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भारत में ईद रही सूनी,लाकडाऊन का पालन करते हुए लोगों ने घरों में ही अदा की ईद की नमाज
कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने इस बार ईद को भी फीका कर दिया. सोशल डिस्टेंसिंग की लक्ष्मण रेखा ने लोगों को गले लगकर बधाई देने और खुशियां बांटने तक का मौका नहीं दिया. लोग ना तो बाजारों में नजर आए और ना ही मस्जिदों में.
सड़कों से लेकर मस्जिदों तक में सन्नाटा पसरा दिखाई दिया. लोगों ने घरों पर ही रहकर इबादत की. मस्जिदों में भी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करते दिखे.
दिल्ली की जिस जामा मस्जिद में ईद पर भारी संख्या में लोग जमा होते थे, इस बार वहां भी कोई चहलकदमी नहीं दिखी.
पुरानी दिल्ली की सड़कों पर हर तरफ भीड़ ही भीड़ नजर आया करती थी लेकिन इस बार सब कुछ अलग था. इक्का-दुक्का लोग ही मास्क पहन सड़कों पर दिखाई दिए लेकिन उनके चेहरे पर भी मायूसी ही थी.
ईद की सेवइयों में इस बार ना तो वो मिठास रही और ना ही पहले जैसा उत्साह. शायद ही पहले किसी ने ईद पर पूरी दुनिया में पसरे ऐसे सन्नाटे की कल्पना की होगी.
संक्रमण फैलने के डर से सरकार ने मस्जिदों में लोगों के इकट्ठा होकर नमाज पढ़ने पर रोक लगा रखी है. वायरस का डर इतना ज्यादा है कि लोग गले मिलना तो दूर हाथ मिलाने से भी कतरा रहे हैं(इनपुट आजतक)
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इस लॉकडाउन में कैसे मनाएं ईद उल-फितर,क्या है इस पर्व का महत्व:शौकत नोमान
रमजान के 30 रोजों के बाद चांद का दीदार कर ईद मनाई जाती है। पवित्र कुरान के अनुसार, रजमान के महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह अपने बंदों को बख्शीश और इनाम देता है। बख्शीश और इनाम के इस दिन को ईद-उल-फ़ित्र कहा जाता है। इस दिन लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए एक खास रकम निकालते हैं, जिसे जकात कहते हैं।
रमज़ान-उल-मुबारक माह के बाद ईद उल-फ़ित्र के इस मुबारक दिन के सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाह में जमा होकर ईद की नमाज अदा करते है! लेकिन इस बार कोरोना वायरस और लॉकडाउन् के मद्देनजर लोगो को ईद की नमाज़ अपने घरों में ही अदा करनी होगी! इस लॉकडाउन् के कारण कहीं भी इकठ्ठा होने पर मनाही है। इस साल चांद के दीदार के बाद ईद उल-फ़ित्र 25 मई को अपने घरों मनाई जाएगी! इस्लाम धर्म का यह त्यौहार भाईचारे का संदेश देता है। ईद कोई हल्ला मचाने या बाइक राइडिंग का त्योहार नहीं, यह आपसी रंजिशो को मिटा कर एक दूसरे के साथ खुशियां बाटने का त्यौहार है। लेकिन इस बार कोरोना संकट के कारण सोशल डिस्टेंसिग का पूरा ध्यान रखा जाएगा, ईद की खुशी यही होगी के हम इस ईद गले ना मिले और हाथ ना मिलाए। जैसा कि आप जानते है कि ये रमज़ान का पाक महीना अपने अंतिम चरणो में है।
रमज़ान का पाक महीना,चांद का दीदार, अल्लाह से पूरी दुनिया के अमनो-व-शुकून कि दुआए करना, वो हर पुराने गीले सिकवे को भुला कर मुहब्बत के साथ अपने इसी वतन के मिट्टी में ज़िन्दगी बसर करेंगे। बताते चले, इस बार की ईद में थोड़ी दूरियां होंगी, जहां भाव तो वहीं होगा पर दूरियां जरूर होंगी। हमे इस बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए इस लॉकडाउन् के नियमो का पालन करना होगा। इस बार भले ही हम घरों से बाहर नहीं निकल सकते और दोस्तो और रिश्तेदारों से नहीं मिल सकते। लेकिन परिवार के साथ घर पर रहकर ईद मनाने का आइडिया भी बुरा नहीं। आप अपने परिवार के साथ मिलकर सिवाईया के इलावा एक नए डिस का आगाज कर सकते है और साथ ही उस डीस रेसिपी(recipe) का वीडियो क्लिप बनाए और अपने दोस्तो और रिश्तेदारों में सेंड कर उन्हें भी प्रोत्साहित कीजिए के वो भी एक नए डीस का आगाज करे। इस बार ईदी पर सबसे ज्यादा संकट मंडरा रहा है, तो कोई बात नहीं, ई-ड्रांसफर तो जानते ही है। बच्चो को ई-ड्रांसफर के माध्यम से ईदी भेजे। जब बच्चो को ई-ट्रांजैक्शंस के जरिए सरप्राइज ईदी मिलेगी तो यकीन मानिए, उसकी खुशी दोगुनी हो जाएगी।
आखिर में,ईद की नमाज़ पढने से पहले फितरा अदा करना होता हैं। फितरा हर मुसलमान पर वाजिब है। अल्लाह ने हम सभी को एक ऐसी जिंदगी दी है, जहां हम लोगों की दुःख-दर्द को कम करने की पूरी कोशिश ताउम्र करते रहें। इसलिए अल्लाह की इबादत करते हुए इबादत करते हैं। इस आने वाली ईद में अल्लाह का रहमो करम कयामत तक बना रहे, ऐसी ख्वाहिश करते हुए शुरिया अदा करें।
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इस लोक डाउन में कैसे पढे़ं ईद की नमाज़
ख़ुर्रम मलिक
कोरोना वायरस की वजह से आज पुरा विश्व एक अजीब सी परिस्थिति से गुज़र रहा है. और इस का असर हर ओर देखा जा सकता है. इस महामारी की वजह से जहाँ स्कूल कॉलेज, बाज़ार बंद हैं वहीं दूसरी ओर मस्जिद मंदिर गिर्जा गुरुद्वारा बंद पड़े हैं. और ऐसे में मुसलमानों का पवित्र महीना रमज़ान भी आया जिस में मुसलमानों ने पुरी तरह सरकार और प्रशासन का सहयोग करते हुए अपने अपने घरों में ही नमाज़ ए तरावीह पढी़ ,और फिर देखते ही देखते यह पवित्र महीना भी गुज़रने को है. और उम्मीद की जा रही है के 25 मई सोमवार को मुसलमानों का पवित्र त्यौहार ईद उल फ़ितर मनाया जाएगा. जैसा के हम सब जानते हैं कि यह पवित्र त्यौहार रमज़ान में किये गए इबादतों का बदला है जिसे अल्लाह ने खुश हो कर मुसलमानों को दिया है.
और जिस की नमाज़ ईद गाह में होती है. लेकिन इस साल कोरोना वायरस की वजह से ईद की नमाज़ घरों में ही पढ़नी है. हम यहाँ आप को यह बताना चाहते हैं कि कैसे ईद की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा है. सब से पहले तो हमें किसी भी नमाज़ की नियत करनी होती है. वैसे नियत दिल से होनी चाहिए. अगर ज़ुबान से बोल दिया तो और भी अच्छा है.
नियत इस तरह करना है.
नियत करता हूँ मैं नमाज़ ईद उल फ़ितर की वाजिब. छे ज़ाएद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह त’आला के. रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़.
नियत के बाद तक्बीर ए तहरीमा (हाथों को कंधे तक उठाना है और फिर पेट पर बांध लेना) के बाद सना पढ़ना है उस के बाद दो और तक्बीर कही जाएगी. पहली तक्बीर के बाद हाथों को कंधे तक ले कर जा कर छोड़ देना है, फिर दूसरी बार भी ऐसा ही करना है. तीसरी तक्बीर के बाद हाथों को बांध लेना है और सुरह फ़ातिहा और उस के बाद कोई भी सुरह पढ़ना है. उस के बाद रुकु में जाना है फिर सज्दे में और इस तरह एक रकत पूरी करनी है.दूसरी रकत के लिये खड़े होंगे तो सब से पहले सुरह फ़ातिहा और फिर कोई सुरह मिलाएंगे और उस के बाद रुकु में जाने से पहले पहले तीन ज़ाएद तक्बीरें (अल्लाह हु अकबर) कहते हुए हाथ छोड़ देंगे और और चौथी तक्बीर कह कर रुकु में जाएंगे और सजदा के साथ सलाम फेर कर नमाज़ मुकम्मल करेंगे. नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा. नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा। यह दो है.
ईद उल फ़ितर का खु़त्बा यह है.खु़त्बा सुनना वाजिब है.
पहला खु़त्बा –
अल्लाह हु अकबर ,अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर,अल्हम्दु लिल्लाही रब्बिल आ लमीन वस सलातु अला सय्येदेना मुहम्मदिन खा़तिमिन नबीय्यीन. व’अला आ’लिही व’अस’हाबिही अज्म’ईन,अम्मा बा’द, फ़क़द क़ालल्लाहु त’आला ,क़द अफ़्लहा मन त’ज़क्का, व’ज़करस्मा रब्बिही फ़सल्ला, बल तु’सिरुनल हयातअद दुनिया, वल’आखि़रतु खै़रु व’अब्क़ा, इनना हाज़ा लफ़िस सुहुफ़िल ऊला, सुहुफ़ी इब्राहीमा वमुसा, वक़ाला रसुलुल्लाह सo अo वo इनना लिकुल्ली क़ौमिन ईदन वहाज़ा ईदुना, बा’रकल्लाहु लना वलकुम फ़िल्क़ुराआन इल अज़ीम, वनफ़ाना व’इय्याकुम बिहदी सय्येदिल मुरसलीन
दूसरा खु़त्बा-
अल्लाह हु अकबर ,अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर,
अल्हम्दु लिल्लाही नहमदुहू व’नस्तईनुहु व’नस्तग्फ़िरुहु ,वनु मिनु बिही, व’नतवक्कलु अलैही ,व’न’ऊज़ु बिल्लाही मिन शुरुरी अन्फ़ुसिना व’मिन सैय्येआती आमालिना ,वनश्हदु अल्लाह ही लाहा इल’ल्लाहु ,व’नश’हदु अन्ना मुहम्मदन रसुलुल्लाह, व’अला आलिही व’सहबिही ,व’बारका व’सल्लम, अम्मा बाद, क़ाला रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम, ज़कातुल फ़ितरी तुहरत उन लिस’साइमी मिनल लग़वी वर’रफ़सी व’तोमत उन लिल मसाकीनी औ कमा क़ाला अलैहिस सलामो, व’क़ाला त’आ’ला ,इननललाहा या’मुरु बिल अदली वल इहसानी व’ईता’ई ज़िल क़ुरबा व’यन्हा अन’इल फ़हशाई वल’मुन्करि वल’बग्यि़ , य’ईज़ुकुम ल’अल्लकुम तज़्कुरून, वलज़िक्रुल्लाही अकबर.यह है दोनों खु़त्बा जिसे लोक डाउन की वजह कर छोटा किया गया है. जिस से के कोई भी अरबी ज़ुबान का जानकार इसे पढ़ सकता है.
इस लिए आप सभी मुसलमान भाई से यह गुज़ारिश है के ईद उल फ़ितर की नमाज़ घरों में पढे़ं ,अगर किसी को नमाज़ पढ़ना नहीं आये तो वह चाश्त की नमाज़ पढ़ ले.
ख़ुर्रम मलिक इस्लामिक स्कॉलर और स्वतंत्र पत्रकार है। ये लेखक के निजी और व्यक्तिगत विचार हैं
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आज भारत में चांद नजर नहीं आया 25 को होगी ईद: शाही इमाम
लुधियाना 23 मई (मेराज़ आलम ब्यूरो) आज यहां पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना में रूअते हिलाल कमेटी पंजाब (चांद देखने वाली कमेटी) की विशेष मीटिंग हुई जिसकी अध्यक्षता पंजाब के शाही इमाम व रूअते हिलाल कमेटी पंजाब के अध्यक्ष मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने की। इस मीटिंग में पंजाब भर से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज कहीं भी ईद उल फितर का चांद नजर नहीं आया , इस लिए ईद का पवित्र त्योहार 25 मई दिन सोमवार को मनाया जाएगा।
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पवित्र महीने के पहले जुम्मे घरों में अदा की नमाज
रमजान में मुसलमान खामोशी से हर खास व आम की मदद करें : शाही इमाम पंजाब
लुधियाना, 1 मई (मेराज़ आलम ब्यूरो) : पवित्र रमजान शरीफ के आज पहले जुम्मे के अवसर पर शहर भर में मुसलमानों ने अपने-अपने घरों में नमाज अदा की। इस अवसर पर लुधियाना की एतिहासिक जामा मस्जिद से कौम के नाम लाइव संबोधन करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि इस पाक बरकत वाले महीने में सभी मुसलमान खामोशी के साथ अपने आप-पड़ोस में रहने वाले हर खास और आम की मदद करें। शाही इमाम ने कहा कि रमजान एक इंकलाबी इबादत है जो सिर्फ अल्लाह के लिए है और इसका बदला अल्लाह ही देते हैं।
उन्होंने कहा की रोजा रखने से इंसान में से बुराइयां खत्म हो जाती हैं और नेकी करने की आदत पड़ जाती है। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा की इस्लाम ने अपने मानने वालों को बिना किसी भेदभाव के इंसानियत की सेवा करने का आदेश दिया है कोई व्यक्ति उस वक्त तक रोजेदार नहीं बन सकता जब तक उसका दिल दूसरों के लिए साफ ना हो जाए। उन्होंने कहा के किसी के साथ भी धर्म और जाति के आधार पर नफरत नहीं की जा सकती, अल्लाह को अपने वह बंदे पसंद हैं जो सब इंसानों के साथ प्यार और मोहब्बत रखने का जज्बा दिखाते हो।
शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहां की सदका और मदद करने वाले सभी इस बात को यकीनी बनाएं कि जिस व्यक्ति की मदद की जा रही है उसके आत्म-सम्मान को ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा कि छुपकर और खामोशी से अपने आस-पास रहने वालों की मदद करना हम पर फर्ज है।
वर्णनयोग्य है कि आज लुधियाना की एतिहासिक जामा मस्जिद में शाही इमाम साहब के साथ पांच व्यक्तियों ने जुमे की नमाज अदा की। कोरोना के चलते शहर भर की मस्जिदों में आज जुमे की नमाज इसी तरह अदा की गई जबकि सभी मुसलमानों ने घरों पर जोहर की नमाज अदा की पवित्र रमजान शरीफ का आज 7वां रोज़ा है और लोग रमजान के रोजे रखने के साथ-साथ एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं
जामा मस्जिद में संबोधन करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी।
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पवित्र रमजान घरों में नमाज अदा करेंगे मुसलमान : शाही इमाम पंजाब
लुधियाना की एतिहासिक जामा मस्जिद से रमजान की समय सारणी जारी,24 को देखा जाएगा चांद
लुधियाना 21 अप्रैल ( मेराज़ आलम ब्यूरो) : आज यहां एतिहासिक जामा मस्जिद से पवित्र रमजान शरीफ के महीने को लेकर आदेश जारी करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि पवित्र रमजान के महीने में सभी मुसलमान रमजान के रोजे रखने के साथ-साथ तरावीह की नमाज अपने घरों में ही अदा करेंगे। शाही इमाम ने कहा कि प्रदेश की सभी मस्जिदों में कुराने पाक सुनाया जाएगा जिसमें मस्जिद के इमाम, मुअज्जिन (अज़ान देने वाले) के साथ साथ तीन सदस्य उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा सभी लोग अपने अपने घरों में ही तरावीह की नमाज पढ़ेंगे।
शाही इमाम ने बताया कि विश्व भर में चल रहे कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान को और ज्यादा मजबूत बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का नेटवर्क तोडऩा हर एक इंसान का फर्ज है, इसी बीच आज यहां एतिहासिक जामा मस्जिद से पवित्र रमजान शरीफ में रखे जाने वाले रोजों को लेकर रोजा रखने और खोलने की समय सारणी भी जारी की गई जिसमें 25 अप्रैल से 25 मई तक की सेहरी और इफ्तार का समय प्रकाशित किया गया है।
शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने बताया कि पवित्र रमजान शरीफ का चांद 24 अप्रैल की शाम को मगरिब की नमाज के बाद देखा जाएगा। उन्होंने बताया कि चांद नजर आने की सूरत में 25 अप्रैल का पहला रोजा होगा, अगर 25 अप्रैल को चांद नजर नहीं आया तो 26 अप्रैल से पवित्र रमजान शरीफ का महीना शुरू होगा। मुस्तकीम ने बताया कि चांद देखने का ऐलान 24 अप्रैल को रुअते हिलाल कमेटी (चांद देखने वाली कमेटी) की अध्यक्षता करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी करेंगे।
दर्से रमज़ान प्रोग्राम होगा शुरूलुधियाना पवित्र रमजान शरीफ और लॉकडाऊन को देखते हुए रमजान कैसे गुजारे इबादत में कौन-कौन सी दुआएं पढ़ी जा सकती हैं इन सब बातों की रहनुमाई करने के लिए एतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना से 24 अप्रैल की रात 10 बजे से रोजाना दर्से रमजान प्रोग्राम ऑनलाइन शुरू किया जाएगा जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब व अन्य सोशल मीडिया पर लाइव प्रोग्राम चलेगा।
शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने बताया की दर्से रमजान में रोजाना कुरान शरीफ की तिलावत नाते रसूले पाक के बाद नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी संबोधन किया करेंगे। इस प्रोग्राम का रोजाना रात 10 से 11 बजे तक जामा मस्जिद के फेसबुक, यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाएगा।
शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी पवित्र रमज़ान शरीफ की समय सारणी जारी करते हुए।
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जयपुर में सामूहिक रूप से नमाज अदा करने पर पुलिस ने इमाम समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है।
अशफाक कायमखानी,जयपुर। कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन का दूसरा फेज 3 मई तक लागू है. लोगों को जागरुक करने के बावजूद भी लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. वहीं, राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामूहिक रूप से नमाज अदा करने पर पुलिस ने इमाम समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है.
मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे थे लोगडीसीपी राहुल जैन ने बताया कि मुखबीर के जरिए सूचना मिली थी कि खोह नागोरियां क्षेत्र में स्थित आयशा मस्जिद में इमाम सहित 15 लोगों द्वारा बिना सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए सामूहिक नमाज अदा की जा रही है. पुलिस ने सभी नमाजियों की पहले वीडियोग्राफी कराई. नमाज अदा करने के बाद सभी लोगों से किसी सक्षम अधिकारी द्वारा परमिशन लेने की बारे में पूछा गया तो सामने आया कि किसी ने भी इस मामले में परमिशन नहीं ली थी।
।कई धाराओं का उल्लंघन।
पुलिस ने बताया कि इन लोगों द्वारा धारा 144 का उल्लंघन करना, लॉकडाउन के निर्देशों की अवहेलना करने, क्वारंटाइन में रहने के निर्देशों की अवहेलना करना और संक्रमण फैलाने में लापरवाही करना का प्रयास किया गया है. इन लोगों के खिलाफ धारा-188, 269, 270 और 271 के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन 2005 की धारा-51 और राजस्थान महामारी अधिनियम 1957 के धारा-3 हिरासत में लिया गया है.
।खोह नागोरियान में मिल चुका है पॉजिटिव।
गौरतलब है कि खोह नागोरियां क्षेत्र में पिछले दिनों एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुका है. जिसके बाद क्षेत्र में विशेष एहतियात बरते जा रहे हैं. साथ ही कोरोना पॉजिटिव मरीज के घर के आसपास के क्षेत्रों में कर्फ्यू भी लगाया जा चुका है.
जयपुर में बढ़ते जा रहे हैं कर्फ्यू के क्षेत्र
जयपुर में फिलहाल तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में एक दो दिनों से कुछ कमी आई है. लेकिन कर्फ्यू वाले इलाकों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. विद्याधर नगर थाना क्षेत्र के मेजर शैतान सिंह कॉलोनी में एक कोरोना मरीज मिलने के बाद क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. डीसीपी राजीव पचार ने कर्फ्यू को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं. अब पुलिस द्वारा चिन्हित क्षेत्र में विशेष एहतियात बरती जा रही है.
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बिहार:चक बहाउद्दीन और बाबूपुर मस्जिदों में तब्लीगी जमात के सभी सदस्यों की रिपोर्ट नेगेटिव
रक्त का नमूना पटना भेजा गया, सभी लोग जांच में स्वस्थ पाए गए
(दलसिंह सराय: 7 अप्रैल) समस्तीपुर जिले के दलसिंह सराय ब्लॉक में स्थित चक बहाउद्दीन गाँव और बाबूपुर की मस्जिद में ठहरे हुए तब्लीगी जमात के सभी पंद्रह सदस्यों के कोरोना का परीक्षण किया गया है और सभी लोगों की रिपोर्ट को नेगेटिव पाया गया है। ज्ञात हो कि 2 मार्च से, तब्लीगी जमात के 15 सदस्य चक बहाउद्दीन और बाबूपुर की मस्जिद में ठहरे हुए थे, जो लॉकडाउन के कारण अपने स्थान पर नहीं लौट सके थे। इन सभी लोगों का संबंध हरदोई, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश), अनूपपुर (मध्य प्रदेश) और दिल्ली से है । तबलीगी जमात के सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं : मोहम्मद ओज़ैर अहमद , मोहम्मद आमिर, मोहम्मद हमज़ा सेराज , मोहम्मद सोहराब , मोहम्मद इस्राइल , मोहम्मद शादाब, मोहम्मद वसीम , मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद जकी, मोहम्मद इफजान, जुनेद कुरैशी, मोहम्मद रिज़्वान , मोहम्मद सरफराज कुरैशी, मोहम्मद आसिफ़, मोहम्मद रेहान
चक बहाउद्दीन पंचायत के मुखिया अदीब कौकब फरीदी ने मीडिया को बताया कि उनके ठहरने की सूचना उसी समय स्थानीय पुलिस और प्रशासन को दे दी गई थी। प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आ कर उन सब की जांच की और उन्हें स्वस्थ पाकिर मस्जिद में क्वारेंटाइन में रहने का निर्देश दिया। अत: सात लोग चक बहाउद्दीन की मस्जिद में और आठ लोग बाबूपुर मस्जिद में ठहरे थे। लेकिन अचानक, शुक्रवार को, स्वास्थ्य विभाग की टीम आई और उन सब लोगों को दलसिंघ सराय ले गई तथा उन्हें दलसिंघ सराय में स्थित ए एन कॉलेज में बने कोरनटाईन केंद्र में रखा और ब्लड सैंपल जांच के लिए पटना भेजा। आज इन सभी लोगों की रिपोर्ट आ गई है और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई है और सब लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं ।चुनांचे स्थानीय प्रशासन द्वारा सभी सदस्यों को दोनों मस्जिदों में पहुंचा दिया गया है, परंतु एहतियात के तौर पर चौदह दिनों के लिए मस्जिद में ही रहने की सलाह दी गई है।इन लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आने से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है और खुशी जाहिर की है।