Category: विदेश

  • मुख़्तार अंसारी के बेटे नें लंदन में ऐसे मनायी होली की दुनिया भर में भारतीय संस्कृति की क़ायम की मिसाल

    अजवद कासमी,ग़ाज़ीपुर यूपी:उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट मऊ के बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर बिन मुख़्तार अंसारी अक्सर अपने अलग अन्दाज़ के कारण चर्चा में रहते हैं।

    दो दिन पहले बीते होली के त्योहार पर पूरा देश इस रंग बिरंगे त्योहार पर जमकर जश्न मनाया है मगर उमर बिन मुख़्तार अंसारी जो इन दिनों लंदन में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं उन्होंने वहाँ सात समुंदर पार होली के त्योहार को अपने भारतीय मूल के दोस्तों साथ साथ विदेशी मित्रों के साथ अलग अन्दाज़ में जश्न मना कर पूरे भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

    जहाँ एक तरफ़ आज भारत में कट्टरता चरम पर है और त्योहारों पर भले ही एक तबक़ा अपने धर्मानुसार जश्न मना रहा होता है तो दूसरे तबके में माहौल ख़राब होने का डर लगा रहता है ऐसे हालात में हिंदू वर्ग के लोगों का बड़ा त्योहार होली के मौके पर मऊ के बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर बिन मुख़्तार अंसारी सात समुंदर पार लंदन में अपने विदेशी मित्रों जिनमे हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,पारसी जैन सभी धर्मों के मानने वाले शामिल थे के साथ होली का जमकर लुत्फ़ उठा रहे थे जिसकी तस्वीरें और उन्होंने अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा की मेरे भारत के सभी लोगों को होली की ढेर सारी बधाइयाँ और साथ में मिलजुल कर रहने के साथ साथ मुहब्बत को फैलाने पैग़ाम दिया।
    यहाँ आपको बता देना ज़रूरी है की पिछले कुछ वर्षों से देश के हालात काफ़ी तेज़ी से बदले हैं और धर्म की आड़ में राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में नेता गण बहुत उतावले होते दिख रहे हैं।

    आपको याद होगा कि पिछले साल ईद के मौक़े पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का एक बयान काफ़ी चर्चा में था जिसकी निंदा सेक्युलर सोच रखने वाले क़ई नेताओं ने भी की थी।

    योगी आदित्यनाथ का बयान था कि मैं एक हिंदू हूँ और मैं ईद नही मनाता।
    लेकिन होली के मौक़े पर उमर बिन मुख़्तार अंसारी ने भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी जिस उत्साह से रंगों में डूब कर होली मनाते हुए एकता और प्रेम का संदेश दिया है उससे पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का मान और बढ़ गया है एवं साथ ही देश के बिगड़ते ऐसे हालात में उमर बिन मुख़्तार अंसारी का ये क़दम गंगा जमुनी तहज़ीब की एक बेहतरीन मिसाल,बहुत सराहनीय और सुकून देने वाला है।

    आपको बता दें की उमर बिन मुख़्तार अंसारी मऊ के बाहुबली विधायक मुख़्तार अंसारी के छोटे बेटे हैं और वो राष्ट्रीय निशानेबाज़ भी हैं जो इस समय लंदन की Middlesex यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हैं।

  • न्यूजीलैंड:मस्जिदों में आतंकी हमले के बाद सरकार ने सभी तरह के हथियारों की बिक्री पर लगाया प्रतिबंध

    क्राइस्टचर्च:न्यूजीलैंड की दो मस्जिदों में पिछले दिनों हुए कत्लेआम के बाद सरकार ने हथियार नीति में बदलाव किया। गुरुवार को प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने कहा कि न्यूजीलैंड में सभी तरह के सेमी ऑटोमैटिक हथियारों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा सभी असॉल्ट राइफलों की बिक्रीपर रोक होगी। जेसिंडा ने कहा कि इनमें ऐसे हथियार भी फायर आर्म्स भी शामिल हैं, जिन्हें सेमी ऑटोमैटिक हथियारों में बदला जा सकता है।

    क्राइस्टचर्च स्थित अल-नूर और लिनवुड मस्जिद में बीते शुक्रवार (15 मार्च) को हुए हमले में 50 लोगो मारे गए थे। इनमें 8 भारतीय थे। हमलावर ब्रेंटन टैरेंट (28) ने नमाज के दौरान लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस दौरान 50 से ज्यादा लोग जख्मी भी हुए थे। इसमें बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी बाल-बाल बच गए थे। दुनियाभर में हमले की निंदा की गई। आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री आर्डर्न ने गन कानून में बदलाव करने की बात कही थी।

    पहली पेशी में कोर्ट में हंस रहा था टैरेंट

    ऑस्ट्रेलियाई मूल के आरोपी ब्रेंटन को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया था। उसे 5 अप्रैल तक हिरासत में भेजा गया। पहली पेशी में टैरेंट को हथकड़ी लगी हुई थी। इस दौरान वह पूरे समय मुस्कुराता दिखा था। कुछ देर मीडिया की तरफ बनावटी हंसी में उसने सबकुछ ठीक होने का इशारा किया। हत्यारे के बचाव के लिए सरकारी वकील साथ गए थे, लेकिन उसने अपने वकील को हटाकर खुद केस लड़ने का फैसला किया। टैरेंट ने कोर्ट में खुद को फासिस्ट बताया और जमानत के लिए आग्रह भी नहीं किया।


    कोर्ट में हमलावर ब्रेंटन टैरेंट।

  • काले स्कार्फ़ में शोक मनातीं न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री खुद में एक ऐतिहासिक औरत हैं

    क्या हम कभी 37 साल की एक बिन-ब्याही मां को अपनी PM चुन सकते?

    15 मार्च. दुनिया का दूसरा सबसे शांतिपूर्ण देश न्यूजीलैंड. यहां एक जगह है क्राइस्टचर्च नाम की. जुम्मे का दिन था. लोग मस्जिदों में नमाज़ अदा करने गए हुए थे. तभी अंधाधुंध गोलियां चलने लगती हैं. हर तरफ अफ़रा-तफ़री मच जाती है. हमले में 50 लोग मार दिए जाते हैं. 50 और घायल हो जाते हैं.

    कुछ घंटों में देश की प्रधानमंत्री काली कमीज़ पहने, सर पर काला दुपट्टा लपेटे घटनास्थल पर पहुंचती हैं. मृत लोगों के परिवार वालों के पास जाती है. एक छोटे बच्चे के साथ खड़ी महिला, जिसने किसी अपने को खो दिया है, को गले लगाती है. महिला रोती है. प्रधानमंत्री महिला को और कसकर भींच लेती है. कई सेकंड महिला को कलेजे से लगाकर रखती है.

    उसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेस में कहती है:

    “उन्होंने (मुसलमान समुदाय) इस मुल्क को अपना मुल्क चुना है. इसलिए ये उनका मुल्क है.”

    हमला ब्रेंटन टैरंट नाम के एक आदमी ने किया था. ऑस्ट्रेलिया का रहने वाला था. प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने इसे आतंकवादी हमला करार कर दिया. ये कहना बड़ी बात थी. क्योंकि दुनियाभर के मीडिया के साथ कई लोग भी इसे ‘हेट क्राइम’ कह रहे हैं. पर ये ‘हेट क्राइम’ नहीं था. ये एक आतंकी हमला था. जो कि बहुत तफ़सील से प्लान किया गया था. और जिसमें 50 लोगों ने अपनी जान गंवाई.

    प्रधानमंत्री ने कहा, “ब्रेंटन टैरंट के विचारों के लिए न इस देश में. और न ही दुनिया में कोई जगह है.” साथ ही जेसिंडा ने ये भी ऐलान किया है कि मारे गए लोगों के परिवार वालों को उनके जनाज़े का ख़र्चा नहीं उठाना होगा. ये काम न्यूजीलैंड की सरकार करेगी.

    कौन हैं जेसिंडा आर्डर्न

    जिस प्रधानमंत्री की हम बात कर रहे हैं. वो 38 साल की, किसी भी धर्म को न मानने वाली, एक बिन-ब्याही मां है. जिसे हम इंडिया में देश की पॉलिटिक्स तो दूर, अपने घर में घुसने लायक भी न समझें.

    1. जेसिंडा न्यूजीलैंड की 40वीं प्राइम मिनिस्टर हैं. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने बतौर रिसर्चर की थी. वो 2001 के समय अपॉइंट हुई PM हेलेन क्लार्क के ऑफिस में काम करती थीं. लेबर पार्टी की लीडर बनाए जाने के बाद 2017 में उन्होंने अपनी सरकार बनाई.

    2. 21 जून 2018 में जेसिंडा ने एक बेटी को जन्म दिया. वो दुनिया में दूसरी ऐसी लीडर हैं जो प्राइम मिनिस्टर या प्रेसिडेंट का रोल निभाने के दौरान मां बनीं. प्रेगनेंट होते ही लोगों ने पूछा कि क्या वो मैटरनिटी लीव लेंगी. लेंगी तो देश का क्या होगा. जेसिंडा ने एक रेडियो प्रोग्राम में कहा, “मैं लीव लूं या न लूं, ये मेरी चॉइस होगी. हर औरत का अधिकार होता है ये चुनना कि वो कितना और कब तक काम करना चाहती है.”

    जेसिंडा ने बच्ची को जन्म दिया. फिर डेढ़ महीने की मैटरनिटी लीव पर गईं. ऐसा करने वाली वो दुनिया की पहली प्रधानमंत्री थीं.

    3. जेसिंडा की मां एक स्कूल में कैटरिंग का काम करती थीं. और उनके पिता पुलिस अफसर थे. स्कूल खत्म करने के बाद जेसिंडा ने पॉलिटिक्स और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की. ग्रेजुएशन के बाद जेसिंडा की आंटी उन्हें पॉलिटिक्स में ले आईं. वो ख़ुद काफ़ी समय से लेबर पार्टी की मेम्बर थीं. 2008 में जेसिंडा बतौर सांसद चुनी गईं. फिर वहां से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफ़र.

    4. जेसिंडा के परिवार वाले काफ़ी धार्मिक थे. उनको बतौर मॉरमॉन पाला गया. ये क्रिश्चियनिटी की ही एक शाखा है. पर जेसिंडा को अपने धर्म में सिखाई जा रही कुछ चीज़ों से दिक्कत थी. वो गे समुदाय के हक़ के लिए बोलती थीं. उनका धर्म इसकी इजाज़त नहीं देता था, इसलिए उन्होंने अपना धर्म छोड़ने का फ़ैसला लिया.

    6. 2012 में जेसिंडा क्लार्क गेफ़ोर्ड से मिलीं. वो एक टीवी एंकर हैं. दोनों की मुलाकात उनके एक कॉमन दोस्त ने करवाई थी. पहली मुलाकात के बाद दोनों काफ़ी समय तक नहीं मिले. एक दिन किसी काम के सिलसिले में क्लार्क ने जेसिंडा को कॉल किया. फिर क्या था. दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे. उन्होंने शादी नहीं की. वो साथ में रहते हैं और अपना परिवार चलाते हैं.

    7. दोनों ने एक बिल्ली पाली जो वर्ड फ़ेमस हो गई. क्योंकि उसका ख़ुद का ट्विटर पर एक अकाउंट था. 2017 में उसकी एक एक्सीडेंट में मौत हो गई.

    जेसिंडा 2017 में प्रधानमंत्री बनी थीं. उनकी छवि एक सॉफ्ट व्यक्ति के तौर पर रही थी. जो धाकड़ और दबंग से ज्यादा, कोमल और धैर्यवान लगती थीं. उनके आलोचकों ने कहा, यही रवैया रहा तो सरकार नहीं चलेगी. जवाब में जेसिंडा ने कहा, “दूसरों के दर्द को समझना और एक शांत हृदय रखना ही असल बहादुरी है. मुझे गर्व है कि मेरी पॉलिटिक्स में करुणा का भाव है.”

    जेसिंडा लगातार युद्ध और न्यूक्लियर हथियारों के विरोध में बोलती देखी जाती हैं. क्राइस्टचर्च आतंकी हमले के बाद भी उन्होंने मुसलमान समुदाय से ये वादा किया कि वो वहां के ‘गन-लॉ’ बदल देंगी. यानी लोगों को जो आसानी से बंदूक रख पाने की सुविधा मिली है, उसमें बदलाव करेंगी

    जेसिंडा वही कर रही हैं जो किसी भी प्रधानमंत्री को करना चाहिए. हमारे राजनेताओं को इनसे सबक लेना चाहिए. जो घड़ी-घड़ी युद्ध के लिए न सिर्फ तैयार रहते हैं. बल्कि उसके आधार पर वोट भी ले आते हैं.

    लेखक: सरवत फातिमा

  • मुस्लिमों के खिलाफ बयान देने वाले ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पर अंडे से हमला

    न्यूजीलैंड के क्राइंस्टचर्च पर नृशंस हमले को लेकर विवादित बयान देने वाले ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पर एक युवा शख्स ने अंडे से हमला कर दिया. ऑस्ट्रेलिया के विवादित सीनेटर फ्रेजर एनिंग मेलबर्न में पत्रकारों से बात कर रहे थे तभी ये वाकया हुआ.

    ये पूरी घटना पत्रकारों के कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. इस घटना का वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया है. इस वीडियो में एनिंग पत्रकारों से बात करते दिख रहे हैं. तभी एक युवा शख्स पीछे से आता है और सीनेटर के सर पर अंडा पटक देता है. गुस्साये एनिंग तुरंत पीछे मुड़ते हैं और इस शख्स को घूसा मारने लगे. तभी वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ा इसके बाद उन्होंने इस शख्स को छोड़ा.

    बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई के क्वींसलैंड से सीनेटर फ्रेजर एनिंग ने कहा था कि न्यूजीलैंड में प्रवासियों की बढ़ोतरी इस हमले के कारणों में से एक है. उन्होंने शुक्रवार को कहा था, “न्यूजीलैंड की गलियों में खून खराबे का असली कारण इमीग्रेशन प्रोग्राम है, जिसकी वजह से कट्टरपंथी मुस्लिमों को न्यूजीलैंड में आने का मौका मिला.”
    https://twitter.com/Henry_Belot/status/1106790914414919681?s=19

    सीनेटर फ्रेजर एनिंग के इस हमले की दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने एनिंग के बयान ‘कुरुप’ और ‘खेदजनक’ बताया. उन्होंने कहा कि उनके बयान का ऑस्ट्रेलिया में कोई महत्व नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मैरिसन ने कहा, “सीनेटर फ्रेजर एनिंग द्वारा इस हिंसक, दक्षिणपंथी और आतंकी हमले के लिए इमीग्रेशन प्रोग्राम पर आरोप लगाया दुर्भाग्यपूर्ण है, इन विचारों को ऑस्ट्रेलिया में कोई जगह नहीं है, ऑस्ट्रेलियाई संसद की बात तो छोड़ ही दीजिए.”

    बता दें कि शुक्रवार को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए इस आतंकी हमले में ब्रेंटन टैरेंट नाम के एक ऑस्ट्रेलियाई मूल के शख्स ने मस्जिद में नमाज पढ़ रहे मुस्लिमों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थी. इस हमले में अबतक 49 लोगों की मौत हो गई है. मरने वाले में 6 भारतीय मुस्लिम भी शामिल हैं. इनमें 4 गुजरात के रहने वाले हैं, जबकि दो हैदराबाद के रहने वाले हैं.

  • न्यूजीलैंड:दो मस्जिदों में आतंकी हमले में 49 की मौत,9 भारतीय लापता;हमलावर ने घटना फेसबुक पर किया लाइव

    वेलिंगटन:न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की अल-नूर औरलिनवुड मस्जिद में शुक्रवार को गोलीबारी हुई। हमला दोपहर की नमाज के बाद किया गया। इसमें 49लोग मारे गए और 50जख्मी हैं। पुलिस ने बताया कि 4 लोगों को हिरासत में लिया गया। लेकिन अभी हमलावर की तलाश जारी है। प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने इसे आतंकी हमला करार दिया है।एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मस्जिद के पास से एक कार से कई आईईडी को डिफ्यूज किया। उधर,ऑकलैंडस्थित ब्रिटोमार्ट स्टेशन पर भी एक बम डिफ्यूज किया गया।

    न्यूजीलैंड में भारतीय राजदूत ने ट्वीट किया, “स्त्रोतों से मिल रही जानकारी के मुताबिक हमले में 9 भारतीय/भारतीय मूल के लोगों के लापता होने की खबर है। आधिकारिक जानकारी आना बाकी है।”

    हमलावर ने फेसबुक पर लाइव किया कत्लेआम
    न्यूजीलैंड पुलिस के मुताबिक, हमलावर एक ऑस्ट्रेलियाई युवक ब्रेंटन टैरेंट (28) था। उसने मस्जिद में घुसने से पहले ही फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में हमलावर को मस्जिद के अंदर घुसकर लोगों पर गोलियां बरसाते देखागया। हालांकि, घटना के बाद फेसबुक और ट्विटर ने यह वीडियो ब्लॉक कर दिया।गोलीबारी के बाद हमलावर ने वापस अपनी कार में बैठकर बंदूक के अटकने और लोगों को आसानी से मारने के बारे में भी बात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंटन नेखतरनाक मंशा वाला37 पन्नों के एक मैनिफेस्टो भी लिखा था।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन के मुताबिक- ब्रेंटन ऑस्ट्रेलिया का नागरिक है और वह कट्टरपंथी राइट विंग से जुड़ा है।

    नमाज के लिए गए थे बांग्लादेश के खिलाड़ी

    गोलीबारी स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर करीब 1.45 बजे हुई। बांग्लादेश टीम के कुछ सदस्य कोचिंग स्टाफ के साथ नमाज पढ़ने अल-नूर मस्जिद गए थे। ईएसपीएन के बांग्लादेश के कॉरस्पॉन्डेंट मोहम्मद इस्लाम भी खिलाड़ियों के साथ थे। इस्लाम के मुताबिक- खिलाड़ी जैसे ही बस से उतरे, उन्होंने मस्जिद के अंदर गोलियों की आवाज सुनी। वे भीतर जाने ही वाले थे कि कई लोग अंदर से भागते हुए निकले। कुछ लोगों ने खिलाड़ियों के सामने ही दम तोड़ा। 10 मिनट में ही खिलाड़ी वहां से होटल के लिए निकल गए।

    बांग्लादेश के क्रिकेटर तमीम इकबाल ने ट्वीट किया- हमलावरों से पूरी टीम सुरक्षित है। यह एक भयावहअनुभव रहा। हमारे लिए प्रार्थना करें।बांग्लादेश टीम के प्रवक्ता ने कहा कि पूरी टीम सुरक्षित है लेकिन सभी खिलाड़ी मानसिक रूप से तनाव में हैं।

    भारत सभी प्रकार के आतंक निंदा करता है- प्रधानमंत्री मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले में मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति दुख और संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मोदी ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ”भारत सभी प्रकार के आतंक और उनका इस तरह की घटनाओं का समर्थन करने वालों की निंदा करता है। इस प्रकार की घृणा और हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।”

    घायलों में एक हैदराबाद का भी युवक
    हमले में घायल लोगों में एक हैदराबाद का युवक भी शामिल है। अहमद जहांगीर के अल नूर मस्जिद में शुक्रवार को नमाज़ के लिए गए थे। उनके भाई खुर्शीद इकबाल ने बताया कि अहमद को अस्पताल में भर्ती किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक वीडियो मिला है जिसमें उनके भाई नजर आ रहे हैं उसके सीने में गोली लगी है और वह स्ट्रेचर पर लेटा है। अहमद 15 साल पहले न्यूजीलैंड में शिफ्ट हुए हैं और यहां मस्जिद के पास रेस्टोरेंट चलाते हैं।

    स्कूल बंद किए गए
    इस घटना के बाद देशभर में मस्जिदों को बंद करने के लिए कहा गया है।पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने गोलीबारी के चलते क्राइस्टचर्च के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। ऑफिस, लाइब्रेरी और इमारतें भी बंद कर दी गई हैं।माइक ने लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर न निकलें और किसी व्यक्ति के संदिग्ध बर्ताव की सूचना दें। एक चश्मदीद ने बताया कि उसने गोलीबारी की आवाज सुनी। चार लोग जमीन पर गिरे हुए थे और हर तरफ खून बिखरा हुआ था।

    सिटी काउंसिल ने पेरेंट्स के लिए हेल्पलाइन जारी की है ताकि बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके। पास के इलाके में जलवायु परिवर्तन रैली के लिए लोग जुटने वाले थे। पुलिस ने कहा कि जब तक कहा न जाए, लोग किसी भी इलाके में न जाएं।

  • चीन को लेकर अभी-अभी देखा गया एक सपना, सपने में सुना मोदी का भाषण

    रवीश कुमार

    भाइयों बहनों, हम चीन को पिचकारी मार-मार कर रंग देंगे। चीन ने आतंकी का साथ दिया है। उसकी सज़ा भुगतनी होगी। हमने पाकिस्तान को घुस कर मारा। अब चीन को पिचकारी से मार देंगे। होली के पहले जितनी भी पिचकारियां आई हैं, मैं हर देशभक्त से अपील करूंगा कि वह सिर्फ तीन चीज़ें लेकर सीमा पर पहुंचे। एक बाल्टी पानी, रंग और चीन की पिचकारी। इसके बार हम सब पिचकारी से ही चीन की सेना को ज़ुकाम करा देंगे। छींकते छींकते चीन की बोलती बंद हो जाएगी।

    भाइयो बहनों, मैंने सारे एंकरों को ट्वीट किया है कि वे भी स्टुडियो में पिचकारी लेकर एंकरिंग करें। अब हर भारतीय के लिए कांग्रेसी चीन के समर्थक बन गए हैं। कांग्रेस के नेताओं ने पाकिस्तान का समर्थन किया है। चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया है। एंकरों से अपील है कि वे कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक और राजीव त्यागी को रंग रंग कर रंग दें। हम बदला लेंगे। हर हर मोदी, घर घर होली।

    प्रधानमंत्री का यह भाषण सुनकर मैं तैयार हो कर व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के लिए निकल पड़ा। इनबाक्स के बस्ते में पड़ी किताबों को पलटने लगा। वामपंथी प्रोफेसर ने उस चैप्टर को गायब कर दिया था जिसमें चीन की पिचकारी के विरोध का इतिहास लिखा था। सुबह से एक भी मेसेज नहीं आया कि आज चीन की पिचकारी का बहिष्कार होगा। जो भारतीय चीन की पिचकारी बेचेगा वो मसूद अज़हर का दामाद होगा। अपना व्हाट्स एप स्टेटस तैयार करने के बाद मैंने उसे अबकी बार पिचकारी सरकार वाले ग्रुप में भेज दिया। वहां से वायरल हो गया।

    चीन हमेशा आतंक का साथी रहा है। हमें चीन का साथ नहीं देना है। जो लोग चीन से सामान लाकर भारत का पैसा बीजिंग भेजते हैं, हम उन्हें दार्लीजिंग भेज देंगे। वहां उन्हें भारतीय मोमो बनाने की विधि की ट्रेनिंग दी जाएगी। हमने चीन को झूला झुलाया मगर चीन ने हमें झुला दिया है। हमारा काम हो गया है। सरदार पटेल की मूर्ति हमने बनवा ली है। चीन के इंजीनियर जा चुके हैं। भारतीय कारीगर बिना पगार के भी सरदार पटेल की रक्षा कर सकते हैं।

    मगर हम चीन की यह धमकी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। तभी टीवी पर प्रधानमंत्री का एक और भाषण आ गया। वे जनता से पूछ रहे थे। चीन को घर में घुस कर मारना चाहिए कि नहीं। एक एंकर ने एलान कर दिया है। चीन से युद्ध के सर्वे होने लगे हैं। सीमा पर प्रधानमंत्री के समर्थक पिचकारी भर कर जाते हुए दिख रहे हैं।

    आख़िर कब तक हम चीन को लेकर चुप होते रहेंगे। नेहरू चुप हो गए लेकिन नरेंद्र चुप नहीं रहेंगे। जो नेहरू नहीं कर पाए, वही तो नरेंद्र करते हैं। वे झूला झुलाते हैं तो चीन को झुलसा भी देंगे। मार पिचकारी, मार पिचकारी रंग देंगे। चीन का चेहरा बदल देंगे। मसूद अज़हर का जो साथी है, वो चीन हमारा दुश्मन है।

    तभी व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में एक मेसेज आता है। चीन को लेकर विरोध पिचकारी और फुलझड़ी तक ही सीमित रखना है। न्यूज़ एंकरों को चीन के साथ शांति की बात करनी है। यह नहीं कहना है कि चीन ने मसूद अज़हर का साथ देकर पुलवामा के शहीदों का अपमान किया है। चीन को लेकर चुप्पी जैसे ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं चलाने हैं। चीन डर गया भारत से या भारत डर गया चीन से इस तरह के नारे चैनलों पर नहीं लिखे होंगे। एक बंदा था जो न्यूज़ रूम में जा- जाकर सबको डांट रहा था। एडिटर मुर्गा बने बैठे थे। एडिटरों के मालिक अमित शाह से ब्रीफकेस में निर्देश ले रहे थे। विज्ञापन का नया नाम निर्देश है।

    फिर अचानक कोई ज़ोर से चिल्लाता है। प्रधानमंत्री मोदी का लाइव चैनलों पर आने लगता है। वो कहते हैं भाइयों और बहनों, शहीदों का अपमान कांग्रेस ने किया है। उसे हराना है। चीन अपने आप हार जाएगा। हमारी विदेश नीति इटावा से लेकर बेगुसराय तक हिट है। हम जीत रहे हैं। हमने पाकिस्तान को घुस कर मारा है। आप उसी में यह समझ लो कि हमने उसके दोस्त चीन को भी मारा है। हम वन प्लस वन नहीं करते, हम वन टू का फोर करते हैं। वन टू का फोर।

    मैं सपने से बाहर आ रहा था। नींद हल्की होने लगी। खिड़की पर बैठा बारिश की बूंदे गिन रहा था। मतदान केंद्रों पर वोट पड़ रहे थे। लोग अपने झूठ से हार रहे थे। गांव गांव में लोग कह रहे थे कि विदेश नीति में मोदी जीत गए हैं। चीन की पिचकारी से चीन को हरा दिया है।

    एंकर ने एलान किया। 70 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ। आज पहली बार झूठ जीत गया है। मैं जाग गया था। व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के इनबाक्स में मेसेज चेक करने लगा था। अभी तक चीन की पिचकारी के बहिष्कार की कोई अपील नहीं आई है। क्या आपके पास ऐसे मेसेज आने लगे हैं?

    यह लेख फेसबुक पेज @RavishKaPage से लिया गया है।

  • एर्दोगान ने अमेरिका को दी चेतावनी कहा”हम तुम्हारे गुलाम नहीं”तो भारत ने भी ललकारा

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:तुर्की राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने कहा है कि हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं। इसलिए वाशिंगटन (अमेरिका की राजधानी) तय नहीं कर सकता, अंकारा (तुर्की की राजधानी) को कौन सी हथियार प्रणाली खरीदनी चाहिए। बुधवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए घोषणा की है कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की निर्धारित योजनानुसार तैनाती की जाएगी। उन्होंने कहा कि एस-400 सिस्टम की खरीद पर अमेरिकी दबाव के खिलाफ अंकारा डटा हुआ है। उन्होंने कहा कि तुर्की अपने व्यापार भागीदारों और हथियार आपूर्तिकर्ताओं को चुनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।

    तुर्की राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने कहा कि एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए रूस से डील हो चुकी है।

    अब इस डील से पीछे नहीं हटा जा सकता है। ये नैतिक नहीं होगा। कोई हमसे ये नहीं पूछ सकता कि हम क्या कर रहे हैं? हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं, किसी के गुलाम नहीं हैं। रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदे को रोकने के लिए अमेरिका द्वारा बनाया जा रहा दबाव तुर्की को वायु रक्षा प्रणाली की उन्नत तकनीक एस-500 खरीदने को मजबूर कर रहा है। एस-500 मिसाइल सिस्टम 2020 तक रूसी सेना में शामिल होगा।

    मालूम हो कि अमेरिका, रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के तहत तुर्की पर एस-400 मिसाइल सिस्टम डील खत्मi करने का दबाव बना रहा है। इसकी जगह अमेरिका तुर्की पर अपनी पैट्रियल मिसाइलें खरीदने का दबाव बना रहा है, जिस पर तुर्की को लगभग 3.5 बिलियन डॉलर (करीब 245 अरब रुपये) खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि, तुर्की इन मिसाइलों को खरीदने के लिए शुरू से मना करता आया है। उम्मीद की जा रही है कि जुलाई, 2019 तक तुर्की एस-400 मिसाइलों को तैनात कर लेगा।
    भारत ने किया है 350 अरब रुपये का समझौता
    भारत ने भी रूस के साथ हथियारों की खरीद पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद 5 बिलियन डॉलर (लगभग 350 अरब रुपये) का समझौता किया है। भारत ने रूस संग एस-400 मिसाइल सिस्टम के लिए अक्टूबर-2018 में करार किया था। भारत चाहता है कि रूस की ये लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली हमारे वायु रक्षा तंत्र को मजबूत करे। भारत इस वायु रक्षा प्रणाली को विशेष तौर पर चीन से लगी 3488 किमी सीमा पर तैनात करना चाहता है। भारत के समझौते पर भी अमेरिका ने आपत्ति जताई थी। हालांकि, जब अमेरिका को लग गया कि भारत किसी भी दशा में समझौते से पीछे नहीं हटेगा तो उसने सौदे को मंजूरी दे दी थी।

    भारत से पहले चीन ने मारी बाजी

    भारत से पहले रूस का एस-400 मिसाइल सिस्टम चीन को मिल चुका है। चीन ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों को नजर अंदाज कर इसके लिए 2014 में ही रूस से तीन बिलियन डॉलर (करीब 210 अरब रुपये) का रक्षा सौदा किया था। रूस से जुलाई 2018 में ये मिसाइलें मिलने के बाद चीन ने 27 दिसंबर 2018 को इनका सफल परीक्षण भी किया था। चीनी सेना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पहली बार इस प्रणाली का परीक्षण किया था।

    चीन ने किया पहला सफल परीक्षण

    चीन द्वारा किए गए परीक्षण के दौरान इस वायु रक्षा प्रणाली ने 250 किलोमीटर दूर मौजूद सिम्युलेटेड बैलेस्टिक लक्ष्य को आसानी से नष्ट कर दिया था। परीक्षण के दौरान ये मिसाइल तीन किलोमीटर प्रति सेकेंड की सुपरसोनिक गति से आगे बढ़ा था। हालांकि चीन ने परीक्षण के स्थान का खुलासा नहीं किया था। एस-400 को रूस की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली माना जाता है।

    इसकी खरीद के लिए 2014 में रूस के साथ इस सौदे को सील करने वाला चीन पहला विदेशी खरीदार था। इसके बाद तुर्की और भारत ने भी इस मिसाइल सिस्ट4म के लिए रूस से सौदा किया है। तुर्की को इसकी पूरी खेप 2020 तक कर दी जाएंगी। तुर्की दूसरा नाटो देश है जिसने रूस के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा देते हुए इस सिस्ट म का सौदा किया है। इससे पहले ग्रीस ने भी रूस के साथ इस सिस्टम की खरीद के लिए समझौता किया था।

  • मुस्लिम उत्पीड़न पर संयुक्त राष्ट्र ने भारत को चेताया

    (संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचले)

    संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचले ने बुधवार को भारत को आगाह किया है कि ‘बाँटने वाली नीतियों’ से आर्थिक वृद्धि को झटका लग सकता है.
    मिशेल ने कहा कि संकीर्ण राजनीति एजेंडा के कारण समाज में कमज़ोर लोग पहले से ही हाशिए पर हैं.
    मिशेल ने कहा, ”हमलोगों को ऐसी रिपोर्ट मिल रही है जिससे संकेत मिलते हैं कि अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न के वाक़ये बढ़े हैं. ख़ास करके मुस्लिम और ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों में दलितों और आदिवासियों का उत्पीड़न बढ़ा है.”
    मिशेल ने ये बात जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार काउंसिल की वार्षिक रिपोर्ट में कही.
    इससे पहले पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद ने संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और उसकी जांच की बात कही थी.

    उस समय कश्मीर पर यूएन की रिपोर्ट को भारत ने पूरी तरह से ख़ारिज करते हुए कहा था कि भारत की संप्रभुता का उल्लंघन और उसकी क्षेत्रीय एकता के ख़िलाफ़ है.
    अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जताती रही हैं चिंता
    2016 में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल की सालाना रिपोर्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना की

    @NARENDRAMODI
    एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ग्रीनपीस और फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन का हवाला देते हुए एनजीओ और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और विदेशी फ़ंड रोकने के लिए मोदी सरकार को जमकर कोसा था.
    वहीं, ह्यूमन राइट्स वॉच की 2016 की रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों को रोकने में नाकाम रही.
    अपनी 659 पन्नों की रिपोर्ट में ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा था कि सरकार का या फिर बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का विरोध करने वाले एनजीओ को मिलने वाले विदेशी फ़ंड्स पर रोक लगा दी गई इससे अन्य संगठन भी सकते में हैं.
    ह्यूमन राइट्स वॉच की मीनाक्षी गांगुली ने कहा था, “असहमति पर भारत सरकार का जो रवैया रहा है उससे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी की परंपरा को धक्का लगा है.(इनपुट बीबीसी)

  • पाकिस्तानी संसद में बोले इमरान खान-शुक्रवार को छोड़ेंगे भारतीय पायलट

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:भारत-पाकिस्तान के बीच तनातनी बरकरार है। इस बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक संसद में एलान किया है कि शुक्रवार (1 मार्च) को भारतीय पायलट अभिनंदन को छोड़ा जाएगा।  इसके साथ ही पाकिस्तान की तरफ से लगातार बातचीत की पेशकश की जा रही है लेकिन भारत ने साफ तौर पर कह दिया है कि पहले हमारे पायलट की सकुशल वापसी कराओ। इस बीच पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के सुंदरबनी, मनकोट, खारी करमारा और देगवार में सीजफायर का फिर उल्लंघन किया है। पाकिस्तान सुबह 6 बजे से इन इलाकों में रह रहकर मोर्टार दाग रहा है और फायरिंग कर रहा है। भारतीय जवान पाकिस्तान की इस फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। दोपहर तीन बजे से फायरिंग फिर शुरू हो गई है।

    अमेरिका ने बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर भारतीय हमले का खुलेआम समर्थन किया है। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर पाकिस्‍तान से आतंकी ठिकानों के खिलाफ सार्थक कार्रवाई करने को कहा था। इसके अलावा ऑस्‍ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देश पहले ही भारत के कदम का समर्थन कर चुके हैं। दूसरी तरफ, जम्‍मू में सीमा से लगते इलाकों के स्‍कूलों को बंद कर दिया गया है। खासकर पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्‍कूलों को बंद कर दिया गया है। वहीं, समझौता एक्‍सप्रेस 28 फरवरी को भी नहीं चलेगी। पाकिस्‍तान ने भारत के साथ मौजूदा तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया है।

    पुलवामा हमले को रचने वाले पाकिस्तानी आतंकी संगठन पर शिकंजा कसने की तैयारी हो गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने 15 सदस्यी यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की सैंक्शंस कमिटी को प्रस्ताव दिया है आतंकवादी संगठन पर शिकंजा कसा जाए। उसके इंटरनैशनल यात्रा पर बैन लगाई जाए और उसकी संपत्तियां भी फ्रीज कर दी जाएं। तीनों देशों ने इस संगठन को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भी दिया है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) के एक अधिकारी ने कहा, “अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है और उसने दोनों पक्षों से तनाव कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है।(इनपुट जनसत्ता)

  • नीदरलैंड:इस्लाम धर्म को झूठ और कुरान को ज़हर कहने वाला संसद डच ने कबुला इस्लाम

    मिल्लत टाइम्स,नीदरलैंड:योराम फान क्लावेरेन PVV पार्टी का हिस्सा रहे हैं. इस्लाम कबूलने के बाद उन्होंने कहा- ‘पार्टी की पॉलीसी थी, जो कुछ भी गलत था उसे किसी न किसी तरीके से इस्लाम से जोड़ा जाना था’
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    ‘डच पीपल’ नीदरलैंड नागरिकों के Germanic ethnic ग्रुप के लोगों को कहा जाता है. ये लोग डच भाषा बोलते हैं और एक कॉमन कल्चर को फॉलो करते हैं. यहां के योराम फान क्लावेरेन नाम के पूर्व राजनेता सुर्खियों में है. क्लावेरेन नीदरलैंड्स में गीर्ट विल्डर्स की पार्टी PVV की ओर से 2010 से 2014 तक सांसद रहे. ये पार्टी दुनिया भर में इस्लाम विरोधी कामों के लिए जानी जाती है.

    क्लावेरेन, विल्डर्स की पार्टी PVV से 2014 में अलग हो गए थे. उसके बाद उन्होंने नीदरलैंड्स के लिए अपनी अलग पार्टी शुरू की थी. लेकिन 2017 के नेशनल इलेक्शन में वे सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाए. उसके बाद राजनीति से अलग हो गए.

    (image: facebook)

    योराम कुछ दिनों पहले तक इस्लाम को कोसा करते थे लेकिन अब उन्होंने इस्लान कबूल कर लिया है. NRC अखबार के मुताबिक क्लावेरेन की कही बात, ‘इस्लाम झूठ है और कुरान जहर’ एक समय में काफी चर्चा में रही थी.

    इस्लाम कबूलने के बाद NRC अखबार से इंटरव्यू में योराम ने कहा, मैं अपनी उस टिप्पणी (इस्लाम झूठ है और कुरान जहर) पर शर्मिंदा हूं. उन्होंने कहा, ये बात पूरी तरह गलत है. साथ ही योराम ने ये भी कहा, ‘ये PVV पार्टी की पॉलीसी थी, जो कुछ भी गलत था उसे किसी न किसी तरीके से इस्लाम से जोड़ा जाना था’

    अल्गेमीन डागब्लाड अखबार ने लिखा, क्लावेरेन एक समय में नीदरलैंड्स में बुर्का और मीनारों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत किया करते थे. उनका कहा था, हमें नीदरलैंड्स में कोई इस्लाम नहीं चाहिए, और हो भी तो कम से कम.

    इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के लिए दुनिया भर में सुर्खियों में रहने वाले क्लावेरेन एक इस्लाम विरोधी किताब ‘From Christianity to Islam in the Time of Terror’ के लिए रिसर्च कर रहे थे. किताब जारी होने से पहले ही उन्होंने पिछले साल 26 अक्टूबर को इस्लाम कबूल किया.

    40 साल के डच राजनेता क्लावेरेन ने इस्लाम कबूलने पर डच अखबारों को बताया, मेरा मन बदल गया है. मुझे लंबे सयम से इसकी तलाश थी. ये मेरे लिए धार्मिक रूप से घर वापसी जैसा है. उन्होंने डच रेडियो से कहा, किताब लिखने के दौरान मैंने ऐसी-ऐसी चीज़ें जानीं, जिससे इस्लाम के प्रति मेरे पुराने विचार लड़खड़ा गए.

    इस्लाम कबूलने के बाद एक इंटरव्यू में क्लावेरेन ने कहा, अगर आप मानते हैं भगवान सिर्फ एक है और मोहम्मद उसके पैगंबर थे, जैसे ईसा मसीह और मोजे, तो आप औपचारिक रूप से मुसलमान हैं.

    डच मीडिया से क्लावेरेन ने कहा, धर्म बदलने पर उनकी पत्नी को कोई परेशानी नहीं है. मेरी पत्नी इस बात को स्वीकार करती है कि मैं मुसलमान हूं. उसने कहा कि अगर तुम खुश हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी.

    क्लावेरेन डच संसद के निचले सदन में बरसों से इस्लाम के खिलाफ झंडा बुलंद करते रहे. दिन रात इस्लाम की आलोचना करने वाले फान क्लावेरेन अब कहते हैं वह गलत थे. वेबसाइट politico.eu के मुताबिक, योराम मजहब बदलने वाले दूसरे पूर्व PVV पॉलीटीशियन हैं.

    नीदरलैंड्स की आबादी 1.7 करोड़ है. जिसमें लगभग पांच फीसदी मुसलमान हैं, उनकी तादाद 8.5 लाख के करीब हैं. 2050 तक नीदरलैंड्स में मुसलमानों की संख्या दो गुनी हो सकती है. ये आंकड़ें डच सेंट्रल स्टैटिक्स ब्यूरो के मुताबिक हैं.(इनपुट न्यूज १८)