Category: विदेश

  • भारत-पाक की कड़वाहट,इस दिवाली सरहद पर जवानों ने नहीं बदलीं मिठाइयां

    देशभर में आज दिवाली मनाई जा रही है पाकिस्तान ने दिवाली के दिन भी सीजफायर का उल्लंघन किया. जम्मू कश्मीर में एलओसी के पास राजौरी जिले के सुंदरबन सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग की गई. इसके अलावा पाकिस्तान ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सऊदी अरब दौरे के लिए अपना एयरस्पेस खोलने से मना कर दिया.

    भारत ने भी पाकिस्तान को जवाब दिया. हर साल दिवाली पर भारत-पाकिस्तान के बीच जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर और एलओसी पर मिठाई एक्सचेंज सेरेमनी होती है लेकिन इस बार भारत ने मिठाई एक्सचेंज नहीं की है. जम्मू कश्मीर में सीमा और एलओसी पर भारत-पाकिस्तान के बीच मिठाई एक्सचेंज नहीं की गई. सेना और बीएसएफ के जवानों की तरफ से मिठाई नहीं भिजवाई गई.

    बता दें जम्मू कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान रुख अलग है. पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठा चुका है.तथा पाकिस्तान लगातार कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है.

    जम्मू कश्मीर में 25 अक्टूबर को भी पाकिस्तान ने पुंछ में सीजफायर का उल्लंघन किया था. पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर फायरिंग की गई थी जिसमें सेना का एक जवान घायल हो गया था. इसके अलावा 22 अक्टूबर को भी पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन किया था.

  • ऑस्ट्रेलिया:मीडिया में सरकारी दखल का विरोध,अखबारों ने पहले पेज की खबरें काली स्याही से छिपाए

    मेलबर्न. ऑस्ट्रेलिया में मीडिया ग्रुप्स प्रेस की आजादी में सरकारी दखल का विरोध कर रहे हैं। सोमवार को यहां द ऑस्ट्रेलियन, द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड जैसे कुछ नामी अखबारों के पहले पन्ने पर छपी खबरों के अक्षर काली स्याही से छिपा दिए गए। टीवी चैनल भी इस अभियान का हिस्सा बने हैं। इनमें चल रहे विज्ञापनों में दर्शकों से पूछा जा रहा है कि जब सरकार आपसे सच्चाई छिपा रही है, तो आखिर यह सच्चाई है क्या?

    क्यों शुरू हुआ सरकार का विरोध?

    हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की एक कोर्ट ने मीडिया को यौन शोषण के दोषी कार्डिनल (पादरी) जॉर्ज पेल के बारे में रिपोर्ट छापने से रोक दिया था। इसके चलते ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने पेल का नाम छापे बिना ही उनके दोषी पाए जाने की खबरें चलाई थीं। जबकि, विदेशी मीडिया ने कार्डिनल का पूरा नाम छापा था। इसके कुछ ही दिनों बाद पुलिस ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) मीडिया ग्रुप के संपादक के घर पर छापा मारा था। उन पर राष्ट्रीय महत्व की गुप्त जानकारी रखने का आरोप लगा था। इसी के बाद मीडिया ग्रुप्स ने एकजुट होकर यह अभियान शुरू किया।

    क्या है मीडिया ग्रुप्स की मांग?

    मीडिया ग्रुप्स का कहना है कि पत्रकारों का काम जनता तक सही जानकारी पहुंचाना है। ऐसे में सरकार उन्हें संवेदनशील जानकारी जुटाने से न रोके। उन्हें ऐसा करने से रोकने वाले कानून बदले जाएं। ऐसे प्रावधान भी हों जिससे पत्रकारों के खिलाफ मानहानि के केस आसानी से दर्ज न हों। मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके। व्हिसल ब्लोअर्स को भी पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। चैनल नाइन के चीफ एग्जीक्यूटिव ह्यूज मार्क्स के मुताबिक, यह आम नागरिकों का हक है कि उन्हें सरकार के हर फैसले की पूरी जानकारी मिले।(इनपुट भास्कर)

  • हैदराबाद निजाम के 306 करोड़ रु फंड मामले में पाकिस्तान को झटका,यूके हाईकोर्ट ने भारत के पक्ष में दिया फैसला

    इंटरनेशनल डेस्क. इंग्लैंड और वेल्स की हाईकोर्ट ने हैदराबाद के तत्कालीन निजाम से जुड़े 71 साल पुराने केस में बुधवार को भारत और हैदराबाद के सातवें निजाम के दो उत्तराधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया, वहीं पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे को खारिज कर दिया।

    दरअसल, 1948 में तत्कालीन निजाम ने लंदन बैंक में 1 मिलियन पाउंड भेजे थे, इन्हीं पैसों के मालिकाना हक को लेकर ये केस चल रहा था। उस वक्त जो 1 मिलियन पाउंड भेजे गए थे, अब वे 35 मिलियन पाउंड (करीब 306 करोड़ रुपए) बन चुके हैं। ये पैसा लंदन के नेशनल वेस्टमिंस्टर बैंक के पास सुरक्षित है।

    विदेश मंत्रालय ने दिया बयान

    विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘बुधवार को दिए अपने फैसले में यूके हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया कि इस धनराशि को भेजने का उद्देश्य हथियारों को खरीदना या एकमुश्त उपहार देना था। न्यायालय ने 1948 में फंड का लाभकारी स्वामित्व सातवें निजाम के पास बताया और उसके बाद से इसका हक उन्हीं के उत्तराधिकारियों के पास बताया।’

    71 साल पहले का है मामला

    इस विवाद की शुरुआत भारत के विभाजन के वक्त हुई थी। 1948 में हैदराबाद के तत्कालीन निजाम असफ जाह ने लंदन में तत्कालीन पाकिस्तान उच्चायुक्त के पास करीब 1 मिलियन पाउंड की रकम सुरक्षित रूप से रखने के लिए भेजी। उस वक्त हैदराबाद में निजाम का शासन था और वो भारत सरकार के अधीन नहीं था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद निजाम ने धनराशि को अपनी सहमति के बिना भेजे जाने की बात कही, और बैंक से अपना पैसा वापस लौटाने के लिए कहा। लेकिन बैंक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वो रकम किसी और के खाते में थी।(इनपुट भास्कर)

  • यूएन:इमरान खान सऊदी क्राउन प्रिंस के विशेष विमान से न्यूयॉर्क पहुंचे,महासभा में कश्मीर मुद्दा उठाएंगे

    इस्लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विशेषविमान से सात दिनों के दौरे पर अमेरिका पहुंचे। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, खान को सऊदी क्राउन प्रिंस ने कमर्शियल विमान में जाने से रोका था। क्राउन प्रिंस नेकहा था कि आप हमारे विशेष अतिथि हैं और आप मेरे विशेष विमान से अमेरिका जाएंगे। इमरान यहां 74वें यूएन महासभा की बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं।

    न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने इमरान खान का स्वागत किया। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद शाह कुरैशी ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका की सात दिनों की यात्रा का उद्देश्य दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है कि कश्मीर में क्या हो रहा है।

    https://twitter.com/pid_gov/status/1175437804387602432?s=19

    कश्मीर मुद्दे पर बोलेंगे इमरान

    इमरान खान अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से 23 सितंबर को मिलेंगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमरान खान 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे।मोदी पहले बोलेंगे, जबकि खान दोपहर बाद अपनी बात रखेंगे। इमरान पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दे को उजागर करेंगे।

    सऊदी अरब से व्यापारिक संबंधों पर चर्चा की

    अमेरिका जाने से पहले इमरान कश्मीर मुद्दे पर इस्लामी राष्ट्र से समर्थन के लिए सऊदी अरब की दो दिनों की यात्रा पर थे। इस दौरान उन्होंने किंग सलमान बिन अब्दुलाजिज अल सौउद से मुलाकात की और कश्मीर मुद्दे के अलावा ट्रेड, निवेश और आर्थिक संबंधों पर चर्चा की।

  • पाकिस्तान के सिख विधायक भारत आए : मांगी मोदी से राजनितिक शरण

    बलदेव ख़ैबर पख़्तूख़्वाह प्रांतीय एसेंबली के सदस्य थे.

    भारतीय राज्य पंजाब आकर उन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तान के पंजाब में ‘अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है’ और बाक़ी समुदाय के लोग भी सुरक्षित नहीं है.

    बलदेव कुमार ने कहा, “सिर्फ़ अल्पसंख्यक ही नहीं, मुसलमान भी वहां सुरक्षित नहीं है. मैं भारत सरकार से गुज़ारिश करता हूं कि वो मुझे यहां आश्रय दे. मैं वापस नहीं जाऊंगा.”

    बलदेव कुमार फ़िलहाल पंजाब के खन्ना में रह रहे हैं. वो कहते हैं कि उन्हें पाकिस्तान में रह रहे सिखों की हालत और सुरक्षा की चिंता है.

    भारत से शरण मांग रहे बलदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुज़ारिश की है कि वो पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख परिवारों की स्थिति पर ध्यान दें.

    बलदेव कुमार ने कहा, “भारत सरकार को पाकिस्तान में रह रहे हिंदू और सिख परिवारों के लिए एक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए. मैं चाहता हूं मोदी जी उनके लिए कुछ करें, वो वहां प्रताड़ित हो रहे हैं.”

    बलदेव ने भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद्दे को तूल देने के लिए भी पाकिस्तान की आलोचना की.

    उधर पाकिस्तान के स्वात में रह रहे बलदेव सिंह के भाई और पार्षद तालिक कुमार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें तो मीडिया के ज़रिए पता चला कि उनके भाई ने भारत में राजनीतिक शरण मांगी है.

    तालिक ने कहा कि उनके भाई की बेटी थैलेसेमिया से पीड़ित है और वो उसी का इलाज कराने के लिए भारत गए थे. तालिक ने कहा कि उनके भाई के बारे में जानकर उन्हें काफ़ी निराशा हुई.

    तालिक कुमार का कहना था, ”हमारा पूरा परिवार पाकिस्तान में रहता है. ये हमारा मुल्क है. बलदेव कुमार का जन्म भी यहीं हुआ है. हमें यहां आज तक कभी कोई परेशानी नहीं हुई.”

    ख़ैबर पख़्तूख़्वाह प्रांत के सूचना मंत्री और प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शौकत यूसुफ़ज़ई ने कहा कि जैसे ही पार्टी को पता चला कि बलदेव सिंह पीटीआई के ही एक दूसरे विधायक सोरन सिंह की हत्या के अभियुक्त हैं पार्टी ने उन्हें फ़ौरन बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

    सरदार सोरन सिंह की 2016 में हत्या कर दी गई थी. बलदेव कुमार समेत कुल पाँच लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. लेकिन दो साल के बाद बलदेव कुमार सुबूतों के अभाव में अदालत से बरी हो गए थे.

    बलदेव कुमार पीटीआई के अल्पसंख्यक नेताओं की सूची में दूसरे नंबर पर थे. और सोरन सिंह की हत्या के बाद उन्हें विधान सभा का सदस्य मनोनीत कर दिया गया था लेकिन पीटीआई ने उनका समर्थन नहीं किया और उन्हें सदन का सदस्य बनने में कोई न कोई बाधा पैदा करने लगी.

    आख़िरकार बलदेव ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और अदालत के आदेश पर उन्हें विधान सभा की सदस्यता की शपथ दिलाई गई. लेकिन सदन का कार्यकाल उसी दिन ख़त्म हो गया और इस तरह वो 24 घंटे से भी कम समय के लिए प्रांतीय एसेंबली के सदस्य रह सके.

    बलदेव कुमार का पूरा परिवार स्वात में रहता है. उनकी पत्नी भारत से हैं. उधर सोरन सिंह के दामाद अजय सिंह ने बीबीसी को बताया है कि उन्होंने अदालत के आदेश के ख़िलाफ़ उपरी अदालत में अपील की है इसलिए बलदेव सिंह पर मुक़दमा अभी भी चल रहा है.

    उन्होंने आश्चर्य जताया कि हत्या का एक अभियुक्त कैसे देश छोड़ सकता है.

    पीटीआई के उमर चीमा ने बीबीसी को बताया कि बलदेव कुमार पर अभी भी मुक़दमा चल रहा है और बलदेव कुमार पर विश्वास करने से पहले लोगों की उनकी नीयत पर ध्यान देना चाहिए.

    INPUT:BBC

  • इराक:कर्बला में मुहर्रम के जुलूस में भगदड़,31 लोगों की मौत,100 से ज्यादा जख्मी

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:कर्बला के एक धार्मिक स्थल पर मची भगदड़भगदड़ की चपेट में आए 31 शिया श्रद्धालुओं की मौत
    इराकी शहर कर्बला के एक प्रमुख धर्मस्थल में भगदड़ के दौरान कई शिया श्रद्धालुओं की मौत हो गई है. मुहर्रम के दौरान हुई इस घटना में मरने वालों की संख्या 31 पहुंच गई है. इसके अलावा कई लोग भगदड़ के दौरान घायल हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में करीब 100 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं.

    श्रद्धालु आशुरा के जुलूस की ओर बढ़ रहे थे तभी भगदड़ मची और भीड़ बेकाबू हो गई. मुहर्रम के दिन हजारों लोग इस पवित्र शहर में शामिल होने के लिए इकट्ठे हुए थे. जिस जगह यह हादसा हुआ है, वह जगह बगदाद से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

    मुहर्रम 10वां दिन जिसे रोज-ए-आशुरा कहते हैं. सबसे अहम दिन होता है. 1400 साल पहले मुहर्रम के महीने की 10 तारीख को ही इमाम हुसैन को शहीद किया गया था. उसी गम में मुहर्रम की 10 तारीख को ताजिए निकाले जाते हैं.

    कहा जा रहा है कि यह हादसा तब हुआ जब लोग इमाम हुसैन के मकबरे की ओर आगे बढ़ रहे थे.

    इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुर्बानी की याद में ही मुहर्रम मनाया जाता है. मुहर्रम शिया और सुन्नी दोनों समुदाय के लोग मनाते हैं. हालांकि, इसे मनाने का तरीका दोनों समुदायों में अलग-अलग होता है.(इनपुट आजतक)

  • पाकिस्तान ने राजनयिक संबंध और कारोबार किया खत्म भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेजा

    इस्लामाबाद:पाकिस्तान ने बुधवार को भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार खत्म करने का फैसला लिया। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में यह फैसला लिया। पाक सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस भेजा जाएगा। इमरान सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह कदम उठाया है। इस बीच ट्रम्प सरकार ने कहा है कि भारत ने उसे कश्मीर पर लिए गए फैसले पर कोई जानकारी नहीं दी।

    बैठक के बाद पाकिस्तान सरकार ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया- भारत का हालिया कदम कश्मीर में हिंसा और उपद्रव को बढ़ाएगा। यह कदम दो सामरिक रूप से सक्षम देशों के बीच अस्थिरता का कारण बनेगा। कश्मीर में भारत सरकार ने बड़ी तादाद मेें सेना को नियुक्त किया है और इसका इस्तेमाल वहां की निहत्थी जनता के खिलाफ किया जाएगा, जो कि आग में घी का काम करेगा।

    एनएससी की बैठक में 5 अहम फैसले लिए गए

    राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) ने कहा- पाकिस्तान भारत के इस कदम की निंदा करता है। इस फैसले से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति पर उल्टा प्रभाव पड़ेगा। इस बैठक में 5 अहम फैसले लिए गए।
    1- राजनयिकसंबंधों को कम करना।
    2- द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध खत्म करना।
    3- द्विपक्षीय व्यवस्थाओं की समीक्षा करना।
    4- कश्मीर पर फैसले का मामला संयुक्त राष्ट्र ले जाना।
    5- 14 अगस्त का दिन कश्मीरियों के साथ मजबूती के साथ खड़े रहने के तौर पर याद किया जाएगा। 15 अगस्त को काला दिवस मनाया जाएगा।
    जुलाई 2018 से जनवरी 2019 के बीच कारोबार हुआ

    पुलवामा हमले से पहले जुलाई 2018 से जनवरी 2019 के बीच दोनों देशों के बीच 6,230 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। जनवरी-जून 2018 की तुलना में इसमें 5% का इजाफा हुआ था। वहीं, 2018-19 में दोनों देशों के बीच करीब 18 हजार करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। यह 2017-18 की तुलना में 1600 करोड़ रुपए ज्यादा था।इसमें भारत का पाकिस्तान को निर्यात 80% है और आयात सिर्फ 20% है।

    वर्ष भारत-पाक द्विपक्षीय व्यापार इजाफा
    2016-17 15,000 करोड़ रुपए —
    2017-18 16,400 कराेड़ रुपए 9%
    2018-19 18,000 करोड़ रुपए 10%
    भारत में पाकिस्तान से खनिज उत्पाद और फल आते हैं
    भारत पाकिस्तान को जो निर्यात करता है, उसमें 37% हिस्सेदारी रासायनिक उत्पादों और 33% हिस्सेदारी टेक्सटाइल आइटम्स कीहै। भारत पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कॉटन और ऑर्गेनिक केमिकल एक्सपोर्ट करता है। वहीं, भारत पाकिस्तान से सबसे ज्यादा 49% खनिज उत्पाद और 27% फल आयात करता है। आयात में मिनरल ऑयल की हिस्सेदारी 27% और फलों की हिस्सेदारी 21% है।

    17 साल पहले में भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को निष्कासित किया था
    मई 2002 में भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त अशरफ जहांगीर काजी को निष्कासित किया था। भारत ने यह कदम कश्मीर में एक आतंकी हमले में 35 लोगों की मौत होने के बाद उठाया था। उस वक्त जहांगीर काजी आतंकियों का समर्थन कर रहे थे। इससे पहले दिसंबर 2001 में संसद पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के बाद भारत ने दिल्ली में पाकिस्तान के मिशन में तैनात स्टाफ में 50% की कटौती करा दी थी। वहीं, अपने उच्चायुक्त को पाकिस्तान से बुला लिया था। दिल्ली में पदस्थ पाकिस्तान के मिशन प्रमुख से बात करने से इनकार कर दिया था।इससे पहले 1965 और 1971 की जंग के वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध खत्म हो गए थे।

    संसद में इमरान ने कहा था- दुनिया को कश्मीर की जानकारी नहीं
    इमरान ने मंगलवार कोकहा था, “मुझे लगता है कि भारत कश्मीरियों को मिटाना चाहता है। वह कश्मीर में नस्लीय तौर पर मुसलमानों का सफाया कर सकता है। स्थितियों को देखकर लगता है कि फिर पुलवामा जैसी घटना होगी। फिर वे मुझ पर आरोप लगाएंगे और एयर स्ट्राइक करेंगे। हम फिर इसका जवाब देंगे। फिर युद्ध होगा। हम खून की आखिरी बूंद तक युद्ध लड़ेंगे।”

    उन्होंने कहा था, “मैं और मेरी पार्टी विश्व के नेताओं को यह बताने की जिम्मेदारी लेती है कि कश्मीर में क्या हो रहा है? मुझे लगता है कि दुनिया को इसकी जानकारी नहीं है। मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि भारत सरकार कश्मीर में मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के साथ क्या कर रही है? दरअसल, वे खतरे में हैं।”

    भारत को जवाब देने का समय आ गयाः शहबाज शरीफ
    पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता शहबाज शरीफ ने कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को भारत के इस कदम का जवाब देना चाहिए। हम कश्मीरियों को मिटते हुए नहीं देख सकते। हमें उनके लिए ठोस कदम उठाना होगा।

  • रवीश कुमार को मिला 2019 का’रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड’12 साल बाद मिला किसी भारतीय पत्रकार को ये सम्मान

    एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड से वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को सम्मानित किया गया है। साल 2019 के लिए रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड की घोषणा हुई, जिसमें रवीश का नाम भी शामिल है। रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड पत्रकारिता के जगत में योगदान को लेकर दिया गया है। बता दें कि यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है।

    https://twitter.com/MagsaysayAward/status/1157122862110502912?s=20

    साल 2019 के लिए रवीश कुमार सहित कुल चार लोगों को रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया है। रवीश के अलावा म्यांमार के को सी विन, थाइलैंड की अंगहाना नीलपाइजित, फिलिपींस के रमेंड और दक्षिण कोरिया के किम जोंग को रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया है।

    यह सम्मान 12 साल बाद किसी भारतीय पत्रकार को मिला है। इससे पहले में पी साईनाथ को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए मैग्सेसे पुरस्कार मिला था।

    चलिए एक नजर डालते है रविश कुमार पर। रवीश कुमार का जन्म बिहार के पूर्वी चंपाराण जिले के मोतीहारी में हुआ है। उन्होंने लोयोला हाई स्कूल, पटना, से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, और फिर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह दिल्ली आ गये। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया।

    1996 से रवीश कुमार एनडीटीवी से जुड़े रहे हैं। शुरुआती दिनों में एनडीटीवी में आई चिट्ठियां छांटा करते थे। इसके बाद वो रिपोर्टिंग की तरफ आगे बढ़े। एनडीटीवी पर आने वाला कार्यक्रम ‘रवीश की रिपोर्ट’ बेहद चर्चित हुआ और लोगों के लिए पसंदीदा कार्यक्रम बन गया।

    रवीश कुमार को कई ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से बोलने के लिए जाना जाता है। इसके लिए कई बार वो सोशल मीडिया पर ट्रोल भी होते रहते हैं।

  • फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के नए आतंक पर तुर्की खामोश नहीं बैठेगा:एर्दोगान

    अंकारा:तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल द्वारा छेड़े गए आतंक की हालिया लहर को खारिज करते हुए कहा है कि अंकारा तेल अवीव शासन का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति का विरोध करेगा।

    एर्दोगन ने शनिवार को अंकारा में सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) के वरिष्ठ प्रांतीय अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “जो कोई भी इज़राइल की तरफ है, सबको बता दें कि हम उनके खिलाफ हैं।”

    इजरायल बलों ने सोमवार तड़के वेस्ट बैंक के सुर बहेर गांवमें फिलिस्तीनी घरों को नष्ट कर दिया। जिसके बाद उसे ने इस सप्ताह के शुरू में अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। तेल अवीव का दावा है कि इमारतों का निर्माण अवैध रूप से किया गया था।

    हालांकि फिलिस्तीनियों का कहना है कि इस्राइल सुरक्षा बलों का इस्तेमाल कर रहा है, जो कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी जमीन और सड़कों को जोड़ने वाली बस्तियों के विस्तार के लंबे समय के प्रयासों के तहत उन्हें क्षेत्र से बाहर करने के लिए एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

    एर्दोगन ने कहा कि तुर्की मुख्य रूप से इजरायल शासन के समर्थकों द्वारा इसे कमजोर करने के प्रयासों की परवाह किए बिना फिलिस्तीनी कारण को बढ़ावा देना जारी रखेगा।तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा, “हम फिलिस्तीन में इजरायल की निंदा करने वाले राज्य के आतंक पर चुप्पी को स्वीकार नहीं करते हैं।”

  • आयशा ने विदेश मे किया भारत नाम रोशन,बैंकॉक में जीते 2 गोल्ड 1 सिल्वर

    दिल्ली के मुस्तफाबाद में रहने वाली आयशा हिमादास से कम नहीं है. सर्वोदय कन्या विद्यालय में पढ़ने वाली आयशा ने एशियन कॉन्टीनेंटल रोप स्किपिंग चैंपियनशिप में 22 जुलाई को दो गोल्ड और एक सिल्वर जीता है. पेश से कपड़े की कटिंग करने वाले कटिंग मास्टर शमीम अहमद का परिवार बेटी पर गर्व कर रहा है.

    आयशा ने बताया कि उसे बचपन से ही रस्सी कूदने का शौक था. स्कूल में उसके इस शौक को खेल के रूप में विकसित किया गया, तो उसने और भी ज्यादा तैयारी शुरू कर दी. बता दें कि आयशा एसकेवी नंबर 2 ब्लॉक वाई में 11वीं की स्टूडेंट हैं. वो कक्षा आठ से इस खेल में नेशनल खेल रही हैं.

    आयशा के परिवार में उनकी मां रिहाना के अलावा वो चार बहनें और एक भाई है. उनकी एक बहन की शादी हो चुकी है और वो भाई बहनों में चौथे नंबर की हैं. आयशा ने कहा कि वो अपने देश के लिए कुछ करना चाहती हैं. साथ ही बहुत बनकर अपने परिवार को सम्मानपूर्ण जिंदगी देना चाहती हूं.

    पापा का सपना करूंगी पूरा
    आयशा का कहना है कि उसके पिता शमीम अहमद उसे रोप स्क‍िपिंग का इंटरनेशनल प्लेयर बनाना चाहते हैं. इसलिए सबसे पहले वो अपने पापा का सपना पूरा करेंगी. इसके बाद उन्हें अपने कोच की तरह खिलाड़ी बनना है. वो कहती हैं कि और मेरा सपना है कि मैं अपने पैसों से अपनी छोटी बहनों को डॉक्टर बनाऊं. इसलिए मैं खेल के साथ-साथ पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती हूं.

    आयशा का परिवार मुस्तफाबाद के 90 गज के एक घर में रहता है. इस घर में आयशा के ताऊ और चाचा का परिवार भी रहता है. इस तरह एक परिवार के हिस्से सिर्फ तीस गज आते हैं. वो बताती हैं कि बचपन से उनके परिवार ने बहुत संघर्ष किया है. लेकिन उन्हें कभी कमी महसूस नहीं होने दी.

    आयशा कक्षा आठ से स्कूल के साथ-साथ बाहर अपने कोच तरुण तिवारी से रोप स्किपिंग सीख रही हैं. वो बताती हैं कि बाहर कोचिंग में उनसे सिर्फ 500 रुपये फीस ली जाती है. उनके पेरेंट्स ने कभी भी इसके लिए मना नहीं किया.

    आयशा कहती हैं कि इस देश में बेटियां खेल में भी आगे बढ़ रही हैं. मैं हिमादास को लेकर भी बहुत गर्व महसूस करती हूं. अगर लोग अपनी बेटियों को मौका दें तो वो किसी भी मायने में कम नहीं होतीं. मेरे घर में हम सब बहनों को पढ़ने और कुछ कर दिखाने के लिए प्रेरित किया जाता है, शायद ये ही वजह है कि मैं अपने देश के लिए कुछ कर पाई.(इनपुट आजतक)