Category: विदेश

  • म्यांमार सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिये ठोस कदम उठाये:संयुक्त राष्ट्र

    बैंकाॅक: संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने रोहंगिया शरणार्थियों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए म्यांमार सरकार शरणार्थियों की पुनर्वास के लिए ठोस कदम की मांग की है।

    अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गोटरेस ने पूर्व एशियाई राष्ट्र संगठन ‘आसियान’ के नेताओं से मुलाकात में बांग्लादेश में स्थित म्यांमार के लाखों रोहंगिया प्रवासियों की बुनियादी अधिकारों से वंचित पर चिंता व्यक्त किया है।

    थाईलैंड में आसियान संगठन 35 वां सत्र आज से शुरू हुआ जिसमें सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। महासचिव संयुक्त राष्ट्र एंटोनियो ने आसियान के कुछ नेताओं से मुलाकात में कहा कि म्यांमार भी आसियान संगठन का सदस्य है इसलिए सदस्य देशों म्यांमार सरकार पर दबाव डालें।

    नेताओं से मुलाकात में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने म्यांमार की सरकार से आग्रह किया कि रोहंगिया प्रवासियों की बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से अपने घरों को वापस ठोस और स्पष्ट कदम होगा और मुस्लिम अल्पसंख्यक जानों और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी ।

  • ईरान आतंकवादियों की मदद करने वाले देशों में पहले स्थान पर है:अमेरिका

    वॉशिंगटन: अमेरिकी मंत्रालय विदेश रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि ईरान आतंकवादियों की मदद करने वाले देशों में अब भी पहले नंबर पर विराजमान है।

    अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2018 के लिए आतंकवाद से संबंधित अपनी रिपोर्ट विज्ञप्ति कर दिया है जिसमें खुलासा किया गया है कि ईरान आतंकवादी संगठनों पर एक अरब डालर खर्च करके अभी दुनिया में आतंकवाद का सहायक सबसे बड़ा देश है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय के विभाग आतंकवाद मामलों के समन्वयक नाथन बिक्री ने बताया कि यह राशि ईरान ने गार्ड क्रांति के माध्यम से हिजबुल्लाह और हमास आदि को प्रदान की गई और यह सिलसिला अभी जारी व सारी है और जिसका मुकाबला करना अमरीका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    रिपोर्ट में आतंकवाद संगठनों की सूची नुस्रा फ्रंट और अफ्रीकी आइएस संगठन सहित अधिक 50 संगठनों को जोड़ दिया गया है जिन की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और उन तक पहुंचने वाली फंडिंग को रोकने के लिये सीधे कदम उठाए जाएंगे।

  • इजरायली वायुसेना की गाजा पट्टी पर ताबड़तोड़ हवाई हमले, एक फिलीस्तीनी युवा शहीद और 2 घायल

    गाजा: इजरायली सेना के हवाई कार्रवाई में एक फिलीस्तीनी युवा शहीद और 2 घायल हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार इजरायली वायुसेना ने गाजा पट्टी पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए जिससे 27 वर्षीय अहमद अलनगरी शहीद और 2 फिलीस्तीनी युवा घायल हो गए। हवाई हमले की चपेट में कुछ आवासीय घर भी आ गए।

    मारे गए और घायल होने वालों को खान यूनुस अस्पताल ले जाया गया है जहां एक घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है। तीनों युवा हमास के एक चेक पोस्ट के पास बैठे थे जब हवाई हमला किया गया।

    उधर इस्राइली अधिकारियों ने अपने बयान में कहा है कि हमास के एक प्रशिक्षण केंद्र और एक चेक पोस्ट हवाई कार्रवाई लक्षित है। यह कार्रवाई हमास की ओर से इजरायल क्षेत्र में रॉकेट दागे जाने की प्रतिक्रिया में किया गया है।

  • जर्मनी में एर्दोगान द्वारा बनाई गई सबसे बड़ी मस्जिद को बम से उड़ाने की धमकी

    कोलोन जर्मनी की सबसे बड़ी और मुख्य मस्जिद को बम से उड़ने की धमकी पर पुलिस ने तुरंत मस्जिद खाली कराकर तलाशी अभियान किया लेकिन बम की रिपोर्ट झूठी साबित हुई।

    अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी जर्मनी शहर कोलोन जर्मन मस्जिदों के संगठन दयतेब केंद्रीय और जामा मस्जिद के टेलीफोन के माध्यम से बम उपस्थिति की सूचना दी गई थी जिस पर पुलिस ने मस्जिद को खाली कराकर तलाशी अभियान किया लेकिन डेढ़ घंटे की तलाशी के बाद मस्जिद को क्लेयर करार दे दिया गया।

    कोलोन सेंट्रल मस्जिद जर्मनी में मुसलमानों की सबसे बड़ी निवास है और इसे हाल ही में बनाया गया है जिसका उद्घाटन छोड़ राष्ट्रपति तईप एरडोगन ने किया था और यहां भक्तों का तांता बंधा रहता है जबकि मस्जिद से सटे हिस्से में स्थापित कार्यालयों लोगों की आवाजाही जारी रहती है।

    गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई की शुरुआत में भी इसी मस्जिद ईमेल के माध्यम से धमकी दी गई थी। सरकार की ओर से इस ईमेल की छानबीन भी की गई थी लेकिन इसका कोई नतीजा सामने नहीं आया था।

  • सऊदी राजकुमार का आया इस एक्ट्रेस पर दिल,दिया सब से बड़ा तोहफा

    रियाद : सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने अपने देश में इतने बदलाव कर दिए हैं कि उसके ढाँचे को बदलकर रख दिया है,इसी कारण से दुनियाभर में मोहम्मद बिन सलमान का नाम एक शक्तिशाली नेताओं में शामिल होता है।

    इन दिनों सऊदी प्रिंस अमेरिकी अभिनेत्री लिंडसे लोहान (Lindsay Lohan) की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस और लिंडसे लोहान के बीच अफेयर चल रहा है।

    प्रिंस (Mohammed bin Salman) अपने प्राइवेट जेट से लिंडसे लोहान (Lindsay Lohan) से मिलने के लिए जाते हैं और उन्हें तोहफे देते हैं. बताया जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने हाल ही में अमेरिकी एक्ट्रेस को गिफ्ट में एक क्रेडिट कार्ड (Credit Card) भी दिया था. हालांकि, लिंडसे के रिप्रेजेंटेटिव ने इन खबरों को बेबुनियाद बताया है।

    उन्होंने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने लिंडसे को कोई क्रेडिट कार्ड नहीं दिया और न ही उनके बीच कुछ ऐसा है. रिप्रेजेंटेटिव ने कहा, ‘एक साल पहले फॉर्मूला वन ग्रैंड प्रिक्स रेस के दौरान दोनों की एक मुलाकात हुई थी.’

    वहीं, लिंडेस लोहान के पिता माइकल लोहान ने कहा कि उनकी बेटी और सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ एक रूहानी और सम्मानजनक रिश्ता है. उन्होंने दोनों के बीच अफेयर की खबरों को खारिज कर दिया.

    माइकल ने कहा, ‘लिंडसे के मध्य पूर्व में बहुत से शक्तिशाली लोग दोस्त हैं, क्योंकि वहां उसकी बड़ी फैन फॉलोइंग है. लिंडसे MBS से कामकाज के सिलसिले में मिली थीं. वह मध्य पूर्व में शरणार्थियों की मदद के लिए काम कर रही है.’ उन्होंने कहा कि कोई इस बारे में नहीं लिखता कि सीरिया में वह क्या अच्छा काम कर रही है. सिर्फ नेगेटिव लिखना चाहते हैं. उनका सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ एक सम्मानजनक रिश्ता है, उससे ज्यादा कुछ नहीं।

  • ईरान में भी कश्मीर मामले पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन,ईरानी नेताओं से की बड़ी मांग

    शिराज :ईरान के शहर शिराज में स्थित शिराज विश्वविद्यालय ऑफ मेडिकल साइंसेज में कश्मीर में जारी मानवाधिकार उल्लंघन की निंदा के लिए शांतिपूर्ण विरोध और मशाल वाहक मार्च किया गया और दो मिनट का मौन रखा गया ।

    इस अवसर पर ईरान के आलम हज्जतुल इस्लाम शेख अमीन विश्वविद्यालय के छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर समस्या, शिया या सुन्नी और रंग और नस्ल का मामला नहीं बल्कि मानवता का समस्या है।

    आज हम कश्मीरी जनता के साथ खड़े हैं और जब तक कश्मीरियों को न्याय नहीं मिलता हम उनके कंधे से कंधा मिलाकर रहेंगे। कश्मीर से संबंधित विश्वविद्यालय के एक छात्र ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर अब नहीं तो कब? आप नहीं तो कौन?उन्होंने ईरानी नेताओं और वैश्विक कंपनियों से मांग की कि वह इस मामले पर योगदान दें ।

  • कश्मीर:सांसद क्रिस डेविस ने कहा,लोगों को जेल में डालने, मीडिया तथा संचार पर पाबंदी,सेना नियंत्रण,ये संप्रदायिक पुर्वाग्रह से प्रेरित,भविष्य के लिए अच्छा नहीं

    यूरोप के सांसदों का एक दल भारत प्रशासित कश्मीर के दौरे पर है. यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्य क्रिस डेविस को भी इस दल के साथ आना था लेकिन उनका दावा है कि उन्हें दिया गया न्योता बाद में वापस ले लिया गया और उन्हें पैनल में जगह नहीं दी गई.

    उत्तर पश्चिम इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले डेविस के मुताबिक इस दौरे के लिए उन्होंने भारतीय प्रशासन के सामने एक शर्त रखी थी. वो शर्त ये थी कि कश्मीर में उन्हें ‘घूमने-फिरने और लोगों से बातचीत करने की आज़ादी दी जाए’.

    डेविस ने कहा, “मैंने कहा कि मैं कश्मीर में इस बात की आज़ादी चाहता हूं कि जहां मैं जाना चाहूं जा सकूं और जिससे बात करना चाहूं, उससे बातचीत कर सकूं. मेरे साथ सेना, पुलिस या सुरक्षा बल की जगह स्वतंत्र पत्रकार और टेलीविजन का दल हो. आधुनिक समाज में प्रेस की स्वतंत्रता बेहद अहम है. किसी भी परिस्थिति में हम समाचारों में कांट छांट की इजाज़त नहीं दे सकते हैं. जो कुछ हो रहा है उसके बारे में सचाई और ईमानदारी से रिपोर्टिंग होनी चाहिए.”

    डेविस के मुताबिक इसी अनुरोध के कुछ दिन बाद उन्हें भेजा गया कश्मीर दौरे का न्योता वापस ले लिया गया.

    भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर पहुंचे यूरोपीय यूनियन के 27 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का काफिला.
    मोदी समर्थक संगठन ने दिया था न्योता
    डेविस के मुताबिक उन्हें कश्मीर दौरे का न्यौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समर्थक कथित ‘वूमेन्स इकॉनमिक एंड सोशल थिंक टैंक’ की ओर से मिला था. इसमें ये स्पष्ट किया गया था कि ख़र्च कौन उठाएगा

    डेविस के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि इस दौरे का खर्च ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर नॉन एलाइन्ड स्ट्डीज़’ वहन करेगा. हालांकि, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इस संस्था को मिलने वाले फंड का स्रोत क्या है.

    उन्होंने बताया, “आयोजकों ने शुरुआत में कहा कि ‘थोड़ी सुरक्षा’ जरूरी होगी लेकिन दो दिन के बाद मुझे बताया गया कि न्योता रद्द किया जा रहा है क्योंकि दौरे में लोगों की संख्या ‘पूरी’ हो गई है और मेरा न्योता पूरी तरह से वापस ले लिया गया.”

    क्रिस डेविस
    न्योता वापस होने को लेकर उन्हें क्या कारण बताया गया, इस सवाल के जवाब में डेविस ने कहा कि उन्हें लगता है कि आयोजकों को उनकी शर्तें ठीक नहीं लगीं.

    उन्होंने कहा, ” मैं मोदी सरकार के पीआर स्टंट में हिस्सा लेने और ये दिखाने को तैयार नहीं था कि ऑल इज़ वेल. मैंने अपने ईमेल के जरिए उनके सामने ये पूरी तरह से साफ कर दिया था. अगर कश्मीर में लोकतांत्रिक सिद्धातों को कुचला जाता है तो दुनिया को इसका संज्ञान लेना चाहिए. वो क्या है जो भारतीय सरकार को छुपाना है? वो पत्रकारों और दौरा करने वाले नेताओं को स्थानीय लोगों से आज़ादी से बातचीत करने की इजाज़त क्यों नहीं देगें? उनके जवाब से लगता है कि मेरे अनुरोध को पसंद नहीं किया गया.”

    क्रिस डेविस ने ये भी बताया कि वो जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहां ‘दसियों हज़ार लोग कश्मीरी विरासत का हिस्सा हैं और कई लोगों के रिश्तेदार कश्मीर में हैं.’ उन्होंने बताया कि कश्मीरियों को प्रभावित करने वाले कई मुद्दे उनके सामने उठाए गए. उनमें संचार माध्यमों पर लगाई गई पाबंदी का मुद्दा भी शामिल है.

    ‘नहीं हुई हैरत’
    इस दौरे से वो क्या हासिल करने के इरादे में थे, इस सवाल पर डेविस ने कहा, “मैं ये दिखाना चाहता था कि कश्मीर घाटी में बुनियादी आज़ादी फिर से कायम हो गई है. लोगों की आवाजाही, राय जाहिर करने या फिर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर कोई पाबंदी नहीं है. लेकिन अगर ईमानदारी से कहा जाए तो मुझे कभी यकीन नहीं था कि हक़ीकत में ये दिखेगा. ये एक तरह की परीक्षा थी कि क्या भारतीय सरकार अपने कदमों की स्वतंत्र समीक्षा की इजाज़त देने को तैयार है.”

    डेविस ने कहा कि कश्मीर दौरे का न्योता वापस लिए जाने पर वो ‘हैरान नहीं’ थे.

    उन्होंने कहा, “मुझे शुरुआत से ही ये दौरा पीआर स्टंट की तरह लगा जिसका मक़सद नरेंद्र मोदी की मदद है. मुझे लगता है कि कश्मीर में भारतीय सरकार के कदम महान लोकतंत्र के उम्दा सिद्धातों के साथ छल की तरह हैं और मैं मानता हूं कि दुनिया जितना कम इस स्थिति पर ध्यान देगी, वो उतना ही खुश होंगे.”

    सही जानकारी नहीं
    कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर वो क्या सोचते हैं, ये पूछने पर क्रिस डेविस ने कहा, “कश्मीर में “जो कुछ” हो रहा है, हमें उसकी सटीक जानकारी नहीं है लेकिन हम लोगों को जेल में डालने, मीडिया पर पाबंदी, संचार माध्यमों पर कड़ी पाबंदी और सेना के नियंत्रण के बारे में सुनते हैं. सरकार की कार्रवाई को लेकर चाहे जितनी भी सहानुभूति हो, ये चिंता भी होनी चाहिए कि ये क़दम सांप्रदायिक पूर्वाग्रह से प्रेरित है. मुस्लिम, हिंदू राष्ट्रवाद को प्रभावी तंत्र के तौर पर देख रहे हैं और ये भविष्य के लिए अच्छा नहीं है. इन दिनों राष्ट्रों के बीच शांति का महत्व तेज़ी से निष्प्रभावी हो रहा है.”

    लंदन में हाल में कश्मीर मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान अंडे और पत्थर फेंके जाने को लेकर उन्होंने कहा कि वो शांति पूर्व प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं लेकिन ये मानते हैं कि किसी भी तरह की चीज का इस्तेमाल जो लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है, वो ‘गैरक़ानूनी और ग़लत है’.(इनपुट बीबीसी)

  • फ्रांस की एक मस्जिद को जलाने की कोशिश,ताबड़तोड़ फायरिंग से कई लोग घायल

    मास्को :फ्रांस की मस्जिद में फायरिंग से 2 लोग घायल हो गए जबकि पुलिस ने हमलावर व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है।

    फ्रांस के दक्षिण पश्चिमी शहर बे योनि में बाद नमाज़े ज़ोहर यह घटना घटी जहां एक 84 वर्षीय व्यक्ति ने मस्जिद के दरवाजे पर फायरिंग कर दी। इस दौरान मस्जिद से बाहर निकलने वाले दो ऐसे व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए जिनकी उम्र 70 वर्ष बताई जाती हैं, इससे पहले उसने मस्जिद के दरवाजे को जलाने की भी कोशिश की और इस दौरान दो व्यक्तियों बाहर आए तो उस ने उन पर गोलीबारी शुरू करदी।

    हमलावर व्यक्ति मस्जिद के पास रहते थे जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, व्यक्ति ने इससे पहले मस्जिद पार्किंग में खड़ी एक कार पर भी फायरिंग की थी।

  • फुटबॉल खेलते हुए प्लेयर का खुला हिजाब तो हुआ कुछ ऐसा,आम्रपाली दुबे ने वीडियो शेयर कर कहा विश्वास और धर्म से ऊपर इंसानियत है

    सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें किसी के धर्म और विश्वास को किस तरह से सम्मान दिया जाता है। यह सीखा जा सकता है। यह वीडियो एक फुटबॉल मैच का है।वीडियो में दिख रहा है कि एक प्लेयर का हिजाब खेलते वक्त खुल जाता है, यह देखते ही दूसरी टीम की लड़कियां उसे तब तक घेरकर खड़ी रहती हैं, जब तक वह प्लेयर अपना हिजाब ठीक नहीं कर लेती।

    वीडियो को पोस्ट करते हुए भोजपुरी सुपरस्टार आम्रपाली दुबे ने भी लोगों को काफी अच्छा संदेश दिया। आम्रपाली दुबे ने लिखा, यह दिल छू लेने वाला है। जब एक खेल के दौरान एक लड़की का हिजाब खुलने ही वाला था तब उसकी अपोनेंट टीम की लड़कियों ने उससे तब तक कवर करके रखा, जब तक उसने अपना हिजाब फिक्स ना कर लिया

    उन्होने कहा, यह साबित करता है कि विश्वास और धर्म से ऊपर इंसानियत है। इंसानियत के लिए इसे सराहना चाहिए। आम्रपाली दुबे के इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं, साथ ही अपने विचार भी इस पर साझा कर रहे हैं।

  • सऊदी किंग और क्राउन प्रिंस ने तुर्की गणतंत्र की सालगिरह पर एर्दोगन को दी बधाई

    रियाद :सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन को तुर्की गणतंत्र की सालगिरह पर बधाई संदेश भेजे।

    किंग सलमान ने अपने नाम और सऊदी सरकार के लोगों और सरकार की ओर से “राष्ट्रपति एर्दोगान, सरकार और तुर्की गणराज्य के लोगों के स्वास्थ्य और खुशी के लिए ईमानदारी से बधाई और शुभकामनाएं दीं और उनकी निरंतर प्रगति और समृद्धि की कामना की। ”

    क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राष्ट्रपति एर्दोगन को भेजे बधाई संदेश में उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की कामना की और तुर्की सरकार और लोगों को आगे बढ़ने और समृद्धि की शुभकामना दी।

    बता दें कि सऊदी पत्रकार जमाल खाशोग्गी की हत्या का मामला सामने आने के बाद से ही तुर्की और सऊदी अरब के रिश्तों में तनाव है। हालाँकि ये तनाव क़तर की नाकेबंदी के बाद से ही चला आ रहा था। जो बाद में काफी बढ़ गया।