Category: देश

  • आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट घटाया;3 वित्तीय संस्थानों को 50 हजार करोड़ की मदद

    मुंबई. देशभर में चल रहे लॉकडाउन के इकोनॉमी पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को 1 लाख करोड़ रुपए के बूस्टर पैकेज का ऐलान किया। यह मदद नाबार्ड जैसे वित्तीय संस्थानों और बाकी बैंकों को दी जाएगी। वहीं, रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर दी है ताकि लोगों को कर्ज मिलने में आसानी हो। यह आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की 22 दिन में दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। इससे पहले 27 मार्च को उन्होंने कर्ज सस्ते करने के लिए रेपो रेट 0.75% घटाया था। लोन की किश्त चुकाने में तीन महीने की छूट दी थी। शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर ने कहा- दुनिया में बड़ी मंदी का अनुमान है, हम सबसे बुरे दौर में हैं। फिर भी बैंकिंग सेक्टर मजबूती से खड़ा है। लोगों तक कैश पहुंचाने वाले 91% एटीएम काम कर रहे हैं।

    सबसे पहले जानिए, आम लोगों और इंडस्ट्री पर इन घोषणाओं का क्या असर होगा?
    क्या अब आसानी से कर्ज मिलेगा?
    इसकी उम्मीदें बढ़ गई हैं। वजह- आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 4% से घटाकर 3.75% कर दिया है। रिवर्स रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंकों को आरबीआई में जमा अपनी रकम पर ब्याज मिलता है। जब आरबीआई इस रेट को घटा देता है तो बैंक अपना पैसा आरबीआई के पास रखने की बजाय कर्ज देना पसंद करते हैं। इससे बाजार में नकदी बढ़ती है।

    क्या कर्ज आसानी से मिलने के साथ सस्ता भी मिलेगा?
    यह कहना मुश्किल है, क्योंकि आरबीआई ने रेपो रेट नहीं घटाया है। रेपो रेट, वह दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। इसमें कमी होने से लोन सस्ते होते हैं। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई 27 मार्च को ही रेपो रेट 0.75% घटा चुका है।

    एक लाख करोड़ का बूस्टर पैकेज क्या है?

    50 हजार करोड़ रुपए टारगेटेड लॉन्गर टर्म रिफाइनेंसिंग ऑपरेशंंस यानी TLTRO के लिए दिए गए हैं। इसमें से 25 हजार करोड़ रुपए की मदद आज से ही शुरू हो जाएगी। इससे नकदी संकट कम होगा। TLTRO के जरिए बैंकों को आरबीआई से 1 से 3 साल के लिए रेपो रेट पर कर्ज मिल जाता है। इससे बैंकों को कर्ज बांटने में आसानी होती है।
    25 हजार करोड़ रुपए की मदद नाबार्ड को दी जानी है। नाबार्ड यानी नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट। यह एग्रीकल्चर और रूरल सेक्टर में कर्ज की उपलब्धता के लिए काम करता है।
    15 हजार करोड़ रुपए की मदद सिडबी को मिलनी है। सिडबी यानी स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक। यह सूक्ष्म, छोटे और मंझले उद्योगों के लिए काम करता है।
    10 हजार करोड़ रुपए की मदद एनएचबी को मिलेगी। एनएचबी यानी नेशनल हाउसिंग बैंक। यह हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज देती है।
    क्या एनपीए के नियमों में भी ढील मिली है?
    बिल्कुल। आरबीआई ने 27 मार्च को लोन की किश्तें चुकाने में तीन महीने की छूट दी थी। आरबीआई की शुक्रवार की घोषणा के मुताबिक, एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट्स घोषित करने की प्रक्रिया में 1 मार्च से 31 मई के तीन महीनों को शामिल नहीं किया जाएगा। नियम कहते हैं कि लोन के रीपेमेंट में 90 दिन की देरी होने के बाद बैंक उस खाते को एनपीए घोषित कर देते हैं। शुक्रवार की घोषणा के ये मायने हैं कि एनपीए के 90 दिनों की गिनती 1 मार्च से शुरू न होकर किश्तें चुकाने के लिए मिली 31 मई तक की छूट के बाद शुरू होगी।

    आरबीआई गवर्नर की नजर में अर्थव्यवस्था कहां खड़ी है?
    गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा- हम बुरे दौर से गुजर रहे हैं। कोरोना संकट की वजह से जीडीपी की रफ्तार घटेगी, लेकिन बाद में ये फिर तेज रफ्तार से दौड़ेगी। कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिनमें कहा गया है कि कोरोना की वजह से ग्लोबल इकोनॉमी आर्थिक मंदी के दौर में जा सकती है। इसके बाद भी भारत की जीडीपी विकास दर बेहतर रहने की उम्मीद जताई गई है। आईएमएफ ने भले ही भारत के लिए 1.9% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया है, लेकिन यह अनुमान जी-20 समूह के बाकी देशों की तुलना में सबसे ज्यादा है

  • 20 अप्रैल से 7 राज्यों में राहत के कदम,राजस्थान में होगा मोडीफाइड लाकडाऊन

    भोपाल. लॉकडाउन का सबसे ज्यादा नुकसान देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 3 मई तक लॉकडाउन के दूसरे फेज में लोगों की रोजी-रोटी बचाने के लिए सरकार काफी हद तक रियायतें देने वाली है। हरियाणा में ढाबे, यूपी में ई-व्यापार, झारखंड में ई-ओपीडी चालू की जाएगी। राजस्थान, छत्तीसगढ, बिहार में भी अस्पताल और कारोबार शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर और उज्जैन के अलावा बाकी जिलों में राहतें मिलना शुरू हो जाएंगी। महाराष्ट्र और पंजाब में 30 अप्रैल तक कर्फ्यू लगा है। ऐसे में दोनों राज्यों में किसानों के अलावा किसी को कोई राहत नहीं मिलेगी।

    राजस्थान: 21 अप्रैल से मॉडिफाइड लॉकडाउन, ग्रामीण-औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन भी शुरू होगा
    21 अप्रैल से प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से मोडिफाइड लॉकडाउन लागू होगा। राज्य के ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 20 अप्रैल के बाद से उत्पादन शुरू किया जाएगा। सीएम निवास पर लॉकडाउन को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने ये निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों के उन उद्योगों को भी शुरू किया जाएगा, जहां श्रमिकों के लिए कार्यस्थल पर ही रहने की सुविधा है। इनमें बाहर से मजदूरों के आवागमन की अनुमति नहीं होगी। गहलोत ने निर्देश दिए कि कलेक्टर, रीको, जिला उद्योग केन्द्र व पुलिस समन्वय स्थापित कर तय करें कि लॉकडाउन के दौरान उद्योगों के शुरू होने में कोई परेशानी न आए।

    यूपी: 20 अप्रैल से शुरू होंगी व्यवसायिक गतिविधियां
    उत्तर प्रदेश में 20 अप्रैल से व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन कोरोबार भी शुरू होंगे। बड़े निर्माण कार्य भी चालू होंगे। वहीं, बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई व्यवस्था का एक स्थाई मॉडल बनेगा। जिस पर काम शुरू भी हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक 31,939 ई-कंटेंट तैयार करते हुए 2.29 लाख छात्रों को कनेक्ट किया है। औसतन 80 हजार छात्र हर दिन उच्च शिक्षा के कोर्सेज में ऑनलाइन हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ स्वास्थ्य विभाग ने कोरोनावायरस से होने वाली मौतों की ऑडिट कराने के लिए सेल बनाने का निर्णय लिया है।

    हरियाणा में 20 अप्रैल से खुलेंगे ढाबे, अस्पतालों में शुरू होगी ओपीडी
    कोरोना संकट के बीच हरियाणा सरकार ने केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार 20 अप्रैल से कुछ छूट देने का फैसला किया है। गुरुवार को हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा कि 20 अप्रैल से लॉकडाउन में कुछ छूट प्रभावी दी जाएगी। सलिए सभी उपायुक्तों को मछली पालन के लिए तालाबों की नीलामी, निर्माण कार्य, ढाबों और सामन्य सेवा केंद्रों को खोलने इत्यादि को खोलने की योजना तैयार करनी चाहिए। इन गतिविधियों के अलावा, फॉरेस्ट वाटरिंग, सिंचाई और खनन कार्य भी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल सुनिश्चित करते हुए चरणबद्ध तरीके से किए जाने चाहिए।

    झारखंड: रिम्स में ई-ओपीडी शुरू होगी, वॉट्सऐप पर मिलेगी दवा पर्ची
    रिम्स के कोरोना सेंटर में लोगों की स्क्रीनिंग के लिए सोमवार से ई-ओपीडी शुरू होगा। इस व्यवस्था के तहत लोग घर बैठे वॉट्सऐप, ईमेल और वीडियो-ऑडियो कॉल के जरिए अपनी स्क्रीनिंग करा पाएंगे। मरीजों को ट्रैवल हिस्ट्री भी बतानी होगी। लोग टेलीफोन और मोबाइल से सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक डॉक्टरों से बात कर सकेंगे। दो बजे के बाद एक्सपर्ट से प्रिस्क्रिप्शन मिलेगा।

    एमपी: भोपाल-उज्जैन-इंदौर को नहीं एमपी में भोपाल, इंदौर, उज्जैन को छोड़कर अन्य जिलों में मिलेगी ज्यादा राहत
    मध्यप्रदेश में कोरोनावायरस का सबसे ज्यादा खतरा इंदौर, भोपाल और उज्जैन में ही है। ऐसे में सरकार 20 अप्रैल के बाद यहां कम ही राहत देगी। हालांकि, राज्य में करीब 3000 किराना दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी गई है। वहीं, आटा चक्की भी खोलने के आदेश भी दिए हैं। संक्रमण का खतरा जिन जिलों में नहीं है, बीस अप्रैल से वहां व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य करने की कवायद होगी।

    छत्तीसगढ: अस्पताल-कारोबार शुरू करने की तैयारी
    भूपेश बघेल सरकार ने 20 अप्रैल से राज्य में अस्पताल और कारोबार शुरू करने की तैयारी कर ली है। सरकार ने अस्पतालों में ओपीडी शुरू करने को कहा है। लेकिन, इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा है। सरकार का सुझाव है- अस्पताल फोन पर मरीजों के नंबर लगाकर उन्हें बुलाएं, जिससे भीड़ न लगे। वहीं, कारोबारी 25 फीसदी कर्मचारियों के साथ अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं, बशर्ते वह कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था करें।

    बिहार के 27 जिलों में 20 अप्रैल के बाद मिल सकती है राहत, यहां एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं
    बिहार के 27 जिले ऐसे हैं जहां मंगलवार तक कोरोना का कोई संक्रमित नहीं मिला है। ऐसा ही रहा तो इन जिलों में 20 अप्रैल के बाद राहत मिल सकती है। बिहार के 27 जिले ग्रीन जोन में हैं। प.चंपारण, पू.चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बांका, जमुई, शेखपुरा, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर और आरा जिले में कोरोना को कोई रोगी नहीं मिला है। 20 अप्रैल तक अगर इन जिलों में कोरोना का मरीज नहीं मिलता है तो राहत मिल सकती है। राज्य के आठ जिले ऑरेंज जोन में हैं। गोपालगंज, सारण, पटना, नालंदा, गया, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर में कोरोना के मरीज मिले हैं।(इनपुट भास्कर)

  • मंडल का वह सैलाब जो कई दलों के तम्बूओं को बहा ले गया: बी पी मंडल की पुण्यतिथि विशेष

    1977 में जनता पार्टी की सरकार बनते ही मोरारजी देसाई ने अपने घोषणापत्र में किये वादे के अनुरूप पिछड़े वर्ग के लिए उत्थान के लिए आयोग गठन के लिए कदम उठाया और पुराने पड़ चुके काका कालेलकर आयोग की जगह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व बी पी मंडल की अध्यक्षता में नए आयोग की घोषणा की जिसे मंडल आयोग के नाम से आम लोगों के बीच जाना गया। स्व मंडल ने अपनी टीम के साथ काम करना शुरू किया और इससे पहले कि वे अपनी रिपोर्ट तैयार कर पाते , जनता पार्टी की सरकार अपने ही बोझ और पदलोलुप सहयोगियों के कुचक्र से धराशायी हो गयी। फिर से चुनाव हुए और जनता पार्टी की पिछली भारी -भरकम जीत को देख कई राजनीतिक पंडितों के द्वारा कांग्रेस और इंदिरा गाँधी जबरदस्त तरीके से कमबैक की। सिर्फ दो साल पहले हुए चुनाव में जिस जनता पार्टी और अलायन्स ने 345 सीटें हासिल कर कांग्रेस को महज 154 सीटों पर धकेल दिया , वही 1979 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 354 सीटें बटोर ली और पदलोलुपों की पार्टी जनता पार्टी महज 31 सीट ही हासिल कर सकी। खैर , यह इस पोस्ट का विषय नहीं है।

    14 जनवरी 1980 को इंदिरा गाँधी पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और तब तक बी पी मंडल अपनी रिपोर्ट भी लगभग तैयार कर चुके थे। 31 दिसंबर 1980 को मंडल कमिशन ने अपनी रिपोर्ट इंदिरा गाँधी को सौंप दिया। इंदिरा गाँधी को मंडल कमिशन की सिफारिशों को नहीं लागू करना था , सो उन्होंने नहीं किया और उस पर कुंडली मार कर बैठ गयी। इंदिरा गाँधी ने इसे क्यों नहीं लागू किया , राजनीति के छात्रों को इसे समझ पाना बहुत मुश्किल नहीं है। कांग्रेस का आधार वोट जो भी रहा हो लेकिन शीर्ष नेतृत्व समूह अगड़ी जातियों का ही समूह था। इक्के -दुक्के दलित और पिछड़ा चेहरा यदि था भी तो वह सिर्फ चेहरा चमकाने के लिए था , डिसिशन मेकिंग में ये लोग कोई तवज्जो नहीं पाते थे। इनके आधार वोट्स में मुस्लिम के अलावा सवर्ण जातियों का बहुत बड़ा समूह था जिसे नाराज कर मंडल आयोग की अनुशंसाओं को लागू कर पाना इंदिरा के लिए इतना सहज नहीं था। मँझोली जातियाँ और दलितों के वोट्स कांग्रेस को नहीं मिलते थे , ऐसा नहीं है लेकिन ऐसे वोट्स किसी एक जगह न जाकर समाजवादी खेमों , वामपंथी खेमों में बँटे हुए थे। खैर , इंदिरा बिना कुछ कहे -सुने इस आयोग की रिपोर्ट को अनंत काल के लिए दबाने के मकसद से ठंढे बस्ते में डाल दिया।
    इंदिरा ने भले इस रिपोर्ट को दबा दिया लेकिन वह वर्षों पुरानी माँगों को लेकर उठ रही आवाजों को कैसे दबा पाती ? मंडल कमिशन की अनुशंसाओं को लागू करने की माँग समाजवादी खेमों (तत्कालीन जनता पार्टी ) द्वारा होती रही और छोटे -बड़े आंदोलन होते रहे। गौरतलब है कि इस दौरान वामपंथी दलों का इस रिपोर्ट पर क्या रुख रहा होगा ? उस समय की घटनाओं का यदि गौर से अवलोकन किया जाय तो पता चलता है कि वामपंथी दलों का भी लगभग वही रवैया था कि जबतक पानी गर्दन से ऊपर न बहने लगे , मौन धारण ही श्रेयस्कर है। यह मौन इस रिपोर्ट से सहमति नहीं , असहमति के लक्षण थे।

    इधर जनता पार्टी में क्या चल रहा था ? भारी -भरकम हार के बाद क्या पार्टी नीतिगत स्तर पर किसी मंथन या सुधार के दौर से गुजर रही थी ? अब इसे जो भी कहें , लेकिन हार का ठीकरा एक -दूसरे पर फोड़ने के चक्कर में जनता पार्टी के नेता सरफुट्टौवल के अलावा कुछ नहीं कर रहे थे। हार के बाद जनता पार्टी के जनसंघ वाले खेमे जिनमें वाजपेयी , आडवाणी प्रमुख थे , की दोहरी सदस्य्ता पर सवाल उठाये जाने लगे। यह माँग जोर पकड़ने लगी कि पार्टी का सदस्य रहते हुए कोई आरएसएस की भी सदस्य्ता कैसे रख सकता है और संघ की कार्यशालाओं में हिस्सा कैसे ले सकता है। यह विवाद इतना बढ़ा कि जनता पार्टी टूट गयी और जनता पार्टी का जनसंघ वाला खेमा 1980 में ही उस पार्टी से अलग होकर नए दल का निर्माण किया और भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ जिसके अध्यक्ष बने अटल बिहारी वाजपेयी। शुरू में दिखावे के लिए ही सही इस पार्टी ने अपने लिए गांधीयन समाजवाद का रास्ता चुना , हालाँकि इस पर जनसंघ और आरएसएस की विचारों का ही प्रभाव था। लेकिन फिर भी आरएसएस का इस नयी बनी पार्टी पर वह नियंत्रण नहीं था जो आज नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भारतीय जनता पार्टी पर है। कुछ सालों तक यह दल गाँधी और समाजवाद के इर्दगिर्द ही अपने संघर्ष का तानाबाना बुनता रहा लेकिन 1984 के आमचुनावों में मात्र 2 सीटे हासिल कर पाने की भारी असफलता ने इस दल के कलेवर और विचार , दिशा और दशा सब बदल कर रख दिया। हालाँकि यदि इस चुनाव से ठीक पहले इंदिरा गाँधी की हत्या नहीं हुई होती तब क्या गुणा -गणित होता , यह कहना मुश्किल है। इस दल ने गाँधी और समाजवाद के चोले को उतार फेंक उग्र हिंदुत्व की राह पकड़ ली और यही वह समय था जब आडवाणी के नेतृत्व में राममंदिर आंदोलन ने जोड़ पकड़ना शुरू किया।

    उधर बाकी की जनता पार्टी क्या कर रही थी ? 1979 की हार ने इस पार्टी में कोहराम ही मचा दिया था। जैसे यह दल कुनबा – कुनबा जोड़कर बना था , वैसे ही यह बिखड़ता गया , एक दिल के टुकड़े हजार हुए कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा। उधर जनसंघ वाला खेमा भारतीय जनता पार्टी बना तो भारतीय लोक दल जिनका नेतृत्व चौधरी चरण सिंह के हाथों था , 1980 में ही अलग होकर पुनः लोकदल के नाम से नया दल बना बैठे। जनता पार्टी खत्म तो नहीं हुई लेकिन ख़त्म जैसी ही हो गयी। एक जनता पार्टी चंद्रशेखर चलाते रहे और एक तो सुब्रमण्यम स्वामी 2013 तक चलाते रहे जिसका विलय अंतत उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में कर लिया। जनता पार्टी हालत यह हो गयी कि 1984 के आम चुनाव में इंदिरा की मौत के बाद जिसमें राजीव गाँधी को 414 सीट मिले वहीँ जनता पार्टी 10 सीट , चौधरी चरण सिंह का दल लोक दल महज 3 सीट और भारतीय जनता पार्टी मात्र 2 सीटों पर सिमट कर रह गयी। जनता पार्टी की आहुति 11 अक्टूबर 1988 को तब दे दी गयी जब कांग्रेस पर बोफोर्स तोप के सौदे में सीधा राजीव गाँधी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह अलग हुए और जनता दल नामक नए दल का गठन हुआ। जनता पार्टी का विलय इस जनता दल में हो गया और विश्वनाथ प्रताप सिंह इसके अध्यक्ष बने।

    1989 के आम चुनाव में जनता दल के नेतृत्व में कई अन्य छोटी -छोटी पार्टियाँ एकत्रित हुई जिसे राष्ट्रीय मोर्चा का नाम दिया गया। जनता दल ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कई वादे किये जिसमें एक प्रमुख वादा था मंडल कमिशन की सिफारिशों को लागू करना। जनता दल को भारतीय जनता ने पसंद किया और बोफोर्स के हल्ले ने कांग्रेस को काफी नुकसान पहुँचाया। कांग्रेस 414 के टैली से धड़ाम होकर 197 पर आ गिरी। नए बने जनता दल को पहली ही बार में 143 सीट मिले। उग्र हिंदुत्व और राममंदिर के आंदोलन की नाव पर सवार होकर भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित बढ़त मिली और उसका आंकड़े पिछले चुनाव के मुकाबले 2 सीट से 85 सीट पर जा पहुँचा। चुनाव उपरांत राष्ट्रीय मोर्चा ने वाम मोर्चा की सहायता से और भारतीय जनता पार्टी के बाहरी समर्थन से वी पी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनायीं। 10 दिसंबर 1989 को वी पी सिंह प्रधानमंत्री बने।

    सरकार बनते ही समाजवादी खेमों ने जिनमें शरद यादव , लालू प्रसाद यादव , राम बिलास पासवान जैसे प्रमुख लोग थे , वी पी सिंह पर मंडल आयोग की रिपोर्ट की अनुशंसाओं को लागू करने का दबाव बनाने लगे। उधर जनता दल के ही लहर में कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए जिसमें बिहार समेत अन्य राज्यों में जनता दल का जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। बिहार, कर्नाटक , हरियाणा , उत्तरप्रदेश , ओडिसा आदि राज्यों में जनता दल की सरकार बनी। यह किन परिस्थितियों में हुआ , किसने दबाव बनाये , परदे के पीछे क्या -क्या खेल चल रहा था , इसके विस्तार में जाना भी इस पोस्ट का मकसद नहीं है। 7 अगस्त 1990 को जनता दल सरकार ने अपनी मंशा इस आयोग की रिपोर्ट को लेकर जता दी और इसके ठीक 6 दिन बाद 13 अगस्त को गवर्नमेंट आर्डर के जरिये इसके कुछ हिस्सों को लागू करने की घोषणा कर दी गयी और अगले दो दिनों बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री वी पी सिंह ने अपने भाषण में लाल किले की प्राचीर से भी इस बात का जिक्र किया।

    इसकी घोषणा होते ही असली खेल शुरू हो गए। कांग्रेस की त्योरियाँ तो चढ़ी ही , सरकार को समर्थन दे रही भारतीय जनता पार्टी ने भी इसका प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष विरोध किया। दोनों के वजूद दाँव पर लगने वाले थे। सड़कों पर आरक्षण विरोधी और आरक्षण समर्थकों के प्रदर्शन होने लगे। पूरे हिन्दुस्तान में खासकर उतर भारतीय बेल्ट में जमकर तोड़-फोड़ और हिंसा हुई। सैकड़ों लोग मारे गए। पिछड़ी -दलित जातियाँ जो अब तक कांग्रेस , कम्युनिस्ट के झंडे ढो रही थीं , जनता दल के पीछे लामबंद होती दिखने लगी। जगह -जगह मशाल जुलूस , रैलियाँ आम बात थीं। मुझे याद है मेरे गाँव से भी एक बहुत बड़ा मशाल जुलूस निकलकर 4 किलोमीटर तक गया जिसमें वी पी सिंह जिंदाबाद , लालू यादव जिंदाबाद जैसे नारों से आसमान गूँज रहा था। भारतीय जनता पार्टी यह सब देख घबरा गयी। बड़े जतन से हिंदुत्व की लहर पर सवार होकर वह 2 से 85 पर पहुँची थी और उसे अपने लिए बेहतर भविष्य दीख रहा था। लेकिन मण्डल कमिशन की सिफारिश को लागू करने की घोषणा के साथ ही उसे यह उम्मीद क्षीण नजर आने लगी। इसकी काट के लिए आडवाणी ने रथयात्रा का प्रपंच रचा। उधर कांग्रेस से नाउम्मीद सवर्ण जातियों को भी भारतीय जनता पार्टी में एक उम्मीद की किरण दिखने लगी थी। इधर आडवाणी ने रथयात्रा की घोषणा की उधर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सरकार के इस घोषणा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस पर रोक की माँग कर दी।

    आडवाणी की रथ यात्रा का बिहार में क्या हश्र हुआ , यह मालूम है. हालाँकि वी पी सिंह नहीं चाहते थे कि आडवाणी को गिरफ्तार किया जाय। क्यों नहीं चाहते थे , इसका अलग -अलग लोग अपने तरीके से जवाब देते हैं लेकिन मैं साफ़ -साफ़ कहने का आदी हूँ। वी पी सिंह को पता था कि आडवाणी उधर गिरफ्तार हुए और इधर सरकार गिरेगी। भाजपा चाहती भी थी कि उसे कोई ठोस बहाना मिले ताकि वी पी सिंह से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी जाय और मंडल आयोग की अनुशंसा जो एक गवर्नमेंट आर्डर के जरिये लागू की गयी थी , ठोस संवैधानिक अमलीजामा पहने बगैर फिर से ठंढे बस्ते में चला जाय। यदि ऐसा करने में भाजपा सफल होती है तो उसे कांग्रेस से उन सवर्ण समर्थकों को झटकने में कामयाबी मिलती जिसे अब तक लगता था कि सवर्णों का हित कांग्रेस के ही हाथ में सुरक्षित है। भाजपा को बहुत हद तक कामयाबी मिली भी। इधर लालू यादव ने आडवाणी को दबोचा , उधर वी पी सिंह की सरकार गिरी। तिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नमेंट आर्डर पर अंतिम सुनवाई तक स्टे लगा दिया।

    वी पी सिंह की सरकार तो गिर गयी लेकिन राज्यों में जनतादल के क्षत्रप मजबूत होकर उभरे। एक तरफ मंडल कमिशन के उफान ने पिछड़ों -दलितों वामपंथियों के चंगुल से निकलकर को लालू , मुलायम जैसे नेताओं के पीछे गोलबंद कर दिया वहीँ सवर्ण जाति के लोग कांग्रेस के इतर भाजपा को अपना सच्चा प्रतिनिधि महसूस करने लगे। एक और वर्ग था मुसलमान। जो मुसलमान अब तक कांग्रेस के पीछे लामबंद थे , भाजपा के चढाव के बीच कांग्रेस की आक्रामकता में कमी देखकर उसका भी कांग्रेस से मोहभंग होने लगा था। शाहबानो का मामला मुस्लिमों का कांग्रेस से विश्वास दरकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा था तो अब भाजपा के उग्र हिंदुत्व के बीच लालू यादव और मुलायम सिंह यादव का आडवाणी और राममंदिर आंदोलन के करता-धर्ता से सीधा टकराना , मुस्लिम समुदाय के मन में इन क्षेत्रीय नेताओं के लिए एक सम्मान और समर्थन का भाव बटोर रहा था। रही -सही कसर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस में नरसिम्हा राव की संदिग्ध भूमिका को लेकर पूरी हो गयी जिसमें कम से कम राज्यों के चुनाव में उत्तर भारत के मुस्लिम कांग्रेस को पूरी तरह छोड़ चुके थे और अपना समर्थन इन क्षेत्रीय क्षत्रपों को दे चुके थे। कांग्रेस का तम्बू बिहार , उत्तरप्रदेश , हरियाणा , झारखण्ड और अन्य राज्यों से उखड चुका था। वहीँ वामपंथी पार्टियाँ जो अब तक दलितों , पिछड़ों के लिए संघर्ष के नाम पर वोट पाकर सवर्ण चेहरों को सदन में भेजने का जो कारनामा अब तक कर रही थी , उसकी भी दुकानें बंद होने के कगार पर पहुँच गयी। मंडल के बाद उभरे राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथी पार्टी के वैसे समर्थक जो सवर्ण वर्ग से थे , भाजपा का दामन थम चुके थे। दलित ,पिछड़े, मुस्लिम समर्थक लालू। मुलायम जैसों का हाथ थाम चुके थे। वामपंथी दलों का भी तम्बू मंडल की सुनामी में बह गया और बहकर इतनी दूर चला गया कि लाख चाहने के बाद भी नया आशियाना बसाया न जा सका।

    Lal Babu Lalit, लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील है.  ये लेखक के निजी और व्यक्तिगत विचार हैं अतः इसे पढते समय पाठक जन अपने विवेक का प्रयोग करें, और इस लेख को पढने के बाद अपनी प्रतिक्रिया जरूर देवें।

  • एसडीपीआई लॉकडाउन का स्वागत करता है,युद्ध स्तर पर समस्याओं का समाधान चाहता है:अफजल खान

    प्रेस विज्ञप्ति
    14 अप्रैल 2020:सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया मुजफ्फरपुर के जिला महासचिव अफजल खान ने लॉकडाउन के फैसले को यह कहते हुए स्वागत किया है कि मेरे देश भारत सहित दुनिया एक महामारी से पीड़ित है जिसे हम पुनरुत्थान के रूप में अनुभव कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपचार शारीरिक दूरी है। इस भौतिक दूरी को सुनिश्चित करने के लिए लॉकडाउन आवश्यक है, और इसलिए हम सरकार के लॉकडाउन के फैसले का स्वागत करते हैं। साथ ही, अफजल खान ने कहा कि कोई भी महामारी दुनिया में कई समस्याएं लाती है, इसलिए हमारे पास ये सभी मुद्दे हैं। समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अनिवार्य रूप से, सरकार को लॉकडाउन परियोजना को सफल बनाने के लिए इस चुनौती से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से योजनाबद्ध तरीके से काम करना चाहिए, साथ ही साथ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस संकट के समय में जिस तरह से जनता की सेवा करने में बाधाएं आ रही हैं। समाप्त किया जाए

    उन्होंने कहा कि कोरोना से युद्ध में लॉकडाउन और राशन की उपलब्धता के बाद से, सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण वे निकाय हैं जो अब तक विफल हो रहे हैं, जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता है, इसलिए हम बहुत नुकसान उठा सकते हैं। डॉक्टरों को पीपीए डिलीवरी से अधिक परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए काम करें। जनता को अधिकतम मास्क और सैनिटाइज़र प्रदान करते हुए सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों की इष्टतम स्वच्छता सुनिश्चित करें।

    अफ़ज़ल खान ने कहा कि देश के बाकी हिस्सों की तरह, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी भी मुज़फ़्फ़रपुर में पिछले पंद्रह दिनों से शहर के लोगों की सेवा में है, एक हजार से अधिक लोगों को सार्वजनिक रसोई के माध्यम से दिन में दो बार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि भारत की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसा करना जारी रखेगी, हम जनता की मदद से भोजन और राशन किट के माध्यम से शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।

  • 3 मई तक बढ़ाया गया लाकडाउन,प्रधानमंत्री ने कहा सात बात पर चाहिए आपका साथ

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: नुकसान को टालने में सफल रहा है । कष्ट सहकर भारत को बचाया है । मैं जानता हूँ कि कितनी दिक्कते आई हैं । लेकिन आप देश के खातिर एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं । हमारे संविधान में we the people of india शक्ति की बात कही है यही तो है । बाबा साहब की जन्म जयंती के अवसर पर यह सच्ची श्रद्धांजलि है । बाबा साहब को नमन ।
    साथियों यह देश के अलग अलग हिस्सों में अलग-अलग त्योहारों का समय है। अनेक राज्यों में नए वर्ष की शुरुआत हुई है। लाकडाउन के नियमों का जिस तरह पालन कर रहें है वह बहुत प्रेरक है।
    साथियों आज पूरे विश्व कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है उससे हम सभी परिचित है। जब हमारे यहाँ एक भी केस नहीं था कोरोना प्रभावित आने वाले लोगों के लिए स्क्रीनिंग की गई थी । जब हमारे यहाँ 550 केस था तब हमने 21 दिन का लाकडाउन किया था । हमने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया। यह एक ऐसा संकट है जिसमें किसी देश की तुलना में सही नहीं है। लेकिन फिर भी अन्य देशों की तुलना में भारत बहुत संभली स्थिति में हैं ।

    महीने भर पहले कई देश कोरोना संक्रमण के मामले में भारत के बराबर खड़े थे । पर वहां आज स्थिति अच्छी नहीं है । अगर हमने तेज फैसले न लिए होते आज स्थिति अच्छी नहीं होती । बीते दिनों के अनुभवों से हमने जो सीखा है वही रास्ता सही है । सोशल डिस्टेसेंसिग और लाकडाउन का ही रास्ता सही है । आर्थिक क़ीमत इसकी चुकानी पड़ी है । लेकिन भारतीयों के जान से ज्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है । राज्य सरकारों ने भी बहुत अच्छा कार्य किया है ।
    लेकिन कोरोना जिस तरह से फैल रहा है । उससे सरकारें और सतर्क हो गई है । समस्याएं कम कैसे हो इसके लिए निरंतर चर्चा किया गया है। सभी चाहते हैं कि लाकडाउन बढ़ाया जाए।

    3 मई तक लाकडाउन बढाया गया है । इस दौरान हमें अनुशासन का पालन करना होगा। मेरी सभी देशवासियों से प्रार्थना है कोरोना को किसी भी स्तर पर नए क्षेत्रों में नहीं फैलने देना है । कोरोना के नए मामले आते हैं तो यह हमारी चिंता होगी। हाटस्पाट पर सतर्कता रखना होगा । नए हाटस्पाट का बनाना हमारे लिए नए संकट पैदा करेगा । अगले एक सप्ताह तक के लिए कठोरता बढ़ाई गई । हर जगह को लाकडाउन में परखा जाएगा । इस दौरान मूल्यांकन किया जाएगा । जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे । वहां कुछ छूट दी जा सकती है । बाहर निकलने के बहुत सख्त होंगे । लाकडाउन के नियमों अगर टूटते हैं तो सारे अनुमति वापस ले लिए जाएंगे । मेरे देश वासियों सरकार की तरफ से कल एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी । 20 अप्रैल से जो छूट बढ़ेगा वह गरीबों को ध्यान में रखकर किया जाएगा ।

    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण के माध्यम से सरकार ने हर संभव मदद किया है । रासन और दवाइयों का पर्याप्त भंडार है ।अब 220 से ज्यादा लैब बन चुके है । एक लाख से अधिक बेड है । 600 से अधिक अस्पताल कोविड के इलाज कर रहें हैं । इन सुविधाओं का बढ़ाया जा रहा है । मानव कल्याण के युवा वैज्ञानिक आगे आए । वैक्सीन बनाए । धैर्य बनाकर रखें कोरोना से जीतेंगे ।

    सात बात पर आपका साथ चाहिए

    1 अपने घर के बुजुर्गों का ध्यान रखें ।
    2 लाकडाउन और सोशल डिस्टेसेंसिग का पालन करें ।घर में बने फेस कवर का उपयोग करें ।
    3 इम्युनीटी बढ़ाए ।
    4 आरोग्य सेतु बढ़ाए
    5 जितना हो सके गरीबों की मदद करें ।
    6 किसी को नौकरी से ना निकालें ।
    7 कोरोना योद्धाओं का सम्मान करें ।

  • मालदार लोग आगे आकर ग़रीब मजदूरों की मदद करें खैरुल बशर:शहजाद सलामी

    पंजाब लुधियाना (मेराज़ आलम ब्यूरो) देश में इस मुश्किल वक़्त में आल इंडिया जमात ए सलमानी (रजि ट्रस्ट) के महासचिव, पंजाब जनाब शहज़ाद हुसैन सलमानी ने निजी तौर पर जनाब मंज़ूर आलम सलमानी, राष्ट्रीय महासचिव जी के राशन वितरण से प्रेरित होते हुए लुधियाना में आज सैकड़ों भाइयों के लिए राशन का वितरण किया। और सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रखते हुए ऑल इंडिया जमात ए सलमानी ट्रस्ट जिला लुधियाना प्रधान नाजिम सलमानी और जिला महासचिव इरफान सलमानी साहब वह पूरी टीम लुधियाना के मशवरे व रूपनगर सरपंच श्रीमती मुन्नी राणा की देखरेख में आज राशन वितरण किया गया।

    देश में इस वक्त कोरोना वायरस नाम की इस महामारी में आज पूरे देश में लॉक डाउन है जिस कारण गरीब मजदूर व कामगार भाइयों पर एक बहुत बड़ा संकट आ गया है कारोबार बंद है। छोटे सैलून व उनमें काम करने वाले कारीगर, रोज़ कमाने वाले मजदूर रिक्शा चालक ऑटो चालक, घरों में काम करने वाले बहुत से लोगो को दो वक्त का खाना भी मयस्सर नहीं है। ऐसे में आल इंडिया जमात ए सलमानी (रजि.ट्रस्ट) के पदाधिकारी महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब अनेक जगह पर मजबूर लोगो की मदद को आगे आए है।

    माननीय जनाब खैरुल बशर सलमानी साहेब, राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय के सख़्त आदेश कि मदद पाने वाले की फोटो खींचकर या वीडियो बनाकर अपलोड करके उसे रुसवा ना किया जाए।
    जनाब खैरूल बशर सलमानी जी व जनाब मंज़ूर आलम सलमानी जी द्वारा माननीय प्रधान मंत्री जी से पत्र के माध्यम से भी असंगठित क्षेत्र के कामगारों ख़ास तौर से सैलून के मालिकों और कारीगरों के लिए विशेष पैकेज जारी करने की मांग कर चुके है।

    हमारा मकसद है हम अपने प्यारे देशवासियों के ज्यादा से ज्यादा काम आ सके। कोशिश करूंगा मेरे साथ मौजूद मेरे बेटे साद महमूद सलमानी व असद महमूद सलमानी और मैं शहजाद हुसैन सलमानी आगे भी देश और समाज के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाता रहूं।

  • Covid-19 : गरीब और जरूरतमंदों के लिए मददगार बना ‘अतिया रोटी बैंक ‘

    नई दिल्ली : कोरोनावायरस फैलने के बाद देशभर में किए गए लॉक डाउन के बाद दिल्ली सरकार के साथ-साथ छोटे बड़े संगठन भी गरीब लोगों का सहारा बन रहे हैं. इसी कड़ी में उत्तर पूर्वी जिले में सीलमपुर से संक्रिया ‘अतिया रोटी बैंक’ ने सैकड़ों जरूरतमंदों लोगों को राशन की किट मुहैया कराई हैं

    संगठन के मुख्य संयोजक समीर शेरवानी ने बताया उनकी संस्था पिछले 15 महीने से दिल्ली के हॉस्पिटल में खाना बांटने का काम अंजाम दे रही है अब ऐसे मुश्किल वक्त में जब हिंदुस्तान की हुकूमत और आम व ख़ास सब परेशान हैं कोरोना वायरस की वजह से संस्था ने हालात देखकर बेड़ा उठाया राशन की किट बांटने का उसी के साथ साथ संस्था मजदूरों, ग़रीबों, बेसहाराऔ, आदि को पका हुआ खाना भी दे रही है

  • कल सुबह 10 बजे प्रधानमंत्री राष्ट्र को करेंगे संबोधन, जानिए क्या सब खुलने के आसार हैं

    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार 14 अप्रैल को सुबह 10 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। कोरोनावायरस पर यह उनका 26 दिन में देश के नाम चौथा संदेश होगा। इसमें वे लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान कर सकते हैं। इससे पहले उन्होंने 24 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन देकर कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन का ऐलान किया था। लॉकडाउन के इस पहले चरण का 14 अप्रैल को आखिरी दिन है।

    5 राज्यों में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन
    पंजाब, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और बंगाल में लॉकडाउन 30 अप्रैल तक बढ़ चुका है। बीते शनिवार प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में 78 करोड़ की आबादी वाली 13 राज्य सरकारों ने देशभर में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाने के सुझाव पर सहमति जताई थी।

    प्रधानमंत्री ने कहा था- जान भी और जहान भी, दोनों बचाना जरूरी
    बैठक में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से कहा था, ‘‘जान है तो जहान है। जब मैंने राष्ट्र के नाम संदेश दिया था, तो शुरुआत में इस पर जोर दिया था कि हर नागरिक की जान बचाने के लिए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बहुत जरूरी है। देश के ज्यादातर लोगों ने बात को समझा और घरों में रहकर दायित्व निभाया। अब भारत के उज्जवल भविष्य के लिए, समृद्ध और स्वस्थ भारत के लिए जान भी, जहान भी, दोनों पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। जब देश का प्रत्येक व्यक्ति जान भी और जहान भी, दोनों की चिंता करते हुए अपने दायित्व निभाएगा, सरकार और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करेगा, तो कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई और मजबूत होगी।’’

    उद्योग मंत्रालय की सिफारिश- 15 तरह के उद्योगों और फल-सब्जी वालों को छूट दें
    रविवार को ही उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी हुआ है, जिसमें 15 तरह के उद्योगों को शुरू करने और फल-सब्जी बेचने वालों को लॉकडाउन में छूट देने की सिफारिश की गई है।

    इन पर पाबंदी बनी रहने के आसार
    सभी तरह के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और खेल से जुड़े इवेंट्स पर पाबंदी बनी रह सकती है। सिनेमा हॉल, मॉल्स, पार्क, पर्यटन स्थल, धर्मस्थल स्कूल-कॉलेज भी अभी बंद रह सकते हैं।

    रेलवे : आधी ही सीटों पर ही रिजर्वेशन देने पर विचार
    सरकार कुछ चुनिंदा रूटाें पर ट्रेनें शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि 30 अप्रैल के बाद भी एकदम से पूरी कैपेसिटी के साथ ट्रेनें शुरू करना मुमकिन नहीं होगा। इसलिए धीरे-धीरे इन्हें शुरू करने की तैयारी है।

    हो सकता है कि स्टेशन पर ट्रेन आने से चार घंटे पहले पहुंचना जरूरी किया जाए।
    ट्रेनाें में जनरल बाेगी नहीं हाेगी। हो सकता है कि एसी डिब्बे भी न रखे जाएं। सिर्फ रिजर्वेशन होने पर ही यात्रा हो सकेगी।
    साेशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए आधी सीटों पर ही रिजर्वेशन दिया जा सकता है।
    काेराेना संक्रमण के हाॅट स्पाॅट पर ट्रेनें नहीं रुकेंगी।
    भीड़-भाड़ से बचने के लिए स्टेशनाें पर स्टाॅपेज का टाइम भी दोगुना किया जा सकता है।
    हर स्टेशन पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा सकती है।
    स्टेशन पर सिर्फ वे पहुंच सकेंगे जिनके पास रिजर्वेशन वाली टिकट है।
    भीड़ रोकने के लिए हो सकता है कि प्लेटफाॅर्म टिकट न बेचे जाएं।
    उड़ानें : रिपाेर्टिंग टाइम 45 मिनट से बढ़ाकर 2 घंटे किया जा सकता है

    घरेलू रूटाें पर बेहद कम संख्या में उड़ानें शुरू करने का विचार है। उड़ानाें के बीच काफी अंतर रखा जा सकता है।
    भीड़-भाड़ से बचने के लिए रिपाेर्टिंग टाइम 45 मिनट से बढ़ाकर 2 घंटे किया जा सकता है।
    हो सकता है कि एयरलाइंस कंपनियों से कहा जाए कि वे साेशल डिस्टेंसिंग के लिए सभी क्लास में बीच की सीट खाली रखें।
    उद्योग मंत्रालय की सिफारिशें : चुनिंदा देशों के लिए उड़ानें शुरू की जाएं
    केंद्र के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार रात एक नोटिफिकेशन जारी कुछ सुझाव दिए हैं। सुझावों में कहा गया है कि सिर्फ ग्रीन जोन में लोकल ट्रांसपोर्ट खोलने की छूट दी जाए, लेकिन रेड और ऑरेंज जोन में लोकल ट्रांसपोर्ट शुरू न करें। भारत से बाहर जाने के लिए स्पेशल और कमर्शियल उड़ानों की ही छूट मिले। चुनिंदा देशों के लिए उड़ान की सीमित छूट रहे।

    तीन जाेन बनाने का सुझाव

    रेड जोन: हॉटस्पॉट वाले जिले, वहां पहले की तरह सबकुछ बंद रहे।
    ऑरेंज जोन: जिन जिलों में नए मरीज नहीं आ रहे, पुराने मरीज बेहद कम।
    ग्रीन जोन: संक्रमण मुक्त जिले, वहां व्यापारिक गतिविधियां शुरू करें।
    लॉकडाउन क्यों जरूरी?
    सरकार का कहना है कि अगर लॉकडाउन नहीं होता तो देश में अब तक कोरोनावायरस के 8.2 लाख केस सामने आ चुके होते। भारत कोरोनावायरस की तीसरी स्टेज यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन में पहुंच जाता, जिसमें कोरोना फैलने के सोर्स का पता नहीं लगता और बड़ी तादाद में लोग संकमित हो जाते हैं।

    कोरोना पर अब तक मोदी के 3 संदेश

    पहला: प्रधानमंत्री ने 19 मार्च को देश को संबोधित किया था और जनता कर्फ्यू लगाने की बात कही थी। 22 मार्च को देशभर में सबकुछ बंद रहा। शाम को लोगों ने घरों के अंदर से ही कोरोना फाइटर्स का ताली और थाली बजाकर आभार जताया था।
    दूसरा: मोदी ने 24 मार्च को संबोधित किया और कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 25 मार्च से 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लोग घरों में रहने की लक्ष्मण रेखा का पालन करें।
    तीसरा: प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अप्रैल को एक वीडियो संदेश जारी किया। इस दौरान लोगों से 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर घरों में दीये, मोमबत्ती और मोबाइल की लाइट जलाकर एकजुटता दिखाने की अपील की थी।(इनपुट भास्कर)

  • बिहार:चक बहाउद्दीन और बाबूपुर मस्जिदों में तब्लीगी जमात के सभी सदस्यों की रिपोर्ट नेगेटिव

    रक्त का नमूना पटना भेजा गया, सभी लोग जांच में स्वस्थ पाए गए

    (दलसिंह सराय: 7 अप्रैल) समस्तीपुर जिले के दलसिंह सराय ब्लॉक में स्थित चक बहाउद्दीन गाँव और बाबूपुर की मस्जिद में ठहरे हुए तब्लीगी जमात के सभी पंद्रह सदस्यों के कोरोना का परीक्षण किया गया है और सभी लोगों की रिपोर्ट को नेगेटिव पाया गया है। ज्ञात हो कि 2 मार्च से, तब्लीगी जमात के 15 सदस्य चक बहाउद्दीन और बाबूपुर की मस्जिद में ठहरे हुए थे, जो लॉकडाउन के कारण अपने स्थान पर नहीं लौट सके थे। इन सभी लोगों का संबंध हरदोई, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश), अनूपपुर (मध्य प्रदेश) और दिल्ली से है । तबलीगी जमात के सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं : मोहम्मद ओज़ैर अहमद , मोहम्मद आमिर, मोहम्मद हमज़ा सेराज , मोहम्मद सोहराब , मोहम्मद इस्राइल , मोहम्मद शादाब, मोहम्मद वसीम , मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद जकी, मोहम्मद इफजान, जुनेद कुरैशी, मोहम्मद रिज़्वान , मोहम्मद सरफराज कुरैशी, मोहम्मद आसिफ़, मोहम्मद रेहान

    चक बहाउद्दीन पंचायत के मुखिया अदीब कौकब फरीदी ने मीडिया को बताया कि उनके ठहरने की सूचना उसी समय स्थानीय पुलिस और प्रशासन को दे दी गई थी। प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आ कर उन सब की जांच की और उन्हें स्वस्थ पाकिर मस्जिद में क्वारेंटाइन में रहने का निर्देश दिया। अत: सात लोग चक बहाउद्दीन की मस्जिद में और आठ लोग बाबूपुर मस्जिद में ठहरे थे। लेकिन अचानक, शुक्रवार को, स्वास्थ्य विभाग की टीम आई और उन सब लोगों को दलसिंघ सराय ले गई तथा उन्हें दलसिंघ सराय में स्थित ए एन कॉलेज में बने कोरनटाईन केंद्र में रखा और ब्लड सैंपल जांच के लिए पटना भेजा। आज इन सभी लोगों की रिपोर्ट आ गई है और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई है और सब लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं ।चुनांचे स्थानीय प्रशासन द्वारा सभी सदस्यों को दोनों मस्जिदों में पहुंचा दिया गया है, परंतु एहतियात के तौर पर चौदह दिनों के लिए मस्जिद में ही रहने की सलाह दी गई है।इन लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आने से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है और खुशी जाहिर की है।

  • शबेबरात में लोगो ने किया लॉकडाउन का पालन:मस्जिदों में रहा सन्नाटा,घरों में ही अदा की गई नमाज

    शबेबरात के मौके पर भी लॉक डाउन का मूसलमानो ने किया पालन

    । शब ए बरात आज सूर्यास्त के बाद से होगी। इसे लेकर इमारत ए शरिया सहित मधेपुरा के सभी मस्जिदों की ओर से एलान कर दिया गया है। सभी एदारों की ओर से देशभर में लागू लॉकडाउन का अनुपालन करते हुए घरों में इबादत करने की अपील की गई है। इस इबादत के साथ कोरोना वायरस जैसी महामारी से निजात और देश की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए दुआएं करने की अपील भी की गई है।

    एदारों की ओर से कहा गया है कि शब ए बरात की रात मस्जिदों में न जाकर अपने घरों में ही इबादत करें। इसके अलावा शब ए बरात के मौके पर कतई आतिशबाजी ना हो। इसे हराम बताया गया है। जदयु के बिहार के बुद्धिजीवी प्रकोष्ट के उपाध्यक्ष डॉ प्रो मो गुलहसन ने अपील की है कि लॉकडाउन का अनुपालन करते हुए घरों में नमाज अदा करें। मस्जिदों में न जाएं। क्रब्रिस्तान न जाकर घरों से ही मरहूमों के इसले सवाब के लिए दुआएं पढ़ें। शब ए बारात को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है।

    ये है गुनाहों से तौबा की रातः मौलाना सुफ़यान साहब ने बताया जाता है कि ये रात बड़ी अजमत और बरकत वाली होती है। इस रात में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है। इस दिन मुस्लिम घरों में तमाम तरह के पकवान जैसे हलवा, बिरयानी, कोरमा आदि बनाया जाता है। इबादत के बाद इसे गरीबों में भी बांटा जाता है। शब-ए-बारात की रात को इस्लाम की सबसे अहम रातों में शुमार किया जाता है

    क्योंकि इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, इंसान की मौत
    और जिंदगी का फैसला इसी रात को किया जाता है।
    इसलिए इसे फैसले की रात भी कहा जाता है।