Category: देश

  • J&K के एलजी बदले:मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल होंगे,राष्ट्रपति ने गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा मंजूर किया

    नई दिल्ली
    मनोज सिन्हा पिछले साल यूपी की गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे।

    गिरीश चंद्र मुर्मू केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल थे, उन्होंने बुधवार को इस्तीफा दिया था
    चर्चा है कि मुर्मू को कैग बनाकर दिल्ली भेजा जा रहा है, क्योंकि मौजूदा कैग राजीव महर्षि इसी हफ्ते रिटायर हो रहे है

    पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा (61) जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल होंगे। राष्ट्रपति भवन ने यह जानकारी दी है। सिन्हा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री और संचार राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, पिछले साल गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उनका नाम मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में भी चर्चा में आया था।

    गाजीपुर जिले के मोहनपुरा में जन्मे सिन्हा पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़े गांवों के विकास से जुड़े कामों में सक्रिय रहे थे। पॉलिटिकल करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई। 1982 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट चुने गए थे। 1989 से 1996 तक भाजपा की नेशनल काउंसिल के सदस्य रहे। 1996 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2014 में उन्होंने तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीता था।

    गिरीश चंद्र मुर्मू को कैग की जिम्मेदारी मिल सकती है
    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। मुर्मू केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल थे। उन्होंने बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। 1985 बैच के आईएएस ऑफिसर मुर्मू गुजरात कैडर के अफसर हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुर्मू को कॉम्पट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) बनाकर दिल्ली भेजा जा रहा है। फिलहाल राजीव महर्षि कैग हैं और वे इसी हफ्ते रिटायर हो रहे हैं।

    मुर्मू के अचानक इस्तीफे पर उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए
    5 अगस्त यानी एक दिन पहले जब कश्मीर में धारा 370 हटने का एक साल पूरा हुआ, ठीक उसी दिन सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर अचानक मुर्मू के इस्तीफे की खबर वायरल हुई। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट गवर्नर से जुड़ी चर्चा अचानक कैसे शुरू हो गई?


  • बाबरी मस्जिद,मस्जिद थी और सदैव मस्जिद रहेगी।आक्रामक क़ब्ज़े से वास्तविकता नहीं परिवर्तित हो जाती।सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया लेकिन न्याय को शर्मसार किया है:ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

    नई दिल्ली, 4 अगस्त 2020, आज जबकि बाबरी मस्जिद के स्थान पर एक मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने दीर्घकालिक स्टैंड को दोहराना आवश्यक समझता है कि शरीअत की रोशनी में जहां एक बार मस्जिद स्थापित हो जाती है वह क़यामत तक मस्जिद ही रहती है इसलिए बाबरी कल भी मस्जिद थी और आज भी मस्जिद है और इनशाअल्लाह भविष्य में भी रहेगी। मस्जिद में मूर्तियों को रख देने से, पूजा पाठ आरंभ करने से, लम्बे समय से नमाज़ पर प्रतिबंध लगा देने से मस्जिद की स्थिति समाप्त नहीं हो जाती।

    आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हज़रत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी ने एक प्रेस बयान में कहा कि यह हमेशा से हमारा स्टैंड रहा है कि बाबरी मस्जिद किसी भी मंदिर या किसी हिंदू पूजा स्थल को ध्वस्त करके नहीं बनाई गई थी। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी पुष्टि की कि बाबरी मस्जिद के नीचे खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वे बारहवीं शताब्दी की किसी इमारत के थे, बाबरी मस्जिद के निर्माण से चार सौ वर्ष पूर्व इसलिए किसी मन्दिर को ध्वस्त करके मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 22 दिसंबर 1949 की रात तक बाबरी मस्जिद में नमाज़ होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय का यह भी मानना है कि 22 दिसंबर 1949 को मूर्तियों को रखना अवैध था। सर्वोच्च न्यायालय यह भी मानता है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी की शहादत एक अवैध, असंवैधानिक और आपराधिक कृत्य था। अफ़सोस कि इन सभी स्पष्ट तथ्यों को स्वीकार करने के बावजूद कोर्ट ने अन्यायपूर्ण निर्णय सुनाया। मस्जिद की ज़मीन उन लोगों को सौंप दी जिन्होंने आपराधिक रूप से मूर्तियों को रखा और इसको शहीद किया।

    बोर्ड के महासचिव ने कहा “चूंकि सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च अदालत है इसलिए उसके अंतिम निर्णय को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है हालांकि हम यह अवश्य कहेंगें कि यह एक क्रूरतापूर्ण और अन्यायपूर्ण निर्णय है जो बहुसंख्यकों के पक्ष में दिया गया।” सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया लेकिन इसने न्याय को अपमानित किया है। अल्हम्दुलिल्लाह भारतीय मुसलमानों के प्रतिनिधित्व व सामूहिक प्लेटफॉर्म ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य पक्षों ने भी अदालती लड़ाई में कोई कसर नहीं रखी। यहाँ यह कहना अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि हिंदुत्व तत्वों का यह पूरा आंदोलन उत्पीड़न, धमकाने, झूठ पर आधारित था। यह एक राजनीतिक आंदोलन था जिसका धर्म या धार्मिक शिक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं था। झूठ और उत्पीड़न पर आधारित कोई इमारत देर तक खड़ी नहीं रहती।

    महासचिव ने अपने बयान में आगे कहा कि स्थिति चाहे कितनी भी खराब क्यों न हो, हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हमें विपरीत परिस्थिति में जीने की आदत बनानी चाहिए। स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती है। अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है { ये समय के उतार चढ़ाव हैं, जिन्हें हम लोगों के बीच प्रसारित करते रहते हैं} इसलिए हमें निराश होने की कदाचित आवश्यकता नहीं है और हमें स्वयं को स्थिति के सामने समर्पण नहीं करना है। हमारे समक्ष इस्तांबुल की आया सोफ़िया मस्जिद का उदाहरण इस आयत की मुंह बोलती तस्वीर है। मैं भारत के मुसलमानों से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मस्जिद की भूमि पर मंदिर के निर्माण से हतोत्साहित न हों। हमें याद रखना चाहिए कि तौहीद (एकेश्वरवाद) का विश्व केंद्र और अल्लाह का घर काबा लंबे समय तक बहुदेववाद और मूर्तिपूजा का केंद्र रहा है। अन्ततः मक्का की विजय के बाद प्यारे नबी ﷺ के माध्यम से फिर से तौहीद का केंद्र बन गया। हमारी ज़िम्मेदारी है कि ऐसे नाज़ुक अवसर पर ग़लतियों से तौबा करें, अपने अख़लाक़ और चरित्र को संवारें, घर और समाज को दीनदार बनाएं और पूरे साहस के साथ प्रतिकूलता का सामना करने का दृढ़संकल्प लें।

  • हरियाणा:घासेड़ा पहुंचे आफताब आलम,मोब लिंचिंग पर सीएम से मांगा जवाब

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता व नूह से विधायक चौधरी आफताब अहमद व पीसीसी सदस्य व उनके अनुज महताब अहमद रविवार को घासेड़ा पहुंचे और मोब लिंचिग के पीड़ित लुकमान व उनके परिवार से मुलाकात की व उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए वो प्रदेश सरकार से लड़ाई लड़ेंगें व दोषियों को सजा दिलाने का काम करेंगे।

    बता दें कि बीते शुक्रवार गुड़गांव में असामाजिक तत्वों की भीड़ ने मेवात के लुकमान पर लाठी डंडों व हथोडियों से हमला कर दिया था, जिस दौरान पुलिस भी वहां मौजूद थी।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने पीड़ित के परिवार से कहा कि वो उनके साथ खड़े हैं और न्याय दिलाने में हर संभव सहयोग करेंगे। आफताब अहमद ने कहा कि पूरा इलाका पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गांधी ग्राम घासेड़ा के लुकमान पर गलत विचारधारा से प्रभावित लोगों द्वारा हमला ना केवल लुकमान के शरीर पर हमला है बल्कि गांधी की विचारधारा व देश के लोकतंत्र पर गोडसे वादी विचारधारा का हमला है। सबसे बड़ी हैरानी व शर्म की बात ये है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ये दुस्साहस हुआ है, जो प्रशासन व सरकार को भी सवालों के घेरे में लाता है।

    आफताब अहमद ने कहा कि जिस दिन
    ये मामला हुआ उसी दिन गांव के लोगों ने उनके संज्ञान में ये मामला लाया, आफताब अहमद ने पुलिस कमिश्नर के के राव से तुरंत बात की और कानूनी कार्रवाई करने की बात उनसे कहा, लेकिन एफआईआर में पूरी धाराएं तक नहीं लगाई हैं और ना ही सरकार ने पीड़ित का इलाज कहीं कराया, ये बहुत शर्मनाक है। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आफताब अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री मेवात को जवाब दें कि पिछले छह सालों में ऐसे मामले मेवातियों से क्यूं हुए?

    कांग्रेस विधायक दल के उप नेता आफताब अहमद ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करे, पीड़ित परिवार को न्याय दे अन्यथा मेवात अब सरकार के खिलाफ आंदोलन की राह पर जाने की बात गंभीरता से सोच सकता है। क्योंंकि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इस बीजेपी सरकार में गैर सामाजिक तत्व ऐसे कामों में लगे हैं जो आपसी भाईचारे को खराब करने की दिशा में होते हैं।

    नूह विधायक चौधरी आफताब अहमद ने कहा कि कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है, मेवात में प्रदेश में सबसे अधिक गौ पालक हैं और मेवात के लोग अपने मवेशियों को अपने बच्चों की तरह ही प्यार करते हैं।

    आफताब अहमद ने कहा कि वो निजी रूप से भी और पूरा इलाका भी पीड़ित परिवार के साथ हर तरीके से खड़े हैं और मदद करेंगें।

    कांग्रेस विधायक दल के नेता आफताब अहमद ने मांग की है कि मोब लिंचिग के लिए कठोर से कठोर कानून बनाया जाए। इस दौरान गांधी ग्राम घासेड़ा के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • क़ुर्बानी को लेकर पुलिस की मनमानी कार्यवाही पर रोक लगाए सरकार: जमियत उलेमा-ए-हिंद

    *आख़िर किस कानून के अंतर्गत पुलिस प्रशासन बड़े जानवरों की क़ुर्बानी से रोक रही है-? जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष ने उठाया प्रश्न*।

    नई दिल्ली (28 जुलाई 2020)
    जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना क़ारी सैयद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने देश के विभिन्न भागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश में क़ुर्बानी को लेकर ज़िला पुलिस प्रशासन के माध्यम से तानाशाही और अत्याचार किए जाने पर रोष प्रकट किया है और कहा है कि क़ुर्बानी इस्लाम का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक धार्मिक कार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की रुकावट (बाधा) खड़ी न की जाए। उन्होंने बताया कि जमीयत को लिखित तौर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं कि पुलिस जानवरों को पकड़ कर ले जा रही है। और बहराइच, गाज़ीपुर, गाज़ियाबाद आदि में ज़िला प्रशासन ने बड़े जानवरों की क़ुर्बानी पर रोक लगा दी है। इसी तरह से देश के विभिन्न भागों से भी ऐसे ही क़ुरबानी में रुकावटों वाले समाचार प्राप्त हो रहे हैं. प्रश्न यह है कि आख़िर पुलिस ने किस क़ानून के तहत बड़े जानवरों पर प्रतिबंध लगाया है। और वह यह सब किसके इशारे पर कर रही है-? इस संबंध में पुलिस के माध्यम से अत्याचार, बर्बरता और तानाशाही तथा खुलेआम क़ानून का मज़ाक बनाए जाने से जनता में तीव्र असंतोष और रोष पाया जाता है। हम पुलिस के इस तरह के अत्याचारों की घोर निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि सरकारें इन सब पर तुरंत रोक लगाएं। और इस बात को सुनिश्चित बनाया जाए कि मुसलमान पूरी सरलता के साथ क़ुर्बानी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य को पूर्ण कर सकें।

    अध्यक्ष जमीअत उलमा ए हिंद ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और क़ुर्बानी से संबंधित सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है उस पर जनता चल रही है। मुस्लिम नेता तथा संस्थाएं इसके संबंध में लोगों को लगातार जागरुक कर रहे हैं। जहां तक गाइडलाइन की बात है तो इसमें कहीं भी बड़े जानवर की क़ुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं है। अगर पुलिस प्रशासन इससे बढ़कर किसी के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करती है और मनमर्ज़ी के आदेश – नियम थोपती है तो इसके परिणाम बहुत ख़राब और नकारात्मक होंगे।

    अध्यक्ष जमीयत उलमा ए हिंद ने यह चेताया है कि अगर सरकार ने समय रहते क़दम नहीं उठाया तो देश में अशांति और दंगों की परिस्थितियां पैदा हो जाएंगी। और उसकी ज़िम्मेदार सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकार होगी। उन्होंने जमीअत उलमा ए हिंद के कार्यकर्ताओं और ज़िम्मेदारों को भी अवगत कराते हुए निर्देश दिए हैं कि अगर उनके क्षेत्र में क़ुर्बानी को लेकर कोई परेशानी होती है या पुलिस अत्याचार करती है तो आप लिखित रूप में इसकी सूचना जमीयत उलमा ए हिंद के कार्यालय को दें। ताकि जमीयत उलमा ए हिंद के द्वारा सरकार और संबंधित अधिकारियों से मिलकर उस समस्या को हल कराने (समाधान) का पूरा पूरा प्रयत्न किया जाए।

  • शरजील इमाम और अखिल गोगोई की रिहाई के लिए एस.डी.पी.आई बिहार का 400 से अधिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन

    प्रेस विज्ञप्ति 24 जुलाई, 2020:भारत में कोरोना को रोकने के नाम पर लॉकडाउन तैयारी की कमी के कारण पूरी तरह से विफल रही है , साथ ही सरकार द्वारा इस बीच की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि यहां लॉकडाउन कोरोना को रोकने के उद्देश्य से नहीं बल्कि उसके आड़ में सांप्रदायिक फासीवाद ताकतों को बढ़ावा देने के लिए है यह बातें *सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया*, बिहार के राज्य अध्यक्ष *नसीम अख्तर* ने कहा, एसडीपीआई ने 24 जुलाई को बिहार के सभी जिलों में सैकड़ों स्थानों पर शरजील इमाम और अखिल गोगोई को रिहा करने की मांग करने वाले तख्तियों के साथ धरना प्रदर्शन किया है। पार्टी ने सवाल किया कि जब कोरोना गुवाहाटी जेल में तेजी से फैल रही थी तब शरजील और गोगोई और अन्य कैदियों की जान क्यों नहीं बचाई गई ? क्या कोरोना के नाम पर शरजील और गोगोई की हत्या की साजिश तो नहीं है? इसलिए पार्टी ने शरजील इमाम, अखिल गोगोई की तुरंत रिहाई और उनके लिए बेहतर इलाज की मांग की, साथ ही राजनीतिक शत्रुता के तहत गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

    अपने बयान में, पार्टी के राज्य सचिव मंजर आलम और राज्य के उपाध्यक्ष नूरुद्दीन ज़ंगी ने धर्मनिरपेक्ष दलों की आलोचना करते हुए कहा कि जब सी.ऐ.ऐ विरोधी आंदोलन चल रहा था, तो हर कोई मंच पर आने और नेता बनने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जब आंदोलन का हिस्सा रहे कार्यकर्ताओं व छात्रों को गिरफ्तार करने और प्रताड़ित करने का काम जारी है, तो सब चुप है, यहां तक ​​कि राजद नेता जामिया विद्वान मीरान हैदर की गिरफ्तारी पर उनकी अपनी पार्टी को भी सांप सूंघ गया है। बिहार के लाल शरजील इमाम का जीवन खतरे में है लेकिन बिहार का कोई भी नेता या कोई भी दल अपने राज्य के बेटे के लिए मुंह खोलने को तैयार नहीं है

    बिहार शरीफ प्रदर्शन में बोलते हुए, पापुलर फ्रंट बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम अख्तर और मुजफ्फरपुर के औराई में बोलते हूवे कैंपस फ्रंट के नेता सैफुर रहमान ने सभी धर्मनिरपेक्ष व्यक्तियों और धर्मनिरपेक्ष संगठनों से अपील की कि वे यूपी और दिल्ली को एक व्यावहारिक तौर पर पुलिस राज्य बनाकर व तलबा और ऐकटिविसटों को प्रताड़ित कर हिंदू राष्ट्र के किऐ जा रहे टेस्ट के खिलाफ एकजुट हो कर हिंदू राष्ट्र के चल रहे परीक्षण को विफल कर देश को फासीवाद की खतरनाक मक़सद से बचा लें । उन्होंने एसडीपीआई को धन्यवाद दिया कि जब सभी ज़बान बंद होती दिख रही हैं, तब एसडीपीआई देश की रक्षा में सबसे आगे दिख रही है।

  • राजस्थान:सीबीआई को जांच के लिए अब राज्य सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी

    आदेश से पहले जांच एजेंसी की टीम गहलोत समर्थक विधायक के घर पहुंची थी

    सीबीआई जांच में राज्य सरकार की अनुमति जरूरी किए जाने के बाद पहले दी गईं कई अनुमतियां भी रद्द कर दी गई हैं।

    राज्य सरकार अनुमति नहीं देती है तो सीबीआई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है
    छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार और बंगाल में ममता सरकार पहले ऐसा ही आदेश जारी कर चुकी हैं

    राजस्थान के सियासी संग्राम के बीच अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी घमासान शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि सीबीआई को किसी जांच के लिए पहले उसकी इजाजत लेनी होगी। उसके बाद ही सीबीआई कोई एक्शन ले पाएगी। राज्य सरकार की सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी रवि शर्मा ने यह आदेश जारी किया है। इससे ठीक पहले सीबीआई की टीम गहलोत समर्थक कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के जयपुर स्थित घर पहुंची थी।

    राज्य सरकार के इस आदेश के बाद अब सीबीआई किसी केस में सीधे जांच नहीं कर पाएगी। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने यह आदेश जारी किया है। जानकारी अनुसार, परिस्थिति के आधार पर ही सरकार किसी केस में जांच की इजाजत देगी। इसके साथ राज्य सरकार की ओर से पहले दी गई जांच की कई मंजूरियां भी रद्द कर दी गई हैं।

    केंद्र और राज्य के बीच टकराव हो सकता है

    राज्य सरकार के इस फैसले को मौजूदा सियासी उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि गहलोत सरकार को इस तरह की आशंका है कि केंद्र की भाजपा सरकार कांग्रेस विधायकों पर दबाव बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी पिछले दिनों जयपुर में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद कहा था कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों को सक्रिय कर चुकी है।

    छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल भी लगा चुका हैं ऐसे प्रतिबंध

    सीबीआई को बिना अनुमति के आने से रोकने वाला राजस्थान कोई पहला राज्य नहीं है। इससे पहले छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार और पश्चिम बंगाल में ममता सरकार भी सीबीआई को आने से रोकने का आदेश जारी कर चुकी हैं।

    अब सीबीआई क्या करेगी?

    अब सीबीआई को जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी। अगर किसी मामले में सीबीआई जांच करना चाहती है, लेकिन राज्य सरकार अनुमति नहीं देती है तो ऐसी स्थिति में सीबीआई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

    विधायक कृष्णा पूनिया के घर पर पहुंची सीबीआई

    राजस्थान में सीबीआई के अाने पर रोक लगाने वाला आदेश सरकार की तरफ से जारी करने से पहले ही खबर आई थी कि सीबीआई कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के जयपुर में जालूपुरा स्थित घर पहुंची। पूनिया के फेयरमोंट होटल पर होने के कारण वे आवास पर नहीं मिलीं, जिसके कारण सीबीआई को खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि सीबीआई एएसओ विष्णु दत्त शर्मा सुसाइड केस में पूछताछ के लिए पूनिया के घर पहुंची थी।(इंपुट भास्कर)

  • भारत में 15 सितंबर तक चरम पर होगा संक्रमण,गांवों में इस बीमारी को फैलने से रोकना होगा

    नई दिल्ली; भारत में कोरोनावायरस 15 सितंबर के आसपास चरम पर हो सकता है। लोगों को कोरोनावायरस को काबू करने के लिए बहुत ही जिम्मेदार रवैया अपनाना होगा। सबसे बड़ा काम इसे गांवों तक पहुंचने से रोकना है, क्योंकि यहां देश की दो तिहाई आबादी रहती है। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्‌डी ने शनिवार को ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि यह वायरस नई ताकत से बढ़ रहा है।

    राज्यों में अलग-अलग समय पर चरम पर पहुंचेगा कोरोना
    प्रोफेसर रेड्‌डी ने कहा- अलग-अलग जगहों (राज्यों) में अलग-अलग समय में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर पहुंचेगा। डॉ. रेड्डी ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड भी रह चुके हैं। वे मौजूदा समय में हार्वर्ड में स्टडी के काम से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस समय हमारा मुख्य काम इस वायरस को छोटे शहरों और गांवों में पहुंचने से रोकना है। अगर हम इसे रोक लें तो अभी भी बड़ा नुकसान टाल सकते हैं।

    कई जगहों पर हुईं गलतियां

    प्रोफेसर रेड्डी ने कहा कि लॉकडाउन के दूसरे चरण तक कोरोना को फैलने से रोकने के लिए बहुत सख्ती से लॉकडाउन किया गया, लेकिन 3 मई के बाद लॉकडाउन में ढील मिली तो हमें जोरदार तरीके से घर-घर जाकर सर्वे, टेस्टिंग, आईसोलेशन करना चाहिए था, जो हमने नहीं किया।
    लॉकडाउन में ढील मिलते ही कोई एहतियात का पालन नहीं किया गया। ऐसा लगा जैसे सब आजाद हो गए हैं। जैसे- स्कूल में एग्जाम के बाद छात्र रिजल्ट आने से पहले ही खुशी मनाने लगे हों।

    हमने बहुत ज्यादा समय अस्पलात और बेड कैपेसिटी को लेकर बिताया। हालांकि, यह भी जरूरी था, लेकिन ट्रेसिंग का पूरा जिम्मा केवल पुलिस को सौंप दिया गया। जबकि, इसे पब्लिक हेल्थ फंक्शन के रूप में देखना चाहिए था।(इनपुट भास्कर)

  • कोयला निजीकरण: मोदी सरकार बनाम हेमंत सरकार

    अफ्फान नोमानी

    देश की सर्वोच्च सरकारी कंपनी और धरोहर का निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार के निशाने पर है मध्य भारत में स्थित कोयला खदान. मोदी सरकार ने कोयला खदान की निजी कंपनी के हाथों नीलामी के लिए सूची भी तैयार कर दिया है. इस सुची में मध्य भारत ( ओड़ीशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व झारखंड ) और पश्चिम बंगाल के कुछ छेत्रों के कोयला खदान है.

    कोयला निजीकरण को लेकर मध्य भारत में मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का स्वर तेज हो गया है. पश्चिम बंगाल में कोयला खदान के मजदूर लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल कर रहे है. झारखंड में कुल 22 कोयला खदानें है जो 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदान के मजदुर यूनियन कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध जुलुस निकाल रहे है. झारखंड में कोयला निजीकरण मामले पर सीएम हेमंत सोरेन से लेकर सभी झामुमो, कांग्रेस व राजद के विधायक व नेता सहित अन्य पार्टी के नेता भी कोयला निजीकरण का विरोध कर रहे है.

    झारखंड कोयला खदान में एक ललमटिया भी है जो महागामा विधानसभा छेत्र में आता है. महागामा विधानसभा छेत्र के विधायक कांग्रेस के दीपिका पांडेय सिंह है जो कोयला निजीकरण मामला उठने के बाद शुरू से ही मोदी सरकार के निजीकरण नीति के खिलाफ सक्रीय दिख रही है. दुर्भाग्य से राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में नहीं है लेकिन स्थानीय मीडिया ( इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और वेब ) में प्रतिदिन कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में है. विधायक दीपिका पांडेय सिंह अपने कार्यकर्ता के साथ मजदुर यूनियन को लेकर कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध कर रही है.

    झारखंड में कोयला निजीकरण पर सियासत गरम है.इसी को लेकर निजीकरण विरोधी की प्रमुख चेहरा विधायक दीपिका पांडेय सिंह से वार्तालाप किया. बातचीत के दौरान दीपिका पांडेय सिंह ने कहा की ” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना लोगों की कीमत पर कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोयला क्षेत्र का निजीकरण करने की है. भाजपा सरकार ने कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इसके निजीकरण की योजना बनायी है. हम जनता के हित में निजीकरण के खिलाफ लड़ते रहेंगे. अगर कोयला निजीकरण हुआ तो सबसे पहले हमारे लाश से गुजरना होगा. क्योकि जल,जंगल, जमींन और झारखंड की सभी संपदा बचाना हम झारखंडवासी का मौलिक अधिकार है. और इसको बचाने के लिए हेमंत सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है. झारखंड की हेमंत सरकार मोदी सरकार से क़ानूनी लड़ाई लड़ रही है. अभी तो सिर्फ 22 कोयला खदान छेत्रों में आंदोलन शुरू हुआ है, जरुरत पड़ी तो पुरे राज्य में जन आंदोलन होगा. लेकिन हम झारखंडवासी किसी निजी कंपनी को किसी भी कोयला खदान में घुसने नहीं देंगे. झारखंड की संपदा से झारखंडवासी का आर्थिक रूप से जुड़ाव है. जो कमाने खाने का एक मात्र जरिया है. अगर निजीकरण होता है तो उद्योगपति अपनी मर्जी चलाएगा जिससे बहुत संख्या में स्थानीय लोग बेरोजगार हो जायेगे. और हम ऐसा मजदूर वर्ग के हित में नहीं होने देंगे “.

    सवाल है मोदी सरकार के निशाने पर सबसे ज्यादा झारखंड के कोयला खदान ही क्यों है? वजह साफ़ है झारखंड की सभी 22 कोयला खदानें कुल मिलाकर 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदानों में लगभग 386 करोड़ टन कोयले का भंडार है। इसलिए 22 कोयला खदानों से झारखंड के खजाने में आने वाली कुल राशि 90 हजार करोड़ के पार होगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून को कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन मोदी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सरकार की दखल के बाद कोयला खदानों की नीलामी में पेच आ गया है. देश में कोयला क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ लाखों कोयला मजदूर हड़ताल पर हैं। इसमें वामपंथी संगठनों के अलावा आरएसएस से जुड़ी बीएमएस तक को भारी दबाब में शामिल होना पड़ा है. इस मामले के विभिन्न जानकर भी निजीकरण के खिलाफ है. माइंस मिनरल एंड पीपल के अध्यक्ष श्रीधर रामामूर्ति का कहना है की ” अगर कोयला का निजीकरण होता है तो निजी कंपनिया अंधाधुंध खनन करेंगी और कोल इंडिया जैसे सार्वजनिक छेत्र के उपक्रम को हाशिए पर पहुँचा देंगी “.
    मई के शुरूआत में जब कोयला निजीकरण विरोध हुआ तो 18 मई 2020 को बीसीसीएल ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रल्हाद जोशी का बयान जारी किया. मंत्री ने कहा है कि कोल इंडिया का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त कोयला भंडार है, जो देश में 100 वर्षों से अधिक तक बिजली बनाने के लिए पर्याप्त है। सरकार को कोल इंडिया पर गर्व है और आने वाले समय में इसे और मजबूत किया जाएगा।

    लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया की खबर से 18 जून के बाद कोयला निजीकरण पर सियासत गर्म है. झारखण्ड, पश्चिम बंगाल,ओड़िसा और छत्तीसगढ़ में विरोध जारी है.

    सवाल है की क्या विदेशी कम्पनियों से खनन करा कर भारतीय जरूरतों की पूर्ति हो सकेगी? जब सरकारी कंपनी खनन करने में सक्षम है तो निजी कंपनी की जरुरत क्या है? गौरतलब हो कि 1973 में कोयला खनन के राष्ट्रीयकरण के बाद निजी कंपनियों के खनन की इजाजत नहीं थी। कोयला खनन की सरकारी कंपनियों की क्षमता पर्याप्त है और उनमें जरूरत के मुताबिक इजाफा की भी गुंजाइश है लेकिन सरकार का असली मकसद कोयला क्षेत्र में कॉरपोरेट्स के लिए लूट व अकूत मुनाफाखोरी के लिए बाजार तैयार करना है। भारत में महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन में कोयला का भंडार होना भारतीयों के लिए एक बड़ा वरदान है. और इसे बचाना राष्ट्र हित में है.

    अब देखना यह है राष्ट्र हित में इसे बचाने में कितना कामयाब हो पायेगी हेमंत सरकार.

    लेखक अफ्फान नोमानी रिसर्च स्कॉलर, लेक्चरर व स्तंभकार है

  • रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय से मुलाकात, पेश की अपनी किताब व विभिन्न मुद्दों पर हुई वार्तालाप

    रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय के बीच अहम मुलाकात हुई. लेखक नोमानी ने साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर लिखी किताब एमएलए को पेश किया. लेखक नोमानी ने राज्य कि शिक्षा पॉलिसी व युवाओं के रोजगार, कोयला निजीकरण व मदरसा शिक्षक के रूके वेतन व खासकर साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर आधारित रोड मेप पर चर्चा किया. जिसपर एमएलए दीपिका पांडेय ने सहमति जताते हुवे कहा कि शिक्षा व युवाओं के रोजगार पर हम काफी सीरियस है. अपने छेत्र में साइंस, लॉ,एग्रीकल्चर व मेडिकल इंस्टीटूशन कायम करना हमारा अहम विज़न है. होनहार व शिक्षित युवाओं का होना मेरे लिए गर्व की बात है. रही बात मदरसा शिक्षकों के रूके वेतन का तो माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मदरसों के शिक्षक के अनुदान भुगतान का प्रस्ताव कैबिनेट में रखने की स्वीकृति दे दी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के मदरसा के करीब 700 शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों को अनुदान का भुगतान हो सकेगा। और कोयला निजीकरण मामले को लेकर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुके है.

    हम क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे है और जरूरत पड़ी तो जन आंदोलन भी होगा.

  • मुख्यमंत्री मनोहर लाल व केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी को आफताब अहमद ने लिखा पत्र

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी आफताब अहमद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी को पत्र लिखकर गुड़गांव अलवर राष्ट्रीय राजमार्ग के काम को पूरा करने की मांग की है।

    नूह विधायक आफताब अहमद ने कहा कि फरवरी 2014 को यू पी ए सरकार में इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कराया था। गुड़गांव से नूह तक कांग्रेस की हुड्डा सरकार में फोर लेन का काम पूरा करा दिया था, केंद्र व प्रदेश में बीजेपी सरकार आने के बाद काम पूरी तरह से बंद हो गया।

    चौधरी आफताब अहमद, सीएलपी उप नेता ने कहा कि सरकारें आती जाती हैं, लेकिन अगर कोई सरकार किसी पिछली सरकार के किसी जन हितेषी कार्य या परियोजना को रोकती हैं तो ये गलत व तानाशाही रवैया है।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी को विशेष रूप से पत्र लिखकर काम दोबारा शुरू करने की मांग की है, पत्र की एक प्रति मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी दी गई है। काम अगर शुरू नहीं किया तो आंदोलन करके सरकार को जगाने का काम किया जाएगा।
    ये दुर्भाग्य है कि बीजेपी सरकार ने 248 ए राष्ट्रीय राजमार्ग के काम को गुड़गांव मुंबई एक्सप्रेस वे की आड में रोक दिया जबकि दोनों अलग अलग रोड हैं और गुड़गांव अलवर के फोर लेन होने से मुंबई गुड़गांव एक्सप्रेस वे पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंंकि कट व आउटलेट थोड़े हैं और बहुत दूर है।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने कहा कि नूह से अलवर रोड पर आए दिन दुर्घटना होती है, हजारों लोग जान गवां चुके हैं, ये महज मौते नहीं बल्कि बीजेपी सरकार की गलत मंशा से हुई मौत हैं, सरकार के हाथ खून से सने हुए हैं।

    आफताब अहमद ने कहा कि बार बार इस मांग को अलग अलग जगह वो उठा रहे हैं चाहे विधानसभा हो, या विधान सभा की कमेटी हो।