Category: देश

  • SC का देशभर में मुहर्रम की इजाज़त देने से इंकार, कहा – कोरोना फैलाने के लिए विशेष समुदाय को बनाया जाएगा

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मुहर्रम के मौके पर जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. गुरुवार को इस संबंध में याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर मुहर्रम के मौके पर ताजिया का जुलूस निकालने की अनुमति दी गई तो इसके बाद कोरोना फैलाने के लिए *एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया जाएगा.*

    प्रमुख न्यायाधीश एसए बोबडे की बेंच ने कहा, ‘अगर हम देश में जुलुसू निकालने की अनुमति दे देते हैं तो अराजकता फैल जाएगी ओर एक समुदाय विशेष पर कोविड-19 महामारी फैलाने के आरोप लगने लगेंगे.’ बता दें कि उत्तर प्रदेश के *याचिकाकर्ता सैयद कल्बे जवाद* ने सुप्रीम कोर्ट में देशभर में मुहर्रम के जुलूस को अनुमति देने की मांग के साथ याचिका दाखिल की थी. इसमें पुरी में *जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा* के मामले का हवाला दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी.

    याचिका पर CJI ने कहा, ‘आप (याचिकाकर्ता) पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा की बात कर रहे हैं, वो *एक जगह और एक निश्चित रूट* की बात थी. उस मामले में हम यह तय कर सकते थे कि जोखिम कितना है, जिस हिसाब से हमने आदेश दिया था.’

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने *लखनऊ में ताजिया के जुलूस की अनुमति मांगी* क्योंकि वहां शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. इसपर कोर्ट ने कहा कि वो अपनी याचिका *इलाहाबाद हाईकोर्ट* लेकर जाएं.

  • कौन हैं ज़फ़र इस्लाम जो बनेगें बीजेपी के सातवें मुस्लिम सांसद,जानिए बीजेपी से और कौन रह चुके मुस्लिम सांसद।

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    नई दिल्ली: अमर सिंह के निधन के बाद खाली हुई उत्तर पदेश से राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद ज़फ़र इस्लाम को उम्मीदवार बनाया है। जफर इस्लाम मीडिया के लिए जाना पहचाना चेहरा हैं. टीवी चैनलों पर डिबेट में वह हर रोज बीजेपी का बचाव करते हैं. राजनीति में आने से पहले जफर इस्लाम एक विदेशी बैंक के लिए काम करते थे। अगर ज़फ़र इस्लाम चुने गए तो वो बीजेपी के इतिहास में वह सातवें मुस्लिम सांसद होंगे।

    माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जफर इस्लाम के अच्छे ताल्लुकात हैं. शायद यही वजह है कि मृदुभाषी और बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी जफर इस्लाम को बीजेपी हाईकमान ने मध्य प्रदेश में ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने की जिम्मेदारी दी थी। मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने में इस्लाम की प्रमुख भूमिका थी. सिंधिया को बीजेपी तक लाने और फिर गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने वाले जफर इस्लाम हैं।

    ज़फ़र इस्लाम से पहले बीजेपी के इतिहास में छह ही मुस्लिम सांसद हुए हैं- मुख्तार अब्बास नक़वी, शहनवाज़ हुसैन, सिकंदर बख्त (राज्यसभा) और आरिफ बेग, एमजे अकबर और नज़मा हेपतुल्ला. सैय्यद ज़फ़र इस्लाम सातवें मुस्लिम सांसद होंगे। मौजूदा हालात में मुख्तार अब्बास नक़वी के बाद बीजेपी के दूसरे मुस्लिम सांसद होंगे सैयद ज़फ़र इस्लाम. बीजेपी के टिकट पर तीन ही मुस्लिम सांसद लोकसभा चुनाव जीते हैं- मुख्तार अब्बास नकवी, शहनवाज़ हुसैन और आरिफ़ बेग।

    डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम झारखंड के रहने वाले हैं और मुंबई में सक्रिय रहे हैं. वो बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. वो बीजेपी के मुखर, उदारवादी और कॉर्पोरेट घरानों से रिश्ता रखने वाला मुस्लिम चेहरा हैं। पार्टी संगठन में पिछले 7 साल से काम कर रहे हैं. उससे पहले वे 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी की रणनीतिक टीम में थे। वैसे ज़फ़र इस्लाम प्रोफेशनल इंवेस्टमेंट बैंकर रहे हैं. उनकी आर्थिक मामलों पर पकड़ मानी जाती है, राजनीति में आने से पहले वे डॉइच बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. फिलहाल वो एयर इंडिया के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक भी हैं।

  • कोरोना मामले में जमातियों को बदनाम किया गया;सरकार, पुलिस और एजेंसियां करें पश्चाताप:बॉम्बे हाईकोर्ट

    बांबे हाईकोर्ट और मरकज में भाग लेने वाले जमात के लोग।
    तबलीगी जमात वाले आपको याद हैं? आपको याद नहीं हैं तो हम बताते हैं कि इन्हीं पर यानी तबलीगी जमात की वजह से भारत के समस्त मुसलमानों पर कोरोना फैलाने का आरोप प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने लगाया था। बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी को रहस्यमय मौत बनाने वाले मीडिया की बहस से ठीक पहले टीवी डिबेट का हिस्सा कोरोाना फैलाने वाला तबलीगी जमात ही हुआ करती थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार 21 अगस्त को एक ऐतिहासिक आदेश अपनी सख्त टिप्पणियों के साथ जारी किया।

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कोरोना मामले में तबलीगी जमात में विदेश से आये जमातियों को बलि का बकरा बनाया गया। और मीडिया ने सोची समझी साज़िश के तहत तबलीगी जमात वालों को बदनाम किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज सारे एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। बता दें कि दिल्ली में तबलीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज में कुछ विदेशी मुस्लिम आये थे। कोविड-19 फैलाने का आरोप इन्हीं पर लगा और धीरे-धीरे पूरे देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का यह हथियार बन गया था।
    हाईकोर्ट का यह फैसला शुक्रवार को आया था बावजूद इसके कथित मुख्यधारा के मीडिया में इस खबर को दबा दिया गया। किसी टीवी बहस में ज़िक्र तक नहीं हुआ। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मोदी भक्त के तौर पर जाने जाने वाले अर्णब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप, रोहित सरदाना जैसे पत्रकारों ने इस बड़ी खबर पर चुप्पी साध ली।
    हाई कोर्ट के जस्टिस टीवी नलवडे और जस्टिस एमजी सेवलीकर की बेंच ने कहा – भारत में इस संक्रमित बीमारी के जो ताजा आंकड़े और हालात हैं वे बता रहे हैं कि याचिकाकर्ताओं (विदेश से आए तबलीगी जमात) पर जो कार्रवाई की गई, वह नहीं ली जानी चाहिए थी। अभी भी समय है संबंधित लोग (सरकार, पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां) अपनी इस गलती पर पश्चाताप करें और इस संबंध में कुछ पॉजिटिव कदम उठाकर उस नुकसान की भरपाई करें।

    इस बात को गौर से पढ़िए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि वीजा नियमों में यह कहीं नहीं लिखा है कि विदेश से आने वाला किसी धार्मिक स्थल पर नहीं जा सकता और न ही ऐसी किसी सामान्य धार्मिक गतिविधि में भाग ले सकता है। विदेश से आये जमाती जिन जिन शहरों में गये, उन्होंने अपनी आमद की जानकारी उस शहर की पुलिस को दी। उन्होंने कुछ भी छिपाने की कोशिश नहीं की। इस बात के तथ्य और सबूत मौजूद हैं कि हर शहर की पुलिस को पूरी जानकारी और सूचना थी कि विदेश से जमाती किस लिए आये हैं। उन्हें यह भी सूचना और जानकारी है कि इस मरकज में क्या होता है। वहां सब कुछ सार्वजनिक होता है और कोई भी जाकर वहां देख सकता है।

    कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के मरकज में आये जमातियों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (यानी अखबार और टीवी न्यूज चैनल) ने बहुत बड़ा प्रचार अभियान चलाया। इससे यह संदेश गया कि भारत में कोविड19 फैलाने में विदेश से आये जमातियों का हाथ है।

    पाठकों को याद होगा कि जब नफरत फैलाने वाले टीवी चैनलों के दफ्तर में कई पत्रकार और वहां के कुछ कर्मचारी कोरोना की चपेट में आये, उसके बावजूद आज तक, जी न्यूज, रिपब्लिक, टाइम्स नाऊ, इंडिया टुडे जैसे चैनलों ने माफी नहीं मांगी। हालांकि उन्हें उस वक्त तक यह अच्छी तरह मालूम हो चुका था कि कम से कम जमाती उनके चैनलों में कोरोना फैलाने नहीं आये। खुद को देश का अग्रणी अखबार बताने वालों के संपादकों ने नफरत की इस आंधी को बढ़ावा दिया। दूर दराज के कस्बों से जमातियों की गिरफ्तारी बड़ी खबर बनाकर लगाई गई। कई अखबारों के दफ्तर भी कोरोना की चपेट में आये लेकिन किसी संपादक ने अभी तक जमातियों और मुसलमानों से नफरत की इन झूठी खबरों के लिए माफी नहीं मांगी।(इनपुट जनचौक)

  • आज मुहर्रम का चांद नजर आया: शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना 20 अगस्त (मेराज़ आलम) आज यहां लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में रुअते हिलाल (चांद देखने वाली) कमेटी पंजाब की मीटिंग शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की अध्यक्षता में हुई। जिसमे देश भर से विभिन्न रूअते हिलाल कमेटियों की ओर से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार मुहर्रम उल हराम का चांद नजर आने की तसदीक की गई । शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने इस्लामी नववर्ष की बधाई देते हुए ऐलान किया कि 21 अगस्त को इस्लामी नववर्ष की एक तारीख है,और दस मुहर्रम उल हराम यौमे आशूरा का दिन 30 अगस्त दिन रविवार को होगा।

  • एसडीपीआई छपरा सारण टीम के द्वारा बाढ़ पीड़ितों के बीच बांटा गया राहत सहायता सामग्री

    एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच सूखे खाने-पीने की सामग्री का किया वितरण जैसा कि आप सबको पता है ज़िला में कई क्षेत्र इन दिनों बाढ़ की परेशानियों से दो चार हैं इसी बीच एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने मढौड़ा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंच कर खाने पीने के सूखे सामग्रियों का वितरण किया एसडीपीआई की टीम हमेशा लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहती है चाहे बाढ़ हो भूकंप हो आग लगी हो या करोना से मृत्यु हुई हो इस दुख की घड़ी में एसडीपीआई की टीम लोगों की सहायता के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी रहती है ठीक इसी प्रकार बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उन्हें सुखा राशन वितरण किया और उनके हालचाल को जाना इस अवसर पर एसडीपीआई छपरा सारण के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नौशाद अहमद ने कहा कि हम लोग आगे भी इस तरह के सहायता को लगातार जारी रखेंगे इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डाॅक्टर नौशाद अहमद के साथ जिला महासचिव कामरान अंसारी, जिला सचिव एहसान अहमद,
    जिला सचिव सह प्रवक्ता इशतेयाक अहमद,रेयाजुददीन अहमद, मोहम्मद रहमतुल्लाह, दिलशाद आलम, आजाद ख़ान,
    मोहम्मद फजलुर्रहमान इत्यादि उपस्थित थे!

  • मुख्यमंत्री गहलोत व सचिन पायलट के मध्य छिड़े विवाद की जड़ राजद्रोह की धारा 124-A लगाना बताया जा रहा है!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार मे कमोबेश सबकुछ ठीक ठाक चलते रहने के बावजूद जुलाई माह के मध्य मे राजस्थान की आला मुकाम रखने वाली इनवेस्टीगेशन ऐजेंसी SOG व ACB मे दो अलग अलग रिपोर्ट कांग्रेस नेताओं सहित अन्य नेताओं व कुछ अन्य लोगो के खिलाफ दर्ज होती है या मानो कि करवाई जाती है। जिन रिपोर्ट मे से जो SOG मे रिपोर्ट दर्ज हुई उसमे अन्य धाराओ के साथ राजद्रोह की धारा 124-A भी लगाई गई थी। जिसके धारा के भय के कारण सचिन पायलट व कुछ नेताओं को राजस्थान से करीब एक माह बाहर रहकर एक तरह से अण्डरग्राउण्ड होना पड़ा था। यहां तक कि एसओजी की टीम आवाज का नमूना लेने व जांच करने के नाम पर आरोपियों के छिपने के सम्भावित ठिकाने हरियाणा के मानेसर तक जाकर हरियाणा पुलिस तक एक तरह से भीड़ गई थी। उसके बाद न्यायालय मे मामला जाने पर राजद्रोह की धारा 124-A हटानी ही नही पड़ी बल्कि एसओजी ने तो उस रिपोर्ट पर एफआर भी लगा दी है।

    हालांकि एसओजी ने कांग्रेस मेन महेश जोशी की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करके अपने स्तर पर जांच करके पाया होगा कि जो रिपोर्ट उनके यहां लिखवाई गई थी या दर्ज की गई वो पुरी तरह सत्य से परे पाई गई होगी। तभी एसओजी ने उस रपट पर एफआर लगा कर भेजा है। लेकिन उक्त प्रकरण को लेकर जिस तरह से प्रदेश मे राजनीतिक अस्थिरता का माहोल बनाया गया व एसओजी की टीम का मानेसर सहित अन्य जगह जांच करने को लेकर जाकर आने मे सरकारी धन का खर्चा भी आया होगा। अब इसमे देखने वाली बात है कि उक्त रिपोर्ट एसओजी मे दर्ज क्यो ओर किसके इशारे पर हुई ओर जांच के नाम पर सरकारी धन का कितना खर्च आया होगा। फिर उस रिपोर्ट का परिणाम भी शुन्य आकर एफआर लगना। यह सबकुछ काफी सोचने पर मजबूर करता है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत SOG व ACB मे दर्ज रिपोर्ट के पक्ष मे अनेक तरह के दावे लगातार करते रहै है। अगर रिपोर्ट मे आरोपियों पर लगाये गये आरोप सही थे ओर उन पर 124-A का मामला बनता था तो उन पर मामला बनाया जाना चाहिए था। अगर इसमे वो दोषी थे तो उन्हें सजा तक पहुंचाने तक लेकर जाना चाहिए था। अन्यथा जनता मे संदेश जायेगा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी के अंदर मोजूद विपरीत विचार रखने वालो को दवाब मे लाने के लिये उक्त तरह से पावर व सत्ता का गलत रुप मे उपयोग किया होगा। मुख्यमंत्री को इस मामले मे जनता के सामने पूरी तरह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर यह है कि हमारी जांच ऐजेंसियों की बन चुकी उजली छवि व उनके अधिकारियों का वकार हर परिस्थितियों मे कायम रखने के लिये हर राजस्थानी का कर्तव्य बनता है। अगर कोई राजनेता व व्यक्ति अपने सत्ता के पावर के सहारे ऐजेंसियों की इंसाफाना छवि पर चोट करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ हर इंसाफ पसंद को संवेधानिक दायरे मे रहकर विरोध मे आगे आना चाहिए। पिछले एक महिने मे राजस्थान मे घटे राजनीतिक घटनाटक्रम के हर जिम्मेदार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ताकि आगे उक्त तरह की पुनरावृत्ति ना हो पाये। उक्त प्रकरण मे हुये खर्च की भरपाई निरर्थक शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति महेश जोशी की निजी आय से भरपाई होकर कड़ा संदेश जाना चाहिए।

  • बिहार में ओवेसी और मांझी के गठबंधन ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की चिन्ता

    मोहम्मद फारूक सुलेमानी,
    दलित और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को बेबाकी से रखने वाले और सविधान की दुहाई देने वाले एम आई एम के बड़े नेता असदुद्दीन ओवैसी का सियासी बवंडर उस समय और उबाल में आ गया जब दलित नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ओवैसी की एम आई एम से गठबंधन लगभग तय हो गया है ।

    गत विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता की ओर अग्रसर हो रही थी उस समय मोहन भागवत के आरक्षण हटाने के बयान को लालू ने खूब भुनाया था जिसका नतीजा यह हुआ कि राजद सत्ता पर काबिज हो गई।
    अब यहां दलित और मुस्लिम गठबंधन से आने वाली बिहार विधानसभा चुनाव में ओवेसी की एंट्री भी धमाकेदार होने वाली है । जितना राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा(हम) बिहार की 50 से अधिक सीटों पर सीधा प्रभाव है । जबकि एक दर्जन सीटों पर काबिज होना लगभग तय माना जा रहा है इधर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बिहार के पूर्वांचल में एक दर्जन सीटों पर आसानी से जीत दर्ज होने का दावा कर रही है ।

    अगर यहां के राजनीतिक समीकरण फिट बैठे तो कई राजनीतिक दलों की नींद उड़ा सकते हैं । ऐसे असदुद्दीन ओवैसी बिहार में फिलहाल वो दलित मुस्लिम और पिछड़ों पर उनकी गहरी नजर हैं , भाई अकबरुद्दीन ओवैसी को बिहार के विधानसभा चुनाव के प्रसार में अलग रखा जा सकता है क्योंकि अक्सर उनके भाई के बयान असदुद्दीन के लिए सिर दर्द भी बने हुए है। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में जितेंद्र राम और असदुद्दीन की एक मंच पर संबोधित करना दलित मुस्लिम की नई राजनीतिक समीकरण को जन्म दे सकता है । राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता ऐसी में ओवेसी की पार्टी से कई राजनीतिक पार्टियां भी गठबंधन का ऐलान कर सकती है , इसलिए लालू के बेटे तेजस्वी अपने बयानों को फूंक फूंक कर दे रहे हैं । उनका एक बयान राजद के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में ओवैसी के लिए फायदेमंद हो सकता है । इसी ओवेसी के लिए बिहार में खोने के लिए कुछ भी नहीं है इसीलिए वह खुलकर बिहार में नीतीश कुमार को जमकर कोस रहे हैं । इधर बिहार के कई सामाजिक कार्यकर्ता वकील दलित नेता मुस्लिम धार्मिक गुरु खुलकर एम आई एम का दामन थाम रहे हैं । अगर ओवैसी की पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में रही तो कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और वर्तमान में एम आई एम के बिहार में सबसे बड़े नेता अख्तरुल इमान पर दांव खेला जा सकता है । हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि दलित नेता जितेंद्र मांझी को गठबंधन का मुख्यमंत्री का उम्मीदवार का ऐलान कर सकती है । ऐसे में अन्य राजनीतिक दलों का अल्पसंख्यक और दलित वोट बैंक मैे सैध लगना तय मानी जा रही है , ऐसे में इन राजनीतिक पार्टियों के लिए ओवैसी की एंट्री चिन्ता का बढा रही है । यह तो वक्त ही बताएगा कि बिहार में किसकी बहार होगी लेकिन यह तो तय माना जा रहा है कि औवेसी की एन्ट्री फ्रन्टफुट पर ही रहेगी।
    मोहम्मद फारुक सुलेमानी
    (युवा लेखक )

  • बाड़मेर में मुस्लिम परिवारों का कोई धर्म परिवर्तन नहीं हुआ:सुलेमानी

    बाडमेर:सिणधरी उपखंड के मोतीसरा राजस्व ग्राम में 50 मुस्लिम परिवारों के 250 लोगों द्वारा मुस्लिम धर्म से हिंदू धर्म बदलने की घटना को स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया( एमएसओ) ने सिरे से नकार दिया है । यह सभी परिवार पहले से ही हिंदू हैं और कंचन समाज से ताल्लुक रखते हैं । धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने खुद दावा किया है कि वह शुरु से ही हिंदू धर्म की रीति रिवाज और त्यौहारो को मनाते हैं।

    ऐसे में सवाल उठता है आखिर मुसलमान कैसे हुए?
    वही धर्म परिवर्तन करने वाली ढाडी समाज के जिला अध्यक्ष सुखदेव मालिया ने अपनी समाज में इस तरह की घटना को सिरे से नकार दिया है । मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के मोहम्मद फारूक सुलेमानी ने बताया कि इन परिवारों का आसपास कहीं भी मुस्लिम समाज से कोई ताल्लुक नहीं रहा है । धर्म परिवर्तन करने वालों के नाम हरजी राम , शुभम राम , मेघराज और जगन हैं ।
    . ऐसे में यह किसी भी मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू धर्म की परिवर्तन की खबर झूठी है , सिर्फ संप्रदाय की बात फैलाने के मकसद से माहौल खराब किया जाए है। एक हिंदू समाज का हिंदू में ही धर्म परिवर्तन सवालों के घेरे में है । मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश सचिव सुलेमानी ने यह भी आरोप लगाया अमन चैन शांति वाले प्रदेश में तथाकथित संगठन सांप्रदायिकता की फसल बोना चाहता है जिसको किसी भी हाल में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा

  • मानसून और बाढ़ कि स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने छह मुख्यमंत्रियों से बात की बेहतर तालमेल पर दिया जोर

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ की स्थितियों से निबटने के लिए राज्य सरकार की तैयारियों की समीक्षा की. इस बैठक में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए. पीएम मोदी ने 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा के दौरान राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। पीएम ने बाढ़ की अग्रिम चेतावनी के लिए एक स्थायी सिस्टम और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात कही। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन, गृह राज्‍य नित्‍यानंद राय और जी किशन रेड्डी के अलावा वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • CAA & NRC पर इम्पार ने लोगों से मांगा सुझाव।

    सांसद रघु के राजू से मुलाक़ात कर के CAA & NRC की समस्याओं से उनको अवगत कराया और उसकी बारीकियां भी बताईं

    नयी दिल्ली: इम्पार ने NRC & CAA के बारे में मुस्लिम समुदाय की चिंताओं से अवगत कराने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विधायी नियमों पर संसदीय उपसमिति के अध्यक्ष और सांसद रघु के राजू से उनके आवास पर मुलाकात की। डॉ एमजे खान के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने सांसद महोदय को बताया कि किस तरह से आसाम में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि किस तरह से बड़े पैमाने पर सभी समुदायों के लोगों को परेशानियों के साथ-साथ टॉर्चर और करेक्शन से गुजरना पड़ता है, क्योंकि डॉक्यूमेंट जमा करना कोई आसान काम नहीं है। ऐसे समय में जबकि भारत जैसे लोकतांत्रिक और महान देश में बाढ़ की वजह से लाखों लोग हर साल पलायन करते हैं। उनके पास डॉक्यूमेंट कहां होंगे ? और वह कैसे डोकोमेंट ला सकते हैं ?

    प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को यह भी बताया कि 1.80 मिलियन लोग अपनी नागरिकता प्रमाणित करने में असमर्थ होंगे, जिसमें 1.20 मिलियन हिंदू समुदाय के लोग शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल ने मिस्टर राजू से अनुरोध किया कि वह प्रतिनिधिमंडल और इंपार द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं से गृह मंत्रालय को अवगत कराएं और अगर एनआरसी CAA लाना जरूरी ही हो तो ऐसे कानून बनाए जाएं जो आसान हों और जिसमें लोगों के साथ भेदभाव की संभावना 0% भी ना हो, ताकि लोगों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करने में किसी तरह की कोई दिक्कत या परेशानी ना आए।

    इम्पार के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मिस्टर राजू ने उनके द्वारा बताई गई समस्याओं को हमदर्दाना तरीके से न सिर्फ सुना बल्कि उन्होंने इस बात का आश्वासन भी दिया कि वह हर तरह से मदद करेंगे, जिससे लोगों को किसी तरह की कोई दिक्कत परेशानी ना आए। इम्पार ने यह भी कहा कि जल्द ही विस्तार से कम्युनिटी कंसर्न को लेकर के 1 नोट भी वह सांसद महोदय को सौंपेगा और उनसे अपेक्षा करेगा कि वह गृह मंत्रालय को इसे भेजें, ताकि गृह मंत्रालय इस पर संवेदनशील होकर के गौर करे।

    सांसद ने इम्पार के प्रतिनिधिमंडल को यह भी कहा कि वह विस्तार से एक प्रेजेंटेशन उन्हें दें, ताकि वह इसके बारे में आगे की कार्यवाही कर सकें। साथ ही उन्होंने इम्पार से कहा कि वह कमेटी के बाकी 15 मेंबरों से भी मुलाकात अलग-अलग करें और उन को कम्युनिटी की समस्याओं और चिंताओं से अवगत कराएं। साथ ही देशवासियों को जो परेशानियां आ सकती हैं या असम समेत देश के विभिन्न कोनों जैसे बाढ़ ग्रस्त इलाकों के जो अनुभव हैं, उससे कमेटी के बाकी 15 सदस्यों को अवगत कराएं। इंपार ने लोगों से अपील की है कि लोग बेहतर तरीके जो उनके मन और दिमाग में हैं उन को भेजें ताकि इंपार बाकी समिति के सदस्यों से मुलाकात करके उन्हें उनके बारे में अवगत कराए और बेहतरीन पेरजेंटेशन दे।