Category: देश

  • कंगना ने मुंबई पहुंचते ही कहा-आज मेरा घर टूटा है, कल उद्धव ठाकरे का घमंड टूटेगा

    कंगना रनौत मुंबई पहुंच चुकी हैं और मुंबई पहुंचते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘आज मेरा घर टूटा है कल तुम्हारा घमंड टूटेगा.’

    कंगना ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करके कहा है, ”उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है तूने फ़िल्म माफ़िया के साथ मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है. आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा. ये वक़्त का पहिया है याद रखना हमेशा एक जैसा नहीं रहता और मुझे लगता है तुमने मुझ पर बहुत बड़ा अहसान किया है, मुझे पता था कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी आज मैंने महसूस किया है. आज मैं इस देश को वचन देती हूं कि मैं अयोध्या पर ही नहीं कश्मीर पर भी एक फ़िल्म बनाऊंगी. और अपने देशवासियों के जगाऊंगी क्योंकि मुझे पता था कि ये हमारे साथ होगा तो लेकिन ये मेरे साथ हुआ है इसका कोई मतलब है, कोई मायने है. उद्धव ठाकरे अच्छा हुआ कि ये क्रूरता मेरे साथ हुई क्योंकि इसके कुछ मायने हैं…जय हिंद, जय महाराष्ट्र”

    कंगना गुरूवार को चंडीगढ़-मुंबई फ़्लाइट से मुंबई पहुंची हैं. जब वह एयरपोर्ट पर पहुंची तो बाहर करणी सेना कंगना के समर्थन में और शिवसेना विरोध में नारेबाज़ी कर रही थी.

    आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेती कंगना रनौत के दफ़्तर पर मुंबई महानगरपालिका की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने बीएमसी से कंगना की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए भी कहा है.

    इससे पहले मुंबई महानगरपालिका की एक टीम ने अभिनेत्री कंगना रनौत के बंगले के कुछ हिस्सों को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी थी जिन्हें वो अवैध तरीक़े से किया गया बदलाव बता रहे थे.

    कंगना के वकील रिज़वान सिद्दिक़ी ने कहा कि बीएमसी ने जो नोटिस दी थी उसका जवाब पहले ही दे दिया गया था.

    उन्होंने पत्रकारों से कहा,”बीएमसी ने जो ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस दिया था वो बे​बुनियाद है और अवैध है, स्टॉप वर्क उनको देना पड़ता है जिनके घर में काम चालू हो. वो अवैध तरीके से घर में घुसे, आस पड़ोस में सबको धमकी देकर घुस गए. नोटिस का जवाब मैंने कल ही दे दिया था.”

  • पानीपत:इखलाक सलमानी के साथ जुल्म की इंतिहा,हाथ काट मृत समझकर फेंका रेलवे ट्रैक पर

    मिल्लत टाइम्स, पानीपत:हरियाणामें जंगल राज की एक होर घटना सामने आई
    कस्बा ननौता जिला सहारनपुर के निवासी इखलाक सलमानी s/o फकीरा रोजगार की तलाश में पानीपत आया और पार्क में बैठा हुआ था पार्क में दो आदमी आए जिन्होंने नशा किया हुआ था और उससे मारपीट करने लगे और वहां से जाकर 6,7 तो लोगों को बुला कर लाए और उनमें एक औरत भी थी और इखलाक सलमानी को पकड़ कर एक घर डैयरी के अंदर ले गए जहां पर मौजूद कुछ औरतें और आदमियों ने उसके साथ बहुत ज्यादा मारपीट की और उसका एक हाथ काट दिया और मरा हुआ समझकर रेलवे लाइनों के पास फेंक दिया । इखलाक सलमानी को होश आया तो उसने किसी राहगीर से एक नंबर मिलाने के लिए कहा और उसने अपने फोन से उसके घरवालों को ननौता फोन किया और बता कि आपका लड़का यहां पर जख्मी हालत में पड़ा हुआ है और इस का एक हाथ भी कटा हुआ है । पीड़ित के भाई इकराम सलमानी s/o फकीरा ने अपने किसी परिचित को फोन कर के घायल अवस्था में पडे अपने भाई के पास भेजा और परिचित ने पुलिस की मदद से रोहतक हस्पताल पहुंचाया । उसके बाद इकराम सलमानी रोहतक अस्पताल पहुंचा और अपने भाई को देखा और उसने देखा कि उसके भाई के पूरे शरीर में बहुत ज्यादा पीटने से चोटें लगीं हुईं हैं यह घटना चौंकी किसनपुरा पानीपत की है और अभी तक गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है और अभी तक पुलिस ने पीड़ित इखलाक के बयान लिए ओ ना ही एफ आई आर दर्ज की क्या सुशांत सिंह राजपूत ही भारत का वासी था उसी को इन्साफ के सरकार और मीडिया मुहिम चला सकता है। मैं इकराम सलमानी और मेरा भाई पीड़ित इखलाक जिस को मरा हुआ समझ कर फेंक दिया और कोहनी से एक हाथ काट सारी जिंदगी के लिए अपाहिज बना दिया को भी इनसाफ चाहिए हमारी मान्ननय प्रधानमंत्री, ग्रह मंत्री, डीजीपी हरियाणा, पुलिस कमिश्नर पानीपत और इंचार्ज चौकी किशनपुरा पानीपत और सभी देशवासियों से भी अपील है कि हमें इंसाफ दिलाया जाए और गुनाहगारों को जेल भेजा जाए और उनके खिलाफ इरादतन कत्ल और हाथ काटने और मारपीट करने की जो भी धारा हेल्प बनती हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए इकराम सलमानी सदर नानौता ऑल इंडिया जमात ए सलमानी बिरादरी

  • चिराग पासवान का एक और पत्र जिसका जवाब नीतीश कुमार के पास नहीं |

    चिराग पासवान  के एक पत्र का जवाब नीतीश कुमार  के पास नहीं है. दलितों ने चिराग पासवान के सामने नीतीश कुमार के फैसले पर उठाए सवाल हैं जिसके बाद चिराग ने नीतीश कुमार को पत्र लिखा है. चिराग पासवान ने कहा है कि यदि चुनावी घोषणा नहीं है तो पिछले 15 साल में जितने भी दलितों की हत्याएं हुई हैं उन सभी के परिजनों को सरकार नौकरी दे. गौरतलब है कि बिहार सरकार ने दलित की हत्या होने पर उसके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. आने वाले दिनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं.

    चिराग पासवान ने कहा है कि एससी, एसटी समाज का कहना कि इसके पूर्व तीन डिसमिल जमीन देने का वादा भी सरकार ने पूरा नहीं किया था जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति समाज को निराशा हुई थी. हत्या एक अपराध है और अपराधियों में डर न्याय प्रक्रिया का होना चाहिए ताकि हत्या जैसे जघन्य अपराध से बचें.

    चिराग पासवान ने नीतीश से कहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति ही नही बल्कि किसी वर्ग के किसी भी व्यक्ति की हत्या न हो, इस दिशा में भी कठोर कदम उठाने की जरूरत है. पिछले 15 सालों में जितने भी एससी-एसटी समुदाय के लोगों की हत्या के मामले न्यायालय में लंबित हैं उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाए. इन दोनो मांगों के साथ लोक जनशक्ति पार्टी सहमत है. लोजपा की यह मांग मांगने से सरकार पर सम्पूर्ण बिहारी का विश्वास बढ़ेगा, अन्यथा जनता इसको मात्र चुनावी घोषणा मानेगी.

     

  • मॉस्को से अचानक ईरान के लिए निकले राजनाथ सिंह, जानिए क्यों अहम है यह दौरा

    मास्को में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंचने वाले हैं। उन्होंने खुद इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। चीन से हालिया तनाव के बीच ईरान दौरे पर भारत के रक्षामंत्री का पहुंचना रणनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। तेहरान के एक दौरे से राजनाथ चीन के साथ पाकिस्तान को भी साधने की कोशिश कर सकते है

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स

    तेहरान:मास्को में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंचने वाले हैं। उन्होंने खुद इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। चीन से हालिया तनाव के बीच ईरान दौरे पर भारत के रक्षामंत्री का पहुंचना रणनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। तेहरान में राजनाथ सिंह अपने समकक्ष ईरानी रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। भारतीय रक्षा मंत्री के ईरान के अचानक दौरे से कई कयासों को बल मिलने लगा है। जानिए क्यों महत्वपूर्ण है राजनाथ सिंह का ईरान दौरा?

    चाबहार पर होगी बातचीत?
    पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब में भारत ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित कर रहा है। इस पोर्ट के रास्ते भारत न केवल अपनी सामरिक बल्कि आर्थिक हितों को भी साधेगा। चीन से बढ़ते तनाव और रिंग ऑफ पर्ल्स के खिलाफ इस पोर्ट की अहमियत काफी ज्यादा है। कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आईं थी कि चाबहार में निर्माण की धीमी गति को लेकर ईरान चिंतित है। ऐसे में भारत की बड़ी कोशिश ईरान की इन चिंताओं का समाधान करना होगा।
    फेल होगा पाकिस्तान-चीन का मिशन ग्वादर
    पाकिस्तान और चीन एक साथ मिलकर ग्वादर बंदरगाह को भारत के खिलाफ आर्थिक और सामरिक रूप से इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं। ऐसे में चाबहार के जरिए भारत ग्वादर के ऊपर बैठा है और वहीं से चीन-पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। इस बंदरगाह के कारण पाकिस्तान का व्यापारिक घाटा भी बढ़ रहा है क्योंकि मध्य एशिया के अधिकतर देश अब पाकिस्तान के ग्वादर को छोड़कर ईरान के चाबहार का उपयोग करने लगे हैं।

    चीन-पाक को एक साथ साधने की तैयारी
    दो फ्रंट पर युद्ध की तैयारी कर रहे चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने भी कमर कस ली है। ईरान को साधकर भारत न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन को भी तगड़ी चोट लगाने की तैयारी में है। चीन ने कुछ दिनों पहले ही ईरान के साथ अरबों डॉलर का सौदा किया था। इसमें न केवल रक्षा बल्कि व्यापार क्षेत्र के भी कई बड़े समझौते हुए थे। ऐसे में अगर भारत चीन के खिलाफ ईरान को मना लेता है तो यह बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।

    पाकिस्तान को तगड़ा झटका देगा भारत
    ईरान और पाकिस्तान की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। इस स्थिति में भारत ईरान को अपने पाले में करके पाकिस्तान को बड़ा झटका भी दे सकता है। वहीं, कट्टर शिया देश होने के कारण पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध अच्छे भी नहीं है। ऐसे में भारत को इसका फायदा हो सकता है। ईरान के रास्ते भारत व्यापार के नए आयाम स्थापित करने की तैयारी में है। इससे भारी दबाव से गुजर रही ईरानी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    ईरान के रास्ते पश्चिम एशिया से व्यापार बढ़ाएगा भारत
    चाबहार पोर्ट के ऑपरेशनल हो जाने से भारत अपना व्यापार अफगानिस्तान और ईरान से कई गुना बढ़ा चुका है। अब भारत की नजर इस बंदरगाह के जरिए रूस, तजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजकिस्तान और उजेबकिस्तान से अपने व्यापार को बढ़ाना है। इस के जरिए हथियारों की खरीद के कारण रूस से बढ़ रहे व्यापार घाटे को भी कम करने में भारत को मदद मिल सकती है।

  • सरकार के नए आदेश:सभी सरकारी विभागों में नई नौकरी पर लगा रोक, वित्त मंत्रालय ने जारी किए निर्देश

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    कोरोना के चलते उत्पन्न वितीय हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी सरकारी महकमों में नई पदों के सृजन पर प्रतिबंध लगा दी है।

    कोरोना ने पूरे दुनिया के इकॉनमी को तबाह कर रखा है। कई देशों की जीडीपी खस्ते हालत में है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने आज एक अहम निर्णय लिया है। कोरोना के कारण उत्पन्न मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार ने सभी सरकारी महकमों में नए पदों के सृजन पर प्रतिबंध लगा दी है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक निर्देश के अनुसार, यह स्थगन सभी मंत्रालयों, विभागों, उनके संलग्न कार्यालयों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों, वैधानिक संस्थानों और स्वायत्त संस्थानों के लिए होगा। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के सरकारी खर्चों में कटौती करने का भी घोषणा किया गया है।

    क्या हैं वित्त मंत्रालय के निर्देश
    वित्त मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, वे सभी विभाग या संस्थाएं जिन्हें पदों के सृजन का अधिकार प्राप्त है, इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे। अब किसी संस्था या सरकारी विभाग में नई नौकरी पर रोक लगा दी गयी है।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देश के अनुसार, यदि किसी विभाग ने व्यय विभाग की अनुमति के बिना इस साल 1 जुलाई के बाद किसी पद के लिए वैकेंसी निकली है और अभी तक उस रिक्ति को भरा नहीं गया है तो अब उस रिक्ति को भरा नहीं जा सकेगा। वैकेंसी निकालने वाले विभाग या संस्था को यदि लगता है कि उस पद का सृजन बहुत जरूरी है तो ऐसे स्थिति में व्यय विभाग के पास उस प्रस्ताव को भेजना होगा।

    सरकारी खर्चो में होगी कटौती
    कोरोना के चलते उत्पन्न इकॉनमी की हालत को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने कई अन्य सरकारी खर्चों में कटौती का निर्णय लिया है। जिसके मुताबिक अब किसी भी आयातित पेपर पर किसी भी प्रकार का दस्तावेज नहीं छपा होगा। शिलान्यास जैसे आयोजनों पर होने वाले खर्च में कटौती की जाएगी और ऐसे समारोहों के अवसर पर यात्रा पर किए गए खर्च को भी समाप्त किया जाएगा।

  • कांग्रेस फिर से मजबूत दल बनकर भारत मे उभर पाना मुश्किल नजर आता है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    कभी देश को आजादी दिलाने के लिये संघर्ष करने वाली कांग्रेस के आजाद भारत मे राजनीतिक दल का रुप धारण करने के बाद चुनावी प्रक्रिया शुरु होने के करीब पच्चीस साल तक केन्द्र मे कांग्रेस का एक तरफा राज रहने के बाद 1977 मे पहली दफा भाऋत मे गैर कांग्रेस सरकार गठित होने के बाद फिर से 1979 मे कांग्रेस के सत्ता मे आने पर कांग्रेस मे बदलाव आने लगा कि जो गांधी परिवार को भाये वो नेता बाकी अन्य सब पावर की धूरी के बाहर।

    चलो पीछले कुछ समय को भूलकर चंद महीनो की राजनीति को सामने रखकर देखते है कि दो दफा लोकसभा का चुनाव हारने वाले व 2019 का लोकसभा चुनाव पार्टी आदेश के बावजूद चुनाव नही लड़ने वाले केरल निवासी केसी वेणुगोपाल जब राहुल गांधी के करीब क्या लगे कि उनको पार्टी का संगठन महामंत्री बनाकर राजस्थान से राज्य सभा का सदस्य भी बनाकर इनाम पर इनाम दिया जाता है। इसके विपरीत जब कांग्रेस के सीनियर नेताओं का एक समुह लोकतंत्र मजबूती के लिये सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी का पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने का मुद्दा अनेक सुझावों के साथ उठाते है तो कुछ तथाकथित नेता उन्हें नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाना बता कर अजीब अजीब बोल बोलकर उनके कांग्रेस मुखालिफ साबित करने की कोशिशे की जाती है।

    भारत के अन्य राज्यों को जरा अलग रखकर राजस्थान की राजनीति मे दो महीने मे घटे घटनाक्रमों पर नजर दोड़ाये तो फिर साबित होता नजर आता है कि जो गांधी परिवार के नजदीक है उनकी बल्ले बल्ले बाकी सब को पावर की धूरी से बाहर। चुनाव लड़ने पर असफलता का हरदम मजा चखने वाले पूर्व प्रदेश प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे को हटाकर जिन अजय माकन को प्रभारी महामंत्री बनाया गया गया है। वो माकन स्वयं दो दफा लगातार लोकसभा चुनाव हार चुके है। एवं हाल ही मे माकन के नेतृत्व मे दिल्ली विधानसभा का आम विधानसभा चुनाव लड़ने पर कांग्रेस की फजीहत होने के साथ साथ एक भी कांग्रेस उम्मीदवार जीत नही पाया। साथ ही तीन उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की दिल्ली चुनावों मे जमानत तक जब्त हुई थी। उसके बाद वो अजय माकन स्वयं के प्रदेश दिल्ली मे कांग्रेस को मजबूत कर नही पाया ओर अब उसे भेजा राजस्थान मे कांग्रेस को मजबूत करने। वाह कांग्रेस तेरे भी खेल निराले है।

    1979 के बाद से कांग्रेस मे अजीब खेल खेला जाने लगा है कि हमेशा जनधार वाले नेता को दरकिनार करके गांधी परिवार के नजदीकी का लाभ देकर अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया जाता है। जब जब अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते राजस्थान मे आम विधानसभा चुनाव हुये तब तब कांग्रेस ओंधे मुह गिरते आने के बावजूद जब भी जनता ने कांग्रेस को सरकार बनाने का मोका दिया तो फिर उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाकर जनता पर थोप दिया जाता रहा है। इसी तरह गोविंद डोटासरा के अचानक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद आल इण्डिया कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर नीट व जेईई परीक्षा कराने पर केंद्र सरकार के अड़े रहने के खिलाफ भारत की तरह राजस्थान मे भी कांग्रेस के धरना प्रदर्शन हुये तो पाया कि राजस्थान के अनेक जिलो मे तो उक्त कार्यक्रम हुये ही नही। जयपुर के प्रोग्राम मे डोटासरा गये नही ओर डोटासरा के ग्रह जिला सीकर मे प्रदर्शन मे मुश्किल से मात्र एक दर्जन लोग ही जुट पाये।

    कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस की राजनीति मे चुनाव हारने या चुनाव लड़ने से दूर भागने वाले के संगठन के महत्वपूर्ण पदो पर बैठाकर उनको राज्यसभा सदस्य एवं मोका आने पर अन्य पदाधिकारी तक बनाकर मजबूत किया जाता है। स्वयं के अध्यक्ष रहते दिल्ली प्रदेश मे हुये विधानसभा व लोकसभा चुनावों मे कांग्रेस के ओंधे मुहं गिरने पर इनाम के तौर पर उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर दुसरे प्रदेश मे संगठन को मजबूत करने भेज दिया जाता है। जिस मुख्यमंत्री के नेतृत्व मे आम चुनाव होने पर कांग्रेस गरत मे चली जाये पर जनता द्वारा फिर से कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका देने पर फिर उसी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर जनता पर थोप दिया जाता है।

  • 50/55वर्ष आयु होने या 30 साल नौकरी कर चुके कर्मियों को हटाएगी मोदी सरकार,समय पूर्व हो जाएंगे रिटायर,आदेश जारी

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स

    PATNA : केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों से नौकरी में 30 साल पूरे कर चुके कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा कर अक्षम या भ्रष्ट कर्मियों को चिह्नित करने और उन्हें जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने को कहा है. कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में यह कहा गया. केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के मौलिक नियम (एफआर) 56 (जे) और 56 (आई) तथा नियम 48 (1)(बी) के तहत कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है जो उचित प्राधिकार को किसी सरकारी सेवक को जनहित में आवश्यक लगने पर सेवानिवृत्त करने का ‘संपूर्ण अधिकार’ देता है. शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया, स्पष्ट है कि इन नियमों के तहत सरकारी सेवकों को समय पूर्व सेवानिवृत्ति देना सजा नहीं है. यह ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ से अलग है जो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के तहत निर्दिष्ट शास्तियों या सजाओं में से एक है.

    आदेश के अनुसार सरकार किसी सरकारी कर्मचारी की आयु 50/55 वर्ष होने या 30 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद किसी भी समय जनहित में उसे समय पूर्व सेवानिवृत्त कर सकती है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल भी अक्ष्म या भ्रष्ट कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था. ऐसे कर्मचारियों को मोदी सरकार ने जबरन रिटायरमेंट दे दिया था

  • कोरोना के बीच अभूतपूर्व कार्य करने वालों को इम्पार ने सम्मानित किया

    यह सम्मान लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए हैं ताकि भविष्य में जब भी देश को ज़रुरत पड़े लोग आगे आयें : इम्पार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: इंडियन मुस्लिमस फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स की ओर से उन संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिन्होंने करोना महामारी के बीच असाधारण कार्य करके लोगों को इस कठिन परिस्थितियों में बचाने और उन्हें सहारा देने का काम किया। इंडियन मुस्लिमस फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स की ओर से जारी मीडिया बयान के अनुसार इस महामारी के बीच कई मुस्लिम चैरिटी समूह सहायता संगठनों और परोपकारी लोगों ने संकट के समय में सहायता के कामों में बढ़-चढ़कर के भाग लिया, जिसकी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया ने व्यापक रूप से रिपोर्टिंग भी की। इम्पार ने इन संगठनों संस्थानों और लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वह लोग हैं जिन्होंने अपनी हदों को पार कर के और अपनी जिंदगी को खतरे में डाल कर के भी लोगों की मदद की।

    इनके अभूतपूर्व कार्यों को देखते हुए इम्पार ने फैसला किया कि इनको सम्मानित किया जाए और इनके हौसले को बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में भी जब भी देश को इनकी जरूरत पड़े यह बढ़-चढ़कर के भाग लें। इम्पार के अनुसार प्रोग्राम में जूरी मेंबर सलाउद्दीन अहमद पूर्व प्रमुख सचिव राजस्थान जयपुर इम्पार की मीडिया एंड रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर अर्शी जावेद के साथ अवॉर्डीस और दूसरे मेहमानों ने भी भाग लिया।

    इम्पार ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जिन लोगों को सम्मानित किया गया उनमें रेड क्रीसेंट सोसायटी ऑफ इंडिया का नाम शामिल है जिसकी अगुवाई अरशद सिद्दीकी कर रहे हैं, इसके अलावा ए आर वेलफेयर फाउंडेशन राजस्थान जयपुर जिसकी अगुवाई ए आर खान पूर्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी कर रहे हैं। हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन जिसकी अगुवाई मुज्तबा हसन असकरी फाउंडर ट्रस्टी कर रहे हैं। इसके साथ जमात ए इस्लामी हिंद, जमीअत उलमा हिंद बेंगलुरु, तमिल नाडु मुस्लिम मुन्नेत्र कैहगाम (टीएमएमके) जिसकी अगुवाई जवाहिरउल्लाह कर रहे हैं। साथ ही डॉक्टर ताहा मतीन, शीबा असलम फहमी, शाइस्ता अख्तर सफा बैतुल माल और सज्जाद खान शामिल हैं।

    इम्पार उन कोरोना योद्धाओं का शुक्रिया अदा करता है जिन्हों ने मजहब और धर्म व जाति से ऊपर उठकर के देशव्यापी लॉक डाउन के बीच लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम किया और उनकी जिंदगियों को बचाने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। इम्पार ने उनके कामों की प्रशंसा करते हुए उन्हें भी सर्टिफिकेट देकर उनके कामों को सम्मानित करेने की बात कही।

  • AIMIM प्रतापगढ़ की टीम ने उत्तर प्रदेश मे तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

    आशिफ अली/मिल्लत टाइम्स,प्रतापगढ़( उत्तर प्रदेश )

    उत्तर प्रदेश प्रतापगढ़ ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रतापगढ़ की टीम ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जिसमें यह मांग की गई कि महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आदेश किया है इसी तरह उत्तर प्रदेश में तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिया जाए।

    इस मौके पर मौजूद रहे प्रदेश सचिव इसरार अहमद, जिला अध्यक्ष मोहम्मद सलीम अंसारी , एडवोकेट जफरुल हसन ,जिला सचिव इंजीनियर अब्दुल्लाह अंसारी ,नगर अध्यक्ष तौफीक अंसारी नगर युवा अध्यक्ष तफज्जुल हसन, नौशाद खान।

  • बिहार में राजनीतिक विकल्प क्यों लाखों लोग सम्मेलन में हुवे शामिल,देश में दो-पक्षीय प्रणाली का गठन किया जा रहा है सामंती और सांप्रदायिक राजनीति के विरोध में वैकल्पिक बिहार को ही देना होगा:एसडीपीआई

    प्रेस विज्ञप्ति 30 अगस्त, 2020
    देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को दो-पक्षीय व्यवस्था की ओर धकेल कर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और संघवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं बिहार में भी केवल दो ही दल शासन कर रहे हैं। इस के साथ हीं जाति के नाम पर कुछ परिवारों ने बिहार को अपने कब्जे में ले लिया है। इसी कारण यहां विकास जैसी कोई चीज नहीं है। जहां एक फिल्म अभिनेत्री के गाल जैसा सड़क का जाल लगाने का दावा किया गया था वहीं बिहार की पूरी सड़क गड्ढों से भरी दिखती है, वहीं शिक्षा और रोजगार के मामले में बिहार सबसे निचले स्तर पर है। यह बात अतिथियों ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में कही।

    इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तसलीम अहमद रहमानी और राष्ट्रीय उपाधयक्ष एडवोकेट शर्फुद्दीन ने बिहार की राजनीति को ब्लैमेलिंग की राजनीति का नाम देते हुए कहा कि बिहार में यादव मुस्लिम और यादव दलित और ओबीसी के नाम पर सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग की राजनीति होती रही है लेकिन वास्तव में तो राजनेताओं के पास बिहार के विकास के लिए कोई रोड मैप नहीं था। ना तो ये दलित, ओबीसी और मुसलमानों का कोई भला कर सकते हैं, इसलिए इस राजनीति के खिलाफ एक नया राजनीतिक विकल्प लाने की आवशयकता है, जो की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के तौर पर उभर रही है। इस अवसर पर दलित कार्यकर्ता राज रतन अम्बेडकर ने कहा कि आजादी के बाद से लगभग 70% लोग विकास और बुनियादी मुद्दों की राजनीति का विकल्प तलाश रहे हैं। इसकी आवश्यकता केवल बिहार में हीं नहीं बल्कि पूरे देश में है जो बिहार से शुरू होनी चाहिए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव ने बिहार में कोरोना की उच्च संख्या पर कहा कि जो लोग कोरोना से मरते हैं, वे कोरोना के कारण नहीं मर रहे हैं, बल्कि राजनीति की कारण से मर रहे हैं क्योंकि राज्य की चिकित्सा प्रणाली 70 वर्षों में तय नहीं की जा सकी। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जीवन और संपत्ति के नुकसान का असली कारण बाढ़ नहीं है, बल्कि राजनीति है जो बाढ़ को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी।

    जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी बिहार के दोनों क्षेत्रीय दलों को निहित स्वार्थ और पूर्ण विफलता बताया और कहा कि एक विकल्प आना चाहिए और कहा कि हमारे राजनीतिक बुद्धिजीवियों द्वारा किए गए प्रयास सराहनिय है, वक्ताओं ने कहा कि केवल बिहार ही देश में जाति और सामंती राजनीति और दो-पक्षीय राजनीति के खिलाफ विकल्प शुरू कर सकता है और बिहार को अब इसके लिए कदम उठाने चाहिए। सम्मेलन में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया बिहार के प्रदेश अध्यक्ष नसीम अख्तर साहब ने भी सभा को संबोधित किया
    इस ऑनलाइन सम्मेलन में फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों की संख्या में लोगों ने भाग लिया