Category: देश

  • RSS का लव जिहाद प्लान हुआ फ्लाप,समीक्षा जैन ने कहा हम आदिल के साथ ही रहेंगे,तो कोर्ट ने दे दि अनुमति

    दिल्ली: ग्वालियर के दो प्यार करने वालो को लव जिहाद का झूठा आरोप लगाकर जुदा करने का षड्यंत्र रचा गया है,जिसमें आखिरकार प्यार की जीत हुई है, मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की मुंगावली कस्बे की एक जैन समाज की लड़की ने इस्लाम क़ुबूल करने के बाद एक मुस्लिम युवक से शादी कर ली थी।


    देखिए इस विडियो मे क्या कह रही है समीक्षा जैन

    जिसके बाद समीक्षा के परिवार वालों ने कथित लव जिहाद का आरोप लगा कर पुलिस थाने में आदिल के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया। इस मामले में आरोपित युवक पर इनाम भी घोषित किया गया था।

    इसी बीच समीक्षा के परिजन ने प्रेस कांफ्रेस कर बताया था कि मोहम्मद आदिल निवासी मुंगावली युवती समीक्षा जैन को अपने साथ ले गया और हैदराबाद में वक्फ बोर्ड में गलत तरीके से युवती का धर्म परिवर्तन कराया।


    (समीक्षा जैन और आदिल का मैरिज सर्टिफिकेट)
    युवती के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया था कि मुस्लिम समाज द्वारा लव जेहाद चलाया जा रहा है,उसका युवती को शिकार बनाया गया। इस सबके बाद समीक्षा अपनी जिद पर अड़ी थी और विधिक सेवा के जरिए उसने हाईकोर्ट में अपील की। इस अपील की सुनवाई के बाद कोर्ट ने समीक्षा को बालिग होने पर रिहा करने के आदेश दिए।

    बता दें की मई 2018 में अशोकनगर जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर मुंगावली कस्बे के जैन परिवार की बेटी समीक्षा और वहीं रहने वाले मोहम्मद आदिल के लापता होने का मामला सामने आया।

    इसके बाद पुलिस ने युवती को हैदराबाद से बरामद कर आरोपी युवक आदिल को गिरफ्तार जेल भेजा और बाद में उसे जमानत भी मिल गई। समीक्षा को अशोकनगर जिला कोर्ट में पेश किया गया जहां से कोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए किसी भी पक्ष को समीक्षा की कस्टडी नहीं दी। कोर्ट के आदेश पर ग्वालियर स्थित नारी निकेतन में समीक्षा को भेजा गया।

    कोर्ट में समीक्षा से पूछा गया कि वह कहां जाना चाहती है तो हाईकोर्ट ने लिखित में इच्छा जानी। समीक्षा ने अपने पति आदिल के पास जाने की इच्छा जताई तो कोर्ट ने अनुमति दे दी। 193 दिन से आदिल के पास जाने के इंतजार में बैठी समीक्षा अब ससुराल में है।

    बता दें की कुछ दिन बाद लडकी ने आदिल खान नाम के युवक से शादी करने के बाद सोशल मीडिया में अपना विडियो जारी कर बयान भी दिया था जो सोशल मीडिया पर लगातार कई दिनों तक चर्चा का विषय भी बना।

    इस विडियो में समीक्षा ने बताया था की उसपर किसी भी प्रकार का कोई दबाव या लालच नहीं दिया गया उसने अपनी मर्जी से शादी की है।
    input:inquilab

  • देशजलाऊ मीडिया ने किया दुष्प्रचार,PFI द्वारा लगाए गए RSS मुर्दाबाद के नारे को बता दिया,भारत देश मुर्दाबाद’

    दो साल में बिहार में यह तीसरी घटना है जब देशजलाऊ मीडिया ने समाज में आग लगाने की करतूत दिखाई. इस बार दरभंगा में सड्यंत्रकारी झूठ परोसा गया. इसके पहले अररिया और पटना में भी ऐसा ही कुकर्म मीडिया के एक वर्ग करके अपमानित हो चुका है.

    मिल्लत टाइम्स, बिहार: यह घटना दरभंगा शहर में 6 दिसम्बर की है. इस दिन SDPI यानी Social Demoratic Party of India के कार्यकर्ता बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी मनाने के एक जुलूस निकाला था. विधिवत रूप से इस जुलूस की सूचना पुलिस प्रशासन को थी और खुद एक मजिस्ट्रेट की देखरेख में यह जुलूस किलाघाट इलाके से निकला. जुलूस में लोग ‘RSS मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे. लेकिन शाम होते होते आगलगाऊ पत्रकारों और कुछ अन्य लोगों ने ‘RSS मुर्दाबाद’ के नारे को ‘भारत देश मुर्दाबाद’ कहके कुप्रचारित करना शुरू कर दिया.

    देश शलाओ मिडिया द्वारा इसे प्रमुखता से प्रसारित भी किया गया. देखते ही देखते दरभंगा सदर के भाजपा विधायक संजय सरावगी भी इस मामले में कूद पड़े और उन्होंने भी आग में घी डालने की कोशिश की और बयान दिया कि ऐसे नारे को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. उन्होंने कथित देशद्रोहियों को गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम भी देना शुरू कर दिया.

    आज मिल्लत टाइम्स ने दरभंगा की एसएसपी गरिमा मलिक से फोन पर बात करके पूछा है कि आपने किस आधार पर एफ आई आर दर्ज किया था उन्होंने कहा कि मुझे सूचना मिली थी और वीडियो के आधार पर हमने एफ आई आर दर्ज कर लिए जब उनसे पूछा गया कि आपको यह वीडियो कहां से प्राप्त हुआ तो उन्होंने कहा कि मुझे कहीं से प्राप्त हुआ था मिल्लत टाइम्स ने जब पूछा है कि क्या आपको यह वीडियो भाजपा विधायक की तरफ से दिया गया था या फिर विधायक के कहने पर आप ने एफआइआर दर्ज की थी तो उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई हाथ नहीं है और आगे कुछ भी बताने से मना कर दिया

    हालांकि बाद में दरभंगा के ही एक पत्रकार ने इस विडियो को अनालाइज करते हुए यूट्यूब पर डाला है और बताया है कि कुछ शरारती लोगों ने आम जन के साइको का दोहन किया है और ‘RSS मुर्दाबाद’ को ‘भारत देश मुर्दाबाद’ कहके अफवाह उड़ाई है.

    आप को याद दिला दें कि दो साल पहले पटना में PFI Popular Front of India ने एक जुलूस निकाला था जिसमें ‘PFI जिंदाबाद’ के नारे लगे. PFI जिंदाबाद के नारे को उस समय पटना के कुछ आगलगाऊ पत्रकारों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहके कुप्रचारित किया था.
    पहले भी देशजलाऊ पत्रकारों की पिट चुकी है भेद

    एक अन्य घटना पिछले दिनों अररिया में हुई जहां उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम ने भाजपा को पटखनी दी थी. जीत के जश्न में निकले जुलूस पर आरोप लगाया गया कि उसमें पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे. इस मामले में भी केस किया गया और काफी बखेड़ा किया गया. लेकिन जांच से पता चला कि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे ही नहीं.
    लेकिन फिर उसी घृणित मानसिकता और समाज में जहर फैलाने वाले तत्वों ने दरभंगा में वैसी ही साजिश रची.
    इस मामले में SDPI के शमीम अख्तर ने मिडिया को बताया है कि वह इस मामले में लीगल कार्रवाई के लिए अध्ययन कर रहे हैं. ध्यान रहे कि PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक विंग SDPI है. इस संगठन पर झारखंड में भी देशद्रोह का मुकदमा किया गया था लेकिन झारखंड़ की अदालत ने इस केस को खारिज कर दिया था.
    input:naukarshahi

  • यूपी:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को कहा नाम भावनाओं के आधार पर नही बदला जाता

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: योगी सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया हलफनामा: जिले का नाम बदला, शहर अब भी इलाहाबाद ही है
    प्रयागराज: यूपी की योगी सरकार द्वारा संगम के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया है. चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच इस मामले में अगले हफ्ते अपना फैसला सुनाएगी. अदालत ने इस मामले में योगी कैबिनेट के मिनट्स और नोटिफिकेशन के सभी रिकार्ड तलब कर लिए थे.

    योगी सरकार की तरफ से आज अदालत में जो दलीलें पेश की गईं, कोर्ट उससे संतुष्ट नहीं हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि क़ानून व नियमों के आधार पर होती है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस वाई के श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच में हुई.

    इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी समेत बारह पूर्व अफसरों- जन प्रतिनिधियों व प्रोफेसरों द्वारा दाखिल की गई पीआईएल में यूपी रेवेन्यू कोड की उस धारा 6 को चैलेंज किया गया था, जिसके तहत इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया है. अर्जी में कहा गया कि लोगों की आपत्ति के बिना ही जिला बदलने का अधिकार दिए जाने वाली रेवेन्यू कोड की यह धारा असंवैधानिक है. इसलिए इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए और इसके तहत इलाहाबाद का नाम बदले जाने की प्रक्रिया को भी रद्द कर देना चाहिए.

    याचिकाकर्ताओं की वकील सैयद फरमान अब्बास नकवी की तरफ से कोर्ट में यह भी दलील दी गई है कि रेवेन्यू कोड की जिस धारा के तहत नाम बदला गया है, उसमे भी प्रस्ताव के बाद लोगों से आपत्ति मंगाने और उसे दूर करने के पैंतालीस दिनों के बाद ही नाम व सीमा बदलने का नियम है, लेकिन योगी सरकार ने सिर्फ कैबिनेट बैठक से ही यह फैसला ले लिया.

    गौरतलब है कि यूपी की योगी सरकार ने इसी साल सोलह अक्टूबर को कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने के बाद अठारह अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था. हालांकि नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल एक अर्जी को हाईकोर्ट खारिज भी कर चुका है, लेकिन इस अर्जी को अदालत ने सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए योगी सरकार से जवाब तलब कर लिया है. नाम बदले जाने के मामले में जैक सेवा ट्रस्ट, एडवोकेट सुनीता शर्मा और एडवोकेट शाहिद सिद्दीकी समेत पांच अन्य लोगों ने भी अर्जी दाखिल की हुई है.