Category: देश

  • CM नीतीश पर लगा है कांग्रेसी कार्यकर्ता सिताराम की हत्या का आरोप,जनवरी मे होगी अगली सुनवाई

    मिल्लत टाइम्स, पटना: हत्या के एक मामले में फंसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आज पटना हाईकोर्ट में देश के दिग्गज वकीलों की फौज उतारनी पड़ी. नीतीश कुमार ने देश के जाने माने क्रिमिनल वकील सुरेंद्र सिंह को जबलपुर हाईकोर्ट से बुलाकर पटना में खड़ा किया. सुप्रीम कोर्ट के वकील गोपाल सिंह समेत आधा दर्जन बड़े वकील आज पटना हाईकोर्ट में खड़े होकर नीतीश कुमार को मर्डर केस से राहत देने की दलील पेश करने में लगे रहे.

    क्या है नीतीश कुमार के खिलाफ मामला
    मामला 27 साल पुराना है. 1991 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र में हो रहे चुनाव में नीतीश कुमार उम्मीदवार थे. 16 नवंबर 1991 को मतदान के दौरान पंडारक थाने के ढ़ीबर गांव में बूथ पर फायरिंग हुई जिसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता सीताराम सिंह का मर्डर हो गया. पुलिस ने मामले की जांच कर फाइनल रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें नीतीश कुमार का नाम नहीं था. लेकिन इस घटना में FIR कराने वाले अशोक सिंह ने कोर्ट में परिवाद दायर किया और नीतीश कुमार पर रायफल से गोली चलाकर सीताराम सिंह की हत्या करने का आरोप लगाया. 31 अगस्त 2010 को बाढ़ कोर्ट ने दो गवाहों का बयान सुनने के बाद नीतीश कुमार को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी कर दिया. नीतीश कुमार को 9 सितंबर 2010 को कोर्ट में हाजिर होने को कहा गया था. बाढ़ कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ नीतीश कुमार पटना हाईकोर्ट चले गये. हाईकोर्ट ने बाढ़ कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी. मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है और आज उसकी तारीख थी.

    नीतीश ने उतारी वकीलों की फौज

    पटना हाईकोर्ट में आज जस्टिस ए. अमानुल्लाह की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नीतीश कुमार का पक्ष रखने के लिए देश भर के दिग्गज वकीलों को बुलाया गया था. देश के जाने माने वकील सुरेंद्र सिंह खास तौर पर जबलपुर हाई कोर्ट से पटना बुलाया गये थे. सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता गोपाल सिंह को भी नीतीश कुमार का पक्ष रखने के लिए लाया गया था. उनके साथ अधिवक्ता भास्कर शंकर, मनिंदर सिंह, राकेश सिंह समेत आधा दर्जन वकील बिहार के मुख्यमंत्री को मर्डर केस से राहत दिलाने के लिए दलीलों के साथ तैयार थे. सुरेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा कि एक ऐसे व्यक्ति ने मर्डर केस में नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत की है जिसका केस से कोई लेना देना नहीं है. उस शिकायत के आधार पर बाढ़ के ACJM ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर नीतीश कुमार के खिलाफ संज्ञान ले लिया, लिहाजा हाईकोर्ट को इस केस को ही खत्म कर देना चाहिये.

    नीतीश के खिलाफ भी तगड़ी दलील
    उधर, नीतीश कुमार के खिलाफ खड़े वकील दीनु कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों को कोर्ट में पेश कर दिया. दीनु कुमार के मुताबिक किसी भी मर्डर केस को बगैर ट्रायल के हाईकोर्ट खत्म नहीं कर सकता. लिहाजा, नीतीश कुमार को बाढ़ कोर्ट में जाकर मर्डर केस का ट्रायल फेस करना चाहिये.

    वकीलों की फौज नहीं खत्म करा पायी केस
    नीतीश कुमार के लिए उतरी वकीलों की फौज हाईकोर्ट से नीतीश के खिलाफ केस खत्म नहीं करा पायी. हां, फौरी राहत जरूर मिली. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया है. 17 जनवरी को मामले पर अगली सुनवाई होगी

  • मोदी की विदेश यात्राओं पर 2000 करोड़ और योजनाओं के प्रचार में 5200 करोड़ रुपए हुए खर्च

    नई दिल्ली. एनडीए सरकार ने साढ़े चार साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों और योजनाओं के प्रचार में करीब 7200 करोड़ रुपए खर्च किए। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद 84 विदेश दौरे किए, जिसमें करीब 280 मिलियन डॉलर यानी 2 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में वर्तमान केंद्र सरकार ने 5200 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

    राजवर्धन राठौर ने प्रचार के खर्च के बारे में दी जानकारी
    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री ने जितनी बार विदेश यात्रा की, उनमें सबसे ज्यादा खर्च एयर इंडिया वन के रखरखाव और सुरक्षित हॉटलाइन को स्थापित करने में लगे हैं। इसी तरह प्रचार में हुए खर्च के बारे में सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राजवर्धन राठौर ने जवाब दिया।

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री ने जितनी बार विदेश यात्रा की, उनमें सबसे ज्यादा खर्च एयर इंडिया वन के रखरखाव और सुरक्षित हॉटलाइन को स्थापित करने में लगे हैं। इसी तरह प्रचार में हुए खर्च के बारे में सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राजवर्धन राठौर ने जवाब दिया।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने दुनिया के लगभग सभी बड़े नेताओं से मुलाकात की है। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे शामिल हैं। ज्यादातर मुलाकातें वैश्विक मामलों में भारत के प्रभाव को बढ़ावा देने और अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने के लिए की गईं।

    मोदी की कुछ यात्राएं ,जिनमें वुहान में जिनपिंग के साथ अनौपचारिक मुलाकात शामिल है, कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जाता है। चीन के राष्ट्र प्रमुख के साथ यह बैठक उस समय हुई थी, जब डोकलाम विवाद कोे लेकर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। नवंबर 2016 में नोटंबदी के ऐलान के बाद मोदी जापान दौरे पर गए थे, जिसपर विपक्ष ने काफी सवाल उठाए थे।

  • राफेल पर राहुल गांधी ने कहा-चौकिदार चोर है अपने दोस्त अंबानी को कराई चोरी,हम साबित करके रहेंगे

    नई दिल्ली: राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस जांच के लिए संसदीय समीति (जेपीसी) गठित करने की मांग पर अड़ी है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि जेपीसी जांच हो गई तो नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी कितना भी छुप लें, बच नहीं पाएंगे। भाजपा ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष शीर्ष अदालत से ऊपर हैं जो फैसले को नहीं मान रहे हैं? इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे में जांच की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं।

    राहुल ने कहा, ”कई साल से राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार की बात चल रही थी। हमारे सवाल हैं कि विमान 1600 करोड़ में क्यों खरीदा गया? एचएएल से कॉन्ट्रैक्ट क्यों छीनकर अनिल अंबानी को दिया गया? हिंदुस्तान के युवाओं से रोजगार क्यों लिया? फ्रांस की सरकार को क्यों कहा कि आप हवाई जहाज फ्रांस में बनाइए? मोदीजी के फ्रांस से लौटने के बाद रक्षा मंत्री ने कहा था कि मुझे कुछ नहीं मालूम। फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद कहते हैं कि सीधे मोदी ने 36 विमानों का ऑर्डर दिया।”

    मोदी राफेल पर क्यों कुछ नहीं बोलते: राहुल
    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री तो कुछ बोलते नहीं। अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण बोलती हैं। हमने जेपीसी की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में फैसला दिया। इसमें कोर्ट ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में लिखी राफेल की कीमत की जानकारी संसदीय समिति के साथ साझा की जाए। क्या ये रिपोर्ट रखी गई, नहीं।

    सीएजी रिपोर्ट संसद में रखी जाए: खड़गे मल्लिकार्जुन खड़गे
    ने कहा- ”सीएजी के पास भी राफेल की कीमत की कोई रिपोर्ट नहीं है। मैंने डिप्टी सीएजी को बुलाकर पूछा- उन्हें भी पता नहीं। ये सब क्या चल रहा है। अगर रिपोर्ट संसद में आएगी तो पब्लिड डोमेन में आएगी। ये रिपोर्ट आई कहां से, किसने दी। कानून ये कहता है कि जब तक ये संसद में नहीं रखी जाएगी, तब तक इसके बारे में बोलने का किसी को अधिकार नहीं है।”

    राहुल ने पीएसी को लेकर चुटकी ली
    राहुल गांधी ने कहा, ”आज की दुनिया में हो सकता है कि मोदीजी ने अपनी पीएसी प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठ रखी हो। मोदीजीआप जितना छिपना चाहते हैं छिप जाइए। आप नहीं बच सकते हैं। जिस दिन जांच हो गई। ये जांच संसद करेगी। जिस दिन हो गई। नरेंद्र मोदी-अनिल अंबानी नहीं रहेंगे।”

    राहुल ने प्रधानमंत्री को गाली दी: रविशंकर
    केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”राहुल गांधी ने ईमानदार प्रधानमंत्री को गाली दी। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल के झूठ से पर्दा उठा दिया है, लेकिन वे शीर्ष अदालत के फैसले को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। क्या कांग्रेस और उसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हैं? राहुल हमसे कई सवाल पूछते हैं, आज हम उनसे एक सवाल करते हैं। जब 2006 से 2011 के बीच दैसो के टेंडर की कीमत कम थी तो आपने राफेल डील फाइनल क्यों नहीं है? तब आपको किसने रोका था?”

  • विजय माल्या ने 40 साल तक लोन चुकाया,उसे विल्फुल डिफॉल्टर कैसे कह सकते हैं:गडकरी

    मिल्लत टाइम्स,मुम्बई: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को विल्फुल डिफॉल्टर कहने पर सवाल उठाए हैं। एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि हर कारोबार में जोखिम होता है। चाहे बैंकिंग हो या इंश्योरेंस, हर बिजनेस में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। लेकिन, गलतियां प्रामाणिक हों तो उन्हें माफ कर दूसरा मौका दिया जाना चाहिए।

    नितिन गडकरी ने कहा कि काफी समय पहले महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कंपनी सिकॉम के जरिए विजय माल्या को कर्ज दिया था। उसने 40 साल तक ब्याज चुकाया। एविएशन कारोबार में आने के बाद माल्या को दिक्कतों का सामना करना पड़ा और वह लोन नहीं चुका सका।

    गडकरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक व्यक्ति जिसने 40 साल तक कर्ज का भुगतान किया वो कुछ दिक्कतों की वजह से बाद में पैसे नहीं चुका पाया तो क्या उसे विल्फुल डिफॉल्टर घोषित किया जा सकता है ?

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीरव मोदी या विजय माल्या ने धोखाधड़ी की है तो उन्हें जेल भेजना चाहिए। लेकिन, हम वित्तीय संकट में फंसे हर व्यक्ति पर फ्रॉड होने का लेबल लगाएं तो अर्थव्यवस्था नहीं बढ़ पाएगी।

    वित्तीय संकट में फंसी कंपनियों को सीधे आईसीयू में नहीं डालना चाहिए

    गडकरी ने कहा कि हमारा बैंकिंग सिस्टम मुश्किल में फंसी कंपनियों को सपोर्ट नहीं करता। जब कोई गंभीर हालत में होता है तो उसे आईसीयू में भर्ती किया जाता है। लेकिन, हमारी बैंकिंग व्यवस्था ऐसी है जो दिक्कत वाली कंपनियों को सीधे आईसीयू में डाल देती है। फिर यह तय कर दिया जाता है कि वह कंपनी खत्म हो चुकी है।

    सरकार के आर्थिक नजरिए का समर्थन करे आरबीआई: गडकरी
    आरबीआई के मुद्दे पर गडकरी ने कहा कि सरकार ने एक संस्था के तौर पर उसे खत्म नहीं किया है। हम उसकी स्वायत्तता का स्वीकार करते हैं। वह सरकार का हिस्सा है इसलिए, उसे भी सरकार के आर्थिक नजरिए का समर्थन करना चाहिए।

    गडकरी ने कहा कि आरबीआई को पूरी तरह स्वायत्तता चाहिए तो उसे अर्थव्यवस्था की हालत के लिए जिम्मेदार होना चाहिए, वित्त मंत्रालय के लिए नहीं। अर्थव्यवस्था में कुछ गलत होने पर आप हमें जिम्मेदार ठहराते हैं और जब हम फैसले लेते हैं तो कहा जाता है कि आरबीआई की स्वायत्तता को खतरे में डाल रहे हैं। गडकरी ने कहा कि आरबीआई एक स्वायत्त संस्था है लेकिन, क्या इसका मतलब यह है कि वह पॉलिसी से जुड़े 100% फैसले खुद लेगा।

  • तेलंगाना:के चंद्रशेखर राव दुसरी बार बने मुख्यमंत्री राज्यपाल नरसिम्हन ने दिलाई शपथ

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: तेलंगाना चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बाद टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
    राज्‍यपाल नरसिम्हन ने केसीआर को पद और गोपनीयता की दिलाई शपथ, बतौर सीएम यह दूसरा कार्यकाल
    अब टीआरएस के नवनिर्वाचित विधायकों की तेलंगाना भवन में बैठक, केसीआर को चुनेंगे अपना नेता

    तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बाद टीआरएस के नेता के चंद्रशेखर राव ने गुरुवार को शपथ ग्रहण कर लिया। राज्‍यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन ने उन्‍हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। केसीआर का यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले ऐसी अटकलें आई थीं कि केसीआर इस बार अपने बेटे केटी रामाराव को सीएम पद सौंप सकते हैं लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया।

    शपथ ग्रहण के बाद अब टीआरएस के नवनिर्वाचित विधायकों की तेलंगाना भवन में बैठक होगी, जहां वे केसीआर को अपना नेता चुनेंगे। बता दें कि तेलंगाना में 7 दिसंबर को हुए चुनाव में 119 सदस्यीय विधानसभा में टीआरएस को 88 सीटें हासिल हुई हैं। तेलंगाना में टीआरएस ने समय से पहले विधानसभा भंग करने का दांव आजमाया था जो सही साबित हुआ। इस तरह वह चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी को बुरी तरह परास्त करने में कामयाब रहे।

    इस बार यहां कांग्रेस ने टीडीपी के साथ गठबंधन करके टीआरएस को चुनौती देने की कोशिश की लेकिन परिणामों में कांग्रेस काफी पीछे नजर आई। गौरतलब है कि कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता के रूप में लगभग गुमनामी में राजनीतिक सफर की शुरुआत से तेलंगाना गौरव का चेहरा बनने तक के. चंद्रशेखर राव ने राजनीति की तेज लहरों पर बड़े सधे अंदाज में अपनी चुनावी नैया पार की है।

    उन्होंने कांग्रेस को झुकने पर मजबूर करके अलग तेलंगाना राज्य के गठन में सफलता भी हासिल की। अलग तेलंगाना राज्य के दशकों पुराने एकमात्र स्वप्न को साकार करने के लिए बनी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की मंगलवार को घोषित परिणामों में जबरदस्त जीत के बाद केसीआर के नाम से लोकप्रिय के चंद्रशेखर राव (64) ने देश के सबसे नए राज्य का सबसे ऊंचे कद वाला नेता होने का अपना दावा बरकरार रखा है।
    राव के बेटे केटी रामाराव उनकी सरकार में मंत्री रहे। वहीं बेटी के. कविता निजामाबाद से लोकसभा सदस्य हैं। राव के भतीजे हरीश राव भी पिछली सरकार में मंत्री थे। गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस मोर्चे के हिमायती रहे केसीआर की यह सफलता क्षेत्रीय दल के रूप में उनकी ताकत को और मजबूती प्रदान करेगी।

    युवा कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक करियर की शुरूआत करने वाले राव ने 1983 में तेलुगू देशम पार्टी का दामन थामा। वह पहले ही चुनाव में सिद्दीपेट सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार से हार गए। केसीआर 1985 में इस सीट पर चुनाव जीत गए और उसके बाद से उनका सफर सफलता के पथ पर आगे बढ़ता रहा। 1987 से 1988 तक केसीआर आंध्र प्रदेश में राज्यमंत्री रहे, इसके अलावा 1997-99 के बीच वह केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।
    इसके बाद केसीआर 1999 से 2001 तक आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे। हालांकि इसके बाद उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य की मांग के साथ टीडीपी से किनारा कर लिया और अपनी पार्टी टीआरएस का गठन कर लिया। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और पांच सीटों पर जीत हासिल की।

    राव ने 2009 के लोकसभा चुनाव टीडीपी के साथ मिलकर लड़े। विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रम से गुजरते हुए राव ने अलग तेलंगाना राज्य के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने नौ दिसंबर, 2009 को घोषणा की कि तेलंगाना के गठन के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद राव ने 11 दिन तक चले अपने अनशन को समाप्त कर दिया। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार वह अलग तेलंगाना राज्य बनवाने में सफल रहे और राज्य के पहले मुख्यमंत्रि बने

  • IP यूनिवर्सिटी के लॉ की परीक्षा का सवाल क्या मुस्लिम हिंदू के सामने गौकशी करता है तो ये अपराध है:दिल्ली सरकार दिये जांच के आदेश

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपी यूनिवर्सिटी) के लॉ की परीक्षा में मुस्लिम समुदाय पर निशाना साधते हुए गोहत्या पर एक सवाल पूछा गया. इसे लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है.

    बीते सात दिसंबर को एलएलबी की तीसरे सेमेस्टर की ‘लॉ ऑफ क्राइम्स’ के प्रश्न पत्र में सवाल आया था कि एक मुस्लिम व्यक्ति हिंदूओं के सामने गोहत्या करता है तो क्या यह एक अपराध होगा?

    सुप्रीम कोर्ट के वकील बिलाल अनवर ने बीते नौ दिसंबर को ट्विटर पर प्रश्न प्रत्र को साझा किया था. इसके बाद ही ये मामला लोगों के संज्ञान में आया.


    प्रश्न पत्र का सवाल था, ‘अहमद नाम का एक मुस्लिम बाजार में हिंदू व्यक्तियों रोहित, तुषार, मानव और राहुल के सामने गोहत्या करता है. क्या अहमद ने कोई अपराध किया है?’

    इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जब विवाद काफी बढ़ गया तो विश्वविद्यालय ने माफी मांगी और उस प्रश्न को हटाने का निर्णय लिया. विश्वविद्यालय ने ये भी कहा कि इस सवाल का नंबर नहीं जोड़ा जाएगा.

    वहीं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गोहत्या को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर रिपोर्ट मांगी है. इस सवाल को ‘निंदनीय’ और ‘सांप्रदायिक रंग’ वाला बताते हुए सिसोदिया ने उच्च शिक्षा सचिव को पांच दिन के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट जमा करने को कहा है.

    गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय ने भी इस मामले को देखने के लिए एक समिति गठित की. विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘इस मामले में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे परीक्षा प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा.’

    इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं.

    समाचार भाषा के इनपुट के साथ

  • मोदी हटाओ योगी लाओ’#योगी 4 PM’मोदी जुमले बाज Vs योगी हिंदुत्व के उप्र० मे लगे होर्डिंग्स

    पांच राज्यों में मिली बीजेपी को हार के बाद उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना ने मोदी हटाओ योगी लाओ की मांग उठाई है। संगठन की तरफ से लखनऊ में कई जगह ये होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इन होर्डिंग्स में योगी फॉर पीएम भी लिखा है।

    मिल्लत टाइम्स, लखनऊ: उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के नए हार्डिंगों पर विवाद पैदा हो गया है। लखनऊ में लगे इन हार्डिंगों में ‘योगी लाओ, देश बचाओ’ लिखा है। साथ ही 10 फरवरी 2019 को रमाबाई आंबेडकर मैदान में धर्म संसद आयोजित करने की बात कही गई है। हार्डिंगों में ‘जुमलेबाजी का नाम मोदी VS हिंदुत्व का ब्रांड योगी’ के साथ ‘हैशटैग योगी फॉर पीएम’ लिखा है। इसके साथ ही दोनों के किए गए कार्यों का विवरण हार्डिंगों में लिखा है। ये हार्डिंगों शहर में पांच राज्यों में बीजेपी की हार के बाद रातों-रात लगाए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी ने कहा कि अगर जनवरी तक राममंदिर और जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार ने कानून नहीं बनाया तो 10 फरवरी को रमाबाई आंबेडकर मैदान में हिंदुओं की धर्म संसद आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस धर्म संसद में लगभग पांच लाख हिंदू शामिल होंगे। धर्म संसद में मोदी बहिष्कार और योगी समर्थन को लेकर एक सुर में आवाज उठेगी।

    लखनऊ में लगे पोस्टर्स

    अमित जानी ने कहा कि पीएम मोदी के जुमलों से देश की हिन्दू जनता ऊब चुकी है। वह हिंदुओं के साथ धोखा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि पांचों राज्य में बीजेपी की करारी हार हुई है। उन्होंने दावा किया कि अगर आदित्यनाथ योगी बीजेपी के स्टार प्रचारक न होते और इन राज्यों में जाकर प्रचार नहीं करते तो बीजेपी का खाता भी नहीं खुलता।

    नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष ने कहा कि दो दिन पहले योगी ने बयान दिया था कि अगर उत्तर प्रदेश के हाथ में होता तो 24 घंटे में राम मंदिर बना देता। उन्होंने कहा कि मंदिर बनाने को लेकर कानून लाना केंद्र के हाथ में है और अब योगी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बौद्ध गुरु विराथु की तरह ही भविष्य में अगर भारत के हिंदुओं को कोई कश्मीरी पंडितों की भांति मरने कटने से बचा सकता है तो वह सिर्फ योगी आदित्यनाथ हैं।

    कौन हैं अमित जानी
    समाजवादी पार्टी में रहने अमित जानी 2012 में मायावती की मूर्ति तोड़कर रातों रात सुर्खियों में आए थे। लखनऊ में बीएसपी प्रमुख की मूर्ति तोड़ने के मामले में उन्हें जेल भेजा गया था। उनके ऊपर रासुका जैसी धारा भी लगाई गई थी। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर हो रहे हमलों को के बाद उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की तर्ज पर उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना का गठन किया था।

    मेरठ के रहने वाले अमित जानी के खिलाफ कई संगीन केस दर्ज हैं। उन्हें शिवसेना के कार्यालय में तोड़फोड़ करने, राहुल गांधी को काले झंडे दिखाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामलों में कई बार जेल भेजा जा चुका है। हाल ही में अक्टूबर महीने में उन्हें बिसाहड़ा गांव से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करके जेल भेजा गया था। उनके ऊपर बिना प्रशासन की अनुमति के बिसाहड़ा गांव में पंचायत करने के प्रयास का आरोप लगा था। पिछले साल अमित जानी ने आजम खां की जीभ काटने वाले को इनाम देने की घोषणा भी की थी।

    nbt के इनपुट के साथ

  • देश विभाजन के समय ही भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था:मेघालय हाईकोर्ट

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:मेघालय हाईकोर्ट ने देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व संसद से ऐसा कानून लाने की सिफारिश की है जिससे पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी, जयंतिया, खासी व गारो लोगों को बिना किसी सवाल या दस्तावेज के भारत की नागरिकता मिल सके। कोर्ट ने फैसले में यह भी लिखा है कि विभाजन से समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन हम धर्मनिरपेक्ष देश बने रहे।

    दरअसल अमन राणा नामक एक व्यक्ति ने एक याचिका दायर की थी जिसमें उसे निवास प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया गया था। इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया। कोर्ट के फैसले में जस्टिस एसआर सेन ने कहा कि उक्त तीनों पड़ोसी देशों में उपरोक्त लोग आज भी प्रताणित हो रहे हैं और उन्हें सामाजिक सम्मान भी प्राप्त नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि इन लोगों को कभी भी देश में आने की अनुमति दी जाए। सरकार इन्हें पुनर्वासित कर सकती है और भारत का नागरिक घोषित कर सकती है।
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    भारतीय इतिहास का किया उल्लेख
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय इतिहास को उल्लेखित करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश था। पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान का कोई वजूद नहीं था। ये सब देष एक थे और इनपर हिंदू साम्राज्य का शासन था। कोर्ट ने कहा कि मुगल जब यहां आए तो उन्होंने भारत के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया। इसी दौरान बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन हुए। इसके बाद अंग्रेज यहां आए और शासन करने लगे।

    भारत-पाक विभाजन के इतिहास के बारे में कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह एक अविवादित तथ्य है कि विभाजन के वक्त लाखों की संख्या में हिंदू व सिख मारे गए थे। उन्हें प्रताड़ित किया गया था और महिलाओं का यौन शोषण किया गया था। कोर्ट ने लिखा कि भारत का विभाजन ही धर्म के आधार पर हुआ था। पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था। ऐसे में भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था लेकिन, इसे धर्मनिरपेक्ष बनाए रखा गया।

    पीएम मोदी पर जताया भरोसा
    जज सेन ने मोदी सरकार को लेकर कहा कि वह भारत को मुस्लिम राष्ट्र नहीं बनने देंगे। उन्होंने लिखा कि किसी भी व्यक्ति को भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जज ने उच्च न्यायालय में केंद्र की सहायक सॉलिसीटर जनरल ए. पॉल को फैसले की प्रति प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह व विधि मंत्री को मंगलवार तक अवलोकन के लिए सौंपने व समुदायों के हितों की रक्षा की खातिर कानून लाने को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

    बता दें कि केंद्र के नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग छह साल भारत में रहने के बाद भारतीय नागरिकता के हकदार हैं, लेकिन अदालत के आदेश में इस विधेयक का जिक्र नहीं किया गया है।

    amar ujala, input ke sath

  • तीन साल मे तीसरे गवर्नर बने शक्तिकांत को मिली आरबीआई की जिम्मेदारी,

    मिल्लत टाइम्स,मुम्बई:आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव और वित्त आयोग के मौजूदा सदस्य शक्तिकांत दास (61) आरबीआई के नए गवर्नर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बुधवार को पद संभाल लिया। उनका कार्यकाल 3 साल के लिए होगा। शक्तिकांत दास आरबीआई के 25वें गवर्नर हैं। सरकार ने मंगलवार को उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था। उर्जित पटेल ने सोमवार को अचानक इस्तीफा दे दिया था।

    शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस हैं। साल 2015 से 2017 के बीच वो इकोनॉमिक अफेयर्स सेकेट्री थे। उन्होंने नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया था। शक्तिकांत दास ने पिछले साल ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों की मेथडोलॉजी पर भी सवाल उठाए थे।

    केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, शक्तिकांत दास को काफी शक्तिशाली माना जाता था। पिछले दिनों वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने ब्यूनस आयर्स भी गए थे। वो जी-20 में भारत के प्रतिनिधि हैं।

    3 साल में आरबीआई के 3 गवर्नर
    सरकार से विवादों की वजह से उर्जित पटेल ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने इस फैसले की वजह निजी बताई। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल नहीं देकर मोदी सरकार ने 4 सितंबर 2016 को उर्जित को गवर्नर नियुक्त किया था। 24वें गवर्नर के तौर पर पद संभालने वाले उर्जित का कार्यकाल 1992 के बाद सबसे छोटा रहा। उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा होने में 9 महीने बाकी थे।

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  • नितीश कुमार कि पार्टी जदयू का किसी भी राज्य मे नही खुला खाता,जमानत भी जब्त

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एक बार फिर से बिहार के बाहर अपनी साख बचान में नाकामयाब रही है. बिहार से बाहर चुनाव लड़ने का लगातार प्रयोग कर रही जेडीयू का प्रदर्शन इस बार भी सुपर फ्लॉप रहा है. मंंगलवार को आये चुनावी नतीजों में जेडीयू को खासी निराशा हाथ लगी है. पांच राज्यों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन दोनों जगह न सिर्फ उसकी करारी हार हुई बल्कि उसे मुंह की खानी पड़ी. राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है.

    राजस्थान में नहीं खुला खाता

    राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जेडीयू के किसी उम्मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है. जेडीयू ने राजस्थान में 12 उम्मीदवारों को उतारा था लेकिन सभी को हार मिली है. जेडीयू के राजस्थान अध्यक्ष दौलतराम पैसिया से लेकर सभी उम्मीदवार को हार नसीब हुई है. पैसिया को रतनगढ़ सीट पर महज 3387 वोट मिले हैं. जेडीयू को सबसे ज्यादा वोट बांसवाड़ा विधानसभा सीट से मिले हैं जहां उसके उम्मीदवार धीरजमल डिंडोर को 5009 वोट मिले. डेगाना सीट से रणवीर सिंह को 1737 वोट, घाटोल सीट से नाथूलाल सारेल को 912 वोट, बागीदौरा सीट से बालाराम पटेल को 1267 वोट, विद्याधर नगर से सुशील कुमार सिन्हा को 588 वोट, भीम-बालू सिंह रावत को 417 वोट, सुमेरपुर सीट से हेमराज माली को 1319 वोट, परबतसर सीट से किशनलाल को 281 वोट, मालवीय नगर से भगवान दास को 161 वोट तो झोटवाड़ा सीट से नटवरलाल शर्मा को 199 वोट और बगरू सीट से दौलत राम को 671 वोट मिले.

    छत्तीसगढ़ में सभी उम्मीदवारों की जमानत ज़ब्त

    छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है. जेडीयू ने यहां
    12 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था जिसमें से महज 2 उम्मीदवार ही हजार का आंकड़ा छू पाएं हैं. केसकाल सीट से विन्देश राणा को 2008 वोट, खुज्जी सीट से सुरेन्द्र सिंह को 438 वोट, कसडोल सीट से सहदेव दांडेकर को 440 वोट, बेमेतरा सीट से चुरामन साहू को 1713 वोट, साजा सीट से रोहित सिन्हा को 204 वोट, जांजगीर चंपा सीट से शिवभानु सिंह को 219 वोट, पामगढ़ सीट से नन्द कुमार चौहान को 378 वोट, मनेन्द्रगढ़ सीट से फ्लोरेंस नाईटटिंगल सागर को 361 वोट, रायपुर दक्षिण सीट से जागेश्वर प्रसाद तिवारी को 80 वोट, बेलतरा सीट से रमेश कुमार साहू को 363 वोट, कुरूद सीट से रघुनंदन साहू को 347 वोट और प्रेमनगर सीट से मालती बिहारी राजवारे को 608 वोट मिले हैं.

    ये पहला मौका नहीं है जब नीतीश कुमार ने बिहार के बाहर के चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में भी नीतीश कुमार ने जेडीयू के उम्मीदवारों को उतारा था लेकिन वहां भी उनके प्रत्याशियों की जमानत ज़ब्त हो गई थी. राजस्थान चुनाव को लेकर जेडीयू ने बड़े दावे किए थे और नीतीश के करीबी माने जाने वाले संजय झा को राजस्थान में जेडीयू का प्रभारी बनाया गया था लेकिन वो भी कोई करिश्मा नहीं कर सके.