Category: देश

  • श्मशान घाट की जमीन अपने नाम कराने पर, साक्षी महाराज के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी,

    बता दें कि साल 2012 में बीजेपी सांसद सहित मुकेश कुमार, जय प्रकाश, चोखेलाल, प्रेम सिंह ने साजिश करके श्मशान की जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया था. मामले की रिपोर्ट जबर सिंह ने एटा के थाना कोतवाली नगर में दर्ज कराई थी.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के खिलाफ एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है. ये वारंट धोखाधड़ी से श्मशान घाट की जमीन का बैनामा अपने नाम कराने, न्यायिक कार्य में सहयोग न करने और अदालत में हाजिर न होने के मामले में कोर्ट की तरफ से जारी किया गया है. इस मामले में पांच अन्य लोगों के खिलाफ भी कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है. इस मामले की सुनवाई 12 मार्च 2019 को होगी.

    बता दें कि साल 2012 में बीजेपी सांसद सहित मुकेश कुमार, जय प्रकाश, चोखेलाल, प्रेम सिंह ने साजिश करके श्मशान की जमीन का बैनामा अपने नाम करा लिया था. मामले की रिपोर्ट जबर सिंह ने एटा के थाना कोतवाली नगर में दर्ज कराई थी.

    पुलिस ने जांच के बाद इस मामले की रिपोर्ट और आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया. आरोप पत्र दाखिल होने के बाद न्यायधीश ने पाया कि इसमें सभी नामजद लोगों पर अभी आरोप तय होने हैं और ये लोग कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं. इसके बिना पर विशेष न्यायधीश ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है.

    बता दें कि बीजेपी सांसद साक्षी महाराज अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा रहते हैं. पिछले साल उन्होंने कहा था कि कब्रिस्तान बनना ही नहीं चाहिए. अगर कब्रिस्तानों में हिंदुस्तान की सारी की सारी जमीन चली जाएगी तो खेती-खलिहान कहां होंगे?

    बीजेपी सांसद ने कहा था कि चाहे नाम कब्रिस्तान हो चाहे शमशान हो. सबका दाह संस्कार ही होना चाहिए. उनका कहना था कि किसी को गाड़ने की आवश्यकता ही नहीं है. दुनिया के बाकी मुस्लिम देशों में शवों को जलाया जाता है. उन्हें जमीन में नहीं गाड़ा जाता.

    साक्षी महराज का कहना था कि देश में ढ़ाई करोड़ साधू हैं अगर सबकी समाधी बनेगी तो कितनी जमीन जाएगी. वहीं 20 करोड़ मुस्लिम हैं. अगर सबको कब्र चाहिए तो हिन्दुस्तान में जगह कहां मिलेगी.

  • सरकार देना चाहती है 15-15 लाख लेकिन RBI पैसे नहीं दे रहा: रामदास अठावले

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: अपने बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय मंत्री रामदास अठालवे ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसकी चर्चा जोर शोर से हो रही है. अठावले ने कहा है कि मोदी सरकार तो 15 लाख देना चाहती है लेकिन आरबीआई पैसा नहीं दे रहा है.

    अठावले ने कहा, ”एक दम 15 लाख नहीं होंगे लेकिन धीरे धीरे मिलेंगे. इतनी बड़ी रकम सरकार के पास नहीं है. हम आरबीआई से मांग रहे हैं लेकिन वो दे नहीं रहे. इसमें तकनीकी समस्याएं हैं. यह एक साथ नहीं हो पाएगा, लेकिन धीरे-धीरे हो जाएगा.”

    अठावले ने प्रधानमंत्री मोदी की भी जमकर तारीफ की और विपक्ष पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ”नरेंद्र मोदी बहुत एक्टिव प्रधानमंत्री हैं. राफेल के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दी है. इससे जुड़े सभी दस्तावेज जमा कर दिए गए हैं. विपक्षियों के पास कोई मुद्दा नहीं है, तीन चार महीने में सबकी हवा निकल जाएगी. नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनेंगे.”

    हाल ही में कहा था- राहुल गांधी अब पप्पू नहीं, पापा बनना चाहिए.
    इससे पहले तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत की बाद राहुल गांधी की ‘तारीफ’ की थी. अठावले ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष अब एक परिपक्व नेता बन गए हैं. अठावले ने कहा, “‘राहुल गांधी को पप्पू बोलते थे लेकिन मेरा ये सुझाव उनको है कि पप्पू नहीं आपको पापा होना चाहिए और पापा होने के लिए जल्दी शादी करनी चाहिए, आपको तीन राज्यों में सफलता मिली है. राहुल गांधी जल्दी शादी करें और पापा बनने के काम करें.”

    एबीपी के इनपुट के साथ

  • कमलनाथ ने सीएम बनते ही,कहा बिहार और यूपी से आए लोगों के कारण MP वालों को नहीं मिलता रोजगार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली : मध्यप्रदेश में सीएम की शपथ लेते हैं कमलनाथ ने एक विवादित बयान दे दिया है उन्होंने कहा है कि बिहार और यूपी से आए हुए लोगों के कारण यहां रोजगार नहीं मिल पाता है इस विवादित बयान पर लोगों मे काफी गुस्सा है बिहार और यूपी के लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है

    कर्जमाफी चुनावों के दौरान मुद्दा बनी मगर कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद जो बात सुर्खियां बटोर रही है वो है उद्योगों को दिए जाने वाले अनुदान को लेकर नई सरकार की नीति। सत्ता संभालने के साथ ही कमलनाथ ने घोषणा की कि सरकार की ओर से अनुदान केवल उन्हीं उद्योगों को दिया जाएगा जिनमें 70 फीसदी स्थानीय लोग कार्यरत होंगे।

    मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद मीडिया से रू-ब-रू हुए कमलनाथ ने कहा कि सरकार की ओर से केवल उन्हीं उद्योगों को अनुदान दिया जाएगा जिनसे मध्यप्रदेश के स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग रोजगार के लिए यहां आते हैं, जिस वजह स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता। कमलनाथ ने कहा कि हमने अनुदान को लेकर यह फैसला इसलिए लिया है ताकि स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। नवनियुक्त मुख्यमंत्री ने चार वस्त्र पार्क (गारमेंट पार्क) खोलने की भी घोषणा की।

    कार्यभार संभालने के चंद घंटों में ही कमलनाथ ने राहुल गांधी के कर्जमाफी के एलान को पूरा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर पहली फाइल जिसपर मैंने दस्तखत किए वो किसानों के कर्जमाफी की है, जिसका वादा हमने अपने वचनपत्र में किया था। बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बनने के 10 दिनों में कर्जमाफी का वादा किया था।

    कांग्रेस सरकार ने एक अध्यादेश जारी करके सरकारी और सहकारी बैंकों से 31 मार्च 2018 तक किसानों के 2 लाख तक के सभी कर्ज को माफ करने का आदेश जारी किया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कम से कम 34 लाख किसानों को इसका फायदा होगा और सरकार पर 34 से 38 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि जब बैंक बड़े उद्योगपतियों का 40 से 50 फीसदी कर्ज माफ कर देते हैं तो कोई कुछ नहीं कहता मगर जब किसानों के कर्ज माफ होते हैं तो सवाल उठते हैं। सरकार ने कन्यादान योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि को भी बढ़ाकर 28 हजार से 51 हजार कर दिया है।

    आरएसएस की शाखाओं को सरकारी संस्थानों में प्रतिबंधित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह आदेश केंद्र और गुजरात सरकार की तर्ज पर लिया गया है और इसमें कुछ भी नया नहीं है।

  • बहुजन आंदोलन को मजबूत कर मोदी को वापस गुजरात भेजेंगे’सिर्फ दलित नहीं OBC समेत 85 फिसदी लोग मेरे साथ:चंद्रशेखर

    आजाद ने कहा कि सिर्फ दलित नहीं बल्कि ओबीसी समेत 85 फीसदी तबका उनकी बात सुनता है. उन्होंने कहा कि हमने बिजनौर, गुजरात में मुस्लिमों के साथ बैठक की. ओबीसी समाज की रैली भी की है, तो ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ एक ही तबके की बात कर रहे हैं.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: भीम आर्मी के सहसंस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने आजतक के एक प्रोग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि उनका मकसद है कि वह बहुजन मूवमेंट को इतना मजबूत कर देंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वापस गुजरात भेज देंगे.

    उन्होंने कहा कि मैं राजनीति नहीं कर रहा हूं, ना ही राजनीति में आ रहा हूं. लेकिन मेरे ऊपर कई तरह के आरोप लग रहे हैं, आरोप तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पर राफेल को लेकर आरोप लग रहे हैं. हम पूरे देश में बहुजन आंदोलन को इतना मजबूत करेंगे कि 2019 में नरेंद्र मोदी को वापस गुजरात भेज देंगे.

    आजाद ने कहा कि सिर्फ दलित नहीं बल्कि ओबीसी समेत 85 फीसदी तबका उनकी बात सुनता है. उन्होंने कहा कि हमने बिजनौर, गुजरात में मुस्लिमों के साथ बैठक की. ओबीसी समाज की रैली भी की है, तो ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ एक ही तबके की बात कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि अब मैं महाराष्ट्र जा रहा हूं, वहां भीमा कोरेगांव जाऊंगा. कुछ लोग मुझे जाने से रोक रहे हैं, लेकिन फिर भी जाएंगे. हम लाठी खाएंगे, जेल जाएंगे लेकिन अपनी बात पूरी करवाएंगे.

    आजाद ने कहा कि वह अभी राजनीति में नहीं आएंगे, लेकिन देश के हर हिस्से में जाएंगे. लोगों को जागरूक करेंगे, ताकि आने वाले आंदोलन के लिए लोगों को तैयार किया जाए. उन्होंने कहा कि मैं तेजस्वी यादव की पार्टी, समाजवादी पार्टी, आरएलएसपी, बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों से बात करेंगे और उन्हें मजबूत करेंगे.

  • कश्मीरी नागरिकों की मौत पर जश्न मनाने वाले मेरे सेक्युलरिज़्म के ठेकेदारों आपका बहुत बहुत शुक्रिया:डॉ० उमर फारूक अफ़रीदी

    चंद दिनों पहले की बात है जब इज़राइल में आम आदमी पार्टी की विधायक “अलका लांबा” और समाजवादी पार्टी की पूर्व प्रवक्ता “पंखुड़ी पाठक” जी सेक्यूलरिज़्म की मूल शिक्षा को अर्जित करने गयी थी जिसमें सेक्युलरिज़्म के कई बहुत सारे और भी महारथी थे जो सब मिलकर भारत की गंगा जमुना तहज़ीब इज़राइल में जाकर बचाने की शिक्षा लेकर आये थे उनके नाम क्रमशः ये थे..

    अनिल यादव राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा,
    वाहिद पारा राष्ट्रीय प्रवक्ता PKP
    पवन खेड़ राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस
    पंखुरी पाठक राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा
    बाबू मुरुगावेल प्रवक्ता AIAMK
    डा. राजू वाघमारे प्रवक्ता कांग्रेस
    अलका लाम्बा विधायक आप,
    रितेश पांडेय विधायक, बसपा
    अदिति सिंह विधायक एन.सी.पी
    धनञ्जय मुंडे एमएलसी, कांग्रेस
    अमृता धवन पूर्व अध्यक्ष एनएसयूआई

    इस लिस्ट में
    श्वेता शालिनी प्रवक्ता भाजपा
    शज़िया इल्मी राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा
    विकास पांडेय संस्थापक आई सपोर्ट नमो का भी नाम है पर वे तो घोषित कम्यूनल हैं ही,

    हाल ही सेक्युलरिज़्म की चैंपियन अलका लांबा के द्वारा कश्मीरी नागरिकों की हत्या पर आए ट्वीट को देखने के बाद मुझे इस बात से क़तई कोई हैरत नहीं हुई कि वो कश्मीरी मुस्लिमों की हत्या पर अपनी विचारधारा को खुलकर स्प्ष्ट कर रही हैं , बस मायूस इस बात से हूँ कि ये सब जानने के बावजूद अपनी आंखों पर पट्टी बांधे वो मुस्लिम नौजवान जो इनके पीछे अपनी जवानियों को बर्बाद किये जा रहे हैं क्या वे अब भी इन कथित सेक्युलरिज़्म की खाल ओढ़े बागड़ बिल्लों की खुली असलियत देखकर भी अपनी आंखों पर पड़े पर्दे को उठा पाएंगे और क्या वो इस बात को अब भी समझ पाएंगे इज़राइल का जो यार है वो कैसे तुम्हारा दोस्त और अलम्बरदार है?

    शाबाश अलका और सेक्युलरिज़्म के महारथियों हम अंधों को आंखे देने के लिए बाक़ी बस अब ईश्वर से प्राथना है कि काश वो हमारी क़ौम को तुम्हारी दी हुई इन आँखों मे वो बीनाई दे सके जिससे हम वो सब देख सकें जिससे अब तक महरूम हैं !!

    बाक़ी कश्मीरी नागरिकों की मौत पर जश्न मनाने वाले मेरे सेक्युलरिज़्म के ठेकेदारों आपका बहुत बहुत शुक्रिया !!
    #काॅलम_निगार
    डा○ उमर फारूक़ आफरीदी

  • राम मंदिर पर भाजपा बिल लाई तो अदालत में देंगे चुनौती: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

    मिल्लत टाइम्स: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को कहा कि सरकार द्वारा अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिये अध्यादेश लाये जाने और तीन तलाक पर संसद में कानून बनाए जाने की स्थिति में वह उन्हें अदालत में चुनौती देगा। बोर्ड ने यह भी कहा कि मंदिर के लिये कानून बनाने की मांग कर रहे कुछ हिन्दूवादी संगठनों के भड़काऊ बयानों पर सरकार रोक लगाये और और उच्चतम न्यायालय उनका संज्ञान ले।

    बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की यहां हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य कासिम रसूल इलियास ने बताया कि केंद्र सरकार तीन तलाक पर अध्यादेश लाई है। इसकी मियाद छह महीने होगी। अगर यह गुजर गई तो कोई बात नहीं लेकिन अगर इसे कानून की शक्ल दी गई, तो बोर्ड इसको उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा।

    उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश मुस्लिम समाज से सलाह-मशवरा किए बगैर तैयार किया गया है और अगर सरकार इसे संसद में विधेयक के तौर पर पेश करेगी तो बोर्ड की समिति सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से गुजारिश करेगी कि वे इसे पारित ना होने दें। इलियास ने बताया कि बोर्ड का स्पष्ट रुख है कि वह बाबरी मस्जिद मामले में अदालत के अंतिम फैसले को स्वीकार करेगा।

    बैठक में यह भी राय बनी कि सरकार मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश या कानून लाने की मांग के साथ दिए जा रहे जहरीले बयानों पर रोक लगाए और उच्चतम न्यायालय भी इसका संज्ञान ले। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने इस मौके पर कहा कि अयोध्या के विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रहने की स्थिति में कानूनी तौर पर कोई अध्यादेश नहीं लाया जा सकता।

    यही वजह है कि सरकार ने यह रुख दिखाया है कि वह अध्यादेश नहीं लाएगी। अगर कोई अध्यादेश आता भी है तो वह कानूनन सही नहीं होगा और बोर्ड उसको चुनौती देगा।

    इस सवाल पर कि बोर्ड मंदिर बनाने के लिए विश्व हिंदू परिषद तथा अन्य कुछ संगठनों द्वारा विभिन्न आयोजन करके सरकार पर दबाव बनाए जाने की आड़ में दिये जा रहे भड़काऊ बयानों की शिकायत उच्चतम न्यायालय से क्यों नहीं करता, जीलानी ने कहा कि यह हमारे लिये मुनासिब नहीं है।

    हमारा मानना है कि जो लोग इस तरह के बयान दे रहे हैं उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई करे और उच्चतम न्यायालय भी इसका संज्ञान ले। उसके लिये उपाय सोचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि राम जन्मभूमि आंदोलन किसी पार्टी का कार्यक्रम हो सकता है, किसी सरकार का नहीं, क्योंकि हुकूमत धर्मनिरपेक्षता से आबद्ध है।

    जीलानी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में इस्माइल फारूकी मामले पर निर्णय के दौरान कहा गया है कि इस फैसले का असर अयोध्या मामले पर नहीं पड़ेगा। बोर्ड ने इसका स्वागत किया है। विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े मुकदमे की सुनवाई अब शुरू होनी है।

    अदालत यह कह चुकी है कि वह इस मसले का आस्था के आधार पर नहीं बल्कि जमीन पर मालिकाना हक के मुकदमे के तौर पर निर्णय करेगी। इलियास ने बताया कि बैठक में बोर्ड की दारुल कजा कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि इस साल देश में 14 नई दारुल कजा का गठन किया गया है।

    इस महीने के अंत तक कुछ और स्थानों पर भी इन्हें कायम किया जाएगा। दारुल कजा में कम वक्त में जायदाद, वरासत और तलाक जैसे मामलों का निपटारा किया जाता है। इससे बाकी अदालतों के बोझ को कम करने में मदद मिलती है।

    उन्होंने बताया कि बैठक में यह फैसला किया गया है कि दारुल कजा के अब तक दिये गये फैसलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा ताकि अदालत के बोझ को कम करने में दारुल कजा के योगदान को दुनिया के सामने लाया जा सके।

  • भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन

    मेघालय हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने सफाई दी है कि भारत का संविधान धर्म निरपेक्षता की बात करता है और देश का बंटवारा धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: जस्टिस सेन ने 14 तारीख को अपने आदेश से जुड़ी सफाई जारी की जिसमें उन्होंने लिखा, “धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के मूल स्तंभों में है और मेरे आदेश को किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा या उसके संदर्भ में नहीं समझा जाना चाहिए.”

    इससे पहले 10 दिसंबर को नागरिकता सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के बाद उन्होंने जो आदेश दिया उसमें उन्होंने लिखा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए था.

    आदेश में लिखा था, “आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था. पाकिस्तान ने स्वयं को इस्लामिक देश घोषित किया और इसी तरह भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन ये एक धर्मनिरपेक्ष देश बना रहा.”

    जस्टिस सेन के आदेश को लेकर विवाद छिड़ा और कई हलकों में इसकी आलोचना हुई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा कि ये संविधान की अवधारणा के विपरीत है.

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    दलित नेता जिन्नेश मेवाणी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इसकी आलोचना की.
    जिन्नेश मेवाणी ने कहा कि इससे साफ संदेश मिल रहा है कि सिर्फ़ एक तबके के लोगों के लिए ही न्याय है. प्रशांत भूषण ने कहा कि इस तरह के बयानों से न्यायपलिका पर लोगों का भरोसा कम होगा.

    ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत विभिन्न संप्रदायों के लोगों से मिलकर बना एक देश है जो कभी इस्लामिक राष्ट्र नहीं बनेगा.

    इस मुद्दे पर संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी का कहना है कि जस्टिस सेन का आदेश भारत के संविधान का उल्लंघन है. पढ़िए, उनका नज़रिया –
    जस्टिस सेन ने 10 दिसंबर को दिए अपने आदेश में भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन किया था. इसके बाद उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी दी है लेकिन उनका आदेश दो तरीके से भारतीय संविधान का उल्लंघन है.

    पहला तो ये कि संविधान की प्रस्तावना में ही ये घोषणा की गई है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है. जस्टिस सेन के सामने हमेशा ही ये रास्ता खुला है कि वो अपने पद से इस्तीफ़ा दें और उसके बाद भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन करें.

    एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन होकर (एक बेंच का हिस्सा होते हुए) वो इस तरह की बात नहीं कर सकते क्योंकि अगर वो न्यायपालिका में किसी भी पद पर काम करना स्वीकार करते हैं तो वो पहले ये शपथ लेते हैं कि वो संविधान का पालन करेंगे.

    दूसरा ये कि उनका शपथ लेकर अपने पद पर काम करना उन्हें इस बात कि बाध्य करता है लोगों में भेदभाव ना करें और सभी से समान व्यवहार करें.

    जज की परिभाषा के आधार पर देखें तो अगर एक जज हिंदू राष्ट्र के हिमायती हैं तो वो पक्षपात कर रहे हैं.
    क्या ग़लत किया जज ने
    वो इस तथ्य से कतई अनजान नहीं हो सकते कि ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर राजनीतिक पार्टी बीजेपी और अन्य पार्टियों में मतभेद हैं. एक तरफ जहां बीजेपी हिंदुत्व की समर्थक है अन्य पार्टियां इसके विरुद्ध खड़ी हैं.

    अपने बयान के कारण वो आज उसी जगह पर हैं जिसके बारे में एक बार ब्रितानी जज जस्टिस लॉर्ड डैनिंग ने कहा था कि “मैदान में उतरे भी और फिर विवाद की वजह से उड़ रही धूल से अंधे भी हो गए.”

    उनके ख़िलाफ़ महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए या नहीं ये और बात है लेकिन इसमें दोराय नहीं कि उन्होंने उन लोगों का भरोसा खो दिया है जो संविधान पर भरोसा करते हैं. हालांकि ये उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके ख़िलाफ महाभियोग लाया जाएगा.

    मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं. 1981 में कोलंबिया की सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस टॉमस बर्गर को उनके पद से हटा दिया गया था. देश के वरिष्ठ 27 जजों वाली कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल ने फ़ैसला सुनाया, “राजनीतिक मसलों से संबंधित ऐसे मामलों पर जस्टिस बर्गर का अपनी राय रखना अविवोकपूर्ण था जिन पर पहले ही विवाद है.”

    इस मामले का जिक्र कई बार अदालतों में किया जाता है.
    हिंदू राष्ट्र पर जस्टिस सेन का हालिया बयान इसी वाकये की श्रेणी में सटीक बैठता है. ख़ास कर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि जस्टिस सेन ने ना तो इसके लिए सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल क्या ना ही छिपे शब्दों में ऐसा कुछ कहा. उन्होंने साफ तौर पर अपने शब्दों में हिंदू राष्ट्र की हिमायत की.

    ‘राष्ट्र सर्वोच्च है और राष्ट्र का नाम हिंदू राष्ट्र है’
    क्या सनातन संस्था ‘उग्र हिंदुत्व’ की वर्कशॉप है?
    कनाडा के चीफ़ जस्टिस से जस्टिस टॉमस बर्गर के ख़िलाफ़ शिकायत कनाडा फेडेलर कोर्ट के एक दूसरे जज ने थी. ये जज कनाडाई ज्यूडिशियल कमिटी के चेयरमैन थे.

    जस्टिस सेन के बयान से नाराज़गी इस उदाहरण के मद्देनज़र समझी जा सकती है.
    न्यायपालिका से संबंधित क़ानून (जजेस एक्ट) के तहत कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल का गठन किया गया था. ये दुर्भाग्य की बात है कि भारत में जजों के लिए इस तरह की कोई अनुशासनात्मक समिति नहीं है.

    और रह बात भारतीय जजों की तो वो अपनी ताकत, अथॉरिटी और सम्मान को ले कर कभी-कभी संवेदनशील हो जाते हैं.
    जस्टिस बर्गर ने खुद के बचाव की कोशिश की थी. उनका कहना था, “जो मैंने किया वो अपारंपरिक था लेकिन ये किसी भी मायने में राजनीति की तरफ इशारा नहीं था.”

    उनकी इस दलील को बेतुकी माना गया था और सभी ने से खारिज कर दिया था. उन्होंने कई मामलों का ज़िक्र करकते हुए इस पर लंबी दलील दी थी लेकिन उसे माना नहीं गया.

    ज्यूडिशियल काउंसिल ने इस मामले में जांच करने के लिए जीन जजों की एक समिति बनाई. इस समिति की रिपोर्ट मे कहा गया, “कानून के इतिहास से जो सिद्धांत उभरता है वो ये है कि राजनीतिक और क़ानूनी दायरे अलग हैं और इन्हें स्पष्ट रूप से अलग ही रहना चाहिए और संसदीय लोकतंत्र का इस मौलिक आधार का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए.”

    क्या ये दलील भारतीय जज पर भी लागू नहीं की जानी चाहिए?
    सफ़ाई स्वीकार्य नहीं
    समिति का कहना था, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों को अलग करने के लिए किए गए लंबे संघर्ष का इतिहास ये बताता है कि न्यायाधीशों को राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए. साथ ही राजनेताओं को न्यायिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए.”

    “इसके साथ ही ये महत्वपूर्ण है कि न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर लोगों का विश्वास कायम रहे.”

    जस्टिस बर्गर के केस में रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए अपने कार्यालय को इस्तेमाल किया.

    सार ये है कि इस ऐतिहासिक मामले का हर शब्द टिप्पणी करने वाले हाई कोर्ट के जज पर भी लागू होता है.
    रिपोर्ट में कहा गया, “जज का यह तर्क या बहाना स्वीकार्य नहीं है कि उसने अंतरात्मा के आधार पर कोई बात कही. हर राजनीतिक विषय पर जजों के अपने निजी विचार हो सकते हैं. अगर जस्टिस बर्गर के विचारों का स्वीकार किया जाए तो हो सकता है बाक़ी जज ऐसे बयान देने लगेंगे जो एक-दूसरे से अलग होंगे.”

    अगर जज एक-दूसरे से सार्वजनिक तौर पर बहस करने लगेंगे तो जनता के मन में उनके प्रति सम्मान पर क्या असर होगा?
    ऊपर से राजनेता और मीडिया ख़ामोश नहीं रहेंगे. वे भी अखाड़े में कूद पड़ेंगे जज को अपने बयान की सफ़ाई में इस तरह से उतरना पड़ेगा मानो वह ख़ुद उस विवादित विषय में एक पक्ष हों.

    ऐसे में इस मामले (मेघालय हाई कोर्ट के जज वाले) में अगर कुछ नहीं होता है तो न्यायिक स्वतंत्रता और मर्यादा को नुक़सान पहुंचेगा. ऐसा होने से रोकना है तो किसी को सुप्रीम कोर्ट जाना होगा और मांग करनी होगी कि ग़लती करने वाले इस जज के संबंध में उचित क़दम उठाए जाएं.

    सभी को करनी चाहिए आलोचना
    साथ ही बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया को बोलना चाहिए. अफ़सोस है कि मीडिया इस विषय पर ख़ामोश है. मीडिया, बार और बेंच को इसकी निंदा करनी चाहिए.

    अगर कोई जज किसी महत्वपूर्ण विषय पर अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को अनसुना नहीं कर पा रहा है और उसे लगता है कि उसे इस विषय में बोनला चाहिए तो उसे जज के तौर पर बात नहीं करनी चाहिए.

    अगर वह चाहता है कि किसी तरह का विवाद खड़ा न हो तो उसे इस्तीफ़ा देना चाहिए और फिर अखाड़े में उतरना चाहिए ताकि बाद में न्यायपालिका के बजाय बात उसी पर आए.

    ऐसे में इन जज को शालीनता से पद छोड़ देना चाहिए. जो कुछ उन्होंने कहा है, उनके शब्दों ने उन्हें हाई कोर्ट बेंच में बने रहने लायक नहीं छोड़ा है.

    उन्होंने 14 दिसंबर को अपने बचाव में जो बातें कहीं, उनका भी कोई मतलब नहीं है. हिंदू राष्ट्र की वकालत करने का मतलब यह कहना है कि संविधान ग़लत है.

    ऐसा ही आरएसएस कहता है कि ये संविधान तो अंग्रेज़ी है और हमारा अपना स्वदेशी संविधान होना चाहिए.

    इस विषय में डॉक्टर बीआर आंबेडकर की वह बात याद आती है जो उन्होंने ‘पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ़ इंडिया में लिखी थी- “हिंदू राष्ट्र बनना भारत के लिए विनाशकारी होगा.”

  • मप्र:कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनते हैं किसानों का कर्ज किया माफ शुरू हो गई अपने वादों को निभाने की शुरुआत

    मप्र:कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनते हैं किसानों का कर्ज किया माफ शुरू हो गई अपने वादों को निभाने की शुरुआत

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद कमलनाथ एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने किसानों की कर्ज माफी वाली फाइल पर साइन कर दिए हैं। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने दी। बता दें कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी करने का वादा किया था।


    इससे पहले सोमवार दोपहर को कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने सोमवार दोपहर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें शहर के जम्बूरी मैदान में एक भव्य समारोह में शपथ दिलाई

    कमलनाथ ने हिन्दी में शपथ ली और अकेले शपथ ग्रहण किया। उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंच पर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हर्षोउल्लस के साथ जमकर नारे लगाये।

    शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित संप्रग के कई दिग्गज नेता मौजूद थे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी, द्रमुक नेता एम के स्टालिन, तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, नेशनल कांफ्रेस के नेता फारूख अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी शामिल हैं। कार्यक्रम में बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी आना था लेकिन किन्हीं कारणों से दोनों नहीं आ सके।

  • राजस्थान:अशोक गहलोत मुख्यमंत्री तथा सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री बने’राज्यपाल कल्यान सिंह ने दिलाई शपथ

    अशोक गहलोत के अलावा मध्य प्रदेश मे कमलनाथ तो छत्तीसगढ़ मे भूपेश बघेल भी आज लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली : कांग्रेस के लिए आज अहम दिन है। आज कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्री शपथ ले रहे हैं। सबसे पहले आज सुबह तकरीबन 11 अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री और सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली।

    अशोक गहलोत और सचिन पायलट को राज्य के राज्यपाल कल्याण सिंह ने पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। इसके बाद तकरीबन 1 बजे कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। उसके बाद तकरीबन 4.30 बजे भूपेश बघेल में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे।

  • AIMIM ने तेलंगाना विधानसभा के लिए अकबरुद्दीन ओवैसी को चुना सदन का नेता,दी बड़ी जिम्मेदारी।

    एआईएमआईएम की कार्यकारी समिति ने पार्टी अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में यहां पार्टी मुख्यालय, दारुल इस्लाम में अकबरुद्दीन को फ्लोर नेता के रूप में निर्वाचित किया.

    (AIMIM के कद्दावर नेता अकबरूद्दीन ओवैसी)

    मिल्लत टाइम्स,हैदराबाद: अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने पांच बार के विधायक अपनी पार्टी के कद्दावर नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को तेलंगाना विधान सभा में पार्टी के फ्लोर लीडर के रूप में चुना है. एआईएमआईएम की कार्यकारी समिति ने पार्टी अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में यहां पार्टी मुख्यालय, दारुल इस्लाम में अकबरुद्दीन को फ्लोर नेता के रूप में निर्वाचित किया.

    अकबरुद्दीन ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में लगातार पांचवी बार चंद्रयान विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की. वो 1999 से लगातार इस सीट से चुनाव जीत रहे हैं. हाल के चुनाव परिणामों में सत्तारूढ़ टीआरएस ने कुल 119 सीटों में से 88 जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस ने 19 सीटें और एआईएमआईएम 7 सीटें जीतीं.

    तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने 13 दिसंबर को दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. प्रदेश के राज्यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.