Category: देश

  • हिजाब पहनकर परीक्षा देने गई छात्रा सौदागर को,अधिकारियों ने नहीं देने दिया परिक्षा,जबकि ड्रेस कोड का नहीं था कोई कंडिशन

    तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है

    छात्रा ने कहा कि ऐसा करना उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ है इसलिए अधिकारियों से हिजाब हटाने के लिए इनकार कर दिया।…

    मिल्लत टाइम्स: गोवा के पणजी में मंगलवार (18 दिसंबर) को एक 24 वर्षीय छात्रा को हिजाब पहनकर राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (एनईटी) में नहीं बैठने दिया गया। पीटीआई की खबर के मुताबिक छात्रा ने आरोप लगाया कि उसने हिजाब हटाने से इनकार कर दिया तो अधिकारियों उसे परीक्षा नहीं देने दी। अधिकारियों का कहना है कि नकल रोकने और सुरक्षा के लिहाज से हिजाब या अन्य सामान के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं है। सफीना खान सौदागर नाम की छात्रा ने आरोप लगाया कि जब वह 18 दिसंबर को पणजी के परीक्षा केंद्र पर पहुंची तो पर्यवेक्षक ने उससे हिजाब हटाने को कहा। सौदागर ने मीडिया को बताया कि जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो उसे टेस्ट नहीं देने दिया गया। बता दें कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर की लेक्चरशिप और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एनईटी आयोजित कराता है। सौदागर ने बताया कि मंगलवार को 1 बजे जब उम्मीदवारों की पहचान पत्र जांचने की प्रक्रिया शुरू हुई, उसी वक्त वह परीक्षा केंद्र पहुंची थीं और पक्ति में खड़ी हो गई थीं।

    छात्रा ने कहा, ”जब मैं निरीक्षण अधिकारी के पास पहुंची तो उन्होंने मेरे दस्तावेज देखे, उन्होंने मुझे देखा और हिजाब के साथ मुझे परीक्षा हॉल में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, यह कहते हुए इसे हटाने को कहा।” छात्रा ने कहा कि ऐसा करना उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ है इसलिए अधिकारियों से हिजाब हटाने के लिए इनकार कर दिया। छात्रा ने कहा, ”वह मुझसे तर्क करने लगे और उनके आगे खड़ी महिला अधिकारी से परामर्श लिया।” सौदागर ने बताया कि तब पुरुष पर्यवेक्षक ने उनसे उनके कान दिखाने के लिए कहा जिससे फोटोग्राफ में पहचान की पुष्टि हो सके।

    छात्रा ने कहा, ”आखिर में मैं अपने कान दिखाने के लिए राजी हो गई और अधिकारियों से कहा कि वे मुझे वॉशरूम का रास्ता बता दें ताकि फिर से हिजाब को एडजस्ट कर सकूं। उन्होंने मुझे वॉशरूम का रास्ता बताने से मना कर दिया।” सौदागर ने कहा कि जैसा कि यह उनके इस्लामिक विश्वास के खिलाफ है, उन्होंने सार्वजनिक जगह पर हिजाब उतारने से मना कर दिया। छात्रा ने बताया कि जब उसे हिजाब या परीक्षा में से एक को चुनने के लिए कहा गया को उसने अपने धार्मिक विश्वास के आगे अकादमिक नुकसान को चुना।

    सौदागर ने बताया कि परीक्षा के लिए अप्लाई करते वक्त उन्होंने वेबसाइट पर जाकर ड्रेस कोड के बारे में भी पता किया था लेकिन वहां हिजाब या किसी तरह के ड्रेस कोड के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। पणजी में हायर एजुकेशन के डायरेक्टोरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परीक्षा में नकल रोकने या सुरक्षा के लिहाज से हिजाब ही नहीं, यहां तक की मंगलसूत्र या किसी तरह की एक्सेसरी ले जाने की अनुमति नहीं है। अधिकारी ने कहा कि यूजीसी के द्वारा परीक्षा पारदर्शिता से कराने के लिए लिए बड़ी सख्त गाइडलाइंस हैं और अधिकारियों ने वैसा ही किया

  • झारखंडःइम्तियाज कि हत्या कर शव पेड़ से लटकाने के मामले में आठ’गौ रक्षक’दोषी करार,हो सकती है फांसी या उम्रकैद

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: देश में लगातार गौ रक्षकों द्वारा लोगों की हत्या की जा रही है जिसमें एक मामला झारखंड का भी है जिसमें इम्तियाज की हत्या कर के पेड़ पर लटका दिया गया था अब अदालत ने उसपर सुनवाई पूरी कर ली है और आठ लोगों को दोषी करार दे दिया है

    झारखंड के चर्चित पशु व्यापारी हत्याकांड में लातेहार ज़िले की एक अदालत ने आठ गौ रक्षकों को दोषी करार दिया है.
    गुरुवार को इनकी सज़ा का एलान होगा. दोषी करार दिए गए अभियुक्त झाबर गांव के रहने वाले हैं. यह बालूमाथ थाना क्षेत्र का हिस्सा है. इनके ख़िलाफ़ दो लोगों की हत्या कर उनके शवों को फांसी के फंदे से लटकाने का आरोप था.
    एक पेड़ की दो समानांतर टहनियों से लटकती शवों की तस्वीर जब सामने आई थी पूरे देश में सुर्खियां बनी थीं. यह झारखंड में मॉब लिंचिंग की पहली घटना थी. अभियुक्तों को शक़ था कि वे (मृतक) गायों की खरीद-बिक्री करते हैं. इस मामले की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही थी.
    झारखंड में हत्या कर पेड़ से शव लटकाए
    फांसी या उम्रकैद
    अदालत में इस मामले में पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने बताया कि सुनवाई के दौरान कुल 11 लोगों की गवाही कराई गई थी. उन्होंने बताया कि पुलिस रिपोर्ट में पहले सिर्फ एक आरोपी नामज़द किए गए थे.

    जांच के बाद एफ़आईआर में सात और नाम जोड़े गए. अदालत ने इन्हें हत्या करने और उससे जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश का दोषी माना है. लिहाजा, भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 302 और 201 के तहत उन्हें सजा सुनाई जाएगी. इसमें अधिकतम फांसी और न्यूनतम उम्रक़ैद की सज़ा का प्रावधान है.
    पिछले साल 2016 के मार्च महीने की 18 तारीख थी. दिन शुक्रवार. झाबर गांव में अल सुबह किसी युवक ने सखुआ के पेड़ से लटकती लाशें देखीं. पहले तो वह डर गया लेकिन उसने भागकर गांव के दूसरे लोगों को यह बात बतायी.
    उस पेड़ के नीचे कई गांवों के लोग पहुंच गए. इसकी सूचना बालूमाथ थाने के दी गई. पुलिस आई, शवों को नीचे उतारा, तो उनकी पहचान पड़ोसी नावादा गांव के मज़लूम अंसारी और आराहरा के इम्तियाज़ खान के तौर पर हुई.
    मज़लूम पशु व्यापारी थे और इम्तियाज़ इस काम में उनकी मदद करता था. उसकी उम्र सिर्फ 12 साल की थी.
    उस समय कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि इनकी हत्या किसने की और इन्हें पेड़ से किसने लटकाया. हालांकि, पुलिस ने कुछ ही घंटे बाद झाबर गांव के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
    तब यह बताया गया कि झाबर के ही कुछ लोगों ने ये हत्याएं की क्योंकि उन्हें शक़ था कि ये दोनों लोग पशुओं का व्यापार करते थे. गिरफ्तार किए गए लोग गौ क्रांति दल नामक संगठन से जुड़े थे. इनमें से कुछ का नाता बजरंग दल से होने की भी बात चर्चा में आई. हालांकि, बजरंग दल के पदाधिकारी इससे इनकार करते हैं.

    इंसाफ मिला, अब फांसी की उम्मीद
    मज़लूम अंसारी की विधवा शायरा बीबी इस फैसले से खुश हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके शौहर के हत्यारों को अदालत फांसी की सजा देगी. इन दिनों अपने मायके में रह रही शायरा ने बताया कि अदालत से जमानत पर छूटने के बाद उन अभियुक्तों ने उन्हें गवाही नहीं देने की धमकी दी थी. उन लोगों ने कहा था कि गवाही देने पर उनकी भी हत्या करा दी जाएगी.
    शायरा बीबी ने कहा, ”बस इतनी मांग है कि जैसे उन लोगों ने मेरे शौहर को फांसी के फंदे से लटका कर मार दिया, वैसे ही जज उन्हें भी फांसी पर लटका दें. उन लोगों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी. अब कोर्ट पर ही भरोसा है कि वह इंसाफ़ करेगा.”
    इम्तियाज़ ख़ान की मां नजमा बीबी इस ख़बर को सुनते ही रोने लगीं. उन्होंने बताया कि 12 साल का इम्तियाज़ धार्मिक प्रवृति का था, जिस दिन उसकी लाश मिली वो जुम्मे का दिन था. हत्या से एक दिन पहले वह यह कहकर घर से निकला था कि दो दिन बाद वापस घर लौट आएगा. लेकिन, अगली सुबह उसकी लाश पेड़ से लटकती मिली.
    नजमा बीबी ने कहा, ”दो-दो बेटियां शादी के लायक हैं. बड़ा लड़का बीमार है और कोई काम नहीं करता. उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है. मेरे शौहर के पैर टूटने के बाद से इम्तियाज ही घर का खर्च चलाता था. अब मेरे शौहर मनरेगा का कुछ काम करते हैं तो हमारे लिए रोटी का इंतजाम होता है. हत्यारों ने उसकी हत्या से पहले उसे बुरी तरह पीटा भी था. अब अदालत इंसाफ करे और उन्हें भी फांसी की सजा दे.

    इम्तियाज़ ख़ान की मां नजमा बीबी
    पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इन हत्याओं की तुलना दादरी कांड से की थी. पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने सरकार से मांग की थी कि इनके लिए मुआवजे का प्रबंध किया जाए. तब माकपा नेत्री वृंदा करात ने भी झाबर, नवादा और आराहरा गांवों में आकर लोगों से बातचीत की थी.
    हालांकि, अभियुक्तों के परिजनों का कहना है कि सजा के ऐलान क बाद वे दूसरे न्यायिक विकल्पों का सहारा लेंगे.

  • LU:बिना अप्रूवल विश्वविद्यालय ने बढ़ा दी फीस तो,विद्यार्थियों का फूटा गुस्सा,एडमिशन का किया बहिष्कार

    ओरिएंटल पर्शियन विभाग के 2 कोर्सों में फीस बढ़ोतरी का मामला

    रजिस्ट्रार ने कहा 23 तारीख के बाद इमरजेंसी मीटिंग करेंगे उसके बाद होगा फैसला

    मिल्लत टाइम्स,लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय के ओरिएंटल पर्शियन विभाग में चलने वाले आलिम और ताबीर ऐ माहिर पाठ्यक्रम में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने ऐडमिशन का बहिष्कार कर दिया है अभ्यर्थियों ने रविवार को विभाग के हेड अरशद जाफरी को ईमेल किया

    अभ्यार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना अप्रूवल मनमानी तरीके से कोर्स की फीस बढ़ा दी है इसे लेकर वीसी से लेकर रजिस्ट्रार तक को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन आवेदन प्रक्रिया के 4 महीने बाद भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले पाया है अभ्यर्थियों का कहना है कि एलयू पुरानी फीस लेगा तो ही हम एडमिशन लेंगे

    वेबसाइट पर भी फीस 1649 रूपए:
    अभ्यर्थियों के मुताबिक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर आलिम और दबीर ए माहिर कोर्स की फीस ₹1649 दी गई है लेकिन उनसे 2649 रूपये लिए गए ज्यादा फीस का कारण पूछा तो उन्हें ₹1000 एनरोलमेंट के अलग से जोड़े जाने की बात कही गई इतना ही नहीं ₹200 फार्म शुल्क भी लिया गया जो कि पहले फ्री था अभ्यर्थियों के मुताबिक इस संबंध में विभाग के हेड अरशद जाफरी से मिले तो उन्होंने वीसी और रजिस्ट्रार के पास भेज दिया

    इस संबंध में जब मिल्लत टाइम्स ने अरशद जाफरी से फोन पर बात कर पूछा के वहां के छात्र द्वारा जो इल्जाम लगाया गया है क्या वह सही है या गलत तो अरशद जाफरी ने कहा कि मुझे नहीं पता है जबकि अरशद जाफरी, ओरिएंटल पार्शियन विभाग लखनऊ यूनिवर्सिटी के हेड हैं अरशद जाफरी ने कहा कि मैं एक टीचर हूं इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है रजिस्ट्रार के पास होती है इसकी जानकारी और गोलमोल बातें करके उन्होंने फोन काट दिया

    तथा इस संबंध में अभ्यर्थियों का कहना है कि वीसी से लेकर के रजिस्ट्रार तक को पत्र लिख चुके हैं लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है

  • कश्मीर:फारूक अब्दुल्ला बोले,अगर गोलियां नहीं चलाते सेना तो जिंदा होते मारे गए 7 स्थानिय नागरिक

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: 15 दिसंबर को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुए मुठभेड़ को लेकर पुलवामा में तनाव का माहौल हैं। मुठभेड़ स्थल के पास जमा हुई उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कथिक तौर पर सुरक्षाबलों ने फायरिंग की जिसमें 7 स्थानिय नागरिकों की मौत हो गई। इस मामले को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता और जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि सेना को गोलियों की जगह पानी की बौछार या आंसूगैस का इस्तेमाल करना चाहिए था, जो लोग मारे गए हैं, वे लौटकर नहीं आ सकते।

    फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सेना और पुलिस भविष्य में इस तरह की कार्रवाई नहीं करेंगी। आपको बता दें कि पुलवामा में एनकाउंटर में 7 नागरिकों के मारे जाने पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भी बयान सामने आया था। इमरान खान ने मामले की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र तक इस मुद्दे को ले जाने की धमकी दी।

    इमरान खान ने घटना की ट्वीटर पर निंदा करते हुये कहा कि केवल बातचीत से ही इस मुद्दे का हल निकलेगा, न कि हिंसा और हत्याओं से.. उन्होंने कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने की चेतावनी देते हुए कहा कि देश मांग करेगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जम्मू कश्मीर पर अपने जनमत-संग्रह की प्रतिबद्धता को पूरा करे। पाकिस्तान के विदोश कार्यालय ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि जम्मू कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माना हुआ विवाद हैं जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का लंबा एजेंडा हैं और इस हकीकत से भारत का अलग होना चौंकाने वाली बात थी।

    आपको बता दें, पुलवामा के खारपुरा में 15 दिसंबर को सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया था। दोनों ओर से हुई फायरिंग इस दौरान एक जवान शहीद हो गया। इस ऑपरेशन के दौरान ही सुरक्षाबलों और स्थानीय लोगों के बीच संघर्ष हो गया और पत्थरबाजी भी हुई। सुरक्षाबलों की ओर से की गई फायरिंग कार्रवाई के दौरान सात स्थानीय नागरिकों की मौत हो गई है।

    इसके बाद पूरे पुलवामा और उसके आस-पास के गांवों में तनाव का माहौल है। पहले खबर थी कि आठ नागरिकों की मौत हुई है, लेकिन बाद में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि कुल 7 लोगों की मौत हुई है। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। तीन आतंकवादियों के मारे जाने के साथ ही मुठभेड 25 मिनट में खत्म हो गई, लेकिन सुरक्षाबल तब मुश्किल में पड़ गए जब लोगों ने सेना के वाहनों पर चढ़ना शुरू कर दिया।

  • गुजरात:अल्पसंख्यक मंत्रालय और आयोग के लिए गुजरात में मुसलमानों ने किया बड़ा प्रदर्शन

    (सबनवाज अहमद / मिल्लत टाइम्स)
    गुजरात के गांधीनगर स्थित सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के मौके पर राज्य के मुसलमानों ने अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग के लिए बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान राज्य विधानसभा को घेरने की भी तैयारी भी थी, लेकिन गांधीनगर पुलिस और प्रशासन द्वारा इजाजत नहीं दी।

    गुजरात के अल्पसंख्यक समन्वय समिति (एमसीसी) के तत्वधान में आयोजित हुए इस प्रदर्शन में एमसीसी के कोऑर्डिनेटर मुजाहिद नसीफ ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि समिति शीतकालीन सत्र के दौरान या बजट सत्र के दौरान राज्य के मुसलमानों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सदन का घेराव करेगी।
    उन्होनें आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें फोन कर सदन का घेराव नहीं करने और अपने पोस्टर से ‘सदन का घेराव’ हटाने को कहा। उन्होंने आगे कहा, “इससे यह साबित होता है कि प्रशासन और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच भय का महौल है। लेकिन हमने ‘सदन का घेराव’ शब्द को अपने बैनर में रखा ताकि प्रशासन और राजनेताओं को यह याद रहे कि वे मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार को अनदेखा नहीं कर सकते हैं।”

    नफीस ने आरोप लगाया, “यह अफवाह उड़ाई गई थी कि जो लोग मंगलवार को आयोजित प्रदर्शन में शामिल होंगे, उनके ऊपर लाठीचार्ज और फायरिंग की जाएगी। अफवाहों को दरकिनार कर जनता प्रदर्शन के लिए इकट्ठे हुए और साबित किया कि वे अपने अधिकारों की मांग करने के लिए किसी से डरने वाले नहीं हैं।”

    नफीस ने यह भी घोषणा किया कि अगले साल से मुसलमानों के अधिकार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
    नफीस ने कहा कि गुजरात एकमात्र वैसा राज्य है, जहां राज्य अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग नहीं है। उन्होंने कहा, “यहां अल्पसंख्यकों के विकास के लिए बजट में राशि आवंटित नहीं की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम लागू नहीं होते हैं। क्या यह असंवैधानिक नहीं है?”

  • ओवैसी की बेटी बनने जा रही हैदराबादी नवाब घराने की बहू, जानिए कौन है वो नवाब

    (सबनवाज अहमद / मिल्लत टाइम्स)
    हैदराबाद के नवाब शाह आलम खान के घराने से चली आ रही ओवैसी खानदान की कई पीढ़ियों की दोस्ती अब रिश्तेदारी में तब्दील होने जा रही है। दरअसल, 28 तारीख को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बेटी कुदसिया हैदराबादी नवाब घराने की बहू जा रही है।

    ओवैसी की बेटी कुदसिया की शादी 28 तारीख को दराबाद के नवाब के पोते नवाब बरकत आलम खान से होगी। आलम खान का परिवार हैदराबाद के शीर्ष उद्योगपतियों में शुमार है। शाह आलम खान ने शैक्षणिक उत्थान की दिशा में बहुत काम किया है। इनमें बहुचर्चित अनवरुल उलूम कॉलेज भी शामिल है।

    वो हैदराबाद डेक्कन सिगरेट फैक्ट्री की गोलकोंडा सिगरेट हैदराबाद के लिए भी मशहूर रहे। साथ ही उनका परिवार हैदराबाद की पाक कला के लिए जाना जाता है। शाह आलम के बड़े बेटे नवाब महबूब आलम खान पाक व्यंजनों के लिए मशहूर हैं। उन्हें हैदराबाद में कुतुब शाही और असफ शाही व्यंजनों को दोबारा जीवित करने के लिए जाना जाता है।

    बता दें कि दोनों की सगाई इसी साल 24 मार्च को हुई थी। पिछले हफ्ते असदुद्दीन ओवैसी बरकत और अहमद को लेकर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के पास उन्हें न्योता देने भी पहुंचे थे।

  • बुलंदशहर हिंसा:83 पूर्व अफसरों ने मांगा CM योगी का इस्तीफा’कहा सिर्फ गौकशी पर ध्यान दें रहे है

    मिल्लत टाइम्स: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई हिंसा पर राज्य के पूर्व नौकरशाहों ने योगी सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया है. करीब 83 रिटायर्ड नौकरशाहों ने बुलंदशहर हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा मांगा है. अपने खुले खत में रिटायर्ड अफसरों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर हिंसा को गंभीरता से नहीं लिया. इसके अलावा वह सिर्फ गोकशी केस पर ध्यान दे रहे हैं.

    आपको बता दें कि पूर्व नौकरशाहों का ये खत तब सामने आया है जब बुलंदशहर हिंसा की जांच SIT ने पूरी कर ली है. जांच में खुलासा हुआ है कि हिंसा से पहले गोकशी हुई थी. इस आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगने वालों में पूर्व अफसर बृजेश कुमार, अदिति मेहता, सुनील मित्रा जैसे बड़े अफसर शामिल हैं. अफसरों ने आरोप लगाया कि बुलंदशहर हिंसा को राजनीतिक रंग दिया गया है. आपको बता दें कि ये खुला खत सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहा है, इसमें दावा किया गया है कि 83 अफसर इनके साथ हैं.

    अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले भी कई मसलों पर खुला खत लिखा है. बुलंदशहर हिंसा को लेकर उन्होंने कहा कि एक पुलिस वाले की भीड़ द्वारा हत्या किया जाना बहुत दर्दनाक है, इससे राज्य की कानून व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने अपील की है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए और हिंसा से जुड़े पूरे मामले की जांच होनी चाहिए.

    आपको बता दें कि 3 दिसंबर, 2018 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी की खबर के बाद हिंसा फैल गई थी. इस दौरान भीड़ ने बुलंदशहर की स्याना पुलिस चौकी पर हमला किया था, इसी में पुलिसकर्मी सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी. इस हिंसा में एक अन्य युवा की भी मौत हुई थी.

    इनपुट आजतक के साथ

  • इज़राईली विद्धवान ने कहा इस्लाम सर्वश्रेष्ठ धर्म,और मोहम्मद साहब सर्वश्रेष्ठ इंसान हैं,वीडियो हुई वायरल

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:इज़राईली विद्धवान मोशिया शारुन ने एक लेक्चर में कहा है कि उन्होंने रिसर्च करते हुए पाया है कि इस्लाम सातवी सदी में कुदरती चुनाव है,हमने रिसर्च किया है कि अरबी भाषा में मोहम्मद के कई सारे मतलब होते हैं जिसका खास मतलब मुस्तफ़ा होता है,मुस्तफ़ा का मतलब अरबी भाषा में जिसे चुना गया उसको कहते हैं।

    मोशिया शारुन ने कहा दुनिया मे सबसे बेहतरीन से बेहतरीन इंसान हज़रत मोहम्मद सलल्लाहु अलैयही वसल्लम हैं,इसके साथ ही कहा कि दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ और सच्चा धर्म इस्लाम है।


    प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एक इस्राईली विद्वान ने उस समय सबको हैरत में डाल दिया जब एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने इस्लाम धर्म की प्रशंसा करनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मैंनो अपने जीवन में बहुत सारे धर्मों के बारे में अध्ययन किया है लेकिन सबसे अच्छा और सच्चा कोई धर्म मुझे दिखाई देता है तो वह इस्लाम ही है।

    इज़राईली प्रोफेसर मूशा शारून ने तेल अवीव में स्थित बिन गोरियन विश्वविद्यालय में अपने भाषण से उस समय और सबको हैरत में डाल दिया जब उन्होंने ने अरबी भाषा में कहा ” ’وھو یَعلو ولا یُعلیٰ علیہ‘ ” अर्थात इस्लाम धर्म सबसे ऊंचा है और उससे ऊंचा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे स्वीकार करने वाला भाग्यशाली है क्योंकि इस्लाम धर्म ही सच्चा दीन है।

    इनपुट इंकिलाब के साथ

  • कर्नाटक विधानसभा में लड़कियों की फोटो देख रहे थे BSP विधायक,पकड़े जाने पर बोले-बेटे के लिए लड़की देख रहा हूं

    आजकल हमारे नेता इतने बिजी हो गए हैं कि उन्हें अपने लड़के के लिए लड़की ढूंढने का समय ही नहीं मिलता है सदन में जाकर के सदन का काम करने के बजाय आज
    लड़की ढूंढते हुए बीएसपी के विधायक सीसीटीवी कैमरा मे हुए कैद

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा में सोमवार को जिस वक्त कार्यवाही चल रही थी उस वक्त बहूजन समाज पार्टी के विधायक एन महेश मोबाइल में लड़कियों की तस्वीरें देख रहे थे। ऐसा करते हुए उन्हें वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद कर लिया गया। सदन के अंदर विधायक महेश की इस हरकत के मामले ने मगंलवार को तूल पकड़ लिया। विवाद बढ़ता देख महेश सामने आए और उन्होंने सफाई। अपनी सफाई पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वो बेटे के लिए सुंदर लड़की ढूंढ रहे थे।

    मीडिया से बात करते हुए बीएसपी विधायक ने अपनी गलती मानी और कहा कि हां मैं सदन के अंदर मोबाइल लेकर गया था। मैं स्वीकर करता हूं कि मैं मोबाइल लेकर गया था जो कि मेरी गलती थी। मैं ऐसा फिर कभी नहीं करुंगा। लेकिन आप लोग किस तरह की पत्रिकारिता कर रहे हैं। महेश ने कहा, मीडिया हर चीज़ को सनसनीखेज मामला बनाकर उसे तूल दे देता है। एक पिता होने के नाते मैं अपने बेटे लिए चिंतिंत हूं इसलिए उसके लिए एक अच्छी लड़की की तलाश कर रहा हूं। बात केवल इतनी सी ही है। मैं केवल दुल्हन का प्रोफाइल देख रहा था इससे ज्यादा कुछ नहीं।

    बता दें कि कर्नाटक विधानसभा और परिषद में कार्यवाही के दौरान मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद कार्यवाही के दौरान सदस्यों को मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए देखा जाता है। ऐसी ही हरकत सोमवार को बीएसपी के विधायक की कैमरे में कैद हो गई।

  • अब जबरदस्ती अगर मांगा आधार कार्ड तो,एक करोड़ जुर्माना और 10 साल तक की होगी सजा

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:अब आपको सिम कार्ड लेने या बैंक खाता खुलवाने के लिए आधार कार्ड नहीं देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आधार कार्ड की गोपनीयता को देखते हुए इसके बैंक व टेलिकॉम कंपनियों द्वारा इसका उपयोग करने पर रोक लगा दी थी। अब केंद्र सरकार ने इसे कानून का रूप देने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट और भारतीय टेलिग्राफ ऐक्ट में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी है।

    संशोधन के तहत पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड के लिए दबाव बनाने पर बैंक और टेलिकॉम कंपनियों को एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही आधार कार्ड मांगने वाले कर्मचारी अथवा जिम्मेदार व्यक्ति को तीन से 10 साल तक की कैद की सजा भी हो सकती है। आधार कार्ड की जगह अब पासपोर्ट, राशन कार्ड या कोई अन्य मान्य दस्तावेज लिए जा सकेंगे। अब ये पूरी तरह से उपभोक्ता पर निर्भर होगा कि वह सिम कार्ड या बैंक खाते के लिए आधार कार्ड देना चाहता है या नहीं।

    केंद्र सरकार ने आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट और भारतीय टेलिग्राफ ऐक्ट में संशोधन को सोमवार को मंजूरी प्रदान कर दी थी। संशोधन के तहत ही इसमें जुर्माने और सजा का प्रावधान शामिल किया गया है। केंद्र सरकार के इस संशोधन को हाल में आधार कार्ड की अनिवार्यता से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के अनुपालन के तौर पर देखा जा रहा है। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि यूनिक आइडी (आधार कार्ड) को सिर्फ सरकारी जनहित योजनाओं के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

    डेटा मिसयूज पर भी जुर्माने व सजा का प्रावधान
    संशोधन में आधार का सत्यापन करने वाली संस्था की भी जिम्मेदारी तय की गई है। इसके मुताबिक अगर आधार का सत्यापन करने वाली कोई संस्था डेटा लीक के लिए जिम्मेदार पायी जाती है तो उस पर भी 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और 10 साल तक की सजा हो सकती है। संशोधन में कहा गया है कि केवल राष्ट्रहित में ही इन गोपनीय जानकारियों व डेटा का प्रयोग किया जा सकता है। इन संशोधनों को अभी संसद से मंजूरी मिलना बाकी है।