Category: देश

  • मप्र:विधानसभा की कल की कार्यवाही में फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं,पर राज्यपाल का सीएम को खत-मतों विभाजन हाथ उठाकर हो

    भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन की कार्यवाही का कार्यक्रम रविवार को जारी किया गया। सोमवार को होने वाले कार्यक्रमों की सूची में फ्लोर टेस्ट का जिक्र ही नहीं है। इसमें केवल राज्यपाल के अभिभाषण और उस पर धन्यवाद ज्ञापन का जिक्र किया गया है। इस बीच, राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र जारी कर कहा कि विश्वासमत के दौरान मत विभाजन की प्रक्रिया हाथ उठाकर करवाई जाए, किसी अन्य तरीके से नहीं।

    कमलनाथ सरकार को 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट से गुजरने के आदेश शनिवार आधी रात राज्यपाल लालजी टंडन ने जारी किए थे। इसके मुताबिक, सोमवार से शुरू होने वाले बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद ही विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग होगी। आदेश में कहा गया है कि मतदान सिर्फ बटन दबाकर होगा। यह प्रक्रिया इसी दिन पूरी होगी और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।

    भाजपा ने कहा- राज्यपाल के निर्देशों का उल्लंघन हुआ
    नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने रात को राज्यपाल से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा- राज्‍यपाल ने विधानसभा अध्‍यक्ष और सरकार को निर्देश दिया था कि 16 मार्च को अभिभाषण के बाद फ्लोर टेस्‍ट करवाएं। दुख की बात है कि विधानसभा की कार्यसूची में केवल अभिभाषण को लिया गया। यह राज्‍यपाल के निर्देश का उल्‍लंघन और असंवैधानिक है। हमने विरोध के तौर पर ज्ञापन दिया है। राज्‍यपाल ने आश्‍वासन दिया है कि वे नियमों के तहत इस पर निर्णय लेंगे।

    वोटिंग सिस्टम खराब होने पर राज्यपाल नाराज
    राज्यपाल लालजी टंडन ने सदन का इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम खराब होने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सदन के सचिव को फटकार लगाई कि इन व्यवस्थाओं को पहले से सही क्यों नहीं किया गया? टंडन ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को तलब किया था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम तुरंत ठीक कराने को कहा। राज्यपाल ने सचिव से पूछा कि सिस्टम ठीक नहीं था तो पहले से व्यवस्थाएं ठीक क्यों नहीं की गईं? नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और नरोत्तम मिश्रा ने राज्यपाल से मिलकर वोटिंग मशीन खराब होने पर हाथ उठाकर वोटिंग कराने की मांग की है।

    विधायकों ने 5 दिन में दूसरी बार भेजे इस्तीफे
    ज्योतिरादित्य समर्थक 16 विधायकों ने 5 दिन में दूसरी बार अपने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को भेजे हैं। इससे पहले प्रजापति ने ज्योतिरादित्य गुट के 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। ये सभी 22 विधायक अभी बेंगलुरु में हैं। दूसरी बार इस्तीफा भेजने वाले विधायकों ने स्पीकर से कहा कि जिस तरह आपने 6 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया है, उसी तरह हमारे इस्तीपों पर भी विचार करें।

    विधायकों की खबर मिल रही, वे सीधे मुझसे संपर्क नहीं कर रहे: स्पीकर
    फ्लोर टेस्ट को लेकर स्पीकर प्रजापति से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह सवाल ही काल्पनिक है। उन्होंने मीडिया से कहा कि आपको कल ही इस बारे में पता चलेगा। फैसला लेने से पहले मैं आप लोगों को कुछ नहीं बता पाऊंगा। उन्होंने कहा, “मैं लोकतंत्र का संरक्षक हूं। ये आप तय कीजिए कि क्या चल रहा है। जो लोग लोकतंत्र के संरक्षक हैं, उन्हें भी चिंता करनी चाहिए। मैं विधायकों को लेकर चिंतित हूं। विभिन्न माध्यमों से उनके बारे में जानकारी मिल रही है। लेकिन वे मुझसे सीधे संपर्क नहीं कर रहे।”

  • कोरोना का ये कैसा डर,लोगों ने चिकेन से बनाई दूरी , टूट पड़े सब मछली पर

    शहनवाज हुसैन/मिल्लत टाइम्स,मधेपुरा : कोरोना वायरस को लेकर मधेपुरा में जहां चिकेन और मटन की बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ा है, वहीं मछली व्यवसाय में इजाफा दर्ज किया गया है. इसके कारण मछली व्यवसायी खुश दिखाई दे रहे हैं. हो भी क्यों न, जब सारे व्यवसायों का खस्ता हाल हो तो ऐसे में किसी व्यवसाय में तेजी अच्छी खबर ही होगी.

    दरअसल, कोरोना वायरस के बारे में यह अफवाह थी कि मटन और चिकन खाने से यह वायरस फैलता है. इसी अफवाह के कारण मधेपुरा के अधिकांश चिकेन की दुकान बंद हो गई है और लोगों का रूझान अब मछलियों के तरफ ज्यादा होने लगा है. इसका परिणाम है कि अकेले सिंघेश्वर मछली मंडी में आज 5 से 10 लाख रुपए के मछली का कारोबार हुआ है.

    मछली कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि जो मछलियां पहले 180 रूपए किलो बेची जाती थीं, अब वह 240 से ढाई सौ रूपए के दामों पर बिकने लगी हैं. वहीं चिकेन बेचने वाले दुकानदारों के सामने रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है.
    दूसरी ओर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ श्याम बिहारी का कहना है कि नॉनवेज खाने से कोरोना का असर नहीं होता है. क्योंकि हम लोग जो भी खाद्य पदार्थ लेते हैं, उसे पकाया जाता है जिससे कोई नुकसान नहीं होता है. ऐसे परिवेश में इन खाद्य पदार्थों के बारे में जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं वह बिल्कुल ही गलत है.

    खैर, मामला चाहे जो भी हो मगर इस अफवाह से मधेपुरा के चिकेन व्यवसाय पर व्यापक असर पड़ा है. अगर हम मटन की बात करें तो मटन के कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि कोरोना का ज्यादातर असर सीफूड खाने की वजह से हो रहा है. बताया जा रहा है कि समुद्री जीवों के खाने से ही चीन, इटली और ईरान जैसे देशों में कोरोना का व्यापक असर देखने को मिला है.

    ऐसे में चिकेन छोड़ मछली पर टूट पड़ने का लोगों का फैसला कितना सही है, यह वही जानें.

  • एमपी ड्रामा:विधानसभा स्पीकर ने मंजूर किया 6 बागी विधायकों का इस्तीफा

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी संकट के बीच विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कांग्रेस के बागी छह विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 276 के तहत 10 मार्च से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है.

    विधानसभा अध्यक्ष ने जिन विधायकों का इस्तीफा मंजूर किया है, उनमें गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी, प्रद्युम्न तोमर, तुलसी राम सिलावट और इमरती देवी शामिल हैं. विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी गई है.

    विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि विधानसभा सदस्यों ने इस्तीफे की सूचना खुद मिलकर नहीं दी थी. उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफे दिए हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए 13 मार्च को उपस्थित होने को कहा था. विधायक नहीं पहुंचे तो फिर 14 मार्च को भी समय दिया गया, लेकिन वे नहीं पहुंचे. विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इन छह विधायकों को मंत्रिमंडल से भी बर्खास्त किए जाने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इनका आचरण आश्चर्यजनक है. ये विधानसभा सदस्य रहने के योग्य नहीं हैं.

    कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

    वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने आगामी विधानसभा सत्र के लिए अपनी पार्टी के विधायकों को 3 लाइन व्हिप जारी किया है. व्हिप जारी करते हुए संसदीय कार्य मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा कि ‘राज्यपाल का अभिभाषण और धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ताव पारित किया जाना है. इसके अलावा अनुपूरक अनुमान, विनियोग विधेयक 2020, साल 2012-13 के आधिक्य व्यय का विवरण पेश और पारित कराया जाना है.

    गोविंद सिंह की ओर से जारी व्हिप के अंत में कहा गया है, ‘कांग्रेस पक्ष के समस्त विधायकों से अनुरोध किया जाता है कि विधानसभा के इस वर्तमान पंचम सत्र के समस्त कार्यकारी दिवसों 16 मार्च से 13 अप्रैल तक भोपाल में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और सदन की पूरी कार्रवाई के दौरान पूरे समय अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें. किसी भी स्थिति में अनिवार्य रूप से शासन के पक्ष में मतदान करें.’

  • कोरोना:चीन से लौटी MBBS छात्रा पहुंची अस्पताल,कुर्सी छोड़ भाग गए डॉक्टर

    कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया डरी हुई है. भारत में भी इस जानलेवा वायरस ने 80 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है, जबकि 2 लोगों की मौत भी हो गई है. ऐसे में इसका नाम सुनकर ही लोग कांपने लगते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में जहां कोरोना वायरस से पीड़ित एक छात्रा के आने पर डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर वहां से भाग गए.

    दरअसल तीन फरवरी को एक छात्रा चीन से लौटी थी, जहां कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रकोप है. छात्रा के लौटने के बाद संदिग्ध पाए जाने पर छात्रा को 28 दिनों के लिए निगरानी में रखा गया था.

    इसके बाद करीब 40 दिन पहले चीन से लौटी युवती अपने साधारण सर्दी और खांसी का इलाज कराने जिले के सरकारी अस्पताल में पहुंची. उसने जैसे ही डॉक्टर को बताया कि वो चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है यह सुनते ही डॉक्टर वहां से फरार हो गया.

    अस्पताल के अन्य कर्मियों ने फौरन इसकी सूचना रैपिड रिस्पांस टीम को दी गई, जिसके बाद टीम ने फौरन घर पहुंचकर छात्रा की जांच की और उसमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं पाए गए.

    युवती ने बताया कि जैसे ही उसने डॉक्टर को बताया कि वो कुछ दिनों पहले ही चीन से लौटी है ये सुनते ही डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर भाग गया. वहीं इस मामले को लेकर जिले के सीएमओ हरगोविंद सिंह ने बताया कि जो भी लोग विदेश से लौटे रहे हैं उन्हें 28 दिनों तक निगरानी में रखा जा रहा है.

    ऐसा ही कुछ बेंगलुरु में भी हुआ जहां इटली से हनीमून मनाकर लौटी महिला पति में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाने के बाद इस कदर दहशत में आ गई कि वो उसे छोड़कर आगरा अपने मायके भाग गई. दरअसल इटली से हनीमून मनाकर लौटने के बाद महिला के पति को वायरस के मामले में पॉजिटिव पाया गया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसके साथ ही महिला को भी आइसोलेशन में रखा था.

    वहीं महाराष्ट्र के नागपुर में एक निजी अस्पताल से शुक्रवार देर रात कोरोना संक्रमण के चार संदिग्धों के भाग जाने के बाद नागपुर में खलबली मच गई. अधिकारियों ने यह जानकारी शनिवार को दी. चार फरार संदिग्धों में से तीन बाद में माया अस्पताल में लौट आए. वे इसी अस्पताल में कुछ दिनों से निगरानी में रखे गए थे.

    बता दें कि देश में कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बाद जिन दो लोगों की मौत हुई है जिसके बाद मोदी सरकार ने उनके परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला किया था जिसे बाद में वापस ले लिया गया.(इनपुट आजतक)

  • नजरबंदी से रिहा हुए फारूक अब्दुल्ला ने 7 महीने बाद बेटे उमर से की मुलाकात तथा गुलाम नबी मिले फारुक अब्दुल्ला से

    श्रीनगर.श: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला नजरबंदी से रिहा होने के एक दिन बाद अपने बेटे और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले। पिछले सात महीने में पिता और बेटे की यह पहली मुलाकात थी। रिहाई के बाद फारूक ने उमर से मिलने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने उन्हें श्रीनगर के उप जेल में उमर से मिलने की इजाजत दी। दोनों करीब एक घंटे तक साथ रहे। फारूक के साथ अब्दुल्ला परिवार के अन्य सदस्यों की भी उमर से मुलाकात हुई।

    उमर को 4 अगस्त की रात को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले हिरासत में लिया गया था। उन्हें 5 फरवरी से पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता अभी भी नजरबंद हैं।

    गुलाम नबी आजाद फारूक से मिलने पहुंचे

    कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद फारूक से मिलने शनिवार को उनके घर पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है। मैं फारूक अब्दुल्ला से सात महीने बाद मिला। इतने महीनों तक उन्हें हिरासत में रखा गया था। इन्हें हिरासत में रखने का कारण अभी तक मुझे पता नहीं है। जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना यहां के लोगों की बेईज्जती है। इसे फिर से राज्य घोषित किया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर तभी तरक्की करेगा जब यहां के नजरबंद नेताओं को रिहाई मिलेगी। यहां पर समुचित प्रक्रिया के मुताबिक चुनाव कराए जाएं।

    हमारी मंशा किसी को जेल में रखने की नहीं: जी किशन रेड्‌डी

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्‌डी ने शनिवार को हैदराबाद में फारूक की रिहाई के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हमारी मंशा किसी को जेल में रखने की नहीं है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में राज्य को सही ढंग से चलाने के लिए कुछ लोगों को अंदर रखना पड़ा। सभी नजरबंद लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी मूलभूत सुविधाएं और विकास का अधिकार है। उन्हें समान अधिकार देने के लिए केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया। अब राज्य शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

    रिहाई के बाद कहा था- मेरी आजादी अभी अधूरी

    शुक्रवार को रिहाई के बाद फारूक ने कहा था कि मेरी आजादी तब तक अधूरी है, जब तक उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती व अन्य नेताओं की रिहाई नहीं हो जाती। उम्मीद है भारत सरकार अब उन सभी को रिहा करेगी, जिन्हें राजनीतिक हिरासत में लिया गया था। मैं उन सभी का शुक्रिया करता हूं, जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए दुआएं की हैं।

  • राजस्थान राज्यसभा चुनाव मे उम्मीदवार चयन मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की एक तरफा चली।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की हमेशा की तरह मै रहु तो कांग्रेस ओर मै नही रहु तो कांग्रेस नही के फारमूले के चलते उन्होंने अब उम्मीदवार चयन मे एक तरफ जाट उम्मीदवारों को ठिकाने लगाते हुये प्रदेशाध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी मात देते हुये एक उम्मीदवार दिल्ली हाईकमान के कोकस ग्रूप के सदस्य केरला निवासी पूर्व सांसद एव राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी वेणुगोपाल को उम्मीदवार बनवाने के साथ साथ अपने खासमखास नीरज डांगी को भी उम्मीदवार घोषित करवा कर सबको अचरज मे डाल दिया है।

    राजस्थान युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे नीरज डांगी को कांग्रेस ने सिरोही जिले की रेवदर विधानसभा सीट से 2008 व 2018 मे उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़वाया लेकिन दोनो दफा डांगी बूरी तरह चुनाव हारे। नीरज डांगी अनुसूचित जाति से तालूक रखते है एवं उनके पिता दिनेशराय डांगी राजस्थान मे मंत्री रह चुके है।


    (कांग्रेस केंडिडेट की लिस्ट)

    राजनीतिक सूत्र बताते है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले अपने खासमखास राजीव अरोड़ा का नाम उछाला तो दूसरे नेताओं द्वारा उसका विरोध करने पर उन्होंने नीरज डांगी का नाम आगे बढाकर गहलोत ने उसपर दिल्ली मे सहमति करवाने की खबर जब सचिन पायलट तक पहुंचीं तो उन्होंने अनुसूचित जाति के ही कुलदीप इंदौरा का नाम आगे बढाया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

    राजस्थान के तीन सदस्यों के लिये हो रहे राज्यसभा चुनाव मे संख्याबल के मुताबिक दो कांग्रेस व एक भाजपा के उम्मीदवार का जीतना तय है। तीनो सदस्यों के निर्विरोध चुने जाने की सम्भावना बन चुकी है। वर्तमान मे कांग्रेस के पहले से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सदस्य होने के अलावा अब दो सदस्यों के चुनाव जीतने के बाद कुल दस मे से तीन कांग्रेस व सात भाजपा के सदस्य हो जायेंगे।

    कुल मिलाकर यह है कि प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट दो उम्मीदवारों मे से एक जाट व एक मीणा जाती के उम्मीदवार बनाकर पार्टी को मजबूती देने की कोशिश मे थे। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चतुराई के आगे पायलट की चाल कमजोर साबित हुई। उक्त उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस विधायक दल मे असंतोष पनपना देखा जा रहा है। पूर्व विपक्ष के नेता व विधायक हेमाराम चोधरी ने तो इशारे ही इशारे मे काफी कुछ कह डाला है भाजपा ने मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने वाले व उन्हीं की माली बिरादरी व गहलोत गोत्र के पूर्व मंत्री राजेंद्र गहलोत को उम्मीदवार बनाया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा-किस कानून के तहत आरोपियों के होर्डिंग्स लगाए,ऐसा कोई प्रावधान नहीं,जो इसकी इजाजत देता हो

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा के आरोपियों के पोस्टर के हटाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 मार्च को दिए हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। गुरुवार को जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की वेकेशन बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा कि किस कानून के तहत आरोपियों के होर्डिंग्स लगाए गए। अब तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं, जो इसकी इजाजत देता हो। इस मामले में अगले हफ्ते नई बेंच सुनवाई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने की कार्रवाई को निजता में गैर जरूरी हस्तक्षेप करार दिया था।

    कोर्ट रूम में क्या हुआ…
    वेकेशन बेंच के सामने राज्य सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने कहा- ”यह मामला काफी अहमियत रखता है, क्या यूपी सरकार को ऐसे पोस्टर लगाने का अधिकार है। अब तक ऐसा कोई कानून नहीं है, जो सरकार की इस कार्रवाई का समर्थन करता हो।” इस पर मेहता ने कहा- निजता के अधिकार के कई आयाम हैं। पोस्टर हटाने के हाईकोर्ट के फैसले में खामियां हैं। ये लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल थे। सरकार के पास ऐसी कार्रवाई करने की शक्ति है।

    इस पर जस्टिस बोस ने पूछा- हिंसा के आरोपियों के होर्डिंग्स लगाने की शक्ति कहां मिली हुई है? हम सरकार की चिंता समझ सकते हैं। बेशक दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें दंडित किया जाए। लेकिन कानून में ऐसी कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं है।
    पोस्टर दंगाइयों को सबक सिखाने के लिए लगाए थे: सरकार

    मेहता ने कहा- जब प्रदर्शनकारी खुले में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान कर रहे हैं। मीडिया ने उनके वीडियो बनाए, सबने इन्हें देखा है। ऐसे में यह दावा नहीं कर सकते कि पोस्टर लगाने से उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। एक आदमी जो प्रदर्शन के दौरान हथियार लेकर पहुंचा हो और हिंसा में शामिल रहा हो। दंगाइयों के पोस्टर सबक सिखाने के लिए लगाए गए, ताकि आगे से लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से डरें। हिंसा के आरोपियों पर हर्जाना बकाया है।
    जस्टिस ललित ने पूछा- क्या प्रदर्शनकारियों को हर्जाना जमा करने की समय सीमा खत्म हो गई है। इस पर मेहता ने बताया कि अभी नहीं, उन्होंने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी है।
    आरोपियों के पोस्टर लगाना लिंचिंग के लिए खुला न्यौता: सिंघवी

    पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- दारापुरी 72 बैच के अधिकारी हैं, जो आईजी रैंक से रिटायर हुए थे। उनके भी पोस्टर लगाए गए। सरकार को संबंधित अधिकारियों को बताना था कि कानून के मुताबिक ही कार्रवाई की जाए। लेकिन सरकार की मंशा केवल अंतिम फैसले से पहले इन लोगों को बदनाम करने की थी। पोस्टरों में उनके नाम और पते तक लिखे गए हैं। यह एक तरह से आम लोगों को खुला न्यौता है कि कोई भी उनके घरों में घुसकर या राह चलते मारपीट करे।

  • तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने पूछा-मेरे पास ही बर्थ सर्टिफिकेट नहीं;देश के दलित,पिछड़े और गरीब ऐसे दस्तावेज कहां से लाएंगे

    हैदराबाद. तेलंगाना विधानसभा में शनिवार को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) लागू करने की प्रक्रिया पर हंगामा देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने कहा कि उनके पास अपना जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) तक नहीं है। ऐसे में अगर उनके पिता का प्रमाण पत्र मांगा जाए, तो उसे कैसे बनवाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा- देश के गरीब लोग इस तरह के दस्तावेज कहां से लाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से नागरिकों के लिए एक राष्ट्रीय पहचान पत्र पेश करने की मांग की।

    विधानसभा में 1 अप्रैल से एनपीआर की प्रक्रिया शुरू होने पर दस्तावेजों की जरूरत पर जारी बहस के दौरान उन्होंने कहा, “मेरे पास सरकारी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। मैं एक ऐसे गाँव में पैदा हुआ था, जहां कोई अस्पताल नहीं था। तब हम उस गांव के पुजारी से अपना नाम लिखवाते थे। मेरे पास पुजारी के हाथ का लिखा हुआ पत्र मौजूद है। जब मेरे पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, तो देश के लाखों दलित, पिछड़े और गरीबों के पास ऐसा दस्तावेज कैसे होगा?” केसीआर ने कहा- मेरे पिता के पास भी कोई जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को मेरी सलाह है कि वो एक राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करे।

    एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री राव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाली एनपीआर की प्रक्रिया को देखें, तो लगता है कि हमें सरकारी अफसरों की दया पर छोड़ दिया गया है। इससे गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। राज्य में एनपीआर को स्थगित किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री केसीआर ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के मुद्दे पर विधानसभा का एक अलग सत्र बुलाने की बात भी कही। इसमें सभी विधायक सीएए को लेकर अपनी राय रख सकते हैं।

  • कांग्रेस नेताओं की हठधर्मिता व अड़यल रुख अपनाने के कारण कांग्रेस पार्टी गर्त्त मे जा रही है।

    मध्यप्रदेश की हवा का रुख राजस्थान की तरफ होता नजर आ रहा है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    कांग्रेस का दिल्ली हाईकमान कमजोर होने व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री व पीसीसी चीफ जैसे दोनो पदो पर कमलनाथ के काबिज होकर सत्ता का बंटवारा करने की बजाय सत्ता की धुरी अपने तक सिमित रखने का ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़कर भाजपा से हाथ मिला चुके है। सिंधिया के साथ कांग्रेस के उन्नीस विधायको के पार्टी छोड़ने के समाचार आना भी कांग्रेस को बडा झटका है।

    मध्यप्रदेश मे कांग्रेस सरकार बनने को 18-महिने होने को आने के बावजूद मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं तो सत्ता का सुख भोगने मे किसी तरह की कमी नही छोड़ रहे है। लेकिन इसके उलट पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को सत्ता मे भागीदारी देने के लिये राजनीतिक नियुक्तियों के अब तक ना करने से उनके खिलाफ काफी गुस्सा पाया जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने से पहले राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से मिलना भी अनेक शंकाओ को जन्म दे रहा है। सिंधिया की दादी का भाजपा की दिग्गज नेता रहने व बुवाओ का नेता होने की तरह सचिन पायलट के पिता भी सोनिया गांधी के सामने पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुके है।

    कांग्रेस मे विचार विहीन नेताओं की बडी तादाद होने के कारण ही भाजपा के 167 मोजूदा सांसद कभी ना कभी कांग्रेस मे रहे है। नेताओं का एक बडा हिस्सा कांग्रेस मे रहते जरूर है लेकिन वैचारिक तौर पर वो संघ के काफी करीब होते है। जो केवल मात्र सत्ता सुख के लिये कांग्रेस मे रहते है जब उन्हें सत्ता नही मिलती है तो वो एक झटके मे सत्ता के लिये भाजपा मे जा मिलते है।

    मध्यप्रदेश मे लगातार 15-साल भाजपा की सरकार रहने के बावजूद जनता ने मुश्किल से कांग्रेस को सत्ता के करीब लाकर सत्ता सोंपी थी। लेकिन जिस किसान-दलित व मुस्लिम तबके के समर्थन के बल पर कांग्रेस सत्ता मे आई ओर सत्ता पाते ही इन्हीं तबको को भूल गई है। मध्यप्रदेश की तरह ही राजस्थान मे भाजपा को हटाकर कांग्रेस की सरकार बनाने मे किसान-दलित व मुस्लिम समुदाय के समर्थन की प्रमुख भूमिका रही थी। लेकिन सत्ता आते ही एक तबका सत्ता का आनंद ले रहा है। ओर सत्ता लाने वाला दूसरा तबका दलित-किसान व मुस्लिम बूरे दौर से गुजर रहे है।

    मध्यप्रदेश की तरह ही राजस्थान के मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत को 18-महिने होने को है। लेकिन सत्ता का बंटवारा कर नेताओं व कार्यकर्ताओं मे सत्ता मे भागीदारी बनाने की तरफ गहलोत ने किसी भी तरह के कदम नही उठाये है। सत्ता पर कुण्डली मारे बैठे गहलोत ने राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा लोकायुक्त, सूचना आयुक्तो, राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्यों के अतिरिक्त अनेक प्रकार के सवैधानिक पद जो रिक्त चल रहे है। उनमे से एक पद पर भी नियुक्ति नही की है। इसके अतिरिक्त महिला-किसान-एससी एसटी व अल्पसंख्यको के सम्बंधित बोर्ड व निगम पर नियुक्ति नही होने से उनमे निराशा के भाव पैदा हो चुके है। जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने पूत्र वैभव गहलोत के लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद जोड़-तोड़ करके सत्ता की ताकत के बल पर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन RCA का अध्यक्ष बनवा कर एक तरह से सत्ता सुख मे भागीदार बना दिया है।

    राजस्थान कांग्रेस सरकार मे भी सबकुछ ठीक नही चल रहा है। मुख्यमंत्री के टालते रहने की आदत से मजबूर एक मंत्री ने पिछले दिनो अपने स्तर पर जिला कन्जयूमर फोरम व स्टेट कन्जयूमर फोरम के सदस्यों का मनोनयन करके एक नई परिपाटी को जन्म दे दिया है।उक्त मनोनयन प्रक्रिया असंतोष दर्शाता है। अशोक गहलोत राजस्थान के तीसरी दफा मुख्यमंत्री बने है। 156 से अधिक सीट जीतकर 1998-03 तक अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद जब आम चुनाव हुये तो कांग्रेस 56 पर सीट आ लुढकी, फिर 2008-13 मे 96 सीट जीतकर फिर गहलोत मुख्यमंत्री बनने के बाद आम चुनाव मे कांग्रेस 21 सीट पर आकर लुढकी एवं अब यही हालात रहे ओर पांच साल पूरे होने पर चुनाव होगे तो पांच सीट भी आना मुश्किल माना जा रहा है। मध्यप्रदेश से कांग्रेस हाईकमान ने सबक लेकर सुधार नही किया तो राजस्थान भी मध्यप्रदेश की राह पकड़ सकता है।

  • राजस्थान:मकराना क्षेत्र में अन्धाधुन फायरिंग कर हत्या की वारदात का पर्दाफाष।

    अशफाक कायमखानी।मकराना (नागोर)!
    तीन मार्च को नागौर जिले के डीडवाना निवासी प्रार्थी मोहम्मद युसुफ, मोहम्मद फिरोज, अबरार हुसैन, नबाब, असलम व फिरोज कस्बा मकराना में एक शादी समारोह में शरीक होकर अपनी स्विफ्ट गाडी से वापस डीडवाना जाते समय रात्रि लगभग 8.00 बजे जुसरी तिराहा के पास मोहम्मद फिरोज पानी की बोतल लेने के लिये उतरा तभी अज्ञात मुलजिमान ने मोहम्मद फिरोज व उनकी गाडी की तरफ अन्धाधुन फायरिंग कर दी। फायरिंग में मोहम्मद फिरोज की मौत हो गई व नबाब गोली लगने से घायल हो गया। घटना पर प्रकरण संख्या 73/20 धारा 302,307,341,323/34 आईपीसी व 3/25 आम्र्स एक्ट पुलिस थाना मकराना पर दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।

    घटना की गम्भीरता को देखते हुये महानिरीक्षक पुलिस अजमेर रेंज अजमेर डाॅ0 हवासिंह धुमरिया के निर्देषन में डाॅ0 विकास पाठक पुलिस अधीक्षक, जिला नागौर के सुपरविजन में श्री नितेष आर्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीडवाना, श्री सुरेष कुमार सांवरिया वृताधिकारी मकराना व श्री गणेषाराम चैधरी वृताधिकारी डीडवाना के नेतृत्व में श्री जितेन्द्र चारण पुलिस निरीक्षक थानाधिकारी मकराना, श्री सुभाष चन्द पुलिस निरीक्षक थानाधिकारी परबतसर, श्री जगदीष प्रसाद मीणा थानाधिकारी डीडवाना, हैड कानि0 करामत खाँ, पर्वतसिंह, गजेन्द्रसिंह, कानि0 लतीफ खाँ, सुषील कुमार, राजेन्द्र मीणा व पुलिस अधीक्षक कार्यालय नागौर की साईबर सैल से हैड कानि0 लक्ष्मीनारायण यादव, मूलाराम गुजर एवं श्याम प्रताप गौड़ की अलग-अलग टीमों का गठन कर तत्काल प्रकरण का खुलासा कर मुलजिमान को गिरफ्तार करने हेतु निर्देष दिये गये।

    गठित टीम द्वारा घटनास्थल के आसपास की दुकानों व कस्बा मकराना के रास्तों पर होटल व ढाबांे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फूटेज प्राप्त कर दुकानदारों से मुलजिमान के बारे में जानकारी एकत्र की गई। पुलिस टीमों द्वारा आसूचना संकलन से जानकारी मिली की मुलजिमान द्वारा प्लसर मोटरसाईकिल से आकर वारदात को अंजाम दिया गया था एवं यह तथ्य भी जानकारी में आये की समीर नाम का अपराधी घटना के दिन मकराना आया हुआ था जिसके विरूद्ध पूर्व में भी लूटपाट एव संगीन अपराध के अनेक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस टीमों द्वारा घटना में प्रयुक्त मोटर साईकिल के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर मोटर साईकिल का मालिक सलीम उर्फ जगदीष पुत्र सदीक निवासी इकबालपुरा मकराना होना पाया गया जो लगातार मुलजिम समीर के सम्पर्क में होना भी जानकारी में आया। पुलिस टीम द्वारा सलीम उर्फ जगदीश को दस्तयाब कर पूछताछ करने पर यह तथ्य सामने आये की तीन फरवरी को आरीफ, अकबर, समीर व समीर के तीन अन्य साथी सलीम के इकबालपुरा स्थित मकान पर आये थे।

    वहां से सभी गांगवा रोड पर गये एवं शराब पीकर मकराना के एक व्यापारी की हत्या करने की योजना बनाई। योजना के अनुसार सभी मुलजिमान गांगवा रोड से मंगलाना रोड होकर मकराना गये जहां पर पुलिस नाकाबंदी देखकर नायकों की ढाणी होते हुये जुसरी तिराहा पहुंचे। वारदात में प्रयुक्त मोटरसाईकिल मुलजिम समीर द्वारा लाये गये शूटरों ने ले ली एवं समीर द्वारा सलीम उर्फ जगदीष, अकबर एवं आरीफ को अपनी कार में बैठा लिया गया। मुलजिमान ने योजनानुसार जुसरी तिराहा पर आकर कार को मालियों की ढाणी के रास्ते पर खड़ी कर दी एवं आरीफ को जिसकी हत्या करनी है उसके बारे में बताने को कहा गया। समीर द्वारा लाये गये शूटर जुसरी तिराहा पर खडे़ हो गये इसी दौराने मृतक मोहम्मद फिरोज पानी की बोतल लेने के लिये गाडी से उतरते समय वहां खड़े मुलजिम आरीफ से टकरा जाता है जिस पर समीर द्वारा लाये गये शूटरों नें मोहम्मद फिरोज पर अन्धाधुन फायरिंग शुरू की दी जिससे मोहम्मद फिरोज की गोली लगने से मौत हो जाती है व गाडी में बैठा नबाब गोली लगने से घायल हो जाता है।

    पुलिस टीम द्वारा प्रकरण में अब तक निम्न तीन मुलजिमान को गिरफ्तार किया जा चुका हैः-
    1. अकबर अली पुत्र मुस्तफा जाति गैसावत, निवासी नदी मौहल्ला, मकराना।
    2. मोहम्मद आरीफ पुत्र अब्दुल सलाम जाति गहलोत मुसलमान, निवासी दो मस्जिद कसाई मौहल्ला, मकराना।
    3. मोहम्मद सलीम उर्फ जगदीष पुत्र सदीक निवासी इकबालपुरा, मकराना।

    गिरफ्तार मुलजिमान का आपराधिक रिकाॅर्डः-
    1- अकबर अली पुत्र मुस्तफाः-
    क्र.सं. मुकदमा नम्बर/दिनांक पुलिस थाना, धारा
    1 96/26.2.02 मकराना, नागौर 379 भादस
    2 -437/22.11.06 मकराना, नागौर 302,201/34 भादस
    3 -393/16.12.09 मकराना, नागौर 341,323,352 भादस
    4 -325/26.9.10 मकराना, नागौर 341,323,384 भादस
    5- 372/11.10.10 मकराना, नागौर 302/34 भादस एवं एससी/एसटी एक्ट
    6-200/21.07.15 मोती डुंगरी, जयपुर 341.323.427 भादस व 4/25 आम्र्स एक्ट
    7-73/25.02.18 मकराना, नागौर 13 आरपीजीओ एक्ट
    8-90/10.03.17 सदर पश्चिम, जयपुर 13 आरपीजीओ एक्ट
    9-60/14.03.17 आदर्श नगर, अजमेर 395 भादस

    2. मोहम्मद आरीफ पुत्र अब्दुल सलामः-
    क्र.सं. मुकदमा नम्बर/दिनांक पुलिस थाना , धारा
    1-328/23.08.18 मकराना, नागौर 379 भादस
    2- 292/25.07.19 मकराना, नागौर 376(2)(ढ), 228(क), 384 भादस व 67 आईटी एक्ट
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