Category: देश

  • corona virus:बिहार में कोरोना से हुई पहली मौत,कतर से लौटा था शख्स

    बिहार में रविवार को कोरोना वायरस से एक व्यक्ति की मौत हो गई. प्रदेश में यह कोरोना से मौत का पहला मामला है. मृतक का नाम सैफ अली बताया जा रहा है. वह हाल ही में कतर से लौटा था. पटना एम्स में उसका इलाज चल रहा था. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इसकी पुष्टि की. बताया जा रहा है कि वह मुंगेर का रहने वाला था.

  • कोरोना पर केजरीवाल का ऐलान:72 लाख लोगों को 7.5 किलो फ्री राशन,बुजुर्ग-विधवा का पेंशन भी डबल

    ‌नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने शनिवार (21 मार्च) को कहा कि फिलहाल बंद जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस के मद्देनजर जरूरत पड़ने पर इसे करना होगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी तरह के पहले डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कोविड-19 के कारण पाबंदियों से गरीबों को भयानक वित्तीय परेशानी हो रही है।उन्होंने घोषणा की कि इन लोगों को अगले महीने से उचित मूल्य की दुकानों से 50 प्रतिशत अतिरिक्त राशन मिलेगा और इस महीने के लिए बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों की पेंशन दोगुनी की गई है।

    केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक सभाओं में लोगों की संख्या घटा दी है और अब पांच से अधिक लोगों को एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल बंद जैसी स्थिति नहीं है लेकिन कोरोना वायरस के मद्देनजर जरूरत पड़ने पर इसे करना होगा।

    उन्होंने कहा कि रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान दिल्ली की सड़कों पर 50 प्रतिशत बसें नहीं चलेंगी। उन्होंने कहा, ”सात अप्रैल तक 8.5 लाभार्थियों को 4000-5000 पेंशन दी जाएगी।” मुख्यमंत्री ने कहा, ”दिल्ली में 72 लाख लोगों को उचित मूल्य की दुकानों से राशन मिलेगा। राशन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इसे मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा।”

    उन्होंने कहा, ”हम कोरोना वायरस के मद्देनजर दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों के बारे में बहुत चिंतित हैं। हम नहीं चाहते कि कोई खाली पेट सोए।” केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के रैन बसेरों में बेघरों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

    देश में अब तक कोरोना वायरस के मामले:
    देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण के 40 से अधिक नए मामले सामने आने के बाद भारत में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर शनिवार को 271 हो गई। इन 271 लोगों में से 39 विदेशी नागरिक हैं। इन विदेशी नागरिकों में 17 इटली के, तीन फिलीपीन के, दो ब्रिटेन के तथा कनाडा, इंडोनेशिया एवं सिंगापुर का एक-एक नागरिक है। मंत्रालय ने कहा, ‘इस समय भारत में अब तक कोविड-19 से 23 लोग बीमारी से उबर चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है या वे देश से बाहर चले गए हैं और चार लोगों की मौत हो गई ह

    कहां कितने मामले:
    दिल्ली में कोरोना वायरस के अभी तक 26 मामले सामने आए हैं जिनमें एक विदेशी नागरिक है। उत्तर प्रदेश में 24 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें एक विदेशी नागरिक है। महाराष्ट्र में शनिवार तक मामलों की संख्या बढ़कर 63 पहुंच गई, जबकि केरल में 40 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें सात विदेशी नागरिक हैं। कर्नाटक में कोरोना वायरस के 16 मरीज हैं लद्दाख में अभी तक 13 और जम्मू-कश्मीर में चार लोग इससे संक्रमित हैं। तेलंगाना में संक्रमण के 21 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें 11 विदेशी हैं। राजस्थान में 17 मामले सामने आए हैं जिनमें दो विदेशी नागरिक है। वहीं, पंजाब में 13 मामले आए हैं। गुजरात में अभी तक सात मामले सामने आ चुके हैं।

    तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में तीन -तीन मामले दर्ज किए गए हैं। ओडिशा में दो तथा पुडुचेरी, छत्तीसगढ़ एवं चंडीगढ़ में एक-एक मामला सामने आया है। हरियाणा में 17 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं जिनमें 14 लोग विदेशी नागरिक हैं।

  • नाम जनता कर्फ्यू,लेकिन बेंगलुरु में पुलिस ने बाहर निकलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी,कश्मीर में कर्फ्यू जैसी ही पाबंदियां

    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से जनता कर्फ्यू के दिन सुबह 7 बजे से रात 9 बजे के बीच घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। इस दौरान श्रीनगर और बेंगलुरु जैसे शहरों में हालात वैसे ही होंगे, जैसे कर्फ्यू लगने पर होते हैं। प्रशासन की तरफ से इस तरह के बयान भी सामने आए हैं। कश्मीर में हिंसक घटनाओं का इतिहास होने की वजह से बंदिशें लगाने का फैसला किया गया है। वहीं, बेंगलुरु पुलिस ने बेवजह घर से बाहर निकलने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हम किसी तरह की सख्ती नहीं बरतेंगे, न ही कोई जुर्माना लगाएंगे।

    कश्मीर : लोगों की आवाजाही पर पाबंदी
    कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस विजय कुमार ने कहा कि जनता कर्फ्यू की अपील की गई है, लेकिन कश्मीर में लोगों की आवाजाही और एक जगह जरूरत से ज्यादा लोगों के इकट्‌ठा होने पर पाबंदियां लगेंगी। इन पाबंदियों को सख्ती से अमल में लाने के लिए एक्स्ट्रा पुलिस फोर्स की तैनाती होगी। हम लोगों से सहयोग की अपील कर रहे हैं। कुमार ने कहा- इसे भले ही जनता कर्फ्यू नाम दिया गया है, लेकिन कश्मीर का इतिहास ऐसा रहा है कि पुलिस या सुरक्षा बलों की तैनाती के बिना हम बंदिशों को अमल में नहीं ला सकते।

    बेंगलुरु : पुलिस चीफ ने कहा- बिना वजह बाहर निकले तो कार्रवाई होगी
    बेंगलुरु के पुलिस चीफ भास्कर राव ने कहा कि लोग बेवजह या बहुत जरूरी न होेने पर बाहर न निकलें और घर में ही रहें। अगर वे बेवजह या गैर-जरूरी होने पर बाहर निकले तो आईपीसी की धारा 269 और 270 (जानलेवा बीमारी का इन्फेक्शन फैलाने वाली लापरवाही) और महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    जनता कर्फ्यू नहीं मानने वालों पर जुर्माने की बात अफवाह : पुलिस
    दिल्ली पुलिस ने कहा कि रविवार को जनता कर्फ्यू लागू करने के लिए सख्ती या जुर्माना लगाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। इस तरह की बातें पूरी तरह से अफवाह हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक मैसेज में दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया गया था कि रविवार को दिल्ली में अगर कोई व्यक्ति बिना किसी बड़ी वजह के घूमता मिला, दुकान खोलता हुआ मिला तो उस पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने इस मैसेज को फर्जी करार दिया है।

    दिल्ली पुलिस का कोरोना पर ट्वीट- राहों में उनसे मुलाकात हो गई

    केंद्र ने राज्यों से कहा- साइरन की व्यवस्था करें
    केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से बात की है। उन्होंने सभी राज्यों के आला ब्यूरोक्रेट‌्स से कहा है कि वे लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से बात कर रविवार शाम 5 बजे साइरन की व्यवस्थाएं कराएं ताकि जनता अपने घर से ही कोरोना से निपटने में लगे लोगों का शुक्रिया अदा कर सके। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इसकी अपील की थी।

    देशभर में 3700 ट्रेनें नहीं चलेंगी
    शनिवार अाधी रात से रविवार रात 10 बजे तक देश के किसी भी स्टेशन से कोई ट्रेन शुरू नहीं होगी। रेलवे ने रविवार को देशभर में 2400 पैसेंजर और लंबी दूरी की 1300 एक्सप्रेस ट्रेनें नहीं चलाने का फैसला किया है।

    रेलवे ने ट्वीट कर लोगों से यात्रा से बचने की अपील की

    गोएयर की सभी और इंडिगो की 40% उड़ानें रद्द
    गो एयर ने रविवार को अपनी सभी उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है। वहीं, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने रविवार को 60% उड़ानें चलाने का फैसला किया है।

    मोदी ने दोबारा जनता से अपील की

    कोरोना के भय से मेरे बहुत से भाई-बहन जहां रोजी-रोटी कमाते हैं, उन शहरों को छोड़कर अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। भीड़भाड़ में यात्रा करने से इसके फैलने का खतरा बढ़ता है। आप जहां जा रहे हैं, वहां भी यह लोगों के लिए खतरा बनेगा। आपके गांव और परिवार की मुश्किलें भी बढ़ाएगा

    सभी शॉपिंग मॉल्स बंद रहेंगे, दुकानें भी नहीं खुलेंगी

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जनता कर्फ्यू का समर्थन करते हुए इस दिन देशभर की सभी दुकानों को बंद रखने का ऐलान किया है। देशभर के लगभग सभी राज्यों में शॉपिंग मॉल्स, बड़े मार्केट भी बंद रहेंगे। हालांकि, मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे। इन सबके अलावा मैकडॉनल्ड के सभी रेस्टोरेंट और आउटलेट बंद रहेंगे।

    जेल में बंद कैदियों से परिवार वाले भी नहीं मिल सकेंगे

    देश की जेलों में बंद कैदियों को रविवार के दिन अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से भी मिलने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा संस्थाओं और संस्थानों ने भी रविवार के दिन इकट्ठे होने पर रोक रहेगी।

    धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे, गोवा की चर्च में संडे प्रेयर भी नहीं होगी

    भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए कई बड़े मंदिर पहले ही बंद हो चुके हैं। रविवार को भी देश के कई मंदिरों में लोगों को आने की मनाही रहेगी। गोवा के आर्कबिशप फिलिप नेरी फैराओ ने सभी चर्च में रविवार के दिन होने वाली संडे प्रेयर भी कैंसिल कर दी है। दिल्ली के भी पहाड़गंज स्थित सेंट पीटर्स मार थॉमस सिरियन चर्च और सेंट्रल दिल्ली स्थित कैथेड्रल चर्च में भी संडे प्रेयर नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने भी रविवार के दिन होने वाली नमाज रद्द कर दी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का इस्लामी स्कूल दारुल उलूम देवबंद भी रविवार के दिन बंद रहेगा।

  • कोरोनावायरस:शाहीन बाग का फैसला,रविवार से 1 प्रदर्शनकारी सिर्फ 4 घंटे ही देंगे धरना

    नई दिल्ली: शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले तीन महीने से चल रहे प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने कोरोनावायरस की मौजूदा परिस्थिति में फैसला किया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी को अब चार घंटे से ज्यादा प्रदर्शन स्थल पर बैठने की इजाजत नहीं होगी।

    प्रदर्शनकारियों ने एजेंसी को बताया कि कोरोनावायरस महामारी की बढ़ती समस्या के कारण रविवार से यहां आने वाला कोई भी प्रदर्शनकारी सिर्फ चार घंटे ही धरनास्थल पर रहेगा, और उसके बाद वह यहां से चला जाएगा। यह व्यवस्था रविवार से लेकर कोरोनावायरस की समस्या समाप्त होने तक या कानून वापस होने तक जारी रहेगी।

    प्रदर्शनकारियों ने बताया कि रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान धरनास्थल पर माइक से किसी तरह की कोई घोषणा नहीं होगी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी फैसला किया है कि प्रदर्शनस्थल पर बच्चे और बुजुर्ग मौजूद नहीं होंगे, और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होगा।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने गुरुवार रात आठ बजे कोरोनावायरस को देखते हुए सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है। इसके बाद से ही लगातार यह सवाल उठ रहा है कि शाहीनबाग के लोग रविवार के दिन प्रदर्शन करेंगे या नहीं? इसके बाद ही शाहीनबाग की तरफ से यह फैसला किया गया है।

  • 15 महीने तक MP के ताज पर राज करने वाले कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में करीब दो सप्ताह से जारी सियासी संकट का पटाक्षेप हो गया और कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। शुक्रवार को शक्ति परीक्षण का सामना किए बगैर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कमलनाथ ने ऐलान कर दिया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कमलनाथ ने जाकर राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफा सौंपा। इस इस्तीफे में राज्यपाल को कमलनाथ ने पिछले दो सप्ताह में हुई सियासी घटनाक्रम की ओर इशारा किया है और इसे प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय बताया।

    राज्यपाल लालजी टंडन को लिखे त्यागपत्र में कमलनाथ ने लिखा, ‘मैंने अपने 40 साल के सार्वजनिक जीवन में हमेशा से शुचिता की राजनीति की है और प्रजातांत्रिक मूल्यों को सदैव तरजीह दिया है। मध्य प्रदेश में पिछले दो हफ्ते में जो कुछ भी हुआ, वह प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय है।’

    उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। साथ ही नए बनने वाले मुख्यमंत्री को मेरी शुभकामनाएं। मध्य प्रदेश के विकास में उन्हें मेरा सहयोग सदैव रहेगा।’

    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज शाम पांच बजे तक मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करने को कहा था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही आज दोपहर 2 बजे शुरू होने वाली थी, मगर शक्ति परीक्षण से पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना त्यागपत्र देने की घोषणा कर दी।

    कैसे संकट पैदा हुआ
    मालूम हो कि ज्योतिरादित्या सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के 11 मार्च को विधायक के पद से अपना त्यागपत्र देने से सियासी संकट पैदा हुआ। इनमें से छह के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत कर लिये थे, जबकि 16 बागी विधायकों के इस्तीफे कल देर रात को मंजूर हुए थे। इससे कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई थी। ये सभी विधायक वर्तमान में बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं।

  • निर्भया:आजाद भारत के इतिहास में पहली बार चार दोषियों को एक साथ दी गई फांसी

    नई दिल्ली:साल 2012 में राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड में आज करीब सवा सात साल के बाद इंसाफ हुआ है. तिहाड़ जेल के फांसी घर में शुक्रवार सुबह ठीक 5.30 बजे निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दी गई. निर्भया के चारों दोषियों विनय, अक्षय, मुकेश और पवन गुप्ता को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया और अब इनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाएगा.

    सात साल 3 महीने और तीन दिन पहले यानी 16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. सड़कों पर युवाओं का सैलाब इंसाफ मांगने के लिए निकला था और आज जाकर उसका नतीजा निकला है.

    निर्भया की मां आशा देवी ने लंबे समय तक इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी, आज जब दोषियों को फांसी दी गई तो उन्होंने ऐलान किया कि 20 मार्च को वह निर्भया दिवस के रूप में मनाएंगी. आशा देवी का कहना है कि वह अब देश की दूसरी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ेंगी.

    आखिरी पल तक हुई बचाने की कोशिश
    निर्भया के चारों दोषियों की ओर से आखिरी वक्त तक फांसी को टालने की कोशिश की गई. वकील एपी सिंह ने फांसी के दिन से एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को टालने के लिए याचिका दायर की गई, लेकिन इसमें दोषियों के खिलाफ फैसला आया.

    आधी रात को वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और जब सर्वोच्च अदालत बैठी तो वहां भी निर्भया के दोषी कुछ ऐसी दलील नहीं दे सके जिसकी वजह से ये फांसी टले. हालांकि, एपी सिंह लगातार इस फांसी को गलत बताते रहे और मीडिया-अदालत और राजनीति पर आरोप मढ़ते रहे

    16 दिसंबर की रात को क्या हुआ था?

    16 दिसंबर 2012 की रात को हिंदुस्तान में कोई शख्स नहीं भूल सकता. राजधानी दिल्ली के मुनिरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया. इस मामले में दरिंदगी की वो सारी हदें पार की गईं, जिसे देखकर-सुनकर कोई दरिंदा भी दहशत में आ जाए. वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था. दोषियों ने उसके साथ भी मारपीट की थी. इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था.

    पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया. वहां अस्पताल में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई. पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी.

    निर्भया के दोषियों को सजा दिलाने की लड़ाई दिल्ली की अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक होती रही. अदालती सुनवाइयों के दौरान ही निर्भया के एक दोषी ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद भी बाकी के चारों दोषियों ने कई बार कानूनी दांव-पेच खेले, कभी स्थानीय अदालत में याचिका तो कभी सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली. कई बार फांसी टली भी लेकिन आखिरकार शुक्रवार को चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया.

  • कोरोना:प्रधानमंत्री की अपील-22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू लगाएं,बाकी समय में भी जरूरी न हो तो घर से न निकलें

    नई दिल्ली. देश में कोरोनायरस के बढ़ते मामलों और गंभीर होते हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने गुरुवार को देश को संबोधित किया। उन्होंने रविवार यानी 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू लगाने की अपील की। यह जनता के लिए, जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू होगा। उन्होंने कहा कि इस 14 घंटे के दौरान कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर न निकले। शाम 5 बजे अपने-अपने घरों में से ही ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी बजाकर एकदूसरे का आभार जताएं और इस वायरस से लड़ने के लिए एकजुटता दिखाएं।

    यह मोदी का पिछले 6 साल में 5वां राष्ट्र के नाम संबोधन था। गुरुवार को उन्होंने 29 मिनट में करीब 1900 शब्दों का इस्तेमाल कर कोरोनावायरस से निपटने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि हर देशवासी अगले कुछ हफ्तों तक बहुत जरूरी न होने पर बाहर जाने से बचे। 60 से 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग घर में ही रहें। पढ़ें, उनकी कही 8 सबसे अहम बातें…

    1. जनता कर्फ्यू : रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक

    प्रधानमंत्री ने क्या अपील की?
    ‘‘पहले जब युद्ध की स्थिति थी, तब गांव-गांव ब्लैकआउट होता था। युद्ध न हो, तब भी साल में एक-दो बार नगर पालिकाएं ब्लैकआउट का ड्रिल करवाती थीं। इसलिए मैं आज प्रत्येक देशवासी से एक और समर्थन मांग रहा हूं। ये है- जनता कर्फ्यू। यानी जनता के लिए, जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू। इस रविवार यानी 2 दिन के बाद 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी देशवासियों को जनता कर्फ्यू का पालन करना है।’’

    लोगों काे करना क्या होगा?
    प्रधानमंत्री ने अपील की है कि इस जनता कर्फ्यू के दरमियान कोई भी नागरिक घरों से बाहर न निकले। न सड़क पर जाए। न सोसाइटी-मोहल्ले में लोग इकट्ठे हों। लोग अपने घरों में ही रहें।

    इस पर अमल कैसे होगा?
    प्रधानमंत्री ने देश की सभी राज्य सरकारों से जनता कर्फ्यू को अमल में लाने की कोशिशें करने को कहा है। एनसीसी, खेल संगठन और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से भी इसके लिए जागरुकता लाने की अपील की है। मोदी ने कहा- आप हर दिन 10 नए लोगों को फोन करके इस वैश्विक महामारी और जनता कर्फ्यू की बात बताएं और समझाएं।

    इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
    मोदी ने कहा- यह जनता कर्फ्यू हमारे लिए एक कसौटी की तरह होगा। यह कोरोना जैसी लड़ाई के लिए भारत कितना तैयार है, यह देखने-परखने का भी प्रयास होगा। जनता कर्फ्यू की कामयाबी और इसके अनुभव हमें आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे।

    2. दूसरों की सेवा करने वालों का आभार : रविवार 22 मार्च शाम 5 बजे

    प्रधानमंत्री ने क्या अपील की?
    मोदी ने कहा- 22 मार्च को मैं आपसे एक और सहयोग चाहता हूं। साथियो! पिछले दो महीनों से लाखों लोग अस्पतालों, एयरपोर्ट, दफ्तरों, शहर की गलियों में दिन-रात काम में जुटे हैं। चाहे डॉक्टर हों, नर्स हों, हॉस्पिटल का स्टाफ हो, सफाई करने वाले भाई-बहन हों, मीडियाकर्मी हों, पुलिसकर्मी हों, ट्रांसपोर्ट वाले हों, होम डिलिवरी करने वाले हों, ये लोग अपनी परवाह न करते हुए दूसरों की सेवा में लगे हैं। आज की परिस्थितियां देखें तो ये सेवाएं सामान्य नहीं कही जा सकतीं। आज भी ये खुद के संक्रमित होने का खतरा मोल ले रहे हैं, फिर भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। ये अपने आप में राष्ट्र रक्षक की तरह कोरोना महामारी और हमारे बीच में शक्ति बनकर खड़े हैं। देश ऐसे सभी छोटे-बड़े व्यक्तियों और संगठनांे का कृतज्ञ है। मैं चाहता हूं कि 22 मार्च को ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें। यह तरीका भी सभी को जोड़ सकता है।

    लोगों काे करना क्या होगा?
    प्रधानमंत्री ने कहा- जनता कर्फ्यू के दिन शाम 5 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर या बालकनी या खिड़कियों के सामने खड़े होकर 5 मिनट तक ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करें। इसके लिए ताली बजाकर, थाली बजाकर, घंटी बजाकर हम उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें, उनका हौसला बढ़ाएं और उन्हें सैल्यूट करें।

    इस पर अमल कैसे होगा?
    देशभर में स्थानीय प्रशासन इस पर अमल करेगा। 22 मार्च को शाम 5 बजे आपको सायरन सुनाई देगा ताकि अपने घर के दरवाजों और खिड़कियों तक पहुंच सकें।

    इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
    देश में पुलिसकर्मियों की संख्या 19 लाख के आसपास है। ये सभी ऑन ड्यूटी हैं। देशभर में 22 लाख हेल्थ वर्कर्स हैं। इनकी काेरोनावायरस को कंट्रोल करने में अहम भूमिका है। देश में 12 लाख डॉक्टर्स हैं। हर 10,926 नागरिकों पर एक सरकारी डॉक्टर है।

    3. अस्पताल न जाएं
    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे अस्पतालों पर दबाव बढ़ना नहीं चाहिए ताकि डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को इस महामारी को प्राथमिकता देने की सुविधा बने। रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल जाने की हमारी आदत से बचना चाहिए। जितना बच सकें, बचना चाहिए। आपको बहुत जरूरी लग रहा हो तो अपने फैमिली डॉक्टर या जान-पहचान के डॉक्टर से फोन पर ही आवश्यक सलाह ले लें। अगर आपने इलेक्टिव सर्जरी, जो बहुत आवश्यक न हो, उसकी तारीख ले रखी है तो इसे भी आगे बढ़ा दें।’’

    4. अर्थव्यवस्था, मिडिल क्लास और गरीब
    अर्थव्यवस्था : मोदी ने कहा- इस वैश्विक महामारी का अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। हमने काेविड-19 इकोनॉमिक टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया है। यह टास्क फोर्स सभी राज्यों से फीडबैक लेते हुए, आकलन लेते हुए निकट भविष्य में फैसले लेगी। यह टास्क फोर्स यह भी सुनिश्चित करेगी कि जितने भी कदम उठाए जाएं, उन पर अमल हो।

    मिडिल क्लास, गरीब : प्रधानमंत्री ने कहा- निश्चित तौर पर इस महामारी ने मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और गरीब को भी क्षति पहुंचाई है। उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि संभव हो ताे जिन-जिन लोगों से आप सेवाएं लेते हैं, उनका ध्यान रखें। हो सकता है कि आने वाले दिनों में वे दफ्तर न आएं, तो उनका वेतन न काटें। पूरी संवेदनशीलता के साथ फैसला लें। हमेशा ध्यान रखें कि उन्हें भी अपना परिवार चलाना है और परिवार को बीमारी से बचाना है।

    5. दूध, खाने-पीने की जरूरी चीजें
    मोदी ने कहा- मैं देशवासियों को इस बारे में आश्वस्त करता हूं कि दूध, खाने-पीने का सामान, दवाइयां और जरूरी चीजों की कमी न हो, इसके लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं। ये सप्लाई कभी रोका नहीं जाएगा। इसलिए जरूरी सामान संग्रह करने की होड़ न लगाएं। पहले की तरह सामान्य खरीदारी ही करें। पैनिक बाइंग न करें। ये ठीक नहीं है।

    6. संकल्प और संयम : घर से काम करें, सीनियर सिटिजन बाहर न निकलें
    संकल्प : प्रधानमंत्री ने कहा- आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों काे भी संक्रमित होने से बचाएंगे।

    संयम : मोदी ने कहा- इस बीमारी से बचने और खुद के स्वस्थ बने रहने के लिए दूसरी अनिवार्यता है संयम। और संयम का तरीका क्या है? भीड़ से बचना, घर से बाहर निकलने से बचना, आजकल जिसे सोशल डिस्टेंसिंग कहा जा रहा है। कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में सोशल डिस्टेंसिंग ज्यादा आवश्यक और कारगर है। अगर आप को लगता है कि आप ठीक हैं और आपको कुछ नहीं होगा, आप ऐसे ही मार्केट में सड़कों पर जाते रहेंगे और कोरोना से बचे रहेंगे तो ये सोच सही नहीं है। ऐसा करके आप अपने और अपने परिवार के साथ अन्याय करेंगे। मेरा देशवासियों से आग्रह है कि आने वाले कुछ सप्ताह तक जब बहुत जरूरी हो, तभी अपने घर से बाहर निकलें। चाहे काम ऑफिस, बिजनेस से जुड़ा हो, वह काम घर से ही करें। एक और आग्रह है, परिवार में जो भी सीनियर सिटिजन हैं जो 60-65 साल से ज्यादा आयु वाले हैं, वे आने वाले कुछ हफ्ते आइसोेलेट रहें और घर से बाहर न निकलें।

    7. मोदी ने कहा- मैंने आपसे जो भी मांगा, आपने कभी निराश नहीं किया
    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘प्रत्येक भारतवासी का सजग रहना, सतर्क रहना बहुत आवश्यक है। साथियो! आपसे मैंने जब भी जो भी मांगा है, मुझे कभी भी देशवासियों ने निराश नहीं किया है। ये आपके आशीर्वाद की ताकत है कि हम सब मिलकर अपने निर्धारित लक्ष्यों की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और सफल भी हुए हैं। आज मैं आप सभी देशवासियों, 130 करोड़ देशवासियों से, आप सभी से कुछ मांगने आया हूं। मुझे आपके आने वाले कुछ सप्ताह चाहिए। आपका आने वाला कुछ समय चाहिए।’’

    8. नवरात्रि में शक्ति के साथ आगे बढ़ने की अपील
    मोदी ने कहा, ‘‘हमें अभी अपना सारा सामर्थ्य खुद को कोरोना से बचाने में लगाना है। आज देश में केंद्र सरकार हो, राज्य सरकाों हों, पंचायतें हों, हर कोई अपने-अपने तरीके से इस वैश्विक महामारी से अपना योगदान दे रहा है। आपको भी अपना पूरा योगदान देना है। ये जरूरी है कि वैश्विक महामारी के इस वातावरण में मानव जाति विजयी हो, भारत विजयी हो। कुछ दिन में नवरात्रि का पर्व आ रहा है। यह शक्ति उपासना का पर्व है। भारत पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़े। इस संकल्प को लेकर आवश्यक संयम करते हुए आओ, हम भी बचें, देश को भी बचाएं। जगत को बचाएं। मैं आग्रह करूंगा जनता कर्फ्यू और सेवा करने वालों का धन्यवाद अर्पित करने के लिए।’’

  • रंजन गोगोई का राज्यसभा में नामांकन राष्ट्र के लिए शर्म की बात: पीके कुन्हालिकुट्टी।

    नई दिल्ली:– केरल के मलप्पुरम के सांसद और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय महासचिव पीके कुन्हालिकुट्टी ने बुधवार को भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का राज्यसभा में नामांकन को राष्ट्र के लिए शर्म की बात बताया। नामांकन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर संदेह पैदा करता है। कुन्हालिकुट्टी ने कहा, लोगों को संदेह होना स्वाभाविक है कि क्या यह निवर्तमान CJI के लिए सरकार द्वारा इनाम है। खासकर बाबरी फैसले आदि की पृष्ठभूमि में यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह नामांकन अतीत में किसी अन्य नामांकन की तुलना में विशेष रूप से गंभीर प्रकृति का है । कुन्हालिकुट्टी ने कहा, रंजन गोगोई की मौजूदगी उच्च सदन के लिए शर्म की बात होगी।

  • राज्यसभा चुनाव की नज़दीक आती तारीख़ और मध्य प्रदेश में बढ़ता सियासी तापमान ।

    MOHD SAIF ALIAS UROOZ SAIFI

    भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा के मायने।
    भारतीय लोकतंत्र में निरंतर चलने वाली सभा को राज्यसभा के नाम से जाना जाता है ।जहाँ लोकसभा में सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं तो वहीँ दूसरी तरफ राज्यसभा के सदस्य हर राज्य में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि यानि विधायक द्वारा चुने जाने की प्रक्रिया से होकर गुजरती है। वैसे तो अक्सर सीटें खाली होती रहती हैं जिससे समय समय पर भारत में चुनाव होते रहते हैं लेकिन राज्यसभा में 1 तिहाई सीट हर 2 वर्ष के अंतराल पर खाली होती रहती है ।हर एक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और हर 2 वर्ष पर एक तिहाई सीटें खाली होती हैं जिससे यह राज्यसभा हमेशा अस्तित्व में रहती है
    2020 में भी ऐसी ही कुछ सीटें खाली हो रही है जिनका या तो कार्यकाल पूरा हो चूका है या फिर वह किसी कारण रिक्त हैं ।ऐसे में खाली सीटों पर तमाम राजनितिक पार्टियां जिनके चुनाव चिन्ह पर चुनकर आये विधायक उन राज्यो में मौजूद है जिन राज्यो की खाली हुई सीटों के लिए चुनाव होने हैं उन्होंने राजनितिक समीकरण और जोड़तोड़ करना शुरू कर दिया है

    ऐसा ही एक राज्य मध्य प्रदेश है जहाँ पर खाली होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों के लिए राजनितिक सरगर्मी शुरू हो चुकी है,तो आइये समझते हैं मध्य प्रदेश के इस पुरे सियासी गणित को।

    राज्यसभा तो बहाना है,भाजपा को कमल खिलाना है-
    सियासी उठापठक का केंद्र बन चुके मध्य प्रदेश में राज्यसभा के लिए खाली होने वाली 3 सीटों के लिए चुनाव होने हैं लेकिन दोनों सियासी पार्टियाँ इस चुनाव की आड़ लेकर राज्य में सरकार बनाने/बचाने की भी क़वायद में जुटी हुई हैं। मध्य प्रदेश में काँग्रेस सरकार कुछ निर्दलीय और सपा विधायको के भरोसे चल रही थी। राज्यसभा चुनाव की रस्साकसी देखते हुए मध्य प्रदेश की राजनीति में ख़ास पकड़ रखने वाले काँग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा सीट की दावेदारी को भंवर में पड़ता देख हाल ही में अपनी पार्टी से रिश्ता तोड़कर भाजपा के पाले में जाने का फैसला कर लिया ,यही नही बल्कि वह अपने साथ कुछ विधायको को भी तोड़कर ले गए जिनकी संख्या लगभग 22 के करीब बतायी जा रही है। सिंधिया और उनके कुछ करीबी विधायको का काँग्रेस से दूर जाना मध्य प्रदेश की राजनीति में आसान बने समीकरण को बहुत ही जटिल बना दिया। जहाँ यह कयास लगाये जा रहे थे कि राज्यसभा की खाली होने वाली 3 सीटों में काँग्रेस के 2 सदस्य और भाजपा का एक ही सदस्य पहुंच पायेगा लेकिन सिंधिया और कुछ विधायको के काँग्रेस छोड़ते ही समीकरण उल्टा पड़ने के साथ साथ राज्य की चलती सरकार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।राजनितिक विश्लेषक तो इसे राज्य में भाजपा के मिशन कमल से जोड़कर देखने लगे हैं जिनमे काँग्रेस सरकार को अस्थिर करके राज्य में कमल खिलाना है ।

    राज्यसभा सीट और उम्मीदवार-
    राज्य में खाली होने वाली तीन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए दोनों पार्टियों ने तीन तीन उम्मीदवारो के नामांकन दाख़िल किये हैं ।जहाँ एक ओर भाजपा की तरफ से उनक पुराने दुश्मन और नए नवेले दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक सुरक्षित सीट दी गयी है वहीँ बाकी बची दो सीटों पर क्रमशः सुमेर सिंह सोलंकी और श्रीमती रंजना बघेल का नामांकन करवाया है ।अंदरखाने में खबर चल रही है कि पहले सुमेर सिंह सोलंकी का नाम आलाकमान ने फाइनल किया था लेकिन राज्य के अंदरूनी सलाह पर सोलंकी को नामांकन वापस लेने को कहा गया और उनकी जगह श्रीमती रंजना बघेल को नामांकन करने को कहा गया।
    वहीं दूसरी ओर काँग्रेस पार्टी ने भी चौंकाते हुए तीनो सीट पर अपने तीन प्रत्याशी उतार दिए हैं जिनमे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पहले नम्बर पर और फूलसिंह बरैया दूसरे तथा तीसरे नम्बर पर श्री रामदास को नामांकन करवाया है।ज्ञात हो कि फूल सिंह बरैया चंबल क्षेत्र में काफी पकड़ रखते हैं और सिंधिया के जाने के बाद की भरपाई के लिए काँग्रेस ने उन्का नाम फाइनल किया है वहीं तीसरे प्रत्याशी के बारे में कयास लगाया जा रहा है कि राजनितिक समीकरण कब बन बिगड़ जयें इसका कोई भरोसा नही इसलिए नामांकन करवा कर राम भरोसे छोड़ दिया गया है और मौका लपकने की उम्मीद में लोग बैठे हैं।

    विधानसभा में दलीय स्थिति और अनुमानित समीकरण-
    मध्य प्रदेश विधानमंडल में टोटल 230 सीटें है जिनमे वर्तमान समय में काँग्रेस के 108 विधायक हैं,ज्ञात हो कि कांग्रेस के टोटल 114 विधायक थे जिनमें हाल ही में 6 विधायकों के इस्तीफ़े स्पीकर ने स्वीकार कर लिए हैं जिससे इस समय कांग्रेस के विधायकों की कुल संख्या 108 बची हुई है हालांकि अभी लगभग 13 और काँग्रेसी विधायको के इस्तीफों को स्वीकार नही किया गया है जो इस वक्त बैंगलोर के एक होटल में आराम फरमा रहे हैं ।भाजपा अपने 107 विधायको के साथ नम्बर 2 पर मौजूद है हालांकि भाजपा के भी कुछ विधायको के पाला बदलने की खबरें बीच बीच में उठती रहती है।बाकी बची हुई 15 सीटों पर 2 सीटें सपा के कब्जे में,1 सीट बसपा के कब्जे में,4 सीटें निर्दिलीय विधायको के पास और बाकी की 8 सीटें रिक्त हैं ।सियासी उठापठक के दौर को देखते हुए अनुमान लगाया जाना मुश्किल है लेकिन अगर इन्ही संख्याबल पर दोनों पार्टियां राज्यसभा चुनाव में उतरती हैं तो एक एक सीट दोनों पार्टियों के लिये सुरक्षित है लेकिन तीसरी सीट जिसपर सबसे अधिक जटिलता है उसे हासिल करने के लिए दोनों पार्टियों को जीतोड़ मेहनत करने की ज़रूरत पड़ सकती है।

    फिलहाल एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोट (विधायको)की ज़रूरत पड़ने वाली है ।इस हिसाब से एक एक सीट निकल जाने के बाद भाजपा के पास 49 वोट और वही काँग्रेस के पास 50 वोट बचे रहेंगे इस स्थिति में निर्दलीय विधायक और अन्य छोटे दलो की स्थिति बहुत ही निर्णायक होने वाली है,वहीं दोनों तरफ से क्रॉस वोटिंग होने की भी पूरी संभावना है।सबकी निगाहें उन बागी विधायकों पर भी है जो कमलनाथ सरकार का साथ छोड़ने का एलान कर चुके हैं। आगामी 26 मार्च को इन सीटों पर चुनाव होने हैं जहाँ विधायक अपने मत का प्रयोग करके राज्यसभा में अपनी पार्टी का प्रतिनधित्व सुनिश्चित करेंगे। मौजूद माहैल ने मध्य प्रदेश के राजनितिक तापमान को काफी हद तक बढ़ा दिया है जिसके घटने की सम्भावना 26 मार्च से पहले सम्भव होती नही दिख रही है।

  • तेलंगाना:मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने भी विधानसभा में CAA,NPR और NRC के खिलाफ किया प्रस्‍ताव पास।

    नई दिल्ली:बिहार,केरल,पंजाब,राजस्थान,पश्चिम बंगाल,पुदुचेरी,दिल्ली और मध्य प्रदेश विधानसभाओं के बाद अब तेलंगाना विधानसभा में सीएए,एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ सोमवार को प्रस्ताव पास हुआ है।

    मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने विधानसभा में कहा कि ऐसे लाखों लोग हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में केंद्र को संशोधित नागरिकता कानून पर एकबार फ‍िर से विचार करना चाहिए।

    इस प्रस्ताव के पास होने से पहले सीएम चंद्रेशेखर राव ने कहा कि जो भी इन कानूनों के खिलाफ कुछ भी कह रहा है उसे सरकार देश विरोधी कह रही है, ऐसा हो सकता है कि आज तेलंगाना की विधानसभा को भी देश विरोधी कह दिया जाए।

    केसीआर ने अपने संबोधन में कहा कि देश में जिस तरह से एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, किसी भी सभ्य समाज में ऐसा नहीं होना चाहिए। ये बात सिर्फ किसी एक समुदाय की नहीं पूरे देश के हित से जुड़ी हुई है। केसीआर ने कहा कि केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों पर पुन: विचार करना चाहिए।

    बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के संसद में पास होने के बाद से ही असम और पूर्वोत्तर सहित देशभर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। दिल्ली के शाहीन बाग़ में बीते तीन महीने से अधिक समय से महिलाएं इस कानून के खिलाफ धरने पर बैठी हुई हैं. वहीं शाहीन बाग़ के आधार पर मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद सहित देश के कई शहरों पर महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं।

    एक तरफ देश के कई हिस्सों में आज भी इस कानून के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी है, वहीं कई राज्यों ने इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं. इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दायर हुई है. किन्तु केंद्र की मोदी सरकार इस कानून पर एक कदम भी पीछे हटने के तैयार नहीं है।

    बीते गुरुवार को संदस में इस मसले पर जबर्दस्‍त बहस देखने को म‍िली थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में विपक्षी नेताओं पर सीएए और एनपीआर के मसले पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। उन्‍होंने कहा था कि यह भ्रम फैलाया गया कि सीएए से उनकी नागरिकता छिन जाएगी।

    बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (12 मार्च) को राज्यसभा में जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को अपडेट करने के लिए किसी तरह के दस्तावेज को दिखाने की जरूरत नहीं है और जो कुछ जानकारी मांगी जा रही है वो वैकल्पिक हैं।