Category: देश

  • कोरोना जैसी जानलेवा संक्रामक महामारी को धार्मिक रंग देना दुःखद:-मौलाना अरशद मदनी

    लॉकडाउन का उल्लघंन करने वालो पर सख्त कार्यवाही हो:- मौलाना अरशद मदनी

    नई दिल्ली:- कोरोना वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व की मानवजाति पर सबसे बड़ा खतरा है और बिना सामूहिक प्रयास के इससे बचना नामुमकिन है इसके लिए सभी को लॉकडाउन की शर्तो को मानना चाहिए. अभी हाल ही में लॉकडाउन के नियमो के उल्लघंन को लेकर तब्लीगी जमात मरकज़ के संबंध में मीडिया में होने वाले नकारात्मक प्रचार के संदर्भ में मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि अगर मरकज ने लॉकडाउन के नियमो की अवहेलना की हो तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और ये भी देखना चाहिए लॉकडाउन के दौरान पूरे देश में कहा कहा धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत गतिविधियां हुई जिसमें लॉकडाउन के नियमो का उल्लघंन हुआ.

    मरकज के मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा कि मरकज का आयोजन कई महीनों पहले से ही आयोजित था फिर भी मरकज प्रशासन ने प्रधानमंत्री मोदी जी की अपील “जो जहां है, वही रहे” का पालन किया और मस्जिद मे ठहरे हुए यात्रियों कि जानकारी संबंधित प्रशासन को दी और उन्हें बाहर निकालने का अनुरोध भी किया लेकिन प्रशासन ने जमात की मांग को अनसुना किया. मदनी ने कहा कि मरकज के मसले पर प्रशासनिक लापरवाहियां हुई जिसकी जांच आवश्यक है.

    लॉकडाउन के संबंध में मदनी ने कहा कि देश में कई जगह लॉकडाउन के नियमो का घोर उल्लघंन हुआ है जिसकी जांच की जानी आवश्यक है.
    अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि मरकज मुद्दे को लेकर कोरोना जैसी महामारी को धार्मिक रंग देना शर्मनाक है और जो भी ऐसी सोच रखते है वो अपने धार्मिक एजेंडे की आड़ में कोरोना के खिलाफ विश्वव्यापी लड़ाई को कमजोर कर रहे है

  • दिल्‍ली में तबलीगी जमात की घटना का अपराधीकरण व साम्प्रदायिकीकरण करने की कोशिशें निन्‍दनीय व भर्त्‍सना योग्‍य कृत्‍य है:माले

    नई दिल्‍ली,मार्च महीने के मध्‍य में तबलीगी जमात के दिल्‍ली में हुए एक अंतर्राष्‍ट्रीय समारोह का अपराधीकरण एवं साम्‍प्रदायिकीकरण करने की हो रही कोशिशें बेहद निन्‍दनीय कृत्‍य है जिसकी भर्त्‍सना होनी चाहिए.

    विदेशों से आने वालों की कोरोना वायरस संक्रमण की जांच की जिम्‍मेदारी और बड़े आयोजनों को रोकने के लिए एडवाइजरी/निर्देश जारी करने का अधिकार केन्‍द्र सरकार के पास है. लेकिन केन्‍द्र ऐसा करने में पूरी तरह से असफल हुआ है. इसके विपरीत मार्च का आधा महीना बीत जाने के बाद भी सरकार इस बात से ही इंकार कर रही थी कि कोविड-19 के कारण भारत के लिए कोई बड़ा खतरा (‘हैल्‍थ इमर्जेन्‍सी’) हो सकता है. उल्‍टे वह तो विपक्षी नेताओं पर आरोप लगा रही थी कि वे वायरस के बारे में बेवजह एक काल्‍पनिक भय ‘पैनिक’ (भगदड़) खड़ा कर रहे हैं.

    भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया था. लेकिन पूरा फरवरी भर महीना केन्‍द्र सरकार ने इसके फैलाव को रोकने का कोई काम नहीं किया, और न ही इससे आगे निपटने के लिए कोई तैयारी की. इसके उलट सरकार ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रम्‍प के स्‍वागत में बड़ी-बड़ी भीड़ें जमा कर और रैलियां कर हजारों हजार लोगों को इस वायरस से संक्रमण के खतरे के आगे खुला छोड़ दिया. दूसरी ओर शासक पार्टी भाजपा के समर्थकों ने फरवरी के महीने में दिल्‍ली में दंगाई भीड़ों की अगुवाई की. जब फरवरी के शुरू में कोविड-19 के कारण आसन्‍न महामारी के खतरे के प्रति विपक्षी नेता चेतावनी दे रहे थे तब केन्‍द्र सरकार उनका मखौल बना रही थी.

    यही नहीं, जब यह खतरा सभी के सामने स्‍पष्‍ट हो गया था और लॉकडाउन की घोषणा हो चुकी थी, तब भी भाजपा के नेता और समर्थक बड़े बड़े आयोजन करने में सबसे आगे थे. 700 सांसदों ने संसद के सत्र में हिस्‍सा लिया, वहीं भाजपा ने मध्‍यप्रदेश की विधानसभा में एक तख्‍तापलट को अंजाम दिया और फिर उस तख्‍तापलट का जश्‍न मनाने के लिए 24 मार्च को एक बड़े जमावड़े का आयो‍जन भी किया गया.

    दिल्‍ली की सरकार ने भी तबलीगी जमात के उक्‍त आयोजन, जो पूरी तरह से कानून के दायरे में हुआ था, के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है. यह आयोजन दिल्‍ली पुलिस (जो केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है) और दिल्‍ली सरकार के तहत आने वाले सम्‍बंधित एसडीएम कार्यालय की अनुमति और सहयोग से किया गया था. यदि यह गैरकानूनी था तो दिल्‍ली सरकार ने उसी समय आदेश जारी कर इसे रोका क्‍यों नहीं?

    जमात के खिलाफ आपराधिक मामला, और साथ साथ टीवी चैनलों व सोशल मीडिया में चलाये जा रहे जहरीले और अमानवीय दुष्‍प्रचार से यह खतरा भी है कि उक्‍त आयोजन में हिस्‍सा लेने और वायरस से संक्रमण की संभावना वाले लोग डर के मारे अपना टेस्‍ट एवं इलाज कराने के लिए आगे आने में हिचकिचायेंगे.
    इस आयोजन में आये लोगों में कोविड-19 संक्रमण के मामले पता चले जिनमें कईयों की मौत हो चुकी है. सच तो यह है कि इसी दौरान बहुत से बड़े बड़े धार्मिक और राजनीतिक आयोजन किये गये और भारत चूंकि कोविड-19 की टेस्टिंग लगभग नहीं हो रही, इसलिए यह जानना मुश्किल है कि इन आयोजनों/समारोहों में और कितने लोग संक्रमित हुए होंगे.

    इस दौरान शिरडी के साईबाबा मन्दिर में समारोह हुआ, एक अन्‍य आयोजन सिख समुदाय द्वारा किया गया, और हाल ही में वैष्‍णोदेवी गये तीर्थयात्रियों के बारे में पता चला जो लॉकडाउन के कारण लौट नहीं पा रहे (इससे दूरस्‍थ पर्वतीय समुदाय में भी संक्रमण का खतरा बन सकता है). इन सभी आयोजनों व समारोहों और तबलीगी जमात के आयोजन को, किसी भी तरह से आपराधिक कृत्‍य नहीं माना जा सकता. और न ही इनको साम्‍प्रदायिकता के चश्‍मे से देखना चाहिए. जिम्‍मेदार तो केन्‍द्र की सरकार है जो ढुलमुल रवैया अपनाती रही और स्‍पष्‍ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किये, अत: इन आयोजनों के बारे में निर्णय करने का काम आयोजक संगठनों या व्‍यक्तियों के विवेक पर चला गया.

    केन्‍द्र सरकार कोविड-19 संकट के मीडिया और सोशल मीडिया कवरेज पर बंदिशें लगाने के लिए अदालत का सहारा लेने की कोशिश में है ताकि बिना ‘सरकारी अनुमति के’ कुछ भी प्रकाशित न हो पाये. यह सभी के सामने स्‍पष्‍ट है कि भीड़ कम करने के नाम पर जो लॉकडाउन किया गया है उससे उल्‍टे नतीजे निकले हैं और विशाल भीड़ें जमा हो रही हैं. इस लॉकडाउन के कारण भूख से, सड़क दुर्घटनाओं से, पुलिस बर्बरता से, और किसानों की आत्‍महत्‍याओं में मौतें हो रही हैं, और प्रवासी मजदूरों तथा गरीब मजदूर-किसानों की पीड़ा एवं संकट कई गुना बढ़ चुका है. इन सबके बीच में मीडिया और सोशल मीडिया में बेरोकटोक चल रहे साम्‍प्रदायिक नस्‍लवादी मुस्लिमविरोधी दुष्‍प्रचार को रोकने के लिए सरकार कोई कोशिश नहीं कर रही, जिसमें कोविड-19 को मुस्लिम समुदाय या चीनी लोगों से जोड़ा जा रहा है. उत्‍तर पूर्व भारत के लोगों को पहले से ही कोविड-19 के नाम पर नस्‍लीय भेदभाव, घृणा अपराधों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. अब मुस्लिम समुदाय को उसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश हो रही है.

    हम भारत की जनता से अपील करते हैं कि कोविड-19 की महामारी का साम्‍प्रदायिकीकरण करने की साजिश को दृढ़ता के साथ नाकाम करें, और सभी की मदद करने के लिए खुल कर सामने आयें, कहीं भी भीड़ भाड़ न बनने दें, इस वायरस की रोकथाम के लिए सभी उपायों को लागू करें.

  • मरकज निजामुद्दीन:सरकार जो एफआईआर करने की बात कर रही है वह एक साजिश:मीना तिवारी

    पटना: तथ्य बताते हैं कि बड़े आयोजनों पर रोक की घोषणा के बाद मरकज निजामुद्दीन ने अपने धार्मिक आयोजन को जिसमें देश – विदेश के सैकड़ों लोग शामिल थे , स्थगित कर सरकार से बार बार आग्रह किया कि वहां मौजूद लोगों को उनके घर भेजने के लिए गाड़ियों को परमिशन दिया जाए.

    लॉकडाउन की घोषणा के बाद संस्था ने प्रशासन को अपने यहां फंसे लोगों की सूचना दी और SDO ने जाकर जांच पड़ताल भी की . वहां कुछ लोग कोरोना पीड़ित हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जो प्रशासन की जानकारी और सहयोग से हुआ. लेकिन अब दो दिनों से मीडिया में जिस तरह इस पूरे मामले को पेश किया जा रहा है और सरकार जो एफआईआर करने की बात कर रही है वह एक साजिश है , प्रवासी मजदूरों में सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ उभरते गुस्से को मुसलमानों की तरफ मोड़ देने की.
    Meena Tiwari
    सेंट्रल कमेटी मेम्बर भाकपा-माले
    राष्ट्रीय महासचिव AIPWA

  • हां तबलीगी जमात से मौलाना साद के आचरण के कारण वैचारिक मतभेद है और बने रहेंगे,लेकिन आभी हम उनके साथ है:डॉ अब्दुल्लाह मदनी

    (डॉ। अब्दुल्ला मदनी)
    हां, तबलीगी जमात के साथ मेरे कुछ वैचारिक मतभेद हैं और मौलाना साद साहब के आचरण के कारण बने रहेंगे, लेकिन अब मैं कुछ वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनके साथ हूं और इस देश के सभी संगठन अपने मतभेदों से ऊपर उठते हैं। उसे साथ आना चाहिए अन्यथा वह आज निशाने पर है। कोई और भी ऐसा ही करेगा। जिस तरह से पूरे संघ और दंगा मीडिया ने कोरोना वायरस के संदर्भ में सरकार की जगह निजामुद्दीन को केंद्र में लाने में सरकार की विफलता पर बहस की है वह एक बहुत ही दुखद और घृणित प्रक्रिया है। वह हिंदुओं, मुसलमानों के बीच इस घातक बीमारी को फैलाने और सरकार के नफरत के एजेंडे को फैलाने में भी शामिल है। मीडिया को अब सरकार से पूछना चाहिए था कि

    1. अब तक कितने अस्पतालों और परीक्षण प्रयोगशालाओं का प्रबंधन किया गया है?
    2. डॉक्टर को दी गई सभी सुविधाएं या नहीं?
    3. अब तक कितने वेंटिलेटर प्रबंधित किए गए हैं? 4. गरीब लोग हैं, किसान हैं, मजदूर हैं, फंसे हैं, खाना मिल रहा है या नहीं?
    5. उनके पास रहने की सही व्यवस्था है या नहीं?
    6. सरकार द्वारा प्रतिदिन कितने लोगों का परीक्षण किया जा रहा है?
    7. घर के राशन और पैसे देने के लोगों के वादे पर सरकार द्वारा कितना काम किया जा रहा है?
    8. मन्त्री मन्त्री राहत कोष और पीएम केयर में अब तक जुटाए गए धन का क्या हो रहा है?
    9. इन सवालों के अलावा, जो लोग तब्लीगी समूह में आए हैं, उनसे यह भी पूछा जाना चाहिए कि जब बाहरी पार्टी के अवसर पर आते हैं, तो उन्हें हवाई अड्डे पर दिखाया गया था?

    10. कोरोना वायरस से प्रभावित देशों के लोगों का परीक्षण किया गया है या नहीं? यदि हां, तो क्या वे सकारात्मक या नकारात्मक पाए गए थे? यदि सकारात्मक है, तो उनका इलाज किया जाता है या नहीं? 11. यदि निगेटिव पाए गए, तो अब उनकी क्या स्थिति है?
    जब निजामुद्दीन ने समय पर पुलिस को सूचित किया, तो उन्हें क्यों नहीं निकाला गया और उन्हें सही जगह पर ले जाया गया, और उन्हें देरी क्यों हुई?
    12. उन नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है जिनके लॉकडाउन का अब तक उल्लंघन किया गया है? (जैसे योगी आदित्य आदि)
    13. क्या Ayodhya में सभी लोग testing की, और यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
    14. सरकार ने हजारों की तादाद में सड़क पर निकले गरीबों और मजदूरों के लिए एक परीक्षण प्रयोगशाला का आयोजन किया है?
    15. सरकार ने अब तक हज़ारों लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की है, जिन्होंने प्लेट पर बाहर आकर ताली बजाई ?
    16. बिना किसी तैयारी के तालाबंदी क्यों की गई और अगर ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया, तो आम जनता के लिए व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
      इन सवालों पर मीडिया चुप क्यों है? क्या

    देश में एक हिंदू मुस्लिम इस घातक बीमारी को दूर कर सकता है? हमें मीडिया के खिलाफ आवाज उठाने और उनके नफरत के एजेंडे के प्रसार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है। हम देश के सभी वकीलों और सामाजिक संगठनों से अपील करते हैं कि वे मीडिया का सहारा लें और कानून का सहारा लेते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और उन्हें ऐसा करने से रोकें, वरना एक समय ऐसा आएगा। कोई भी सरकार द्वारा गरीब लोगों की जरूरतों और उत्पीड़न के खिलाफ हमारी आवाज नहीं उठाएगा। सरकारी उत्पीड़न करने वाले न केवल गरीब लोग हैं, बल्कि वकील, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी और व्यापारी, शिक्षक, सिर्फ इसलिए कि किसी भी समुदाय के लोग हो सकते हैं और शौकीन हैं, उन्हें सभी को सच्चे मीडिया की आवश्यकता है। हमेशा रहेगा, इसलिए हमें मीडिया पर लगाम लगाने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है।

  • फेसबुक पर कोरोना वायरस की झूठी अफवाह फैलाकर आमजन को गुमराह करने वाला युवक गिरफ्तार

    अशफाक कायमखानी,जयपुर 28 मार्च। सोशल मीडिया फेसबुक पर ‘कोटा के रामगंजमण्डी में दो व्यक्ति कोरोना वायरस से मर चुके है’’ की झूठी खबर वायरल करने के आरोपी को थानाधिकारी खानपुर ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी राधेश्याम पुत्र घांसी लाल धाकड़ (25) थाना खानपुर क्षेत्र के धाकड़ मोहल्ला का रहने वाला है।

    झालावाड़ एसपी श्री राममूर्ति जोशी ने बताया कि शनिवार को अफवाह के बारे में थानाधिकारी खानपुर श्री कमल चन्द मीणा को पता चला तो आरोपी राधेश्याम को डिटेन कर पूछताछ की तो कहने लगा कि मै तो मजाक कर रहा था।

  • मोदी सरकार के अविवेकपूर्ण फैसले के कारण लाखों मजदूरों का जीवन संकट में:इंसाफ मंच

    *प्रवासी मजदूरों के ठहराव संबंधी तत्काल व्यवस्था करे दिल्ली-पटना की सरकार.*

    प्रेस रिलीज़, दरभंगा 29 मार्च 2020
    इंसाफ मंच दरभंगा बिहार राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद ने मजदूरों के बीच मची भगदड़ की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इससे कोरोना का प्रसार और तेजी से फैलने की संभावना उत्पन्न हो गई है. साथ ही, भूख, प्यास व बेबसी के कारण मजदूर दम तोड़ने लगे हैं.

    जिस प्रकार के हालात उत्पन्न हो गए हैं, उससे साबित होता है कि लाॅकडाउन की घोषणा के पहले मोदी सरकार ने किसी भी प्रकार का होमवर्क नहीं किया था. आज के अपने मन की बात में उन्होंने खूब घड़ियाली आंसू बहाए लेकिन हकीकत यह है कि गरीबों-मजदूरों को मरने-खपने के लिए छोड़ दिया गया है. यदि सरकार ने थोड़ी भी गंभीरता दिखलाई होती, अन्य राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की होती, और प्रवासी मजदूरो, दिहाड़ी व अन्य प्रकार के मजदूरों के लिए उचित कदम उठाया होता, तो स्थिति इतनी विस्फोटक नहीं हुई होती. दिल्ली में जो नजारा बना है, उसके लिए पूरी तरह मोदी की यह अविवेकपूर्ण कार्रवाई है.

  • ट्रस्ट के नाम पर चला रहे हाॅस्पिटल के मालिक ने मिथिला लाइव 24 के पत्रकार पर किया जानलेवा हमला, कैमरा और माइक भी तोड़ा

    500 फीस की जगह 1500 लेने की पुष्टि करने के समय पत्रकारों को हाॅस्पिटल के अन्दर बनाया बंधक.

    दरभंगा- पूरी दुनिया में इस‌ समय कोरोना वायरस को लेकर महामारी फैली हुई है। भारत में भी 14 अप्रैल तक इस महामारी से निपटने के लिए सरकार ने लाॅकडाउन कर रखा है। सरकार के साथ साथ बड़ी संख्या में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, डाक्टरस, नर्स, हाॅस्पिटल, सामाजिक कार्यकर्ता, नेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस बिमारी से निपटने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल लोगों की मदद कर रहे हैं लेकिन इस हालात में भी कुछ भेड़िए लोगों की मजबूरियों का फायदा उठाने और गरीब मरीजों का इलाज के बहाने मोटी राशि ऐंठ खून चूसने का काम कर रहे हैं। जी हां ये मामला दरभंगा के एक निजी हाॅस्पीटल का है जो ट्रस्ट के नाम पर चलता है और फीस की तीन गुनी राशि ऐंठ रहा है। जिला प्रशासन और सिविल सर्जन के निकटतम छेत्र में यह माफिया आम गरीब मरीजों का खून चूसने का काम रंगबाजी अंदाज में अंजाम दे रहा है।

    इस हाॅस्पिटल का नाम है जोगिंदर मेमोरियल ट्रस्ट हॉस्पिटल। इसके मालिक का नाम है रितेश कमल।जोकि हॉस्पिटल रोड पर उपस्थित है और कल तक इस हॉस्पिटल का चार्ज ₹500 था और इस विपदा की घड़ी में आज इस हाॅस्पिटल ने अपना चार्ज 1500 रुपए कर दिया है। इस की एक विडियो वायरल होने के बाद *Mithila Live 24* के पत्रकार और कैमरामैन हाॅस्पिटल पहुंच कर हाॅस्पिटल मालिक से पक्ष जानने की कोशिश की। इसी दौरान हाॅस्पिटल मालिक रितेश कमल पत्रकार और कैमरामैन पर खुद और अपने स्टाफ के साथ मिलकर हमलावर हो गए। इतना पर ही नहीं रुका मामला पत्रकार का माइक तोड़ दिया साथ ही कैमरा को भी फेंक दिया उसके बाद सभी को हाॅस्पिटल के अंदर ही बंधक बना लिया। मामला जैसे ही लोगों तक पहुंचा हाॅस्पिटल मालिक रितेश ने धमकाना बंद नहीं किया बल्कि उसने कहा कि हम किसी पुलिस प्रशासन को नहीं मानते अपना फैसला डायरेक्ट करते हैं। उक्त बातें ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के सचिव ई0 फखरूद्दीन ने कही। श्री फखरूद्दीन ने कहा कि दरभंगा मेडिकल मामले में पहले से भी बदनाम रहा है। यही कारण है के यहां के बेश्तर निजी हाॅस्पीटल के मालिक मरीजों के इलाज के नाम पर मोटी राशि ऐंठ गरीब मरीजों का खून चूसने का काम सिविल सर्जन, जिला प्रशासन, दलाल और मेडिकल माफियाओं के संरक्षण में खुलेआम अंजाम दे रहा है। हम जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से मांग करते हैं कि 24 घंटे के अंदर जांच कर ट्रस्ट के नाम चल रहे जोगिंदर मेमोरियल ट्रस्ट हाॅस्पिटल को सील करे साथ ही देश के चौथे स्तंभ मिडिया बंधुओं पर किए गए जानलेवा हमले के आरोपी रितेश पर कानूनी कार्रवाई करे।

  • कोरोना:623 केस,12 मौतें:25 राज्यों में पहुंचा संक्रमण नं एक‌‌ पर महाराष्ट्र तो दुसरे स्थान पर हैं केरल

    नई दिल्ली. देश में कोरोनावायरस का कहर जारी है। बुधवार को देश में 87 नए मामले सामने आए। राज्य सरकारों की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक संक्रमितों की संख्या बुधवार को 623 हो गई, वहीं अब तक 12 लोगों की जान चली गई है। बुधवार को दो कोरोना संक्रमितों की मौत भी हुई। सुबह तमिलनाडु के मदुरै में 54 साल के मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया और शाम को मध्यप्रदेश के उज्जैन की 65 साल की महिला की मौत हो गई। मिजोरम में नीदरलैंड से लौटा पादरी पॉजिटिव मिला। यह मिजोरम में संक्रमण का पहला और पूर्वोत्तर का दूसरा मामला है। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण देश के 25 राज्यों तक पहुंच गया है। इधर अमेरिकी दूतावास ने भारत में फंसे अपने नागरिकों से कहा- अमेरिकी नागरिक भारतीय कानूनों का पालन करें। यहां 15 अप्रैल के लिए लॉकडाउन घोषित किया गया है। जरूरी इंतजामों के लिए हम भारत सरकार के संपर्क में हैं। नागरिकों को निकालने के लिए अमेरिकी सरकार और एयरलाइन कंपनियों से बातचीत जारी है।

    इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने कहा- संक्रमितों के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों और पीड़ितों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के बचाव के तौर पर हाइड्रोक्लोरोक्वीन नाम की दवा इस्तेमाल की जा सकती है। किसी और व्यक्ति को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा- हम टेली कंसल्टेशन सुविधा शुरू कर रहे हैं। कई मरीजों के अपाइनमेंट्स थे, जो निरस्त कर दिए गए हैं। गंभीर मरीज इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। फॉलोअप के लिए आने वाले मरीज फोन पर डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं। यह व्यवस्था अगले एक-दो दिन में काम करने लगेगी। हर डिपार्टमेंट से कुछ डॉक्टर मरीजों की समस्याओं का समाधान करने के लिए मौजूद रहेंगे।

    दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक पहुंचा संक्रमित
    केंद्र सरकार के मुताबिक, देश में 553 संक्रमितों का इलाज चल रहा है। 42 लोग ठीक होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने मृतकों की संख्या 10 बताई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- पिछले 24 घंटे में पांच नए संक्रमण के केस सामने आए हैं। इनमें से एक के विदेश यात्रा करने की जानकारी मिली है। अब दिल्ली में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 35 हो गई है। वहीं, मौजपुर के मोहनपुरी में स्थित मोहल्ला क्लीनिक में संक्रमण के एक पॉजिटिव मरीज के पहुंचने की सूचना मिलने के बाद, 12 से 18 मार्च के बीच आने वाले लोगों को 15 दिन के लिए होम क्वारैंटाइन की सलाह दी गई है।

    दिल्ली की अदालतों में कामकाज बंद
    दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन के मद्देनजर राजधानी की सभी जिला अदालतों में 15 अप्रैल तक कामकाज बंद रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं, गृह मंत्रालय ने कोरोना की वजह से 2021 की जनगणना का पहला चरण स्थगित कर दिया है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अपडेशन भी फिलहाल टाल दिया गया है।

    सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में
    अब तक कोरोना के सबसे ज्यादा 116 मामले महाराष्ट्र में सामने आए, जबकि केरल (109) दूसरे नंबर पर है। कर्नाटक सरकार ने कहा कि राज्य में पिछले 24 घंटे में 10 नए मामलों को मिलाकर संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है। इनमें से तीन लोग ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं, जबकि एक की मौत हो गई। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 12 बजे से 21 दिनों के लिए देशभर में लॉकडाउन घोषित कर दिया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें एक से दो साल की जेल के अलावा कुछ मामलों में जुर्माने का प्रावधान है।

    अमेरिका में लॉकडाउन लागू कराने के लिए सेना बुलानी पड़ी थी: केसीआर
    तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने राज्य के लोगों से कहा कि अमेरिका में लॉकडाउन लागू कराने के लिए सेना बुलानी पड़ी थी। यहां हालात काबू नहीं हुए तो हमें देखते ही गोली मारने का आदेश जारी करना पड़ेगा। उन्हाेंने सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से अपने क्षेत्रों में लॉकडाउन लागू करवाने में पुलिस की मदद करने काे कहा। राज्य में संक्रमण के अब तक 35 मामले सामने आए हैं और 19,313 लोग सर्विलांस पर हैं।

    पंजाब पुलिस लोगों के घर जाकर उन्हें खाने का सामान दे रही है।
    पुलिस सख्ती बरतने के साथ ही लोगों की मदद भी कर रही
    देशभर में लॉकडाउन के बीच पुलिस जहां सख्ती के साथ लॉकडाउन का पालन करा रही है वहीं, जरूरतमंदों की मदद भी कर रही है। बुधवार को पंजाब और बेंगलुरु पुलिस लोगों को खाना बांटती दिखीं। जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने लॉकडाउन नहीं मानने वालों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बनाए गए गोल घेरों में बिठा दिया। मध्य प्रदेश में कई जगहों पर पुलिस ने बाहर घूमते दिखे लोगों पर लाठियां चलाई तो कुछ से उठक-बैठक लगवाई।

    दिल्ली में कुछ स्थानों पर लोग किराना की दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं।
    राज्यों के हाल:
    राजस्थान: महान एयरलाइन्स का विमान ईरान के तेहरान शहर से 277 भारतीयों को लेकर सुबह जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचा। सभी को स्क्रीनिंग के बाद सेना के जोधपुर क्वारैंटाइन सेंटर भेजा गया।
    छत्तीसगढ़: सरकार ने सभी गरीब परिवारों को अप्रैल-मई महीने में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मुफ्त चावल देने की घोषणा की है।

    गुजरात: प्रधान स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि ने कहा- राजकोट में 1 और संक्रमित मिला। गुजरात में कुल 39 संक्रमित हो गए हैं। प्रशासन ने होम क्वारैंटाइन का उल्लंघन करने वाले 147 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
    उत्तराखंड: मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि राज्य में सभी जरूरी सामान की दुकानें सुबह 7 से 10 बजे तक खुली रहेंगी।
    दिल्ली: सरकार ने कहा है कि कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टर, पैरामेडिकल और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर घर खाली करने का दबाव बनाने वाले मकान मालिकों पर कार्रवाई होगी।
    महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य में सब्जी, चावल और दूसरे जरूरी सामान की कमी नहीं है। इन सामानों की सभी दुकानें खुली हैं। हम गुड़ी पड़वा कोरोना से निपटने के बाद मनाएंगे।

    ईरान से पहुंचे 277 भारतीयों की जोधपुर एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की गई।
    देश में 42 लोग पूरी तरह स्वस्थ हुए, 553 मरीजों का इलाज जारी

    महाराष्ट्र में सबसे पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए दोनों लोग ठीक हो गए हैं। दो सप्ताह पहले जांच में इन्हें संक्रमित पाया गया था। मंगलवार को दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई। बुधवार सुबह दोनों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके साथ ही देश में अब तक 42 लोग पूरी तरह ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि 553 मरीजों का इलाज क्वारैंटाइन सेंटरों में चल रहा है।

    जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन नहीं मानने वालों को पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बनाए गए घेरे में बैठा दिया।
    तेलंगाना में महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी

    तेलंगाना के खम्मम में लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी पर जा रही महिला डॉक्टर के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। डॉ हिमाबिंदु ने बताया कि पुलिसकर्मी ने मेरे साथ मारपीट की। बाल पकड़कर मुझे घसीटा। मेरा आईडी और फोन जब्त कर लिया। जब मैंने इसकी शिकायत की तो उसने माफी मांग ली।

  • कोरोना से लड़ाई में हैं सरकार के साथ,सरकार नागरिकों का रखे ख्याल:आफताब अहमद

    नूह विधायक व हरियाणा सीएलपी के डिप्टी लीडर चौधरी आफताब अहमद ने कोरोना से लड़ाई में सरकार के साथ खड़े रहने की घोषणा की है और कहा है कि वो मेवात व प्रदेश के लोगों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हर तरीके से प्रदेश सरकार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री मनोहर लाल व सरकार से उम्मीद करते हैं कि वो प्रदेश के लोगों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएगी।

    डिप्टी लीडर आफताब अहमद ने प्रदेश सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि कितने लोगों का टेस्ट प्रदेश में किया गया है? कितने लोगों का किया जा सकता है? और टेस्टिंग सुविधा कहां कहां मौजूद है? ये जानकारी लोगों के पास होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वेंटिलेटर सहित सभी मेडिकल यंत्रों की किल्लत को भी प्रदेश सरकार तुरंत दूर करे।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मजदूर, दैनिक रूप से कमाने वाले लोगों, गरीबों, व अन्य जरूरतमंद लोगों को तुरंत आर्थिक मदद मुहैय्या करवाया जाए ताकि इस परिस्थिति में उनका गुज़ारा चल सके। इसके लिए प्रदेश सरकार एक राहत पैकेज की घोषणा तत्काल करे।
    आफताब अहमद ने कहा कि लोगों को सब्जी, फल, दूध व इसके उत्पाद, पोल्ट्री व अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति व उनके संरक्षण की सुविधा प्रदेश सरकार तुरंत करे। आफताब अहमद ने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार से राहत पैकेज की तत्काल मांग की है।

    विधायक आफताब अहमद ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसी मेडिकल के चौथे वर्ष के छात्रों को भी इस लड़ाई में डाक्टर के रूप में इस्तेमाल करे ताकि ज्यादा लोगों तक उपचार, काउंसलिंग पहुंच सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की एक लपवारवाही लोगों पर भारी पड़ सकती है इसलिए गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

    सीएलपी डिप्टी लीडर आफताब अहमद ने कहा कि जब लोगों के जान की बात हो तो सभी को एक साथ आकर चुनौती से निपटने की दिशा में काम करना चाहिए।

  • लालबाग अनिश्चितकालीन सत्याग्रह का आज पुरा हुआ 65 दिन

    आज सुबह 7 बजे से ही धरना शुरू हो गया था।

    मिल्लत टाइम्स:कोरोना वायरस से सावधानी के लिए 500 मास्क बांटा गया है लेकिन मास्क उपलब्ध नहीं हो पाने की वजह कर बहुत लोगों को मास्क नहीं मिल पा रहा है इसलिए लोग‌ अपनी सेफ्टी को लेकर चिंतित हैं।

    धरना स्थल पर सेनिटाइजर भी उपलब्ध कराया गया है।‌

    धरना स्थल पर छोटे बच्चों पर रोक‌ लगा दिया गया है।

    राज्य सरकार और केंद्र सरकार जनता के लिए इस‌् महामारी से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए और राशन आदि का एलान करे।

    जगह जगह पर बाहर से आने वाले लोगों का COVID19 जांच के लिए कैम्प लगाए सरकार और कोई फीस नहीं भी लिया जाए।

    मांगें:
    1- एनपीआर से देशवासियों को कोई नुकसान नहीं होगा, सरकार लिख कर दे।
    2- एनआरसी देश में लागू नहीं होगा, सरकार लिख कर दे।
    3- सीएए जैसा काला कानून जो संविधान विरोधी कानून है, सरकार अविलंब वापस ले।
    4- एनपीआर पर अगर सरकार लिख कर नहीं देगी तो एक अप्रैल को भारत बंद बुलाया जायगा।
    5- अब जनता की नहीं सरकार की बारी है कि सभी मांगों पर सरकार श्वेत-पत्र लाए।