Category: देश

  • शरारती तत्व मुस्लिम समुदाय के लोगों को बना रहे हैं निशाना:भट्टी

    – मुस्लिम कल्याण कमेटी व जजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष ने जताई चिंता

    – मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हो रहे हमलों को लेकर सीएम, डिप्टी सीएम व गृहमंत्री को लिखा पत्र

    प्रेस रिलीज़,हिसार, 08 अप्रैल।
    मुस्लिम कल्याण कमेटी एवं जननायक जनता पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष हरफूल खान भट्टी ने लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में मुसलमान समुदाय के लोगों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व गृह मंत्री अनिल विज को पत्र लिखकर समुदाय के लोगों को सुरक्षा मुहैया करवाने व दोषी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    भट्टी ने कहा कि प्रदेश के जिन गांवों में मुस्लिम समुदाय की कम तादाद है, उन गांवों में कुछ शरारती तत्वों द्वारा समुदाय व मस्जिदों पर कई जगह हमले किए गए हैं और मस्जिदों को तोड़ा गया है। यहां तक की मुसलमान समुदाय के लोगों को घरों में घुसकर पीटा गया है। इससे समुदाय के लोगों में भय का माहौल है। विशेष तौर पर फतेहाबाद, हिसार, सिरसा, जींद, भिवानी व दादरी में विभिन्न स्थानों पर हालत चिंताजनक है।

    भट्टी ने नरवाना के गांव कलौदा कलां, सुल्तानपुर, नारनौंद के भैणी अमीरपुर, धर्मखेड़ी, फतेहाबाद के जांडली व बुआन, पानीपत के धनसौली व दिनौद गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि उक्त गांवों में कई स्थानों पर समुदाय के लोगों के साथ मारपीट, गांव छोडऩे की धमकी व मस्जिद में तोड़ फोड़ की घटनाएं हो चुकी है। विशेष तौर पर जिन गांवों में मुसलमानों की आबादी कम है, वहां पर इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है और उन्हें गांव छोडऩे के लिए मजबूर किया जा रहा है। भिवानी शहर में ढाणा रोड पर भी बीती रात को मस्जिद को जलाया गया और वहां पर खड़ी गाड़ी व मोटरसाइकिल पर आग लगा दी गई। इसके बारे में पुलिस को सूचना देने के बावजूद पुलिस थोड़ी लीपापोती कर मामले को टरका रही है। ऐसे में समुदाय के लोगों में भय का माहौल व्याप्त है। उन्होंने निजाऊदीन दरगाह दिल्ली में हजारों मुसलमानों को तब्लीक कार्यक्रम के लिए एकत्र करने व जमाते बनाकर कोरोना वायरस फैलाने जैसे कुकृत्य की कड़े शब्दों में भृत्सना करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। यह मुस्लिम समुदाय सहित देश के सभी वर्ग के लोगों के लिए दुखदायी है। लेकिन इसकी आड़ में समुदाय के अन्य लोगों को निशाना बनाना कतई सही नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार मुसलमानों की हिफाजत के लिए तुरंत कार्रवाई करे और ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए आपराधिक मुकदमें दर्ज किए जाएं।

  • शब ए बरात के अवसर पर घरों में करें इबादत :शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से ऑनलाइन किया जाएगा जलसा सीरत उन नबी का आयोजन

    लुधियाना 8 अप्रैल (मेराज़ आलम ब्यूरो) : पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक आज दिनांक 9 अप्रैल, 2020 को दिन गुजार कर आने वाली रात शबे बरात की मुकद्दस रात होगी। शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने अपने संदेश में कहा है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर चल रहे करफियू को देखते हुए सभी मुसलमान भाई बहन अपने-अपने घरों में ही शबे बरात की मुकद्दस रात मनाए। शाही इमाम ने कहा कि अपने घरों में सारी रात इबादत करें, कुराने पाक की तिलावत करें, नफिल नमाज अदा करें और आज की रात क्योंकि अल्लाह ताला के दरबार में कबूलियत की रात है इसलिए पूरी दुनिया के लोगों को कोरोना से निजात के लिए विशेष दुआएं की जाएं। शाही इमाम ने कहा कि शबे बरात की मुकद्दस रात में अल्लाह तबारक वताला अपने बंदों को माफ फरमाते हैं और उनकी दुआएं कबूल की जाती हैं, दुनिया भर में कोरोना के कहर के बीच इस मुकद्दस रात का आना हम सब के लिए राहत और सुकून की बात है। उन्होंने कहा कि हर एक मुसलमान पर लाजिम है कि वह विश्व से कोरोना के खात्मे और सभी लोगों की तंदुरुस्ती और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं करवाएं। शाही इमाम ने कहा कि शबे बरात की इबादत से पहले इस बात का खास ध्यान रखें कि आपके पड़ोस में रहने वाले किसी भी धर्म का कोई भी व्यक्ति भूखा ना हो, जो भी जरूरतमंद है उसको अपनी हैसियत के मुताबिक मदद करें।

    शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने बताया कि हर साल लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शबे बरात की रात को होने वाला जलसा सीरत उन नबी का आयोजन इस बार फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर ऑनलाइन किया जाएगा, जिसमें कारी मुहम्मद मोहतरम की तिलावत-ए-कुरान शरीफ होगी। कारी मुहम्मद इब्राहीम नाते रसूले पाक पेश करेंगे। नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी का विशेष संबोधन होगा व आखिर में शाही इमाम साहब दुआ करवाएंगे।

    मुस्तकीम ने सभी लोगों से अपील की है कि वह रात 10 बजे से 12:30 बजे तक फेसबुक पेज शाही इमाम पंजाब पर जुड़कर इस जलसे में ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं। मुस्तकीम ने बताया कि 10 तारीख दिन शुक्रवार को शबे बरात के बाद एक दिन नफली रोजा रखा जाएगा।

    लुधियाना के 46 जमाती पाए गए नेगेटिव
    लुधियाना कोरोना के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच पंजाब में तबलीगी जमात के सदस्यों की मेडिकल जांच चल रही है, लुधियाना शहर में विभिन्न राज्यों से आई हुई जमातों को पिछले दिनों राहों रोड इस्लामिया स्कूल में कवारांटेन किया गया है और सभी 46 जमतियों का लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिकल टेस्ट करवाया गया और सभी जमात के सदस्य नेगेटिव पाए गए। क्लीन चिट पाए गए जमातियों के रहने के प्रबंधों का नायब शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी व शाही इमाम पंजाब के सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने जायजा लिया। इस अवसर पर राहों रोड मदनी मस्जिद के प्रधान मुहम्मद जमील ने बताया की सभी जमतियों को अलग-अलग कमरों में कवारांटेन किया गया है, शहर के लिए राहत की बात है कि सभी के टेस्ट नेगेटिव आए हैं।

    मदनी मस्जिद राहों रोड पर जमातियों के लिए किए गए प्रबंधों का जायजा लेते हुए नायब शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी, मुहम्मद जमील व अन्य।

  • कोरोना वायरस महामारी के लिए सिर्फ मुसलमानों और तबलीगी जमात को ज़िम्मेदार ठहराने वाले मीडिया संस्थानों पर कार्यवाही हो:-मौलाना अरशद मदनी

    नई दिल्ली: देश में फैले कोरोना वायरस के लिए मुसलमानों और तबलीगी जमात को ज़िम्मेदार ठहराने वाले मीडिया संस्थान कोरोना महामारी को सांप्रदायिक करने पर तुले है और कोरोना को हिन्दू मुसलमान कर रहे है. जमीयत उलेमा हिन्द ने इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में निजामुद्दीन मरकज मुद्दे को सांप्रदायिक बनाने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

    मौलाना सैयद अरशद मदनी (अध्यक्ष, जमीयत उलेमा-ए-हिंद) ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि मीडिया ने निजामुद्दीन मरकज़ मामले को सांप्रदायिक रूप दिया है। अधिवक्ता एजाज मकबूल द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा तब्लीगी जमात के कुछ हिस्सों पर रिपोर्ट ने पूरे मुस्लिम समुदाय को अपमानित किया है।

    मौलाना मदनी ने कहा कि मीडिया के इस रोल ने गंभीर रूप से “मुसलमानों के जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा” पैदा कर दिया है, और इस तरह उनके “राइट टू लाइफ अंडर 21” का उल्लंघन हुआ। याचिका में कहा गया है कि अधिकांश मीडिया रिपोर्टों को “कोरोना जिहाद”, “कोरोना आतंकवाद” या “इस्लामिक कट्टरपंथ” जैसे शीर्षकों का उपयोग करते हुए ग़लत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    याचिका में “कई सोशल मीडिया पोस्ट्स” को भी सूचीबद्ध किया गया है जो “गलत तरीके से मुसलमानों को Covid -19 फैलाने के ज़िम्मेदार बता रही है। साथ ही झूठे और फर्जी वीडियो का भी जिक्र किया गया है। मौलाना मदनी ने कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है और क्या डिजिटल मीडिया वेबसाइटों पर फैलाई जा रही फर्जी खबरों और सांप्रदायिक बयानों को रोकने में सरकार विफल है?

    अंत में मौलाना मदनी ने इसे “घोर गैरजिम्मेदाराना व्यवहार” करार देते हुए दलील में कहा गया है कि इस तरह की खबरें समाज में बंटवारे को लेकर बनाई गई हैं। इस तरह के सांप्रदायिक पत्रकारिता में विभिन्न समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रभाव होता है और देश में सामाजिक अशांति पैदा करने का प्रभाव भी हो सकता है इसलिए “निज़ामुद्दीन मरकज़ मुद्दे के संबंध में कट्टरता और सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले मीडिया के वर्गों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए

  • पीएम,सभी मंत्री और सांसदों के वेतन में एक साल तक 30% की कटौती,2 साल सांसद निधि भी नहीं मिलेगी;लॉकडाउन धीरे-धीरे हटेगा

    नई दिल्ली. कैबिनेट की सोमवार को हुई बैठक में कोरोनावायरस के चलते खड़े हुए संकट से निपटने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, सभी राज्यपाल और सांसदों की सैलरी में एक साल तक 30% कटौती की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई इस बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा सांसदों को मिलने वाली निधि भी 2022 तक रोक दी जाएगी। सांसदों को 10 करोड़ की रकम क्षेत्र के विकास के लिए मिलती है। वेतनमान में की गई कटौती और सांसद निधि की रकम कंसोलिडेटेड फंड में जाएगी।

    किसे, कितना वेतन मिलता है

    पद वेतन/प्रति माह
    राष्ट्रपति 5 लाख रु.
    उप-राष्ट्रपति 4 लाख रु.
    राज्यपाल 3.5 लाख रु.
    प्रधानमंत्री 2 लाख रु.
    सांसद 2 लाख रु.
    एक्शन प्लान पर काम करने के निर्देश

    मोदी ने लॉकडाउन के बाद के एक्शन प्लान पर काम करने के निर्देश भी मंत्रियों को दिए हैं। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे उन इलाकों में विभागों को धीरे-धीरे खोलने की योजना बनाएं, जो कोरोनावायरस के हॉटस्पॉट के रूप में नहीं उभरे हैं।
    मोदी ने मंत्रियों से 10 बड़े फैसलों और 10 प्राथमिकताओं की सूची बनाने को कहा है। 21 दिन के लॉकडाउन की मियाद 14 अप्रैल को खत्म हो रही है।
    किसानों की मदद के लिए ऐप व्यवस्था हो- मोदी
    प्रधानमंत्री ने बैठक में मंत्रियों के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रहे फीडबैक की वजह से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कारगर रणनीति बनाने में काफी मदद मिली। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सभी नेताओं के लिए यह जरूरी है कि वह संबंधित राज्यों और जिला प्रशासन से लगातार सम्पर्क में रहें। खासतौर पर उन जिलों में जो कोविड-19 के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। ताकि वहां की जमीनी स्थिति के बारे में उन्हें भी पता रहे और समस्याओं के समाधान में वे मदद कर सकें। मोदी ने कहा कि फसल कटाई के लिए सरकार किसानों को हरसंभव मदद मुहैया कराएगी। प्रधानमंत्री ने ऐप आधारित कैब सर्विस की तर्ज पर मंडियों से किसानों को जोड़ने के लिए ऐप आधारित ट्रक सेवा उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया।(इनपुट भास्कर)

  • तेलंगाना सीएम बोले-14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन 3 जून तक बढ़ाया जाए,यूपी सरकार ने भी बढ़ाने के संकेत दिए

    नई दिल्ली. देश में 21 दिन का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केंद्रीय मंत्रियों से लॉकडाउन के बाद के एक्शन प्लान को तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने संकेत दिए हैं कि लॉकडाउन को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा। इस बीच, तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने सुझाव दिया है कि राज्य में लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद 3 जून तक बढ़ा दिया जाना उचित रहेगा। उन्होंने एक बैठक में कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी से लॉकडाउन बढ़ाने की अपील करेंगे। इस बीच, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि राज्य में 14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन खोला जाएगा या नहीं, यह कह पाना अभी मुश्किल है।

    इससे पहले न्यूज एजेंसी ने कहा था कि तेलंगाना सीएम राव ने घोषणा कर दी है कि राज्य में लॉकडाउन 15 अप्रैल से 3 जून तक लागू किया जाएगा। लेकिन, फिर मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया कि सीएम ने यह सुझाव दिया था। इसे लागू करने के लिए अभी कोई घोषणा नहीं की गई है। सीएमओ ने कहा कि कोरोनावायरस पर आई एक रिपोर्ट को मद्देनजर सीएम ने लॉकडाउन को बढ़ाने की बात कही थी।

    उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन बढ़ाने के संकेत
    सोमवार को राज्य के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा- 14 अप्रैल के बाद भी लॉकडाउन खुलने की संभावना नहीं है। एक भी कोरोना का केस प्रदेश में होता तो हम लॉकडाउन खोलने की स्थिति में नहीं रहेंगे। अवस्थी ने कहा- रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी धर्मगुरुओं से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की थी। सभी ने सहयोग करने का आश्वासन दिया था। धर्मगुरुओं का सुझाव आया है कि मोहल्ला वॉरियर बनाया जाए। प्रदेश में कोविड-19 का लोड बढ़ गया है, इसलिए अभी लोगों को लॉकडाउन खुलने का इंतजार करना चाहिए। लॉकडाउन 14 अप्रैल को खुलेगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता है। प्रदेश में टेस्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है। सभी 75 जनपद में कम से कम टेस्टिंग कलेक्शन सेंटर जरूर होने चाहिए।

    मोदी ने मंत्रियों से कहा- लॉकडाउन के बाद लिए जाने वाले 10 फैसले बताएं

    मोदी ने लॉकडाउन के बाद के एक्शन प्लान पर काम करने के निर्देश भी मंत्रियों को दिए हैं। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे उन इलाकों में विभागों को धीरे-धीरे खोलने की योजना बनाएं, जो कोरोनावायरस के हॉटस्पॉट के रूप में नहीं उभरे हैं।
    मोदी ने मंत्रियों से 10 बड़े फैसलों और 10 प्राथमिकताओं की सूची बनाने को कहा है। 21 दिन के लॉकडाउन की मियाद 14 अप्रैल को खत्म हो रही है।

  • अंधविश्वास फैलाने की बजाय कॅरोना की जांच और चिकित्सा सुविधाओं की गारंटी करे सरकार:सिद्दीकी

    * सरकार का प्रयास अपर्याप्त , युद्धस्तर पर कार्रवाई की जरुरत–इंसाफ मंच

    * बिना राशन कार्ड वाले गरीब परिवारों को भी राशन मुहैया कराए सरकार–माले

    प्रेस रिलीज़,सीतामढ़ी,05 अप्रैल 2020
    भाकपा माले के बाजपट्टी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सह इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद सिद्दीकी ने आज प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि करोना महामारी को मात देने केलिए व्यापक परीक्षण व चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की आवश्यकता थी, लेकिन यह निहायत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री मोदी अंधविश्वास फैलाकर वैज्ञानिक चेतना को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस दौर में गरीबों को राशन व अन्य सुविधाएंअविलंब उपलब्ध करवाना प्राथमिकता होनी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री थोथे दलीलों से काम चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 5,अप्रैल को प्रधानमंत्री द्वारा मोमबत्ती, दीपक तथा टॉर्च लाइट जलाने के आह्वान से करोना की रोकथाम सम्भव नहीं है। इस वायरस का मुकाबला सिर्फ वैज्ञानिक तरीके से सभी जरूरी

    संसाधन,जांच,दवाइयों,डॉक्टरों तथा जरूरी उपकरणों जैसे वेंटिलेटर व पीपीई की व्यवस्था करके ही की जासकती है। देश में लगातार इसकी मांग बढ़ रही है। लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में इस विषय पर कोइ चर्चा नहीं की।
    विगत 22,मार्च को जनता कर्फ्यू के दरम्यान प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों व उन तमाम लोगों केलिए जो करोना पीढ़ितों के इलाज में अपनी ज़िंदगी को जोखिम में डालकर काम कर राहे हैं, थाली पीटने का हास्यास्पद आह्वान किया था। सुविधाओं के अभाव में बड़ी संख्या में डॉक्टर संक्रमित होरहे हैं, वे लगातार किट व अन्य जरूरी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर के उनके मनोबल को गिराने का ही काम कर रही है।

    अचानक और बिना किसी पूर्व योजना के लागू किये गए लौकडाउन ने प्रवासी व दिहाड़ी मज़दूरों के सामने परेशानियों का पहाड़ खड़ा कर दिया है।हज़ारों किलोमीटर पैदल यात्रा करके प्रवासी मज़दूर किसी प्रकार अपने राज्य में पहुंचे। कई लोगों की इस बीच मौत की भी खबरें हैं। उन्हें घर पहुंचाने की जिम्मेदारी से सरकार भाग खड़ी हुई। उनके लिए सुविधाओं से लैस कवारंटाइन की व्यवस्था करने की बजाय यंत्रणापूर्ण स्थितियों में डाल दिया गया है यह बेहद दुखद है। और उस से भी दुखद यह है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लाखों प्रवासी मज़दूरों की दुर्दशा के बारेमें एक भी शब्द नहीं कहा।

    दिल्ली तब्लीग की घटना को साम्प्रदायिक रूप देकर महामारी के दौर में भी हिन्दू-मुस्लिम लड़ाई लगाने का काम किया जारहा है। हमें उम्मीद थी कि इस करोना की चुनौती का हमसब मिलकर सामना करेंगे, लेकिन भाजपाई इस विषम परिस्थिति में भी अपनी साम्प्रदायिक राजनीति से बाज नहीं आरहे हैं।

    बिहार सरकार केवल राशन कार्ड धारकों को ही राशन उपलब्ध कराने की बात कर रही है। बिहार में गरीबों के बड़े हिस्से के पास न राशन कार्ड है और न हीं लाल कार्ड। ऐसे लोगों को सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिल रही है। कामगार प्रवासियों के भी आधार कार्ड अध्यतन न होने के कारण 1000 रु० की राशि नहीं मिल पारही है। इसलिए हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि सभी गरीबों के लिए राशन के व्यवस्था की गारंटी की जाय।

    ऐसे लगता है कि इस महामारी के दौरान में भी सरकार रूटीन वर्क के अनुसार काम कर रही है। इस विकट परिस्थिति में युद्धस्तर पर काम करने की आवश्यकता थी जिसका सर्वथा अभाव दिख रहा है। दूसरी राजनीतिक पार्टियों एवं सामाजिक संगठनों से सरकार किसी भी प्रकार का वार्ता नहीं कर रही है। जहां लोग अपनी पहलकदमी पर गरीब लोगों के बीच राहत अभियान चलारहे हैं उसे भी रोकने की कोशिशें की जारही हैं। इसके बारे में सरकार को अविलम्ब विचार करना चाहिये।

    इस बीच आरएसएस के इशारे पर मीडिया द्वारा झूठी तथा भ्रामक खबरों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध नफरत फैलाने की लगातार कोशिश की जारही है जो अत्यंत शर्मनाक एवं निन्दनीय है विशेष कर सीतामढ़ी ज़िले के नानपुर थाना अंतर्गत चकौती पंचायत के ग्राम पकटोला के बारेमें साज़िश के तहत बिल्कुल झूटी और बेबुनियाद खबर छाप कर वहाँ बाहर से 20-22 तब्लीगी आकर छुपे होने की बात बताना अत्यन्त निंदनीय है। उन्होंने इसकी तीब्र भर्त्सना करते हुए जिले की जिलाधिकारी तथा पुलिस कप्तान से ऐसी झूठी खबर छाप कर भ्रम और नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की साथ ही इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही है।
    नेयाज अहमद सिद्दीकी
    पूर्व प्रत्याशी
    बाजपट्टी विधानसभा,सह
    प्रदेश उपाध्यक्ष
    इंसाफ मंच, बिहार

  • भारत को अंधेरे में न डाला जाए : हज़रत अमीर शरीअत

    मुंगेर 4 अप्रैल 2020: 5 अप्रैल को रात नौ बजे से नौ मिनट पूरे देश के प्रकाश के बुझाने की अपील पर अमीर-ए-शरीअत इस्लामी विचारक मौलाना मुहम्मद वली रहमानी साहब सज्जादानशीन ख़ानक़ाह रहमानी मुंगेर ने फ़रमाया है कि देश के विभिन्न भागों से लोग पूछ रहे हैं कि 5 अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट पूरे देश में अंधेरा करने की अपील पर अमल करना सही है या नहीं? मेरे अनुसार अच्छी खासी रोशनी को बुझाना और दिये या लालटेन या मोबाइल की रोशनी फैलाना कुछ विचित्र कार्य होगा, यह मज़बूत स्थिति से कमज़ोर स्थिति की ओर ले जाना है, और प्रधानमंत्री इसमें निपुण हैं, उन्होंने कई कार्यों के द्वारा देश की जनता को अच्छी से बुरी स्थिति की ओर यात्रा करवायी है, जैसे नोटबन्दी, जीएसटी का ग़लत रूप से लागू करना, बेरोज़गारी में बढोत्तरी, किसानों की स्थिति को नज़रअंदाज़ करना, देश के ग़रीब, भूमिहीन, अनपढ़ लोगों के लिए एनपीआर जैसे कार्यक्रम के माध्यम से देश को अच्छी से बुरी स्थिति की ओर ले जा रहे हैं,

    अंधेरा और अंधेर नगरी प्रधानमंत्री का कार्य हो सकता है मगर यह देश के स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है, बिजली विभाग का भी कहना है कि यदि रोशनी बन्दी पर अमल किया गया तो पॉवरग्रेड पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसको ठीक करने के लिए एक सप्ताह का समय लग सकता है, इसके कारण कोरोना के मरीज़ों के इलाज में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, सम्भवतः प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल की रात को रोशनी बन्दी और इससे पहले थाली और ताली बजाने की अपील हिन्दू धर्म के परिदृश्य में की हो और वे धार्मिक प्रथाओं के प्रचार प्रसार का प्रयास कर रहे हों, मगर इस्लाम, ईसाईयत, सिक्ख मत, बुद्ध मत, जैन मत में इसका कोई धार्मिक महत्व नहीं है, जिन लोगों की ऐसी मान्यताएं हैं वे ऐसा कर सकते हैं लेकिन मुसलमानों, ईसाइयों, सिक्खों, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के मानने वालों को इसके करने की कदाचित आवश्यकता नहीं है, इस्लाम में इस प्रकार के अंधविश्वास की कोई गुंजाइश नहीं है।

    हज़रत रहमानी ने फ़रमाया कि कोरोना विषाणु अंधेरा फैलाने से भाग सकता है ऐसी सोच प्रधानमंत्री को मुबारक हो, मेरे जैसा इंसान रोशनी फैलाने में विश्वास रखता है, और इस बात को सही समझता है कि प्रत्येक देशवासी अपने अपने घरों में रहे, अपने अपने तरीके से अपने अल्लाह को याद करे, पड़ोस और मुहल्ले के ग़रीबों का ख़्याल रखे, उनकी सहायता करे, प्रशासन के निर्देशों का पालन करे और उसके सुझावों पर अमल करे, अभी डॉक्टर और उनके सहयोगी कड़ी मेहनत और हिम्मत के कार्य कर रहे हैं, अपनी जान पर खेल कर मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं, उनका आदर सम्मान किया जाए, आवश्यकता पड़ने पर उनका सहयोग भी किया जाए, देश की सुरक्षा और मरीज़ों के स्वस्थ होने के लिए घर पर रह कर दुआ की जाए।

  • महाराष्ट्र:कब्रिस्तान समिति ने मुस्लिम का शव को दफनाने से इनकार किया,फिर श्मशान में हुआ अंतिम संस्कार

    मुंबई. कोरोना के कारण 65 साल के बुजुर्ग की बुधवार को मौत हो गई थी। मुस्लिम समुदाय के इन बुजुर्ग का जनाजा लेकर जब परिजन चारकोप नाका स्थित कब्रिस्तान लेकर पहुंचे तो वहां की देखरेख करने वाली समिति ने लाश को दफनाने से इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि 2 घंटे तक समझाने के बावजूद कब्रिस्तान समिति ने लाश दफन नहीं करने दी। इसके बाद प्रशासन और समाजसेवियों ने हिंदू श्मशान भूमि प्रबंधन समिति से बातचीत की। इसके बाद बुजुर्ग के शव का दाह संस्कार हुआ।

    बुजुर्ग मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड में रहते थे। बुधवार तड़के जोगेश्वरी पूर्व स्थित अस्पताल में उनका निधन हुआ। परिजनों का आरोप है कि कब्रिस्तान समिति ने इसलिए शव को दफनाने की इजाजत नहीं दी, क्योंकि बुजुर्ग की मौत कोरोनावायरस के चलते हुई थी। इस घटना के बाद मालवणी में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    मामला सामने आने के बाद मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
    विधायक ने कहा- परिजन ट्रस्टियों को बताए बिना शव सीधे कब्रिस्तान ले गए
    महाराष्ट्र के मंत्री और मालवाणी के विधायक असलम शेख ने कहा, “सरकारी निर्देशों के अनुसार कोरोनावायरस से जान गंवाने वाले मुस्लिमों को एक कब्रिस्तान में दफन किया जाना चाहिए, जो उस हॉस्पिटल के सबसे करीब हो और जहां रोगी की मृत्यु हुई थी। मालवणी का जो मामला है, उसमें मृतक के परिजन कब्रिस्तान के ट्रस्टियों और अन्य संबंधित लोगों को बताए बिना शव कब्रिस्तान ले गए। फिर शव को दफनाने की मांग की। हालांकि, जिन लोगों ने निर्देशों का उल्लंघन किया है, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस घटना से एक दिन पहले एक और कोरोनोवायरस पीड़ित को उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।

  • राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा-लॉकडाउन के बाद बढ़ गई घरेलू हिंसा,23 मार्च के बाद 69 शिकायतें मिलीं

    नई दिल्ली:राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि जब से लॉकडाउन हुआ है तब से घरेलू हिंसा के मामले बढ़ गए हैं। 24 मार्च को हुए लॉकडाउन के बाद से आयोग को कुल 250 शिकायतें में मिली हैं, जिसमें से 69 शिकायतें घरेलू हिंसा की हैं।

    राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 23 मार्च 2020 से एक अप्रैल तक महिलाओं से साइबर अपराध के 15 मामले सामने आए हैं. वहीं, महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की 69 शिकायतें मिली हैं। इसी प्रकार, रेप या रेप की कोशिश की 13, सम्मान के साथ जीने के अधिकार के संबंध में 77 शिकायतें महिलाओं की ओर से मिली हैं। महिलाओं ने कुल 257 शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिनमें से 237 पर कार्रवाई की गई है।

    राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामले इससे और भी अधिक हैं, लेकिन महिलाएं अपने पति की घर में लगातार उपस्थिति के कारण शिकायत करने से डर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महिलाएं पुलिस से संपर्क नहीं कर पा रही हैं क्योंकि वे डरती हैं कि जब उनका पति पुलिस स्टेशन से बाहर आएगा तो फिर उनको पीटेगा और लॉकडाउन की वजह से वे कहीं जा भी नहीं सकती हैं। पहले महिलाएं अपने माता-पिता के पास चली जाती थीं, लेकिन अब वे यह भी नहीं कर पा रही हैं।’’

    महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें भी लॉकडाउन के बाद से महिलाओं से घरेलू हिंसा की कई शिकायतें मिली हैं। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि अगर सरकार ने लॉकडाउन की चेतावनी दी होती तो ऐसी महिलाएं सुरक्षित स्थानों पर जा सकती थीं। उनसे संपर्क करने वाली कई महिलाओं ने बताया है कि अगर उन्हें लॉकडाउन के बारे में थोड़ा सा भी पता होता तो पहले ही सुरक्षित जगह पर चली जातीं।

    घरेलू हिंसा से महिलाओं की मदद और उन्हें बचाने का एक ही तरीका है कि उन्हें रेस्क्यू किया जाए। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा लॉकडाउन के कारण हर कोई घर पर है और महिलाओं को मदद के लिए संपर्क नहीं हो पा रहा है। यह महिलाओं के लिए सही स्थिति नहीं है।

  • मोदी कल सुबह 9 बजे देश को देंगे मैसेज,आज मुख्यमंत्रियों से कहा-कोरोना से लड़ाई में धर्मगुरुओं को भागीदार बनाएं

    नई दिल्ली. नई दिल्ली. देश में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दूसरी बार सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि कोरोना को हराने के लिए सभी मत और विचारधारा के लोगों का एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपनी आस्था और पंथ को बचाने के लिए भी पहले कोरोना को हराना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे कोरोना से लड़ाई में धर्मगुरुओं को भागीदार बनाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल देश के साथ अपना एक वीडियो संदेश भी साझा करेंगे। उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

    कोरोना ने आस्था और विचारधारा पर भी हमला बोला- मोदी

    मोदी ने कहा- कोरोनावायरस के खिलाफ युद्ध अभी शुरु ही हुआ है। कोरोनावायरस ने हमारी आस्था, विश्वास, विचारधारा पर भी हमला बोला है। इसलिए हमें अपनी आस्था, पंथ, विचारधारा को बचाने के लिए कोरोनावायरस को परास्त करना पड़ेगा। आज आवश्यकता है कि सभी विचारधारा, समुदाय के लोग एकजुट होकर कोरोना को पराजित करें। धर्मगुरु और समाज के लोग अपने अनुयायियों को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भागीदार बनने को कहें और उन्हें समझाएं।
    मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में केंद्र और राज्यों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों और कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए नई रणनीतियों पर भी बात की। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद रहे।

    मोदी ने कहा- अब टेस्ट और क्वारैंटाइन पर फोकस करें

    मोदी ने राज्यों से जिला स्तर पर क्राइसिस मैनेजमेंट पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा- अब हमारा फोकस टेस्टिंग और क्वारैंटाइन सुविधाओं पर होना चाहिए। उन्होंने राज्यों को हेल्थ केयर ह्यूमन रिसोर्स में बढ़ोतरी करने और फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर्स को ऑनलाइन ट्रेनिंग दिलाने की सलाह दी। वहीं, रिटायर्ड हेल्थ वर्कर्स, एनएसएस, एनसीसी, सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल कर फोर्स बनाने के लिए कहा। मोदी ने कहा कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन कराने में मदद करेंगे।

    संक्रमण की चेन तोड़ना हमारी प्राथमिकता हो: मोदी

    मोदी ने कहा कि वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिए हम अलग-अलग जगह से बात कर रहे हैं, लेकिन सामूहिकता ही हमारी मजबूती होनी चाहिए। सभी को एक सैनिक की तरह अलर्ट होकर इस महामारी से लड़ना चाहिए। जिस तरह से केस सामने आ रहे हैं, उससे यह पता चलता है कि हमारी लड़ाई अभी शुरू हुई है। पूरी दुनिया ने ऐसी महामारी कभी नहीं देखी। शांति, एकता और कानून व्यवस्था बनाए रखना चाहिए। मोदी ने कहा कि संक्रमण चेन को को तोड़ना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

    मन की बात में मोदी ने मांगी थी माफी

    29 मार्च को रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम के जरिए उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा था- हमें कुछ ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनसे गरीबों को परेशानी हुई। सभी लोगों से क्षमा मांगता हूं। मैं आपकी परेशानी को समझता हूं, लेकिन इसके सिवाय कोई चारा नहीं था। मुझे आपके परिवार को सुरक्षित रखना है। मोदी ने 24 मार्च को देश के नाम संबोधन में 21 दिन (14 अप्रैल) तक पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया था।

    अरुणाचल के सीएम ने लॉकडाउन पर ट्वीट किया, 45 मिनट में हटाया

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तस्वीरें ट्वीट कर लिखा- लॉकडाउन का समय 15 अप्रैल को पूरा होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सड़कों पर आजादी से निकल सकेंगे। हम सभी को संक्रमण कम करने के लिए जिम्मेदार होना होगा। लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना से लड़ने का इकलौता तरीका है। हालांकि 45 मिनट बाद ही उन्होंने ट्वीट हटा लिया। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने ठीक से हिंदी न जानने वाले अधिकारी द्नारा जानकारी अपलोड करने की बात कही। पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिल्ली, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ, बिहार, झारखंड, लक्ष्यद्वीप, गोवा, पुडुचेरी, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

    कांग्रेस कार्यसमिति की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक

    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यसमिति के सदस्यों से चर्चा की। सोनिया ने कहा कि आज हमारे सामने बड़ा मानवीय संकट है। इससे निपटने के लिए सभी को साथ आना जरूरी है। लगातार टेस्ट और सावधानी बरतने के अलावा कोरोना से बचाव का कोई विकल्प नहीं है। हमारे डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ पूरी जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी में लगा हुआ है। इन सभी लोगों को स्पेशल सूट और एन-95 मास्क देना बहुत जरूरी है। इसके बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडियो को बताया कि कार्यसमिति मांग करती है कि सरकार दुनिया के नामी अर्थशास्त्रियों को साथ लेकर एक इकोनॉमिक टास्क फोर्स का गठन करे। सरकार को अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए तत्काल एक हफ्ते और इसके बाद 3 महीने की कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।