Category: शिक्षा

  • अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी:शिक्षा के इस मंदिर मे अब भगवान का मंदिर बनाने की मांग,बढ़ा विवाद

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: विवादों के केन्द्र बने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक नए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। शिक्षा के इस मंदिर में अब भगवान के मंदिर की सियायत ने जन्म ले लिया है। करीब 6 हजार हिदू छात्रों के इस केन्द्र में अब मंदिर बनवाने की मांग होने लगी है। विश्वविद्यालय के छात्र नेता अजय सिंह ने मांग क है कि कैंपस में अगर मुस्लिम साथी नमाज पढ़ सकते हैं तो हिंदू छात्रं के लिए कैंपस में पूजा के लिए मंदिर भी होना चाहिए। अजय सिंह ने इसको लेकर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को लेटर लिखा है।

    अजय सिंह का कहना है कि नोएडा में नमाज को लेकर हंगामा और बयानबाजी करने वाले छात्र संघ के नेता इतने ही सहिष्णु हैं तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कैंपस में अपने हिंदू भाईयों के लिए एक मंदिर क्यों नहीं बनवा देते। उन्होंने इस संबंध में कुलपति को पत्र लिखकर सरस्वती के मंदिर बनवाने की मांग रखी है ताकि छात्र परीक्षा के दौरान अच्छे परिणाम ने के लिए ज्ञान की देवी सरस्वती के दर पर माथा टेक सके।

    वहीं छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन के मुताबिक अगर कोई हॉस्टल, हॉल और लाइब्रेरी के सामने मंदिर बनाने की मांग करे तो ऐसा संभव नहीं है ये विवादित मांग है। इस बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति के सदस्य डॉ मानवेंद्र प्रताप सिंह ने भी मंदिर की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सौ फीसदी मुस्लिम आबादी वाले देश UAE में मंदिर बन सकता है तो एएमयू में क्यों नहीं। इस मांग के बाद कैंपस में सिय़ासत तेज हो गई है और छात्रों के गुट लामबंद होने लगे हैं।(इनपुट न्यूज २४)

  • बिहार:सरकारी शिक्षक बिना स्कुल गए अब नहीं बना पाएंगे हाजिरी,1जनवरी से बनेगी बायोमेट्रिक हाजिरी

    मिल्लत टाइम्स,पटना:बिहार में नीतीश कुमार ने एक नया नियम लागू करने जा रहे हैं जो एक काफी अहम बदलाव है सरकारी शिक्षकों को अब बिना उंगली लगाए हाजिरी नहीं बना पाएंगे क्योंकि पहले बहुत शिकायत रहती थी कि स्कूल से शिक्षक गायब है और उनकी हाजिरी बनी हुई रहती थी और ऐसी शिकायतें बीईओ और डीईओ को जांच करने के समय मिलता था अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि जब तक शिक्षक आएंगे नहीं तब तक हाजिरी बनेंगे नहीं

    नए साल में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार अब उनकी हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से लेगी। शिक्षा निदेशालय ने जिले के सभी स्कूल में 25 दिसंबर तक बायोमेट्रिक मशीनों को दुरुस्त कर अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। ताकि 1 जनवरी 2019 से यह व्यवस्था लागू हो सके। विभाग ने सरकारी शिक्षकों की लेट लतीफी चलते यह कदम उठाया है। अब हर स्कूल में यह मशीन लगाई जाएगी। जहां मशीनें खराब पड़ी हैं, वहां उन्हें जल्द से जल्द ठीक कराया जाएगा।

    अवकाश का प्रावधान मशीन में ही : बायोमेट्रिक मशीन में स्टाफ के लिए यदि आकस्मिक अवकाश चाहिए तो उसकी भी व्यवस्था मशीन में की गई है। मशीन में इस बारे में ऑप्शन दिया गया है। जिससे कर्मचारी आकस्मिक अवकाश भी ले सकते हैं, लेकिन कारण व विवरण लिखित में माह के अंत में भेजना होगा। मशीन को ई-सैलरी सिस्टम से अटैच करने का प्रोग्राम है।

    स्कूल पहुंचने में देरी हुई तो कटेगा वेतन :आदेश में शिक्षकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि देरी हुई तो शिक्षक के वेतन से पैसा कटेगा। शिक्षा निदेशालय ने सभी शिक्षकों को निर्धारित समय से 15 मिनट पहले स्कूल पहुंचने की हिदायत दी है। यदि अध्यापक तीन दिन लगातार 5 मिनट देरी से पहुंचेगा तो शिक्षकों का एक दिन का वेतन और एक दिन 10 मिनट देरी से पहुंचने वाले शिक्षक का आधा दिन का वेतन काटने का नियम है। हर महीने स्कूल से ई मेल द्वारा वेतन संबंधित जानकारी प्राप्त करेगा।

    बायोमेट्रिक व्यवस्था होने से शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचेंगे। पठन-पाठन में सुधार होगा। सभी विषयों की पढ़ाई होगी। जो शिक्षक लापरवाह थे, उन्हें अब विद्यालय में पढ़ाना होगा। इससे देर से पहुंचने वाले शिक्षकों पर नकेल कसा जा सकेगा। अभी आदेश पत्र प्राप्त नहीं है। निर्देश पर सभी कार्य किए जाएंगे। जगतपति चौधरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल

  • झारखंड:2018 में मैट्रिक,इंटर की परीक्षा में खराब प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने नहीं ली कोई सीख

    (अनवर हुसैन फिदवी/मिल्लत टाइम्स)
    झारखंड /रांची, वर्ष 2018 में मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में खराब प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने कोई सीख नहीं ली.हालत यह है कि इस बार परीक्षा को सिर्फ 60 दिन बचे हैं और तैयारी हवा-हवाई है.2018 में 59.48 प्रतिशत स्टूडेंट्स ही मैट्रिक की परीक्षा में पास हुए हैं, जबकि 1,73,559 स्टूडेंट्स असफल घोषित किये गये हैं.मैट्रिक की परीक्षा में इस साल 4,28,389 परीक्षार्थी शामिल हुए थे.

    पिछले साल 2017 में मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट 67.83 प्रतिशत हुआ था.गत वर्ष की तुलना में इस साल रिजल्ट में आठ प्रतिशत की गिरावट हुई.पिछले 13 सालों की तुलना में यह सबसे खराब परीक्षा परिणाम रहा था.परीक्षाफल प्रकाशित होने के बाद शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए कई घोषणाएं की, जो पूरी तरह से हवा-हवाई निकलीं.शिक्षा मंत्री ने कहा था कि इस वर्ष स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर कर ली जायेगी.10वीं कक्षा का सत्र समाप्त होने के बाद भी अब तक स्टूडेंट्स को न स्कूलों में शिक्षक ही मिले और न ही समय पर उन्हें किताबें सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जा सकीं.जैक पंजीयन विभाग के एक अधिकारी  के अनुसार इस बार मैट्रिक परीक्षा 20 फरवरी 2019 से होनी है.इसमें लगभग चार लाख स्टूडेंट्स शामिल होनेवाले हैं.ऐसे में बड़ा प्रश्न स्टूडेंट्स और अभिभावकों के समक्ष उत्पन्न हो गया है कि स्टूडेंट्स परीक्षा में बिना तैयारी के लिखेंगे क्या और परीक्षाफल उनका कैसा होगा.

    स्टूडेंट्स बिना तैयारी के देंगे परीक्षा, प्रति हाई स्कूल एक शिक्षक ने छात्रों को पढ़ाया

    2018 में मैट्रिक के खराब रिजल्ट के बाद सरकार ने घोषणा की थी इस राज्य के सभी हाई स्कूलों में 19 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया की जा रही है, ताकि नये सत्र में बच्चों को प्राप्त संख्या में शिक्षक मिल सकें.सरकार की घोषणा के बाद दिसंबर 2018 तक शिक्षकों की नियुक्ति अब तक हाई स्कूल में नहीं की जा सकी.झारखंड में कुल 2266 हाई स्कूल हैं, जिनमें 203 कस्तूरबा स्कूल व 89 मॉडल स्कूल शामिल हैं.इन स्कूलों में हाई स्कूल शिक्षकों की संख्या लगभग तीन हजार है.इस सत्र के दौरान प्रति स्कूल एक शिक्षक ने 10वीं का सिलेबस छात्रों को पढ़ाया है.वस्तुत: स्थिति का आकलन करने के बाद से यह साबित होता है कि मैट्रिक परीक्षा देनेवाले स्टूडेंट्स का सिलेबस इस वर्ष किस तरह से तैयार किया गया है और उन्हें किन परिस्थितियों में मैट्रिक की परीक्षा देनी होगी.

    राज्य के आधे स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें

    राज्य के आधे स्कूलों में 10वीं की किताबें नहीं पहुंचीं और जिन बच्चों के पास किताबें पहुंचीं, तब तक बच्चों का आधा सिलेबस खत्म हो चुका था.झारखंड परियोजना के अधिकारी महेंद्र कुमार ने बताया कि किताबों की छपाई देर से होने के कारण स्टूडेंट्स के बीच किताबें देरी से पहुंचीं.

    शिक्षकों की हड़ताल के कारण सरकारी स्कूलों को बच्चों ने छोड़ा

    2018 में पारा शिक्षकों के साथ कई बार हाई स्कूल एवं प्राथमिक शिक्षकों ने आंदोलन किया.इसके कारण 10वीं कक्षा में पढ़नेवाले राज्य के स्टूडेंट्स ने परीक्षा में बेहतर करने के लिए सरकारी स्कूलों को छोड़ निजी स्कूलों में नामांकन इस वर्ष लिया.वहीं, परीक्षा में शामिल होनेवाले स्टूडेंट्स की संख्या में गिरावट आयी है.जैक ने परीक्षा की तिथि (20 फरवरी से) घोषित तो कर दी है, लेकिन स्टूडेंट्स का सही डेटा नहीं दे रही है, क्योंकि इस वर्ष स्टूडेंट्स की संख्या में काफी गिरावट आयी है.बताय जा रहा है कि इस बार चार लाख से कम ही स्टूडेंट्स मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे.

    किस वर्ष में कितने स्टूडेंट्स मैट्रिक परीक्षा में हुए शामिल।

    वर्ष 2013 में  469667, वर्ष 2014 में 478079, वर्ष 2015 में 455829, वर्ष 2016 में 470280, 2017 में 467193, वर्ष 2018 में 428388

  • हिजाब पहनकर परीक्षा देने गई छात्रा सौदागर को,अधिकारियों ने नहीं देने दिया परिक्षा,जबकि ड्रेस कोड का नहीं था कोई कंडिशन

    तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है

    छात्रा ने कहा कि ऐसा करना उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ है इसलिए अधिकारियों से हिजाब हटाने के लिए इनकार कर दिया।…

    मिल्लत टाइम्स: गोवा के पणजी में मंगलवार (18 दिसंबर) को एक 24 वर्षीय छात्रा को हिजाब पहनकर राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (एनईटी) में नहीं बैठने दिया गया। पीटीआई की खबर के मुताबिक छात्रा ने आरोप लगाया कि उसने हिजाब हटाने से इनकार कर दिया तो अधिकारियों उसे परीक्षा नहीं देने दी। अधिकारियों का कहना है कि नकल रोकने और सुरक्षा के लिहाज से हिजाब या अन्य सामान के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं है। सफीना खान सौदागर नाम की छात्रा ने आरोप लगाया कि जब वह 18 दिसंबर को पणजी के परीक्षा केंद्र पर पहुंची तो पर्यवेक्षक ने उससे हिजाब हटाने को कहा। सौदागर ने मीडिया को बताया कि जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो उसे टेस्ट नहीं देने दिया गया। बता दें कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर की लेक्चरशिप और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एनईटी आयोजित कराता है। सौदागर ने बताया कि मंगलवार को 1 बजे जब उम्मीदवारों की पहचान पत्र जांचने की प्रक्रिया शुरू हुई, उसी वक्त वह परीक्षा केंद्र पहुंची थीं और पक्ति में खड़ी हो गई थीं।

    छात्रा ने कहा, ”जब मैं निरीक्षण अधिकारी के पास पहुंची तो उन्होंने मेरे दस्तावेज देखे, उन्होंने मुझे देखा और हिजाब के साथ मुझे परीक्षा हॉल में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, यह कहते हुए इसे हटाने को कहा।” छात्रा ने कहा कि ऐसा करना उसके धार्मिक विश्वास के खिलाफ है इसलिए अधिकारियों से हिजाब हटाने के लिए इनकार कर दिया। छात्रा ने कहा, ”वह मुझसे तर्क करने लगे और उनके आगे खड़ी महिला अधिकारी से परामर्श लिया।” सौदागर ने बताया कि तब पुरुष पर्यवेक्षक ने उनसे उनके कान दिखाने के लिए कहा जिससे फोटोग्राफ में पहचान की पुष्टि हो सके।

    छात्रा ने कहा, ”आखिर में मैं अपने कान दिखाने के लिए राजी हो गई और अधिकारियों से कहा कि वे मुझे वॉशरूम का रास्ता बता दें ताकि फिर से हिजाब को एडजस्ट कर सकूं। उन्होंने मुझे वॉशरूम का रास्ता बताने से मना कर दिया।” सौदागर ने कहा कि जैसा कि यह उनके इस्लामिक विश्वास के खिलाफ है, उन्होंने सार्वजनिक जगह पर हिजाब उतारने से मना कर दिया। छात्रा ने बताया कि जब उसे हिजाब या परीक्षा में से एक को चुनने के लिए कहा गया को उसने अपने धार्मिक विश्वास के आगे अकादमिक नुकसान को चुना।

    सौदागर ने बताया कि परीक्षा के लिए अप्लाई करते वक्त उन्होंने वेबसाइट पर जाकर ड्रेस कोड के बारे में भी पता किया था लेकिन वहां हिजाब या किसी तरह के ड्रेस कोड के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। पणजी में हायर एजुकेशन के डायरेक्टोरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परीक्षा में नकल रोकने या सुरक्षा के लिहाज से हिजाब ही नहीं, यहां तक की मंगलसूत्र या किसी तरह की एक्सेसरी ले जाने की अनुमति नहीं है। अधिकारी ने कहा कि यूजीसी के द्वारा परीक्षा पारदर्शिता से कराने के लिए लिए बड़ी सख्त गाइडलाइंस हैं और अधिकारियों ने वैसा ही किया

  • LU:बिना अप्रूवल विश्वविद्यालय ने बढ़ा दी फीस तो,विद्यार्थियों का फूटा गुस्सा,एडमिशन का किया बहिष्कार

    ओरिएंटल पर्शियन विभाग के 2 कोर्सों में फीस बढ़ोतरी का मामला

    रजिस्ट्रार ने कहा 23 तारीख के बाद इमरजेंसी मीटिंग करेंगे उसके बाद होगा फैसला

    मिल्लत टाइम्स,लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय के ओरिएंटल पर्शियन विभाग में चलने वाले आलिम और ताबीर ऐ माहिर पाठ्यक्रम में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने ऐडमिशन का बहिष्कार कर दिया है अभ्यर्थियों ने रविवार को विभाग के हेड अरशद जाफरी को ईमेल किया

    अभ्यार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना अप्रूवल मनमानी तरीके से कोर्स की फीस बढ़ा दी है इसे लेकर वीसी से लेकर रजिस्ट्रार तक को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन आवेदन प्रक्रिया के 4 महीने बाद भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले पाया है अभ्यर्थियों का कहना है कि एलयू पुरानी फीस लेगा तो ही हम एडमिशन लेंगे

    वेबसाइट पर भी फीस 1649 रूपए:
    अभ्यर्थियों के मुताबिक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर आलिम और दबीर ए माहिर कोर्स की फीस ₹1649 दी गई है लेकिन उनसे 2649 रूपये लिए गए ज्यादा फीस का कारण पूछा तो उन्हें ₹1000 एनरोलमेंट के अलग से जोड़े जाने की बात कही गई इतना ही नहीं ₹200 फार्म शुल्क भी लिया गया जो कि पहले फ्री था अभ्यर्थियों के मुताबिक इस संबंध में विभाग के हेड अरशद जाफरी से मिले तो उन्होंने वीसी और रजिस्ट्रार के पास भेज दिया

    इस संबंध में जब मिल्लत टाइम्स ने अरशद जाफरी से फोन पर बात कर पूछा के वहां के छात्र द्वारा जो इल्जाम लगाया गया है क्या वह सही है या गलत तो अरशद जाफरी ने कहा कि मुझे नहीं पता है जबकि अरशद जाफरी, ओरिएंटल पार्शियन विभाग लखनऊ यूनिवर्सिटी के हेड हैं अरशद जाफरी ने कहा कि मैं एक टीचर हूं इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है रजिस्ट्रार के पास होती है इसकी जानकारी और गोलमोल बातें करके उन्होंने फोन काट दिया

    तथा इस संबंध में अभ्यर्थियों का कहना है कि वीसी से लेकर के रजिस्ट्रार तक को पत्र लिख चुके हैं लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है

  • अब किसी भी उम्र में दे सकते हैं पांचवीं-आठवीं की परीक्षा, साल में मिलेंगे दो मौके

    मिल्लत टाइम्स,भोपाल, नईदुनिया। मध्य प्रदेश में ओपन स्कूल से अब किसी भी उम्र में पांचवीं-आठवीं की बोर्ड परीक्षा दी जा सकती है। इसके लिए मप्र राज्य ओपन स्कूल परीक्षा लेकर सर्टिफिकेट जारी करेगा। परीक्षा अगले सत्र (2019-20) से होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम में संशोधन कर दिया है।

    आरटीई की धारा-30 के अनुसार किसी भी बच्चे को आठवीं कक्षा तक फेल नहीं किया जा सकता है, लेकिन अब इसमें संशोधन किया है। संशोधन के बाद परीक्षा को लेकर राज्य ओपन स्कूल ने तैयारियां पूरी कर ली है। पांचवी व आठवीं की परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। पहली परीक्षा जून में और दूसरी परीक्षा दिसंबर में होगी। इसमें पांचवीं के लिए 11 वर्ष से अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी परीक्षा दे सकते हैं। वहीं, आठवीं के लिए 14 वर्ष से अधिक उम्र वाले परीक्षा में बैठ सकते हैं।

    कई नौकरियों में आठवीं का प्रमाण पत्र आवश्यक
    ऐसी कई निम्न वर्ग की नौकरियां हैं। जिनमें आठवीं तक की शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। उनके लिए ओपन स्कूल से आठवीं का बोर्ड परीक्षा पास करना फायदेमंद होगा। साथ ही कई अभ्यर्थी नौकरी करने के कारण पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं। वे भी अब परीक्षा दे सकते हैं।

    राज्य ओपन स्कूल के संचालक पीआर तिवारी का कहना है कि कुछ नौकरी के लिए अभ्यर्थी का आठवीं पास होना जरूरी रहता है। ऐसे अभ्यर्थी इन नौकरियों में आवेदन नहीं कर सकते थे, लेकिन अब ओपन स्कूल से आठवीं परीक्षा पास कर सकते हैं।