Category: रोज़गार,व्यवसाय

  • PMC बैंक क्राइसिस पर एक्ट्रेस का छलका दर्द, बोलीं- गहने बेचकर चलाना पड़ रहा है खर्च…

    पीएमसी बैंक घोटाले (PMC Bank Crisis) ने इसके ग्राहकों की जिंदगी पूरी तरह बदलकर रख दी है. पुलिस जांच के मुताबिक बैंक को 11 साल में करीब 4300 करोड़ से ज्यादा का चूना लग चुका है. बैंक में हुए इस घोटाले ने इसके ग्राहकों की जिंदगी पूरी तरह से बदल कर रख दी है. क्योंकि वित्तीय गड़बड़ी के चलते आरबीआई (RBI) ने खाताधारकों के पैसे निकालने की एक सीमा तय कर दी है. आम लोगों के साथ इसका असर टीवी एक्ट्रेस नुपुर अलंकार (Nupur Alankar) पर भी पड़ा है. इस घोटाले ने उनकी जिंदगी में तूफान ला दिया है, यहां तक कि नुपुर को अपना गुजारा करने के लिए अपने गहने तक बेचने पड़ रहे हैं. यह बात नुपुर अलंकार ने खुद टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताई.

    अपनी परेशानियों के बारे में नुपुर अलंकार (Nupur Alankar) ने बताया, ‘घर पर पैसे न होने के कारण, सभी अकाउंट फ्रीज कर देने की वजह से मेरे पास गहने बेचने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था. यहां तक कि मैने अपने साथी अभिनेता से 3,000 हजार रुपये उधार लिए. किसी दूसरे ने मुझे 500 रुपये ट्रांसफर किए. इसके अलावा, मैंने अपने दोस्तों से भी 50,000 हजार रुपये उधार लिए. अभी तक यह भी नहीं पता चल पाया है कि इस समस्या का समाधान कब होगा और हमें डर भी है कि कहीं हम अपना पैसा न खो दें.’

    टरव्यू के दौरान नुपुर अलंकार (Nupur Alankar) ने कहा, ‘मैं एक बड़े वित्तीय संकट से गुजर रही हूं. दूसरे बैंकों में भी मेरे खाते हैं, लेकिन मैंने उन सब को इस बैंक में ट्रांसफर कर दिया था. मुझे क्या पता था कि मेरे परिवार की और मेरी जमापूंजी बैंक में इस तरह फंस जाएगी. मैं पैसों के बिना अपना जीवन कैसे गुजार सकती हूं? क्या मुझे अपने घर को गिरवी रखना चाहिए? मेरी मेहनत की कमाई पर ही इतनी रोकथाम क्यों? मैंने पूरी शिद्दत के साथ इनकम टैक्स अदा किया है, तो मुझे इस चीज से क्यों गुजरना पड़ रहा है?’ नुपुर ने बातचीत में बताया कि उनका क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड कुछ काम नहीं कर रहा है.

    नुपुर अलंकार (Nupur Alankar) ने आगे बताया, ‘सबसे बुरी चीज यह है कि मैं अभी कोई लोन लेने की स्थिति में भी नहीं हूं. जिस पल मैंने टेलीकॉलर्स से कहा कि मेरा खाता पीएमसी बैंक में है तो उन्होंने उसी वक्त फोन काट दिया.’ बता दें कि नुपुर अलंकार अपने करियर के दौरान ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ और ‘घर की लक्ष्मी बेटियां’ जैसे सीरियल्स में काम कर चुकी हैं. input(NDTV)

     

  • PMC Bank के ग्राहकों को RBI से मिली बड़ी राहत, अब 10 हजार रुपये निकाल सकेंगे

    PMC बैंक के ग्राहकों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से राहत मिली है. अब इस बैंक के ग्राहक 6 महीने में 10 हजार रुपये तक निकाल सकेंगे. पहले यह राशि 1 हजार रुपये थी, जिसे विरोध प्रदर्शन के बाद बढ़ाया गया है. बता दें कि मुंबई में पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC BANK) में वित्तीय गड़बड़ियों की वजह से RBI ने खाता धारकों को हज़ार रुपये से ज़्यादा देने रोक लगा दी थी, जिसकी वजह से बैंक के हर ब्रांच में भीड़ लगी थी और लोग इसका जमकर विरोध कर रहे थे.पैसों की निकासी पर रोक से नाराज़ खाताधारकों ने आज ही बैंक से लेकर थाने तक मार्च भी किया था.

    बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बीते मंगलवार को मुंबई स्थित पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (PMC) बैंक लिमिटेड पर किसी भी प्रकार के व्यापारिक लेन-देन पर रोक लगा दी थी, जिससे बैंक के निवेशकों और शहर में व्यापारी वर्ग को बड़ा झटका लगा था.

    रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने बताया था कि RBI के निर्देशों के अनुसार, पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) के जमाकर्ता बैंक में अपने सेविंग, करंट या अन्य किसी भी तरह के खाते में से 1,000 रुपये से ज्यादा रुपये नहीं निकाल सकते हैं. PMC बैंक पर RBI की अग्रिम मंजूरी के बिना ऋण और अग्रिम धनराशि देने या रीन्यू करने, किसी भी प्रकार का निवेश करने, फ्रेश डिपोजिट स्वीकार करने आदि पर भी रोक लगा दी गई थी.

    मालूम हो कि भारत में 1,500 से अधिक छोटे शहरी सहकारी बैंक हैं जो आमतौर पर कुछ जिलों या राज्यों में छोटे स्थानीय समुदायों को अपनी सेवा देते हैं. INPUT:(NDTV)

     

  • नरेंद्र मोदी सरकार के 100 दिन : डूब गए निवेशकों के 12.5 लाख करोड़ रुपये

    30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद पहले 100 दिन के भीतर निवेशक 12.5 लाख करोड़ रुपये गंवा चुके हैं. सोमवार को बाज़ार बंद होने के वक्त बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों की बाज़ार पूंजी या उनका बाज़ार मूल्य 1,41,15,316.39 करोड़ रुपये था, जबकि मोदी सरकार के सत्ता संभालने से एक दिन पहले यह बाज़ार मूल्य 1,53,62,936.40 करोड़ रुपये था.

    30 मई से अब तक BSE का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 5.96 प्रतिशत, या 2,357 अंक लुढ़क चुका है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के संवेदी सूचकांक निफ्टी 50 में 30 मई से अब तक 7.23 प्रतिशत, या 858 अंक की गिरावट दर्ज की गई है.

    विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाज़ारों में गिरावट की वजूहात में आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार के अलावा विदेशी फंडों का देश से बाहर जाना व कॉरपोरेट की कम कमाई भी शामिल है.

    भारतीय बाज़ारों में विदेशी निवेशक बिकवाल हो गए हैं. बिकवाली का दबाव उस समय बढ़ा, जब वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में पेश किए गए NDA सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में विदेशी निवेशकों पर भी सुपर-रिच टैक्स लागू कर दिया, हालांकि इस टैक्स को लगभग एक महीने बाद वापस ले लिया गया था.

    नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सरकार गठन के बाद से अब तक 28,260.50 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके

    IDBI कैपिटल में रिसर्च प्रमुख ए.के. प्रभाकर ने NDTV को बताया, “बाज़ारों में गिरावट की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल शुरू होने से काफी पहले ही हो गई थी.

    फरवरी, 2018 के बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स तथा डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लागू किए जाने के बाद से ही शेयर बाज़ार मूल्यांकन में गिरावट शुरू हो गई थी, और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीज़िंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज़ (IL&FS) संकट के बाद बाज़ारों में मंदी और बढ़ गई..

    ए.के. प्रभाकर के अनुसार, “बहुत-सी मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में काफी सुधार हुआ और अब वे बढ़िया मूल्यांकन पर हैं. IL&FS संकट का बाज़ारों पर काफी देर तक असर बना रहा, लेकिन अब हालात में सुधार की उम्मीद है

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा एकत्र किए जाने वाले सभी सेक्टरों के सूचकांकों में, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स को छोड़कर, पिछले 100 दिनों में नकारात्मक रिटर्न ही देखने को मिली है, और निफ्टी का PSU बैंक इंडेक्स तो 26 प्रतिशत गिरा है. पिछले महीने सरकार ने सरकारी बैंकों के बड़े स्तर पर विलय की घोषणा की थी, और अब सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों की संख्या 12 हो जाएगी.

    अमेरिका और चीन के बीच व्यापार गतिरोधों के बढ़ने से धातु (मेटल) इंडेक्स में 20 फीसदी की गिरावट आई है. विश्लेषकों का कहना है, एन्टी-डंपिंग ड्यूटी के बावजूद चीन सस्ता स्टील बेच रहा है, जिससे घरेलू धातु कंपनियों को नुकसान हो रहा है.

    निफ्टी के ऑटो इंडेक्स में 13.48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि ऑटो उद्योग पिछले दो दशक की सबसे भयावह मंदी का सामना कर रहा है. IDBI कैपिटल में रिसर्च प्रमुख ए.के. प्रभाकर ने कहा, “हमने पिछले पांच साल के दौरान ऑटो क्षेत्र में ज़ोरदार उछाल देखा, इसलिए मंदी भी साफ नज़र आ रही है. चौपहिया वाहनों की इतनी शानदार बिक्री (पिछले पांच साल जैसी) कभी नहीं देखी गई थी.पिछले पांच साल में मारुति सुज़ुकी ने जिस तरह तरक्की की है, वह अद्भुत है.

    निफ्टी के बैंक, प्राइवेट बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टरों के इंडेक्सों में भी 10 से 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

  • भारत में बढ़ती बेरो़गारी दर 45 साल के ऊचे स्तर पर पहुंची:शौकत नोमान

    भारत में बेरोज़गारी एक प्रमुख सामाजिक मुद्दा रहा है, सितंबर 2018 तक भारत में 31 मिलीयन बेरोजगार है।
    बेरो़गारी दर 45 साल के ऊचे स्तर पर पहुंच गई। इसे भारत सरकर द्वारा आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। कुछ महीने पहले लिक हुए एक रिपोर्ट में बताया गया था के भारत में बेरोजगारी की स्तर 45 साल के ऊंचे स्तर पर है।

    इस रिपोर्ट को लिक होते ही मोदी सरकार ने मानने से इंकार कर दिया था, मगर वहीं मोदी सरकार को इस खारिज ना कर सका, 31/05/19 को स्वीकार करने पर मजबूर होना पड़ा।
    पूरे देश में जूलाई 2017 से लेकर जून 2018 तक 1 साल में बेरोजगारी सचमुच 6.1% के दर से बढ़ा। वहीं, केन्द्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 6 साल में ग्रामीण इलाकों के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी बढ़ कर तीन गुना से ज्यादा हो गई।

    भारत की राजधानी दिल्ली में जितनी कोचिंग संस्थान हैं उतनी तो नौकरी भी नहीं मेरे अनुसार,
    खुद पर भरोसा रखें, इन गैर कानूनी कोचिंग संस्थान की बहकावे में ना आये, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत करे।

    एक मित्र आरती शर्मा अपने फेसबुक वाल पर लिखती है-:
    13 साल के बच्चे प्यार कर रहे है,
    65 साल के लोग शादी कर रहे हैं,
    और जिनकी उम्र ये सब करने की वो कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे हैं।

    मेरे दूसरे मित्र Arshad Anwar लिखते हैं।-:
    जरूरी नहीं है कि बर्बाद होने के लिए जुआ, शराब और इश्क़ ही किया जाएं,
    आप सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर सकते है….।

    हर शक्श दौडता है भीड़ की तरफ, फिर यही चाहता है उसे भी मिल जांए रास्ता, वो रास्ते पर होता तो है लेकिन वो रास्ता तो भ्रष्टाचारियों से बंद हुआ मालूम पड़ता है।

    (लेखक सौकत नोमान)

  • जानिए- बीएसएनएल को मोदी सरकार ने किस तरह बर्बाद किया

    यह बात सभी को पता है कि किस तरह से 4जी स्पेक्ट्रम बीएसएनएल को न देकर बाकी सब कंपनियों दिया गया….. मोदी सरकार की मंशा जियो को प्रमोट करने की थी और उसी को आगे बढाने के लिए बीएसएनएल को धीमा ज़हर दिया गया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रिलायंस को सिर्फ डेटा सर्विस के लिए लाइसेंस दिया गया था, लेकिन बाद में 40 हजार करोड़ रुपये की फीस की बजाय 1,600 करोड़ रुपये में ही वॉयस सर्विस का लाइसेंस दे दिया गया।

    लेकिन जियो के पास इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव था। इसलिए मोदी सरकार ने बीएसएनएल के इंफ्रास्ट्रक्चर को धीरे धीरे जिओ को देना शुरू किया। 2014 में सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने एक टॉवर पॉलिसी की घोषणा की ओर दबाव डालकर रिलायंस जिओ इंफोकॉम लिमिटेड से भारत संचार निगम लिमिटेड के साथ मास्‍टर शेयरिंग समझौता करवा दिया। इस समझौते के तहत रिलायंस जिओ बीएसएनएल के देशभर में मौजूद 62,000 टॉवर्स का उपयोग कर सकती थी। इनमें से 50,000 में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध थी ।

    यह जिओ के लिए संजीवनी मिलने जैसा था क्योंकि वह चाहे कितना भी पैसा खर्च कर लेती, इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नही खड़ा कर सकती थी। लेकिन उसके सामने एक मुश्किल यह ओर थी कि बीएसएनएल भी उसके कड़े प्रतिद्वंद्वियों में से एक था, जिन्हें इन टॉवर से सिग्नल्स मिलते थे।

    इसलिए मोदी सरकार ने ग़जब का खेल खेला, उसने जिओ को इन टावर का निरंतर फायदा मिलते रहे इसके लिए इन टावर्स को एक अलग कम्पनी बना कर उसमे डाल दिया।

    मोबाइल टॉवर किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर के लिए सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं, इस कदम का परिणाम यह हुआ कि अब बीएसएनएल को भी इन टावरों का इस्तेमाल करने के लिए किराया चुकाना पड़ रहा था। 2017 में मोदीं सरकार ने यह फ़ैसला लिया था, जिससे बीएसएनएल ख़ुद अपने ही टॉवरों की किराएदार बन गया।

    नतीजतन जो कम्पनी 2014-15 में 672.57 करोड़ रुपए के फायदे में आ गई थी, इस निर्णय के बाद हजारों करोड़ रुपए का घाटा दर्शाने लगी।

    कुछ समझे आप मोदी सरकार ने बीएसएसएल को 4जी स्पेक्ट्रम अलॉट भी नही किया और उसे बीएसएनएल के टावर भी दिलवा दिए और बीएसएनएल को ख़ुद अपनी ही संपत्ति का किराएदार भी बना दिया।

    लेकिन मोदी सरकार यही नही रुकी उसने उन राज्यों में जहाँ उसकी सरकार थी, वहां ऐसी पॉलिसी बनाई जिससे जिओ को फायदा पुहंचे ओर बीएसएनएल को कोई मौका नहीं मिले।

    छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार ने एक योजना शुरू की जिसे संचार क्रांति योजना कहा गया। 2011 में छत्तीसगढ़ में मोबाईल की पहुंच 29 प्रतिशत थी। छत्तीसगढ़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों एवं कम जनसंख्या घनत्व के कारण दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां राज्य में नेटवर्क का विस्तार नहीं कर पा रही थी।

    संचार क्रांति योजना के तहत इन क्षेत्रों में टेलीकॉम प्रदाता कंपनी द्वारा नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदाय किए जाने हेतु अधोसंरचना (इन्फ़्रास्ट्रक्चर) तैयार की जानी थी और 1500 से अधिक नए मोबाईल टॉवर लगाये जाने थे 600 करोड़ रुपये मोबाइल टावरों की स्थापना पर खर्च किये जाने थे, यानी सारा काम सरकारी खर्च पर किया जाना था। यह ठेका बीएसएनएल के बजाए जियो को दिया गया।

    इस तरह से मोदी राज में BSNL को पूरी तरह से बर्बाद करने की दास्तान लिखी गई।

    (गिरीश मालवीय स्वतंत्र पत्रकार हैं।)