मुजफ्फरुल इस्लाम
घोसी,मऊ।स्थानीय नगर स्थित अजीजिया कोचिंग सेंटर में बुधवार को सामाजिक दूरी के साथ अजीजिया समारोह का आयोजन किया गया।जिमसें कोचिंग संस्थान में अध्यनरत उन प्रतिभाओं को जो सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया उन्हें प्राइड ऑफ अजीजिया अवार्ड से सम्मानित किया गया।संस्थान के छात्र अभिषेक यादव ने 92%,आबिद हुसैन,मो फराज, साहिल खान,हिमांशु मौर्य, अनुपम,अर्चिता सिंह ने 94%मार्क्स हासिल किया ।संस्थान के डाइरेक्टर अजीजुल्लाह अब्बासी ने प्रतिभाओं को अवार्ड देते हुए बताया कि इस वैश्विक महामारी में भी यह संस्थान आधुनिक एवं उच्च क्वालिटी लेवल केसाथ ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहा है।बड़े शहरों जैसे आधुनिक सुविधाओं के साथ यह संस्थान सतत प्रयासरत रहता है कि इस क्षेत्र से प्रतिभाएं निकले जो पुरे देश मे नाम रोशन करें। यूट्यूब के साथ भी जुड़ कर लाभ लिया जा सकता है।
Category: शिक्षा
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UP:सीबीएसई बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्राइज़ लाफ़ अज़ीज़िया से सम्मानित किया गया
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राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार का समय नजदीक।
किसी भी समय चार सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।
अशफाक कायमखानी।जयपुर।
पीछले साल 25 व 26 जून को राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा 2018 की आयोजित मुख्य परीक्षा का परीणाम आखिर कार कोर्ट के आदेश पर तकनीकी जांच के बाद जल्द जारी होकर सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार अगस्त या सितंबर मे शुरू होने की उम्मीद के बाद प्रशासनिक व सरकार के स्तर पर जारी हलचल से लगने लगा है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के खाली चल रहे चार सदस्य पदो पर नये सदस्यों की जल्द नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।राजस्थान सीविल सेवा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार के अगस्त-सितंबर मे शूरू होने की सम्भावना के अतिरिक्त पुलिस सेवा के सब इंस्पेक्टर की लिखित परीक्षाओं मे चयनित होने वाले प्रत्याशियों के साक्षात्कार इसी दस जुलाई से शूरु हो रहे है। एवं जेएलओ पद के लिये लिखित परीक्षा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार की डेट भी जुलाई माह मे आने की सम्भावना जताई जा रही है।
राजस्थान लोकसेवा आयोग मे भाजपा सरकार के समय नियुक्त चार सदस्यों मे अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती व सदस्य राजकुमारी गुर्जर, रामू राम रायका व शिवसिंह राठौड़ वर्तमान समय मे पदस्थापित है। जबकि पीछली कांग्रेस सरकार के समय बने सभी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके है।
राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा परीक्षा 2018 की मुख्य परीक्षा पीछले साल 25-26 जून को आयोजित होने के बाद कानूनी उलझन मे फंसने के बाद आखिरकार हाल ही मे हाईकोर्ट के जारी आदेश अनुसार अगले महीने मे सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार शुरू होने की उम्मीद जताई जाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दवाब बढ गया है कि वो जल्द रिक्त चल रहे चार सदस्य पदो पर नये लोगो की नियुक्ति करे।
लोकसेवा आयोग के सदस्यों के पद वैसे तो सवैधानिक पद होते है। लेकिन इन पदो पर नियुक्ति करते समय केण्डीडेट की योग्यता के अतिरिक्त राजनीति व बिरादरी संतुलन पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है। वर्तमान सरकार के समय जल्द होने वाली सम्भावित उक्त नियुक्तियों मे भी जाट-मुस्लिम-एससी एसटी व मूल ओबीसी पर विशेष फोकस किये जाने की चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती के तीन माह बाद अक्टूबर मे रिटायर होने पर उनकी जगह अध्यक्ष पद पर पुलिस विभाग के आला अधिकारी की नियुक्ति होने की प्रबल सम्भावना जताई जा रही है।
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कैम्पस एंड रिमोट कैम्पस सिंकोरोनस मोड एक नया शिक्षा मोडयूल :प्रोफेसर अहरार हुसैन
नई दिल्ली 9 जुन।
केन्द्रीय सरकार के पीएम ई-विद्या प्रोग्राम के तहत सौ विश्वविद्यालय को अॉन लाइन कोर्सेज चलाने की मंजूरी प्रसंशनीय है, इस से ना सिर्फ इन कैम्पस बल्कि अॉफ कैम्पस विद्यार्थियों को अॉन लाइन डिग्री कोर्सेज के अवसर मिलेंगे और इस से डूवल मूड शिक्षा संस्थानों कि महत्त्वता और ज्यादा बढ़ जाएगी। यह बातें जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेन्टर फॉर डिस्टेंस एंड ओपन लर्निंग के अॉनरेरी डायरेक्टर प्रोफेसर अहरार हुसैन ने अपने एक बयान में कही
प्रोफेसर अहरार हुसैन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में फिचर्रिसटीक एजुकेशन कि अपनी एक महत्वता है इस के तहत इन कैम्पस एंड रिमोट कैम्पस सिंकोरोनस मोड एक नया शिक्षा मोडयूल होगा जो कि समय के अनुसार अत्यंत आवश्यक है अतः इस ओर शिक्षा संस्थानों के जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए ताकि शिक्षा को और तरक्की का अवसर मिल सके।प्रोफेसर अहरार हुसैन ने कहा कि फेस टू फेस शिक्षा व्यवस्था के तहत जो कुछ क्लास रूम में होता है वही सब कुछ रिमोट कैम्पस या अॉफ कैम्पस के छात्रों को दिया जा सकता है हालांकि युजीसी के द्वारा भी रेगुलर और डिस्टेंस के पाठ्यक्रम को एक जैसा रखने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं अतः ऐसे में रेगुलर क्लास को डिस्टेंस के छात्रों के लिए ओपन किया जाना चाहिए ताकि एक शिक्षा और एक पाठक्रम से लाभान्वित हो सकें।
प्रोफेसर अहरार हुसैन ने कहा कि करोना वायरस का खतरा लम्बे समय तक रह सकता है इस लिए सरकार कि ओर से पीएम इ- विद्याया प्रोग्राम की शुरुआत प्रसंशनीय है इसलिए स्कूलों, कालेजों, युनिवर्सिटीयों को अॉन लाइन कि ओर ध्यान देना चाहिए और एक समय में फेस टू फेस और रिमोट कैम्पस के लिए खुद को तैयार करना चाहिए ताकि छात्र दोनों में से अपना अॉपशन तलाश कर सकें । इस से शिक्षा संस्थानों का फायदा भी होगा, एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों कैम्पस के लिए काफी होंगे । हालांकि शिक्षा संस्थानों को टेक्नोलॉजी से लैस होना पड़ेगा और क्लास रुम भी तैयार करने होंगे, इस से आसान शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे।इस प्रकार की शिक्षा के बाद रेगुलर डिग्री, क्लाउड डिग्री और मोक्स डिग्री दीजाएंगी।
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लॉकडाउन के कारण घर गए बच्चे जिले में ही दे सकेंगे CBSE 10-12वीं की परीक्षा,स्कूल को देनी होगी जानकारी
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं के सेंटर से जुड़ी बड़ी राहत की घोषणा की। निशंक ने ट्वीट करके कहा कि कोरोना संकट के कारण जो बच्चे अपने गृह प्रदेश चले गए हैं और अपने बोर्ड परीक्षा के सेंटर वाले जिले में नहीं हैं ऐसे छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा अपने गृह जिले में ही दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने स्कूल को जिले और करीब के सेंटर की जानकारी देनी होगी।
CBSE बोर्ड की परीक्षाएं 1 से 15 जुलाई 2020 के बीच आयोजित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री निशंक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।
#Covid_19 संकट के कारण हजारों बच्चे अपने गृह प्रदेश में चले गए थे, ऐसी स्थिति में सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हो रहे विद्यार्थियों की समस्या को ध्यान में रखते हुए #CBSE ने यह फैसला लिया है कि ऐसे विद्यार्थी अपनी बोर्ड परीक्षा अपने गृह जिले में ही दे सकते हैं।@DDNewslive pic.twitter.com/3UFkbISIPm
— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) May 27, 2020
जून के पहले सप्ताह में सेंटर पता चलेगा
निशंक ने कहा कि बच्चों की परेशानी को देखते हुए ये फैसला किया गया है। अब बच्चों को चाहिए कि वे जल्दी से जल्दी अपने स्कूल से सम्पर्क करके उन्हें अपने गृह जिले के बारे में यह बताएं कि आप वहीं रहकर बाकी के पेपर्स देना चाहते हैं। स्कूल और विभाग इसकी पूरी व्यवस्था करके जून के प्रथम सप्ताह तक बच्चों को सेंटर की जानकारी दे देंगे।
29 विषयों की परीक्षाएं बाकी हैं
कोरोना लॉकडाउन के कारण सीबीएसई ने 83 विषयों की परीक्षाएं रोक दी थीं। इसके बाद बोर्ड ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि इन 83 विषयों में से 29 विषयों की ही परीक्षाएं होंगी। ये वही विषय होंगे, जो अगली क्लास में जाने के लिए जरूरी हैं।

एडमिट कार्ड भी नहीं बदलेंगे
सीबीएसई के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एडमिट कार्ड वही रहेंगे। कारण, अब अलग-अलग स्टूडेंट्स के अलग-अलग पेपर हैं और हर पेपर में स्टूडेंट्स की संख्या भी कम है। अधिकतर स्टूडेंट्स के हिंदी कोर, हिंदी इलेक्टिव जैसे पेपर शेष रहे हैं। मेन स्ट्रीम के पेपर पूरे हो चुके हैं। वहीं, कॉमर्स साइड का एक पेपर बिजनेस स्टडीज का बचा है।होम साइंस, भूगोल और बायो टेक्नोलॉजी के साथ ही आईटी के कुछ पेपर हैं। ये ऐसे पेपर हैं, जिनमें स्टूडेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होती। उत्तर पूर्वी दिल्ली को छोड़कर बाकी इंडिया में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, बायोलॉजी, लिट्रेचर सहित विभिन्न मेन स्ट्रीम के पेपर हो चुके हैं।
फिजिकल डिस्टेंसिंग का रखा जाएगा ख्याल
परीक्षा केंद्रों पर सीबीएसई कोशिश कर रहा है कि स्टूडेंट्स के बीच फिजिकल डिस्टेंसिंग मेंटेन रखी जाए। 12वीं के जो पेपर शेष रहे हैं, उनमें स्टूडेंट्स कम हैं। सीबीएसई की डेटशीट में भी यह कोशिश की गई है कि एक दिन एक ही विषय का पेपर हो। ऐसे में स्टूडेंट्स की संख्या कम होने पर फिजिकल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने के लिए परीक्षा केंद्र पर अन्य कक्षों में भी स्टूडेंटस को शिफ्ट किया जा सकता है।
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सीएम लॉ कॉलेज गेट पर से क्यों हटाया गया उर्दू नेमप्लेट?बिहार की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू का किया अपमान:अमानुल्लाह
सीएम लॉ कॉलेज गेट पर से क्यों हटाया गया उर्दू नेमप्लेट?बिहार की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू का किया अपमान, जबाब दे विवि प्रशासन: एस ० आई ० आे ० दरभंगा
कॉलेज प्रशासन ने बिहार की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू का किया अपमान: बी वाई आे दरभंगा
सिर्फ उर्दू नाम को कॉलेज की पट्टी से नोच कर नहीं फेंका गया बल्कि आपके वजूद को मिश्रित समाज से निकाल कर अलग-थलग गया है।प्रेस विज्ञप्ति, दरभंगा: इस समय देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, लेकिन मिथिला के कुछ छात्र संगठन एवं राजनीतिक दल शिक्षण संस्थान में उर्दू भाषा के नाम पर साम्प्रदायिकरण का खेल खेलने में लगे हुये हैं। सम्प्रदायिकरण की इस जड़ में साफ-साफ बिहार सरकार की गठबंधन राजनीतिक पार्टियां नजर आ रही हैं।
उक्त बातें एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए एस आई ओ दरभंगा के जिला अध्यक्ष अमानुल्लाह और बी ०वाई० आे ० दरभंगा के जिला सचिव अब्दुल मलिक ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुये कहा। आगे उन्होंने इस विषय पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सीएम लॉ कॉलेज गेट से किस आधिकारिक आदेशानुसार उर्दू नेमप्लेट हटाया गया है? जबकि पूर्व से ही कॉलेज गेट पर हिन्दी के अलावा उर्दू भाषा में भी कॉलेज का नाम अंकित है। क्या लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो० बदरे आलम किसी के दबाव में काम कर रहे हैं? क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंगा-जमुनी तहजीब को तोड़ने के लिए सांप्रदायिकता फैलाने वालों के साथ हाथ मिलाया है? यह जबाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना होगा साथ ही लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल को बताना चाहिए आखिर घटना आगे कैसे और क्यों बढ़ गया। बिहार की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू है फिर भी कॉलेज प्रशासन ने किस आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए किस कानून के तहत उर्दू नेम प्लेट हटा दिया गया है। अगर कॉलेज एवं विश्वविद्यालय प्रशासन जल्दी उर्दू नेम प्लेट नहीं लगाता है तो एस आई ओ विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। कानून के मंदिर में कॉलेज प्रशासन को कानून के हिसाब से काम करना चाहिए लेकिन इन्होंने खुलेआम कानून की अवहेलना की है। ऐसा लगता है कि नफरत को फलने-फूलने देने वाले लोगों को इस बात का ज्ञान नहीं है कि उर्दू बिहार की दूसरी सरकारी भाषा है। लेकिन फिर कुछ छात्र संगठन एवं राजनीतिक दल ने एक बार फिर इस घिनौनी हरकत कर कॉलेज को बदनाम करने का दुस्साहस किया है।
सभी भाषाओं का सम्मान हमारे देश की संस्कृति रही है, राष्ट्रीय भाषा हिन्दी के साथ-साथ उर्दू और दूसरी अन्य सभी भाषाएं हमारे समाज की साझी विरासत है। हिन्दी के साथ साथ उर्दू भी भारत की गोद में पली बढ़ी हैं। एक भरतीय नागरिक होने के नाते हम देश के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सभी भाषाओं के रक्षक हैं। अपनी इस साझी विरासत को साम्प्रदायिकता की आड़ में खोने नहीं देंगे।
#Urdu
#CMlawCollegeअमानुल्लाह
जिला अध्यक्ष
एस ० आई ० आे ० दरभंगा
अब्दुल मलिक
जिला सचिव
बी० वाई ०आे० दरभंगा
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सीएम लॉ कॉलेज मुख्य द्वार पर हिंदी और उर्दू में कॉलेज का नाम लिखे जाने का विरोध कर रहे छात्रों एंव संस्थानों पर कार्यवाही कर कुलपति लोकतान्त्रिक व्यवस्था को सुनिश्चिय करें:एडवोकेट मो.अदीबउद्दीन
*प्रेस विज्ञप्ति*
दरभंगा:सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया जिला युवा अध्यक्ष, एडवोकेट मो. अदीबउद्दीन ने कहा की
हाल ही मे सीएम लॉ कॉलेज मुख्य द्वार पर हिंदी और उर्दू में कॉलेज का नाम लिखाया गया है, जिसे देख कुछ साम्प्रदायिक छात्रों ने उर्दू मे लिखे नाम का विरोध कर रही है और उर्दू को धर्म विशेष से जोड़कर बता रही है, जबकी उर्दू बिहार का द्वित्य भाषा है और उर्दू भारतीय समाज का अभिन्न अंग है, लेकिन कुछ लोग जो साम्प्रदायिक मानसिकता से ग्रसित है वो इसका विरोध तो कर रहे एवं प्रिंसिपल से भी अमर्यादित भाषा मे बात कर रहे है साथ ही साथ समाज मे ज़हर घोलने का काम कर रहे है, ये नफरत फैलाने वाले लोग असल मे भारत के संविधान के खिलाफ है, जो की संवैधानिक व्यवस्था के अंदर किये गये कार्यों का विरोध करते है,एडवोकेट मो. अदीबउद्दीन ने कहा इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन एंव कुलपति को इस नफरत फैलाने वाले छात्रों एंव संस्थानों पर कार्यवाही करना चाहिए जो भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने का काम कर रहे है और यह कार्यवाही धर्म और भाषा के नाम पर अराजकता फैलाने वालों के लिए एक सबक होना चाहिए,
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मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू
हैदराबाद स्थिति मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (Maulana Azad National Urdu University) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2020-2021 के लिए विभिन्न पाठक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक उम्मीदवार आईटीआई, पॉलीटेक्निक, पूर्वस्नातक, स्नातक, परास्नातक के साथ शोध के पाठक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं। विभिन्न पाठक्रम में प्रवेश के लिए के लिए योग्यता भिन्न-भिन्न निर्धारित है।
JEE Mains और NEET परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा
विभिन्न पाठक्रमों में प्रवेश दो तरीकों से दिया जाएगा। कुछ पाठक्रम में प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। जबकि, कुछ पाठक्रमों में प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। मेरिट आधारित पाठक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 अगस्त 2020 है। जबकि, प्रवेश परीक्षा आधारित पाठक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 जून 2020 है।
उम्मीदवार पाठक्रम, शुल्क, सुविधा सहित अन्य की अधिक जानकारी के लिए यूनिवर्सिटी की वेबसाइट www.manuu.ac.in देखें।
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फीस जमा नही कराने पर स्टूडेंट्स के नाम नही काटे।दसवीं -बारहवीं के बचे पेपर कराने का फैसला बाद मे होगा।
अशफाक कायमखानी।जयपुर।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण कोई अभिभावक आर्थिक स्थिति के चलते फीस जमा नहीं करा पाता है तो निजी स्कूल ऐसे विद्यार्थी का नाम नहीं काटें। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है तो राज्य सरकार उसकी मान्यता निरस्त कर सकती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि शिक्षा विभाग इस बात का भी परीक्षण कराए कि निजी स्कूल विद्यार्थियों को फीस एवं अन्य शुल्कों में किस प्रकार राहत दे सकते हैं और उन विद्यालयों का संचालन भी प्रभावित नहीं हो।मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़े विषयों पर समीक्षा की। मानवता के समक्ष यह ऐसा संकट है जिसका हम सभी को मिलकर सामना करना है। ऐसे वक्त में एक-दूसरे का ध्यान रखकर ही हम इस मुश्किल वक्त का मुकाबला कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं एवं बारहवीं कक्षाओं की शेष परीक्षाएं फिलहाल स्थगित रहेंगी। बाद में सीबीएसई द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अनुरूप फैसला किया जाएगा, ताकि दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में एकरूपता बनी रहे और प्रदेश के विद्यार्थियों का अहित न हो। इसी प्रकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भी परीक्षाओं का आयोजन स्थितियां सामान्य होने पर करवाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग ग्रीष्मावकाश में बच्चों को मिड-डे मील के लिए उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। ताकि लॉकडाउन के कारण बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में अभिभावकों को सूखी राशन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों को जिला एवं विभागों का आवंटन पुनः नई प्रक्रिया से करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को मेरिट के आधार पर उनकी आवश्यकता के अनुरूप चयनित अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध कराएं। उसके बाद संबंधित विभाग मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर उन्हें जिला आवंटित करे। मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी भर्तियों में प्रथम नियुक्ति सभी विभागों द्वारा मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर ही दी जाए।
यूपीए सरकार के समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम लाकर गरीब वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। विगत कुछ वर्षों में इस कानून की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कानून की पारदर्शिता के साथ पालना सुनिश्चित करवाई जाए। इसके लिए अभिभावकों की आय सीमा को एक लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रूपए किया जाए। इस बात पर जोर दिया कि आरटीई के जरिए बच्चों को बड़े नामी निजी स्कूलों में भी पढ़ने का अवसर मिले। गत सरकार के समय एकीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में स्कूल बंद कर दिए गए थे। ऐसे विद्यालयों के अनुपयोगी पड़े भवनों का उपयोग विद्यालयों को पुनः खोलने के साथ-साथ जरूरत होने पर पंचायत, उप केन्द्र तथा सामुदायिक केन्द्रों के रूप में भी किया जा सकता है। प्रदेश में जिन महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण नहीं हुआ है उनके लिए भी योजना बनाकर दें ताकि राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से इनके भवनों का निर्माण करवाने पर कार्यवाही कर सके।
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JNU ने फिर मारी बाज़ी,UPSC की IES परीक्षा में 32 सीटों मैं से 18 पर किया कब्जा
नई दिल्ली ;जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हिंसा के कारण तनाव के माहौल के बीच यह खबर सुकून देनेवाली है। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने इंडियन इकोनॉमिक्स सर्विसेज (आईईएस) परीक्षा 2019 के रिजल्ट जारी किए। इसमें जेएनयू के 18 छात्रों ने सफलता हासिल की है।
तो वहीं, ओडिशा के रहनेवाले अंशुमन कमिला ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में टॉप किया है। उन्होंने जेएनयू से इकॉनोमिक्स में एम.फिल की डिग्री हासिल की है। इंडियन इकोनॉमिक्स सर्विसेज में ऑल इंडिया लेवल पर इसमें सिर्फ 32 सीटें होती हैं। इनमें से सिर्प जेएनयू कैंपस के छात्रों ने 32 में से 18 सीटों पर बाजी मारी है।
यह रिजल्ट आते ही ये साफ हो गया है कि जेएनयू छात्रों पढ़ने का माहौल देता है और यहां का शिक्षा स्तर काफी बेहतर है।
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गोल्ड मेडल ठुकराने वाली राबीहा अब्दुरहीम को देश के सभी छात्र छात्राऐं दे रहे हैं बधाई
नई दिल्ली: नागरिकता कानून के विरोध में पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी की एक टॉपर छात्रा ने गोल्ड मेडल लेने से इंकार कर दिया है। जब यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में टॉपर छात्र-छात्राओं को मेडल बांटें जा रहे थे, तभी छात्रा स्टेज पर पहुंची और वहां उसने गोल्ड मेडल स्वीकार करने से इंकार कर दिया। हालांकि छात्रा ने अपनी डिग्री स्वीकार की।
यह मैं उन छात्रों के समर्थन में करना चाहती थी
“यह मैं उन छात्रों के समर्थन में करना चाहती थी, जो CAA और NRC के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत अन्य शिक्षण संस्थानों में सुरक्षाबलों का सामना कर रहे हैं।” द टेलीग्राफ से बातचीत में गोल्ड मेडल ठुकराने वाली छात्रा राबीहा अब्दुरहीम ने उक्त बातें कहीं।इससे पहले राबीहा को दीक्षांत समारोह में बैठने की भी इजाजत नहीं दी गई। राबीहा ने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आने से पहले एक महिला सुरक्षाकर्मी ने उसे बाहर बुलाया और फिर एक जगह बंद कर दिया। पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए थे।
वो, पांडिचेरी विश्व विद्यालय की टोपर छात्रा है, जिनका नाम “रबिहा अब्दुर्रहीम” है !
https://twitter.com/SaeedAn61146489/status/1209152637943218176?s=20राबीहा का आरोप है कि उसे इस तरह लॉक करने की वजह भी नहीं बतायी गई। राबीहा को लगता है कि उसने सोशल मीडिया पर CAA और NRC के विरोध में कई पोस्ट की थीं। ऐसे में हो सकता है कि उसकी पोस्ट को देखते हुए उसे एहतियातन दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं होने दिया गया। जब राष्ट्रपति समारोह से चले गए उसके बाद ही राबिहा को दीक्षांत समारोह में शामिल होने दिया गया।
मैं इस तरह दुनिया की दिखाना चाहती हूं कि युवाओं के लिए शिक्षा का मतलब क्या है
राबीहा के अलावा यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य छात्र ने भी CAA के विरोध में दीक्षांत समारोह का बहिष्कार किया था। राबीहा का कहना है कि ‘मैं इस तरह दुनिया की दिखाना चाहती हूं कि युवाओं के लिए शिक्षा का मतलब क्या है, मेडल, सर्टिफिकेट नहीं बल्कि एकता, शांति और अन्याय, फासीवाद के खिलाफ खड़ा होने की सीख ही शिक्षा है।’बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून के तहत सरकार 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी लोगों को नागरिकता देगी। हालांकि इस कानून में मुस्लिमों को बाहर रखा गया है। यही वजह है कि लोगों में इस कानून के खिलाफ नाराजगी है और लोग बड़ी संख्या में इसका विरोध कर रहे हैं।