Category: राजस्थान

  • मोडीफाइड लोकडाऊन का यह कतई मतलब नही है कि लोग बाहर निकले।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    राजस्थान मे बीस अप्रेल से शुरू होने वाले मॉडिफाइड लॉकडाउन का यह कतई मतलब नहीं कि लोग घरों से बाहर निकल सकते हैं। लोग किसी सूरत में अपना जीवन खतरे में न डालें। लॉकडाउन की उसी तरह पालना करें, जैसे वे अब तक करते रहे हैं। आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त कोई बाहर निकला तो कार्रवाई होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी महीने शुरू होने वाले रमजान एवं अक्षय तृतीया के अवसर पर लोग लॉकडाउन की पूरी तरह पालना करें। धर्मगुरूओं, जनप्रतिनिधियों, एनजीओ आदि से अपील है कि वे लॉकडाउन की पालना करवाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
    मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों के साथ वार्ता करते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश में जब लॉकडाउन की शुरूआत की गई थी, तब राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों, धर्मगुरूओं, एनजीओ सहित सभी वर्गों को साथ लिया गया था। उन्हें हम फिर आग्रह करेंगे कि वे मॉडिफाइड लॉकडाउन को सफल बनाने में अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं।
    आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त अन्य सरकारी कार्यालयों में 20 अप्रेल से 33 प्रतिशत कार्मिकों को रोटेशन के आधार पर बुलाने के निर्णय को फिलहाल टाल दिया गया है। अभी केवल सचिव, विभागाध्यक्ष और उप सचिव स्तर के अधिकारी एवं उनका निजी स्टाफ ही दफ्तर आएंगे। आगे इस संबंध में चरणबद्ध रूप से निर्णय लिया जाएगा। मॉडिफाइड लॉकडाउन में नगरपालिका के बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग शुरू हो सकेंगें। शहरी क्षेत्रों में उन्हीं उद्योगों को सीमित छूट दी गई है, जिनमें श्रमिकों को फैक्ट्री में रखने की उचित व्यवस्था उपलब्ध है। आवश्यक सेवाओं के लिए पूर्व में जो पास जारी किए गए हैं, वे आगे भी मान्य होंगे। नए ई-पास ऑनलाइन बनाए जाएंगे।

    भारत सरकार ने प्रदेश के अंदर विभिन्न जिलों में कैम्पों में अटके श्रमिकों को राज्य में स्थित उनके कार्यस्थलों पर पहुंचने की छूट दे दी है, लेकिन इससे पूरी तरह समस्या हल नहीं होगी। राजस्थान की समस्या अन्य राज्यों से भिन्न है। बड़ी संख्या में यहां के श्रमिक देश के लगभग सभी राज्यों में मौजूद हैं। वे कोरोना महामारी के कारण तनाव में हैं और एक बार अपने-अपने घर जाना चाहते हैं। ऐसे में भारत सरकार को राजस्थान की परिस्थिति को ध्यान में रखकर उन्हें अपने घर पहुंचाने की छूट देनी चाहिए, ताकि उनका कॉन्फिडेंस मजबूत हो सके और वे कुछ समय बाद फिर अपने-अपने काम पर लौट सकें। इसके लिए मुख्यमंत्री भारत सरकार को पुनः पत्र लिखकर छूट देने का आग्रह करेंगे।

    उत्तर प्रदेश सरकार कोटा में पढ़ रहे कोचिंग स्टूडेंट्स को अपने राज्य में लेकर गई है। अन्य राज्य भी इस दिशा में पहल करें, ताकि बच्चों का तनाव दूर हो सके और संकट की इस घड़ी में वे परिवार के साथ रह सकें।

    कोरोना के कारण राज्य की आय एवं राजस्व संग्रहण में 60 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। आर्थिक मंदी और कोरोना के कारण राजस्थान को इस वर्ष करीब 18 हजार करोड़ रूपए के राजस्व की हानि हुई है। मार्च के अंतिम सप्ताह में ही करीब 3500 करोड़ रूपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस स्थिति का सामना करने के लिए केंद्र सरकार से मुख्यमंत्री ने विशेष पैकेज देना की मांग की।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के ऐसे प्रयास हैं कि प्रदेश में एपीएल हो चुका कोई परिवार कोरोना के कारण बीपीएल में नहीं आए। आर्थिक सलाहकार सेवानिवृत्त आईएएस अरविंद मायाराम की अध्यक्षता में गठित कमेटी इस संबंध में विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उचित निर्णय लिए जाएंगे। केंद्र सरकार को इसके लिए पैकेज देना चाहिए ताकि किसी भी छोटे व्यापारी, दुकानदार या अन्य व्यक्ति की आर्थिक स्थिति नहीं बिगडे़। राजस्थान में हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।

    कोरोना के टेस्ट की पेंडेंसी नहीं रहे, इसके लिए हमारी सरकार ने करीब चार हजार सैम्पल्स जांच के लिए दिल्ली भिजवाए हैं। राजस्थान में कोरोना के सबसे ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। इसी दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए हमारी सरकार ने करीब चार हजार सैम्पल्स को जांच के लिए दिल्ली लैब में भेजा है। ऐसी पहल करने वाला राजस्थान पहला राज्य है। इससे कोरोना की रिपोर्ट के लिए बैकलॉग एवं इंतजार खत्म होगा।

    राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मंडियों में कृषि जिंसों की खरीद में सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल की पालना हो। साथ ही किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य भी मिले। करीब 400 मंडियों एवं गौण मंडियों, करीब 500 ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय-विक्रय सहकारी समितियों तथा करीब 1500 कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के जरिए जिंसों की खरीद की व्यवस्था की गई है। किसानों से कृषि जिंसों की सीधी खरीद के लिए कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को भी लाइसेंस जारी किए गए हैं। कोटा संभाग में रबी जिंसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद प्रारंभ हो गई है।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अटके प्रवासी राजस्थानियों को घर जाने देने के लिये गृहमंत्री अमित शाह से बात हुई।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फोन पर बात कर प्रस्ताव दिया है कि लॉकडाउन के चलते राजस्थान में अटके प्रवासियों और विभिन्न प्रदेशों में रह रहे राजस्थानियों को एक बार अपने घर जाने का मौका दिया जाए। गृह मंत्री ने इस पर मंत्रालय के अधिकारियों से बात कर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। साथ ही, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्तालाप कर कोटा में कोचिंग के लिए रह रहे छात्रों को गृह राज्य पहुंचाने के योजना पर काम किया जाने के लिये भी कहा है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, आसाम और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने इस पर सहमति दे दी है। जल्द ही इन राज्यों के छात्र अपने घर के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत कहा कि पूरे देश में लोग फंसे हुए हैं और उनकी घर जाने की मांग पर संवेदशीलता के साथ निर्णय करने की जरूरत है। केन्द्र सरकार से इस विषय पर कई बार चर्चा की गई है और अब सोमवार को केन्द्रीय गृह मंत्री से भी फोन पर गंभीर विमर्श हुआ है। राजस्थान के प्रवासी अपने गृह राज्य से गहरा लगाव रखते हैं और सुख-दुख में हमेशा आते-जाते रहते हैं। इसीलिए देशभर में जो प्रवासी राजस्थानी हैं, राज्य सरकार उन्हें भी एक बार अपने गांव आने का अवसर देने के लिए प्रयासरत है। राजस्थान के विभिन्न जिलों से आकर कोटा में कोचिंग कर रहे 4,000 बच्चों को भी जल्द ही उनके जिलों में भेजा जाएगा।

    एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन की अवधि मेें राशन सामग्री की मांग अधिक बढ़ गई है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित होने वाले गेहूं की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने केन्द्र से राशन का अधिक गेंहूं जारी करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि इस संकट काल में कोई भी व्यक्ति भूख से पीड़ित ना रहे। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के भण्डार गेहूं से भरे पड़े हैं और नई फसल भी आने वाली है। ऐसे में, मुझे उम्मीद है कि केन्द्र सरकार इस मांग पर भी जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेकर राज्यों को राशन के लिए अधिक गेहूं जारी करेगी। अन्य एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 16 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। इस बार राज्य सरकार ने एफसीआई के खरीद केन्द्रों की संख्या 204 से बढ़ाकर 300 की है, जिनके माध्यम से भारत सरकार 17 लाख टन गेहूं खरीदेगी। राजस्थान सरकार विशेष प्रयास कर रही है कि मण्डियों में किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिले और एमएसपी से नीचे खरीद नहीं हो।

    रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट इंडियन कॉउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। इसके लिए टेस्ट किट की खरीद भी आईसीएमआर की स्वीकृति के बाद ही की गई है। अब इस टेस्ट किट की गुणवत्ता के विषय में एसएमएस अस्पताल तथा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में शोध किया जा रहा है। आईसीएमआर को भी इसके बारे में पत्र लिखा गया है। वहां से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार इन टेस्ट किट का इस्तेमाल किया जाएगा।

    एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पर नहीं आएगी तब तक राजस्थान सरकार वंचितों की हर संभव सहायता करेगी। बेसहारा और किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना से वंचित व्यक्ति हमारा ‘टारगेट ग्रुप‘ है और इनकी मदद करना हमारा संकल्प है। मध्यम वर्ग की समस्याएं अलग हैं, निम्न मध्यम वर्ग की समस्याएं अलग हैं। राज्य सरकार सभी वर्गों की बेहतरी के प्रयास कर रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में केन्द्र सरकार की भूमिका बड़ी है। विभिन्न राज्यों ने केन्द्र सरकार को मदद के लिए कई पत्र लिखे हैं और राहत पैकेज की मांग की है। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार इस पर काम कर रही होगी और जल्द ही राज्यों को आर्थिक सहायता के लिए घोषणा की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विस्तार पर पूरा फोकस कर रही है। हमने पूर्व में भी निशुल्क दवा योजना, निशुल्क जांच और निरोगी राजस्थान जैसे अभियानों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने पर काम किया है। अब कोरोना संकट के चुनौतीपूर्ण दौर में भी हर जिले में विशेष जांच प्रयोगशाला और आईसीयू बेड की सुविधाएं बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय विधायक कोष की क्षेत्रीय विकास निधि का भी उपयोग किया जा सकता है। यह संकट कब तक खत्म होगा, इसका कोई अंदाजा इस समय नहीं लगाया जा सकता, लेकिन इससे जूझने के लिए पूरे देश, दुनिया और प्रदेश में आपसी सहयोग की एक भावना विकसित हुई है।

    राजस्थान ने दूरदर्शन के माध्यम से राज्य में स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम से जुड़े कार्यक्रमों का प्रसारण करने की मांग की है। दूरदर्शन के नेटवर्क की दूरदराज तक पहुंच होने के कारण लॉकडाउन की स्थिति में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसारण एक अभिनव पहल होगी। निजी स्कूलों को जून माह तक अभिभावकों से फीस वसूली स्थगित करने का निर्णय किया गया है और इस अवधि में विद्यार्थियों को स्कूल से नहीं निकालने के लिए निर्देशित किया है। फीस माफ करने के विषय में अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। आगे की योजना पर फिर विचार करेंगे, क्योंकि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना है कि फीस की कमी के चलते निजी स्कूलों के बंद होने की नौबत नहीं आए।

    एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि राज्य सरकार ने स्कूलों में रखी पोषाहार की सामग्री को लॉकडाउन के दौरान वंचितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल करने के आदेश जिला कलक्टर को जारी कर दिए थे। कुछ जिलों में इस पोषाहार को उपयोग में भी ले लिया गया है।

  • राजस्थान सरकार ने बीस अप्रेल से मोडीफाइड लोकडाऊन मे उधोग शूरु करने के दिशा निर्देश जारी किये।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    भारत सरकार के गृह मंत्रालय के 15 अप्रैल को जारी निर्देशों के क्रम में राजस्थान राज्य सरकार ने 20 अप्रैल, 2020 से मोडिफाइड लॉकडाउन के तहत उद्योग एवं उद्यमों को शुरू करने के संबंध में नये दिशा निर्देश जारी किये हैं। जिनके अनुसार ऐसे उद्योग/उद्यम शुरू किये जा सकेंगे जो कि ग्रामीण क्षेत्र (जो नगर पालिका व नगर निगमों की सीमा के बाहर स्थापित हों) अथवा नगर निगम/नगर पालिका क्षेत्रों में स्थापित औद्योगिक क्षेत्र, निर्यात आधारित इकाइयां अथवा सेज जहां आवागमन नियंत्रित हो तथा उनके फैक्ट्री परिसर या आस-पास श्रमिकों को ठहराने की पर्याप्त व्यवस्था हो।

    इन क्षेत्रों में स्थापित उद्योग/उद्यमों को उनके श्रमिकों को (न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार) फैक्ट्री परिसर में लाने हेतु एक बार में परिवहन के लिए चिन्हित वाहन को पास देने की व्यवस्था की जाएगी। यह पास रीको औद्योगिक क्षेत्रों में रीको के क्षेत्रिय प्रबंधक तथा अन्य क्षेत्रों में जीएम (डीआईसी) द्वारा दिये जाएंगे। इसके लिए आवेदन https://epass.rajasthan.gov.in पर ऑनलाइन या राजकॉप सिटीजन मोबाइल ऐप पर अथवा ऑफलाइन सीधे ही किया जा सकेगा।

    पहले से चालू अथवा अनुमत उद्योग पूर्व की भांति संचालित रह सकेंगे और उनके पास भी वैध रहेंगे।

    इन दिशा निर्देश जारी होने के बाद मार्बल नगरी मकराना मे उपखण्ड कार्यलय मे उपखण्ड अधिकारी शीराज जैदी की सदारत मे खान ऐसोसिएशन, स्थानीय प्रतिनिधि व सरकारी अधिकारियों के बैठक हुई जिसमे खान मालिकों की एक मत से आये सुझाव के चलते मार्बल खान शुरू नही करने का तय हुवा है।

  • सरकार स्वास्थ्य के साथ साथ आर्थिक मोर्चे पर भी लड़ाई लड़ेगी।

    भाजपा के दो विधायको के खिलाफ मुकदमा दर्ज व आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर लोसल पुलिस ने तीन को गिरफ्तार किया।

    अशफाक कायमखानी.जयपुर।
    भारत में आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं और लोगाें के पास रोजगार नहीं है। लॉकडाउन के कारण केन्द्र एवं राज्यों को मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आई है। अर्थव्यवस्था पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ा है और उद्योगों को भी काफी नुकसान हुआ है। ऎसे में मुख्यमंत्री कि कहना है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी लड़ाई लड़ रही है।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री ने वार्ता करते हुये कहा कि एफसीआई के गोदाम गेहूं से भरे हुए हैं, ऎसे में केन्द्र सरकार को चाहिए कि ऐसे सभी लोगों को जिन्हें जरूरत है उन्हें गेहूं उपलब्ध कराये, चाहे उनके पास राशन कार्ड हो अथवा नहीं हो। इसके अलावा जो लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कवर नहीं भी हैं उन्हें भी गेहूं उपलब्ध कराया जाये ताकि किसी को भी भूखा नहीं सोना पड़े। फिलहाल उनकी पहली प्राथमिकता कोविड-19 के संक्रमण को पूरी तरह से रोकना है, लेकिन साथ ही आर्थिक गतिविधियां संचालित हो सकें इसके भी प्रयास किये जा रहे हैं। मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान केन्द्र सरकार की गाइडलाइन का राजस्थान मे पूरी तरह से पालन करते हुए सोशल डिस्टेंन्सिग के साथ औद्योगिक गतिविधियां संचालित हों यह सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केन्द्र एवं राज्यों को मिलकर काम करना होगा। लॉकडाउन खोलने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध तरीके से लागू करनी होगी ताकि आर्थिक गतिविधियाें के संचालन के साथ ही वायरस का संक्रमण रोकने में अभी तक जो सफलता मिली है उसे बरकरार रखा जा सके।

    कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये राजस्थान मॉडल के तहत जो काम हो रहा है और ज्यादा से ज्यादा संख्या में टेस्ट किये जा रहे हैं, उसकी तारीफ दिल्ली से आई टीम ने भी की है। जयपुर में शनिवार को कई लोगों के रैपिड एंटी बॉडी टेस्ट किए गये। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी तक प्रदेश में 47000 से भी अधिक जांचें की गई हैं और पॉजिटिव पाये गये मरीजों को ठीक करने में हमें काफी सफलता मिली है। फिलहाल आईसीयू में 6 मरीज हैं। जबकि 942 अन्य मरीजों का सामान्य वार्डों में ईलाज चल रहा है। अभी तक 183 मरीज ठीक हो चुके है उनमें से 83 को अस्पतालों से डिस्चार्ज किया गया है।

    सरकारी कर्मचारी एवं पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं, ऐसे में कोरोना वॉरियर्स के साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार की निंदा की जानी चाहिए। टोंक में हुई घटना पर सख्त कार्यवाही करते हुए राज्य सरकार ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरे प्रदेश में ऎसे प्रकरणों में 191 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। आमजन से मुख्यमंत्री ने अपील की है कि इस महामारी से लड़ी जा रही जंग को जीतने के लिए हमें धर्म, जाति, समुदाय एवं राजनीति की भावना से ऊपर उठकर साथ मिलकर काम करना होगा और इस बात का ध्यान रखना होगा कि देश और प्रदेश में किसी तरह का नफरत का माहौल पैदा नहीं हो।

    कोरोना से लडाई में सोशल डिस्टेंन्सिग की पालना करने के साथ ही प्रदेशवासियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि गुटखा/जर्दा खाकर सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकें। यूरोपीय देशों एवं खाड़ी देशों में सार्वजनिक स्थल पर थूकना एक अपराध है और ऎसे लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। इससे वहां अब लोगों की आदतें बदल गई हैं। राजस्थान सरकार की भी मंशा है कि यहां लोग तंबाकू, गुटखा या पान खाकर राह चलते कहीं भी थूकने की आदत बदलें।

    उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने राजस्थान एपिडेमिक डिजीजेज एक्ट 1957 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस संबंध में एक अधिसूचना जारी कर सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर दण्डात्मक कार्यवाही के प्रावधान किए हैं।

    इसके विपरित संकट के इस दौर मे भी कुछ नेता व लोग नफरत पैदा करने से बाज नही आ रहे है। राजस्थान के रामगंजमंडी से भाजपा विधायक मदन के खिलाफ कोटा के महावीर नगर पुलिस थाने मे विभिन्न धाराओं मे दर्ज हुवा है। वही दूसरा मामला सांगानेर विधायक अशोक लाहोटी के खिलाफ मानसरोवर, जयपुर थाने मे दर्ज हुवा है। इसी तरह सीकर के लोसल थाना की पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक समुदाय के खिलाफ लगातार अभ्रद टिप्पणी करने के आरोपी विकास/शिवपाल कुमावत, विनोद/दयाराम कुमावत व राहुल मिश्रा/गोपाल मिश्रा नामक तीन युवाओं को गिरफ्तार किया है।

  • जयपुर में सामूहिक रूप से नमाज अदा करने पर पुलिस ने इमाम समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है।

    अशफाक कायमखानी,जयपुर। कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन का दूसरा फेज 3 मई तक लागू है. लोगों को जागरुक करने के बावजूद भी लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. वहीं, राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामूहिक रूप से नमाज अदा करने पर पुलिस ने इमाम समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है.
    मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे थे लोग

    डीसीपी राहुल जैन ने बताया कि मुखबीर के जरिए सूचना मिली थी कि खोह नागोरियां क्षेत्र में स्थित आयशा मस्जिद में इमाम सहित 15 लोगों द्वारा बिना सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए सामूहिक नमाज अदा की जा रही है. पुलिस ने सभी नमाजियों की पहले वीडियोग्राफी कराई. नमाज अदा करने के बाद सभी लोगों से किसी सक्षम अधिकारी द्वारा परमिशन लेने की बारे में पूछा गया तो सामने आया कि किसी ने भी इस मामले में परमिशन नहीं ली थी।

    ।कई धाराओं का उल्लंघन।

    पुलिस ने बताया कि इन लोगों द्वारा धारा 144 का उल्लंघन करना, लॉकडाउन के निर्देशों की अवहेलना करने, क्‍वारंटाइन में रहने के निर्देशों की अवहेलना करना और संक्रमण फैलाने में लापरवाही करना का प्रयास किया गया है. इन लोगों के खिलाफ धारा-188, 269, 270 और 271 के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन 2005 की धारा-51 और राजस्थान महामारी अधिनियम 1957 के धारा-3 हिरासत में लिया गया है.

    ।खोह नागोरियान में मिल चुका है पॉजिटिव।

    गौरतलब है कि खोह नागोरियां क्षेत्र में पिछले दिनों एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुका है. जिसके बाद क्षेत्र में विशेष एहतियात बरते जा रहे हैं. साथ ही कोरोना पॉजिटिव मरीज के घर के आसपास के क्षेत्रों में कर्फ्यू भी लगाया जा चुका है.

    जयपुर में बढ़ते जा रहे हैं कर्फ्यू के क्षेत्र
    जयपुर में फिलहाल तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में एक दो दिनों से कुछ कमी आई है. लेकिन कर्फ्यू वाले इलाकों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. विद्याधर नगर थाना क्षेत्र के मेजर शैतान सिंह कॉलोनी में एक कोरोना मरीज मिलने के बाद क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. डीसीपी राजीव पचार ने कर्फ्यू को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं. अब पुलिस द्वारा चिन्हित क्षेत्र में विशेष एहतियात बरती जा रही है.

  • राजस्थान मै रेपिड एंटी बाडी टेस्ट के माध्यम से कोराना की जांच शुरू।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।राजस्थान में आज से रेपिड एंटी बॉडी टेस्ट के माध्यम से कोरोना की जांच शुरू हो गई है। रेपिड टेस्ट करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है। पहले दिन 60 जांच की गई, जो सभी नेगेटिव पाई गईं। मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीडियाकर्मियों के साथ कोरोना की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने वार्ता की। 10 हजार टेस्ट किट प्राप्त होते ही जांच शुरू कर दी गई है। पचास हजार किट शुक्रवार रात तक मिलने हैं और 2 लाख किट तीन दिन में पहुंच जाएंगी। रेपिड टेस्ट कन्फरमेटरी टेस्ट नहीं है, इसलिए पीसीआर टेस्ट की व्यवस्था पूर्व की भांति जारी रहेगी। इसमें किसी तरह की कमी नहीं की जाएगी।

    प्रदेश के हर जिले में कोरोना जांच के लिए लैब स्थापित करने पर काम शुरू कर दिया गया है। जनसंख्या तथा औद्योगिक इकाइयां ज्यादा होने के कारण सबसे पहले अलवर में यह लैब स्थापित की जा रही है। सब्जी विक्रेताओं, खाद्य पदार्थों आदि की होम डिलीवरी करने वालों के भी रेपिड टेस्ट करवाए जाएंगे। प्रदेश में कोरोना की जांच की संख्या में कोई कमी नहीं की गई है। बीते कुछ दिनों में पॉजिटिव मामलों की संख्या कम हुई है, इसका यह कतई मतलब नहीं कि टेस्ट की संख्या कम की गई है। राजस्थान में देश में सबसे ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं। अब तक 42 हजार 751 टेस्ट किए जा चुके हैं।

    केंद्र सरकार से टेस्ट किट, पीपीई, वेंटीलेंटर तथा अन्य उपकरणों की केंद्रीकृत खरीद के लिए आग्रह किया था, ऐसा करने पर उपकरणों की उपलब्धता उचित दरों पर जल्द उपलब्ध हो पाते, लेकिन केंद्र सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। इसके परिणाम स्वरूप खुद राज्यों को ही दुनिया के दूसरे देशों तक दौड़ लगानी पड़ी। अब किट उपलब्ध हो गए हैं तो रेंडम टेस्ट शुरू किए जाएंगे। इससे संक्रमण की वास्तविकता का पता चल सकेगा। अभी प्रदेश में पर्याप्त संख्या में पीसीआर टेस्ट किट, पीपीई किट और वेंटीलेटर्स उपलब्ध हैं।

    कोरोना के प्लाजमा ट्रीटमेंट के सवाल पर कहा कि इसके लिए हो रहे शोध में एसएमएस अस्पताल भी जुड़ा हुआ है। एसएमएस के चार दवाओं के कॉम्बीनेशन पर भी दुनिया के देशों में रिसर्च हो रही है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए राजस्थान के चिकित्सा विशेषज्ञों सहित हर व्यक्ति ने बेहतरीन काम किया है।

    20 अप्रेल से शुरू होने वाले मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान मास्क लगाने, सामाजिक दूरी बनाने सहित सभी प्रोटोकॉल की पालना में कोई ढील नहीं दी जाएगी। केवल उद्योग-धंधों और काम पर आने-जाने के लिए मूवमेंट में आंशिक छूट केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में कहा कि मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना पॉजिटिव मरीज का नाम जाहिर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे कई बार मरीज को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि क्वारेंटाइन की सुविधा आबादी क्षेत्र के पास होने पर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोरोना हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है। क्वारेंटाइन सुविधा जगह की उपलब्धता और भोजन आदि की व्यवस्था सुलभ करवाने में आसानी होने के आधार पर तय की जाती है। कोई भी सरकार नहीं चाहेगी कि एक भी मरीज की संख्या बढे़, इसलिए क्वारेंटाइन फैसेलिटी में सामाजिक दूरी के प्रोटोकॉल की पूरी पालना की जाती है।

    कोरोना के संक्रमण और लॉकडाउन के कारण देश में प्रवासी मजदूरों की समस्या बहुत गंभीर हो गई है। चाहे मजदूर अपने राज्य में रह रहे हों या दूसरे राज्य में उनका एक बार अपने घर जाना जरूरी है। ऐसे में 20 अप्रेल के बाद हो सकता है, भारत सरकार इसमें थोड़ी छूट दे दे। ऐसा होने से मजदूरों का टूटा मनोबल लौट सकेगा और वे अपने रोजगार पर वापस आने में सहूलियत महसूस करेंगे। एक मीडियाकर्मी के सवाल पर कहा कि राज्य सरकार स्वयं के लिए केंद्र सरकार से पैकेज मांग रही है, हमारा मानना है कि उद्योगों को भी इस संकट के दौर से बाहर आने के लिए मदद की जानी चाहिए। यह एक राष्ट्रीय त्रासदी है, जिसमें सभी वर्ग परेशानी में हैं। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार की बजाय केंद्र सरकार की भूमिका अधिक है।

    कोरोना और लॉकडाउन से केवल मध्यम वर्ग नहीं, सभी वर्गों की परेशानियां बढ़ी हैं। खुद सरकारें भी विषम आर्थिक हालातों का सामना कर रही हैं। पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है, इससे निपटने के लिए सभी को कुछ त्याग करना पडे़गा। देश-प्रदेश और परिवारों को खर्चों में कटौती करनी पडे़गी। वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना पडे़गा, तभी सबकी तकलीफें कम हो सकेंगी।

    राजस्थान पहला राज्य है, जहां मजदूरों की परेशानी को दूर करने का लक्ष्य रखकर काम शुरू किया गया है। आमजनता, समाज और प्रशासन ने इसमें भरपूर सहयोग दिया है। कुछ काम-धंधे 20 अप्रेल के बाद शुरू हो जाएंगे तो कुछ लोगों को काम मिल जाएगा। उसके बाद आकलन कर शेष मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की योजनाएं बनाई जाएंगी।

  • जयपुर:राजस्थान में कोरोना वायरस राजधानी जयपुर सहित पच्चीस जिलों में अपने पैर पसार चुका है

    लेकिन आठ जिले सीमांत श्रीगंगानगर तथा जालौर,सिरोही,सवाईमाधोपुर, बूंदी, बारां, राजसमंद एवं चित्तौड़गढ़ अभी इससे अछूते हैं।

    चिकित्सा विभाग की कोरोना वायरस के बारे में
    आज सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार इन आठ जिलों में अब तक 3754 लोगों के नमूने जांच के लिए प्राप्त हुए लेकिन इनमें अभी तक एक भी कोरोना का मरीज नहीं मिला।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि कोरोनावायरस पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य सरकार, अधिकारी,। कर्मचारी, मजदूर, किसान सहित सभी वर्ग एक साथ होकर लड़ाई लड़ रहे हैं और कोरोना यौद्धाओं के इन प्रयासों एवं त्याग से यह विश्वास बढ़ गया है कि हम इस महामारी को हराकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी को भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि अछूते रहे ये आठ ज़िले इस महामारी से बचे रहे।

    प्रदेश में कोरोना की चपेट में आये 25 जिलों में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले जयपुर में 493 पहुंच गये हैं। इनमें दो इटली के नागरिक शामिल हैं। जयपुर के इन मामलों में सर्वाधिक शहर में रामगंज थाना क्षेत्र से हैं। जयपुर में अब तक सर्वाधिक 8851 लोगों के नमूने जांच के लिए लिए गए।
    राज्य में जयपुर के बाद कोरोना कहर जोधपुर में देखने को मिल रहा है जहां शुक्रवार को 17 नये मामले सामने आने से इसके मरीजों की संख्या बढ़कर 174 पहुंच गई है। इनमें 41 मामले ईरान से जोधपुर लाये गए लोगों के शामिल हैं। जोधपुर में 3865 लोगों के नमूने जांच के लिए प्राप्त हुए।

    प्रदेश के कोटा में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 90 पहुंच गई है। इसी तरह टोंक में 77, बांसवाड़ा में 59, जैसलमेर में 44 (इसमें 14 ईरान से लाये लोग शामिल), भरतपुर में 43, झुंझुनूं में 36, बीकानेर में 35, भीलवाड़ा में 28, झालावाड़ में 18, चूरू में 14, दौसा में 12, नागौर में 10, अलवर एवं अजमेर में सात-सात, डूंगरपुर में पांच, उदयपुर में चार, करौली में तीन, हनुमानगढ़, प्रतापगढ़, सीकर और पाली में दो-दो जबकि बाड़मेर और धौलपुर में एक-एक व्यक्ति को इस बीमारी ने अपनी चपेट में लिया है।

    राज्य में अब तक 40 हजार 778 लोगों के नमूने जांच के लिए प्राप्त हुए, जिनमें 958 विस्थापित लोगों के शामिल हैं। 1169 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं जिनमें दो इटली के नागरिक तथा 55 विस्थापित शामिल हैं।
    33 हजार 736 लोगों की रिपोर्ट नकारात्मक पाई गई है जबकि 5873 की रिपोर्ट आनी शेष है।
    कोरोना वायरस के मरीजों में 164 की रिपोर्ट नकारात्मक आ चुकी हैं जबकि स्वस्थ हो चुके 82 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इस महामारी से पन्द्रह लोगों की मौत हो चुकी है। जयपुर में सात, कोटा, जोधपुर एवं भीलवाड़ा में दो दो जबकि बीकानेर एवं टोंक में एक-एक मरीज शामिल हैं।

  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया प्रतिनिधियों से वार्ता करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा मोडीफाइड लोकडाऊन से पिडित व जरुरतमंदों को फायदा होगा।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।मॉडिफाइड लॉकडाउन के तहत 20 अप्रैल से औद्योगिक इकाइयां शुरू होंगी इससे प्रवासी मजदूर जो अभी यहीं रूके हुए हैं उन्हें काम मिलना शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आर्थिक सलाहकार अरविन्द मायाराम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने आर्थिक क्षेत्र के कई विशेषज्ञों से चर्चा के बाद रिपोर्ट तैयार की है, उसे आधार बनाकर राज्य सरकार आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में उचित कदम उठाएगी। धीरे-धीरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगेगी।

    प्रदेश में जो क्षेत्र हॉट स्पॉट चिन्हित किए गए हैं उन्हें छोड़कर अन्य क्षेत्रों में जहां संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं वहां सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए सीमित आर्थिक गतिविधियों का संचालन होगा। इसके अलावा मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में भी काम शुरू हो सकेगा।

    पत्रकारों के साथ विडीयों कांफ्रेंसिंग करते हुये बताया कि राज्य सरकार का पूरा प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। प्रदेश की 136 मुख्य अनाज मण्डियों में से 120 मण्डियां जबकि 296 गौण मण्डियों में से 217 मण्डियां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नियंत्रित तरीके से संचालित हो रही हैं। फल एवं सब्जियों की 8 मुख्य एवं 33 गौण मण्डियां खुली हुई हैं। किसानों को उनके खेत के निकट ही उपज विक्रय की सुविधा देते हुए 508 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों को निजी गौण मण्डी घोषित किया गया है। पहली बार कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को किसानों से सीधे कृषि जिन्सों की खरीद की अनुमति दी गई है। इसके लिए करीब 1137 अनुज्ञापत्र जारी किए गए हैं। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

    राज्य सरकार कोरोना पॉजिटिव मरीजों का पता लगाने के लिए अधिक संख्या में टेस्ट करने पर जोर दे रही है। अभी हमारी टेस्टिंग क्षमता प्रतिदिन 4 हजार है, जो आगामी कुछ दिनों में बढ़कर 10 हजार तक हो जाएगी। हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर टेस्ट किए जा रहे हैं। अधिक संख्या में टेस्ट हो रहे हैं इसीलिए पॉजिटिव रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन इसका एक फायदा यह भी है कि समय रहते पॉजिटिव का पता चलने से दूसरे स्वस्थ लोगों में संक्रमण रोकने में सहायता मिल रही है।

    राज्य सरकार को प्रदेश के लोगों की चिंता है। हमारी पहली प्राथमिकता पॉजिटिव व्यक्ति के सम्पर्क में आए लोगों को होम क्वारेंटाइन रखने की है, लेकिन सघन बसावट वाले क्षेत्रों में जहां घरों में जगह नहीं है, उन लोगों को क्वारेंटाइन सेंटर्स पर रखा जा रहा है। क्वारेंटाइन में रखे गए लोगों को सभी तरह की सुविधा मिल सके, इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

  • राजस्थान मे 21-अप्रैल से मोडिफाइड लोकडाऊन लागू होगा।

    अशफाक कायमखानी ।

    जयपुर।मुख्यमंत्री निवास पर लॉकडाउन को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए कि 21 अप्रैल से प्रदेश में योजनाबद्ध तरीके से मॉडिफाइड लॉकडाउन लागू किया जाए। ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 20 अप्रैल के बाद से औद्योगिक इकाइयों को शुरू करने के निर्देश दिए इससे प्रदेश में मौजूद प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मिल सकेगा।

    शहरी क्षेत्रों में ऐसे उद्योग जहां श्रमिकों के लिए कार्य स्थल पर ही रहने की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें भी शुरू किया जाए। हालांकि इनमें बाहर से मजदूरों के आवागमन की अनुमति नहीं होगी। जिला कलेक्टर, रीको, जिला उद्योग केन्द्र तथा पुलिस समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित करें, जिससे लॉकडाउन के दौरान उद्योगों के शुरू होने में कोई परेशानी न आए। ऐसी पुख्ता व्यवस्था की जायेगी जिससे उद्यमी को किसी प्रकार की आवश्यकता होने पर संबंधित अधिकारी से सम्पर्क कर सकें। साथ ही मजदूरों तथा कर्मचारियों के आने-जाने में पास की व्यवस्था को सुगम किया जायेगा।
    .
    इसी क्रम में सरकारी कार्यालयों को भी चरणबद्ध तरीके से खोलने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में आवश्यक सेवाओं में आने वाले विभाग पूरी तरह काम कर रहे हैं। इनके साथ ही अन्य कार्यालयों में भी आने वाले समय में काम शुरू किया जायेगा और इनमें ग्रुप-ए एवं ग्रुप-बी के अधिकारियों की उपस्थिति आवश्यकतानुसार सुनिश्चित की जायेगा। साथ ही ग्रुप-सी एवं ग्रुप-डी के एक-तिहाई कार्मिकों को सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए बुलाया जाए।

    बैठक में निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक निर्माण एवं सिंचाई से संबंधित कार्य शुरू किए जाएं। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग एवं स्वास्थ्य से संबंधित अन्य प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए मनरेगा कार्यों में तेजी लाई जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट बन रहे जिन स्थानों पर कर्फ्यू लागू है, वहां कर्फ्यू की सख्ती से पालना की जाए। इन क्षेत्रों से किसी को भी आने-जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इनमें कर्मचारी भी शामिल हैं।

    भारत सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर जो विस्तृत गाइडलाइंस जारी की है, उसकी प्रदेश की परिस्थितियों के मद्देनजर पूरी पालना सुनिश्चित की जायेगी। राज्य सरकार इस महामारी से आमजन की रक्षा तथा आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाने के लिए केन्द्र से समन्वय के साथ काम कर रही है।

    बैठक में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता,अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा रोहित कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • पहले छींक व खांशी एक अच्छा संकेत माना जाता था ओर आज यही आफत के संकेत बने हुये है।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।पहले सामाजिक सिस्टम मे घरो की पोल मे रहने वाले घर के बुजुर्ग (मुखीया) कभी खांसते थे तो उनकी अलग अलग तरह की खांशी की आवाज के अलग अलग अर्थ हुवा करते थे। घर का बडा बूजुर्ग जेठ-ससूर व उनके समान रिस्ते वाला घर मे प्रवेश करता था तो घर की महिलाओं के सावधान होने के लिये अलग तरह की खांशी का रिवाज हुवा करता था। इसी तरह घर मे से मुखीया जब अलग तरह से खांसता तो मानो उनके पास कोई आया है। लेकिन कोविड-19 की महामारी ने खांशी का अर्थ ही बदल डाला है। अब खांसने वाले से सभी दूरी बनाकर रखने के अलावा उसको हर हाल मे चिकित्सक के पास भेजकर कोराना की जांच कराने को बाध्य किया जानै लगा है। इसी तरह पहले छींक आने को शुभ संकेत मानते हुये कहा जाता था कि कोई अपना पराया याद कर रह रहा है। लेकिन आज कोराना ने छींक को आफत होना या आना मानने पर मजबूर कर दिया है।

    खासतौर पर राजस्थान मे कायमखानी व राजपूत बिरादरी मे पर्दा प्रथा का अधिक प्रचलन होता था। इसलिए उनमे पोल का चलन एक तरह से अवश्य होता था। जहाँ पर परिवार के बुजुर्ग (मुखीया) बैठे रहते थे। किसी भी मेहमान के अंदर जाने से पहले उक्त बूजुर्ग लोगो की इजाजत लेना जरुरी था। पहले घंटी या फोन का चलन तो था नही। केवल बूजुर्ग लोगो की अलग अलग तरह की खांशी की आवाज से ही पता चलता था कि वो किसी को घर से बूला रहे है या वो स्वयं चलकर आ रहे है।

    कायमखानी व राजपूत की तरह ही गावं के चोधरी की पोल मे हुक्का-चिलम के साथ मजमा लगा करता था। राहगीर ऊंट सवार लोग अपने सफर मे वहीं पर रात वासा लिया करते थे। जहां ऊट के लिये फूस-चारा-पानी के इंतजाम होने के साथ साथ ऊंट सवार को भोजन मिलता था। इस तरह का इंतजाम अक्सर गावं के चोधरी (जाट) की पोल मे मिलता था। चोधरी की खांसी व कहखारे करने की स्टाईल से उनके घर वाले समझ जाते थे कि चौधरी क्या कह रहे है।

    कुल मिलाकर यह है कि पहले खांशी व छींक शुभ संकेत के तौर पर माने व समझे जाते थे। आज कोराना-वायरस के कारण खांसी व छींक एक आफत का संकेत माना जाने लगा हैः