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  • राजस्थान:प्रधानमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मनरेगा की तर्ज पर ही शहरी क्षेत्रों के लिए भी रोजगार की गारंटी देने वाली योजना शुरू करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी पर गुजर-बसर करने वाले, गरीब, मजदूर एवं जरूरतमंद तबके की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्हें रोजगार मिलता रहे, इसके लिए जरूरी है कि केन्द्र मनरेगा की भांति ही शहरी क्षेत्र के लिए भी ऐसी योजना लाने पर विचार करे।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंस में कोरोना से बचाव, लॉकडाउन तथा इस संकट से मुकाबला करने के लिए सुझावों के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की मुख्यमंत्री ने जानकारी दी। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत मजदूरों के लिए न्यूनतम 200 दिवस रोजगार उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केन्द्र एवं राज्य सरकारों को दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लड़नी है। एक तरफ कोरोना से जीवन बचाने की जंग तो दूसरी तरफ आजीविका बचाने और आर्थिक हालात पटरी पर लाने की लड़ाई। लॉकडाउन के कारण केन्द्र एवं राज्यों के राजस्व संग्रहण पर विपरीत असर पड़ा है। केन्द्र की मदद के बिना यह असंभव है कि राज्य इस संकट का मुकाबला कर सकें। इसके लिए जरूरी है कि केन्द्र जल्द से जल्द व्यापक आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराए। एमएसएमई, मैन्यूफैक्चरिंग, सर्विस, टूरिज्म, रियल एस्टेट सहित तमाम सेक्टर्स को संबल की जरूरत है। इकोनॉमिक रिवाइवल के लिए जरूरी है कि ऐसे उपाय हों जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढे़, उन्हें रोजगार मिले तथा उद्योगों को भी राहत मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता जरूरतमंद वर्ग की मदद करना है। हमें ऐसी योजनाओं पर काम करना होगा जिससे बड़ी संख्या में लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिले। इस समय बेरोजगारी की दर 37.8 प्रतिशत हो गई है जो सर्वाधिक है।

    केन्द्र द्वारा घोषित लॉकडाउन का राज्य सरकारों और आमजन ने पूरी इच्छाशक्ति और संकल्प के साथ पालन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगले चरण में विभिन्न जोन के निर्धारण और प्रतिबंधों को लागू करने का अधिकार राज्यों को मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार के मानक दिशा-निर्देशों के अनुरूप रहते हुए राज्यों को यह अधिकार मिले जिससे कि वे स्थानीय स्तर पर यह तय कर सकें कि किन गतिविधियों के लिए उन्हें छूट देनी है और किन को प्रतिबंधित रखना है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संकट की इस घड़ी में किसानों को संबल देना हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले इसके लिए जरूरी है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं, चने एवं सरसों की खरीद की सीमा को कृषि उत्पादन के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया जाए।

    प्रधानमंत्री को प्रदेश में टिड्डी के प्रकोप की मुख्यमंत्री ने जानकारी दी और इसके नियंत्रण में सहयोग का आग्रह किया। बीते साल टिड्डियों के हमले के कारण प्रदेश के 12 जिलों में फसलों तथा वनस्पति को बुरी तरह नुकसान पहुंचा था। इस साल 11 अप्रैल से ही प्रदेश में टिड्डियों के हमले शुरू हो गए हैं और अजमेर तक भी टिडडी दल पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री का ध्यान विश्व खाद्य संगठन की उस चेतावनी की ओर भी दिलाया जिसमें बताया गया है कि अफ्रीका, ईरान, भूमध्यसागर के देशों में बड़ी संख्या में टिड्डियों का प्रजनन हो रहा है। इससे राजस्थान और गुजरात के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना महामारी का बड़ा प्रतिकूल प्रभाव उद्योग एवं व्यापार जगत पर पड़ा है। डेढ़ महीने से अधिक समय से औद्योगिक गतिविधियां ठप हैं। ऐसे में उन्हें उबारने के लिए केन्द्र एक व्यापक आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध कराए, जैसा वर्ष 2008 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समय दिया गया था।

    प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को मिलने वाली शुद्ध ऋण सीमा को जीडीपी के 3 प्रतिशत से बढाकर 5 प्रतिशत बिना शर्तों के की जाए। इस मुश्किल समय में राज्य सरकार जरूरतमंद, निराश्रित एवं बेसहारा लोगों को संबल देने के लिए तमाम जरूरी कदम उठा रही हैं। ऐसे में उन्हें वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं रहे इसके लिए यह अनुमत किया जाए। एफआरबीएम एक्ट के तहत राजकोषीय घाटे की सीमा 6 माह तक जीडीपी के 3 प्रतिशत से बढाकर 5 प्रतिशत तक करने का सुझाव दिया। कोरोना के कारण हर राज्य की स्थानीय परिस्थितियों एवं आर्थिक स्थिति को देखते हुये जीएसटी के तहत राज्यों को वर्ष 2022 तक दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की अवधि को 5 वर्ष और बढ़ाया जाए।

    भारत सरकार को केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के तहत केन्द्रांश की राशि की प्रथम किस्त शीघ्र बिना किसी शर्त के जारी करनी चाहिए एवं राशि जारी करने की प्रक्रिया को कठिन बनाया गया है, जो अनुचित है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं पर राज्यों में आवश्यकता आधारित आवंटन की नई नीति उपयुक्त नहीं है। इससे राज्य इन योजनाओं का संचालन ठीक से नहीं कर पाएंगे। केन्द्र सरकार इस चुनौतीपूर्ण समय में अर्थव्यस्था को उबारने के लिए राजकोषीय व्यय को बढ़ावा दे।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में लाभार्थियों के चयन का आधार वर्ष 2011 की जनगणना है। वर्तमान विशेष परिस्थितियों को देखते हुए लाभार्थियों की संख्या को 2019-20 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर तुरन्त बढ़ाया जाए। राज्य सरकार ने मई महीने में एफसीआई से 21 रूपए प्रति किलो की बाजार दर से गेहूं खरीदकर करीब 54 लाख ऐसे लोगों को वितरित किया है जिन्हें एनएफएसए का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इन लोगों को प्रति व्यक्ति 10 किलो खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने करीब 78 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। प्रधानमंत्री से कहा कि लॉकडाउन के कारण विषम वित्तीय हालात को देखते हुए राज्य सरकार हर महीने यह खाद्यान्न उपलब्ध नहीं करा पाएगी। इन वंचित लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिले इसके लिए केन्द्र सरकार से सहायता का अनुरोध किया

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार कोरोना संक्रमण की स्थिति को प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की चुनौती के रूप में ले रही है। पहले हमें जांच के लिए दिल्ली एवं पूना सैम्पल भेजने पड़ते थे। अब राजस्थान ने करीब 12 हजार टेस्ट प्रतिदिन की क्षमता हासिल कर ली है। इस महीने के अंत तक हम प्रतिदिन 25 हजार जांच करने की स्थिति में होंगे। बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कम है। साथ ही डबलिंग रेट जहां राष्ट्रीय स्तर पर 12 दिन है। वहीं राजस्थान में यह 18 दिन है। हमारे राज्य में कोरोना संक्रमितों की रिकवरी दर राष्ट्रीय औसत 30 प्रतिशत के मुकाबले 57 प्रतिशत है। गैर कोविड रोगियों के लिए गांव-गांव में 428 आउटडोर मोबाइल वैन संचालित करने के साथ ही मातृ एवं शिशु कल्याण सेवाओं, टीकाकरण आदि में कोई बाधा नहीं आने दी है।

  • लोकडाऊन के कारण फंसे हुये श्रमिक को सावनो से रवाना किया जायेगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण फंसा हुआ कोई श्रमिक अपने गृह स्थान के लिए पैदल रवाना नहीं हो। राज्य सरकार उन्हें बसों एवं ट्रेनों के माध्यम से अपने-अपने गृह स्थानों पर पहुंचाने के लिए उचित व्यवस्थाएं कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गये है कि जो श्रमिक पैदल रवाना हो गए हैं, उनके लिए रास्ते में कैम्प एवं भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। कोई श्रमिक भूखा-प्यासा नहीं रहे। संकट की इस घड़ी में हर व्यक्ति के जीवन की रक्षा और उनके दुःख-दर्द को बांटना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री निवास पर प्रवासियों के आवागमन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण फंसे हुए जिन प्रवासियों एवं श्रमिकों ने आवागमन के लिए पंजीयन करवाया है। उन्हें ई-पास प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी नहीं आए। इसके लिए ई-पास के सिस्टम को और बेहतर बनाएं। जिन प्रवासी एवं श्रमिकों को ई-पास प्राप्त हो गए हैं, उन्हें ट्रेनों के माध्यम से भेजने के लिए समय पर सूचना दी जाए, ताकि वे ट्रेन के शेड्यूल के अनुसार निर्धारित स्टेशन पर पहुंच सकें।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मेडिकल इमरजेंसी, मृत्यु या अत्यावश्यक कार्यों को लेकर पास की प्रक्रिया को और सुगम बनाएं तथा ऐसे मामलों में सहानुभूतिपूर्वक जल्द से जल्द पास जारी करें, ताकि लोगों को अनावश्यक पीड़ा नहीं झेलनी पडे़। अत्यावश्यक कार्य होने पर अंतर जिला आवागमन के लिए ई-पास के साथ-साथ ऑफलाइन पास की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके लिए संबंधित थाने एवं एसडीएम कार्यालय को अधिकृत किया जाए। साथ ही यह व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए कि लोगों को थाने एवं एसडीएम कार्यालय नहीं जाना पडे़, उन्हें मोबाइल के माध्यम से ही पास प्राप्त हो जाए।

    करीब 50 दिन से चल रहे लॉकडाउन से उपजी परिस्थितियों के कारण श्रमिक रोजगार एवं घर नहीं पहुंच पाने की पीड़ा के कारण तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं। इन श्रमिकों को संबल दिया जाना जरूरी है।

    फंसे हुए श्रमिकों एवं प्रवासियों को जल्द से जल्द उनके गृह स्थानों पर सुरक्षित पहुंचाया जा सके, इसके लिए भारतीय रेलवे से समन्वय कर ट्रेनों की संख्या बढ़वाई जाए। साथ ही जिन स्थानों की दूरी कम है, वहां बसों से लोगों को उनके गृह स्थान भिजवाया जाए। तकलीफ झेल रहे श्रमिकों एवं प्रवासियों का सकुशल आवागमन जरूरी है, लेकिन इनकी स्क्रीनिंग एवं क्वारेंटाइन की व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही नहीं हो। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति का होम या संस्थागत क्वारेंटाइन सुनिश्चित किये जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।

  • फीस जमा नही कराने पर स्टूडेंट्स के नाम नही काटे।दसवीं -बारहवीं के बचे पेपर कराने का फैसला बाद मे होगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण कोई अभिभावक आर्थिक स्थिति के चलते फीस जमा नहीं करा पाता है तो निजी स्कूल ऐसे विद्यार्थी का नाम नहीं काटें। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है तो राज्य सरकार उसकी मान्यता निरस्त कर सकती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि शिक्षा विभाग इस बात का भी परीक्षण कराए कि निजी स्कूल विद्यार्थियों को फीस एवं अन्य शुल्कों में किस प्रकार राहत दे सकते हैं और उन विद्यालयों का संचालन भी प्रभावित नहीं हो।

    मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़े विषयों पर समीक्षा की। मानवता के समक्ष यह ऐसा संकट है जिसका हम सभी को मिलकर सामना करना है। ऐसे वक्त में एक-दूसरे का ध्यान रखकर ही हम इस मुश्किल वक्त का मुकाबला कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं एवं बारहवीं कक्षाओं की शेष परीक्षाएं फिलहाल स्थगित रहेंगी। बाद में सीबीएसई द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के अनुरूप फैसला किया जाएगा, ताकि दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में एकरूपता बनी रहे और प्रदेश के विद्यार्थियों का अहित न हो। इसी प्रकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भी परीक्षाओं का आयोजन स्थितियां सामान्य होने पर करवाया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग ग्रीष्मावकाश में बच्चों को मिड-डे मील के लिए उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। ताकि लॉकडाउन के कारण बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में अभिभावकों को सूखी राशन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

    लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों को जिला एवं विभागों का आवंटन पुनः नई प्रक्रिया से करने के निर्देश दिए। सभी विभागों को मेरिट के आधार पर उनकी आवश्यकता के अनुरूप चयनित अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध कराएं। उसके बाद संबंधित विभाग मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर उन्हें जिला आवंटित करे। मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी भर्तियों में प्रथम नियुक्ति सभी विभागों द्वारा मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर ही दी जाए।

    यूपीए सरकार के समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम लाकर गरीब वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। विगत कुछ वर्षों में इस कानून की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।

    अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कानून की पारदर्शिता के साथ पालना सुनिश्चित करवाई जाए। इसके लिए अभिभावकों की आय सीमा को एक लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रूपए किया जाए। इस बात पर जोर दिया कि आरटीई के जरिए बच्चों को बड़े नामी निजी स्कूलों में भी पढ़ने का अवसर मिले। गत सरकार के समय एकीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में स्कूल बंद कर दिए गए थे। ऐसे विद्यालयों के अनुपयोगी पड़े भवनों का उपयोग विद्यालयों को पुनः खोलने के साथ-साथ जरूरत होने पर पंचायत, उप केन्द्र तथा सामुदायिक केन्द्रों के रूप में भी किया जा सकता है। प्रदेश में जिन महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण नहीं हुआ है उनके लिए भी योजना बनाकर दें ताकि राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से इनके भवनों का निर्माण करवाने पर कार्यवाही कर सके।

  • राजस्थान में कोरोना से मरने वालों की संख्या सौ पहुंची

    जयपुर:राजस्थान में कोरोना वायरस से एक मरीज की और मौत हो जाने से इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर सौ पहुंच गई है।

    चिकित्सा विभाग की सुबह प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को कोरोना के 26 नये मामले सामने आने से इसके मामलों की संख्या बढ़कर 3453 हो गई वहीं एक मरीज की और मृत्यु होने से कोरोना संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा भी बढ़कर सौ पहुंच गया।

    राज्य में राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा पचास से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि जोधपुर में इससे 16, कोटा में 10, अजमेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, नागौर एवं सीकर में दो-दो, अलवर, बीकानेर, करौली, प्रतापगढ़, टोंक एवं सवाईमाधोपुर में एक-एक कोरोना मरीज की मृत्यु हुई है। राज्य में इससेे उत्तर प्रदेश के दो लोगों की भी मौत हुई है।

    राज्य में अब तक 31 जिलों में कोरोना संक्रमण फैल चुका है और अब प्रदेश के बूंदी एवं श्रीगंगानगर जिला ही इससे अछूते रहे हैं। राज्य में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव जयपुर में देखने को मिल रहा है और यहां अब तक एक हजार एक सौ अधिक मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि इनमें करीब 680 मरीज ठीक हो चुके हैं और लगभग 590 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। इससे दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित जोधपुर जिले में अब तक करीब साढ़े आठ सौ मामले सामने आए हैं जहां 312 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और 291 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। कोटा में 231 मामलों में 159 मरीज ठीक हो गए जबकि सौ से अधिक मरीजों को छुट्टी मिल गई। टोंक में 136 मामलों में 120 स्वस्थ हो चुके और 64 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। भरतपुर में 116 मामले सामने आए जिनमें 105 मरीज ठीक हो चुके हैं और करीब सौ को छुट्टी मिल गई। नागौर में 119 मामले सामने आए, जिनमें 80 मरीज ठीक हो चुके हैं और 30 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। बांसवाड़ा में 66 मामलों में 58 स्वस्थ हो चुके हैं और 40 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अजमेर में अब तक करीब 190 मामले सामने आए हैं जहां 63 मरीज स्वस्थ हुए तथा पांच को अस्पताल से छुट्टी मिली है।

    राज्य में अब तक सामने आए मामलों में 61 मामले विस्थापित एवं 42 सीमा सुरक्षा बल के जवान तथा दो इटली के नागरिक भी शामिल है। अब तक एक लाख 45 हजार पांच सौ से अधिक लोगों के सैंपल प्राप्त हुए जिनमें एक लाख 39 हजार 830 की रिपोर्ट नकारात्मक पाई गई है जबकि 2227 की रिपोर्ट आनी शेष है। राज्य में अब तक 1903 मरीज ठीक हो गए जबकि 1523 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
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  • राजस्थान:गर्मी के मौसम मे सरकार की पेयजल की आपूर्ति पर विशेष नजर।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    गर्मी के मौसम में प्रदेश में पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से करने और हैण्डपंप एवं नलकूपों की मरम्मत के कार्याें में तेजी लाने के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने 48 घंटे से अधिक समय के अंतराल से पेयजल आपूर्ति वाले क्षेत्रों में यह अंतराल कम करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा। लोगों को पीने का पानी कम से कम 48 घंटे में एक बार मिले, यह सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कांस्फ्रेसिंग के माध्यम से प्रदेश में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बढ़ जायेगी ऐसे में निर्बाध पेयजल आपूर्ति राज्य सरकार की प्राथमिकता में है और हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि इन गर्मियों में कोई प्यासा नहीं रहे।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की तैयारी रखी जाए। हैडपंप एवं ट्यूबवैल की जहां जरूरत हो वहां स्वीकृति जारी की जाए और मरम्मत के कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएं। जल संरक्षण के साथ जल संचय पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया जाए।

    लॉकडाउन के दौरान काफी संख्या में श्रमिक बेरोजगार हुए हैं। ऐसे में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जल संसाधन एवं ऊर्जा विभाग के तहत चल रही परियोजनाओं में इन्हें नरेगा के तहत काम दिये जाने की संभावनाएं तलाशी जाएं।

    पेयजल आपूर्ति सुचारू बनाये रखने के लिए जिला कलक्टर एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव के स्तर पर साप्ताहिक एवं राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठक करने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए। पेयजल से संबंधित शिकायतों का समय पर निस्तारण करने को कहा।उन्होंने हाल ही में आये आंधी-तूफान से जिन बिजली आपूर्ति लाइनों को नुकसान पहुंचा है उनकी मरम्मत कर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही आवश्यतानुसार जगह चिन्हित कर आरओ प्लांटस लगाने के भी निर्देश दिए।

  • राजस्थान मे मई के अंत तक अनेक राजनीतिक व सवैधानिक पदो पर नियुक्ति होने की सम्भावना।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान से 26-मार्च को तीन राज्य सभा सदस्यों के चुनाव मे मतदान होने से पहले स्थगित हो जाने के बाद अब मई आखिर मे मतदान की तिथि की आने की सम्भावना जताई जा रही है। जबकि तीन सीटो के लिए होने वाले उक्त चुनाव मे दो कांग्रेस के व दो भाजपा की तरफ से उम्मीदवार के अपने पर्चे दाखिल कर चुकने के बाद पर्चा वापिस लेने का समय गुजर चुका था। अब मात्र सदस्य चुनने के लिए मतदान होना बाकी है। इसी के साथ खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली अधीकांश राजनीतिक नियुक्तियों पर होम वर्क पुरा कर लिया बताते है। इन नियुक्तियों मे सभी तरह के संवेधानिक पदो पर होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों की घोषणा राज्य सभा चुनाव के तूरंत बाद की जा सकती है। जबकि समाज कल्याण विभाग के सम्बंधित कुछ नियुक्तियों के आदेश लोकडाऊन मे भी जारी हो चुके है।

    आने वाली खबरो के मुताबिक राजस्थान लोकसेवा आयोग के रिक्त चल रहे चार सदस्यों पर नियुक्ति के अलावा राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, महिला आयोग, राज्य पुलिस जवाबदेय समिति, अल्पसंख्यक आयोग, सूचना आयुक्तों सहित कुछ अन्य संवैधानिक पदो पर नियुक्तियों के आदेश जारी हो सकते है। संवैधानिक पदो पर नियुक्तियों के बाद अन्य राजनीतिक नियुक्तियों का सीलसीला जारी होगा जिसमे बोर्ड-निगम-आयोग व समितियों के गठन होगा।

    कुल मिलाकर यह है कि कोराना महमारी व लोकडाऊन के मध्य राजनेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिये एक अच्छी खबर निकल कर आ रही है कि राजस्थान मे जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा खुलने वाला है। खबरो के मुताबिक अधीकांश पदो पर होमवर्क मुकम्मल कर लिया बताते है। समय अनुसार नियुक्तियों की घोषणा का सीलसील जारी होगा।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि श्रमिकों का किराया राज्य सरकार वहन करेगी।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लॉकडाउन के कारण फंसे प्रवासी श्रमिक जो प्रदेश से बाहर अपने घर जाना चाह रहे हैं उनके जाने का किराया राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि संकट की इस घड़ी में फंसे श्रमिकों को घर जाने के लिए यात्रा किराए का भुगतान स्वयं नहीं करना पड़े। ऐसे लोग जो अपने राज्य में रेल से जाना चाहते हैं, उनके रेलवे यात्रा किराये का भुगतान तथा सड़क मार्ग से जाने वालों को राजस्थान की सीमा तक बस से निशुल्क पहुंचाने की व्यवस्था भी राजस्थान सरकार करेगी।

    वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए कोरोना संक्रमण रोकने के उपायों, लॉकडाउन एवं प्रवासी श्रमिकों के आवागमन को लेकर नोडल अधिकारियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जिला कलक्टरों-पुलिस अधीक्षकों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुख्यमंत्री ने चर्चा की।

    केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी नई गाइडलाइन में अन्तर्राज्यीय आवागमन के लिए उन्हीं श्रमिकों और प्रवासियों को अनुमत किया है जो लॉकडाउन के कारण अपने घर से दूर अन्य राज्यों में अटक गए हैं। जिला कलक्टर से इस गाइडलाइन की पूरी तरह से पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासियों एवं श्रमिकों को आवश्यक रूप से क्वारेंटाइन में रहना होगा। जिन लोगों में खांसी, जुकाम एवं बुखार के लक्षण हैं, उन्हें संस्थागत क्वारेंटाइन में रखा जायेगा। अन्य व्यक्ति आवश्यक रूप से अपने घर में होम क्वारेंटाइन में रहें। जिला कलक्टर को यह सुनिश्चित करने और इसमें किसी तरह की लापरवाही नही बरतने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि ऐसे प्राइवेट हॉस्पीटल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जो संकट की इस घड़ी में मरीजों का इलाज नहीं कर मानव सेवा के अपने नैतिक दायित्व का पालन नहीं कर रहे हैं। जिला कलक्टर ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई करें। गैर कोविड रोगियों को उनके घर के नजदीक ही चिकित्सा सुविधा देने के लिए राज्य सरकार ने 428 मोबाइल ओपीडी वैन संचालित की हैं जिनका आमजन को लाभ मिल रहा है। गंभीर बीमारियों के मरीजों के उपचार के साथ-साथ संस्थागत प्रसव एवं टीकाकरण पर पूरा ध्यान रखने के निर्देश दिए।

    भीलवाडा में जिस तरह रूथलेस कंटेनमेंट के कारण कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में सफलता मिली है वही मॉडल चित्तौडगढ़ जिले के निम्बाहेडा में अपनाया जाए क्योंकि वहां एकाएक कई पॉजिटिव केस सामने आये हैं। यहां पूरी प्लानिंग के साथ कंटेनमेंट पर फोकस किया जाए। कर्फ्यू एरिया में इसका पालन सख्ती से कराया जाए और सैंपल कलेक्शन की संख्या बढायी जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश मे यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सैंपल टेस्टिंग के परिणाम में देरी नहीं हो और टेस्टिंग के लिए सैंपल उदयपुर की बजाय भीलवाडा भेजे जाएं। निम्बाहेडा एवं आस-पास के क्षेत्रों में घर-घर सर्वे एवं स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। जोधपुर में भी सैंपल टेस्टिंग रिजल्ट में तेजी लाने को कहा। जांच के परिणाम जितने जल्दी आएंगे उतना ही संक्रमण रोकने में हमें कामयाबी मिलेगी। जांच परिणाम आते ही पॉजिटव व्यक्ति एवं उसके संपर्क में आये लोगों को क्वारनटाइन किया जाए।

    लॉकडाउन 3.0 को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन में यह संदेश जाए कि लॉकडाउन अभी भी पूरी तरह से लागू है और कुछ आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छोड़कर इसमें कोई ज्यादा ढील नहीं दी गई है। जरूरी नहीं होेने पर कोई अपने घरों से बाहर नहीं निकले। निर्देश दिए कि तीसरे चरण के लॉकडाउन की भी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए। केन्द्र एवं राज्य की ओर से जारी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं हो। इसके लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।

  • प्रवासी व मजदूरों के आवागमन के लिये विशेष ट्रेन संचालन की इजाजत।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार की पुरजोर मांग के बाद केन्द्र सरकार ने प्रवासियों एवं श्रमिकों के आवागमन के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन की अनुमति दे दी है। यह खुशी की बात है कि राजस्थान से ट्रेन का संचालन शुरू हो गया है। अब प्रवासियों एवं श्रमिकों के सुगम एवं शीघ्र आवागमन के लिए अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें। अब तक हुए पंजीयन के आधार पर सूचियां तैयार कर संबंधित राज्यों के साथ साझा कर ली जाएं।

    मुख्यमंत्री निवास पर लॉकडाउन एवं प्रवासी श्रमिकों के आवागमन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा करते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रवासियों एवं श्रमिकों के सकुशल आवागमन के इस चुनौतीपूर्ण काम के लिए लगातार केंद्र सरकार एवं अन्य राज्य सरकारों से समन्वय कर रही है। हमारा प्रयास है कि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पडे़।

    सोशल डिस्टेंसिंग तथा रूथलेस कंटेनमेंट के कारण कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में सफलता मिली है। अनुमत श्रेणियों में छूट के साथ तीसरे चरण के लॉकडाउन की भी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए। केन्द्र एवं राज्य की ओर से जारी गाइडलाइन का किसी भी स्थिति में उल्लंघन नहीं हो। इसके लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।

    विशेष ट्रेनों के साथ-साथ रोडवेज एवं निजी बसों के माध्यम से भी प्रवासियों को लाया जाए। इसके लिए पूरी प्रक्रिया निर्धारित करें। प्रदेश में जिन स्थानों से विशेष ट्रेनों का आवागमन होना है, वहां माकूल इंतजाम के लिए अतिरिक्त अधिकारियों को लगाया जाए। वृद्ध, गर्भवती महिलाओं, बच्चों सहित ऐसे लोग जिन्हें अपने गृह स्थान पर भेजा जाना बेहद जरूरी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार भेजा जाना सुनिश्चित करें। जो प्रवासी स्वयं निजी वाहनों अथवा बसों के जरिए आना-जाना चाहते हैं, उन्हें संबंधित राज्यों के साथ समन्वय कर जल्द पास जारी करवाएं। वाहनों की व्यवस्था में सेवाभावी लोगों की भी मदद ली जा सकती है।

  • राजस्थान सरकार की कड़ी मेहनत के मुकाबले कोराना दम तोड़ने लगा।

    नब्बे वर्षीय पोजेटिव मरीज भी ठीक होकर घर पहुंचा।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दृढ इच्छा शक्ति के बल पर राजस्थान के मेडिकल विभाग के कर्मियों की कर्तव्यनिष्ठठा के चलते राजस्थान प्रदेश मे कोराना दम तोड़ने लगा है। जयपुर सी-स्कीम के रहने वाले नब्बे वर्षीय भवानी शंकर शर्मा के पोजेटिव होने के बाद क्वरंटाईम मे रहकर आज पूरी तरह ठीक होकर घर के लिये रवाना होते समय कर्मियों ने उन्हें गुलदस्ता व फूल माला देकर रवाना करने का मंजर देखने लायक था।

    राजस्थान मे कोराना संक्रमित अब तक 28 जिले है जिनमे अब तक कुल 2364 मरीज पोजेटिव पाये गये। जिनमे से 770 मरीज रिकवर होकर घर चले गये एवं कुल 51 का देहांत हुवा है। जानकारी अनुसार जिलेवार पोजेटिव मरीजों की संख्या निम्न प्रकार है। जयपुर-859, अजमेर-135, धोलपुर-09, जोधपुर-400, कोटा-189, सीकर-06, नागोर-117, बांसवाड़ा-63, उदयपुर-07, टोंक-131 है। इनमे नागोर जिले के अकेले गावं बासनी मे तीन अको मे जयपुर के रामगंज क्षेत्र मे मरीज की तादाद अधिक देखने मे आई है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रधानमंत्री से पहले लोकडाऊन की घोषणा करके उस पृ पछरी तरह अमल करवाने के चलते कोराना वायरस अपना दायरा बढा नही पाया। ओर पोजेटिव मरीज मिलते ही उस क्षेत्र के दो किलोमीटर की परिधि मे कर्फ्यू लगाकर हर एक की स्क्रीनिंग करने से संक्रमित व सदिग्ध मरीजो का पता करके उनको क्वरंटाईम करके इलाज करने के कारण मरीज रिकवर भी काफी हो रहे है।

  • आईसीएमआर की गाईडलाईन पर खरे उतरने वाले टेस्ट किट एवं उपकरण ही मिले।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए टेस्टिंग किट, वेंटीलेटर एवं अन्य मेडिकल उपकरण केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीयकृत खरीद कर राज्यों को उपलब्ध कराये जाने चाहिएं ताकि राज्य सरकारों को इनकी खरीद में आसानी हो सके, राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा न हो और आईसीएमआर की गाइडलाइन पर खरे उतरने वाले टेस्ट किट एवं उपकरण ही मिल सकें।

    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केन्द्र से आई पांच सदस्यीय टीम एवं प्रदेश के अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई वीसी के दौरान भी आग्रह किया था। राजस्थान द्वारा चीन से हाल ही में मंगवाये गये रेपिड टेस्ट किट का टेस्ट रिजल्ट ठीक नहीं आना बताया। जो हमारे लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

    एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की एक रिसर्च टीम इसकी जांच कर रही है। इस जांच की रिपोर्ट एवं आईसीएमआर की गाइडलाइन प्राप्त होने के बाद ही रेपिड टेस्ट किट के बारे में आगे फैसला लिया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी का संक्रमण रोकने के लिए राज्यों ने अपने संसाधन झोंक दिये हैं और लॉकडाउन के कारण राजस्व में भारी कमी आने से अधिकतर राज्यों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में केन्द्र सरकार को राज्यों को अनुदान के रूप में मदद पहुंचाने के लिए बड़े पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। आरबीआई की ओर से वेज एण्ड मीन्स एडवांस में 60 प्रतिशत की वृद्धि तो की गई है। लेकिन इसे ब्याज मुक्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा राज्य सरकारों को उनके बकाया ऋण की आगामी किश्तों पर तीन माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराया जाना चाहिए। राज्यों की उधार लेने की क्षमता भी तीन से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किये जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री को पत्र के माध्यम से एवं वीसी के दौरान इस संबंध में आग्रह किया जा चुका है।

    कोविड-19 के संक्रमण को शुरूआती दौर में ही रोकने के लिए राज्य सरकार ने केन्द्र की घोषणा से पहले ही 22 मार्च को लॉकडाउन घोषित कर दिया था। साथ ही रेहडी व ठेला चालक, रिक्शा चालक, असहाय, घुमन्तू एवं रोज कमा कर खाने वाले लोगों के जीविकोपार्जन पर आये संकट को देखते हुए अनुग्रह राशि के रूप में ढाई-ढाई हजार रूपये जरूरतमंद लोगों के खाते में डाले गये ताकि उनकी जरूरतें पूरी हो सकें। जिन लोगों के बैंक खाते नहीं थे उन्हें कलेक्टर के माध्यम से नकद राशि दी गई। राज्य सरकार की ओर से जरूरतमंद लोगों को राशन सामग्री किट एवं भोजन के पैकेट भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

    विधायक कोष का पैसा स्थगित करने के बजाय राज्य सरकार अगले दो साल तक कोविड-19 से लड़ने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर खर्च करने की योजना बना रही है। हमारी सरकार सभी वर्गों की बेेहतरी के लिए प्रयासरत है और वंचित लोगों की सहायता के लिए हर संभव कदम उठा रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्यों को केन्द्र की ओर से मदद बिना किसी देरी के मिलनी चाहिए। कोविड-19 से लड़ते हुए हमारी सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत ढांचा मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। प्रदेश में लैब बढ़ाने, आईसीयू बैड बढ़ाने एवं वेन्टीलेटर की संख्या बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। कोरोना संकट से निपटते हुए एक आपसी सहयोग की भावना भी विकसित हुई है।

    लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में अटके प्रवासियों एवं वहां रह रहे राजस्थानियों को एक बार अपने घर जाने का मौका मिलना चाहिए। इस बारे में मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय गृहमंत्री से फोन पर बात की है। गृहमंत्री ने इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रवासी श्रमिकों सहित अन्य लोग फंसे हुए हैं। वे निराश एवं हताश हैं और एक बार अपने घर जाना चाहते हैं। ऐसे में उनके बारे में संवेदनशीलता के साथ केन्द्र सरकार द्वारा उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

    भारतीय खाद्य निगम के भंडार गेहूं से भरे हुए हैं। ऐसे में केन्द्र सरकार ऐसे लोगों, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और जिनके नाम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में नहीं हैं, उन्हें भी गेहूं उपलब्ध कराये ताकि किसी को भी भूखा नहीं सोना पड़े। लॉकडाउन के दौरान बढ़ी हुई मांग को देखते हुए राज्यों को राशन का अधिक गेहूं जारी करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह केन्द्र सरकार से किया।

    उम्मीद है कि केन्द्र सरकार की ओर से भेजी गई टीम अपनी रिपोर्ट में इन सभी बिन्दुओं को भी शामिल करेगी। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा अभी तक किये गये प्रयासों को केन्द्रीय टीम अपनी रिपोर्ट में शामिल करते हुए इस महामारी से लड़ने के लिए प्रदेश को केन्द्र से अनुदान एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराने में सकारात्मक भूमिका निभायेगी।