Category: राजस्थान

  • राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों मे मुस्लिम समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व।

    हालात चिंताजनक व सोचने को मजबूर करने वाले बन चुके है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    भारत के प्रत्येक प्रदेश मे सरकारी नीतियों व योजनाओं को क्रियान्वयन करते हुये उनको जनता तक पहुंचाने के अलावा अपने क्षेत्र की कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये प्रदेश स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों का अपना एक केडर होता है। राजस्थान मे राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारियों का भी केडर कायम है। राजस्थान मे कुल 816 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों का केडर है। जिनमे 479 अधिकारी सीधे तौर पर राजस्थान लोकसेवा आयोग के मार्फत चयन होकर आते है। एवं 337 तहसीलदार सेवा से पद्दोनत होकर आते है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग के मार्फत चयनित होकर आने वाले राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की सूची मे मुस्लिम प्रतिनिधित्व मामूली है। पर तहसीलदार सेवा से पद्दोनत होकर आने वाले अधिकारियों को शामिल करने पर मोजुदा समय मे कुल 816 के केडर मे मात्र 23 मुस्लिम अधिकारियों का नाम शामिल पाया जाता है। समुदाय के उक्त सेवा मे बनी चिंताजनक हालात के जिम्मेदार कोई अन्य कतई नही है। बल्कि स्वयं समुदाय की उक्त सेवाओं के प्रति उदासीनता व शिक्षा पाने के प्रति ललक का अभाव मात्र है।

    राजस्थान प्रशासनिक सेवा RAS के अधिकारियों की सूची–
    नाम। सेवानिवृत्ति दिनांक
    1-असलम शैर खान। 31/5/36
    2-असलम मेहर 31/8/20
    3-अकील खान। 30/6/36
    4-अय्यूब खान। 3/04/31
    5-अबू सुफियान। 31/7/34
    6-अंजुम ताहिर शम्मा। 31/8/42
    7-अमानुल्लाह खान। 30/6/26
    8-अजीजुल हसन गौरी। 30/9/25
    9-इकबाल खान। 28/2/29
    10-हाकम खान। 30/5/34
    11-जमील अहमद कुरैशी। 31/12/21
    12-जावेद अली। 31/8/35
    13-मोहम्मद अबू बक्र। 31/8/39
    14-मोहम्मद सलीम। 30/6/44
    15-नसीम खान। 30/4/45
    16-रुबी अंसार। 28/2/51
    17-सना सिद्दीकी। 31/7/45
    18-शीराज जैदी। 28/2/45
    19-सतार खान। 31/7/23
    20-सैय्यद मुकर्मशाह। 31/8/29
    21-शौकत अली। 30/6/22
    22-शाहीन अली खान। 31/7/32
    23-ताहिर अख्तर। 30/6/29

    किसी समय जयपुर के मोतीडूंगरी रोड़ पर नानाजी की हवेली मे सर्विस गाईडेंस ब्यूरो चला करता था। मोजुदा अधिकारियों मे से अधीकांश उसी गाईडेंस ब्यूरो की उपज बताते है। उसके बंद होने के बाद प्रदेश भर मे उक्त तरह का किसी भी स्तर पर कहीं भी गाईडेंस ब्यूरो नही चलना भी घटते प्रतिनिधित्व का प्रमुख कारण बताया जाता है। साथ ही पीछले 25-30 साल से समुदाय की जकात व इमदाद पर कुछ लोग अन्य प्रदेशो के यहां आकर अपने यहां से भेजकर प्रदेश मे अलग अलग रुप से अपने हिसाब से जमाये ऐजेंट के मार्फत जमा करके उसको अपने हिसाब से खुर्द बूर्द करने के कारण राजस्थान मे ढंग का गाईडेंस ब्यूरो कायम नही हो पाया है।

    कुल मिलाकर यह है कि दिल्ली मे रिटायर्ड राजस्व सेवा के अधिकारी जफर महमूद द्वारा कायम जकात फाऊण्डेशन द्वारा जिस तरह से भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने का इंतजाम करके बेहतरीन रजल्ट दे रहे है। उसी तर्ज पर राजस्थान मे भी जकात फाऊंडेशन बनाकर उसके मार्फत उक्त फिल्ड मे काम किया जाये तो सुखद परिणाम आ सकते है। इसके लिये किसी ना किसी को पहल करनी होगी अन्यथा भविष्य पर छाई घटाघोप विकराल रुप धारण कर सकती है।

  • राज्यसभा चुनाव।राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विरोधियों को पटखनी देकर सबको चोंकाया।

    कांग्रेस व समर्थन दे रहे विधायकों की गहलोत ने की मतदान तक बाड़ेबंदी।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    कर्नाटक व मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल करके भाजपा द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के अलावा गुजरात मे कांग्रेस विधायकों के विधायक पद से त्याग पत्र देने के सीलसीले के बाद राजस्थान के कुछ कांग्रेस विधायकों व निर्दलीय विधायको के पास उन्नीस जून को होने वाले राज्य सभा चुनाव मे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष मे मतदान करने या फिर कांग्रेस विधायक पद छोड़ने के लिये लोभ-लालच के फोन आने व कुछेक से व्यक्तिगत सम्पर्क करके लोभ -लालच का आफर करने की भनक जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंची तो उन्होंने गुप्त रणनीति के तहत कांग्रेस व सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायकों को मुख्यमंत्री निवास पर बैठक करने के बहाने न्योता भिजवाया ओर उक्त विधायकों से सम्पर्क करने की विरोधियों की हर कोशिश को असफल करने के लिये कोराना केश बढने के बहाने अचानक दस जून को पहले प्रदेश की सभी सीमा सील करने के आदेश सरकार की तरफ से जारी करवाये फिर एक घंटे बाद उक्त आदेश का संशोधित आदेश जारी हुवा जिसमे प्रदेश मे आने व प्रदेश से बाहर जाने वाले पर पूरी तरह नजर रखी जा सकती है।इस आदेश के बाद कांग्रेस व निर्दलीय विधायको से या उनके परिजनों के मार्फत उनसे सम्पर्क करके उनको अपनी तरफ खींचकर कांग्रेस को मात देने मे लगे नेताओं की कोशिशों पर ब्रेक सा लग गया है। एवं इस तरह की हलचल अगर होती है तो उसका मुख्यमंत्री को पता भी लगना आसान हो गया है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने व निर्दलीय विधायकों से विरोधियों द्वारा सम्पर्क साधने की मिल रही खबरो के बाद मुख्यमंत्री ने सोची समझी रणनीति के तहत सभी कांग्रेस विधायकों व समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को बैठक के बहाने दस जून शाम को बीना कुछ बताये अपने निवास पर बूलाकर एक एक विधायक से स्वयं व्यक्तिगत मिलकर उनको राज्य सभा चुनाव तक बाड़ेबंदी मे रहने को तैयार करके दिल्ली रोड़ स्थित अपने परिचित की शिवा होटल मे सभी को भेजकर अपनी सफल रणनीति का पहला फेज पुरा कर लिया। बताते है कि मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के सभी विधायको के अतिरिक्त समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों के साथ लोकदल के एक विधायक को बाड़ेबंदी मे बंद करके विरोधियों द्वारा उनसे सम्पर्क करके उन्हें तोड़कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का एक तरह से बन रहे रास्ते मे कठोर अवरोध लगा दिया है। शाम को मुख्यमंत्री स्वयं बाड़ेबंदी वाली जगह पहुंच कर विधायकों के साथ भोजन किया ओर एक बार फिर उनसे मिले। यानि एक तरह से राज्य सभा चुनाव मे तोड़फोड़ होने की आशंका के चलते राजस्थान की पुरी सरकार बाड़ेबंदी मे सिमट कर रह गई है।

    उन्नीस जून को तीन राज्य सभा सीटों के लिये होने वाले चुनाव के लिये भाजपा ने अपने दो उम्मीदवार उतार कर मतदान होने की स्थिति बनाकर कांग्रेस के असंतुष्ट व निर्दलीय विधायकों के सामने विकल्प पैश करके अपने अतिरिक्त मतो के साथ निर्दलीय व गुजरात, व अन्य प्रदेशों की तरह कांग्रेस विधायकों को अपनी तरफ खींचकर कांग्रेस को मात देकर अपने दूसरे उम्मीदवार को जीताने की कोशिश करने की चाल की भनक खुफिया तंत्र व भाजपा के ही अंदरूनी सुत्रो से मुख्यमंत्री गहलोत को ज्यो ही मिली त्यो ही गहलोत ने विधायकों की बाड़ेबंदी का कदम उठाकर एक तरह से विरोधियों को एक दफा तो मात दे दी है।

    राज्य सभा चुनाव मे एक उम्मीदवार को जीतने के लिये कम से कम 51 मतो की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास 101 स्वयं के निसान पर जीते हुये व छ बसपा से कांग्रेस मे आये विधायको को मिलाकर कुल 107 विधायक है। इसके अतिरिक्त लोकदल के एक विधायक सुभाष गर्ग का समर्थन शुरू से प्राप्त है। तेराह निर्दलीय विधायको मे से विधायक ओमप्रकाश हुड़ला को छोड़कर बाकी 12 विधायकों का भी समर्थन कांग्रेस को प्राप्त है। इसके विपरीत भाजपा के स्वयं के 72 विधायक व 3 रालोपा के व अगर हुड़ला का मत भी भाजपा की तरफ जाये तो अधिकतम 76 विधायको का समर्थन ही पक्ष मे होना माना जा रहा है। दो माकपा व दो बीटीपी के मोजूद विधायकों का वैचारिक तोर पर भाजपा के पक्ष मे जाना सम्भव नही है।

    राजनीतिक समीक्षक कहते है कि भाजपा को पहले से पता है कि उक्त राज्यसभा चुनाव मे उनका दुसरा उम्मीदवार जीत नही पायेगा। लेकिन इस चुनाव के बहाने कर्नाटक-मध्यप्रदेश व गुजरात की तरह कांग्रेस व निर्दलीय विधायको मे से किसी भी तरह से किसी भी स्तर पर उन्हें तोड़कर अपनी तरफ खींचकर मनोवैज्ञानिक तौर पर कांग्रेस सरकार पर दवाब बनाकर उसे मुश्किल मे डालकर आगे चलकर सत्ता परिवर्तन का खेल रचने का रास्ता तैयार करना चाहती है। जिसमे गहलोत द्वारा विधायकों की बाड़ेबंदी करने के बाद सफलता मिलना मुश्किल हो चुका है। इसके विपरीत कांग्रेस ने अपने मुख्य सचेतक महेश जौशी द्वारा सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने की शिकायत राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के मुखिया से करने के बाद ऐसीबी द्वारा जांच करने की सम्भावना से गहलोत विरोधी व तोड़फोड़ मे लगे भाजपा नेताओं पर मनोवैज्ञानिक दवाब बना गया है। जिसके चलते लोभ-लालच देकर कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों को तोड़कर अपनी तरफ खींचने मे लगे नेताओं मे खलबली मच चुकी है।

    कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस के राज्य सभा उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल व नीरज डांगी व भाजपा के दो मे से एक उम्मीदवार राजेन्द्र गहलोत का चुनाव जीतना लगभग तय है। कांग्रेस विधायकों व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की बाड़ेबंदी दिन ब दिन मजबूत होती जायेगी। बाड़ेबंदी मे भी गहलोत के खास विधायक सदिग्ध विधायकों पर पूरी नजर बनाये हुये है। राजस्थान मे जारी राजनीतिक हलचल से लगने लगा है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस मे मोजूद असंतुष्ट व भाजपा को एक दफा तो अपनी गुप्त रणनीति से पटखनी दे दी है।

  • राजसथान की तीन राज्यसभा सीटों के लिये मतदान उन्नीस जून को।

    कांग्रेस को दो व एक सीट भाजपा के खाते मे जायेगी।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर ।
    राजस्थान की राज्यसभा की तीन सीटो पर पहले छब्बीस मार्च को होने वाले मतदान के लोकडाऊन के कारण स्थगित होने के बाद अब उन्नीस जून को मतदान होगा। ओर उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिया जायेगा।

    उक्त राज्यसभा चुनाव मे कांग्रेस से केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी उम्मीदवार है वही भाजपा से राजेन्द्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत उम्मीदवार है। विधायकों के आंकड़ों के मुताबिक तीन मे से दो सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है।

    कांग्रेस की तरफ से बनाये गये उम्मीदवारों मे कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव व केरल निवासी केसी वेणुगोपाल को हाईकमान की पसंद व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की विरोधियों को मात देने की कला को मानने के अलावा इसी के मध्य दो दफा विधानसभा चुनाव हारने वाले नीरज ढांगी को उम्मीदवार बनाना केवल मात्र मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा अपने चहतो को पूरुष्कृत करना माना जा रहा है। नीरज ढांगी की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस के अनेक विधायक अंदर खाने नाखुश है लेकिन अब वो विरोध करने की स्थिति मे नही है।

    उक्त राज्यसभा चुनाव मे जीत के लिये प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम से कम 51 मत आवश्यक रुप से चाहिए। मोजूदा विधानसभा मे कांग्रेस के पास 101 विधायक हाथ के निशान पर जीते हुये व एक सुभाष गर्ग लोकदल के निशान पर जीते हुये विधायक को गहलोत ने अपने मंत्रिमंडल मे जगह दे रखी है। इसके अतिरिक्त छ विधायक बसपा से कांग्रेस मे शामिल हो चुके एवं तेराह निर्दलीय विधायको मे से एक मात्र ओमप्रकाश हुड़ला को छोड़कर बाकी सभी बारह निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के पाले मे है। यानि कुल 120 विधायक तो कांग्रेस की जाजम पर इकठ्ठा बैठे है। इनके अलावा दो माकपा व दो बीटीपी के विधायकों के भी कांग्रेस के साथ रहने की उम्मीद पुख्ता है। दूसरी तरफ भाजपा के पास 72 स्वयं के विधायक व तीन रालोपा के एवं एक निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला का मत मोजूद है। भाजपा को अपने दुसरे उम्मीदवार को जीतने के लिये कम से कम 26 अन्य मतो की आवश्यकता है। जो मिलना इस समय कतई सम्भव नही लगता है।

    हालांकि कांग्रेस मे अंदरखाने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यशैली के करीब 36 विधायक असंतुष्ट बताये जा रहे है। लेकिन उनका कांग्रेस के खिलाफ व भाजपा के दुसरे उम्मीदवार ओंकार सिंह लखावत के पक्ष मे मतदान करना मोजुदा हालत मे कतई सम्भव नही है। ऐसी स्थिति मे दो कांग्रेस व एक भाजपा का उम्मीदवार जीतना तय माना जा रहा है। राजस्थान की दस राज्यसभा सीटो मे से कांग्रेस के पास उपचुनाव मे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जीतने पर एक सीट पहले से एवं उन्नीस जून को केसी वेणुगोपाल व नीरज ढांगी के जीतने के बाद तीन सीट कांग्रेस के पास हो जायेगी ओर सात भाजपा के पास रह जायेगी।

    कुल मिलाकर यह है कि भाजपा के दूसरे उम्मीदवार ओंकार सिंह लखावत के मैदान मे रहने से केवल मात्र निर्विरोध चुनाव को रोकना मात्र विकल्प रहेगा। तीन मे से दो कांग्रेस के व एक भाजपा के खाते मे सीट जाना तय लगती है। जातीय आधार के मुताबिक कांग्रेस ने वेणुगोपाल (केरला ब्राह्मण) व नीरज ढांगी (अनुसूचित जाति) व भाजपा ने राजेन्द्र गहलोत (माली) व ओंकार सिंह लखावत (चारण) को उम्मीदवार बनाया है।

  • थानेदार विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामले की जांच सीबीआई करेगी।

    विश्नोई समाज के दवाब के सामने आखिरकार गहलोत को झूकना पड़ा।
    अशफाक कायमखानी।जयपुर
    राजस्थान मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पीछली कांग्रेस सरकार के समय 17- मार्च 2011 को सवाईमाधोपुर के सुरवाल गावं मे थानेदार फूल मोहम्मद को डयूटी का फर्ज निभाते हुये गहरी साजिश के तहत सरेआम जींदा जलाकर मौत के घाट उतारने के बावजूद उनके जनाजे मे सरकार का कोई भी मंत्री सरकारी प्रतिनिधि के तौर पर शामिल नही हुवा ओर नाही कभी उनके परिजनो के आंसू पोंछने की कोशिश आज तक गम्भीरता से हुई है। इसके उलट राजस्थान के विश्नोई समाज को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने सामाजिक एकता की ताकत के बल पर दवाब बनाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनकी इच्छा के विपरीत उन्ही से राजगढ़ थानेदार विष्णु दत्त विश्नोई के आत्महत्या मामले की जांच सीबीआई से करने के आदेश करवा कर बडी उपलब्धि हासिल की है।

    चूरु जिले के राजगढ़ थाने मे तैनात थानेदार विष्णु दत्त विश्नोई द्वारा 23-मई-2020 को सुबह-सवेरे थाना परिसर स्थित अपने सरकारी आवास मे आत्महत्या करने का मामला सामने आने पर कुछ राजनेता द्वारा थाने के सामने लोकडाऊन के बावजूद उसी दिन धरना-प्रदर्शन करके एक तरह से सरकार पर दवाब बनाते हुये थानेदार विष्णु के दवाब के चलते आत्महत्या करने को बताते हुये प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग रखी। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हमेशा की तरह अपनी टालमटोल की नीति के तहत स्टेट ऐजेन्सी से ही जांच जारी रखी। मुख्यमंत्री के रवैये को देखते हुये विश्नोई समाज ने दवाब लगातार जारी रखने पर भी मुख्यमंत्री जब टस से मस नही हुये तो विश्नोई समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कांग्रेस नेता कुलदीप विश्नोई ने विष्णुदत्त थानेदार आत्महत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग के साथ गहलोत को चार जून शाम तक का अल्टीमेटम ज्योही दिया कि मुख्यमंत्री गहलोत ने चार जून की दोपहर को ही सीबीआई जांच कराने की अभिशंषा करके टवीट करके जानकारी दे दी।

    इसके विपरीत 17-मार्च 2011 को थानेदार फूल मोहम्मद को सरकारी डयूटी करते हुये सवाईमाधोपुर के सुरवाल गावं मे सरेआम जलाकर मारने वाले हत्यारों व साजिश कर्ताओं को पूर्ण रुप से अभी तक सजा नही मिल पाई है। उक्त प्रकरण मे शहीद फूल मोहम्मद के परिवारजनों को आज भी पूरी तरह इंसाफ मिलने का इंतजार है। फूल मोहम्मद को जलाकर मौत के घाट उतारने के मामले की तत्कालीन समय मे सीबीआई से जांच करने की मांग उठी थी। लेकिन तत्तकालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक कान से सूना ओर दूसरे कान से निकाल दिया। मुस्लिम समाज के पास ना विश्नोई समाज की तरह एकता थी ओर नाही कुलदीप विश्नोई जैसा कोई मजबूत नेता था। जो सरकार को झूका सके। सीबीआई जांच की मांग को ताकत देने की बजाय मुस्लिम नेता मुख्यमंत्री की हां मे हां मिलाने लगे हुये। एक मात्र सवाईमाधोपुर के तत्तकालीन विधायक अलाऊद्दीन आजाद ने फूल मोहम्मद केश मामले मे आवाज उठाई तो अगले चुनाव मे सीटींग विधायक होते हुये भी आजाद की कांग्रेस द्वारा टिकट काट दी गई थी।

    कुल मिलाकर यह है कि मुस्लिम समुदाय कांग्रेस का बीन बूलाये मेहमान व गारंटीड मतदाता है। बीन बूलाये मेहमान व जरखरीद मतदाता की कभी इच्छा पूर्ति नही की जाती है। इच्छा पुर्ति बराबर वाले की या फिर अपने से भारी कि की जाती है।

  • राजस्थान मे कायमखानी राजनेता अपने राजनीतिक आकाओ का विश्वास दुबारा जीतने मे कमजोर साबित रहे

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    पूर्व मंत्री व भाजपा नेता यूनुस खान को छोड़कर बाकी अधीकांश कायमखानी राजनेता अपने राजनैतिक आकाओ का विश्वास जीतकर दुबारा पद पाने मे नाकामयाब रहे है। जबकि इसके उलट जनता ने काफी नेताओं कै फिर से विधायक व सांसद बनने मे उनका पुरा साथ दिया है। तत्कालीन डीडवाना भाजपा विधायक यूनुस खां भाजपा की राजे सरकार मे अपने राजनैतिक आका का विश्वास पाकर दुबारा मंत्रीमण्डल मे मंत्री पद पाया था। लेकिन उनके अलावा मरहूम रमजान खां राजस्थान राज्य मंत्रीमंडल मे एवं मरहूम केप्टेन अय्यूब का केन्द्रीय मंत्रीमंडल मे एक एक दफा ही मंत्री बन पाये है। जबकि जनता ने उक्त तोनो नेताओं के साथ मरहूम आलम अली खा व भंवरु खा के एक से अधिक दफा विधायक या फिर सांसद का चुनाव जीतवाया है।

    अपने राजनैतिक आकाओं के विश्वास की ताकत के बल पर राजनीतिक नियुक्तियों को पाने वाले 1998-2003 की गहलोत सरकार मे डा.निजाम खान ने राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पाया था। लेकिन उसके बाद दुबारा उस पद पर या उसके अन्य समानांतर पद पर मनोनीत नही हो पाये है। तत्तकालीन समय मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के काफी करीबी लोगो की गिनती मे डा. निजाम खान शुमार होते थे। इसी तरह कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष लियाकत अली खान बने थे। जो दुबारा उक्त पद के समानांतर पद पर अपने जीवनकाल मे मनोनीत नही हो पाये थे। इसके अलावा राजनीतिक आकाओ के विश्वास पाने पर भाजपा सरकार मे सलावत खां चोलूखा राजस्थान वक्फ बोर्ड व हिदायत खां धोलीया मदरसा बोर्ड के एक एक दफा अध्यक्ष बन पाये। लेकिन उक्त पदो पर या उनके समांतार पदो पर अभी तक दोनो नेता मनोनीत नही हो पाये है। मौजूदा अशोक गहलोत सरकार मे गहलोत के विश्वास के कारण खानू खां 16 महिनो के लिये वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने है जिनके भविष्य का अभी इंतजार होगा।

    उक्त राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा डा. हबीब खां गोरान IPS को गहलोत सरकार के समय पहले राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य व फिर चेयरमैन बनाया गया था। इसी तरह गहलोत सरकार मे ही जस्टिस भंवरु खां को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद राजस्थान राज्य पुलिस जवाबदेह समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। लेकिन दोनो ही उच्च अधिकारियों को उसके बाद अभी तक उक्त पदो के समानांतर अन्य पदो पर दुबारा मनोनीत नही किया गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि कायमखानी नेताओं को अपने आप पर व अपनी कार्यशैली पर मंथन करना चाहिए कि अपने राजनैतिक आकाओ के विश्वास के कारण पूर्व मंत्री यूनूस खां को छोड़कर बाकी नेता एक दफा तो राजनीतिक नियुक्ति या मंत्रीमंडल मे जगह जैसे तैसे पाने मे सफल हो जाते है। लेकिन जल्द ही उनसे उन पर से राजनैतिक आकाओ का विश्वास डगमगाने लगता है या फिर वो स्वयं फाल चूकने वाली कहावत को सिद्ध करने पर उतारू हो जाते है। उक्त सवालो का कायमखानी नेताओं को स्वयं जवाब तलासना चाहिए। जबकि जनता ने आलम अली खा, भवरु खां , रमजान खा व युनूस खां को एक से अधिक दफा विधायक व केप्टेन अय्यूब खा को एक से अधिक दफा सांसद का चुनाव जीताकर विधानसभा व संसद भेजा है।

  • लोकडाऊन मे सरकारी निर्दशो के तहत मुस्लिम समुदाय मे भी शादीयाँ का सीलसीला शुरु।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    लोकडाऊन मे सरकारी दिशा-निर्दशों के तहत अधिकतम पचास लोगो की उपस्थिति मे शादीयाँ होने की शुरुआत राजस्थान के मारवाड़ व शेखावाटी जनपद मे होने के बाद लगता है कि मुस्लिम समुदाय मे ईद के चांद माह मे शादीयाँ खूब होने की रिवायत के तहत इस माह मे आगे भी सादगी व सीमित तादाद वाली इस तरह की शादीयों का सीलसीला जारी रह सकता है।

    लोकडाऊन के तहत पहले पचास लोगो की सीमा की बाध्यता के साथ स्थानीय उपखण्ड अधिकारी की इजाजत के बाद शादी की जा सकती है। लेकिन रमजान माह खत्म होते ही ईद के त्योहार के बाद सरकार का नया आदेश आया कि अब शादीया करने मे उपखण्ड अधिकारी की इजाजत की आवश्यकता नही है। केवल उपखण्ड अधिकारी को पूर्व मे सुचित करना अनिवार्य बताया गया है।

    उदाहरण के तोर पर मारवाड़ के लाडनू कस्बे मे सम्पन्न शादी मे डीडवाना के खात्यासनी गावं से बारात आई। इसी तरह शेखावाटी के बेसवा मे गारीण्डा गावं से आई बारत की तरह कि किरडोली मे सम्पन्न शादी मे सरकारी दिशा निर्देशो का पूरी तरह पालन किया गया है। माहे ईद पर ईद के बाद होने वाली उक्त तरह की शादीया कायमखानी बिरादरी मे अधिक होना पाया गया है। जिसके पिछे कायमखानी यूथ ब्रिगेड द्वारा पीछले कुछ सालो से लगातार जारी मेहनत व कोशिशों का प्रभाव अधिक देखा जाता है।

    कुल मिलाकर यह है कि खर्चीली व फिजुल खर्च वाली शादियों के खिलाफ बूलंद होती आवाज को कोविड-19 के चलते जारी लोकडाऊन मे जारी सरकारी दिशा-निर्देशो से बडी मजबूती मिली है। अब काफी लोग पचास लोगो की सीमित संख्या की मोजुदगी मे शादी करने लगे है। जो आगे भी जारी रहने की सम्भावना जताई जा रही है। ऐसे चलन को प्रमोट करना होगा।

  • लोकडाऊन काल मे संकट की जद मे आये लोगो कि निजी तौर पर मदद करने वाले मादरे वतन के बेटो को हमेशा याद रखा जायेगा।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।लोकडाऊन व कोराना काल मे जहां सरकारी उपेक्षा के चलते भारत भर मे सड़क व टेढे मेढे कच्चे-पक्के रास्तो से मजदूर नंगे पावं व साईकिल या फिर किसी अन्य उपलब्ध साधनो से भूखे प्यासे अपने घरो की तरफ लोटते नजर आये वही अनेक संस्थाओं व लोगो ने सामुहिक व निजी तौर पर इनकी मदद करने के लिये अपनी हैसियत से अधिक बढकर मदद कार्य करके संकट के काल मे इंसानियत को जीन्दा रखते हुये वो पूण्य का काम किया है जिससे लोगो को सबक लेना चाहिए। इनमे अदाकार सोनू सूद, पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव , हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन आवैसी व राजस्थान के पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया के नाम प्रमुख रुप से लिये जा रहे है।

    तेलंगाना सरकार की समर्थक इत्तेहादुल मुस्लेमीन के नेता व सांसद असदुद्दीन आवेसी का वेसे तो उनके क्षेत्र मे विशाल एम्पायर खड़ा हुवा है लेकिन उन सबको को अलग छोड़ देते है तो लोकडाऊन मे फंसे मजदूर व जरुरतमंदों को बेतहासा कच्चा-पक्का राशन की निजी तोर पर उपलब्धता करवाने के अतिरिक्त उनके घरो तक उनको पहुंचाने मे जो मदद कार्य को अंजाम दिया है। उसको सदियों तक वहां की अवाम याद रखेगी।

    इसके अतिरिक्त फिल्म अदाकार सोनू सूद ने महाराष्ट्र मे प्रवासी मजदूरों को उनके घर जाने के लिये बसो व उनके लिये भोजन की सुविधा जिस तरह से की है उससे लगता है कि उन्होंने भारतीय होने के कारण संकट मे फंसे भारतीय भाई-बहनो की जीस शालीनता व सुव्यवस्थित तरीके सै मदद को अंजाम देकर भारतीय परम्परा को कायम रखा है।

    इसी तरह बिहार के पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार व दिल्ली मे दिन-रात बिहार व झारखंड के परेशानहाल मजदूरों व जरुरतमंदों के मध्य रहकर उनके लिये भोजन का इंतेजाम करने व अपने घरो की तरफ लोटने वाले मजदूरों को हजारों बसो से निजी तोर पर भिजवाने के साथ साथ उनकी नकद मदद करने से लगा कि आज भी भारत मे ऐसे लोग जींदा है जो अपना सबकुछ लूटाकर भी अवाम के दुख को दूर करने व संकट से उनको बचाकर फिर से उनके जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश को ही अपने जीवन का सर्वोत्तम कार्य मानते व उस पर अमल करते है। पूर्व सांसद यादव ने खिदम ऐ खल्क को इसी तरह आगे भी जारी रखने की बात दोहराई है। जिसके लिये वो अपनी प्रोपर्टी भी बेचने का मानस बना चुके है।

    सांसद आवेसी, अदाकार सोनू सूद व पूर्व सांसद पप्पू यादव की तरह की राजस्थान मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता सुभाष महरिया ने भी लोकडाऊन की शुरूआत से लेकर लगातार हजारों जरुरतमंद लोगो व मजदूरों को बीना किसी प्रचार से प्रचूर मात्रा मे खाद्य सामग्री के किट उन तक पहुंचाने के अलावा अन्य प्रकार की जो मदद की एवं जारी रख रखी है उससे लगता है कि जिस तरह कड़ी धूप व बरसती बरसात एवं हाढ कम्पकम्पा देने वाली सर्दी के बावजूद किसान अन्न व अन्य खाद्य सामग्री धरती के सीने को चीर कर पैदा करके इंसान व पशुओं के अलावा पक्षियों का पेट भरकर खुशी महसूस करता है। उसी तरह सुभाष महरिया ने संकट काल मे अपनी तरफ से निजी तोर पर मदद का सीलसीला बना रखा है उससे साफ नजर आता है कि वो असल मे किसान पुत्र है जो बीना किसी राजनीतिक व सामाजिक भेदभाव के मानव व पशु-पक्षियों की सेवा को अंजाम देकर मानव धर्म को ओर अधिक मजबूती देने का साहस जूटाया है।

    आज के कोराना नामक महामारी व उससे उपजे हालात मे खिदमत ऐ खल्क मे कार्यरत उक्त चारो वीर मानवो के अतिरिक्त भी अनेक लोग भारत के अलग अलग हिस्सों मे खिदमात अंजाम दे रहे है। पर सबके साथ वो किसान भी धन्य है जिन्होंने संकट काल मे अपने खेतो मे खड़ी या फिर पैदा हुई पूरी की पूरी फसल-उपज को अपने बच्चों के पेट के लिये भी ना रखकर पूरी तरह दान करदी। उन किसानों के जज्बे को कभी भूलाया नही जायेगा। बल्कि उनकी मिशाल सालो साल दी जाती रहेगी।

  • राजगढ़ थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई के आत्महत्या करने को लेकर राजस्थान की राजनीति मे आया भूचाल

    अशफाक कायमखानी।
    चूरू (राजस्थान)।राजस्थान के पुलिस विभाग के कर्मठ, दबंग व ईमानदारी के साथ इंसाफाना कार्रवाई करने के लिये विख्यात चूरू जिले के राजगढ़ थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई का शव शनिवार को उनके सरकारी क्वार्टर में फंदे से झूलता मिलने की जानकारी सवेरे.मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप व जनता मे शोक की लहर छाने के बाद थाने से सामने भारी भीड़ जमा होने व अनेक नेताओं के इस घटना को लेकर सक्रिय होने से राजस्थान की राजनीति मे एक तरह से अचानक भूचाल सा आ गया है। दूसरी तरफ थाना प्रभारी विष्णु विश्नोई के आत्महत्या की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक एसपी तेजस्वनी व आईजी रेंज जोश मोहन भी मौके पर पहुंच कर मामले की जांच-पड़ताल में जुटे हैं। मौके से सुसाइड नोट मिलने की पुष्टि आईजी रेंज ने कर दी है।

    जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट मे क्या लिखा है, इसके बारे मे पुलिस अधिकारी अभी तक कुछ खास नही बता रहे है लेकिन आईजी ने यह जरूर कहा है कि किसी राजनीतिक दवाब का नोट मे कोई जीक्र नही है। जबकि सीआई विष्णु विश्नोई के एक दोस्त वकील गोर्धन सिंह ने उनसे दो रोज पहले हुई वाटसेप चेट को सोशल मीडिया पर जारी किया है। जिसमे राजनीतिक दवाब व फंसाने का जीक्र जरुर है। वकील गोरधन ने जांच से कुछ पुलिस अधिकारियों को दूर रखने व सीबीआई जांच की मांग रखी है। विश्नोई पिछले कुछ समय से तनाव में चल रहे थे. शुक्रवार देर रात तक वे हत्या के एक मामले की जांच कर रहे थे. पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने इस मामले को लेकर आईजी और एसपी से रिपोर्ट तलब की हैः एसपी ने एफएसएल की टीम को मौके पर बुलाकर शव को नीचे उतारवाया है।

    विष्णु विश्नोई के आत्महत्या करने की खबर आग की तरह पहले राजगढ़ फिर राज्य भर मे फैलने के बाद राजगढ़ के पूर्व विधायक व बसपा नेता मनोज न्यांगली व व्यापार मण्डल के सदस्यों सहित भारी भीड़ थाने के सामने जमा होकर धरना शुरु करके घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग करने लगे है। बाद मे मोके पर चूरू के पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा भी पहुंच कर उच्च स्तरीय जांच की मांग मे सूर मे सूर मिलाया। इनके अतिरिक्त नोखा विधायक विश्नोई, चूरु सांसद राहुल कस्वा, नागोर सांसद हनुमान बेनीवाल भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुये आत्महत्या पर सवाल उठाते हुये न्यायिक जांच की मांग करते हुये कहा कि पुलिस का इकबाल कायम रहने के लिये जांच मे दूध का दूध व पानी का पानी होना जरुरी है। भादरा के माकपा विधायक बलराम पुनिया ने भी जांच की मांग करते हुये इंसाफ की लड़ाई मे मृतक सीआई के परिवार के साथ खड़े होने की बात कही है।

    भाजपा नेता व चूरु विधायक राजेन्द्र राठौड़ भी घटना के बाद सक्रिय होकर सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिये सरकार को कठघरे मे खड़ा करते हुये उच्च स्तरीय जांच की मांग कर डाली है। इसके अतिरिक्त सवालो मे घिरी राजगढ़ की कांग्रेस विधायक क्रष्णा पुनिया ने भी राजस्थान के मुख्यमंत्री जिनके पास ग्रह विभाग भी है से जांच की मांग की है।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिनके पास ग्रह विभाग भी है। उन्हे घटना पर दुख व्यक्त करते हुये विश्नोई के परिवार के साथ खड़ा होने को कहा है। जबकि सीआई विष्णु विश्नोई के आत्महत्या करने की घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार हमला बोला है। वही भारी भीड़ थाने के सामनै मोजूद होने से तनाव के हालात बने हुये है।

    राजगढ़ दो प्रदेशो के सीमा पर स्थित क्षेत्र है। राजगढ़ थाने को अपराध व मादक पदार्थ एवं शराब तस्करी के लिहाज से काफी सेंसेटिव थाना माना जाता है। सीआई विष्णु विश्नोई ने अपराध पर लगाम लगाने की भरपूर कोशिश की थी। एवं जनता मे भयमुक्त माहोल कायम किया था। दबंग पुलिस अधिकारी के तोर पर विष्णु विश्नोई की पहचान बन चुकी थी।

    मेडिकल टीम से पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाएगा. शाम तक आईजी और एसपी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे. राजगढ़ थाना परिसर में माहौल गमगीन है और वहां सन्नाटा पसरा हुआ है. कोई कुछ कहने की स्थिति में नहीं है. पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की जांच की जाएगी. उसके बाद आगे की जांच की जाएगी. आत्महत्या के क्या कारण रहे इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है. घटना से जिले के पुलिस अधिकारी भी सकते हैं. विश्नोई को किस बात का तनाव था इसका भी अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. कुछ समय पहले जयपुर जिले में एक थाना अधिकारी ने भी खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

    कुल मिलाकर यह है कोविड19 व लोकडाऊन के कारण प्रदेश की राजनीति मे छाई खामोशी के मध्य राजगढ़ के थाना अधिकारी विष्णु विश्नोई के अचानक आत्महत्या करने को लेकर अनेक तरह के सवाल उठने के साथ साथ प्रदेश की कानून व्यवस्था के साथ उक्त घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर अनेक विपक्षी नेताओं के सरकार पर हमलावर होने से प्रदेश की राजनीति मे एकदम से गरमाहट ला दी है। राजगढ के दारिया मुठभेड़ , विरेन्द्र न्यांगली हत्याकांड सहित राजगढ़ मे अनेक घटित घटनाओं को लेकर यह क्षेत्र हमेशा से चर्चित रहा है। राजगढ़ थाना प्रभारी विष्णु विश्नोई के आत्महत्या करने की घटना के बाद राजस्थान की राजनीति मे गरमाहट आना निश्चित है।

  • लोकडाऊन समाप्त होने के साथ ही राजस्थान कांग्रेस मे आ सकता है तुफान

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    ऊपरी तोर पर राजस्थान मे सत्तारुढ पार्टी कांग्रेस मे कोराना-19 की जंग के मध्य चलते सत्ता व संगठन स्तर पर सबकुछ ठीक नजर आ रहा है। लेकिन अंदर ही अंदर बहुत कुछ पकने के समाचार आ रहे है। विधायक दल मे मुख्यमंत्री विरोधी सदस्य कोराना-19 की लड़ाई मे केवल मुख्यमंत्री स्तर पर सभी तरह के फैसले लेने व अब तक किसी तरह की प्रमुख राजनीतिक व संवेधानिक नियुक्तियों तक का ना होने के अलावा कुछ अन्य विषयों को लेकर एक खेमा लोकडाऊन समाप्ति का इंतजार कर रहा है। ज्योही लोकडाऊन खतम होगा त्योही कुछ लोग दिल्ली हाईकमान के सामने अपनी पीड़ा ब्यान कर अपनी मांग रखकर दवाब बनाना शुरू कर सकते है।
    हालांकि मंत्री मुरारीलाल मीणा द्वारा मुख्यमंत्री के यहां से सूची फायनल होने के पहले ही अपने स्तर पर उपभोक्ता न्यायालय मे अनेक नियुक्तियों के करने का मामला चर्चा मे चल रहा था। वही लोकडाऊन के अंदर ही मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के विभाग मे चार समितियों के गठन का मामला भी सामने आ चुका है। वही खबर यह भी आ रही है कि उधर मुख्यमंत्री स्तर पर अनेक संवेधानिक व राजनीतिक नियुक्तियों पर मंथन कर लिया गया है। अनुकूल समय आते ही एक एक करके उक्त नियुक्तियों की घोषणाओं का सीलसीला शुरू होगा।

    राजनीतिक सुत्र बताते है कि कुछ लोग लम्बे समय से चले आ रहे सचिन पायलट को एक पद एक व्यक्ति के फारमूले के तहत प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर किसी चहते नेता को इस कुर्सी पर बैठाना चाहते है। जिसमे रघू शर्मा का नाम भी बतोर ब्राह्मण के तौर पर चर्चा मे खासा बताते है। वही कुछ नेता इसके उलट मुख्यमंत्री की कार्यशैली को मुद्दा बनाकर दिल्ली हाईकमान को अपनी पीड़ा बया कर दवाब बनाने की चाल चल सकते है। जिस मुहीम मे तीन दर्जन विधायक शामिल हो सकते है।

    कोविड-19 को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के सभी विधायकों व सांसदों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये फीडबैक लिया है। वही उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट कांग्रेस जिलाध्यक्षों व लोकसभा मे कांग्रेस के रहे सभी उम्मीदवारों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये फीडबैक ले चुके है। मंत्रीमंडल मे आधे दर्जन से अधिक मंत्री, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के कट्टर समर्थक बताये जाते है। जो समय समय पर अपनी बात उचित माध्यम से रखते भी रहे है। अस्पतालो मे शिशुओं के मरने के उठे बवाल को लेकर मुख्यमंत्री के नजदीकी हेल्थ मिनिस्टर रघू शर्मा व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मे खरास होने की झलक पहले देख चुके है। राज्यसभा के दो उम्मीदवारों को चयन को लेकर एक तो हाईकमान की पसंद थी पर दुसरे उम्मीदवार के चयन मे मुख्यमंत्री की एक तरफा चलने से कुछ लोग अंदर ही अंदर अलग बाते करते पाये गये। वही राजस्थान के मामलो को लेकर सचिन पायलट की पत्नी सारा पायलट की ट्विटर पर बढती सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक हलको मे चर्चा काफी है।

    राजस्थान विधानसभा मे कांग्रेस के 101 विधायकों के अलावा बाराह निर्दलीय विधायकों के अलावा बसपा से कांग्रेस मे शामिल हुये छ विधायकों का समर्थन है। सदन मे दो माकपा व दो बीटीपी के विधायक है। भाजपा के पास 72 विधायक खूद के व तीन आरएलपी व एक निर्दलीय विधायक का समर्थन है। राज्यसभा चुनाव मे भाजपा ने दो उम्मीदवार चुनाव मे उतारकर निर्विरोध चुनाव होने की बजाय मतदान होकर निर्वाचित होने मे बदल दिया है। कांग्रेस के एक उम्मीदवार को लेकर कुछ विधायकों व नेताओं मे नाराजगी बताते है लेकिन क्रोस वोटिंग होने की कोई गुंजाइश नही लगती है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस सरकार मे सरकार के कामकाज व राजनीतिक व सवैधानिक नियुक्तियों मे हो रही देरी को लेकर ऊपरी तौर पर ठीक ठीक चलता नजर आ रहा होगा। लेकिन अंदर ही अंदर पक रही खिचड़ी को देखते हुये सरकार की सेहत के लिये ठीक नही कहा जा सकता है। सूत्र बताते है कि चाय के प्याले मे कभी भी तुफान उठ सकता है। वहीं भाजपा नेताओं की भी उक्त बनते-बिगड़ते रिस्तो पर पूरी नजर बताते है।

  • राजस्थान:कोराना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिये क्वारंटाईम व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहेगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में जो कामयाबी हमें अभी तक मिली है उसे बरकरार रखने के लिए क्वारंटाइन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। अभी तक शहरों में कोरोना के मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब यह संक्रमण गांवों में नहीं फैले, इसके लिए क्वारंटाइन व्यवस्था का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। निर्देश दिए कि बाहर से आने वाले प्रवासियों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो और साथ ही क्वारंटाइन में रखे गये लोगों की मॉनिटरिंग के पुख्ता इंतजाम हों।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिला कलक्टर, जिला एवं उपखंड स्तरीय अधिकारियों से क्वारंटाइन व्यवस्थाओं पर मुख्यमंत्री द्वारा चर्चा करते हुये जिले से लेकर पंचायत स्तर तक मौजूद सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलकर क्वारंटाइन व्यवस्था को ग्राम स्तर तक सुचारू बनाने को कहा। इस काम में सांसदों, विधायकों के साथ-साथ सभी शहरी एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों की बड़ी भूमिका है। ट्रेन से आने वाले लोगों की रेलवे स्टेशन पर ही स्क्रीनिंग करवाकर बसों से उन्हें गन्तव्य स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। संभव हो तो रेलवे स्टेशन पर उन्हें चाय-नाश्ता उपलब्ध कराएं और बसों में खाने के पैकेट व पानी रखवाया जाए, ताकि उन्हें आगे के सफर मे आसानी हों। जालोर, सिरोही एवं पाली जैसे जिलों को क्वारंटाइन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि वहां बाहर से आने वाले प्रवासियों की संख्या हजारों में है। डूंगरपुर एवं भरतपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को भी प्रवासियों के लिए समुचित इंतजाम रखने होंगे।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टेस्टिंग की जरूरतों को देखते हुए जिला स्तर पर जांच सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाये। जालौर, पाली, सिरोही, बांसवाड़ा, बाड़मेर सहित वे सभी जिले जहां प्रवासी अधिक आ रहे हैं, जल्द से जल्द जांच सुविधाएं विकसित की जाएं।

    बाहर से आने वाले प्रवासियों के क्वारंटाइन के लिए स्थानीय विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेंकर उनसे संपर्क स्थापित करें ताकि बेहतर तालमेल के साथ ग्राम स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें। क्वारंटाइन के लिए जगह चिन्हित करने और ग्राम स्तर पर बनाये गये संस्थागत क्वारंटाइन सेंटर्स पर भोजन-पानी की व्यवस्था में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए। गांव वालों को भी विश्वास में लेकर होम क्वारंटाइन रखे गए एवं बाहर से आने वाले प्रवासियों की मॉनिटरिंग में उनका सहयोग लिया जाए। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट और नेहरू युवा केन्द्र से जुड़े युवाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है।
    आपदा के समय जिस गंभीरता से काम किया जाता है वैसा हमारे प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भामाशाहों सभी ने मिलकर किया है। कोरोना का सामना करने में राजस्थान ने प्रो-एक्टिव होकर काम किया है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए यहां अपनाये गये उपायों की देश-विदेश में जमकर प्रशंसा हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत करते हुए हमें आगे भी इसी जज्बे के साथ लड़ाई जारी रखनी होगी। हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक संभव हो बाहर से आने वालों को होम क्वारंटाइन रखा जाए, जरूरी हो तभी उन्हें संस्थागत क्वारंटाइन किया जाए। क्वारंटाइन में रखे गए लोगों में किसी तरह के लक्षण दिखाई दें तो उनकी जांच कर उन्हें कोविड सेंटर में भेजा जाए।
    प्रवासी श्रमिक सड़क पर पैदल दिखाई दें तो उन्हें बसों के माध्यम से आगे भेजने की व्यवस्था की जाए अथवा उन्हें केंप में पहुंचाकर उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जाए। राज्य सरकार ने उनके लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था की है।