Category: राजस्थान

  • भरतपुर रेंज के डीआईजी (कार्यवाहक आईजी) रहे लक्ष्मन गौड़ को लेकर ऐसीबी जांच मे बहुत कुछ निकल कर आ सकता है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान व उत्तरप्रदेश की सीमावर्ती भरतपुर रेंज क्षेत्र मे बजरी-दारु सहित अनेक तरह के माफियो से मंधली बंदी लेने की आवाज अक्सर उठती रही है। इसी तरह के भ्रष्टाचार के उठते बादलो के मध्य राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को डीआईजी (कार्यवाहक आईजी) लक्ष्मन गौड़ के नाम से भरतपुर के उधोगनगर थानेदार चंद्रप्रकाश से पांच लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथो भाजपा नेता प्रमोद शर्मा को गिरफ्तार की मिली सफलता को बडी उपलब्धि माना जा रहा है।

    दलाल प्रमोद शर्मा के ऐसीबी द्वारा पकड़े जाने के बाद भरतपुर डीआईजी लक्ष्मन गौड़ को सरकार ने ऐपीओ कर दिया है। एवं गोड़ भरतपुर से रिलीव भी हो चुके है। दलाल शर्मा के पकड़े जाने के बाद ऐसीबी टीम पृथ्वीराज मीणा के नेतृत्व मे जांच करने जयपुर से भरतपुर पहुंच कर जाचं शुरु करने से रेंज क्षेत्र मे हड़कंप मचा हुवा है। राजस्थान मे इमानदाराना सख्त कार्यवाही करने वाले व भ्रष्टाचार के सख्त विरोधी ऐसीबी के एडीसनल डीजी एम एन दिनेश का उक्त प्रकरण मे आज रेंज के धोलपुर जिले मे पहुंचने के बाद लगने लगा है कि ऐसीबी की जांच का दायरा विस्तृत हो सकता है। उक्त प्रकरण मे ऐसीबी जांच मे बहुत कुछ निकल कर आ सकने की उम्मीद लगाई जा रही है।

    हालांकि उधोगनगर थानेदार चंद्रप्रकाश को दलाल प्रमोद शर्मा द्वारा डीआईजी गौड़ के निवास से फोन करके धमकाने व पैसो की मांग करके बदले मे डीआईजी गोड़ का संरक्षण दिलवाने की कहने के बाद थानेदार द्वारा उक्त मामले की ऐसीबी मे शिकायत करने पर ऐसीबी ने दलाल को थानेदार से पांच लाख की रिश्वत लेते पकड़ा था। गौड़ के लिये रेंज के पुलिस अधिकारियों से पैसा जमा करने के लिये प्रमोद शर्मा के साथ अन्य लोग जो जुड़े हुये थे। जिनका भी जांच मे पता चलेगा। दलालो द्वारा गौड़ के लिये पैसै बटोरने का गोरखधंधा भरतपुर के अतिरिक्त रेंज के अन्य जिलो मे भी फैला होने की चर्चा है। वही यह पुलिस अधिकारियों के अलावा बजरी-दारु व अन्य माफियाओं तक भी बताते है।

    भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीसनल डीजी एम एन दिनेश की देखरेख मे भरतपुर डीआईजी गौड़ के नाम पर दलाल द्वारा पैसा वसूलने को लेकर की गई ट्रेप की कार्यवाही के बाद चल रही ऐसीबी जांच के विस्तृत होते दिखने से लगने लगा है कि भ्रष्टाचार को लेकर की जा रही उक्त जांच मे बहुत कुछ निकल कर आ सकता है। जिसमे डीआईजी गौड़ के अलावा अनेक अधिकारी व राजनेताओं की भूमिका पर अनेक सवाल खड़े हो सकते है।

    डीआईजी रिश्वत प्रकरण को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत काफी गम्भीर नजर आ रहे है। वही कांग्रेस विधायक गिरिराज मलिंगा ने डीआईजी गौड़ को गिरफ्तार करने की मांग की है। विधायक मलिंगा के अलावा दूसरे विधायकों ने भी उक्त प्रकरण को लेकर भ्रष्टाचार के मामले पर पत्र लिखा है। राजस्थान के ऐसीबी मे भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी एम एन दिनेश की तैनाती के बाद ब्यूरो ने काफी भ्रष्टाचारियों को रंगे हाथो पकड़ा है। अनेक भ्रस्टाचार के रेकेट को तोड़ा है। लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार रात-दिन बढते जा रहा है। जिन अधिकारियों व कार्मिको की तनख्वाह से आसानी से उनका गुजारा चल सकता है। लेकिन उनके कारण उनकी व उनके परिवारजनो की तेजी से बढती जायदाद व उनके रहन सहन के स्तर को देखकर तो लगता है कि यहां टाटा-बिड़ला की तो क्या आज के रिलायंस व अडानी ग्रूप से सम्बंध है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीछले दिनों कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। जानकारी अनुसार गहलोत सरकार बनने के बाद प्रदेश मे भ्रस्टाचार के कुल 552 से अधिक मामले दर्ज हो चुके है। जिनमे 382 के करीब ट्रैप के मामले, व 30 के करीब आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले है। वहीं 160 लोगो को भ्रष्टाचार के मामले मे कोर्ट से सजा मिल चुकी है। उम्मीद करनी चाहिये की अगले कुछ दिनो मे ऐसीबी के हाथो ओर अधिक भ्रष्टाचारी पकड़ मे आयेंगे।

    राजस्थान मे बडे स्तर पर चर्चित हो चुके डीआईजी गौड़ भ्रष्टाचार प्रकरण की जांच कर्तव्यनिष्ठ व इमानदाराना कार्यवाही करने के लिये विख्यात भ्रष्टाचार के सख्त विरोधी एडीसनल डीजी एम एन दिनेश की देखरेख मे जांच होने से लगता है भ्रष्टाचारी अब बच नही पायेंगे।ज्यो ज्यो जांच आगे बढेगी त्यो त्यो भ्रष्टाचार की परते खुलने लगेगी। जांच मे डीआईजी गोड़ व दलाल के अलावा भ्रष्टाचार की आग अन्य अधिकारियों व राजनेताओं को भी लपेट मे ले सकती है।

  • बेटे की शादी में 50 से ज्यादा लोगों किया था आमंत्रित 15 लोग हुए संक्रमित एक की मौत

    बेटे के शादी समारोह में 13 जून को 50 से ज्यादा लोगों को आमंत्रित किया था।

    समारोह में शामिल होने के बाद 15 लोग कोरोना संक्रमण के शिकार पाए गए।

    जबकि एक शख्स की मौत इसी संक्रमण की वजह से हो गई।

    अशफाक कायमखानी, भीलवाड़ा।

    राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कलेक्टर ने वहां के एक शख्स पर 6 लाख 26 हजार 6 सौ रुपए का जुर्माना लगाया है. दरअसल, इस शख्स ने अपने बेटे के शादी समारोह में 13 जून को 50 से ज्यादा लोगों को आमंत्रित किया था. समारोह में शामिल होने के बाद 15 लोग कोरोना संक्रमण के शिकार पाए गए, जबकि एक शख्स की मौत इसी संक्रमण की वजह से हो गई.

    गौरतलब है कि पूरे राजस्थान में प्रशासन ने बड़ी मुस्तैदी के साथ लॉकडाउन का पालन करवाया है. कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन के तहत जारी निर्देशों के प्रति प्रशासन खूब सतर्क रहा है. राजस्थान पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के रिकॉर्ड चालान काटे हैं. राजस्थान में एपिडेमिक अध्यादेश के तहत अब तक 1 लाख 36 हजार से अधिक व्यक्तियों का चालान कर उनसे 2 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूल किया जा चुका है.

    मास्क नहीं लगाने पर 66 हजार से अधिक लोगों पर लगाया जुर्माना
    पुलिस महानिदेशक (अपराध) बीएल सोनी ने बताया कि सार्वजनिक स्थलों पर मास्क नहीं लगाने वाले 66 हजार से अधिक लोगों पर जुर्माना लगाया गया है. बिना मास्क पहने लोगों को सामान बेचने वाले 7 हजार से अधिक और निर्धारित सुरक्षित भौतिक दूरी नहीं रखने वाले 63 हजार व्यक्तियों का चालान काटा गया है. इनके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर थूकने, शराब पीने और गुटखा-तंबाकू खाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाइयां की गयी है. वहीं बड़ी संख्या में वाहनों को जब्त किया जाकर उनसे भी करोड़ों का जुर्माना वसूला गया. उसके बाद कार्रवाइयां अभी भी जारी है.

  • राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मंत्रीमंडल विस्तार व बदलाव मे मुस्लिम प्रतिनिधित्व मे भी बदलाव आने की सम्भावना।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर
    हालांकि सभी राजनीतिक दल व उनके नेताओं की एक बात पर आपसी सहमति व रजामंदी हमेशा नजर आती है कि अवल तो मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व उभरने दिया ही नही जाये। अगर दिखावे के तौर पर मजबूरन कभी कभार उभारना भी पड़े तो छानबीन करके कमजोर से कमजोर नेतृत्व को उभारा जाये। इसी तरह कभी किसी मुस्लिम को मंत्री बनाने की जान पर आ पड़े तो उन्हें अल्पसंख्यक मामलात या फिर भाषाई अल्पसंख्यक विभाग तक महदूद रखा जाये। इसी सिद्धांत को अपनाते हुये राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपने मंत्रीमंडल मे मुस्लिम प्रतिनिधित्व के तौर पर शालै मोहम्मद को मंत्री बनाकर उन्हें अलपसंख्यक मामलात विभाग तक ही महदूद रखा है।

    विधायकों की तादाद के हिसाब से पंद्रह प्रतिशत मंत्री बनाने की इजाजत अनुसार राजस्थान मे तीस मंत्री बनाये जा सकने के बावजूद मुख्यमंत्री गहलोत ने कुल पच्चीस ही मंत्री बना रखे है। गाजर लटकाने की तरह पांच मंत्री की जगह मुख्यमंत्री ने खाली रख रखी है।

    राजस्थान मंत्रीमंडल मे पोखरण विधायक व सिंधी धार्मिक गुरु गाजी फकीर के बेटे शाले मोहम्मद को गहलोत ने अपने मंत्रीमंडल मे जगह देकर प्रभावहीन अल्पसंख्यक मामलात विभाग की जिम्मेदारी दे रखी है। मंत्री शाले मोहम्मद प्रदेश भर मे सक्रिय ना होकर मात्र जैसलमेर जिले तक अब तक के कार्रकाल मे सीमित रहकर समुदाय के हिसाब से उदासीन मंत्री की भूमिका अदा की है।

    राजस्थान मे कांग्रेस के निशान पर जीते आठ व बसपा से एक विधायक के कांग्रेस मे आने के बाद कुल नो मुस्लिम विधायक होने के बावजूद एक विधायक को मंत्री बना रखा है। लेकिन मंत्रीमंडल बदलाव व विस्तार की जल्द सम्भावना को देखते हुये सम्भावना जताई जा रही है कि मंत्री शाले मोहम्मद को बदला जायेगा ओर अन्य दो मुस्लिम विधायकों को मंत्री बनाया जायेगा। जाहीदा खान, आमीन खान व शालै मोहम्मद के अलावा बाकी छ मुस्लिम विधायक सफीया, वाजिब अली, दानिश अबरार, रफीक, आमीन कागजी व हाकम अली पहली दफा विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे है। पहली दफा बने विधायकों को मंत्री बनाने या नही बनाने का फैसला उच्च स्तर पर होता है।

    अगर पहली दफा बने विधायकों को मंत्री नही बनाने का तय होता है तो विकल्प के तौर पर एक से अधिक दफा बने विधायकों मे कामा विधायक जाहीदा खान, शिव विधायक आमीन खा व पोकरण विधायक शाले मोहम्मद का नाम ही शेष रहता है। अगर पहले दफा बने विधायकों मे से मंत्री बनाना तय होता है तो मुख्यमंत्री के नजदीकी नगर विधायक वाजिब अली, सचिन पायलट के नजदीकी सवाईमाधोपुर विधायक दानिश अबरार व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व प्रियंका गांधी के नजदीकी जुबैर खान की पत्नी व लक्ष्मनगढ विधायक सफीया खान मे से विकल्प तलासना होगा। इसके अलावा गठरी की ताकत पर जयपुर विधायक रफीक व आमीन कागजी भी उम्मीद लगाये बैठें है।

    कुल मिलाकर यह है कि सिंधी मुस्लिम विधायक आमीन खा व शाले मोहम्मद के अतिरिक्त मेव विधायक सफीया, वाजिब व जाहीदा मे से मंत्री बनाने का दवाब अधिक रहेगा। इनके अतिरिक्त भी कुछ विधायक मंत्री बनने के लिये दिल्ली-जयपुर चक्कर लगाने लगे है।

  • भाजपा नेता प्रमोद शर्मा को सीनियर पुलिस अधिकारी के नाम पर उगाही करते ऐसीबी के पकड़ने के बाद पुलिस महकमे मे मचा हड़कंप।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर
    राजस्थान मे आम फरीयादियो से कार्यवाही करने व नही करने के नाम पर रिश्वत लेते पुलिस अधिकारियों को राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) अक्सर ट्रैप करते रहने के समाचार छपते रहते है। लेकिन भरतपुर रैंज मे तैनात डीआईजी लक्ष्मन गोड़ के हवाले से पुलिस अधिकारियों को उनके निवास से फोन करके धमका कर पैसा ऐंठने के सीलसीले मे मालवीय नगर भाजपा मण्डल के नेता प्रमोद शर्मा को भरतपुर के उधोगनगर थाने के थानेदार से पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रंगे हाथ गिरफ्तार करने से पुलिस महकमे मे खलबली मच हुई है।

    शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ अक्सर नजर आने वाला प्रभाव शाली भाजपा नेता प्रमोद शर्मा भरतपुर रेंज डीआईजी लक्ष्मण गौड़ के निवास से पुलिस अधिकारियों को फोन करके उनको संरक्षण दिलवाने के नाम पर पैसे उगाही करने का जाल बिछाकर कुछ अन्य लोगो के साथ मिलकर गोरखधंधा चला रखा था। जिसकी शिकायत भरतपुर के उधोग नगर थाना इंचार्ज चंद्रप्रकाश ने ऐसीबी को करने के बाद प्रमोद शर्मा द्वारा पांच लाख की रिश्वत लेते हुये को ऐसीबी के रंगे हाथ गिरफ्तार करने से पुलिस महकमे मे हड़कंप मचा हुवा है। ऐसीबी दल ने जब प्रमोद शर्मा के जयपुर के मालवीय नगर स्थित आवास की तलासी ली तो सभी आधुनिक सुविधाओं युक्त अलीशान मकान को देखकर दंग रह गई।

    चर्चा है कि डीआईजी लक्ष्मण गोड़ से ऐसीबी द्वारा पकड़े गये प्रमोद शर्मा से लम्बे अर्शे से मधुर रिस्ते रहे है। जहां जहा लक्ष्मन गोड़ पोस्टेड रहे वहां वहा प्रमोद शर्मा का आना जाना रहा है। अक्सर शर्मा स्वयं गोड़ के सरकारी आवास पर रुकता रहा बताते है। उक्त मामले मे ऐसीबी ने शर्मा के अतिरिक्त दो अन्य दलालो के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है जो रिश्वत के उक्त गोरखधंधे मे शामिल थे।

    कुल मिलाकर यह है कि आरोपित डीआईजी लक्ष्मण गोड़ को बडी कश्मकश के बाद सरकार ने आखिरकार ऐपीओ कर दिया है। वही ऐसीबी द्वारा की गई उक्त ट्रैप की कार्रवाई की प्रदेश भर मे तारीफ हो रही है। लगता है कि उक्त मामले मे ऐसीबी की जांच मे आगे चलकर बहुत कुछ निकल कर बाहर आयेगा। उम्मीद करनी चाहिये की ऐसीबी अधिकारियों व दलालो के मध्य बन चुके मजबूत गठजोड़ को तोड़कर असलियत सामने लाकर दोषियों को सजा दिलवाने मे कामयाब रहेगी।

  • शेखावाटी के मुस्लिम समुदाय के लोगो ने हिजरत तो की, पर वो आजतक ताजीर नही बन पाये।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।

    राजस्थान के चूरु-सीकर व झुंझुनू जिलो को मिलाकर कहलाने वाले शेखावाटी जनपद के मुस्लिम समुदाय के बडी तादाद मे लोग रोजी रोटी कमाने के लिये भारत के गुजरात-महाराष्ट्र व गोवा के अतिरिक्त भारत के कुछ अन्य हिस्सों के अलावा विदेशो मे हिजरत करके गये जरुर लेकिन उनमे से करीब करीब सभी लोगो ने भवन निर्माण के धंधे को अपनाया या फिर किसी के घर-दफ्तर या कम्पनी मे नौकरी करकै दो पैसा कमाकर अपने बच्चों का पैट भरने की कोशिशे जरुर की है लेकिन उनमे से आजतक कोई ताजीर बनने की या तो कोशिश नही की या की तो उसमे वो सफल नही हो पाये।

    हिजरत व तिजारत मे बरकत मानकर चलने वाले मुस्लिम समुदाय के शेखावाटी जनपद के लोगों ने हिजरत को तो खुब अपनाया लेकिन तिजारत को छुवा तक नही है। मुम्बई के अलावा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों व गुजरात-कर्नाटक-गोवा व उसके लगते प्रदेशो मे शेखावाटी जनपद के बडी तादाद मे लोग रहते है। जो या तो भवन निर्माण के ठेकेदार बने हुयै है या मजदूरी कर रहे है। वही खासतौर पर हिजरत करके अरब मे रोजी रोटी के लिये गये लोग भवन निर्माण के काम से ही जुड़ै हुये है। कुछ लोग घरो मे पारिवारिक चालक या फिर दफ्तर मे भी काम करते है।

    अधीकांश लोगो के भवन निर्माण से जुड़े होने के बावजूद वो उससे सम्बंधित बिल्डिंग मेटेरियल सप्लाई के ताजीर भी अभी तक नही बन पाये है। हां अपवाद स्वरूप खासतौर पल सऊदिया मे कुछ लोगो ने किराना व जनरल स्टोर खोलकर लाईन बदलने की अच्छी शुरुआत जो कि थी। उसके काफी सुखद परिणाम निकल कर आये। पीछलै दिनो आई अंतरराष्ट्रीय मंदी व सऊदिया सरकार द्वारा विभिन्न तरह के करो मे भारी इजाफा करने से काफी किराना व जनरल स्टोर संचालको को बेदखल होना पड़ा। लेकिन उक्त काम से वो वहां छोटै ताजीर ही बने होगे पर उनके उस तरह के जेहन साजी होने का परिणाम यह निकला कि उनके भारत आकर अपने स्तर पर वो सभी छोटी छोटी दुकानो का संचालन करने लगे है।

    शेखावाटी जनपद से अनेक लोगो के हिजरत करके मुम्बई-गोवा व महाराष्ट्र-गुजरात के अन्य हिस्सों मे जाकर भवन निर्माण के काम करने मे दो-तीन पीढियां भी खप चुकी है। उक्त भवन निर्माण मे कभी ठीक कमाया तो कभी नुकसान खाया। यही सबकुछ चलता आ रहा है। इसी तरह फतेहपुर शेखावाटी के कुछ काजी व कुरेशी परिवार आजादी से पहले अरब गये जो पीढी दर पीढी आज भी भवन निर्माण व उसके अंदरूनी डेकोरेशन के काम कर रहे है। पर ताजीर वो भी नही बन पाये है।

    कुल मिलाकर यह है कि शेखावाटी जनपद के मुस्लिम समुदाय ने हिजरत करने को तो अपनाया है। पर उसके साथ साथ तीजारत करके ताजीर बनने की तरफ जरा भी ध्यान नही दिया। अगर हिजरत के सिथ तीजारत पर जरा भी ध्यान दिया जाता तो आज बदली बदली तस्वीरों के साथ पुरी तरह काया पलट हुई नजर आती।

  • राजस्थान मे माकपा राज्य सचिव कामरेड अमरा राम के नेतृत्व को पार्टी के अंदर से मिलने लगी चुनोती।

    पार्टी निर्णय के बावजूद विधायक बलवान ने मतदान मे भाग लिया।
    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    पीछले दो दशक से राजस्थान की माकपा पर मजबूत पकड़ बनाये रखने वाले माकपा राज्य सचिव कामरेड अमरा राम के पीछले दो विधानसभा चुनाव लगातार हारने के कारण अब पार्टी पर उनकी पकड़ ढीली होती जाने के कारण उनके नेतृत्व के पार्टी के अंदर से चुनोती मिलने लगी है।
    सरपंच से विधायक बने कामरेड अमरा राम के लगातार चार चुनाव जीतकर विधायक बनते रहे तब तक पार्टी मे उनकी तूती बोला करती रही। 2008 मे कामरेड अमरा राम के साथ उनके लगती सीट धोद से कामरेड पेमाराम के चुनाव जीतने से विधानसभा मे माकपा के एक से दो विधायक बने। पर अगले ही 2013 के विधानसभा चुनाव मे अमरा राम के साथ कामरेड पेमाराम भी चुनाव हार गये। उसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव मे भी कामरेड अमरा राम व पेमाराम दोने फिर चुनाव हार गये लेकिन इनके हारने के बावजूद माकपा के दो अन्य उम्मीदवार बलराम पुनिया व गिरधारी महिया नामक जीतकर विधायक बन जाने से राजनीतिक माहोल व वामपंथ की राजनीति मे तबदीली आने के संकेत मिलने लगे।

    तेज तर्रार विधायक कामरेड बलराम पुनिया के माकपा विधायक दल का नेता होने के कारण उन्हें विधानसभा व विधानसभा के बाहर बोलने के अधिक अवसर मिलने से बलराम पुनिया की भी जनता मे एक अलग से पहचान बनने लगी। जिससे पूनिया की राजस्थान भर मे जूझारू नेता की छवि उभरने लगी। दूसरी तरफ नजर दोड़ाये तो पाते है कि कामरेड अमरा राम जहां से विधानसभा चुनाव लड़ते है वहा उनका सीधा टकराव कांग्रेस सै होता है। वही विधायक बलराम जहां से चुनाव लड़ते है वहा उनका मुकाबला भाजपा से होता है।

    कामरेड अमरा राम को झटका——-

    19-जून को राज्य सभा चुनाव मे माकपा राज्य सचिव अमरा राम माकपा के दोनो विधायकों को राज्य पार्टी ईकाई के निर्णय के अनुसार मतदान से दूर रखना चाहते है। माकपा के विधायक गिरधारी महिया ने तो मतदान मे भाग नही लिया पर दूसरे विधायक कामरेड बलराम पूनिया ने मतदान मे भाग लेते हुये कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष मे मतदान किया। पूनिया के मतदान करने के बाद उनके खिलाफ 22-जून को माकपा सचिव मण्डल की आयोजित आवश्यक बैठक मे अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुये उनको एक साल के लियै पार्टी से निलम्बित करते हुये कारण बताओ नोटिस जारी करके उनसे सात दिवस मे स्पष्टीकरण देने को कहा है।

    निलम्बित व नोटिस जारी होने के बाद विधायक बलवान पुनिया ने राज्यसभा चुनाव मे मतदान करने के सवाल पर मीडिया से कहा कि भाजपा देश मे सविधान के खिलाफ काम करने लगी है। उन्होंने सविधान बचाने के लिये अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान मे भाग लिया है। उन्होंने पार्टी लाईन व निर्णय का अनुशासित सिपाही की तरह सम्मान करने की कहते हुये कहा कि उन्होंने अंतरात्मा के तहत मतदान किया है। विधायक पूनिया ने नोटिस का जवाब सात दिवस मे देने की कहते हुये पोलित ब्यूरो के सामने अपनी बात रखने को भी कहा है। साथ ही बलवान पूनिया ने यह भी कहा कि वो पार्टी लाईन से बंधे हुये है व पार्टी विचार धारा को मानते है।

    राजस्थान मे मुद्दों की पहचान करके आंदोलन चलाने वाले जूझारु नेता पूर्व विधायक कामरेड अमरा राम ने अपने विधायक काल मे तत्तकालीन 2008-2013 के मध्य वाली अशोक गहलोत सरकार के समय विधानसभा व उसके बाहर काफी जनहित के मुद्दे उठाये थे। लेकिन उक्त गहलोत सरकार के खिलाफ अमरा राम अपने साथी विधायक कामरेड पेमाराम को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे के नेतृत्व मे भाजपा विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मिल कर राज्य सरकार की शिकायत करने के बाद उनकी छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगा था।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री दफ्तर व निवास पर समस्याओं को लेकर अक्सर मुख्यमंत्री व अधिकारियों से मिलते नजर आने वाले माकपा विधायक कामरेड बलराम पूनिया ने राज्य कमेटी के निर्णय के खिलाफ जाकर 19-जून को हुये राज्यसभा चुनाव के मतदान मे भाग लेकर अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की घटना को राजनीतिक तौर पर हल्के मे नही लिया जा सकता है। पूनिया को भी मतदान करने पर पार्टी की तरफ से उक्त कार्यवाही होने का पहले से अंदाजा जरूर रहा होगा। उक्त घटना का प्रभाव 2022 मे होने वाले राजस्थान की चार सीटो के राज्यसभा चुनाव व 2023 के विधानसभा चुनाव मे भी नजर आने की सम्भावना जताई जा रही है।

  • राज्य सभा मे मतदान करने पर माकपा विधायक बलवान एक साल के लिये पार्टी से निलम्बित।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के राज्य सचिव मंडल की आज जयपुर मे आयोजित बैडक मे पार्टी अनुशासन तोड़ने पर विधायक बलवान पूनिया को पार्टी से 1 वर्ष के लिए निलंबित करने का फैसला लिया गया।

    राज्य सचिव कामरेड अमरा राम द्वारा जारी प्रैस बयान मे बताया कि पार्टी राज सचिव मंडल ने हाल ही में संपन्न राज्य सभा चुनाव में पार्टी विधायक बलवान पूनिया द्वारा पार्टी अनुशासन भंग कर कार्य करने की भूमिका पर विचार- विमर्श करने के बाद उन्हें पार्टी निर्णय के विपरीत कार्य करने का दोषी मानते हुए पार्टी सदस्यता से 1 वर्ष के लिए तुरंत प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया।

    इस निर्णय की जानकारी देते हुए पार्टी राज्य सचिव कॉमरेड अमराराम ने बताया कि उन्हें पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस भी दिया गया है जिसका जवाब उन्हें 7 दिनों की अवधि में देना है।

    राजस्थान मे माकपा के दो विधायक है। जिनमे से कामरेड गिरधारी महिया ने 19-जून को हुये राज्य सभा चुनाव मे मतदान मे भाग लिया था। जबकि दूसरे विधायक कामरेड बलवान पुनिया ने मतदान मे भाग लेकर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष मे मतदान किया था। कामरेड बलवान पुनिया के मतदान करने के बाद से माकपा मे हलचल बढ गई थी।

  • राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की एक सप्ताह से जयपुर मे जारी बाड़ेबंदी

    कांग्रेस समर्थक विधायकों के केम्प मे मुस्लिम विधायक अपनी मांग नही रख पाये।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    उन्नीस जून को राजस्थान के तीन राज्यसभा सदस्यो के होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस ने उनके विधायकों व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायको को प्रभोलन देकर पाला बदल करवाने के साजिश करने का भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को अपने निवास पर बैठक के बहाने बूलाकर अचानक उनको एक होटल भेजकर एक तरह से जमा करके कोराना वायरस के खोफ व लोकडाऊन से सहमे हालात मे अचानक राजनीतिक गरमाहट पैदा करदी है। होटल मे विधायकों के लगे केम्प मे कांग्रेस, निर्दलीय व बीटीपी के मोजूद विधायको से मुख्यमंत्री व दिल्ली से आये तमाम नेताओं ने सामुहिक तौर के अलावा एक एक विधायक से व्यक्तिगत मिलकर उनकी डिमांड व सुझावों को सूना जिसमे मुस्लिम विधायकों मे विधायक वाजिब अली को छोड़कर होटल मे मोजूद सभी आठ मुस्लिम विधायक अलपसंख्यकों के मुतालिक जायज डिमांड रखने मे फिसड्डी साबित हुये बताते।

    आदिवासी क्षेत्र से आने वाले बीटीपी के दोनो विधायकों के कांग्रेस उम्मीदवारों को समर्थन देने से पहले मुख्यमंत्री व फिर दिल्ली से आये दिग्गज नेताओं से मिलकर अपनी आदीवासी भाइयों के हित की नो सूत्री मांग को लिखित मे देकर उनपर सहमति बनावाकर कांग्रेस द्वारा कायम किये केम्प मे रहना शुरु किया। इसी तरह निर्दलीय विधायकों ने भी एक साथ व अलग अलग रुप मे मुख्यमंत्री व दिल्ली से आये नेताओं को उन्हें तरजीह देने व मंत्रीमंडल मे तेराह मे से कम से कम दो विधायकों को मंत्री बनाने की बात रखकर एक तरह से सहमति बनवाने की चर्चा है। जिसके बाद निर्दलीय विधायक महादेव सिंह खण्डेला व संयम लोडा को मंत्रीमंडल विस्तार मे जगह मिलने की सम्भावना बढ गई है। अनुसूचित जाति न अनुसूचित जन जाती के अलावा किसान वर्ग के विधायकों ने भी अपने अपने वर्ग हित की डिमांड रखी बताते है।

    सूत्र बताते है कि मुस्लिम समुदाय द्वारा अपने विधायकों से उम्मीद जताई कि राजनीति मे बहुत कम अवसर मिलते है जब मुख्यमंत्री व पार्टी हाईकमान के दिग्गज प्रतिनिधि कुछ मिनटो के लिये नही बल्कि कई दिनो तक उनके मध्य रहकर चला कर उनकी राजनीतिक डिमांड व सुझाव पूछ रहे है। लेकिन मिल रही सूचनाओं अनुसार मुस्लिम विधायकों ने अभी मिले उक्त सुअवसर का किसी भी रुप मे लाभ उठाने की बजाय फिसड्डी साबित हो रहे है। कुछ विधायकों को तो बीना वजह का डर सताये जा रहा बताते है कि अगर जरा सी जबान खोली तो अलग थलक कर दिये जायेगे। कांग्रेस केम्प मे नो मे से मोजूद आठ मुस्लिम विधायको मे से एक दो विधायकों ने सामुहिक तौर पर मिलकर मुख्यमंत्री व शीर्ष नेताओं से डिमांड रखने की कोशिश करने के बावजूद पता नही क्यो सभी विधायक एक साथ बात रखने का सम्भव नही हो पाया।

    राजस्थान मे कांग्रेस को एक तरह से शतप्रतिशत मत देने वाले मुस्लिम समुदाय की अधीकांश समस्याएं मुहं बाये खड़ी है। समुदाय कम से कम जयपुर की होटल मे लगे कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों की बाड़ेबंदी मे मोजूद अपने आठो विधायकों ( आमीन खां, शाले मोहम्मद, हाकम अली, सफीया, जाहिदा, दानिश अबरार, आमीन कागजी, रफीक खान) से उम्मीद कर रहा था कि उक्त मिले अवसर मे उनकी जायज मांगो को तो नेताओं के सामने कम से कम बेधड़क पार्टी द्वारा उपलब्ध करवाये मंच पर रखेगे ही। दिल्ली से आये दिग्गज नेताओं व पर्यवेक्षकों ने उक्त विधायकों से अलग अलग व सामुहिक तौर पर मिलकर एक रिपोर्ट भी तैयार की है। सुत्रोनुसार उस रिपोर्ट मे मुस्लिम विधायकों द्वारा किसी तरह की मांग करने का जीक्र तक नही बताते है। मात्र सरकार की वाहवाही करने के अलावा सरकार के कामकाज से संतुष्टि का हवाला होने की चर्चा बताते है।

    बसपा से कांग्रेस मे आये नगर विधायक वाजिब अली के अपने व्यपारीक काम से आस्ट्रेलिया जाने से उनकी गैरमौजूदगी मे कांग्रेस के आठ मुस्लिम विधायक कांग्रेस केम्प मे मोजूद है। उन्हे कम से कम कुछ आवश्यक जायज मांगे तो मुख्यमंत्री व दिग्गज नेताओं के सामने रखनी चाहिये थी। अभी भी उन्नीस जून दूर है। जमीर जगे तो यह मांगे तो रख ही सकते है।

    1-राजस्थान के अधिकतम तीस सदस्यों की बाध्यता वाले मंत्रीमण्डल मे कम से कम दो केबिनेट व एक राज्य मंत्री मुस्लिम हो। जिनमे मुख्यधारा वाले विभाग का चार्ज हो।
    2- राजनीतिक नियुक्तियों मे मुख्य धारा वाले बोर्ड-निगम व सवैंधानिक पदो मे भी प्रतिनिधित्व मिले।
    3-मदरसा बोर्ड को संवैधानिक दर्जा व मदरसा पेरा टीचर्स का जल्द से जल्द स्थायी करण हो। उनका मानदेय कम से कम थर्ड ग्रेड टीचर की सेलेरी के समान हो।
    4-मदरसा पेरा टीचर व कम्प्यूटर पेरा टीचर की अटकी भर्ती को जल्द शुरु किया जाये।

    5-सरकार द्वारा प्रदेश भर मे खोली जा रही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों मे उर्दू पद भी अनिवार्य रुप से विज्ञ्यापित होकर भरे जाये। साथ ही संसकृत भाषा के साथ साथ उर्दू भाषा के पदो की स्वीकृति भी हमेशा एक ही आदेश से जारी करने का प्रावधान हो।
    6-अल्पसंख्यक बस्तियों मे पानी-बिजली, चिकित्सा व शिक्षा का माकूल इंतजाम के लिये अलग से जनजाति क्षेत्र की तरहयोजना बनाकर बजट स्वीकृत हो।
    7-अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मिलने वाले अल्पसंख्यक संस्था प्रमाण पत्र की जटिलताओं को खत्म कर सरलीकरण करके उनके डवलपमेंट के लिये विशेष योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन आवश्यक रुप से हो।
    8-सरकारी स्तर पर हर तहसील स्तर पर बालक-बालिकाओ का अलग अलग रुप से अल्पसंख्यक छात्रावास निर्माण की स्वकृति व बजट का एलोकेशन होने के साथ साथ उसके लिये सरकारी जमीन का आवंटन सरकारी स्तर पर सुनिश्चित हर हाल मे हो।

    9- वक्फ जायदाद से सरकारी विभागो का अतिक्रमण एक अध्यादेश लाकर उनको खाली करवाया जाये। एवं वक्स बोर्ड को अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिये अलग से थानो का गठन करने की छूट दे।

    10-यूनानी चिकित्सा के साथ सरकारी स्तर पर किये जा रहे दोगला व्यवहार खत्म कर अलग से यूनानी विभाग का गठन करके उक्त चिकित्सा पद्धति को बढावा देने के लिये अलग से योजना बनाई जाये। साथ ही यूनानी नर्स की ट्रेनिंग का इंतजाम भी राजस्थान मे सरकार अपने स्तर पर करे। वही कम से कम हर सम्भाग पर जक एक यूनानी सरकारी कालेज खोली जाये।

    11- राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्यों सहित अन्य सवैधानिक पदो मे शैक्षणिक , सामाजी व आर्थिक तौर पर पीछड़े मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को आवश्यक बनाया जाये।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री व दिल्ली मे मोजूद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से मिलने का समय बार बार मांगने पर भी राजनीतिक कारणो व उनकी व्यस्तता के चलते नही मिलना आम होना देखा गया है। जबकि इसके विपरीत होटल मे लगे कांग्रेस विधायको के केम्प मे मुख्यमंत्री स्वयं उनके मध्य रहकर एक एक से अलग अलग व सामुहिक तौर पर मिल रहे है। वही दिल्ली के नेता उनके मध्य स्वयं चलकर आ रहे है। विधायकों को मिले ऐसे सुअवसर का मुस्लिम विधायकों को भी लाभ उठाना चाहिए। वरना चूग गई खेत तो फिर पछताय क्या होय। ओर निकल गई गणगोर तो —मोड़े आयो वाली कहावत चरितार्थ हो सकती है। विधायकों के मुखर होकर अपनी जायज मांगो को उभार कर उन पर सहमति बनाने का यह अब तक मिले अवसरो मे पहला मुफीद अवसर है।

  • राजस्थान राज्यसभा चुनाव मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जादू चला।

    दो सीट कांग्रेस व एक सीट भाजपा की झोली मे गई।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस-भाजपा के मध्य दो सप्ताह से चली आ रही राजनीतिक उठा-पटक के बाद आखिरकार तीन सदस्यों के चयन को लेकर चार उम्मीदवारों के मध्य मुकाबले मे आज हुये मतदान के बात हुई मतगणना मे दो सीट कांग्रेस व एक सीट भाजपा के खाते मे गई। एवं भाजपा के दूसरे उम्मीदवार ओंकार सिंह लखावत को हार का मजा चखना पड़ा।

    राजस्थान विधानसभा के कुल दोसौ विधायकों मे से मंत्री भंवरलाल मेघवाल के अस्पताल मे भर्ती होने के कारण व माकपा विधायक गिरधारी महिया को छोड़कर बाकी सभी 198 विधायकों ने आज हुये मतदान मे भाग लिया। मतदान के बाद मतो की गिनती होने के पर कांग्रेस के उम्मीदवार केसी वेणुगोपाल को 64 व नीरज ढांगी को 59 मत मिले एवं भाजपा के राजेन्द्र गहलोत को 54 व भाजपा के दूसरे उम्मीदवार लखावत को 21 मत मिले। मतगणना के बाद कांग्रेस के वेणुगोपाल व नीरज ढांगी एवं भाजपा के राजेन्द्र गहलोत को विजयी घोषित किया गया।

    राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस प्रकार से भाजपा ने इन चुनावों को लेकर षड्यंत्र किया था, आज षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया, टाइमली हम लोगों ने विधायकों को रिक्वेस्ट करी, यह कोई अच्छी परंपरा नहीं है बाड़ेबंदी करने की, 10 दिन तक बाड़ेबंदी करना किसे कहते हैं, भाजपा वालो को लोकतंत्र के हत्यारे बताते हुये गहलोत ने कहा कि कभी कर्नाटक को, कभी मध्यप्रदेश को, गुजरात में जो इन्होंने हॉर्स ट्रेडिंग की वो सबके सामने है, 7 विधायक हमारे तोड़ दिए, पर राजस्थान बचा रहा। मैं तमाम विधायकों को, बीटीपी के लोगों को, सीपीएम के लोगो को, इन्डिपेंडेंट साथियों को बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने एकजुटता दिखाई है और वोटिंग पैटर्न वही रहा है जो हम लोगों ने तय किया था। यह बहुत बड़ी सियासत में विजय है और ये जो बीजेपी वाले षड्यंत्र कर रहे थे, उनका पर्दाफाश हो गया है। ये चाहे गोवा में हो, चाहे मणिपुर में हो, इनकी परंपरा रही है, कैसे, बहुमत किसी के साथ हो, तब भी सरकार कैसे बनाएं, ये जो चालें चल रहे हैं ना पूरा मुल्क देख रहा है, आने वाले वक्त में इनको बख्शेगा नहीं मुल्क

    गहलोत ने कहा इस चुनाव का बिल्कुल दूर तक मैसेज तो जा ही रहा है, मध्यप्रदेश में कांग्रेस से त्याग पत्र देने वाले जो 22 लोग गए हैं, उनकी बहुत दुर्गति हो रही है, कोई उनको पूछ नहीं रहा है। उनके विधानसभा क्षेत्र की पब्लिक कह रही है सब बिकाऊ माल है, हमने 5 साल के लिए भेजा था इनको और ये डेढ़ साल में ही क्यों आ गए हमारे बीच में वापस? ये सवाल का जवाब देते हुए नहीं बन पा रहा है विधायकों से जो छोड़कर गए थे, मंत्री थे अब सब पछता रहे हैं और सिंधिया जी की जो दुर्गति हुई है वो सबके सामने है। इसलिए राजस्थान में कांग्रेस विधायकदल एकजुट रहेगा। हम गवर्नेंस देंगे बहुत चैंलेंजेज सामने हैं, एक तरफ कोरोना का संकट, दूसरी तरफ आर्थिक संकट जो पैदा हुआ है लॉकडाउन के कारण से, उन सबका मुकाबला हमें करना है। मैं उम्मीद करता हूं तमाम विधायकों से, मंत्रिमंडल के साथियों से हम मिलकर चलेंगे और किसी रूप में अच्छी गवर्नेंस देने का हम लोग कामयाब होंगे, यह मैं कह सकता हूं।
    इनको पूछो बीजेपी वालों को, आपके पास में क्या सामान था ? सामान नहीं था, उम्मीदवार खड़ा क्यों किया एक्स्ट्रा? उनको मालूम था हम लोग नहीं जीत पाएंगे उसके बावजदू भी क्योंकि एक दलित खड़ा हो गया था कांग्रेस से, ये दलित विरोधी लोग हैं बीजेपी वाले, इसलिए उन्होंने जानबूझकर के नीरज डांगी को हराने के लिए उम्मीदवार खड़ा किया, विधायक लोगों ने जवाब दे दिया उनका।

    कांग्रेस उम्मीदवारो को कांग्रेस विधायकों के अलावा सभी तेराह निर्दलीय विधायक, लोकदल के एक, बीटीपी के दो, दो मे से एक माकपा विधायक को मिलाकर कुल 123 मत मिले एवं भाजपा उम्मीदवारों को भाजपा के सभी बहतर विधायकों के साथ तीन रालोपा विधायकों को मिलाकर पच्चेतर मत मिले।
    कुल मिलाकर यह है कि विधानसभा मे प्रयाप्त संख्याबल नही होने के बावजूद भाजपा द्वारा दूसरा उम्मीदवार मेदान मे उतारने को कांग्रेस ने चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिये विधायकों को प्रबोलन देकर उनसे क्रोस वोटिंग करने की मंशा का भाजपा पर आरोप लगाते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कांग्रेस विधायकों के अलावा सभी समर्थक दलो के विधायकों व सभी निर्दलीय विधायको दस जून से होटल मे बाड़ाबंदी मे रख रखा था। जिनको आज सीधा मतदान स्थल लाया गया।

  • राज्यसभा चुनाव के बहाने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक तीर से अनेक शिकार करने मे कामयाब रहे।

    राज्यसभा चुनाव के बहाने गहलोत ने बन रहे विपरीत हालात को अपने पक्ष मे किया।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सरकारी स्तर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट समर्थकों की बढती सक्रियता व उनमे गहलोत के कामकाज के तरीकों से पनपते मुखर असंतोष को दबाने के लिये अचानक राज्यसभा चुनाव के बहाने भाजपा पर उनकी चूनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिये विधायकों को प्रलोभन देकर पाला बदलवाने का आरोप लगाने के साथ सभी कांग्रेस व समर्थक विधायकों को मुख्यमंत्री निवास पर बैठक के बहाने बूलाकर सीधे उनको वहीं से एक होटल मे ठहरा कर उनकी कड़ी बाड़ेबंदी करने पर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट द्वारा यह कहने के बाद कि उनको किसी भी विधायक ने उन्हें प्रभोलन देने की बात नही बताने की ज्योहीं कहा तो लगा कि दाल मे कुछ काला जरुर है। लेकिन तब तक मुख्यमंत्री गहलोत अपना खेल , खेल चुके थे।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस व समर्थक निर्दलीय विधायकों की बाड़ाबंदी करने के साथ साथ भाजपा नेताओं द्वारा विधायकों को प्रभोलन देकर कांग्रेस से तोड़कर अपनी तरफ खींचकर राज्यसभा मे क्रोस वोटिंग के अलावा कर्नाटक-मध्यप्रदेश व गुजरात की तरह पाला बदलवाने की कोशिश का खुला आरोप लगाने से एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायकों को सदिग्ध स्थिति की तरफ धकेला वही हमलावर भाजपा को घेरने पर भाजपा नेता व पायलट समर्थक बचाव की मुद्रा मे आ गये। गहलोत अपने खास विधायक व मुख्य सचेतक महेश जोशी द्वारा राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो व एसओजी मे शिकायत दर्ज करवाने के बाद जांच मे क्या निकल कर आयेगा यह अलग बात है। लेकिन हवाला कारोबारियों के अलावा भाजपा की मदद करने वाले व्यापारीक घराने व राजस्थान के धन्ना सेठो मे उक्त दर्ज शिकायतो के बाद मन मे डर जरूर बैठ गया है कि कभी जांच की जद मे वो व उनका कारोबार नही आ जये वरना उनको काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। शिकायत के बाद बताते है कि उक्त तरह के लोग भाजपा नेताओं से सम्पर्क करने से कोसो दूर भागने लगे है।

    हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा विधायको की बाड़ाबंदी करने के खिलाफ मंत्री रमेश मीणा व निर्दलीय विधायक लक्ष्मण मीणा, पूर्व मंत्री व विधायक भरतसिंह सहित अनेको ने सवाल भी खड़े किये। लेकिन अशोक गहलोत ने कोराना काल मे भी मंत्री व विधायकों को उनकी पसंद अनुसार सूख-सुविधाओं वाली होटल मेरियट मे अपनी पूर्व नियोजित योजना के तहत बाड़ाबंदी जारी रखकर दिल्ली मे मोजूद पार्टी हाईकमान को यह समझाने मे कामयाब रहे है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के तौर पर केवल मात्र वोही भाजपा का मुकाबला कर सकते है। भाजपा की सरकार गिराने के सपनो को चकनाचूर करने का मादा केवल उन्हीं मे है। कांग्रेस के दोनो राज्यसभा उम्मीदवारों की जीत मे ना पहले किसी तरह का शंसय था ओर ना बाड़ाबंदी के बाद है। लेकिन विधायकों की बाड़ाबंदी करने के बाद गहलोत ने अनेक राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष मे जरुर कर लिये है।

    1998 मे अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक केवल सचिन पायलट मात्र ऐसे प्रदेश अध्यक्ष है जिनको बनाने मे उनकी मंजूरी की जरूरत नही पड़ी ओर नाही अभी तक वो उनको हटा पाये है। जबकि पायलट के अलावा 1998 के बाद बनने वाले सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिये सीधे तौर पर या पर्दे के पीछे से गहलोत की मंजूरी रही है। ओर गहलोत जब चाहा तब उन्हें पद से हटवाने मे कामयाब रहे है। पायलट की राजनीति की शुरुआत दिल्ली से होने के साथ साथ ऊपर गहरी राजनीतिक जड़े कायम है। जबकि पायलट के अलावा अन्य सभी बने प्रदेशाध्यक्षो की जड़े राजस्थान के मात्र एक विधानसभा या इससे अधिक जिला स्तर पर ही कायम थी। इसलिए उनकी जड़ें उखाड़ने मे कोई खास मसक्कत नही करनी पड़ी। तभी तो गहलोत अपनी कोशिशों से पायलट को मुख्यमंत्री बनने से रोक तो जरूर पाये लेकिन लाख जतन करके उनको अध्यक्ष पद से हटवा नही पा रहे है। पायलट आज भी उप मुख्यमंत्री के अलावा अध्यक्ष पद पर विराजमान है।

    जादूगर के बेटे व स्वयं जादूगरी करने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है। चाहे वास्तव मे धरातल पर कुछ भी घटित नही हुवा हो लेकिन राज्यसभा चुनाव के बहाने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक जादूगर की तरह बहुत कुछ घटित होते दिखाकर राजनीतिक माहोल को कोराना के डर व संन्नाटे मे हाईट देकर काफी कुछ अपने पक्ष मे कर लिया है। अब वो अपनी पसंद से राज्यसभा चुनाव के तूरंत बाद राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा खोलने के अलावा मंत्रीमंडल का विस्तार व बदलाव आसानी से कर पायेगे। एक तरह से पीछले दस दिन के राजनीतिक माहोल मे गरमाहट लाकर मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने आपके लिए फ्री हेण्ड पा लिया है।

    विधानसभा चुनाव मे अशोक गहलोत ने अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने की भरसक कोशिशे की। अनेक समर्थकों को जब टिकट नही मिल पाई तो उनमे से अधीकांश लोगो ने बगावती तेवर अपनाते हुये निर्दलीय व कुछ बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ गये। बताते है कि राजस्थान मे मोजूद तेराह निर्दलीय विधायकों मे से दो भाजपा की पृष्ठभूमि के व ग्यारह कांग्रेस पृष्ठभूमि के है। उन ग्यारह मे से दस विधायक अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक बताये जाते है। वही बसपा के निशान पर जीते विधायक राजेन्द्र गुडा तो अपने आपको गहलोत के खास तोर पर समर्थक बताने के अलावा गहलोत को ही अपना नेता बताते है। बसपा के सभी छ विधायकों का कांग्रेस मे विलय करवाने मे विधायक गुडा की ही गहरी भूमिका राजनीतिक हलको मे मानी जा रही है। इसी तरह गहलोत के अन्य कट्टर समर्थक सुभाष गर्ग को कांग्रेस से टिकट नही मिलता नजर आया तो वो लोकदल की टिकट समझोता दलो के बंटवारे के तहत ले आये ओर विधायक बनकर आज वो गहलोत सरकार मे मंत्री है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजनीति के जादूगर के तौर पर पहचाने जाने वालै मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को विपरीत परिस्थितियों मे भी बदले माहोल को अपने पक्ष मे करके गेंद अपने पाले मे लाने का माहिर माना जाता है। अभी राज्यसभा चुनाव के बहाने भी उनकी कारगर रही रणनीति के कारण विरोधियों को मुहं की खानी पड़ी है। कांग्रेस के दोनो राज्यसभा उम्मीदवारो का बडे मत अंतराल से चुनाव जीतना तय है। लेकिन चुनाव के बहाने रची योजना से मुख्यमंत्री ने एक तीर से कई शिकार करके सबको चोंका दिया है।