Category: राजस्थान

  • राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार का समय नजदीक।

    किसी भी समय चार सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    पीछले साल 25 व 26 जून को राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा 2018 की आयोजित मुख्य परीक्षा का परीणाम आखिर कार कोर्ट के आदेश पर तकनीकी जांच के बाद जल्द जारी होकर सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार अगस्त या सितंबर मे शुरू होने की उम्मीद के बाद प्रशासनिक व सरकार के स्तर पर जारी हलचल से लगने लगा है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के खाली चल रहे चार सदस्य पदो पर नये सदस्यों की जल्द नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    राजस्थान सीविल सेवा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार के अगस्त-सितंबर मे शूरू होने की सम्भावना के अतिरिक्त पुलिस सेवा के सब इंस्पेक्टर की लिखित परीक्षाओं मे चयनित होने वाले प्रत्याशियों के साक्षात्कार इसी दस जुलाई से शूरु हो रहे है। एवं जेएलओ पद के लिये लिखित परीक्षा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार की डेट भी जुलाई माह मे आने की सम्भावना जताई जा रही है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग मे भाजपा सरकार के समय नियुक्त चार सदस्यों मे अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती व सदस्य राजकुमारी गुर्जर, रामू राम रायका व शिवसिंह राठौड़ वर्तमान समय मे पदस्थापित है। जबकि पीछली कांग्रेस सरकार के समय बने सभी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा परीक्षा 2018 की मुख्य परीक्षा पीछले साल 25-26 जून को आयोजित होने के बाद कानूनी उलझन मे फंसने के बाद आखिरकार हाल ही मे हाईकोर्ट के जारी आदेश अनुसार अगले महीने मे सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार शुरू होने की उम्मीद जताई जाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दवाब बढ गया है कि वो जल्द रिक्त चल रहे चार सदस्य पदो पर नये लोगो की नियुक्ति करे।

    लोकसेवा आयोग के सदस्यों के पद वैसे तो सवैधानिक पद होते है। लेकिन इन पदो पर नियुक्ति करते समय केण्डीडेट की योग्यता के अतिरिक्त राजनीति व बिरादरी संतुलन पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है। वर्तमान सरकार के समय जल्द होने वाली सम्भावित उक्त नियुक्तियों मे भी जाट-मुस्लिम-एससी एसटी व मूल ओबीसी पर विशेष फोकस किये जाने की चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती के तीन माह बाद अक्टूबर मे रिटायर होने पर उनकी जगह अध्यक्ष पद पर पुलिस विभाग के आला अधिकारी की नियुक्ति होने की प्रबल सम्भावना जताई जा रही है।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने तीन तीन सलाहकार नियुक्त करने की जरुरत क्यो आ पड़ी?

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के तीसरी दफा मुख्यमंत्री बनने वाले अशोक गहलोत को आखिरकार इस समय तीसरे ब्यूरोक्रेट्स को अपना सलाहकार बनाने की जरूरत क्यो आ पड़ी है। जबकि पहले से दो ब्यूरोक्रेट्स के सलाहकार नियुक्त होने के बाद से अब तक वो दोनो निठल्ले बैठे है।

    अपने स्तर पर राजनीतिक व सरकारी स्तर पर फैसले लेने के लिये विख्यात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली दफा किसी राजनीतिक नेता को अपना सलाहकार नियुक्त करने के बजाय उन्होंने तीन सलाहकार नियुक्त किये वो तीनो ही ब्यूरोक्रेट्स रहे है।

    हालांकि मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री अपने किसी तरह के राजनीतिक सलाहकार नियुक्त करे या नही करे पर प्रैस सलाहकार जरुर नियुक्त जरुर करते रहे है। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहली दफा अपने डेढ साल का समय गुजरने तक अभी तक किसी भी मिडिया क्रमी को अपना प्रैस सलाहकार नियुक्त नही किया है। मुख्यमंत्री गहलोत को प्रैस सलाहकार के लिये उपयुक्त व काबिल नाम नजर नही आया या फिर उन्होंने इसकी जरुरत ही नही समझी, यह तो स्वयं मुख्यमंत्री जाने। इसके विपरीत मुख्यमंत्री ने भारतीय प्रशासनिक सेवा दो सेवानिवृत्त अधिकारी गोविंद शर्मा व अरविन्द मायाराम को पहले से अपना सलाकर नियुक्त कर रखा था। वही अगले तीन महिने बाद सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य सचिव डी बी गुप्ता को अचानक पद से हटाकर अपना तीसरा सलाहकार नियुक्त करके प्रदेश मे नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

    कुल मिलाकर यह है कि मंत्रीमंडल के बजाय अंदर खाने ब्यूरोक्रेट्स के मार्फत अपनी सरकार चलाने के लिये विख्यात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा मुख्य सचिव गुप्ता को सेवानिवृत्ती के पहले दो ब्यूरोक्रेट्स के सलाहकार के नियुक्त होने के बावजूद गुप्ता के रुप मे तीसरा सलाहकार नियुक्त करने के बाद प्रदेश मे अलग तरह की चर्चा चल पड़ी है।

  • राजस्थान मे जिला पुलिस अधीक्षक पद पर किसी मुस्लिम का वर्तमान मे पदस्थापित नही होना चर्चा बनी।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि ब्यूरोक्रेट्स को पदस्थापित करने का मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। लेकिन लोकतांत्रिक सरकार व जनता द्वारा चुने गये नेता की खासियत होती है कि वो अपने राजकीय फैसले उस तरह का करते है जिस फैसले मे उस क्षेत्र के हर तबके को अहसास होता नजर आये है कि सत्ता मे उन्हें समान अवसर दिये जा रहे है। साथ ही सत्ता मे भागीदारी सबको मिलना ही सुशासन का स्वरूप माना जाता है।

    राजस्थान मे कांग्रेस सरकार जब जब रही है तब तब अक्सर जिला पुलिस अधीक्षक के पद पर किसी ना किसी मुस्लिम आईपीएस अधिकारी को जिला पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित करने का सीलसीला चला आ रहा था। वर्तमान मे भरतपुर पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित हैदर अली जैदी का 66 आईपीएस अधिकारियों की आई तबादला सूची मे उप महानिरीक्षक, इंटेलिजेंस, जयपुर के पद पर पदस्थापित कर दिया गया है। जबकि हैदर अली जैदी के अलावा दुसरे मुस्लिम भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अरशद अली को अभी तक खांचे मे ही पदस्थापित कर रखा है।

    राजस्थान के मुस्लिम समुदाय की बदनसीबी रही है कि भारतीय सीविल सेवा परीक्षा पास करके राजस्थान से बना आईपीएस को अभी तक राजस्थान केडर नही मिल पाया है। एवं नाही अन्य प्रदेश का भारतीय सीविल सेवा मे चयनित होकर राजस्थान केडर मे पदस्थापित नही हो पाये है। प्रदेश मे जो आईपीएस बनकर यहां पोस्टेड हुये वो सभी राजस्थान पुलिस सेवा से तरक्की पाकर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बने है।

    आजादी के बाद लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद राजस्थान पुलिस सेवा से विभागीय तरक्की पाकर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बनने वालो मे जो आईजी पद तक पहुंचे है उनमे मुराद अली अबरा, लियाकत अली खान, निसार अहमद फारुकी व कुवंर सरवर खान का नाम शामिल है। इसके अलावा तारीक आलम भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे है। उक्त अधिकारियों के अलावा वर्तमान मे भारतीय पुलिस सेवा के राजस्थान केडर मे पदस्थापित अधिकारी हैदर अली जैदी पुलिस अधीक्षक पद से तरक्की पाकर डीआईजी पुलिस पद पर पदस्थापित हुये है।एवं दूसरे अरशद अली आईपीएस है। जिन्हें सरकार चाहे तो जिला पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थापित कर सकती है। सरकार मे जनता का दवाब या विधायकों की आवाज को अहमियत मिला करती है। राजस्थान मे सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के कुल नो मुस्लिम विधायक होने के बावजूद उनके मुहं से किसी एक भी उक्त मामले मे आवाज सुनाई नही आ रही है। सभी नो विधायकों को अपने अपने कर्तव्यों पर विचार जरुर करना चाहिए।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुशल रणनीति को अन्य नेता समझ नही पाये।

    1998 मे गहलोत के मुख्यमंत्री के रुप मे उदय होने के बाद एक एक करके अन्य नेता पस्त होते जा रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अचानक 1998 मे मुख्यमंत्री बनने के बाद आज तक जब जब प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार बनी है तब तब गहलोत ही मुख्यमंत्री बने है। इसके अलावा गहलोत की राजनीतिक चतुराई के सामने धीरे धीरे एक एक करके दिग्गज व जातीय आधार वाले मजबूत राजनेता धाराशायी होते चले गये। आज राजस्थान मे कांग्रेस पोलिटिक्स मे मजबूत जातीय बेश का एक भी नेता नही बचा है। कमोबेश कोई जातीय बेश का नेता है तो माली जाती बेश का नेता स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत को ही मान सकते है। जो अपने उन अधीकांश जातीय मतो के सहारे पार्टी के अंदर के विरोधी नेताओं का बैंड बजवा देते या फिर हितेषी की नेया पार लगवा देते है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सत्ता मे रहे या सत्ता के बाहर लेकिन उनका कांग्रेस संगठन के अलावा एक अलग से प्रदेश के कोने कोने मे सुचना व हितैषी तंत्र कायम रहता है। जो तंत्र हरदम हरकत मे रहकर गहलोत के खिलाफ व पक्ष मे होते राजनीतिक षडयंत्र व प्लान पर नजर रखकर समय रहते उन्हें अवगत करवाने मे रेडी रहते है। गहलोत के राजनीतिक, समाजिक व जनरल स्तर पर प्रदेश भर मे कायम सुचना तंत्र के वर्कर का गहलोत भी सत्ता मे आने पर विशेष ध्यान रखते है। वो पुरी कोशिश करते है कि जायज तरीको से उन्हें आर्थिक लाभ होता रहे।

    उक्त सूचना तंत्र मे काम करने वालो मे मुख्यमंत्री के विश्वासी लोगो को या उनके परिवार जनो को बाकायदा नियमानुसार उनकी योग्यता स्तर के हिसाब से स्टेट व जिला कंज्यूमर कोर्ट, ट्रिब्यूनल व विभिन्न बोर्ड-निगम एवं समितियों मे एडजस्ट किया जाता है। जहां उन्हे वेतन या भत्ते के तौर पर अच्छा खासा माहना मिलता रहे। ऐसी जगह तीन मे से एक या पांच मे से दो सदस्य मुख्यमंत्री के विश्वास वाले वर्कर ऐपोंईट हो जाते है तो उनके कारण राजनीतिक भूचाल भी नही मचता है। वही ऐसे लोग आर्थिक रुप से टूट भी नही पाते है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायको को अपने अपने क्षेत्र का दिखते तौर पर हमेशा बादशाह बनाकर मस्त रखा है। वही अपने विश्वास के लोगो का भी विशेष ध्यान रखकर उन्हें हमेशा अपने साथ जोड़े रखा है। जिस जिस खांचे मे बीना किसी राजनीतिक धमाचौकड़ी किये अपने खास लोगो को एडजस्ट किया जा सकता है वहां वहाँ मुख्यमंत्री उनको एडजस्ट करते आये है। तभी बीना किसी मजबूत राजनीतिक जातीय आधार के बावजूद अशोक गहलोत तीसरी दफा मुख्यमंत्री बन पाये है। प्रदेश के कोने कोने मे विश्वासी लोगो को बीना राजनीतिक विवाद पैदा किये जोड़े रखने की अशोक गहलोत की कला के सामने राजस्थान के बाकी नेता काफी बोने नजर आते है। गहलोत की इसी राजनीतिक चतुराई व रणनीति के कारण प्रदेश मे उनका 1998 मे मुख्यमंत्री के रुप मे उदय होने के बाद दुसरा कोई उनके बराबर का नेता अभी तक बन नही पाया है।

  • राजस्थान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS के एक सो तीन अधिकारियों के तबादले।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान प्रशासनिक ढांचे मे भारी फैर बदल करते हुये भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक सो तीन अधिकारियों के तबादले किये है। जिसमे प्रमुख रुप से मुख्य सचिव डीबी गुप्ता के स्थान पर राजीव स्वरूप को नया मुख्य सचीव बनाया गया है।

    उक्त भारी फैर बदल मे अनेक जिला कलेक्टर भी बदले गये है। पर प्रदेश मे पोस्टेड दो मुस्लिम जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ जाकीर हुसैन व झूंझुनू उमरदीन खान पर विश्वास जताते हुये उन्हें नही बदला गया है। इसी तरह सीधे तौर पर बने आईऐएस मे कमर उल जमा चोधरी को आयुक्त, नगर निगम उदयपुर व अतर अमीर को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद जयपुर के पद पर लगाया गया है। इसके अतिरिक्त अतर अमीर की पत्नी टीना ढाबी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्रीगंगानगर लगाया गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि जयपुर कलेक्टर पद पर इतिहास मे दूसरी दफा राजस्थान प्रशासनिक सेवा से पद्दोनत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (ओबीसी वर्ग) बनने को लगाया है। वही पहले से लगे दोनो मुस्लिम कलेक्टरस पर विश्वास जताते हुये उन्हें हटाया नही गया है।

  • मऊ:आकाशीय बिजली की चपेट में आकर युवक की मौत

    मुज़फ्फरुल इस्लाम
    घोसी,मऊ। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के कल्यानुपर अस्पताल के पास आकाशीय विद्युत की चपेट में आकर बुधवार को जमीन हाजीपुर निवासी विशुन चौहान की मौत हो गई। वह दोपहर करीब दो बजे निजी कार्य हेतु जा रहा था। तभी बारिश होने लगी कल्यानपुर स्थित अस्पताल से गुजर रहा था कि आकाशीय बिजली उसपर गिर पड़ी। वह वहीं बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोग उसे आनन-फानन में एक अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे जांचोपरान्त मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बना पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल भेज दिया।

  • साबिक मंत्री यूनुस खांन की पांच लाख रुपयो की मदद से सीकर के कायमखानी छात्रावास के विस्तार भवन निर्माण को गति मिली।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    कुछ महिनो पहले सीकर कायमखानी छात्रावास मे साबिक स्टुडेंट्स के आयोजित एक भव्य समारोह मे शिरकत करते हुये उपस्थित लोगो को सम्बोधित करते हुये राजस्थान सरकार के साबिक वजीर यूनुस खान ने शिक्षा की अहमियत व आवश्यकता पर बोलते हुये कहा था कि कोमी फला व बहबूदी के लिये सामुहिक तौर पर प्रयास किये जाये तो सफलता पाने मे समय नही लगता है। उन्होंने उस समय सीकर कायमखानी छात्रावास की खाली पड़ी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं युक्त नये तौर पर भवन बनाकर उनमे स्टूडेंट्स को शिक्षामय वातावरण उपलब्ध कराने पर जौर दिया था।

    कायमखानी यूथ ब्रिगेड की पहल पर समाज के अधीकांश मोजिज लोगो की मोजूदगी मे 14-जुन कायम खां डे के पावन अवसर के दिन सीकर कायमखानी छात्रावास विस्तार भवन की संगे बुनियाद रखी गई है। जिसमे प्रत्येक कोमी फर्द अपनी तरफ से सहयोग करने का वादा करते हुये सहयोग कर रहा है। इसी कड़ी मे सीकर के कुछ समाजी कारकूनो का एक समूह साबिक वजीर यूनुस खांन से डीडवाना जाकर मिला तो उन्होंने तूरंत पांच लाख राशि की मदद नकद देने के साथ इसके अतिरिक्त पांच लाख का सहयोग आगे चलकर देने का वादा किया है।

    कुल मिलाकर यह है कि सीकर कायमखानी छात्रावास के बन रहे आधुनिक विस्तार भवन के लिये आर्थिक तौर पर मदद करने मे काफी लोग आगे आये व आ रहे है। जिनमे सीकर कायमखानी छात्रावास के पूर्व छात्र व राजस्थान सरकार के साबिक वजीर यूनुस खान द्वारा दख लाख रुपये के सहयोग करने का वादा कर तूरंत पांच लाख की राशि नकद प्रदान करके व बाकी पांच लाख का सहयोग जल्द करने के आवश्वासन के बाद कोमी स्तर पर उनकी उक्त कदम की सहरायना होती नजर आ रही हैः

  • घोसी,कांग्रेसियों ने डीज़ल पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर राष्ट्रपति के नाम 6 सूत्रीय ज्ञापन दे विरोध प्रदर्शन किया

    रिपोर्टर:-मुज़फरुल इसलाम
    घोसी,मऊ।जिला कांग्रेस कमेटी मऊ द्वारा बुधवार को स्थानीय नगर के मझवारा मोड़ से पैदल मार्च निकाल तहसील मुख्यालय पहुँच उपजिलाधिकारी घोसी आशुतोष कुमार राय के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम छः सूत्रीय ज्ञापन दे विरोध प्रदर्शन किया।जिला अध्यक्ष इंतखाब आलम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से वर्तमान सरकार की दमनकारी नीतियों एवं जन विरोधी बताते हुए कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी में हुए लॉक डाऊन में डीजल एवं पेट्रोल के अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि को देखते हुए देश के नागरिकों के हित मे मूल्यवृद्धि आपके निर्देश पर सरकार द्वारा तत्काल वापस लिया जाय।ज्ञापन देने वालों में मुख्यरूप से बृजेश पांडे,धनेश कुमार,विजयशंकर,सम्प्पत मौर्य,राधेश्याम,त्रिवेणी,मलिक सिराजुद्दीन आदि उपस्थित रहे।

  • सीएलपी उप नेता आफताब अहमद व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मुलाकात, एनएच 248 ए व आईएमटी पर बैठक

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी आफताब अहमद ने चंडीगढ़ में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला मुलाकात की जिसमें मुद्दा नूह से अलवर बॉर्डर तक राष्ट्रीय राजमार्ग 248 ए के फोर लेन के काम को शुरू करने व आईएमटी मेवात में युवाओं के रोजगार के अवसरों के लिए कंपनी लगाने की मांग रही।

    नूह विधायक व कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को कहा कि 2014 में कांग्रेस सरकार में उन्होंने गुड़गांव अलवर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग 248 ए का दर्जा दिलाया था। गुड़गांव से नूह तक फोर लेन हो गया था, नूह से अलवर सीमा तक सड़क को चौड़ा किया गया था। पूरे काम का डी पी आर बन चुका था कोई प्रक्रिया बाकी नहीं थी।

    केंद्र में व प्रदेश में सरकार बदलने के बाद काम को रोक दिया गया जो दुर्भाग्य पूर्ण है। सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री को कहा कि छह सालों में कुछ काम परियोजना पर नहीं हुआ है।
    उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उप नेता कांग्रेस विधायक दल आफताब अहमद को आश्वस्त किया कि वो उनकी मांग को पूरा करने के लिए हर सकारात्मक करवाई करेंगे। प्रदेश सरकार मामले को गंभीरता से लेकर, आगे जरूरी करवाई करेगी।

    इसके अलावा नूह विधायक व सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, मेवात के युवा भी बेरोजगारी से बुरी तरह से जूझ रही है, इसलिए आईएमटी मेवात जो कांग्रेस ने वहां उद्योग धंधे शुरू करने के उद्देश्य से बनाया था, छह साल बीत जाने के बाद भी एक भी कंपनी वहां प्रदेश सरकार नहीं ला सकी जो गलत है।
    आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मांग की है कि आईएमटी मेवात में कंपनी लगाई जाएं, ताकि युवा वर्ग को रोजगार मिल सके। नूह विधायक ने एक बात और जोड़ते हुए कहा कि यहां आने वाली कंपनियों में यहां के स्थानीय बच्चों को विशेष रूप से प्राथमिकता देकर नौकरी दी जाए। उप मुख्यमंत्री ने कांग्रेस उप नेता को आश्वस्त किया है कि आईएमटी मेवात में कंपनियां जल्द आएंगी और वहां के युवाओं को भी रोजगार देने की दिशा में जरूरी क़दम उठाएंगे और उनकी मांगों को सकारात्मक सोच के साथ पूरा किया जाएगा।

    आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मुलाकात के बाद बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नूह से अलवर बॉर्डर का फोर लेन किया जाना बहुत जरूरी है, गुड़गांव से नूह तक का काम हो चुका है, सरकार अब इस परियोजना को मुंबई वडोदरा एक्सप्रेस वे की आड में बंद करना चाहती है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। गुड़गांव अलवर मार्ग का महत्व अलग है, एक्सप्रेस वे का अलग है।
    आईएमटी मेवात में भी 6 साल बीत जाने के बाद भी कंपनी ना लाना सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। आज उप मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें सकारत्मक आश्वाशन मिला है, उम्मीद है कि दल गत राजनीति से ऊपर उठकर सरकार मेवात के विकास की बात सोचेगी।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने कहा कि उन्होंने पहले मुख्यमंत्री से भी मांग की थी, विधानसभा में भी मामला उठाया था, कई पत्राचार कर चुके हैं, एनएचएआई को भी लिखा है, लेकिन समाधान अभी हुआ नहीं है।

  • मुस्लिम समुदाय के पीछड़ने के कारण स्वयं मुसलमान को तलासने होगे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि प्रिंटिंग प्रैस से लेकर आंखो की रोशनी बढाने के लिये आंखो पर चश्मा लगाने के अलावा लाऊडस्पीकर पर अजान देने की शुरुआत होते समय मुस्लिम समुदाय का एक तबका इनके उपयोग के सख्त विरोध मे आ खड़ा हो कर आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार था। लेकिन धीरे धीरे इस तहर की वेज्ञानिक तरक्की की उपयोगिता के बढते कदमो की जद मे वो तबका भी आकर फायदा उठाने लगा जो कभी इसका सख्त विरोधी हुवा करता था।

    कुरान ऐ पाक की हिदायतों व शिक्षा को जो शख्स अच्छे से समझकर पढ लेता है तो उसके जेहन के बल्ब्स जगमगाते लगाते है। पता चलेगा कि आज की विज्ञान व वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रही खोज के बारे मे कुरान ऐ पाक ने जो बहुत पहले बताया था, वो सबकुछ आज साफ साफ नजर आ रहा है। इतना सबकुछ होने के बावजूद हमरा एक तबक आज भी विज्ञान की तरक्की का सदुपयोग करने की मुखालफत करने से नासमझी के कारण बाज नही आ रहा है।

    विश्व भर मे कोविड-19 के रुप मे आई वबा के कारण आज हर इंशान पेशोपेश मे नजर आ रहा है। भारत मे 24-मार्च से जारी लगातार लोकडाऊन ने जीवन के हर पहलू को पूरी तरह बललकर रख दिया है। आज जदीद तालीम की अधीकांश शेक्षणिक संस्थानो ने अपने स्टुडेंट्स की शिक्षा को जारी रखने के लिये आनलाइन पद्वति का सदुपयोग किया व कर रहे है। जबकि बडी तादाद मे जकात-खेरात व अन्य इमदाद जमा करके चलने वाले मुस्लिम समुदाय के मदरसे समय की रफ्तार के साथ नही चल पाने के कारण आज सभी मदरसे अपने स्टुडेंट्स को आनलाइन पढा पाने मे सक्षम नही पा रहे है। जिसका कारण साफ है कि हमारे मदरसे व उनके संचालक वक्त की जरूरत को पहचानने व अपने आपमे एव मदरसों मे आवश्यकता अनुसार बदलाव लाने मे कमजोर साबित हुये है। अगर समय समय पर अपने अड़यल रुख को त्याग कर रोज बदलती तकनीक का ठीक से उपयोग करने का जेहन बनाकर उसके मुताबिक़ मदरसों मे बदलाव की बयार बहाई जाती तो आज अन्य जदीद तालीम पाने वाले स्टुडेंट्स की तरह मदरसों के स्टुडेंट्स भी आनलाइन अपनी तालीम को जारी रख पाने मे सफल होते।

    कुल मिलाकर यह है कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते बचाव की खातिर जारी लोकडाऊन मे रोज आये बदलाव व मुश्किलों से मुस्लिम समुदाय व उनके कुछ कथित लीडरान को सबक लेकर अपने आप मे बदलाव लाना होना। अगर बदलाव लाकर वक्त की रफ्तार को ठीक से पहचान करके कुरान ऐ पाक के हर लफ्ज़ को ठीक ठीक समझकर वैज्ञानिक क्रांति को अपने पर विचार करना होगा।