Category: राजस्थान

  • कांग्रेस ने अपने दो कद्दावर विधायक भंवरलाल शर्मा व विश्वेंद्र सिहं को प्राथमिक सदस्यता से किया निलम्बित

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान कांग्रेस के विधायकों मे छिड़ा विवाद पल पल बढता जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आज जयपुर मे प्रैस कांफ्रेंस करते हुये कहा कि कांग्रेस विधायकों को 20-35 करोड़ मे खरीदनै की कोशिशें हो रही है। उन्होंने भाजपा पर जोरदार हमला बोलते हुये कहा के देश मे दस लाख से अधिक कोराना मरीज हो गये एवं चीन ने हमारी भूमि पर कब्जा कर लिया फिर भी भाजपा सत्ता सूख के लिये चूनी हुई राजस्थान सरकार को विधायको की खरीद-फरोख्त करके गिराने मे लगी है।

    विधायकों के खरीद-फरोख्त को लेकर कल जारी कथित ओडियो क्लिप को लेकर सुरजेवाला ने कांग्रेस के दिग्गज दो विधायक भवंरलाल शर्मा व विधायक विश्वेंद्र सिंह को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित करने की जानकारी देते हुये केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को गिरफ्तार करने की मांग की है।

    भरतपुर राजा विश्वेंद्र सिंह वर्तमान गहलोत सरकार मे तीन दिन पहले तक मंत्री थे। वहीं यह सांसद व अनेक दफा विधायक बन चुके है। राजस्थान जाट समाज के बडे नेता भी है। दूसरे निलम्बित विधायक भंवरलाल शर्मा सात दफा विधायक व एक दफा मंत्री बन चुके है। शर्मा लोकदल, जनता दल, भाजपा व कांग्रेस के निशान पर सरदारशहर से विधायक बने है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस विधायकों को जारी किये गये नोटिस पर हाईकोर्ट की डिविजनल बैंक मे आज दोपहर एक बजे सुनवाई होनी है। जिसके जजमेंट का गहलोत-पायलट खेमे पर काफी असर पड़ेगा।

  • राजस्थान मे खण्डित होती कांग्रेस के गहलोत-पायलट धड़े मे द्वंद्व पल पल बढता ही जा रहा है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    कुछ दिन पहले राज्यसभा चुनाव मे कांग्रेस के सभी विधायक व समर्थक विधायकों द्वारा एक साथ मतदान करके तीन मे से अपने दो उम्मीदवार जिता कर विपक्षी दल भाजपा को मात देने के करीब दो सप्ताह बाद ही अशोक गहलोत व सचिन पायलट के मध्य क्या राजनीतिक वर्चस्व की जंग को हवा लगी कि दोनो नेताओ को अपने अपने समर्थक विधायकों को बाड़ेबंदी मे बंद करने को मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री गहलोत ने सचिन पायलट पर अनेक गम्भीर आरोप लगाने के अलावा उन पर व्यक्तिगत आरोपो की झड़ी लगाने के बावजूद पायलट स्वयं अब तक चुप्पी साधे हुये है।

    राजस्थान कांग्रेस के अशोक गहलोत व सचिन पायलट के नेतृत्व मे कांग्रेस विधायकों के बने अलग अलग धड़ो के अलग अलग प्रदेश के होटलो मे जमे होने से राजस्थान की जनता के जेहन मे वर्तमान सरकार के प्रति अनेक तरह के सवाल उठने लगने के साथ आम धारणा बनकर उनके गले से आवाज निकल कर आ रही है कि उक्त घटे घटनाक्रम के बाद राजस्थान से कांग्रेस की आगे चलकर विदाई होना निश्चित है। कांग्रेस के नेताओं द्वारा पार्टी से अधिक स्वयं के हित को तरजीह देने की वजह एवं ऊटपटांग हरकतें करने के कारण देश भर मे कांग्रेस हाशिये मे चली गई है। लेकिन कांग्रेस जन अब भी इस हकीकत से कोई सबक लेकर आगे बढने को तैयार नजर नही आ रहे है। पिछले छ दिन से राजस्थान मे कांग्रेस नेता पार्टी के बजाय राजनीति मे अपने आपको शीर्ष पर बनाये रखने के लिये अशोक गहलोत व पायलट के नाम से कांग्रेस विधायकों के धड़ो को होटल मे बाड़ेबंदी करके रखने से हो रही फजीहत के बाद अब एक दुसरे धड़े पर ओछे आरोप-प्रत्यारोप भी लगाने से चूक नही रहे है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे की तरफ से कल ओडियो क्लिपिंग जारी करते हुये एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति की हो रही बात को पायलट खेमे ने एक विधायक व एक मध्यस्थ के बीच बात होना बताया जा रहा है। जिसमे एक केन्द्रीय मंत्री के इशारे पर विधायको को तोड़कर लाने को बताया जा रहा है। वही उसके बाद उक्त विधायक ने वीडियो जारी करके मुख्यमंत्री के इशारे पर उनके एक ओएसडी पर फर्जी ओडियो क्लिप बनाने का आरोप लगाते हुये उस क्लिपिंग को पूरी तरह फर्जी बताया है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान कांग्रेस के विधायकों के गहलोत-पायलट धड़े मे बंटने के बाद मुश्किल मे फंसी सरकार व कांग्रेस पार्टी की प्रदेश मे खराब होती छवि से कांग्रेस नेताओं द्वारा सबक लेकर कोई सार्थक पहल करके दोनो धड़ो के मध्य सम्मान जनक समझोता कराने के बजाय लगी आग मे घी डालने का काम हो रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के लिये ओछे हथकण्डे भी अपनाने का दौर शुरु हो चुका है। एक तरफ मामला न्यायालय मे पहुंच चुका है। दुसरी तरफ जनता के न्यायालय मे भी अब चाहे ना सही लेकिन कुछ महिनो बाद मध्यवर्ती चुनाव के रुप मे मामला जाता लग रहा है।

  • राजस्थान मे कांग्रेस सरकार अब गिरे या बचे, पर कांग्रेस को काफी नुकसान हो चुका।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य अपने आपको सुपर पावर बनाने के लिये पीछले ढेड साल से चल रहे कोल्ड वार के तहत तीन दिन मे घटे घटनाक्रम के बाद यह तय हो चुका है कि अब सरकार गिरे या बचे लेकिन घटे घटनाक्रम से कांग्रेस पार्टी को काफी नुकसान हो चुका है। साधारण कार्यकर्ता जो बूथ पर खड़ा होकर मतदान करवाने के साथ साथ घर घर जाकर मतदाताओं को कांग्रेस की तरफ अपने तर्को की ताकत के बल पर आकर्षित करता है। वो कार्यकर्ता उक्त नेताओं के आपसी झगड़े से अपने आपको ठगा हुवा महसूस करने के कारण काफी मायूस व उदासीन होता नजर आ रहा है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपना राजनीतिक कद ऊंचा बनाये रखने के लिये मुकाबील आने वाले नेता का कद हमेशा छोटा करने की भरपूर कोशिश करते रहे है। हमेशा की तरह इस बार भी गहलोत ने प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे से मिलकर सचिन पायलट का राजनीतिक कद छोटा करने की शूरुआत से लेकर आखिर तक भरपूर कोशिश करते रहने के बावजूद जब उनका कद छोटा नही हो पा रहा था। तब जाकर विभिन्न ऐजेन्सियों के मार्फत कुछ विधायकों द्वारा आपसी बातचीत के ब्योरे पर एसओजी व ऐसीबी मे विधायक महेश जौशी के मार्फत शिकायत दिलवाने के बाद मुकदमा दर्ज होने पर सचिन पायलट सहित कुछ अन्य नेताओं को संदिग्ध बता कर उन्हें उसमे खसीटने की कोशिश करने के बाद आखिरकार पायलट व उनके साथी मंत्रियों को बरखास्त तो करवा दिया लेकिन उक्त हरकत का परिणाम आगे चलकर कांग्रेस का प्रदेश से सफाया होने का रास्ता तय कर दिया है। गहलोत ने हमेशा राजनीति मे अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिये प्रत्येक अवसर का अपने हित मे उपयोग किया है। गहलोत के मुख्यमंत्री रहते राजस्थान मे जब जब विधानसभा चुनाव हुये उन सभी आम विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस ओंधे मुहं गिरी है।

    अशोक गहलोत व सचिन पायलट के मध्य चले शह व मात के खेल मे रोज घटते घटनाक्रमों के बाद चाहे उक्त दोनो नेता अपनी अपनी जीत मान रहे हो। लेकिन दोनो के झगड़े से राजस्थान मे कांग्रेस को भारी नुकसान हो चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी चलाने के लिये कम से कम प्रदेशो मे उस पार्टी की सरकार होना आवश्यक है। पंजाब मे कांग्रेस की कम मुख्यमंत्री केप्टेन अमरींद्र सिहं की सरकार होना अधिक माना जाता है। कांग्रेस पार्टी को चलाने के लिये उसकी मदद करने के लिये ले देख मात्र राजस्थान की सरकार बचती है। जिसकी संगठन चलाने के लिये महत्वपूर्ण भूमिका बनती है। वर्तमान घटे घटनाक्रमों के बाद यह तय हो चुका है कि गहलोत बहुमत सिद्ध करे या पायलट की वापसी हो जाये। घटे घटनाक्रम से कांग्रेस विधायकों व नेताओं मे अविश्वास इतना बढ चुका है कि उनका लम्बे समय तक एक रहना मुश्किल है। फिर उनके सामने भाजपा जैसी पार्टी है जो सरकार गिराने के लिये किसी भी स्तर तक जा सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अबतक के अपने कार्यकाल मे पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे का विशेष ख्याल रखा। राजे के तीन मतो की बल पर पुत्र को राजस्थान क्रिकेट ऐसोसिएशन का अध्यक्ष बनवाया लिया है एवं राजे के सरकारी आवास खाली करने के हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गहलोत सरकार गई। इसके विपरीत उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के खिलाफ सरकारी स्तर पर जितने षडयंत्र किये जा सकते है उतने षड्यंत्र किये जाते रहे बताते है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के मध्य सरकार को लेकर अपने अपने समर्थक विधायकों की बाड़ेबंदी करने एवं गहलोत-पाण्डे की जोड़ी के दवाब के बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री व अध्यक्ष पद से बरखास्त करने के अलावा दो अन्य मंत्री रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिहं को मंत्री पद से बरखास्त करवाने के बाद मसला अधिक पेचीदा हो चुका है। इसकै अतिरिक्त पायलट समर्थक विधायकों के घर नोटिस चस्पा होने के बाद विवाद ओर अधिक गहराता दिखाई दे रहा है। चाहे आगे चलकर कुछ भी समझोता या विभाजन हो। लेकिन यह तय है कि उक्त घटे घटनाक्रमों से कांग्रेस को राजस्थान मे काफी नुकसान हो चुका है।

  • राजस्थान कांग्रेस मे गहलोत-पायलट के मध्य छिड़ी वर्चस्व की जंग मे घटे घटनाक्रम मे अचानक चार पदो पर हुई नियुक्तियों मे मुस्लिम नदारद रहा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य पीछले कुछ महीनों से चल रही राजनीतिक वर्चस्व की जंग मे कल अचानक घटे घटनाक्रम से आये नये मोड़ के बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद से बरखास्त करके शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा को नया पीसीसी चीफ मनोनीत किया गया है। डोटासरा के अलावा युवा कांग्रेस, सेवादल व एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष भी पार्टी हाईकमान द्वारा नये मनोनीत किये गये है। जिनमे एक भी मुस्लिम को अध्यक्ष पद पर मनोनीत नही करने को कांग्रेस द्वारा अपने परम्परागत वोटबैंक मुस्लिम समुदाय की पूरी तरह अनदेखी करना प्रदेश मे चर्चा का विषय बना हुवा है कि मुस्लिम कांग्रेस राजनीति मे ना तीन मे है ओर ना तेराह मे गिने जा रहे है। जबकि कांग्रेस के वर्तमान समय मे नो मुस्लिम विधायक है जो अभी तक अशोक गहलोत के केम्प मे ही बैठे हुये है।

    गहलोत-पायलट के मध्य जारी राजनीतिक वर्चस्व की जंग के आसमान छुने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाईकमान के मार्फत अचानक संगठन स्तर पर बदलाव करवाकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा (जाट), राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पर विधायक गणेश घोघरा (आदिवासी), एनएसयूआई के अध्यक्ष पद पर अभिषेक चोधरी (जाट) व प्रदेश सेवादल अध्यक्ष पद पर हेमेंद्र शेखावत (राजपूत) को मनोनीत करवा कर पायलट खेमे को मात देने की कोशिश करते हुये केंद्रीय स्तर पर मोजूद कांग्रेस हाईकमान के कोकस पर अभी भी अपनी मजबूत पकड़ होना साबित किया है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वेसे ऊपर से अपने आप को सेक्यूलर व गांधीवादी होने के साथ साथ मुस्लिम हितैषी दिखाने की भरपूर कोशिश करते रहे है। जिसके कारण चाहे प्रदेश स्तर पर ना सही पर राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले मे उनकी उजली छवि देखी जाती है। जबकि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री काल पर नजर दोड़ाये तो मुस्लिम समुदाय के प्रति उनके काम करने का तरीका इससे अलग नजर आता है। जब से अशोक गहलोत की राजनीति मे चमक-धमक बढी है तब से उनके ग्रह जिले जोधपुर से मुस्लिम विधायक बनने का सीलसीला खत्म हो चुका है। अशोक गहलोत के पीछले कार्यकाल मे जोधपुर के बालेसर मे मुस्लिम-मालियो मे विवाद हुवा तो उसमे सरकारी स्तर पर मुस्लिम समुदाय को कुचला गया था। जिसकी रिपोर्ट विभिन्न समाचार पत्रो की सुर्खियां बनी थी। इन्ही गहलोत के कार्यकाल मे जैसलमेर-बाडमेर जिले के 32 मुसलमानों को रासुका मे बंद किया गया था।

    अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनने से पहले राजस्थान सरकार मे ग्रहमंत्री रहे है। तब काला कानून “टाडा” के दूरूपयोग होने के खिलाफ आवाज बूलंद होने के मध्य तत्तकालीन ग्रहमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश मे टाडा कानून के तहत पहली गिरफ्तारी एक मुसलमान की करने के आदेश दिये थे। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री कार्यकाल मे भरतपुर के गोपालगढ़ कस्बे की मस्जिद मे नमाजियों पर पुलिस द्वारा गोली चलाकर मारने की शर्मनाक घटना घटित हुई थी। जिसमे पीडित मुसलमानों को ही मुलजिम बनाकर गिरफ्तार किया गया था। सीआई फूल मोहम्मद को सवाईमाधोपुर के सुरवाल कस्बे मे सरेआम डयूटी के समय चलाकर मारने की घटना को कभी भूलाया नही जा सकता है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री गहलोत के वर्तमान कार्यकाल मे महाधिवक्ता व अतिरिक्त महा अधिवक्ताओं के मनोनयन मे मुस्लिम प्रतिनिधित्व नही दिया गया। मंत्रीमण्डल गठन मे एक मात्र शाले मोहम्मद को मंत्री बनाया गया जिसको अल्पसंख्यक मंत्रालय तक सीमित रखा गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे कांग्रेस की सत्ता लाने मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस के वर्तमान असमंजस वाले हालात मे भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उनकी कांग्रेस पार्टी की दया द्रष्टि का पात्र नही समझा गया तो माने कांग्रेस व गहलोत के अच्छे दिनो मे तो समुदाय को अछूत बना कर रखा जा सकता है। कल चारो पदो पर हुये मनोनीत अध्यक्षों के लिये इलेक्सन नही बल्कि मनोनयन (सलेक्शन) हुवा है। मनोनयन मे पार्टी व नेताओं की केवल कृपा दृष्टि व जेहनी सोच निर्भर करती है।

  • राजस्थान:विधानसभा ने 15 विधायकों को जारी किए कारण बताओं नोटिस, समाप्त हो सकती सदस्यता

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य छिड़ी वर्चस्व की जंग मे अचानक घटे घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 15 विधायकों को जारी किए कारण बताओं नोटिस।

    राजस्थान में कांग्रेस पार्टी द्वारा बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें सचिन पायलट सहित लगभग 15 विधायक शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई शुरू की गई है, जिसके में पार्टी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने को कहा है। कांग्रेस की शिकायत पर अध्यक्ष ने इन बागी विधायकों को नोटिस भेजकर 17 जुलाई तक जवाब मांगा है।

    बताते है कि पार्टी ने सचिन पायलट पर कार्रवाई करते हुए उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से उन्हें मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उनके समर्थन में उतरे दो मंत्रियों- रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को भी उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। अब उन बाकी विधायकों पर कार्रवाई की जा रही है, जो संभावित रूप से पायलट खेमे में बताये जा रहे है। पार्टी की ओर से कार्रवाई के बाद सचिन पायलट ने ट्विटर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। देखना यह है कि अब सचिन पायलट की क्या योजना है। वहीं दूसरी ओर इसके बाद अशोक गहलोत खेमे की भी हालत बहुत अच्छी नही बताई जा रही है। हो सकता है कि उनको फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़े।

  • पं नवल किशोर शर्मा व परशराम मदेरणा परिवार सहित अनेक मजबूत राजनीतिक परिवारों को हाशिये पर धकेलने वाले मुख्यमंत्री गहलोत पर पायलट भारी पड़ रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि 1998 मे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बनने के बाद से पार्टी मे मोजूद उनके मुकाबले मजबूत लीडर्स को धीरे धीरे एक एक करके राजनीतिक तौर पर हाशिये पर धकेलने मे गहलोत कामयाब होते गये लेकिन मोजुदा कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को हाशिये पर धकेलने की लाख कोशिश करने के बावजूद सचिन पायलट, मुख्यमंत्री अशोक की हर चाल को नाकाम करते हुये उन पर भारी चाहे ना पड़े लेकिन कमजोर भी नही पड़ रहे है।

    1998 मे राजस्थान कांग्रेस का बहुमत आने पर दिल्ली तिकड़म के बल पर अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत ने चालाकी व कूटनीति के साथ मिले हर अवसर का उपयोग करते हुये कांग्रेस मे मोजूद मजबूत राजनीतिक परिवारो को एक एक करके हाशिये पर धकेलने का काम सफलतापूर्वक अंजाम दिया। पं नवल किशोर शर्मा के बाद उनके पुत्र ब्रज किशोर शर्मा, परशराम मदेरणा के बाद भंवरी देवी के बहाने उनके पूत्र महिपाल मदेरणा व उसी के साथ रामसिंह विश्नोई के पूत्र मलखान सिंह विश्नोई , नाथूराम मिर्धा व रामनिवास मिर्धा परिवार के ज्योति मिर्धा-हरेंद्र मिर्धा व रिछपाल मिर्धा को राजनीतिक हाशिये पर आसानी से धीरे धीरे हाशिये पर ढकेलने मे गहलोत कामयाब हो चुके है। उक्त परिवार से एक दो विधायक जरुर बने है। जो एकदम नये होने के कारण वो किसी भी रुप मे गहलोत के लिये लम्बे समय तक चेलैंज नही हो सकते है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक कुटनीति व चालाकी से चाल चलने की कला के बल पर अपने उदय के बाद से कांग्रेस मे मोजूद हर राजस्थानी मजबूत राजनीतिक परिवार को हाशिये पर धकेलते हुये अपने राजनीतिक रास्ते को साफ सुथरा बनाने मे कामयाब रहे। पर अचानक यूपी के सारणपुर निवासी पूर्व केन्द्रीय ग्रह मंत्री राजेश पायलट के पूत्र जो राजनीति मे पावर लेकर पैदा हुये सचिन पायलट के राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनकर आने के बाद से अशोक गहलोत ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लाख जतन करने के बावजूद हटे नही ब्लकि इसके विपरीत पायलट अध्यक्ष पद के अलावा उपमुख्यमंत्री पद पर भी कायम हो गये।

    विधानसभा व लोकसभा चुनाव मे टिकट बंटवारे के साथ साथ राज्य सभा चुनाव के लिये उम्मीदवार चयन को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत के मुकाबले पायलट के बराबर मजबूत स्तम्भ की तरह खड़े होने से मुख्यमंत्री गहलोत असहज महसूस करने लगे थे। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री की दौड़ मे चाहे गहलोत आगे भले निकल गये पर वो पायलट को राजनीतिक तौर पर हाशिये पर धकेलने पर कामयाब नही हो पा रहे है।

    जब भारत के अनेक प्रदेशो मे भाजपा वहा कायम कांग्रेस सरकार को गिराने व कांग्रेस विधायकों से पाला बदलवाने व त्याग पत्र दिलवाले मे कामयाब होती जाने लगी तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उक्त अवसर का उपयोग सचिन पायलट को राजनीतिक हाशिये पर धकेलने मे करने के विकल्प तलासने मे करने लगे। मुख्यमंत्री गहलोत को उपमुख्यमंत्री पायलट को घेरने के लिये ढेड साल के कार्यकाल मे पहली दफा राज्यसभा चुनाव के बहाने मिला। मतदान के पहले इनडायरेक्ट रुप से खरीद फरोख्त के बहाने विधायकों की बाड़बंदी करके पायलट को निशाने पर लेने की कोशिश के बावजूद पायलट साफ बचकर निकल गये। इसके बाद भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद फरोख्त करके सरकार गिराने की कोशिश पर SOG व ACB मे दर्ज महेश जोशी की शिकायत पर कार्यवाही करने पर 11-जुलाई को मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा प्रैस कांफ्रेंस करके भाजपा नेताओं पर अनेक आरोप लगाते हुये फिर से पायलट को इनडायरेक्ट घेरने की कोशिश की है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 11-जुलाई की प्रैस कांफ्रेंस के बाद उनकी सरकार को समर्थन दे रहे तेराह निर्दलीय विधायको मे से ACB की प्राथमिकी मे दर्ज तीन निर्दलीय विधायक सुरेश टाक, सुखवीर, व ओम प्रकाश हुड़ला को कांग्रेस समर्थक विधायकों की सूची से हटा दिया गया है। जबकि मीडिया मे भांति भांति की खबरे चलने के बाद कांग्रेस विधायकों मे भी अविश्वास का माहोल बन गया है। देर रात तक सीएमआर से विधायकों को फोन करके उनकी लोकेसन जानी जा रही थी। वहीं कुछ विधायक व मंत्री मुख्यमंत्री से मिलकर विश्वास भी जताते नजर आये बताते।

    कुलमिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रैस कांफ़्रेंस करने के बाद भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनीया व भाजपा नेताओं ने भी प्रैस कांफ्रेंस करके गहलोत के आरोपो का जवाब दिया है। वही रालोपा नेता सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे द्वारा लिखित स्क्रिप्ट बताया है। लेकिन दिन भर घटे घटनाक्रम के बावजूद उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की चुप्पी होने को सबको असमंजस मे डाल रखा है। लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत का पायलट को राजनीतिक रुप से हाशिये पर धकेलने का लगाया ताजा दाव भी खाली जायेगा।

  • राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिये सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा का नाम सबसे आगे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजनीति मे नेताओं व राजशाही मे बादशाहों द्वारा अपने आपको को सुरक्षित रखने के साथ भविष्य मे उनके लिये कोई तगड़ा चेलेन्ज खड़ा ना हो पाये तो उसके लिये वो हरदम प्रयास करते है कि उनके मुकाबले कोई काबिल या तेजतर्रार व्यक्ति कभी ऐसी जगह पदस्थापित ना पाये जहां से वो शख्स उछाला मार कर उनकी कुर्शी पर कब्जा करले। भारत की मोजुदा राजनीति मे भी हर नेता कोशिश तो यही करता है। लेकिन इतनी सावधानी के बावजूद भी कभी कभी गूरू गूड़ ही रह जाता ओर चेला शक्कर बन जाता है।

    राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे भी प्रत्येक नेता अपने अपने स्वर्ण काल मे अपने आपके लिये संम्भावित मजबूत चेलैंज व जनाधार वाले नेता को उस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित होने से रोकने की निचे निचे भरपूर कोशिश करता रहा है। अपवाद स्वरूप कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता किसी महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किसी तरह हो भी गया तो वो उस नेता के स्वयं की तिकड़म या अचानक हालात फेवर मे बनने की बदौलत ही सम्भव हो पाया है।

    अशोक गहलोत के 1998 मे पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के लेकर आजतक मात्र सचिन पायलेट ऐसे प्रदेश अध्यक्ष बने है जिनके बनने मे अशोक गहलोत ही भुमिका नही रही ओर नाही अपने हिसाब से इनको हटा कर इनकी जगह दुसरे को अध्यक्ष बना पा रहे है। जबकि पायलट के अलावा अन्य बने प्रदेश अध्यक्षो को बदलवाने मे अशोक गहलोत को कोई खास कसरत नही करनी पड़ी थी। सबसे अधिक समय तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट को अब जाकर बदलने शीर्ष स्तर पर लगभग तय हो चुका है। पर इसके साथ यह भी है कि उनकी जगह नये बनने वाले अध्यक्ष के नाम पर गहलोत व पायलट दोनो का सहमत होना आवश्यक है। पहले की तरह मुख्यमंत्री गहलोत अकेले की पसंद से अब अध्यक्ष कतई नही बनेगा।

    राजनीतिक सुत्रोनुसार अध्यक्ष पद के लिये उपयुक्त नाम पर अब तक बनती दिख रही सहमति के हिसाब से सीडब्ल्यूसी सदस्य व पूर्व सांसद रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। धड़ेबंदी से दूर माने जाने वाले मीणा के नाम पर शीर्ष नेतृत्व मे भी सहमति आसानी से बनने लगी है। अगर किसी वजह आदीवासी के अलावा अन्य बिरादरी के नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार शीर्ष स्तर पर होता है तो जाट बिरादरी मे मंत्री हरीश चोधरी, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया का नाम चर्चा मे आ सकता है। महरिया के रास्ते मे उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे आने व उनका काफी तेज तर्रार होना उनके रास्ते का रोड़ा बन सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य बिरादरियों के किसी नेता को अध्यक्ष बनाना नामुमकिन दिखाई दे रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि लम्बे समय तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट का प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना लगभग तय हो चुका है। उनकी जगह बनने वाले अध्यक्ष पद के अनेक नामो पर मंथन चल रहा जिनमे सबसे आगे पूर्व सांसद व सीडब्ल्यूसी सदस्य रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। मीणा यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व स्टेट सरकार मे मंत्री भी रह चुके है।

  • राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिये सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा का नाम सबसे आगे।
    ।अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।
    राजनीति मे नेताओं व राजशाही मे बादशाहों द्वारा अपने आपको को सुरक्षित रखने के साथ भविष्य मे उनके लिये कोई तगड़ा चेलेन्ज खड़ा ना हो पाये तो उसके लिये वो हरदम प्रयास करते है कि उनके मुकाबले कोई काबिल या तेजतर्रार व्यक्ति कभी ऐसी जगह पदस्थापित ना पाये जहां से वो शख्स उछाला मार कर उनकी कुर्शी पर कब्जा करले। भारत की मोजुदा राजनीति मे भी हर नेता कोशिश तो यही करता है। लेकिन इतनी सावधानी के बावजूद भी कभी कभी गूरू गूड़ ही रह जाता ओर चेला शक्कर बन जाता है।
    राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे भी प्रत्येक नेता अपने अपने स्वर्ण काल मे अपने आपके लिये संम्भावित मजबूत चेलैंज व जनाधार वाले नेता को उस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित होने से रोकने की निचे निचे भरपूर कोशिश करता रहा है। अपवाद स्वरूप कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता किसी महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किसी तरह हो भी गया तो वो उस नेता के स्वयं की तिकड़म या अचानक हालात फेवर मे बनने की बदौलत ही सम्भव हो पाया है।
    अशोक गहलोत के 1998 मे पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के लेकर आजतक मात्र सचिन पायलेट ऐसे प्रदेश अध्यक्ष बने है जिनके बनने मे अशोक गहलोत ही भुमिका नही रही ओर नाही अपने हिसाब से इनको हटा कर इनकी जगह दुसरे को अध्यक्ष बना पा रहे है। जबकि पायलट के अलावा अन्य बने प्रदेश अध्यक्षो को बदलवाने मे अशोक गहलोत को कोई खास कसरत नही करनी पड़ी थी। सबसे अधिक समय तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट को अब जाकर बदलने शीर्ष स्तर पर लगभग तय हो चुका है। पर इसके साथ यह भी है कि उनकी जगह नये बनने वाले अध्यक्ष के नाम पर गहलोत व पायलट दोनो का सहमत होना आवश्यक है। पहले की तरह मुख्यमंत्री गहलोत अकेले की पसंद से अब अध्यक्ष कतई नही बनेगा।
    राजनीतिक सुत्रोनुसार अध्यक्ष पद के लिये उपयुक्त नाम पर अब तक बनती दिख रही सहमति के हिसाब से सीडब्ल्यूसी सदस्य व पूर्व सांसद रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। धड़ेबंदी से दूर माने जाने वाले मीणा के नाम पर शीर्ष नेतृत्व मे भी सहमति आसानी से बनने लगी है। अगर किसी वजह आदीवासी के अलावा अन्य बिरादरी के नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार शीर्ष स्तर पर होता है तो जाट बिरादरी मे मंत्री हरीश चोधरी, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया का नाम चर्चा मे आ सकता है। महरिया के रास्ते मे उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे आने व उनका काफी तेज तर्रार होना उनके रास्ते का रोड़ा बन सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य बिरादरियों के किसी नेता को अध्यक्ष बनाना नामुमकिन दिखाई दे रहा है।
    कुल मिलाकर यह है कि लम्बे समय तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट का प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना लगभग तय हो चुका है। उनकी जगह बनने वाले अध्यक्ष पद के अनेक नामो पर मंथन चल रहा जिनमे सबसे आगे पूर्व सांसद व सीडब्ल्यूसी सदस्य रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। मीणा यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व स्टेट सरकार मे मंत्री भी रह चुके है।

  • मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगी कांग्रेस

    भाजपा राजस्थान में सरकार गिराने की चालें चल रही है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कहा कि भाजपा राजस्थान की चुनी हुई कांग्रेस सरकार को गिराने कु चाले चलकर लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने-गिराने की चर्चा के बीच गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस के अंदल यदि कोई गद्दार है तो उसे जनता माफ नहीं करेगी।
    उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति के कारण देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। आज हर व्यक्ति का जीवन बचाना अनिवार्य है। विकास रुके नहीं, इसलिए वो चाहते हैं कि उद्योग धंधे चालू हों, अर्थव्यवस्था पटरी पर आए इसके लिए उनकी सरकार लगातार काम कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि हमने हर वर्ग को साथ लिया। भाजपा के नेताओं को भी साथ लिया। हालांकि वे टिप्पणी करते रहे। यह महामारी है। इसके लिए बीजेपी के लोगाें को समझना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के नेताओं ने सारी हदें पार कर दी हैं। एक ओर हम मानवता बचाने में लगे हैं दूसरी ओर बीजेपी सरकार गिराने में लगी है। हम पूरी तरह कोरोना से लोगों को बचाने में लगे हैं। ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़फोड करे मे लगे है। अब जो 2014 के बाद भाजपा में जो घमंड आ गया है। धर्म के नाम पर जाति के नाम पर, लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं। विभिन्न प्रदेशों में जब जब भी इन्हें मौका लगा, गोवा या मणिपुर हो, वहां कांग्रेस की सरकारें बनने नहीं दी। इन लोगो के कारण एक एक्स सीएम को तो सुसाइड करना पड़ा।उत्तराखंड में भी जो देखा आप सबको पता है। महाराष्ट्र में तो इन्होंने कमाल ही कर दिया था । मेजोरिटी नहीं थी तब भी सुबह-सुबह सात बजे शपथ ले ली और मोदी ने ट्वीट कर दिया बधाई का। देवेंद्र फडनवीस ने तो ट्वीट कर दिया कि मोदी है तो मुमकिन है। हर प्रदेश में यही हाल है। मध्य प्रदेश में सबको मालूम है क्या किया । सोच ही कैसी है।

    गहलोत ने कहा कि वो राजस्थान के विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया से उम्मीद करते है कि वे ऐसे नहीं होंगे। सतीश पूनिया या राजेंद्र राठौडृ हाे ये जो खेल खेल केंद्र के इशारे पर खेल रहे हैं ये सब तमाम बातें जनता के सामने आ गई हैं। ये 5 करोड़, 10 करोड़, सरकार गिराने आदि की जो बातें सामने आ रही हैं, यह शर्मनाक है।

    भाजपा वाले बेशर्म लोग है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बसपा को लेकर उनको आरोपित करते हैं। मैं बताना चाहता हूं बसपा राजस्थान मे पूरी तरह कांग्रेस मे मर्ज हुई है। लेकिन भाजपा ने जो खेल खेला है वह सबके सामने है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश में जो घटनाएं हुई हैं, उसी तरह राजस्थान में करने की कोशिश की है। यह अच्छी बात है कि राजस्थान में अच्छी परंपरा रही है। बकरा मंडी में जैसे बकरे बिकते हैं, उस ढंग से विधायकों को खरीदकर भाजपा राजनीति करना चाहती है वह बेशर्माई की हद है। भाजपा के लोगो की तरफ बोलते हुये कहा कि ये इतने बेशर्म लोग हैं, तिकड़मी हैं। राजस्थान में हमने इनकी चाल चलने नहीं दी। हमने राज्य सभा चुनाव में सबक सिखाया। ये मानने वाले कहां हैं, बेशर्म लोग हैं। ये वापिस अपने असली चेहरे पर आ रहे हैं।

    हमारे नेताओं ने लोकतंत्र को बचाया है
    70 साल में कांग्रेस के नेताअेां ने देश के लोकतंत्र को बचाया है। इंदिरा गांधी चुनाव हार गई तो तुरंत मोरारजी भाई को सत्ता सौंप दी। ये वो लोग हैं जिन्होंने पूरे मुल्क के लोगों को डरा धमका रखा है। राहुल गांधी व सोनिया गांधी के सवालों का जवाब नहीं दे पाते हैं। अब ये कांग्रेस के नाम से डरते हैं।

    राजस्थान की सरकार स्थिर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में सरकार स्थिर रहेगी। ओर पांच साल चलेगी। राजस्थान सरकार अगला चुनाव जीतने की तैयारी में लग गई है। उसी तरह हम बजट दे रहे हैं। उसी तरह हम जीतने के लिए सरकार चला रहे हैं। पूरी राजस्थान की जनता से हमारा संपर्क है। मुझे खुशी है कोरोना के मैंनेजमेंट की चर्चा पूरे मुल्क में हो रही है। यह सबके लिए गर्व की बात है। इस माहौल में सरकार गिराने का प्रयत्न करना, ठीक नहीं। सबक जरूर सिखाएगी जनता। कांग्रेस के कोई विधायक गद्दारी करते हैं तो राजस्थान की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

    पीछले माह राज्य सभा चुनाव के पहले भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस व कांग्रेस समर्थक विधायकों को लालच देकर खरीदने की चर्चा के मध्य कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जौशी ने ऐसीबी व एसओजी मे चूनी हुई सरकार को अस्थिर करने को लेकर शिकायत दी थी। उसके बाद एसओजी ने रिपोर्ट दर्ज करके जांच करने पर अनेक तरह के तथ्य सामने आ रहे है। निर्दलीय विधायक सुखवीर सिंह, सूरेश टांक व ओम प्रकाश हुड़ला द्वारा आदिवासी क्षेत्र के विधायको को लालच देकर पाला बदलवाने व अशोक सिंह व सीऐ मलानी को इस मामले मे एसओजी द्वारा गिरफ्तार करने के बाद राजस्थान मे राजनीतिक गरमाहट है। उक्त मामले मे लालच देकर पाला बदलवाने मे भाजपा नेताओं व उनके दलालो के सम्पर्क मे आने के मामले मे अनेक कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों के नाम की चर्चा चल पड़ी है। उसमे शेखावाटी के भी तीन विधायक शामिल बताते है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा आज प्रैस कांफ्रेंस करके भाजपा द्वारा राजस्थान सरकार को अस्थिर करने की लगातार कोशिश करने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी व ग्रह मंत्री शाह के इशारे पर राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनीया,विपक्षी नेता गुलाब चंद कटारिया व सीनियर भाजपा विधायक राजेन्द्र राठोड़ पर आरोप लगाने व एसओजी द्वारा अशोक सिंह व मलानी नामक दो लोगो को गिरफ्तार करने के बाद राजनीति मे गरमाहट आ गई है। लगी इस आग की जद मे कोन कोन आते है यह आगे पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस आग मे बहुत नेताओं को अपना राजनीतिक केरियर स्वा करना होगा।

  • राजस्थान मे अब सफाई कर्मचारी नाला-चेम्बर मे उतर कर सफाई नही करेगा।

    अशफाक कायमखानी ।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस समर्पण भाव के साथ स्वच्छताकर्मियों एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों ने कोराना काल मे काम किया है। उससे कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सरकार कामयाब हो सकी हैं। कोरोना की जंग में शामिल डॉक्टर्स, नर्सिंगकर्मियों, आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं पुलिस सहित आप सबकी मेहनत से देश में राजस्थान का मान और सम्मान बढ़ा है। गहलोत ने आह्वान किया कि आगे भी इसी मनोयोग से कोरोना की लड़ाई में टीम भावना के साथ जुटे रहें।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं सफाईकर्मियों के साथ मुख्यमंत्री गहलोत संवाद कर रहे थे। प्रदेशभर के 196 नगरीय निकायों के करीब 1600 प्रतिभागी इस कार्यक्रम से सीधे जुड़े।

    पिछले करीब चार महीने से राजस्थान कोरोना को नियंत्रित करने में कामयाब रहने का मुख्यमंत्री ने बताते हुये कहा कि स्वच्छताकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शहर, गली-मोहल्ले एवं घर-घर को संक्रमणमुक्त रखने में बड़ी भूमिका अदा की है।सफाईकर्मियों को मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर सहित अन्य सुरक्षा सामग्री के लिए राज्य सरकार ने एक-एक हजार रूपए उपलब्ध कराए ताकि फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम करते हुए वे संक्रमण से बचे रहें। इसके साथ ही राजस्थान पहला राज्य है, जिसने कोरोना की जंग में जुटे हुए सरकारी और गैर-सरकारी कार्मिकों की चिंता करते हुए उन्हें 50 लाख रूपए के बीमा कवर की सुविधा प्रदान की है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सभी वर्गों एवं जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों का सहयोग लेकर उनके अनुभवों एवं नवाचारों का उपयोग करते हुए राजस्थान को इस लड़ाई में अग्रणी पायदान पर रखा। नगर निगमों के महापौर, सभापति, चैयरमेन, पार्षदों आदि जनप्रतिनिधियों से इस दौरान संवाद किया और उनसे सुझाव लिए। सफाई निरीक्षकों, जमादारों सहित अन्य स्वच्छताकर्मियों से मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद करते हुए उनके अनुभव जाने और उनसे उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान कोरोना के प्रति आमजन में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए दो पोस्टरों का विमोचन भी किया। सभी जिला कलक्टरों एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्वच्छताकर्मी को सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में नहीं उतरना पड़े। यह काम पूरी तरह मशीनों से ही करवाया जाए। सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में उतरने से मौत की कोई घटना नहीं होनी चाहिए।

    इस अवसर पर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा अखिल अरोरा, शासन सचिव श्रम नीरज के. पवन, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।