Category: राजस्थान

  • कांग्रेस नेताओं की आपसी फूट के कारण राजस्थान मे पार्टी के बट्टा लग रहा है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवारों के बडे अंतर से सभी पच्चीस सीटों पर बूरी तरह हारने के असल जिम्मेदार कार्यकर्ताओं से अधिक कांग्रेस नेताओं की आपसी कलह व विधायकों व विधानसभा मे रहे उम्मीदवारों के पूरे चुनावी समय उदासीनता की चादर ओढे रहना प्रमुख कारण माना जा रहा है। जिसके कारण चार माह पहले विधानसभा चुनाव मे सो सीट जीतकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस पार्टी के लोकसभा चुनाव मे दोसो मे से 185 सीटो पर भाजपा के मुकाबले पिछडंने को गम्भीरता से लेकर कोई कदम पार्टी स्तर पर नही उठाया तो मंडावा व खीवंसर विधानसभा उप चुनाव व पांच माह बाद होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव मे भी लोकसभा जैसे परिणामों का स्वाद कांग्रेस को चखना पड़ सकता है।

    विधानसभा चुनावों मे गुजर मतदाताओ का झूकाव सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की सम्भावनाओं के चलते कांग्रेस की तरफ आने के बाद चाहे पायलट मुख्यमंत्री ना बन पाये लेकिन उपमुख्यमंत्री तो बन ही गये थे। लोकसभा चुनाव मे पायलट की जिम्मेदारी बनती थी कि वो कम से कम गुजर मतदाताओं को तो बांध कर रखते। लेकिन उन्होंने ऐसा या तो किया नही, अगर किया तो उनका मतदाताओं पर प्रभाव नही बचा। अगर प्रभाव नही बचा तो उनको इसकी जिम्मेदारी लेते हुये राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की तरह प्रदेश अध्यक्ष पद से त्यागपत्र तो तूरंत दे देना चाहिए था। चाहे सत्ता के सूख पाने के लिये उपमुख्यमंत्री पद से चिपके रहते। यानि गूड़ दे दो, वरना छोरी होजाय वाली कहावत! दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी माली मतदाताओं पर प्रभाव विधानसभा चुनाव मे तो नजर आया। लेकिन लोकसभा चुनाव मे गहलोत प्रभावहीन नजर आये है। यानि उन मतदाताओं की विधानसभा चुनाव मे गहलोत पसंद थे तो लोकसभा चुनाव मे मोदी चाहत बनते नजर आये।

    लोकसभा चुनाव मे हार के कारणो पर मंथन करने को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलेट ने कहा कि उन्होने बूथ वाईज आंकड़े मंगवाये है। उन आंकड़ो की समीक्षा के बाद उभरने का काम करेंगे। पायलट ने दोसो विधानसभा क्षेत्रो की बूथो की बजाय टोंक विधानसभा के मुस्लिम बहुल बूथो को छोड़कर अन्य बूथो के आंकड़ों के साथ साथ सरदारपुरा सीट के बूथो पर मंथन करके उपमुख्यमंत्री व मुख्यमंत्री के क्षेत्र का ही बूथवार आंकलन कर लेते ताकि वास्तविक हालातो का पता लग जाता। इससे अधिक आंकड़ों की जरूरत महसूस करते तो गहलोत पायलट को छोड़कर बाकी 98 कांग्रेस विधायकों के मतदाता सूची वाली बूथो के आंकड़ों की समीक्षा करने से भी सबकुछ सामने आ जायेगा।
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    राजस्थान कांग्रेस से विधानसभा चुनाव के पहले अधिकांश सम्भावित लोकसभा उम्मीदवारो को ही उम्मीदवार बनाया है। बने लोकसभा उम्मीदवारों ने विधानसभा उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिये जी-जान लगाते हुये दिन रात एक किया लेकिन उसका ठीक बदल जीते विधायकों ने उन्हें कतई नही दिया। सबसे पहले कांग्रेस को सभी पच्चीस लोकसभा उम्मीदवारों की मीटिंग बूलाकर उनसे हकीकत जाननी चाहिए। दोसो मे से जिन 15- विधानसभा क्षेत्रों मे कांग्रेस उम्मीदवार आगे रहे है उन विधायकों या नेताओं को प्रोत्साहित करने पर विचार करना चाहिए। लोकसभा चुनाव के आंकलन से साफ नजर आया कि केवल मात्र मुस्लिम मतो को छोड़कर बाकी सभी तबके के मतदाताओं मे भारी विघटन होने को कांग्रेस नेता रोक पाने मे असमर्थ नजर आये।

  • राजस्थान के दसवी बोर्ड के परिणाम मे भी मुस्लिम बेटियों ने तीर मारा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के शेखावाटी जनपद मे मुस्लिम गलर्स ऐजुकेशन का पैमाना काफी ऊंचा जाने लगने के साथ साथ बेटीया बोर्ड परीक्षा मे अच्छे परिणाम देने लगी है। सेंकड़ो बेटियों ने नब्बे प्रतिशत से अधिक व हजारों बेटियों ने पिच्यासी प्रतिशत से अधिक अंक पाकर उस भ्रम को तोड़ डाला है कि बेटीया बेटो से कम ना होकर शिक्षा मे चार कदम आगे ही रहकर परिवारजनों व वतन का सकारात्मक दिशा मे नाम रोशन कर सकता है , अगर उनको अवसर प्रदान किया जाये।

    आज राजस्थान दसवीं बोर्ड के आये परीक्षा परिणाम पर सरसरी तोर पर नजर डाले तो उनमे से चंद उदाहरण के तोर पर पाते है कि पींसागन अजमेर की शाहीन अफरोज के 98.50 प्रतिशत, सीकर शहर की असमा निर्वाण को 97.33 प्रतिशत, कुचामन सिटी की तसलीम बानो 96.33 प्रतिशत व शहर के पास के किरडोली गावं की सना खान के 95.83 प्रतिशत, बिसाऊ के इशरत खान के 95.33 प्रतिशत, सदीनसर सीकर की अबू निशा खान के 93.50 प्रतिशत, झुन्झुनू जिले की सानिया खान के 92.67 प्रतिशत, डीडवाना के छोटी बेरी गावं की सुफियान बानू के 91.33 प्रतिशत , शाहीना बाने केकड़ी 90.17 प्रतिशत अंक आये है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुस्लिम समुदाय को अपनी बेटियो को भी अच्छी से अच्छी शेक्षणिक संस्थानो मे प्रवेश दिलाकर आला दर्जे की शिक्षा पाने के अवसर उपलब्ध कराने पर गम्भीरता पूर्वक विचार करना समय की आवश्यकता बन गया है।

  • राजस्थान मे भाजपा व कांग्रेस अध्यक्षों का चेहरा जल्द बदला जा सकता है!

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद राजस्थान मे होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव , क्रषि उपज मण्डी चुनाव के अलावा सहकारी समिति व बैको के चुनाव से पहले राजस्थान मे सत्तारूढ़ कांग्रेस व केंद्र मे सत्तारूढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट व मदनलाल सैनी रुपी चेहरो के जल्द बदले जाने की सम्भावना जताई जा रही है।

    हाल ही मे लोकसभा चुनाव मे भारी बहुमत मिलने के बाद केंद्र मे भाजपा सरकार के गठन के समय राजस्थान से पूर्व केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिह राठौड़ का मंत्री पद की शपत लेने वाले की सूची से नाम बाहर होने के बाद राजनीतिक हलको मे चर्चा गरम है कि संघ व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी माने जाने वाले जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिह राठौड़ को पार्टी मे अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। उस अहम जिम्मेदारी मे राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद की सम्भावना अवल बताते है।

    लोकसभा चुनाव मे करारी हार से आहत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व उनकी बहन प्रियंका गांधी के सीडब्ल्यूसी की बैठक मे कांग्रेस नेताओं को परोक्ष रुप से निशाने पर लेते हुये कड़े प्रहार करने के बाद लगने लगा है कि अब राहुल गांधी कांग्रेस को पूरी तरह फ्री हेण्ड होकर नये रुप से चलाना चाहते है। वो पार्टी अध्यक्ष पद से अपना त्यागपत्र देने के बहाने व प्रियंका गांधी के सहयोग व सलाह के बल पर संगठन स्तर पर बदलाव करके नये रुप मे कांग्रेस को देखने का ईशारा भी एक तरह से कर दिया है। लोकसभा चुनाव मे राजस्थान व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों द्वारा पूत्र मोह मे अपने अपने पूत्रो को लोकसभा चुनाव लड़ाने से भी राहुल गांधी खासे नाराज नजर आये। लेकिन प्रदेश सरकार बचाये रखने के लिये दोनो ही प्रदेशो मे मुख्यमंत्री के चेहरे मे बदलाव लाने को आत्मघाती कदम मानते हुये गहलोत व कमलनाथ को एक दफा जीवनदान मिलना बताया जा रहा है। राहुल गांधी के सात व आठ जून की केरल यात्रा से लोटकर आने के बाद कांग्रेस मे अनेक तरह के बदलाव होने की शुरुआत हो सकती है। जिसमे राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की जगह नये चेहरे का मनोयन होना तय बताया जा रहा है।

    राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष के चेहरे के बदलाव होने की सुगबुगाहट के बाद इस पद को पाने की कोशिश मे कुछ ब्राह्मण नेताओ ने भी जोड़तोड़ लगाना शुरू कर दिया है। पर अधिक सम्भावना किसी जाट नेता को अध्यक्ष बनाने की बताई जा रही है। जिसमे लालचंद कटारिया, हरीश चोधरी, ज्योती मिर्धा, सुभाष महरिया व नरेन्द्र बूढानीया के नाम खासे चर्चा मे बताते है। अगर किसी मंत्री या विधायक को अध्यक्ष नही बनाने का तय होता है तो फिर पूर्व सांसद ज्योती मिर्धा व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया मे से किसी एक नाम पर मोहर लग सकती है। इसमे भी यह तय है कि इनमे से या फिर किसी अन्य के नाम का ऐहलान तब ही हो पायेगा जब उस नाम पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अंतिम मोहर लग पायेगी।

    कुल मिलाकर यह तय है कि राजस्थान भाजपा व कांग्रेस के अध्यक्षों के चेहरे बदलना तय है। भाजपा मे जिस नाम पर संघ की मोहर लगेगी उसका नाम अंतिम होगा। और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष के रुप मे उसी नाम को फायनल माना जायेगा जिस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हाथ रख देगे।

  • पुर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया द्वारा आयोजित रोजा-ऐ इफ्तार मे हजारो रोजेदारों ने शिरकत की।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    राजस्थान के शेखावाटी जनपद के सीकर शहर मे साबिक मरकजी वजीर व कांग्रेस नेता सुभाष महरिया की अगुवाई मे जिला कांग्रेस कमेटी व जिला ओधौगीक उधमी संघ द्वारा पाक माह -ऐ-रमाजान के सताईसवे रोजे के इफ्तार के समय ओधौगीक क्षेत्र के सामुदायिक भवन परिसर स्थित मोजूद हजारो रोजेदार व सभी धर्मों के लोगो की मोजूदगी मे सुभाष महरिया ने कहा कि रोजा आपसी प्यार-मोहब्बत के साथ रहकर भूखे , गरीब व बेसहारा लोगो की मदद व खिदमत करने का संदेश देता है। धार्मिक व वैज्ञानिक तौर पर रोजो की पवित्रता व उससे शारिरिक व मानसिक लाभ के बारे मे बहुत कुछ पढने को मिलता है। चार दिन बाद मनाई जाने वाले पवित्र त्योहार ईद उल फितर को रोजोदारो को रोजे रखने के इनाम को तोर पर मनाये जाने की मुबारकबाद भी एडवांस मे पेश की

    रोजेदारो के इस्तकबाल करने मे लगे पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया ने कहा कि रमजान माह मे इस्लाम धर्म के अनुसार शैतान को एक माह के लिये कैद करने के संदेश का ही परिणाम है कि पवित्र रमजान माह की सुगंध चारो तरफ फैली पाई जाती है। नंदकिशोर ने इस तरह के आयोजनों की मोजूदा समय की आवश्यकता बताते हुये कहा कि सभी धर्मों के लोग आपस मे एक साथ मिल बेठकर इफ्तार करते है तो दिलो का गहराई से जुड़ाव होता है।

    पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता सुभाष महरिया द्वारा ओधौगीक क्षेत्र सीकर के सामुदायिक भवन मे आज आयोजित रोज-ऐ-इफ्तार मे जिले भर के हजारों रोजेदारों के अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री व विधायक महादेव सिह खण्डेला, शिक्षा मंत्री गोविंद सिह डोटासरा , पूर्व मंत्री व विधायक राजेन्द्र पारीक , विधायक विरेन्द्र सिंह व कांग्रेस जिलाध्यक्ष पी.एस जाट के अलावा जिला ओधौगीक उधमी संघ व कांग्रेस के पदाधिकारियो सहित जिले भर के अनेक जनप्रतिनिधि व समाजी कारकून भी मोजूद थे।

    अंत मे मोलाना मोहम्मद यूनुस कासमी ने सामुदायिक भवन परिसर स्थित बाजमात मगरीब की नमाज अदा करवाई एवं सुभाष महरिया ने इफ्तार मे आने वाले तमाम लोगो का दिल की गहरायो के साथ शूक्रीया अदा किया।

  • मुख्यमंत्री गहलोत इस बार भी सरकार के आखिरी समय मे बोर्ड-निगम व सवैंधानिक पदो पर नियुक्ति देगे?

    अशफाक कायमखानी।जयपुर
    हाल ही मे सम्पन्न लोकसभा चुनाव मे पूत्र मोह के चलते कांग्रेस राजनीति मे चर्चा मे आये मध्यप्रदेश व राजस्थान के मुख्यमंत्री कमलनाथ व अशोक गहलोत के अलावा कांग्रेस नेता चिदम्बरम के पूत्रो के लोकसभा चुनाव लड़ने पर गहलोत के बेटे वैभव गहलोत के अलावा अन्य दोनो नेताओं के पूत्रो के लोकसभा चुनाव जीतने के कारण काफी दवाब महसूस करने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आदत रही है कि बोर्ड-निगम व सवैंधानिक पदो पर नियुक्तिया सरकार के आखिरी समय मे करते रहे है।

    राजस्थान मे मुख्यमंत्री के सलाहकारो व कोर्ट मे आवश्यक सरकारी वकीलो की नियुक्तियों के अलावा हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय मे ओम थानवी के वीसी पद पर नियुक्ति होने के अलावा तमाम तरह की राजनैतिक व सवेधानिक नियुक्तियों का पिटारा अभी तक राजस्थान मे खूला नही है।

    राज्य मे कांग्रेस सरकार बनने के चार माह बाद हुये लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस की बूरी तरह हार होने मे कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं की सत्ता मे भागीदारी ना होना भी अनेक कारणो मे से एक अहम कारण बताया जाता है। लेकिन लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव के अलावा सहकारी बैंको के चुनाव होने के पहले कांग्रेस कार्यकर्ता राजनेतिक नियुक्तियों की चाहत रखते है। इन नियुक्तियों के बाद आम कार्यकर्ता को सत्ता मे अपनी भागीदारी नजर आने से वो उक्त चुनावों मे उदासीन की बजाय सक्रिय होकर पार्टी हित मे काम करता नजर आयेगा। दूसरी तरफ लोकायुक्त व राजस्थान लोकसेवा आयोग मे सदस्यो की नियुक्तियों सहित अनेक संवेधानिक पदो पर अभी तक नियुक्ति नही होने से आम कामकाज सूचारू रुप से नही हो पा रहा है।

    हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक जीवन के लिये एक माह का समय काफी महत्वपूर्ण माना व बताया जा रहा है। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की तल्ख टिप्पणियों से एक दफा गहलोत के सामने धूंधलापन सा छाया नजर आ रहा है। लेकिन गहलोत को राजनीतिक गोटियां फिट कर संकट से उभरने का माहिर माना जाता रहा है। राजस्थान लोकसेवा आयोग मे सदस्यों के दो पद पहले से खाली चल रहे है। एवं 17-जून 2019 को सूरजीत मीणा व के.राम चोधरी नामक दो सदस्यों का छ साल का कार्यकाल पूरा होने पर वो रिटायर होने जा रहे है। उधर लोकायुक्त का पद भी खाली चल रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सत्ता मे भागीदारी का ऐहसास करवाने के लिये राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खोल देना चाहिए। दूसरी तरफ आम जनता की सहूलियत के लिये संवेधानिक पदो पर भी नियुक्तिय जल्द पूरी करनी चाहिए।

  • नरेन्द्र मोदी मंत्रीमंडल मे राजस्थान का प्रतिनिधित्व पहले के मुकाबले कम हुवा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व मे दूसरी दफा केंद्र मे गठित सरकार मे पहले के मुकाबले राजस्थान को कम प्रतिनिधित्व मिला है। मोदी की पीछली सरकार मे गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, सी.आर चोधरी के अलावा पी.पी चोधरी व राज्यवर्धन सिह राठोड़ भी मंत्री थे। जबकि अब राजस्थान से गजेन्द्र सिह, अर्जुन मेघवाल व कैलाश चोधरी को ही मंत्रीमंडल मे जगह मिल पाई है।

    अगर राजस्थान को नरेन्द्र मोदी सरकार मे मिले पीछले प्रतिनिधित्व को सम्भाग व बीरादरी वार देखे तो, पाते है कि शेखावत व राठोड़ राजपूत व जोधपुर व जयपुर सम्भाग, मेघवाल बीकानेर सम्भाग व एससी, सी.आर चोधरी अजमेर सम्भाग व जाट, एवं पीपी चोधरी जोधपुर सम्भाग व सिरवी थे। जबकि अब शेखावत गजेन्द्र जोधपुर व राजपूत, अर्जुन मेघवाल बीकानेर सम्भाग व एससी , कैलास चोधरी जोधपुर सम्भाग व जाट। यानी जाट, राजपूत व एससी के साथ साथ जोधपुर, बाडमेर व बीकानेर एक दूसरे के लगते जिले को नवगठित मोदी सरकार मे प्रतिनिधित्व मिला है। 2014 व 2019 मे सभी पच्चीस सांसद भाजपा के होने की समानता के बावजूद एक फर्क यह है कि 2014 मे राजस्थान मे भाजपा की सरकार थी एवं अब 2019 मे कांग्रेस की सरकार है।

    कुल मिलाकर यह है कि 2014 की तरह 2019 के लोकसभा चुनावों मे भाजपा के सभी पच्चीस सांसद जीताने के बावजूद पहले के मुकाबले राजस्थान को कम प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा आम है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूत्र दुष्यन्त सिंह के सबसे अधिक दफा लगातार जीतते रहने के साथ साथ सीनियर सांसद होने के बावजूद मंत्री नही बनाने को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है।

  • राजस्थान मे मंत्री बनने वालो की बजाय नही बनने वाले सांसदों की चर्चा अधिक हो रही है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व मे आज शाम दिल्ली मे गठित केन्द्रीय मंत्री मण्डल मे राजस्थान के सांसदो के मंत्री बनने वालो से अधिक चर्चा बेनीवाल व मीणा के मंत्री नही बनने को लेकर खूब चर्चा हो रही है।

    राजस्थान मे तीन विधायकों वाली पार्टी रालोपा के एनडीए मे शामिल होकर उसके विधायक हनुमान बेनीवाल के नागोर से सांसद बनने के बाद घटक दल के कोटे मे उनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन बेनीवाल को मंत्री नही बनाये जाने से वो नाराज होकर शपथ समारोह मे तक नही गये बताते है।

    रालोपा नेता सांसद हनुमान बेनीवाल की ही तरह राज्य सभा सांसद डा.किरोड़ी मीणा के भी मंत्री बनने की चर्चा जोरो पर थी लेकिन उन्हे भी मंत्रीमण्डल मे जगह नही मिलने की चर्चा प्रदेश मे खूब हो रही है। बेनीवाल व मीणा आखिर समय तक फोन का इंतजार करते रहे कि उन्हे मंत्रीमण्डल मे जगह देकर शपथ के लिये बूलाया जायेगा। पर उनके पास ऐसा कोई फोन नही आया।

    राजस्थान की राजनीति मे हनुमान बेनीवाल व किरोड़ीलाल मीणा को काफी संघर्षी व जनाधार वाले नेता के तौर पर देखा जाता रहा है। दोनो नेताओं की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से पटरी नही बैठने के कारण वो राजे की भाजपा सरकार के खिलाफ एक समय बहुत संकट पैदा करते रहे थे। लेकिन अंत मे किरोड़ी मीणा के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले फिर भाजपा जोईन करने पर भाजपा ने उसे राज्य सभा सदस्य बना दिया था। मीणा ने विधानसभा व लोकसभा चुनाव मे भाजपा उम्मीदवारों के लिये खूब कोशिशे की थी। इसी तरह पूरे पांच साल वसुंधरा राजे व उसकी सरकार के खिलाफ हनुमान बेनीवाल के खूब जहर उगलते रहने के बाद लोकसभा चुनाव मे भाजपा से गठबंधन करके नागोर से रालोपा की टिकट पर चुनाव लड़ा ओर सांसद बन गये। लोकसभा चुनाव मे बेनीवाल ने अनेक जगह भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष मे साभाऐ करके प्रचार किया।

    लोकसभा चुनाव परिणाम मे भाजपा को बहुमत मिलने के बाद बेनीवाल व मीणा को मोदी मंत्रीमंडल मे जगह मिलने की पूरी सम्भावना होने के कारण वो आखिर समय तक दिल्ली रहकर अमीतशाह या पीएमओ से फोन आने का इंतजार करते रहे ओर फोन फिर भी नही आया। राजस्थान की धरती पर अब केन्द्रीय मंत्री बनने वालो से अधिक मंत्री नही बनने वाले बेनीवाल व मीणा को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

  • राजनीति मे नेताओं की हार भी कभी बडी जीत का कारण बनकर आती है।

    राजनीति मे नेताओं की हार भी कभी बडी जीत का कारण बनकर आती है।
    राजस्थान मे महादेव सिह व कैलाश चोधरी के साथ ऐसा ही हुवा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    कहते है कि हर एक नफे नूकसान मे ऊपर वाले मालिक की कुछ रजा छुपी होती है। राजनीति मे भी नेताओं की कभी कभार होने वाली हार मे कुछ अच्छाई छूपी होने के प्रमाण हमे भी कभी कभार देखने को मिलने के साथ लगता है कि महादेव सिंह व कैलाश चोधरी की विधानसभा चुनाव की हार के पीछे बडी जीत छूपी हुई थी।

    2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव मे सीकर जिले की खण्डेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार को तोर पर महादेव सिह खण्डेला चुनाव लड़े ओर वो चुनाव हार गये। लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव मे विधानसभा चुनाव हारे हुये महादेव सिंह को कांग्रेस ने सीकर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया तो वो चुनाव जीतकर सांसद बने गये। केंद्र मे कांग्रेस की मनमोहन सिंह के नेतृत्व मे सरकार बनी तो महादेव सिंह खण्डेला को उस सरकार मे मंत्री बना दिया गया।

    महादेव सिह खण्डेला की ही तरह राजस्थान के बाडमेर जिले की बायतू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार कैलाश चोधरी 2018 का चुनाव हार गये। एवं चार महिने बाद हुये 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा ने कैलाश चोधरी को बाडमेर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने पर वो चुनाव जीतकर सांसद बन गये। ओर आज नरेन्द्र मोदी मंत्रीमंडल मे सांसद कैलाश चोधरी को मंत्री बनाया जा रहा है।

    अजीब संयोग है कि महादेव सिंह व कैलाश चोधरी दोनो जाट बीरादरी से तालूक रखने के साथ साथ दोनो मे से महादेव सिंह कांग्रेस से व कैलाश चोधरी भाजपा की तरफ से पहली दफा सांसद बनते ही केंद्र मे मंत्री बनने का दोनो को अवसर मिला। दोनो विधायक रहे ओर दोनो के विधायक रहते चुनाव हारने के बाद उन्हें लोकसभा का टिकट मिलते ही पहले झटके मे सांसद व मंत्री बन गये। जबकि दोनो ही राजस्थान के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य अभी तक नही रह पाये है।

  • भारतीय सिविल सेवा परीक्षा-2018 को टोप करने वाले कनिष्क कटारिया के बाद,मेघवाल समाज की बेटी गीता ने सीनियर कला के परीक्षा परिणाम मे इतिहास रचा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    दलित समुदाय की योग्यता पर सवाल उठाने वालो पर करारा तमाचा जड़ते हुये श्रीगंगानगर जिले के जोरावरसिंहपुरा गावं की राजकीय स्कूल की छात्रा गीता जयपाल (मेघवाल) ने आज सीनियर कला के जारी हुये परीक्षा परिणाम मे 99.40 प्रतिशत अंक पाकर सूनहरे अक्षरो मे नाम दर्ज करवा लिया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने गीता को उसकी इस कामयाबी पर फोन करके मुबारकबाद पैश की है।

    एक गरीब टेलर की बेटी गीता अपने घर से रोजाना आठ किलोमीटर दूर जोरावरसिंहपुरा गावं की सरकारी स्कूल मे पढने जाने के बाद हिन्दी, राजनीतिक विज्ञान व पंजाबी साहित्य मे सो मे सो अंक पाये है। जबकि अंग्रेजी मे 99 व इतिहास मे 98 अंक पाने के अनुसार कुल 500 मे से 497 अंक पाने पर 99.40 प्रतिशत अंक पाये है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की गीता के आज जारी हुये बारवी कला के परीक्षा परिणाम मे 99.40 अंक पाने पर दलित समुदाय की योग्यता व सरकारी स्कूल की पढाई स्तर पर ऊंगली उठाने वाले पर करारी चोट करते हुये गरीब-अमीर की खाई के शिक्षा के मध्य बनने वाले रोड़े के मिथक को भी तोड़ डाला है। गीता ने अच्छे अंक लाने मे माता-पिता के साथ अध्यापकों का सहयोग बताते हुये राजस्थान प्रशासनिक सेवा मे जाने की इच्छा जताई। इसके अतिरिक्त भारतीय सिविल सेवा परीक्षा-2018 को टोप करने वाला भी राजस्थान के दलित समुदाय का लाल कनिष्क कटारिया ही है।

  • राजस्थान की मुस्लिम बेटियो के सिनियर सेकण्डरी के परीक्षा मे चमकते परिणाम।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सीनियर विज्ञान के परीक्षा परिणाम आज जारी होने के बाद राजस्थान भर से मुस्लिम बेटियों के अच्छे नम्बरों से पास होने के मिल रहे समाचारों के बाद लगता है कि अब अगले पांच-आठ साल मे मुस्लिम गलर्स ऐजुकेशन का स्तर काफी ऊंचा व बदलाव वाला नजर आने वाला है।

    राजस्थान मे बडी तादात मे मुस्लिम बेटियों ने सीनियर विज्ञान कक्षा के परीक्षा परिणाम मे नब्बे या नब्बे से अधिक प्रतिशत अंक पाकर समाज मे जारी महिला शिक्ष के अवरोध को तोड़ कर आने वाली पीढी को आगे बढने के लिये आला दर्जे की तालीम पाने की राह दिखाई है। उदाहरण के तौर पर आज आये परिणाम मे कुछ मुस्लिम बेटियो मे डीडवाना तहसील के छोटी बेरी गावं निवासी सीमरन बानो ने 96.80 प्रतिशत, तो सुजानगढ़ की ही दूसरी सीमरन बानो ने 94.20 प्रतिशत, डीडवाना के दाऊदसर गावं की खुशबू खान के 92.80, सीकर के धोद तहसील के गूनाठू गावं की हीना बानो के 92.00 प्रतिशत,फलोदी की माफिया के 91.00 प्रतिशत, नसीराबाद की उजमा ने 90.20 प्रतिशत व सुजानगढ़ की असमा बानो ने 89.20 प्रतिशत अंक पाकर बेटियों का मान बढाया है।

    राजस्थान के सीकर जिले मे आज से पेंतीस साल पहले ऐक्सीलैंस गलर्स स्कूल कायम करके अंग्रेजी माध्यम से बेटियों को मुफ्त तालीम देने का पूख्ता इंतजाम करने वाले वाहिद चोहन ने प्रदेश मे अच्छे अंको से पास होने वाली बेटियों को मुबारकबाद देते हुयें कहा है कि उक्त तरह के रजल्ट आने से उनके कलेजे को काफी ठण्डक व मस्तिष्क को खूराक पहुंचती है। इसी तरह डा. परवीन कायमखानी का कहना है कि मुस्लिम समाज अगर अब भी शिद्दत के साथ बेटियों को अच्छी व आला दर्जे की शिक्षा दिलाने का प्रण ले तो बेटिया तालीम के क्षेत्र मे अपना एक मुकाम बनाकर मिल्लत व देश की खिदमत मे अहम किरदार अदा करने को तैयार है

    हालांकि राजस्थान की मुस्लिम बेटियों ने इससे पहले भारतीय व राजस्थान स्तर की सिविल सेवा परीक्षा, आर्मी , ऐयरफोर्स व नेवी मे डायरेक्ट अधिकारी का ओहदा भी पाया है। राजस्थान न्यायीक सेवा परीक्षा मे भी एक ठीक ठीक तादाद मे बेटीयाँ परीक्षा पास करके सेवा मे आ रही है। इसके अलावा मेडिकल, इंजीनियरिंग व टिचर्स के क्षेत्र मे अच्छी तादाद मे आना जारी है।

    कुल मिलाकर यह है कि आज सीनियर कक्षा के आये परीक्षा परीणाम मे बेटियो के अच्छे नम्बरों से पास करने पर मुस्लिम समाज को गलर्स ऐजुकेशन को आम करने मे आने वाले सभी अवरोधकों को तोड़ते हुये हर शख्स को कम से कम अपने परीवार की बेटियों के आला तालीम हासिल करने के लिये संघंर्षशील होने का तय करते हुये बेटियों को हर तरह के अवसर उपलब्ध कराने पर कार्ययोजना पर अमल करने का तय कर ही लेना ही होगा।