Category: राजस्थान

  • कांग्रेस राजनीति:राज्यो के सामने दिल्ली हाईकमान कमजोर पड़ने लगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    भारतीय राजनीति के लोकसभा चुनाव के इतिहास मे सबसे कमजोर 2014 व फिर 2019 मे कांग्रेस के नजर आने के बाद अब केंद्र मे पूरी तरह हासिये पर चले जाने के साथ साथ कांग्रेस मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, पांडेचेरी जैसे पांच राज्यों तक सिमट जाने के बाद साफ लगने लगा है कि दिल्ली के सामने राज्य कांग्रेस राजनीति मे काफी मजबूत नजर आ रहे है।

    लोकसभा चुनाव मे हार की जिम्मेदारी लेते हुये पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने पद से त्याग पत्र देते हुये लगातार इशारा कर रहे है कि वो त्याग पत्र किसी भी सूरत मे वापिस नही लेंगे। राहुल गांधी के त्याग पत्र का अनूशरण करते हुये किसी भी नेता ने त्याग पत्र अपने पद से नही दिया तो पूरे एक महिने बाद दूखी मन से राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस के उनसे मिलने गये कार्यकर्ताओं के सामने रोया तो कुछ कार्यकर्ताओं ने त्याग पत्र देना शुरू किया पर उनमे किसी भी मुख्यमंत्री व प्रदेशाध्यक्ष का नाम नही था।

    दिल्ली कमजोर होने का परिणाम यह निकला कि भारत के सभी पांच राज्यो मे कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री राहुल गांधी से एक जुलाई को एक साथ मिलने पहुंचे ओर वो त्याग पत्र देने की बजाय उन्हे ही समझाने पहुंचे की वो त्याग पत्र वापस लेने पर विचार करे अन्यथा इस मुद्दे पर जल्द फैसला लेकर निपटारा करे।

    हालाकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पंजाब के मुख्यमंत्री केप्टेन अमरेंद्र सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भुपेश वघेल व पांडेचेरी के मुख्यमंत्री नारायण शामी ने राहुल गांधी से मिलकर मिडिया के सामने आने पर अपने त्याग पत्र देने की पेश के सवाल पर कोई जवाब नही दिया। ब्लकि यह कहा कि उम्मीद है की राहुल गांधी हमारी बातो पर गौर करके सही समय पर उचित फैसला करेगे।

    कुल मिलाकर यह है कि दिल्ली के मुकाबले राज्यों के मजबूत होने के कारण कांग्रेस की लोकसभा मे हार के कारण किसी भी मुख्यमंत्री का त्याग पत्र नही होगा। इसके विपरीत इसी हफ्ते सीडब्ल्यूसी की आयोजित होने वाली बैठक मे किसी दलित, ब्राह्मण या अल्पसंख्यक ईशाई नेताओ मे से किसी एक नेता का नये अध्यक्ष के तोर पर नाम का ऐहलान जरूर हो सकता है।

  • रुबी अंसार व फारुक खान एवं इमरान पठान ने जरा लाज रखली वरना?

    दिल्ली की तरह राजस्थान मे भी उठी जकात फाऊंडेशन कायम करने की मांग।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    जयपुर से दो दिन पहले दिल को शूकून देने वाली खबर निकलकर आई कि करीब एक हजार राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी (RAS) केडर वाले संगठन का जयपुर मे सम्मेलन हुवा जिसमे तत्तकालीन अध्यक्ष पवन अरोड़ा ने राजस्थान आरऐएस ऐसोसिएशन के नये अध्यक्ष के तौर पर काबलियत व उचित नेतृत्व देने की क्षमता के आधार पर शाहीन अली खान का नाम प्रस्तावित करने पर सभी मोजूद अधिकारियों ने एक राय से प्रस्ताव का समर्थन करते हुये शाहीन अली खान RAS को ऐसोसिएशन का अध्यक्ष चुन लिया।

    ऐसोसिएशन की खबर के बाद कई दिनो से अटकी पड़ी राजस्थान सिविल सेवा मे करीब सात सो बानवे चयनित अधिकारियों को पद स्थापित करने की खबर आने पर देखा तो पाया की राजस्थान प्रशासनिक सेवा मे सवाईमाधोपुर की रुबी अंसार व राजस्थान तहसीलदार सेवा मे चूरु जिले के राणासर गावं के फारुक खान व सीकर जिले के खीरवा गावं के इमरान पठान ने चयनित होकर लाज रखनी वरना मुस्लिम समुदाय के भरोसे तो यह भैंस पानी मे जाती नजर आती।

    मुस्लिम समुदाय के धार्मिक लीडरो के मुद्दों को धार्मिक भावना से जोड़ने के बाद किये ईशारो पर तीन तलाक के मुद्दे पर महिलाओं के बडी तादाद मे जगह जगह सड़क पर आने के बाद झारंखड मे तबरेज अंसारी के कत्ल पर लोगो के सड़क पर आकर अहतेजाज किया व कर रहे है। लेकिन आज तक उक्त धार्मिक लीडरो ने मुस्लिम समुदाय मे जदीद तालीम को बढावा देने के अलावा जगह जगह अधिकारी बनने के पहले कोचिंग सेंटर कायम करने के लिये चाहे सड़क पर ना सही पर समाजी स्तर पर भी मुहीम चलाने की कोशिशें नही करने पर अब समाज मे चर्चा होने लगी है।

    भला हो दिल्ली मे मोजूद भारतीय रेवेन्यू सेवा के अधिकारी रहे जफर महमूद खान का जिन्होंने जकात फाऊंडेशन बनाकर भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने की शुरुआत करके जकात का दूसरी तरफ खर्च करने का रास्ता भी खोला। वरना अकेले राजस्थान से अरबो रुपये वो लोग जकात जमा करके ले जाते है जिनके बारे मे व जिनके काम का जकात देने वालो को खैर खबर तक भी नही होती है। राजस्थान के लोगो की बैचारगी के कारण कुछ बैरुनी लोग बैरुनी बच्चो को लेकर नाजरा कुरान-ऐ-पाक पढाने के नाम पर राजस्थान मे धड़ाधड़ मदरसे कायम करके जकात जमा करने मे लगे है। मदरसे कायम होने चाहिये लेकिन वो जदीद तालीम के साथ हो तो तब कामयाबी मिलना आसान होगा।

    कुल मिलाकर यह है कि अगर राजस्थान के मुस्लिम समुदाय को कुछ आगे बढकर समाज व वतन के साथ साथ खिदमत ऐ खल्क मे काम करना है तो जफर महमूद खान की तरह राजस्थान मे जकात फाऊंडेशन कायम करके सिविल सेवा के साथ साथ अन्य मुकाबलाती परिक्षाओ की तैयारी कराने के लिये सुव्यवस्थित आवासीय सेंटर खोलने पर विचार करना चाहिए। अन्यथा हम ना तीन मे रहेगे ओर ना तेराह मे शुमार किये जायेगे।

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत सरकार के कामकाज से मुस्लिम समुदाय का सरकार से विश्वास उठने लगा!

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार से या फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से व्यक्तिगत तोर पर चली आ रही नाराजगी व उठते विश्वास के कारण लेकिन राजस्थान का मुस्लिम समुदाय एक बार फिर छ महिने पहले बनी प्रदेश की गहलोत सरकार से सख्त नाराज नजर आ रहा है।

    जयपुर के नाई की थड़ी इलाके मे लगने वाले हटवाड़े से कानूनन सन् 2017 मे गाय खरीदकर रशीद के साथ अपने गावं ले जा रहे पचपन साला डेयरी संचालक पहलू खान को भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला था। उस मामले मे पहलू खान को इंसाफ दिलवाते हुये उसके हत्यारो को सजा दिलवाने की बजाय गहलोत सरकार ने पहलू खान व उनके पूत्रो को ही गोतस्कर बताते हुये उनके खिलाफ अब चालान पेश करके सरकार का असली रुप दिखा देने से सभी इंसाफ पसंद लोगो के पैरों के नीचे से जमीन खिसका कर रख दिया है।

    इससे पहले पीछली अशोक गहलोत सरकार के समय सीकर के खीरवा गावं के पुलिस अधिकारी फूल मोहम्मद को सवाईमाधोपुर जिले के सूरवाल गावं मे ड्यूटी का फर्ज निभाते समय भीड़ द्वारा जींदा जलाकर मौत के घाट उतारने का पूरी तरह इंसाफ उनके परिजनों को आज तक नही मिल पाया है। इसी तरह भरतपुर जिले के गोपालगढ कस्बे की मस्जिद मे पुलिस द्वारा नमाजियों को गोली से भूंद देने के मृतकों के परिवार को इंसाफ मिलने के बजाय उन्ही पर मुकदमे ठोक देने की सजा आज तक वो भूगत रहे है।

    अशोक गहलोत के इससे पहले के दो मुख्यमंत्रीकाल मे हुये साम्प्रदायिक तनाव व दंगो का दंश आज तक समुदाय झेल रहा है। तो वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्रीकाल मे मदरसा पेरा टिचर्स को प्रबोधक बनाकर सरकारी सेवा से जोड़ने के बावजूद गहलोत के तीसरे मुख्यमंत्रीकाल मे आज तक किसी एक भी पेरा टिचर को भारी मांग के बावजूद प्रबोधक या फिर किसी भी रुप मे सरकारी सेवा नही जोड़ा गया है। इतिहास पर नजर दोड़ाये तो पाते है कि अशोक गहलोत के राजस्थान के ग्रहमंत्री काल मे काला कानून टाडा के तहत प्रदेश मे पहली गिरफ्तारी तत्तकालीन समय मे हुई थी।

    कुल मिलाकर यह है कि छ महिने पहले अशोक गहलोत के नेतृत्व मे प्रदेश मे कांग्रेस सरकार गठित होने के बाद ऐडवोकेट जनरल व अतिरिक्त ऐडवोकेट जनरल मे मनोनयन मे एक भी मुस्लिम ऐडवोकेट को मनोनीत नही करने से लेकर विभिन्न तरह के मनोनयन व चयन मे मुस्लिम को दूर रखने के साथ साथ भीड़ द्वारा मारे गये गौपालक पहलू खान को इंसाफ देने के बजाय उसे व उसके पूत्रो को गोतस्कर बताते हुये उनके खिलाफ चालान पैश करने से लोगो के पैरो के नीचे से जमीन खिसक गई है। उक्त सभी हालातो से लगता है कि या तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर पकड़ नही है। अगर है तो फिर उनकी नीयत मे खोट नजर आता है। अगर वास्तव मे अशोक गहलोत राजस्थान की जनता मे राहत व इंसाफ की आवाज बूलंद करना चाहते है तो उनको सरकार का इकबाल कायम रखना होगा।

  • राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ के शाहीन अली खान निर्विरोध अध्यक्ष चुने गये।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ ( RAS UNION) के आज जयपुर मे हुये सम्मेलन मे सीनियर प्रशासनिक अधिकारी व मुख्यमंत्री कार्यालय मे संयुक्त सचिव पद पर पदस्थापित शाहीन अली खान RAS को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। प्रदेश मे करीब एक हजार केडर वाले आरऐएस युनियन के शाहीन अली खान के अध्यक्ष चुने जाने पर पुरे प्रदेश मे अधिकारी वर्ग मे खुशी लहर व्याप्त है।

    झूंझुनू जिले के नुआ गावं निवासी शाहीन अली खान के पिता लियाकत अली खान पुलिस सेवा मे आईजी पद से व चाचा अशफाक हुसैन भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के अलावा चाचा जाकीर हुसैन हनुमान गढ के जिला कलेक्टर पद पर पदस्थापित है। पत्नी मोनिका जैल सेवा की सीनियर अधिकारी व बहन फरहा खान भारतीय रेवन्यू सेवा की अधिकारी होने के अलावा भहनोई दामाद कमरुल जमा चोधरी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है। इनके अलावा निकट के रिस्तेदार सलीम खान, सना खान व जावेद खान राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व ऐजाजनबी खान वित्त विभाग के सीनियर अधिकारी है।

    हंसमुख व सरल स्वभाव के धनी शाहीन अली खान की प्रदेश मे एक कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार अधिकारी की छवि के साथ साथ इंसाफाना कार्यवाही करने वाले अधिकारियों मे गिनती होती है। शाहीन अली के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने के बाद राजस्थान के तमाम प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों मे खुशी की लहर व्याप्त होना देखी जा रही है।

  • राजस्थान मे सरकारी बोर्ड-निगम व आयोग मे मनोनयन का सीलसीला शुरु।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व मे गठित कांग्रेस मे विभिन्न न्यायालय मे सरकारी की तरफ से पक्ष रखने के लिये ऐडवोकेटस के मनोनयन के बाद अधीकांश विधायकों के साथ नाम मात्र पार्टी वर्कर को जिला जेल सलाहकार समिति मे मनोनयन करने के बाद आज राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग का गठन जोधपुर की संगीता बेनीवाल की अध्यक्षता मे करते हुये शैलेन्द्र पांड्या, डॉ विजेंद्र सिंह, प्रहलाद सहाय नामक तीन सदस्यों को भी मनोनीत किया है। आयोग का कार्यकाल तीन साल होगा। संगीता बेनीवाल जोधपुर देहात कांग्रेस अध्यक्ष भी है।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लिये अशोक गहलोत को छ महिने से अधिक समय गूजरने के बाद आज राजस्थान राज्य बाल संरक्षण आयोग का गठन होने के बाद अगले कुछ दिनो मे अन्य बोर्ड व आयोग के गठन होने के आदेश जारी होने वाले बताते है। अधीकांश बोर्ड व आयोग के गठन की प्रक्रिया जारी होने के समाचार मिल रहे। विभिन्न राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन के चार सदस्यों के मनोनयन पर भी काम चालू हो चुका बताते है।

  • सांसद मदनलाल सैनी के इंतेकाल से सीकर को बडा नुकसान पहुंचा।

    अशफाक कायमखानी।सीकर:
    भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष जगदीश माथुर के बाद आज से ठीक एक साल पहले जून-2018 मे भाजपा के सीकर के दूसरा व्यक्ति प्रदेश अध्यक्ष बनने वाले पचेतर वर्षीय मदनलाल सैनी के आज दिल्ली के ऐम्स मे इंतेकाल होने की खबर से पूरे प्रदेश मे शोक की लहर छाने के अलावा सीकर को बडी क्षति माना जा रहा है।

    जनसंघ से राजनीतिक सफर शुरु करने वाले सीकर शहर की पूरोहित जी की ढाणी निवासी मदनलाल सेनी ने 1952 मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे शामिल होकर फिर ऐबीवीपी के मंत्री व भाजपा के प्रदेश महामंत्री के अलावा भाजपा अनुशासन समिति के अध्यक्ष भी रहे। 1990 मे उदयपुर वाटी से एक दफा विधायक रहने के बाद विधानसभा व लोकसभा का चुनाव तो लड़े पर जीत नही पाये। मोजूदा समय मे मदनलाल सैनी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के अलावा राज्य सभा के सदस्य भी थे। श्री सैनी आपातकाल मे जैल भी गये थे।

    साधारण माली परिवार मे जन्मे व कुशल नेतृत्व के धनी सांसद मदनलाल सैनी के इंतेकाल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया सहित अनेको ने शोक व्यक्त किया है।

  • डॉ सारा जैदी ने नि:संतानता परामर्श शिविरो मे उपचार के साथ परामर्श देकर रोगियों को राहत पहुंचा रही है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की प्रमुख नि:संतानता रोग विशेषज्ञ डा.सारा जैदी प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रो मे जाकर नि:संतानता परामर्श शिविर मे भाग लेकर गर्भ धारण करने मे आ रही दिक्कतों व उनसे बचाव एवं निवारण के बारे मे तफ्सील से बताते हुये रोगियो का उपचार करके राजस्थान मे बढते उक्त रोग पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।

    नि:संतानता रोग विशेषज्ञ डा.सारा जैदी ने महिलाओं की शादी की सही उम्र 24-28 साल को ठीक बताते हुये कहा कि शराब सेवन, स्मोकिंग, केरियर को लेकर तनाव व न्यूट्रीशियन की कमी के कारण सहायक अण्डे बनने मे दिक्कत होने के कारण आज नि:संतानता रोग के मरीज काफी बढने लगे है। पिछले पांच साल मे यह तादाद ठीक डबल होना पाया जा रहा है। डा. सारा ने कहा कि महिलाओं की शादी की ठीक उम्र 24-28 साल मानी जाती है लेकिन बडे शहरो मे अब शादी की उम्र का चलन तीस की उम्र पार करने के बढते चलन से गर्भ धारण करने मे आवश्यक सहायक अण्डो की कमी के कारण भी यह रोग बढने लगा है।

    डा.सारा जैदी ने बताया कि पहले महिलाओं के 45 की उम्र पार करने के बाद सहायक अण्डो का निमार्ण होना कम होने लगता था वो समस्या अब महिला की 35 की उम्र के बाद ही नजर आने लगती है। नि:संतानता की समस्या मोबाइल रेडिएसन व हिट के कारण भी होने लगी है। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिसर्च मे पाया गया है कि मोबाइल रेडिएशन के कारण भी शुक्राणू के पैदा होने मे कमी आने लगती है एवं टाईट अण्डरगारमेंट भी सहायक अण्डे बनने मे दिक्कत पैदा करना पाया जाता है।

    मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़ मोबाइल रेडिएशन के अलावा हलवाई व वाहन चालक के अतिरिक्त लम्बी सिटिंग वाले काम करने वालो के साथ साथ तनाव मे रहने वालो मे सहायक अण्डो का निमार्ण कम होने से नि:संतानता रोग बढने लगता है। इस रोग के महिला व पुरुष समान रुप से शिकार हो सकते है। खास तौर पर कुछ अन्य कारणो के अलावा मोबाइल रेडियेशन के कारण नि:संतानता रोग के रोगियों की तादाद पीछले पांच साल मे दूगनी होना पाया जा रहा है।

    राजस्थान के नामी जैदी परिवार व भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैदर अली जैदी (पुलिस अधीक्षक-भरतपुर) की पुत्री डा.सारा जैदी ने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रो के साथ सीकर के एक निजी नीरजा अस्पताल मे रोगियों को परामर्श देने के साथ उपचार भी किया।

    कुल मिलाकर यह है कि अधिक उम्र मे महिलाओं के शादियां करने के बढते चलन, मोबाइल रेडीयेशन व तनाव मे रहने के अलावा लम्बी सिटिंग के काम करने के कारणो से महिला व पुरुषों मे नि:संतानता के बढते रोग के रोगियों की तादाद से भारी इजाफा होने से भारतीय समाज मे चिंता की लहर पाई जाती है। ऐसे चिंताजनक हालत मे डा:सारा जैदी का परामर्श व उपचार बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।

  • जयपुर:केंद्रीय मंत्रालय का सलाहकार बताकर आसाराम की जमानत के लिए किया 50 लाख में सौदा

    मिल्लत टाइम्स,जयपुर:राजस्थान पुलिस ने नौकरी का झांसा देकर युवाओं से करोड़ों रुपए ठगने वाले दंपती को गिरफ्तार किया है। पति-पत्नी खुद को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय का मुख्य सलाहकार बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। इतना ही नहीं उन्होंने दुष्कर्म केस में सजा काट रहे आसाराम को पैरोल और जमानत दिलाने के लिए 50 लाख रुपए में सौदा कर रखा था। आरोपी पति ने 7 महीने में चार बार जोधपुर जेल में आसाराम से मुलाकात की बात कही है।

    एसओजी एएसपी करण शर्मा के मुताबिक, फर्जीवाड़े के आरोपी नितिन और शिखा गुप्ता ने पूछताछ में अहम खुलासे किए हैं। उनके करीब 8 बैंक खातों और कॉल डिलेट की पड़ताल हो रही है, ताकि ठगी की रकम और पीड़ितों के बारे में जानकारी मिल सके। नितिन आसाराम के एक वकील के संपर्क में था। दंपती ने सुपरिंटेंडेंट को रौब दिखाकर जेल में आसाराम से मुलाकात की थी। नितिन ने कहा है कि आसाराम जमानत के एवज में 50 लाख रुपए देने को तैयार था।

    रसूख बताया- मेरी कई नेताओं से जान-पहचान है
    नितिन ने एसओजी अफसरों को बताया कि वह अलीगढ़ के पास स्थित अचरोली का रहने वाला है। उसके पिता गांव के इंटर स्कूल में प्रिंसिपल थे। इसी स्कूल में एक टीचर थे जो वर्तमान में राजस्थान में उच्च पद पर तैनात हैं। उसने इसी अफसर का नाम लेकरआसाराम की जमानत कराने की बात कही थी। आरोपी दंपती की कॉल डिटेल खंगाली जा रही हैं, ताकि पता चल सके कि दोनों कौन से अफसर और नेताओं के करीबी हैं।

    गिड़गिड़ाया- एक फोन कर लेने दो, रुपए लौटा दूंगा
    ठग दंपती की गिरफ्तारी के बाद एसओजी ने जैसे ही आरोपियों से पूछताछ की तो आरोपी नितिन ने पुलिस अफसरों को कहा कि मुझे केवल एक फोन कर लेने दीजिए। जिसने भी मामला दर्ज कराया है उसके सारे रुपए लौटा दूंगा।

    दावा- उपराष्ट्रपति ऑफिस के पीएस की सिफारिश से कमेटी में शामिल हुआ
    जांच में पता चला है कि नितिन उत्तर-पश्चिमरेलवे की जोनल रेलवे यूजर कंसलटेंट कमेटी का सदस्य है। यह कमेटी रेलवे के द्वारा दी जाने वालीसुविधाओंकी निगरानी करती है। नितिन चार महीने पहले कमेटी में शामिल हुआ था। पूछताछ में उसने दावा किया है कि कमेटी की सदस्यता के लिए उपराष्ट्रपति कार्यालय में तैनात एक पीएस ने उसकी सिफारिश की थी।(इनपुट भास्कर)

  • राजस्थान के बाड़मेर में रामकथा के दौरान तूफान की तबाही से 13 लोगों की मौत

    मिल्लत टाइम्स,राजस्थान:राजस्थान के बाड़मेर में रविवार को रामकथा चल रही थी, लेकिन अचानक हुई बारिश और तूफान आने से पंडाल गिर गया. इसमें 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 45 लोग घायल हो गए. यह हादसा उस समय हुआ, जब पंडाल के नीचे काफी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे और रामकथा चल रही थी. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है.

    बताया जा रहा है कि बारिश होने की वजह से पंडाल में करंट भी फैल गया था. जब पंडाल गिरा उस समय भगदड़ मच गई. बारिश के चलते पंडाल के आसपास काफी कीचड़ हो गया. फिलहाल राहत-बचाव तेजी से जारी है. पंडाल में अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. लोगों को पंडाल के नीचे से बाहर निकालने की कोशिश भी की जा रही है. बताया जा रहा है कि कई लोगों की मौत दम घुटने और करंट लगने से हुई.

    वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस हादसे पर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘बाड़मेर के जसोल में रामकथा के दौरान टेंट गिरने से हुए हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की जानकारी अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को सम्बल देने की प्रार्थना है. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं.’

    उन्होंने ट्वीट कर बताया, ‘स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है. संबंधित अधिकारियों को हादसे की जांच करने, घायलों का शीघ्र उपचार सुनिश्चित करने और प्रभावितों व उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.’

    इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाड़मेर में टेंट गिरने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘राजस्थान के बाड़मेर में पंडाल गिरने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं. मैं घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करता हूं.’

    इसके अतिरिक्त भारतीय जनता पार्टी और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी बाड़मेर में हुए हादसे को लेकर दुख जताया है. साथ ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं से बाड़मेर हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने की अपील की है. उन्होंने राजस्थान की गहलोत सरकार से भी कहा कि वो मृतकों के परिजनों और घायलों को फौरन आर्थिक मदद दे.

  • राजस्थान की राजनीति मे स्वतंत्र प्रभावी जाट आवाज मंद पड़ने लगी।

    भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री राजे निकलेगी प्रदेश के दौरे पर।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    भारतीय राजनीति मे चोधरी चरणसिंह व चोधरी देवीलाल के तत्तकालीन समय के अलावा आज से पंद्रह साल पहले तक किसी ना किसी रुप मे जाट राजनीति की स्वतंत्र आवाज भारत भर मे गुंजा करती थी। लेकिन जब से खेत से जुड़े जाट नेताओं के बजाय उनकी जगह व्यापारीक सोच वाले जाट नेताओं का राजनीति मे बोलबाला हुवा है, तब से स्वतंत्र जाट आवाज मंद पड़ने लगने का असर राजस्थान की जाट राजनीति पर भी पड़ने लगा है।

    राजस्थान मे अंग्रेजों व सामंतो के खिलाफ जाटो की किसान सभा नामक संगठन ने आंदोलन चलाकर आजादी पाने के बाद जोत की जाने वाली खेती जोतने वाले किसान के नाम होने की उपलब्धि पाकर प्रदेश मे एक बडा बदलाव लाकर अपने स्थायित्व का अहसास करवाया था। आजादी के बाद मारवाड़, बीकाणा व शेखावाटी जनपद के सरदार हरलाल सिह, चोधरी कुमभाराम, नाथूराम मिर्धा, चोधरी रामनारायण, शीशराम ओला, परशराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा , कामरेड श्योपत सिंह व दौलतराम सारण सहित अनेक जाट नेताओं का राजनीति मे सीधा दखल होकर एक स्वतंत्र आवाज मानी जाती थी। उसके बाद 2003 मे जाटो की बहु वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री बनने के बाद जाट समुदाय ने बेटा-बेटी के बजाय बहु के मुख्यमंत्री बनने को भी अपनी जीत मान कर खुशी का इजहार करते आये है। लेकिन अब वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह को केंद्र मे मंत्री नही बनाने के वावजूद उनके विरोधी माने जाने वाले ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाने के साथ साथ स्वयं वसुंधरा को राज्ससभा उम्मीदवार बनाकर केंद्र मे मंत्री नही बनाने का संकेत मिलने के बाद जाट समुदाय ठगा हुवा महसूस कर रहा है। दूसरी तरफ भाजपा मे मदनलाल सैनी की जगह जाट जाती के सतीस पूनीया को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाने की चर्चा चल पड़ी है।

    कांग्रेस मे अलग अलग समय मे सरदार हरलाल सिह, चोधरी रामनारायण, नाथूराम मिर्धा, परशराम मदेरणा, चोधरी नारायण सिंह व डा.चंद्रभान जैसे छ जाट प्रदेशाध्यक्ष बनने के बावजूद कोई भी जाट कांग्रेस सरकार मे कभी मुख्यमंत्री नही बन पाये पर उस समय उनकी राजनीतिक आवाज मे दम हुवा करता था। अब कांग्रेस मे ना कोई जाट प्रदेशाध्यक्ष है ओर ना ही मुख्यमंत्री है। हालांकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष किसी जाट के बनने की सम्भावना के वास्तविकता मे बदलने से पहले ही भाजपा का जाट के रुप मे सतीस पूनीया के भाजपा अध्यक्ष बनने की अटकलें जोर पकड़ने लगी है।

    पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूत्र दुष्यंत सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने मंत्रिमंडल मे मंत्री नही बनाने के साथ साथ उनके विरोधियों को पार्टी व केंद्र सरकार मे खासी अहमियत मिलने की चासनी चखने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने स्तर पर राजस्थान दौरे पर निकलने की तैयारी करने की सूचना से कांग्रेस व भाजपा हलको मे खासा पारा गरम होने लगा है। भाजपा व कांग्रेस मे कोई खास अहमियत मिलती नही नजर आने पर अगर जाट समुदाय वसुंधरा राजे को जाट बहु मानकर उनके राजस्थान दौरे मे भीड़ के रुप मे उमड़ आता है तो माने प्रदेश मे राजे के नेतृत्व मे तीसरा मोर्चा जल्द उभर सकता है।

    कुल मिलाकर यह है कि सभी वसुंधरा राजे भी राजस्थान मे भाजपा हुवा करती थी। लेकिन आज राजे भाजपा की राजनीति मे पूरी तरह साईड लाईन हो चुकी है। जीद की पक्की व विरोधियों को नाको चना चबाने की माहिर माने जाने वाली वसुंधरा राजे के प्रदेश दौरे पर सबकी निगाहें रहेगी। अगर समय रहते कांग्रेस ने बनते बीगड़ते राजनीतिक हालत को नही सम्भाला तो मानो जिस दिन राजे के नेतृत्व मे अगर तीसरे मोर्चे का गठन हुवा तो कांग्रेस की हात बिहार, यूपी, बंगाल व आंध्रप्रदेश जैसी राजस्थान मे भी हो सकती है।